Sunday, July 11, 2010

सड़क के किनारे का यूरोप, मेरे कैमरे की नज़र से -सतीश सक्सेना

जब भी मैं चित्रों में यूरोप के खींचे हुए फोटो देखता हूँ , मशहूर स्मारकों  के खींचे गए फोटो ही नज़र आते हैं  , मैंने कोशिश की है कि सड़क किनारे का आम माहौल ,रहनसहन और वहां की संस्कृति की झलक आप को दिखा सकूं  ! 
लेफ्ट साइड में, रोम में हमारा अमेरिकेन गाइड ,माइकेल जब  भारतीय तिरंगा हाथ में लेकर, अपनी प्रभावशाली आवाज़ में रोमन साम्राज्य और संस्कृति के बारे में समझाता था तो हम लोग मंत्रमुग्ध से उसकी गहरी आवाज के साथ रोम साम्राज्य में खो जाते थे ! दाहिनी ओर का चित्र रोमन सिपाही के कपडे पहने, पैसे लेकर फोटो खिंचवाने का प्रयत्न करते, इस रोम वासी को देख, मुझे अपने यहाँ के मदारी याद आ गए  !
   
 
बायीं तरफ रोम का मशहूर कोलीज़ियम है , जो रोमन लोगों की उत्कृष्ट  भवन एवं वास्तुकला  की, सैकड़ों सालों बाद आज भी याद दिलाता है ! विश्वप्रसिद्द ग्लेदिएतर लड़ाके यहीं अपने जौहर दिखाते थे ! दीवारों से चोरों द्वारा उखाड़े गए, कॉपरपिन होल, इन विश्व धरोहरों की बर्वादी के सबूत के रूप में , हमारे देश की तरह यहाँ भी  उपस्थित थे  !
"दिल खुश हुआ मस्जिदे वीरान देख कर 
  मेरी तरह खुदा का भी खाना खराब है "
रास्ते में कोच में बैठे हुए घरों के फोटो खींचने का लोभ नहीं रोक पाया मैं !अपने घर के लान में खेलते ये बच्चों को देखना बहुत मन भावन था ! आसपास सूखते कपडे , और घर का फालतू समान कुछ कुछ अपने घर जैसा ही लगा  !
काफी हद तक इटली अपने देश जैसी  नज़र आई ! घरों में बंधे डोरी पर सूखते कपडे, पूरे यूरोप में सिर्फ यही देखने को मिले !
 दिल्ली के जनपथ मार्केट की तरह फूटपाथ पर सामान बेचते लोग, हमारे यहाँ के मुकाबले अधिक सभ्य नज़र आये !
कोई खींचा तानी या सामान बेचने की आपाधापी  नहीं दिखी  दुकान में खड़े होते ही हमारा मुस्कान के साथ स्वागत अवश्य किया जाता था !
 इटालियन पत्थर पूरे विश्व में अपनी सुन्दरता के लिए मशहूर रहा है ! जगह जगह रोड साइड पर लगी हुई इटालियन ग्रेनाईट की फैक्ट्रियां , और कटी हुई पत्थर की सिल्लियाँ , भवन निर्मातों की मांग बता रही थीं ! इटालियन ओनेक्स अपने कलर और खूबसूरती के लिए धनवानों के घर में अक्सर शोभा बढाता आया है ! परन्तु यह महंगा होने के कारण आम आदमी की पंहुच से बाहर है !


इटली में करारा नामक जगह का महत्व वही है जो भारत में मकराना का ! ऊपर दिया गया फोटो उसी स्थान का है ! मगर पहाड़ों का बेतरतीब खनन, हमने वहाँ भी बहुतायत में देखा, जैसा हमारे देश में है ! प्रकृति का दोहन, मानव  बहुत क्रूरता से करता रहा है , इसके दूरगामी परिणामों , के बारे में हम सोचने का प्रयत्न ही नहीं करते  ! करारा  (तस्किनी ), में जगह जगह,  बेदर्दी से काटे गए नंगे पहाड़, अपनी दुर्दशा सुना रहे थे !

26 comments:

  1. बढिया चित्र हैं सतीश भाई
    इटली की झांकी

    आभार

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  2. सुन्दर चित्र और विवरण। शुक्रिया।

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  3. आवश्‍यक जानकारी।

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  4. रोम और इटली प्राचीन काल से ही भारतीय सभ्यता से प्रभावित रहे हैं...पर संस्कृति और सभ्यता तो ठीक है आपने कुछ और विशेष बातें बताई जो जिसमें भारतीय सभ्यता और रहन-सहन के प्रति वहाँ के लोगो का लगाव झलकता है..सुंदर सचित्र प्रस्तुति के लिए धन्यवाद चाचा जी

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  5. उन पक्षों को उजागर करती आपकी पोस्ट, जो संभवतः टूरिस्ट नहीं बता पाते हैं ।

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  6. रोचक यात्रा वृत्तांत ..मगर कहते हैं इटली में पर्यटकों को ठगने वाले धूर्त भी अधिक हैं !

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  7. सतीश भाई साहब,
    बहुत बहुत आभार आपका ! घर बैठे बैठ ही आपने सब दिखवा दिया !

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  8. ये हुई न सतीश जी की नज़र... आम अदमी की ख़ास नज़र... नतीजा एक ही लिकाला मैंने, आम आदमी की शकल, हिंदुस्तान हो या इटली, एक सी ही होती है...धन्यवाद!!

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  9. संतोस हुआ देखकर उजड़ा हुआ मंदिर
    हमरे ही जईसा देवता का घर भी हो गया.
    मजा आ गया गुरू जी, बिदेस में भारत दर्सन करके!!

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  10. सही बात तो यही है सतीश जी, कि बस नज़रिये का फ़र्क़ है वर्ना हमारे देश व विदेश में बस इतना ही अंतर है कि जैसे हम कश्मीर से कन्याकुमारी की तरफ निकल जाएं या, त्रिपुरा से ताप्ती की ओर... कोई ख़ास अंतर नहीं दिखता. लेकिन अगर अंतर देखना चाहें ..... तो कुछ भी एक सा नहीं लगता.

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  11. वास्तविक भ्रमण तो इसे कहते हैं. सुन्दर चित्र. आभार.

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  12. अच्छा लगा यह जानकर कि इटली भी भारत जैसा ही है ।
    वरना बाहर जाकर सब कुछ एलियन सा लगता है ।

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  13. बहुत सुंदर, हम ने इटली को कई बार देखा है, ओर इस कोलीज़ियम मै जा कर आदमी बहुत कुछ सोचने पर मजबुर हो जाता है कि कितने निर्दियी थे हम... मै तो बहुत उदास हो कर आया था, बाकी सतीश जी यह तार पर कपडे सिर्फ़ इटली मै ही दिखाई देते है आप से सहमत है, एक जगह ओर भी है... गर्मियो मे मेरे घर की बालकोनी मै भी दिखाई देते है जी:), वेसे इटली ५०% हमारे से मिलता है वेसे ही दुकाने, वेसे ही जोर जोर से बोलना, गंदगी थोडी कम है है, बाकी बहुत कुछ हम से मिलता है, ओर सब से बडी बात जब हम इटली मै गये तो पता ही नही चलता कि हम विदेशी है, ओर वो लोग भी हमे वही का नागरिक समझते है, क्योकि वो भी हमारी तरह ही लगते है, चोर, उचक्के, ठग सब मिलते है हमारी ट्रिक से भी ज्यादा सयाने:)

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  14. बहुत बढ़िया सचित्र जानकारी दी है....सोचने और देखने के नजरिये का फर्क है ...आभार

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  15. tulnatmak vivran accha laga......

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  16. Rome vaise jebkatro ke liye kafee mashoor hai.....kai
    tourist ise chapet me aa jate hai.........
    yanha kafee satarkta baratanee padtee hai .shukr hai ki aapko koi katu anubhav nahee hua.

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  17. सतीश जी आपने हमें भी अपने साथ घुमा दिया

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  18. अच्छी जानकारी के साथ चित्र भी सुन्दर हैं

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  19. सुंदर फोटोग्राफी
    ...मजा आ रहा है आपका यात्रा वर्णन पढ़ कर.

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  20. सुंदर फोटोग्राफी
    ...मजा आ रहा है आपका यात्रा वर्णन पढ़ कर.

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  21. सुंदर फोटोग्राफी
    ...मजा आ रहा है आपका यात्रा वर्णन पढ़ कर.

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  22. Lovely pics and beautiful description...thanks for sharing with us.

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  23. सचित्र यात्रा वर्णन अच्छा लगा |

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- सतीश सक्सेना

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