Wednesday, May 6, 2009

क्यों लोग मानते दीवाली (छटा भाग ) - सतीश सक्सेना

उच्चारण मन्त्रों का अशुद्ध 
कर अपने को पंडित माने
मांगलिक समय पर श्राद्धमंत्र 
मारण पर मंगल गान  करें !
संस्कृत का क ख ग ना पढ़ा,व्याकरण तत्व का ज्ञान नहीं 
ऐसे पंडित, कुल गुरु बना , क्यों लोग मनाते दीवाली  ? 

भोजन में लेते मांस और 
मदिरा पीते जल के बदले
पूजा में बैठ आचरण पर 
वेदों की ऋचा सुनाते हैं 
ऐसे ज्ञानी पुरोहितों से है , त्राहि त्राहि माँ सरस्वती  !
अधकचरा ज्ञान धर्म का ले क्यों लोग मनाते दीवाली ? 


ईश्वर समक्ष अपने को रख
बनियों को अर्थ हेतु माना
क्षत्रिय को सौंपी निज रक्षा 
खुद पूज्य बने सारे युग के 
सेवा करने को निम्न कोटि,शूद्रों को जन चाकर माना ,
 करवा संशोधित,आदि ग्रन्थ क्यों लोग मानते दीवाली ?


ऐसा कोई अवतार धरो  ,
जो नष्ट वर्ण संकट करदे !
अपने  अपने  कर्मानुसार 
मानव,समाज का काम करे !
मिल बैठें आपस में सारे व्राह्मण और शूद्र साथ होकर 
औरों के लिए घ्रणा लेकर,क्यों लोग मनाते दीवाली  ?

Tuesday, May 5, 2009

क्यों लोग मनाते दीवाली (पांचवां भाग) - सतीश सक्सेना

लेकर निर्बल की हाय पुत्र , 
होगा जग में उद्धार   नहीं 
अपने दिल पर रख हाथ देख
आत्मा को  लज्जित पाओगे 
लज्जित मन से क्यों काम करो गंगा सा निर्मल मन लेकर 
निर्बल का ऋण लेकर मन पर, क्यों लोग मनाते दीवाली  ?

वैष्णवजन कहलाये वह ही 
जो कष्ट दूसरों का समझे !
पीड़ा औरों की निज मन में 
महसूस करे आगे  आकर !
सारे तीर्थों का सुख मिलता, सेवा निर्बल की करने में
अपने सुख की कामना लिए,क्यों लोग मनाते दीवाली ?

अन्याय सहन करने वाला 
अन्यायी से भी पापी  है  !
न्यायार्थ दंड भाई को दो, 
यह कर्मज्ञान है गीता का 
अन्यायी बन कर जीने से, कुल कीर्ति  नष्ट हो जाती है !
केशव की बातें बिसरा कर, क्यों लोग मनाते दीवाली  ?

वह दिन दिखलाओ महाशक्ति 
जिसमें कोई न , प्रपंच रहे !
धार्मिक पाखंड समाप्त करो 
वास्तविक साधू सन्यासी हों 
जाति वन्धन को काट मूल से,मुक्ति दिलाओ नरकों से 
अपराध बोध लेकर मन में, क्यों लोग मानते दीवाली ?