Friday, September 24, 2010

जैसलमेर में १८ करोड़ वर्ष पुराने पथरीले जंगल के अवशेष -सतीश सक्सेना

मुझे हमेशा से पहाड़ और घने जंगल आकर्षित करते रहे हैं ! हजारों साल पुराने खोये हुए अवशेष अगर किसी पहाड़ी पर मिल जाएँ तो मैं वहाँ अपने कैमरे के साथ, बिना खाए पिए अकेला पूरे दिन आराम से रह सकता हूँ !राजस्थान यात्रा से पहले मैं यह सोच भी नहीं सकता था कि वहाँ मुझे इतिहास लिखे जाने से भी पहले का, बेशकीमत खज़ाना मिल जायेगा, जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था !
जैसलमेर से १७ किलोमीटर दूर जैसलमेर - बारमेड रोड पर, अकाल वुड फोसिल पार्क, जिसमें सैकड़ों की संख्या में फासिल भरे पड़े हैं, कौन विश्वास करेगा कि यहाँ १० स्कुआयर किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में प्रागैतिहासिक काल के पेंड, पत्थर बने हुए अपने अतीत की गवाही दे रहे हैं ! और यह पथरीले पेंड़ों  के तने ,यहाँ १८० मिलियन वर्ष पुराने जंगल होने के गवाह हैं !



समय और धरती में आये बदलाव के कारण, यह जंगल बाद में सागर  की तलहटी में समा गया और लगभग ३६ मिलियन वर्ष पहले जब सागर यहाँ से बापस लौटा तो पीछे पूरा पत्थर रुपी जंगल छोड़ गया !
सरकार द्वारा सुरक्षित घोषित इस फासिल पार्क में, जहाँ तहां पत्थर बन चुके, लकड़ी के तने बिखरे पड़े हैं ! पथरीले पहाड़ पर २५ तने नज़र आते हैं इनमें से १० पेंड के तने बहुत अच्छी तरह से स्पष्ट दीखते हैं ! सबसे बड़ा तना 13मीटर लम्बा और डेढ़ मीटर चौड़ाई में है !इन विशाल पेंड़ों की उपस्थित यह बताती है कि कभी यहाँ की जलवायु घने जंगल के लिए अनुकूल रही होगी और समय के साथ, यह गिरे हुए पेंड, मिटटी में दबते चले गए और लाखों वर्षों से जमीनी दवाब और गर्मी के कारण पत्थर में बदल गए ! बाद में पानी के कटाव और मिटटी के क्षरण के साथ प्रकृति की यह दुर्लभ रचना जमीन के ऊपर आ गयी  ! आज सैकड़ों वर्ष पुराने समुद्री शैल ,सीप,शंख  इत्यादि के साथ पत्थर बने यह पेंड, रेगिस्तान में करोड़ों साल पहले समुद्र की उपस्थिति को, सबूत के साथ बयान करते हैं !
राजस्थान यात्रा में तमाम ऐतिहासिक खूबसूरत इमारतों और स्वादिष्ट भोजन के मध्य, मैं इस पथरीले जंगल को कभी नहीं भूल पाऊंगा !

31 comments:

  1. एक लम्बा मौन और उसके बाद एक यात्रा संस्मरण, एक ऐतिहासिक स्थान का... ऐसा लगा कि प्रस्तरित वृक्ष जीवंत हो उठे!

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  2. एतना बड़ा ख़ामोसी, उसके बाद जैसलमेर का रेगिस्तान.. अऊर फिर ओहाँ का फॉसिल हो गया पेड़ के बारे में यात्रा वृत्तांत...चलिए हम तएक सब्द में एही कहेंगे कि गीत गाया पत्थरों ने!!

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  3. अच्छी जानकारी देता संस्मरण ..

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  4. अति सुन्दर और ज्ञानवर्धक जानकारी ........ आभार

    यहाँ भी आये और अपनी बात कहे :-
    क्यों बाँट रहे है ये छोटे शब्द समाज को ...?

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  5. बहुत ही अच्छी ओर रुचीकर जानकारी दी आप ने काश कुछ ज्यादा फ़ोटो दिखाये होते

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  6. मेरे मन में जाने की प्रबल इच्छा जाग्रत हो गई है..

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  7. @ हजारों साल पुराने खोये हुए अवशेष अगर किसी पहाड़ी पर मिल जाएँ तो मैं वहाँ अपने कैमरे के साथ, बिना खाए पिए अकेला पूरे दिन आराम से रह सकता हूँ

    मैं भी ...मैं भी ...मैं भी ...

    बहुत अच्छी जानकारी के लिए धन्यवाद

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  8. ज्ञानवर्धक जानकारी ..

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  9. सालों पहले एक दिन जैसलमेर जाने का मौका मिला था ,दोपहर बाद ही पहुंचे थे शाम के वक्त इस पार्क की चर्चा चली तो हमारी गाड़ियों का पूरा काफिला पार्क तक पहुँच गया पर शाम को देर होने के चलते पार्क बंद हो चूका था और इस अमूल्य धरोहर को देखने से हम वंचित रह गए |

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  10. पहाड़ और घने जंगल --वाह ये तो अपनी पसंद भी है ।
    जैसलमेर तो हम भी गए थे लेकिन जाने कैसे मिस कर गए ।
    अच्छा लगा यह दिलचस्प जानकारी प्राप्त कर ।

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  11. राजस्थान के चप्पे चप्पे में इतिहास बिखरा पड़ा है कितना कुछ अपने में समेटे हुए ...
    हम राजस्थानियों के लिए भी अच्छी जानकारी
    अच्छा संस्मरण ...!

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  12. आपका शौक बेहद पसंद आया !

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  13. अच्छा संस्मरण!

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  14. बढियां जीवाश्म संस्मरण -आखिरी अंक के बाएं एक दशमलव लगाने से मिलियन करोड़ में बदल जाता है :)
    (जानकारी के लिए )

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  15. बेहद ही रोचक जानकरी...आभार
    regards

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  16. राजस्‍थान के होकर भी इस पार्क के बारे में जानकारी पहली बार मिली। इस बार जैसलमेर इसी पार्क के लिए जाएंगे। बहुत अच्‍छी जानकारी, आभार।

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  17. @ डॉ अरविन्द मिश्र ,
    सारी समस्या आसान कर गए डॉ साहब आप !१८० मिलियन वर्ष तुरंत १८ करोड़ साल कराने के लिए धन्यवाद गुरुदेव !

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  18. प्रकृति के द्वारा किए गए परिवर्तन का यह एक बहुत बड़ा प्रमाण है। रेत का सागर पूर्व में पानी का सागर था। यह प्रमाणित है।

    बहुत बढिया सतीश भाई
    आपने फ़ोटो तो बहुत ली होंगी।
    लेकिन यहां लगाने में कंजुसी क्यों?

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  19. साब बात या छ: की थांकी पोस्ट पर अब कांई भी टिपण्णी कौन करा...........................कारण की थे म्हांका देश म आर पाछा चालेग्या अर म्हाने कोई बात की खबर ही न पड़ी............................. साबजी औ टाबर तो रूस ग्यो अर अब तो जद ही राजी हवलो जद आप पाछा आर म्हासुं मिलेला..........

    (सर अब बात ऐसी है की आपकी पोस्ट पर कुछ भी टिपण्णी नहीं करूँगा......................कारण यह है की आप राजस्थान में आके वापस चले गए और हमें खबर ही ना हुई................... सरजी अब तो यह बच्चा रूठ गया है और तभी मानेगा जब आप वापस आकर इससे मिलेंगे.....................)

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  20. @ अमित शर्मा,
    एक बार नहीं बार बार आयेंगे अमित ! अगली बार ऐसी गलती नहीं होगी....
    ऐसे प्यार भरे न्योते बड़े किस्मत वालों को मिलते हैं ! उम्मीद करता हूँ कि अब हंस दोगे !
    सस्नेह

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  21. oh ho.........hame bhi laga tha, kuchh to karan hai, Sir ko na to dekha na hi unke blog pe update.......
    Welcome back sir!!

    as usual aapke post to kuchh bata kar hi jaate hain..:)

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  22. बड़ी सुन्दर जानकारी। धरोहरें जहाँ भी रखी हैं, स्वयं ही सुरक्षित होन् का प्रयास कर रही हैं। इतिहास की मात्रा के अनुसार इतिहासवेत्ता नहीं हैं।

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  23. ओह तो यहां थे जनाब , चलिए अब कोई शिकायत नहीं आखिर हमारे लिए इतनी अमूल्य धरोहरें लिए आ गए आप ..बहुत ही अद्भुत ..जारी रखिए

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  24. रोचक और अद्भुत जगह की यात्रा कर रहे हैं जी आप
    वाह!
    आश्चर्यजनक सा लगा होगा ना, पत्थर के पहाड
    मुझे तो फोटो में और पोस्ट पढने में ही आश्चर्य हो रहा है

    प्रणाम स्वीकार करें

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  25. ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए धन्यवाद.

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  26. अब जैसलमेर जाने का एक कारण और..

    थैंक्स..

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  27. सार्थक यात्रा वर्णन. सुन्दर तस्वीरें.

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  28. प्रकृति के बहुत से अनोखे रूप है देश में और विदेशों में भी...एक और सुंदर सचित्र वर्णन...जैसलमेर यात्रा का संस्मरण अच्छा लगा....प्रणाम चाचा जी

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  29. acchee post......jaisalmer vaise bhee tourist attraction ka shahar hai........vanha kile me base shahar ka jain mandir aur vanha ek murtee saikado meel kee surang bana kar lakar sthapit kee gayee hai aaj bhee humaree sanskruti kee gavah hai .sadak nhee shaandaar banee huee hai.........BSF javano kee maintenance kee vajah se........

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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