Saturday, November 20, 2010

ब्लोगिंग एक लत - सतीश सक्सेना

कल एक और आयोजन भाई राज भाटिया और अमित ( अंतर सोहिल ) द्वारा रोहतक में किया जा रहा है ! स्नेही अमित और राज भाई का आमंत्रण ठुकराया नहीं जा सकता अतः व्यस्तता के बावजूद ,भी रोहतक जाना पड़ेगा !
अपने ढाई साल के ब्लोगिंग काल  का अनुभव बांटू तो यह मानिए कि ब्लोगिंग एक बुरा नशा है, जो आपके सारे कार्यकलापों को उसी तरह प्रभावित करता है जिस तरह कोई और नशा कर सकता है ! शायद इसका नशा, शराब से कहीं अधिक है ! अपने मन में, अपने ही बनाये हुए प्रभामंडल को, सहेजने की कोशिश करता हुआ ब्लागर, किसी ब्लाग पर समान विचारों के कारण न्योछावर और कहीं अपने विचारों का तीब्र खंडन होते देख,गुस्से में आग बबूला होता नज़र आता है ! फलस्वरूप अक्सर इस आभासी जगत में ,दो ब्लागरों के मध्य रंजिश देखना,और उसे पालना, आम बात हो गयी हैं


ब्लाग जगत में अपनी पसंद और नापसंद के बारे में, कुछ मजबूत ब्लागर , अपनी धारदार कलम और अपनी प्रतिभा का उपयोग, आपस के हिसाब बराबर करने में अधिक लगाते  हैं  ! 
तमाम विषयों पर लिखते लोगों में, सबसे ख़राब ब्लागिंग, दूसरे धर्मों को बुरा बताते लोगों की है ! सर्व -धर्म -सद्भाव की नसों में, जहर घोलने का प्रयास करते यह लोग, हमारी अगली पीढ़ी के अपराधी हैं ! 
अपनी श्रद्धा को सर्वोच्च बताते यह लोग, दुर्भावना पूर्वक, दूसरों की श्रद्धा का मज़ाक उड़ा, ब्लोगिंग के जरिये नफरत फ़ैलाने में, कामयाब होते नज़र आ रहे हैं !     


दूसरों के धर्म में कमियां निकालते और उनकी श्रधा के खिलाफ नफरत की आग में जलते ये लोग, अक्सर नैतिकता के साथ साथ कानूनी धाराओं का भी उल्लंघन करते देखे जा सकते हैं ! अनजाने में की गयी जोशीली गलती को माफ़ किया जा सकता है मगर जान बूझ कर भारतीय कानूनों का उल्लंघन करने वाले  ब्लागर, यकीनन किसी अन्य शक्ति से प्रायोजित हैं , ऐसे लोगों से हमें सावधान रहना होगा !

59 comments:

  1. आपके विचारों से सहमत हूँ ..... यह ऐसा नशा है जिसका सुरूर २४ घंटे रहता है उतरता ही नहीं है ...

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  2. आपके विचारों से सहमत हूँ ..... यह ऐसा नशा है जिसका सुरूर २४ घंटे रहता है उतरता ही नहीं है ...

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  3. शत प्रतिशत - सहमत हूँ.........

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  4. आपके विचारों से सहमत हूँ
    ब्लोगिंग एक ...........बुरा नशा है,

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  5. आदरणीय इस आयोजन का श्रेय केवल और केवल श्री राज भाटिया जी को है। चूंकि श्री राज भाटिया जी आजकल नेट से दूर हैं इसलिये मुझे उनके लिये कुछ कार्य (पोस्ट आदि द्वारा जानकारी) करना पड रहा है। कृप्या मेरा नाम हटा दें। मैं किसी श्रेय या धन्यवाद का हकदार नहीं हूँ जी और मुझे लाईट में ना लायें :)

    प्रणाम

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  6. बिल्कुल जी नशा होता है। मैनें भी एक पोस्ट कल ही लिखी थी इस नशे पर कि मुझे शुरु-शुरु में ब्लॉगर्स से मिलने के सपने आते थे।
    विचारों में असहमति होने पर खामख्वाह ही लोग रंजिश पाल लेते हैं और अपनी ऊर्जा व्यर्थ करते हैं। लेकिन ऐसे लोग कभी भी कामयाब नहीं हो पायेंगें जी जबतक आप जैसे लोग ब्लॉगिंग में हैं, प्यार का पैगाम पहुंचता रहेगा।
    बेशक ये लोग कहीं से प्रायोजित हों, कभी ना कभी तो कानून का डंडा इनके सिर पर पडेगा ही।

    प्रणाम

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  7. सतीश जी ,
    मुझे भी पिछले एक महीने से इस नशे कि लत लगी है ! वैसे भी किसी न किसी नशे कि तलाश सभी को है !
    आपकी ब्लोगिंग पर पोस्ट अच्छी लगी !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  8. कोई न कोई लत तो पालनी ही पड़ती है.

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  9. सतीश जी एक बेहतरीन पोस्ट " दूसरे धर्मों को बुरा बताते लोगों की है ! सर्व -धर्म -सद्भाव की नसों में, जहर घोलने का प्रयास करते यह लोग, हमारी अगली पीढ़ी के अपराधी हैं !
    अपनी श्रद्धा को सर्वोच्च बताते यह लोग, विनम्रता पूर्वक, दूसरों की श्रद्धा का मज़ाक उड़ा, ब्लोगिंग के जरिये नफरत फ़ैलाने में, कामयाब होते नज़र आ रहे हैं !"
    नहीं सतोष जी शांति सन्देश मैं अधिक ताक़त है. और वोह ताक़त है सत्य की.
    ब्लोगिंग नशा नहीं है बल्कि टिप्पणी की गिनती करना एक नशा है ऐसा मुझे लगता है.
    बुराई चाहे अपने धर्म की निकली जाए, या दूसरे के धर्म की, या किसी इंसान की , नतीजा प्रेम और शांति नहीं होगा. एक बेहतरीन लेख़

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  10. नशा जिससे नुकसान नहीं
    फायदा होता है
    गर न होता होता
    तो कोई क्‍यों विचारों के
    बीज रोजाना बोता
    ब्‍लॉगों पर विचारों की फसल
    लहलहा रही है
    मिलने की घड़ी रोहतक में
    करीब आ रही है।

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  11. @ मासूम भाई !
    आप जैसे लोग कम है इस देश में ....शुभकामनायें

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  12. बलोगिंग नशा है या जूनून है पता नहीं लेकिन इससे पीछा छुड़ाना मुश्किल है |भाई साहब आपसे कल करते है मुलाक़ात|

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  13. बिल्‍कुल सही कहा आपने ...।

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  14. हर इंसान को किसी न किसी चीज़ का नशा होता है ...ब्लोगिंग को यदि विवाद रहित बनाया जाये तो यह नशा बुरा नहीं ...

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  15. solah aane sach baat hai satish jee........
    Rohtak se lout kar bataiyega jaroor kaisa raha aayojan.
    shubhkamnae

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  16. सतीश जी,

    ब्लोगिंग के लिये सार्थक पोस्ट!! बधाई

    बात नशे की करते करते, जहरीले नशे तक का यथार्थ प्रस्तूत कर दिया।
    सुक्ति सम कथन……
    "अपने मन में, अपने ही बनाये हुए प्रभामंडल को, सहेजने की कोशिश करता हुआ ब्लागर, किसी ब्लाग पर समान विचारों के कारण न्योछावर और कहीं अपने विचारों का तीब्र खंडन होते देख,गुस्से में आग बबूला होता नज़र आता है !"

    चर्चा का उद्देश्य हमारी विचारधाराओं का परिमार्जन होना चाहिए।
    _____________________________
    धर्म पे मत ले यार……………………।
    _____________________________

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  17. सतीश जी आपने बिलकुल सही जगह चोट की है। पर इस चोट का असर होगा यह मुश्किल लगता है। क्‍योंकि जिस तरह से आपको और हमें ब्‍लागिंग का यह लत लग गई है। कुछ लोगों को बेवजह के विवाद खड़े करके ब्‍लागरों के बीच में वैमनस्‍य फैलाने की लत लग गई है। उन्‍हें इसके बिना चैन ही नहीं आता। अब तो मुझे भी यह शक होने लगा है कि देश के बाहर बैठकर इस तरह की ब्‍लागिंग करने वाले किसी अन्‍य के हाथों की कठपु‍तली तो नहीं बन रहे हैं। मुझे तो लगता है ब्‍लाग नियंत्रणकर्ताओं को भी इस तरह का कोई कोड आफ कंडक्‍ट बनाना चाहिए।

    मुश्किल यह भी होती है कि जैसे कोई इस तरह की पोस्‍ट लिखता है और दस लोग उसका उत्‍साहवर्धन करने पहुंच जाते हैं। जो दो चार लोग असहमति जताने पहुंचते हैं लोग उन पर भी पिल पड़ते हैं।

    सतीश जी मुझे लगता है हमें भी अपना एक कोड आफ कंडक्‍ट बनाना चाहिए। मैंने बना लिया है। ऐसे ब्‍लागों पर जाना बंद नहीं किया है लेकिन वहां टिप्‍पणी करना बंद कर दिया है। यह एक तरह की बहिष्‍कार नीति है। आपकी इस पोस्‍ट के बहाने मेरा उन सबसे जो मानते हैं कि यह एक गलत प्रवृति है यह अनुरोध है कि ऐसे ब्‍लागों पर जाना बंद कर दें।

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  18. आपके विचारों से सहमत हूँ
    ब्लोगिंग एक ...........बुरा नशा है ।

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  19. सतीश जी, पुरुष हमेशा अपने आपको नशे के साथ क्‍यों जोड़ लेते हैं? कहते हैं कि वो पुरुष ही क्‍या जो कोई नशा ना करे। अब आपने और कुछ किया या नहीं मुझु मालूम नहीं लेकिन ब्‍लागिंग का नशा ही कर लिया। हम तो इसे नशा नहीं मानते बस अच्‍छा पढने को अपनी जमीन तलाश रहे हैं।

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  20. @ राजेश भाई ,
    आपकी टिप्पणी प्रभावशाली है और सुझाव बहुत अच्छे लगे ! मेरा अनुरोध है इस विषय पर एक विस्तृत लेख लिखें और अपने ब्लॉग पर क्या निर्देश जारी किये जाएँ वह भी बताएं ! फ़िलहाल तो ऐसे ब्लोग्स का बायकाट करना ही ठीक है !
    सादर

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  21. आपने बिलकुल सही कहा ...ब्लोगिंग करते -करते जो मुझे महसूस हुआ की यह एक नशा है तो मैंने इसे अपने प्रोफाइल विवरण में शामिल किया ...कल आपके दर्शन जरुर होंगे ..और आज मैं आपका समर्थक ...
    चलते -चलते पर आपका इंतजार रहेगा ..
    स्वागत....
    ...शुक्रिया

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  22. सतीश भाई, ब्‍लाग नियंत्रणकर्त्‍ताओं से मेरा आश्‍य है गूगल या अन्‍य इस तरह की साईट। उन्‍हें ब्‍लागों पर नजर रखने के लिए कोई तरीका बनाना चाहिए।
    मैं भी सोचता रहा हूं कि इस पर एक लेख लिखूं पर लगता है कि दूसरों को नसीहत देने से अच्‍छा है खुद ही उन पर अमल करूं। जो समझदार लोग हैं वे खुद ही ऐसे ब्‍लागों को पहचानकर उन पर जाना छोड़ दे रहे हैं। क्‍योंकि वहां समय की बरबादी के अलावा और कुछ नहीं मिल रहा है।

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  23. ये ब्लॉगिंग नहीं है आसां,
    बस इतना समझ लीजे,
    इक आग़ का दरिया है,
    डूब के जाना है...

    जय हिंद...

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  24. सच कहा सतीश जी ... ब्लोगिंग एक लत है ... लग जाए तो छूटती नहीं .... रोहतक की मीट ... बहुत बहुत शुभकामनाएं .....

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  25. सतीश जी,

    अपने सही कहा है की ये लत है, जरा सी फुरसत हुई नहीं की खोल कर बैठ गए. पर इस लत या नशा की सार्थकता तभी है जब हम इसको सद्कार्यों के लिए उपयोग करें. जैसे हमारे कानपुर में एक सज्जन को नशा है की वे मर्चारी से लावारिस लाशों को ले जाकर उनका संस्कार करते हैं. उन्होंने एक समूह बना रखा है. पिछले दिनों उन्होंने १०० वाँ संस्कार किया था. ऐसे ही पोस्ट ऐसी हों की हम आपस में जुड़ सकें, तोड़ - फोड़ या नफरत न फैलाएं. ब्लोगिंग में अपने अहंकार को न बीच में लायें. हम आपस में सबको सिर्फ इंसान समझें और उसी तरह से व्यवहार करें. व्यक्तिगत मान्यताओं और पूर्वाग्रहों को यहाँ स्थान नहीं देना चाहिए. आपने बात को बहुत अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है.

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  26. आपकी पोस्ट पढ़ी.मैं आपकी सोंच और जज़्बे को सलाम करता हूँ.काश सब लोग ऐसा ही सोंचें.

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  27. धर्म जैसी चीज़ पर क्या क़लम खोटी करने का.

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  28. इसमें तो कोई दोमत ही नहीं है कि ये शराब से कहीं ज्यादा गहरा नशा है । इस नशे के चढने के पहले मैं अपने फुरसत के समय का सदुपयोग हर सप्ताह नई लगने वाली 6 फिल्मों के साथ ही मोजरबियर कंपनी की पुरानी फिल्मों की डीवीडी के माध्यम से ब्लेक एंड व्हाईट युग से लगाकर 80-90 तक के दशक की सिलेक्टेड पिक्चरें देखकर आनन्दित होता था । दो-तीन हमउम्र मित्रों से नियमित मेल-मिलाप कर इधर-उधर की गप-शप भी कर लिया करता था । लेकिन जबसे ये कम्बख्त नशा सर चढा है गोलमाल-3, एक्शन रिप्ले जैसी नई फिल्मों के कलेक्शन भी धूल खा रहे हैं । मित्रों ने फोन करना बन्द कर दिया है और घर वालों की तो पूछिये ही मत । उस पर तुर्रा हमारा ये मुगालता कि हम तो ज्ञान-जगत से जुडे हैं ।

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  29. गुरुदेव..इस विषय पर अपनी तो वही राय है जो हर एक लत के बारे में है..
    लत एक तो शब्द बुरा... आदत जब नशा बन जाए तो लत..और नशा कोई भी अच्छा नहीं.
    लतों के मामले में अपनाएक ही फ़ण्डा है...लतें, अच्छी लगती नहीं,बुरी छूटती नहीं.. और ये नशा..तौबा तौबा!! छुटती नहीं ये काफ़िर मुँह की लगी हुई!!

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  30. @ सुशील बाकलीवाल जी!
    "उस पर तुर्रा हमारा ये मुगालता कि हम तो ज्ञान-जगत से जुडे हैं "

    आपकी अच्छी टिप्पणी के लिए आभार , लगा कि लेख का अधूरापन आपने पूरा कर दिया ! आभार

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  31. bilkul sahi kah rahe hain aap! lekin
    samay ho to blogging bahut achhi hai, varna kaamkaaj jab bhi prabhavit hota hai to jarur lagta hai ki bekaar hai yah sab..... phir bhi ek pahchan to milti hai.. shayad kuch hatkar karne ka mauka hamen jo mil jaata hai...aur phir apne marjee se likh to lete hai... varna newspaper ya magzine mein bahut kaat-chhant hoti hai.....
    khair jaankari ke liye aabhar...

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  32. बहुत ही बढ़िया पोस्ट ... आपने सही लिखा है कि सबसे घटिया लोग वही हैं जो धर्म के नाम पर ब्लॉग जगत में अधर्म कर रहे हैं ...
    पर ऐसा है, ये लोग अपराधी है और शातिर अपराधी है ... इनको समझाया नहीं जा सकता है ... अपराधी को जब तक सजा न दो वो अपराध करना नहीं छोड़ेगा ...

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  33. सतीश जी, सारी लड़ाई की जड़ है, अपनी हर बात सही और दूसरों की हर बात गलत समझने की परंपरा.. हर किसी को अपने मत को अच्छा समझने का हक है, बल्कि केवल अच्छा ही नहीं सर्वश्रेष्ठ समझना चाहिए, लेकिन असल लड़ाई शुरू होती जब हम अपने को अच्छा बताने, उसकी अच्छाई दुनिया के सामने लाने की जगह दूसरों को बुरा कहना शुरू कर देते हैं.

    कल की ब्लोगर मीट के लिए शुभकामनाए! राज भाटिया जी के अलावा और बहुत से साथियों से मिलकर चर्चा करने की आशा के साथ कल मिलते हैं....

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  34. एक लत की बात करते बहुत सार्थक विचार दिये आपने.

    भारत भ्रमण चल रहा है, इसलिए ब्लॉग पर आना कम हो रहा है. जल्द ही नियमित होता हूँ.

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  35. सतीषजी, आपको धन्यवाद...

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  36. शत प्रतिशत सत्य,इस नशे का भी अलग आनंद है

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  37. आपका रोहतक प्रवास सुखद हो .......अच्छी ख़बरें लायें !

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  38. अक्सर कभी बैठे बैठे ताऊ की कही एक बात याद आ जाती है....एक दिन हमने ताऊ से पूछा कि ताऊ ब्लागिंग में आकर आपने आज तक क्या हासिल किया तो ताऊ का कहना था कि "अरे हासिल-वासिल क्या करना था पंडित जी, बस यूँ समझिए कि इन दो तीन सालों में हमने तो यहाँ रहकर निरी झक मारी है"....आज के हालातों को देखकर लगता है कि ताऊ का कहना बिल्कुल सही था..हम भी आज तक यहाँ झक ही मारते आ रहे हैं.

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  39. लत तो है पर कहीं दूसरों का अहित न हो जाये।

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  40. सतीश भाई ,
    पहला पैरा :
    रोहतक जाके आइये मुहब्बतें ठुकराई नहीं जातीं !

    दूसरा पैरा :
    प्रभामंडल , विचारों की समानता/असमानता और रंजिशों पर आप सही हैं !
    नशा अच्छा या बुरा ? अरे आप मिल पाए तो अच्छा ही होना चाहिए !

    तीसरा पैरा :
    ये लोग समझते हैं कि ईश्वर को इनका ही सहारा है :)

    चौथा पैरा :
    आपकी शंका सही भी हो सकती है !

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  41. .
    .
    .
    सभी धर्मों में कमियाँ निकालने, अंधश्रद्धा व अंधी आस्था की बुनियाद पर खड़े प्रपंच पर प्रहार करने, अतार्किक धारणाओं का खंडन करने का अपराध तो इस नाचीज से भी अक्सर होता रहता है... :(

    आप मुझ से तो नाराज नहीं हैं न, देव ?


    ...

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  42. एक यही लत है मुझे जिसकी तलब जब उठती है तो लैपटाप और नेट कनेक्शन के अलावा कुछ नज़र नही आता

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  43. प्रवीण शाह ,
    आप जैसे अच्छे और समझदार लोगों के कारण ब्लागिंग में मन लगता है प्रभू !
    सादर

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  44. @ अली भाई ,
    आपका आभार इस खूबसूरत टिप्पणी के लिए ...
    सादर

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  45. हमारा देश भारतवर्ष अनेकता में एकता, सर्वधर्म समभाव तथा सांप्रदायिक एकता व सद्भाव के लिए अपनी पहचान रखने वाले दुनिया के कुछ प्रमुख देशों में अपना सर्वोच्च स्थान रखता है, परंतु दुर्भाग्यवश इसी देश में वैमनस्य फैलाने वाली तथा विभाजक प्रवृति की तमाम शक्तियां ऐसी भी सक्रिय हैं जिन्हें हमारे देश का यह धर्मनिरपेक्ष एवं उदारवादी स्वरूप नहीं भाता. .अवश्य पढ़ें धर्म के नाम पे झगडे क्यों हुआ करते हैं ? हिंदी ब्लॉगजगत मैं मेरी पहली ईद ,इंसानियत शहीद हम बोलेगा तो बोलोगे की बोलता है
    समाज को आज़ाद इंसान बनाया करते हैं
    ब्लोगेर की आवाज़ बड़ी दूर तक जाती है, इसका सही इस्तेमाल करें और समाज को कुछ ऐसा दे जाएं, जिस से इंसानियत आप पे गर्व करे.

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  46. नशा कहिये या कुछ भी कहिये...लेकिन सब के दिल का सुकून है यहाँ. बाकी रही बात धरम पर डाली गयी पोस्ट की तो ऐसा कुछ उपाय होना चाहिए की धरम की वो पोस्ट जो दूसरे धरम को नीचा दिखाने का काम करती हों उन्हें ब्लाक करने का कोई तरीका होना चाहिए....सेंसर बोर्ड की तरह.

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  47. सतीश जी रोहतक चलने का बहुत मन था पर कुछ मज़बूरी है. आशा करता हूँ आप अपने कैमरे के साथ वहां जायेंगे और हमें वहां का हाल दिखायेंगे और सुनायेंगे.

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  48. शुक्र है पाक परवरदिगार का,
    असीम कृपा है, परमपिता की
    एन्ड आफ़कोर्स बाई दॅ गेस ऑफ़ गॉड..
    मैंने इस लत को, या किसी भी अन्य लत को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया,
    हर तरह का मज़ा लेता रहा हूँ, पर लतिहर कहलाये जाने की मेरी अपनी हदें हैं,
    और.. वह हद मैंनें कभी पार नहीं की, चाहे तो यह कोई भी कर सकता है !

    सतीश भाई, आपके पोस्ट का यह मतला होना चाहिये था कि,
    रोने से और इश्क में.. हम बेबाक हो गये । सो, यह वही बेबाक पोस्ट है !

    अब देखिये, प्रत्युत्तर में दया बनाये रखियेगा, कृपा बनाये रखियेगा.. आपका स्नेह बना रहे जैसी टिप्पणी न दे दीजियेगा ।
    क्योंकि दया, कृपा या स्नेह जैसी चीजें तो मैं स्वयँ पर भी नहीं आज़माता ।

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  49. हम तो इसे नशा नहीं, एक कन्स्ट्रक्टिव काम मानते हैं। हां कुछ लोग वर्क अल्कोहलिक होते हैं।

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  50. आदरणीय सतीश सक्सेना जी
    नमस्कार !

    शराब का तो अनुभव नहीं, लेकिन 6-7 माह से जब से आया हूं ब्लॉगिंग में , लगता है वाकई नशा ऐसा ही होता होगा । मौका मिला नहीं कि लग गए , और ज़रूरी काम भी कई बार अधर-झूल में :)

    और धर्म के नाम पर नफ़रत के संदर्भ में समर्पित हैं मेरे दो दोहे -

    राम नहीं , ईसा नहीं , नहीं बड़ा रहमान !
    सच मानें , सबसे बड़ा होता है इंसान !!


    मज़हब तो देता नहीं , नफ़रत का पैग़ाम !
    शैतां आदम - भेष में करता है यह काम !!


    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  51. @ डॉ अमर कुमार ,
    " आपका स्नेह बना रहे "
    ऐसे शब्द मैं बहुत कम उपयोग में लाता हूँ , शायद ब्लॉग जगत में केवल आपके लिए उपयोग किया है ! मगर आज फिर आपके लिए यही शब्द उपयोग कर रहा हूँ कि आशा है स्नेह बनाये रहेंगे !
    आदर सहित

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  52. यकीनन ऐसे लोगों से हमें बच कर रहना होगा...समयानुकूल आलेख

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  53. हर इंसान को किसी न किसी चीज़ का नशा होता है ...ब्लोगिंग को यदि विवाद रहित बनाया जाये तो यह नशा बुरा नहीं ...

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  54. वैसे देखा जाय तो ब्लागिंग एक शौक या हॉबी है .अच्छा है या बुरा ,यह प्रयोग करनेवाले पर निर्भर है.आत्माभिव्यक्ति मनुष्य का सहज स्वभाव है, और उस पर संयम रखना उसका नैतिक कर्तव्य- जीवन के किसी भी क्षेत्र में .ब्लागिंग में भी .हर एक को अनुशासित रखना किसी के बस की बात नहीं .

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  55. उम्दा पोस्ट..राजेश जी की सलाह सही है।

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  56. "ब्लोगिंग एक बुरा नशा है, जो आपके सारे कार्यकलापों को उसी तरह प्रभावित करता है जिस तरह कोई और नशा कर सकता है" महासय जी अगर यह सही हैं तो आप भी प्रभावित होतें होंगे और आपका कार्य भी ...................................................................................................................................................

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  57. bhai ji ko ram ram
    post bahut aacchi hai .
    nasa sarab main hota to naachati botal.
    nasa blogging main nahi
    nasha bloggers main hai.
    jai ram ji ki

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  58. ब्लॉग्गिंग नशा विमुक्ति केन्द्र पर विचार किया जाय क्या? :)

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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