Wednesday, January 26, 2011

कम ब्लागिंग -सतीश सक्सेना

मेरा विचार है कि अगर आपके पास समय है, तो व्यस्त रहने के लिए, ब्लागिंग से बेहतरीन और कुछ नहीं ! एक से एक बेहतरीन लोग यहाँ उपस्थित हैं जिनसे आप बहुत कुछ सीख सकते हैं !टिप्पणियों लेते और देते , कब एक दूसरे के नज़दीक होते चले जाते हैं पता ही नहीं चलता !

इस ब्लॉग परिवार में आपस में बढ़ते स्नेह के कारण मित्रों की अपेक्षाएं बढ़ना स्वाभाविक हैं ! फलस्वरूप ई मेल में अधिकतर, उनके लिखे लेखों पर, टिप्पणी करने के अनुरोध रहते हैं जिन्हें समयाभाव के कारण ,पूरा करना लगभग असंभव हो जाता है !

एक लती ब्लागर अमूमन ४ -६ घंटे रोज कम्पयूटर पर देता है और रोज इतना समय, एक व्यक्ति के लिए देना, आँखों और स्पाइनल कार्ड  को बीमार करने के लिए काफी होता है  :-(
अतः नए साल से एक निश्चय किया है कि सप्ताह में एक लेख से अधिक लिखने से बचूंगा  ! शायद अधूरे काम  आसानी से निपटा पाऊंगा  !

हालाँकि आदतें छोड़ना आसान नहीं होता..."कैफ" भोपाली का एक शेर है ..
आग का क्या है,पल दो पल में लगती है !
बुझते  बुझते, एक  ज़माना  लगता  है  !

आप सबको शुभकामनायें ! 

73 comments:

  1. इश्वर आपको इसके लिए शक्ति दे ।
    हा हा हा ! बड़ा मुश्किल काम है बचे रहना ।
    वैसे आपसे पूर्णतय: सहमत हूँ ।

    गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें सतीश जी ।

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  2. अच्छा किया जी बधाई..

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  3. सतीश जी हमने तो इस पत्र अम्ल शुरू भी कर दिया हुया। । इससे लिखने के लिये समय भी मिल जाता है।
    आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।

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  4. मुझे तो नहीं लगता कि किसी 'लती' ब्लौगर को चार-छः घंटे ब्लौगों पर रोज़ देने ज़रूरी हैं. यदि आप यह जानते हैं कि आपको क्या पढ़ना और क्या छोड़ना है तो दो-तीन घंटे ही पर्याप्त होंगे. हफ्ते में एक दिन का ब्रेक लेना ही/भी उचित होगा.

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  5. सप्ताह में एक. बिलकुल ठीक है. गणतंत्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं.

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  6. प्रेरक विचार और अनुकरणीय निर्णय.

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  7. आप हमेशा सार्थक ही लिखते हैं
    हमें आपके लिखे गीत बहुत पसंद हैं
    समय समय पर लिखते रहिये


    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।
    जय हिंद

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  8. मै तो गाहे बगाहे दुर ही रह्ता हु....पर जब ब्लाग पर आता हु तो फिर मुश्किल होता है ....दुर जाना .....अब आप मुझे ही देखिये दिल्ली मे रहते हुए भी ब्लाग से दुर ....बस नेट नही चल रहा है .....आपको गणतंत्र दिवस की हर्दिक शुभकमनाये

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  9. देखते हैं जी, इस नशे तक कहाँ तक बचते हो......

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  10. बिलकुल सही विचार हैं सर ... सहमत हूँ .... गणतंत्र दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ....

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  11. कोई ज़रूरी नहीं कि रोज़ खामखा पोस्ट लिखी जाय.
    सार्थक और उपयोगी पोस्ट अगर सप्ताह में एक भी लिखी जाय तो पर्याप्त है. (यह बात हर किसी पर लागू होती है)

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  12. आपने हम लोगों का प्रतीक्षा समय बढ़ाने का निर्णय लिया है। अपनों पे सितम, चलिये सह लेंगे आपके खातिर।
    वैसे एक सप्ताह में दो पोस्ट देने से व्यस्तता बनी रहती है।

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  13. सही मार्गदर्शन -
    लत से बचना चाहिए -
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

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  14. गणतंत्र दिवस पर आपके द्वारा प्रेरक ब्लॉगतत्र का अनुशासन अनुकरणीय है।

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  15. कभी रम ब्लॉगिंग , तो कभी कम ब्लॉगिंग ,
    हाय देख इस अदा को , हुई नम ब्लॉगिंग ।
    अजी होती रहे बूंद बूंद कभी कभार , और हो,
    फ़िर झूम के और टूट के , झमाझम ब्लॉगिंग




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  16. अभी काम अधूरे पड़े हैं, और आप यहाँ ब्लॉगिंग छाँट रहे हो ?
    मुझे आपकी नीयत पर सँदेह हो चला है :)

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  17. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

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  18. सतीश जी
    गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें ।

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  19. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (27/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!

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  20. सही कहा आपने. अमल भी करिए. अपनी सेहत का ख्याल तो कीजिये ही पढने और टिप्पणी देने वालों की सेहत का भी ख्याल कीजिये. शुभकामनायें गणतंत्र दिवस की.

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  21. विचारणीय ...सेहत पहले ब्लोगिंग बाद में ...

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें..

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  22. हा हा हा ...हम तो कभी कभार ही दर्शन देते है तो हम तो बच गए है ..... आप की बात सच है ..

    आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं!

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  23. सतीश भाई,
    प्रण तो अच्छा है, लेकिन मुंह से लगी छूटती नहीं काफ़िर...

    जय हिंद...

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  24. hello dear satishji !
    kya baat hogayi iss decision ke peeche ? App ke blog padne ne mei alag hi mazaa hai... We young bloggers are your followers, you are an example for the younger generation,be it in any field (homeo,religion,geet,masti etc etc)
    We will miss your blog daily in the morning,
    Regards
    a admirer,a follower

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  25. बहुत सही निर्णय..गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई !

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  26. कम ब्लागिंग पर बड़ा बढ़िया सुझाव है आपका , आपसे प्रेरणा लेकर हम भी ऐसी कोशिश करेंगे :)

    गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं स्वीकारियेगा !

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  27. अपने लिए तो ये सम्भव ही नही क्योकि मेरे तो 10 - 12 घण्टे ही कम्पयूटर के सामने गुजरते है
    शुभकामनाये

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  28. शुभकामनाएँ... गणतंत्र दिवस के साथ ही ब्लागिंग के प्रति आपके नये निर्णय की भी.

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  29. अच्छा प्रयास है .हम तो वैसे भी १ हफ्ते में एक ही पोस्ट लिख पाते हैं :)आपको शुभकामनाये.

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  30. बड़े शहर में रहने वाले मेरे जैसे व्यक्ति की दिनचर्या पर गौर करें जो दफ्तर/दूकान से/में ब्लौगिंग नहीं करता.

    कुल जमा चौबीस घंटों में से

    सात-आठ घंटे निकल गए सोने में. बचे सोलह-सत्रह घंटे.
    इनमें से लगभग दस घंटे निकल गए दफ्तर जाने और काम करके वापस लौटने में. बचे छः-सात घंटे.
    रोज़मर्रा के ज़रूरी काम (नहाना-धोना, खाना-पीना) में निकल गए दो-तीन घंटे. बचे चार पांच घंटे.
    परिवार और बच्चों के साथ बैठकर समय बिताने, पढ़ाने, टीवी देखने आदि में लगे दो-तीन घंटे. बच गए दो-तीन घंटे.

    बस यह दो-तीन घंटे ही पर्याप्त हैं. इससे ज्यादा समय न तो देना चाहिए न ही दिया जा सकता है.

    जो महाशय फिर भी ब्लौगिंग को चार-छः घंटे दे रहे हों उनको मैं नमन करता हूँ.

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  31. बिलकुल ठीक है
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!

    Happy Republic Day.........Jai HIND

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  32. अच्छा है. मेरे पास तो अब ही समयाभाव रहता है...आगे जाने और क्या होगा. ख़ैर मैं भी याद रखूंगा.

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  33. ब्लॉग्गिंग और दूसरे काम में सामंजस्य बहुत जरूरी है...और स्वास्थ्य का ख्याल तो सर्वोपरि
    सही फैसला किया,आपने..शुभकामनाएं

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  34. आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  35. आपने सही सलाह दी है क्योंकि ये अभी कुछ दिन पहले ही मेडिकल रिपोर्ट में भी कहा गया था . इसके साथ ही इसमें मष्तिष्क और ह्रदय दोनों ही प्रभावित होते हैं. इसमें TV भी शामिल है. अगर आप ४-५ घंटे रोज टीवी देखते हैं तो सावधान हो जाइए. लेकिन समर्पित ब्लोगर के लिए ये मुश्किल होगा. उन्हें तो रोज ही लिखना नहीं पढ़ना है और टिप्पणी भी करनी है. तब सिर्फ हफ्ते में एक बार लिखिए और बाकी दिन पढ़िए और टिप्पणी कीजिये. जरूरी नहीं लगातार ही ये काम करें. जब समय हो तो आधा आधा घंटे के लिए ये काम किया जा सकता है.

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  36. मैं बहुत पहले से ये निश्चय कर चुकी हूँ. गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ !

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  37. "अगर आपके पास समय है, तो व्यस्त रहने के लिए,"
    यह तो परस्पर विरोधी वक्तव्य हो गया !जिसके पास समय है वह व्यस्त क्योंकर हुआ और अगर व्यस्त है तो समय वाला कैसे हुआ --
    थोडा तनाव शैथिल्य कर लीजिये ..मैं समझ सकता हूँ !

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  38. @मित्रों चर्चा के बीच अभी अभी यह खबर मिली है -
    प्रवीण जी आप के लिए ख़ास तौर पर -
    "अभी अभी हमारे केरेल और कर्नाटक के दो वीरों नें प्रयास किया है,, आह... ये भारत है,, मैनें अभी भारत के सैनिकों को भारत का झंडा, भारतियों से छीनते हुये देखा है... ये वही सैनिक हैं जो इसी झंडे के लिये अपनीं जान न्योछावर करते हैं.. "

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  39. आलोक पुराणिक का कहना है:
    ब्लागर,आशिक, सिपाही, स्मगलर-ये धंधे ऐसे हैं कि एक बार जो बन गया , सो बन गया, फिर पूरी जिंदगी नहीं छूटता
    हमने कभी ब्लागिंग छोड़ने के चंद फ़ायदे बताये थे। ब्लॉगिंग कम करने पर भी ये लागू होने चाहिये।

    तबियत चकाचक रखी जाये।

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  40. .
    .
    .
    "इस ब्लॉग परिवार में आपस में बढ़ते स्नेह के कारण मित्रों की अपेक्षाएं बढ़ना स्वाभाविक हैं ! फलस्वरूप ई मेल में अधिकतर, उनके लिखे लेखों पर, टिप्पणी करने के अनुरोध रहते हैं जिन्हें समयाभाव के कारण ,पूरा करना लगभग असंभव हो जाता है !"

    समस्या यहीं है,

    अपने रोजमर्रा के काम के लिये एक नया ईमेल खाता खोलें, उसे किसी ब्लॉगर को न बतायें व पुराने खाते की ओर झाँकें भी न... सुखी रहेंगे व समय भी कम लगेगा... पोस्ट अल्बत्ता जब दिमाग में आये तभी ठेल दें... ब्लॉगर तो आप अपनी पोस्टों के ही कारण हैं... :))


    ...

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  41. ऐकरे बदे त हम ब्लागिंग शुरु ही नाही किया जी। "लागी छूटे ना अब तो सनम" गाते रहिये ई नाही छूट सकत है।

    -राधे राधे सटक गईल बिहारी

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  42. सही निर्णय .... व्यस्तता तो रहती है.....गणतंत्र दिवस की मंगलकामनाएं.....

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  43. आप लगभग हमारी राह पर आ रहे हैं, मैं अधिकतम दो लिखता हूँ. :)

    गणतंत्र दिवस पर आपको शुभकामना.

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  44. आपका निर्णय बिलकुल उचित है .... शुभकामनाएँ

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  45. कोई बात नही एक सप्ताह कर के देखे? क्योकि अब आप को यह टी वी भी अच्छा नही लगेगा, ओर यह खाली समय ओर क्या करेगे? सब काम तो जल्द ही निपट जायेगे, बाबा बहुत मुश्किल हे मै दो तीन घंटे से ज्यदा समय नही देता ओर ना ही इस का लती हुया हु अभी तक, लेकिन समय पास करने का इस से अच्छा ओर सस्ता तरीका ओर कोई नही

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  46. और जो समय बचे उसे टिप्‍पणी देने में अवश्‍य लगा देना। यहां का सब यहीं रहना चाहिए। टिप्‍पणी देना परमार्थ का कार्य है।
    हमें तो झमाझम और घनघोर ब्‍लॉगिंग ही भाती है। चाहे माथा फूटे, चाहे कमर टूटे, पर ब्‍लॉगिंग को सांस की तरह अनिवार्य बना लेना चाहिए।
    पर सतर्कता यही रहे कि मीडियोकर्मियों को संबोधित करते हुए हिन्‍दी ब्‍लॉगिग कार्यशाला में अविनाश वाचस्‍पति ने जो कहा

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  47. हमें इंतजार रहेगा,
    आपके संकल्प पूर्ण होने का।
    ब्लागवुड में सूरज कभी डूबता नहीं है।24 घंटे
    ब्लागिंग होती है :)

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  48. आदरणीय सतीशजी भाईसाहब
    प्रणाम !
    आदरणीय दराल साहब और पद्मसिंह जी से सहमत हूं …,

    इससे मुझ जैसों को आपकी पोस्ट पर टिपिया न पाने का मलाल भी नहीं रहेगा ।
    वरना अभी तो हाल ये है कि आपके यहां चार बार दावत उड़ाता हूं , तो एक बार धन्यवाद दे पाता हूं … :)
    हां, अवसर विशेष पर सप्ताह में एक से अधिक बार भी लिख सकते हैं … ब्लॉग आपका, पोस्ट आपकी , हम आपके !!

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  49. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई.

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  50. वेसे हम भी आपकी बात से सहमत हैं पर न जाने शायद ये भी एक तरह का नशा सा ही लगता है कभी न लिखू तो लगता है शाद कोई काम छुट सा गया है !

    वेसे निर्णय बुरा नहीं अगर निभा सको तो ?

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  51. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें देखते हम भी कि कितना है दम ।

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  52. hum apke sadiksha ka samman karte hain.....

    pranam.

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  53. बहुत कठिन निश्चय किया है आपने सतीश जी...

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  54. हम तो पहले से ही मासिक पोस्ट का नियम बनाये
    हुए हैं :) बढिया फ़ैसला. शुभकामनाएं.

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  55. ओह! तभी ब्लॉग धीमी गति से अपडेट हो रहा है।
    गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।

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  56. प्रवीण शाह से सहमत.
    शुभकामनाएँ.
    घुघूती बासूती

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  57. यह तो सिगरेट छोड़ने जैसी बात हुए. १५ दिन बाद फिर शुरू. कम लिखो, अच्छा लिखो , अधिक पढो और जो सही लगे उसे ही सराहो..यह उसूल.

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  58. गृहस्थ आश्रम से इतनी जल्दी भी क्या है वानप्रस्थ में जाने की ? फिर वहाँ भी मन नहीं लगेगा तो कहेंगे कि मन अब संन्यास आश्रम की ओर भाग रहा है ?क्या ब्लॉग -जगत आपको ऐसा करने देगा ?

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  59. जब तक 50 से ज्यादा टिप्पणियां आती रहेंगी, लत कम नहीं होगी।
    सबसे बढिया तरीका यह है कि पोस्ट लिखकर पब्लिश करते समय टिप्पणियों का विकल्प बन्द कर दिया जाये।
    ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी।

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  60. सही है। सप्ताह में एक सारगर्भित लेख रोज़ कचरा लिखने से अच्छा है। यह गैप बेहतर करने को प्रेरित करेगा क्योंकि पाठकों की अपेक्षाएं भी ऐसी होंगी जिन्हें पूरा करने के लिए आपके पास पर्याप्त समय भी होगा। शुभकामनाएं।

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  61. बहुत अच्छा सोचा है आपने, हमने तो पहले से ही इस पर अनुसरण करते हुए पोस्ट कम ही लिखते हैं

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  62. हम्म... गुड...
    बात हेल्थ की है तो कोई बात नहीं... वर्ना यूँ जाना...???
    स्पाइनल की बीमारी से तो ऊपरवाला दुश्मन को भी बचाए... बहुत ख़राब होती है... उस बीमारी से तो बच नहीं पाई, पर सोचती हूँ बस चश्मे से बची रहूँ... पर मेरा तो काम ही रहता है कम्पूटर पर... तो मैं क्या करू??? यही सवाल मैंने अपने डॉ. से भी किया था...

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  63. सर जी...आपको जैसे उचित लगे, वैसे लिखिए........
    जब कभी भी आपको समय हो तो सप्ताह में ज्यादा भी लिख सकते हैं.
    इसके लिए आपको ढेरों शुभकामनाएँ.....

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  64. सप्ताह में एक. बिलकुल ठीक है.

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  65. नमस्कार, मैं इस ब्लॉग जगत में नया हूँ, कृपया मेरे ब्लॉग पर आ कर के मेरा मार्ग दर्शन करें........

    http://harish-joshi.blogspot.com/


    आभार.

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  66. उंगलियों को बेवजह मुट्ठी नहीं करते
    छुट्टी मिले तो यूँ कुट्टी नहीं करते।
    ...आज तो संडे है सर जी।

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  67. ---हमें तो अजय झा जी की यह बात ही सबसे अच्छी लगी...


    कभी रम ब्लॉगिंग , तो कभी कम ब्लॉगिंग ,
    हाय देख इस अदा को , हुई नम ब्लॉगिंग ।
    अजी होती रहे बूंद बूंद कभी कभार , और हो,
    फ़िर झूम के और टूट के , झमाझम ब्लॉगिंग॥

    ---यह भी कविता की भांति मूड पर आधारित है जी.....

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  68. blogging ke side effects Deepak Baba Ji se puche--------------------------------------------------------------
    jai baba banaras

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  69. socha to theek....nibh jae to...baharhaal shubhkamnaen.....

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  70. आपकी बात से सहमत हूँ सतीश जी ।

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  71. satishji.... Namaskar !
    Ek hafta nikal gaya , post ka Intzaar hai.... Sanyaas ke din khatam ho gayi :-)

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  72. sahi kahate hai aap.......

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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