Saturday, September 6, 2008

एक पिता का ख़त पुत्री के नाम ! (पांचवां भाग)

कर्कश भाषा ह्रदय को चुभने वाली, कई वार बेहद गहरे घाव देने वाली होती है ! और अगर यही तीर जैसे शब्द अगर नारी के मुख से निकलें तो उसके स्वभावगत गुणों, स्नेहशीलता, ममता, कोमलता का स्वाभाविक अपमान होगा ! और यह बात ख़ास तौर पर, भारतीय परिवेश में, घर के बड़ों के सामने चाहे मायका हो.या ससुराल, जरूर याद रखना चाहिए ! अपने से बड़ों को दुःख देकर, सुख की इच्छा करना व्यर्थ और बेमानी है !

नारी की पहचान कराये
भाषा उसके मुखमंडल की
अशुभ सदा ही कहलाई है
सुन्दरता कर्कश नारी की !
ऋषि मुनियों की भाषा लेकर,तपस्विनी सी तुम निखरोगी
पहल करोगी अगर नंदिनी , घर की रानी,  तुम्ही रहोगी !


कटुता , मृदुता नामक बेटी
दो देवी हैं, इस जिव्हा पर !
कटुता जिस जिव्हा पर रहती
घर विनाश की हो तैयारी !
कष्टों को आमंत्रित करती, गृह पिशाचिनी सदा हँसेगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी, घर की रानी तुम्ही रहोगी !

उस घर घोर अमंगल रहता
दुष्ट शक्तियां ! घेरे रहतीं !
जिस घर बोले जायें कटु वचन
कष्ट व्याधियां कम न होतीं !
मधुरभाषिणी बनो लाड़िली,चहुँदिशि विजय तुम्हारी होगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी , घर की रानी,  तुम्ही रहोगी  !

घर में मंगल गान गूंजता,
यदि जिव्हा पर मृदुता होती
दो मीठे बोलों से बेटी  ,
घर भर में दीवाली होती !

उस घर खुशियाँ रास रचाएं ! कष्ट निवारक तुम्ही लगोगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी ! घर की रानी तुम्ही रहोगी !

अधिक बोलने वाली नारी
कहीं नही सम्मानित होती
अन्यों को अपमानित करके
वह गर्वीली खुश होती है,
सारी नारी जाति कलंकित, इनकी उपमा नहीं मिलेगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी ! घर की रानी तुम्ही रहोगी !

next : http://satish-saxena.blogspot.in/2008/10/blog-post_14.html

18 comments:

  1. Pahal karogi agar nandini, ghar ki rani tumhi rahogi. achhi panktiyan. ek achhi rachana.

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  2. अधिक बोलने वाली नारी
    कहीं नही सम्मानित होती
    अन्यों को अपमानित करके
    वह गर्वीली खुश होती है,
    " very touching and inspiring creations of yours, each word has a deep meaning.... and the above four line are real essence of the poetry which i liked most, very well described"
    Regards

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  3. प्रिय/मधुर बोलने का तो कोई काट है ही नहीं।

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  4. घर में मंगल गान गूंजता,
    यदि जिव्हा पर मृदुता रहती
    दो मीठे बोलों से बेटी !,
    घर भर में दीवाली होती

    बहुत सुंदर रचना ! आपकी रचना पढ़कर
    अति आनंद हुवा ! धन्यवाद !

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  5. पांडे जी की बात से सहमत हूँ सतीश जी....

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  6. सतीश सक्सेना जी आज आप की कविता मेने कई बार पढी, जिस बेटी का बाप इअतनी अच्छी शिक्षा अपनी बेटी को देगा तो ऎसी बेटी कितने गुणो वाली हो गी , बहुत ही अच्छी ओर सच्ची बात कही हे, जो नारी मिठ्ठे बोल बोलती हे वह अपने घर मे क्या पुरे खान दान पर राज करती हे, कटू वचन नारी तो क्या नर भी बोले तो ....
    फ़िर हमारे पंजाबी मे एक कहावत हे...
    जिस का अन्वाद मे यहां हिन्दी मे कर रहा हू...
    यही जुबान जुते पडवाये, ओर यही जुबान प्यार करवाये,इज्जत करवाये.
    धन्यवाद

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  7. पूर्णतः सहमत-आपसे भी और पांडे जी से भी.

    -------------------


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  8. घर में मंगल गान गूंजता,
    यदि जिव्हा पर मृदुता रहती
    दो मीठे बोलों से बेटी !,
    घर भर में दीवाली होती
    सुंदर कविता के लिए आपको बधाई

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  9. sateesh ji itni sundar rachna ke liye bahut bahut badhaai.

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  10. मधुर-वचन से किसे इनकार हो सकता है भला.
    कविता में संस्कार बोलता है .और समग्रता में अपनी बात रखता है, यहाँ खाली-पीली शब्दों की जुगाली नहीं है,संस्कृति की आंच में पके शब्द हैं, और यही शब्द अपने अर्थों में मधुर होते हैं.
    धर्म से लेकर बाज़ार तक. घर से लेकर बाहर तक मीठे बोल सराहे जाते हैं.
    सतीश जी तबियत प्रसन्न हो गयी.

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  11. सतीश जी ,
    आप पिता है,पितृसत्ता के प्रतिनिधि भी हैं।लेकिन परिवार को एक टीम के बतौर देखने और सोचने की अब बहुत ज़रूरत है न कि एक सदस्य को घर की धुरी बना देने की ।इस तरह की व्यवस्था हमेशा कहीं न कहींअन्याय की पोषक होती है।

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  12. घर में मंगल गान गूंजता,
    यदि जिव्हा पर मृदुता रहती
    दो मीठे बोलों से बेटी !,
    घर भर में दीवाली होती

    सतीश जी आपने एक अच्छी श्रृंखला चलाई हुई है. इस के लिए आप बधाई के पात्र हैं.
    काश हर बेटी को ऐसा बाप मिले, हर परिवार को ऐसी बहू.

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  13. .

    लिखते रहो... लिखते ही रहो...
    अच्छा लगता है !
    क्या खूब लिखते हो.. कितना सुंदर लिखते हो..

    सच्ची में..

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  14. अधिक बोलने वाली नारी
    कहीं नही सम्मानित होती
    अन्यों को अपमानित करके
    वह गर्वीली खुश होती है,
    सारी नारी जाति कलंकित, इनकी उपमा नहीं मिलेगी !
    पहल करोगी अगर नंदिनी ! घर की रानी तुम्ही रहोगी !
    बहुत खूब सतीश जी, काफी दिनों बाद आई, माफ़ी चाहूंगी..मन खुश हो गया....ऐसे ही लिखते रहें

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  15. मधुरता नर और नारी दोनो के लिये उपयोगी है किन्तु ध्यान रखना होगा, मधुरता के प्रयास में सत्य की उपेक्षा न हो. क्योंकि सत्य कडुवा होता है और सत्य समाज के लिये साधना का विषय है.

    ReplyDelete
  16. मधुरता नर और नारी दोनो के लिये उपयोगी है किन्तु ध्यान रखना होगा, मधुरता के प्रयास में सत्य की उपेक्षा न हो. क्योंकि सत्य कडुवा होता है और सत्य समाज के लिये साधना का विषय है.

    ReplyDelete
  17. घर में मंगल गान गूंजता,
    यदि जिव्हा पर मृदुता रहती
    दो मीठे बोलों से बेटी !,
    घर भर में दीवाली होती

    मीठे बोलों का कोई मुकाबला नही है !

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  18. घर में मंगल गान गूंजता,
    यदि जिव्हा पर मृदुता रहती
    दो मीठे बोलों से बेटी !,
    घर भर में दीवाली होती
    उस घर खुशियाँ रास रचाएं ! कष्ट निवारक तुम्ही लगोगी !
    पहल करोगी अगर नंदिनी ! घर की रानी तुम्ही रहोगी !

    "Kabir ne bhi kaha hai "Mithi bani boliye " do mithe bolo se beti" suchmuch aap ki poem me jaan hoti hai,aur yadi betiya aap ki bat samjh jaye to phir dhar ki rani hi bankar rahegi"
    Really i love ur fellings and expression...
    http://dev-poetry.blogspot.com/

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- सतीश सक्सेना

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