Monday, November 8, 2010

पापा के चले जाने का अर्थ - सतीश सक्सेना

                खुशदीप सहगल के पापा दीवाली के दिन उनको छोड़ कर चले गए ! सरल ह्रदय खुशदीप के लिए यकीनन यह सबसे मनहूस दीवाली होगी जिस दिन उनके ऊपर से पापा का हाथ हट गया !

               बड़ों को एक न एक दिन हमें अकेला छोड़ कर जाना ही होता है ! मगर आज की आपाधापी में हम, उनके वे बचे हुए दिन शायद सहेजने की कोशिश नहीं कर पाते !

               और एक दिन चुपके से वह मनहूस घडी आ जाती है जिस दिन हमको तेज धूप से बचाता और खुद चुपचाप कष्ट सहता हुआ यह मजबूत वृक्ष अचानक गिर जाता है !

अक्सर बहुत देर हो जाती है समझने में ,कि यह वृक्ष हमारे कितने काम का था .......

43 comments:

  1. खुशदीप जी आपकी इस दुख की घडी मे हम सब आपके साथ हैं और भगवान आपके पिताजी की आत्मा को शांति दे…

    ReplyDelete
  2. इश्वर आपको और आपके परिवार को इस दुःख भरी घड़ी में संबल दे. पिताजी को शत्-शत् नमन.

    ReplyDelete
  3. पिता का साया सर से उठ जाना जैसे
    चिलचिलाती धूप में सर से छत का उड़ जाना ...
    विनम्र श्रद्धांजलि !

    ReplyDelete
  4. जुदाई दुख देती है ।
    दुख का अहसास केवल दुखी ही कर सकता है ही फिर वह जो इस अहसास से गुजर चुका हो ।

    ReplyDelete
  5. जुदाई दुख देती है ।
    दुख का अहसास केवल दुखी ही कर सकता है या फिर वह जो इस अहसास से गुजर चुका हो ।

    ReplyDelete
  6. मौन श्रद्धांजली
    परमात्मा पिताजी की आत्मा को मोक्ष और परिवार को संबल प्रदान करे, यही कामना है।

    प्रणाम

    ReplyDelete
  7. चाहे हम उम्र में कितने भी बडे हो जायें और नाती-पोतों वाले हो जायें, फिर भी माता या पिता में से किसी के भी खोने पर एकबारगी अनाथ और असहाय बोध होता है। जिन्होंनें हमें जीना सिखाया, उनके बिना लगता है कि अब हम कैसे चल पायेंगें। जैसे हमारी सुरक्षा में खडा अडिग हिमालय एकाएक गायब हो गया।

    प्रणाम

    ReplyDelete
  8. भगवान् अपने परिवार में सबको यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे ... दिवंगत बाबूजी को विनम्र श्रद्धांजलि और शत शत नमन !

    ReplyDelete
  9. श्रद्धांजली ... इस दुख की घडी मे खुशदीप जी हम सब आपके साथ हैं ....

    ReplyDelete
  10. पापा के चले जाने का अर्थ है सिर से एक घनी छाया का हट जाना, जो हमें हर धूप और छाँव में बचने की सलाह दिया करती है और हम कठिन समय में उनसे हल भी पा लेते थे. चाहे जितने भी बड़े हो जाएँ. पिता के बिना अनाथ हो जाते हैं. एक दिन अनाथ सब को होना है, कोई आज हुआ कोई कल होचुका था और कोई कल.........
    जब तक ये छाया रहे उसकी देखभाल और सेवा हमारा धर्म है.
    --

    ReplyDelete
  11. बेहद दुखद घटना.

    खुशदीप जी, ईश्वर से प्रार्थना है कि वह आपको इस दुःख को सहने का संबल दे।

    ReplyDelete
  12. खुशदीपजी को ईश्वर संबल दे। दिवंगत आत्मा को परम शान्ति प्राप्त हो।

    ReplyDelete
  13. अक्सर बहुत देर हो जाती है समझने में ,कि यह वृक्ष हमारे कितने काम का था ....... सच हैं श्रीमान समय रहते हम उस वृछ की कद्र नहीं कर पाते , और उस समय के बाद अपने आप को असहाय सा महसूस करते हैं

    ReplyDelete
  14. एक न एक दिन सब के साथ यह अवसर आना है ।
    खुशदीप के पिताश्री को विनम्र श्रधांजलि ।

    ReplyDelete
  15. पिताजी ---सिर्फ़ एक एहसास है...
    शब्दों मे नहीं व्यक्त किया जा सकता...फ़िर भी...एक संकलित रचना थी जिसे "यह वॄक्ष" वाली लिन्क पर टिप्पणी के रूप में पोस्ट किया मैने ...और एक गीत इस पोस्ट पर(गुजराती में)...
    http://archanachaoji.blogspot.com/2010/07/blog-post_30.html

    ReplyDelete
  16. सतीश जी यकीनन बाप का जाना इंसान को कहीं ना नहीं कमज़ोर बना देता है, और वक़्त से साथ अपनी ओलाद की हिफाज़त करते करते इंसान फिर से मज़बूत महसूस करने लगता है. सतीश साहब आप को हमेशा दूसरों के दुःख मैं शरीक पाया. मैं आप के इस जज्बे की कद्र करता हूँ.

    ReplyDelete
  17. बुजुर्ग तो अन्धेरे मकान में रौशनदान की तरह होते है ये पुराने दरख्त होते है मगर सही है जाने के बाद ही अहसास होता है

    ReplyDelete
  18. पिता का साया उठाना जीवन के सबसे त्रासद क्षणों में से एक है ...मगर यह हम सभी के साथ होने वाला एक अनिवार्य अनुभव है ...
    हमें इसे दिल कड़ा करके स्वीकारना ही होता है -खुशदीप भाई अब पिता जी से जुड़े अंतिम संस्कारों को पूरा करें -हमारी संवेदना उनके साथ है !

    ReplyDelete
  19. सतीश जी, मृत्यु ही वह सत्य है जिसे कोई झुटला नहीं सकता, हर जीवित शय के इसका मज़ा चखना होता है. खुदा इस दुःख की घडी में उनको और परिवार को सहनशक्ति दे.


    प्रेमरस.कॉम

    ReplyDelete
  20. मौन श्रद्धांजली
    परमात्मा पिताजी की आत्मा को मोक्ष और परिवार को संबल प्रदान करे, यही कामना है।

    ReplyDelete
  21. अक्सर बहुत देर हो जाती है समझने में ,कि यह वृक्ष हमारे कितने काम का था ...

    apne pita kaa aise hee ek din chale jana yaad a raha hai

    ReplyDelete
  22. पिता की स्नेहिल छाया का सर से उठ जाना क्या होता है मैं समझ सकती हूँ .
    इश्वर खुशदीप जी के परिवार को संबल दे और उनके पिताजी की आत्मा को शांति.

    ReplyDelete
  23. दिवंगत आत्मा शान्ति के लिए प्रार्थना करते हैं.खुशदीप जी को इस दुःख से उबरने की शक्ति मिले.

    ReplyDelete
  24. अरविन्द जी की पंक्तिया हमारी ओर से भी पढ़ी जायें

    ReplyDelete
  25. सही कहा आपने। खुशदीप के पिताश्री को विनम्र श्रधांजलिऔर भगवान उन्हे इस गम से उबरने की शक्ति दे।

    ReplyDelete
  26. खुशदीप जी के पिताश्री को विनम्र श्रधांजलि और भगवान उन्हे इस गम से उबरने की शक्ति दे

    ReplyDelete
  27. विनम्र श्रद्धांजलि.... ईश्वर परिवार को संबल प्रदान करे....

    ReplyDelete
  28. पिता की छाया वट वृक्ष के समान होती है ... उनकी कमी हमेशा खलती है .... विनम्र श्रद्धांजलि ...

    ReplyDelete
  29. विनम्र श्रद्धांजलि....ईश्वर, खुशदीप भाई को यह असह्य दुख सहने की क्षमता प्रदान करे

    ReplyDelete
  30. ये एक कटु सत्य है जिसका एक न एक दिन सबको सामना करना पडता है , जिसने उंगली पकड़कर चलना सिखाया और जिसने बोलने से लेकर पारंगत होना सिखाया , अनुभव दिया, संस्कार दिए , छाया दी और प्रोत्साहन दिया, पिता तो जीवन का प्रारम्भ है और एक प्रिय मित्र भी ! शब्द भी कम पड़ जायेंगे पिता शब्द के लिए ! हम सब खुशदीप भाई के साथ हैं इस गमगीन और दुखद घडी में ! ईश्वर उनको शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करे और पिताजी की आत्मा को शांति !

    ऊं !!

    ReplyDelete
  31. सर आपको एक बार फिर तकलीफ दूंगा । कृपया मेरे लेख की अन्तिम लाइन पढने का कष्ट करें

    ReplyDelete
  32. दुखद घटना.विनम्र श्रद्धांजलि

    ReplyDelete
  33. कोई कुछ नहीं कर सकता...ये दुख तो अकेले खुशदीप जी को ही झेलना होगा.... सांत्वना दुख को कम नहीं कर सकती.

    ReplyDelete
  34. विनम्र श्रद्धांजलि!!

    क्या कहा जाये!

    ReplyDelete
  35. .

    दुखद समाचार । पिताजी की दिवंगत आत्मा को शांति मिले। खुशदीप जी के दुःख में हम सभी उनके साथ हैं।

    .

    ReplyDelete
  36. अमावश में दीप बन जगमगाएंगे पिता
    हैं नहीं पर रोशनी दिखाएंगे पिता।
    ..विनम्र श्रद्धांजली।

    ReplyDelete
  37. सतीश जी ये तो बड़े ही दुख का समाचार सुनाया आप ने
    भगवान ख़ुशदीप जी के पिता की आत्मा को शांति दे और उन के घर वालों को इस दुख को सहने की शक्ति और हिम्मत
    श्रद्धांजलि

    ReplyDelete
  38. Pita ka saya sar se uth jana kitna dukhad ho sakta hai yah main achchi tarah janti hoon. Mahaj 24 sal kee thee main jab mere pita theek Bhaee dooj wale din hee yah sansar chod kar chale gaye. Uske pehale 6 mahine unhone atyadhik kasht men bitaye. Khush deep jee ko Ishwar dhiry pradan kare aur is dukh ko zelane kee shakti de. Jeewan to chalta rehata hai aur chlna bhee chahiye.

    ReplyDelete
  39. ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके पिताजी की दिवंगत आत्मा को शान्ति और खुशदीपजी सहित पूरे परिवार को यह महा दुख सहने की शक्ति प्रदान करे !

    ReplyDelete
  40. सतीश जी अपने एकदम सत्य कहा है. आपके विचारों से मैं सहमत हूँ.

    ReplyDelete
  41. उस डाल का सूख जाना जिसने खुशदीप जैसे फूल को जन्म दिया निश्चय हीं शोक का विषय है। पिता वो तवा होता है जो खुद जल कर परिवार को रोटि खिलाता है। मैं आपके इस दु:ख को कम तो नहीं कर सकता पर परमपिता ईश्वर से आपको सम्बल और आपके पिता जी की कमी ना महसूस होने देने की प्रार्थना ज़रूर करता हूँ

    ReplyDelete
  42. आत्मा अमर है गति कर्मानुसार है .

    ReplyDelete

एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

Related Posts Plugin for Blogger,