यूरोप यात्रा की खुशनुमा यादों के साथ इस वर्ष ब्लॉग जगत की खट्टी मीठे अनुभव लिए, आपके मध्य हूँ ! ब्लॉगजगत की यादों की बात करुँ तो पूरा वर्ष टिप्पणिया और लेखों में उलझा रहा और आत्मसंतुष्टि और सत्संग, ढूँढने के बावजूद कम ही मिल पाया ...
दिन भर में ४० - ५० टिप्पणियां देने का लक्ष्य पूरा करने के लिए , अधिकतर लोग यहाँ, दूसरे को पढ़कर अपना समय बर्बाद नहीं करते , किसी लेख की, पहली और आखिरी कुछ लाइनें से समझ ना आये तो किसी अच्छे ब्लागर की टिप्पणी पढ़ कर, अपनी टिप्पणी ठोक देने से काम चला जाता है ! हाँ कभी कभी , जल्दी जल्दी समझने को कोशिश कर ,जो राय बने, उसे कायम कर, अक्सर मूर्ख को समझदार और समझदार को मूर्ख मान लेते हैं !
दोस्तों से अनुरोध है कि सच्चे मन से, अगले वर्ष की शुभकामनायें दे जाना, हमारे ब्लॉग पर...बहुत जरूरत है !शुभकामनायें चाहिए कि अगले साल "हमें समझ जाने वाले" और "हमारी असलियत जानने वाले" समझदार, कम से कम टकरायें :-)), और कुछ भले और ईमानदार लोगों से भेंट हो तो इन लेखों का लिखना सार्थक हो !सबसे अंत में ईश्वर से प्रार्थना है कि मेरे पास इतना धन और शक्ति जरूर बचाए रखे कि वक्त आने पर, मेरे दरवाजे से , कोई मायूस होकर वापस न लौट जाए !
किसी का एक आंसू,बिना उस पर अहसान किये, पोंछ सका, तो अगले वर्ष अपना मन संतुष्ट मान लूँगा ...

















