Tuesday, April 5, 2011

आज किसी की रक्षा करने, साईं तुझे मनाने आया -सतीश सक्सेना

                      वर्षों पहले जब इस महानगर में कदम रखा था तो एक सीधे साधे लड़के राकेश से, एक ही कार्यालय में कार्य करने के नाते मित्रता हुई, और उसने रहने के लिए घर की व्यवस्था कराई ! उसके बाद बहुत सी यादें, एक दूसरे की शादी में योगदान...... दुःख के समय में साथ....मुझे याद है राकेश के द्वारा साईं बाबा के मन्दिर में ले जाने की जिद, और मेरा न जाना.....मेरी भयानक बीमारी पर साईं बाबा का प्रसाद लाकर घर में खिलाना और यह विश्वास दिलाना की अब आप ठीक हो जाओगे ! उसकी बहुत जिद और इच्छा थी कि मैं एक दिन उसके साथ शिरडी अवश्य चलूँ, जो मैंने कभी पूरी नही की !
                      और एक दिन वही, बिना मां,बाप, भाई, बहिन वाला राकेश, गंगाराम हॉस्पिटल पर स्ट्रेचर पर, अर्धवेहोशी, आँखों में आंसू भरे मेरी तरफ़ बेबसी में देख रहा था, तब मेरे जैसा नास्तिक, पहली बार साईं दरबार में विनती करने के लिए भागा !वहीं यह विनती लिखी गयी, बावा को मनाने हेतु , पर शायद बहुत देर हो गई थी......... !

ना श्रद्धा थी , ना सम्मोहन
ना अनुयायी किसी धर्म का
कभी न ईश्वर का दर देखा
अपने सिर को नहीं झुकाया
फिर भी मेरे जैसा नास्तिक,
बावा ! तेरे द्वारे आया !
मुझे नहीं मालुम क्यों, कैसे ? आज चढावा देने आया !

पूजा करना मुझे न आए
मुख्य पुजारी मुझे टोकते
कितनी बार लगा है जैसे
जीवन बीता, खाते सोते,
अगर क्षमा अपराधों की हो
तो मैं भी, कुछ लेने आया
आज किसी की रक्षा करने का वर तुमसे लेने आया !

आज कष्ट में भक्त तेरा है
उसके लिए चरणरज लागूं
कष्टों की परवाह नहीं है ,
अपने लिए नहीं कुछ मांगू,
पर बावा उसकी रक्षा कर
जिसने तेरा दर दिखलाया
आज ,किसी की जान बचाने, तेरी ज्योति जलाने आया !

कई बार सपनों में आकर
तुमने मुझको दुलराया है
बार - बार संदेश भेजकर
तुमने मुझको बुलवाया है
बाबा तुझसे कुछ भी पाने
मैं फल फूल कभी न लाया !
आज एक विश्वास बचाने , मैं शरणागत बनके  आया !

कितने कष्ट सहे जीवन में
तुमसे कभी न मिलने आया
कितनी बार जला अग्नि में
फिर भी मस्तक नही झुकाया
पहली बार किसी मंदिर में
मैं भी , श्रद्धा लेकर आया !
आज तेरी सामर्थ्य देखने , तेरे द्वार बिलखने आया !
आज किसी की रक्षा करने साईं तुझे मनाने आया !

67 comments:

  1. गुरु भाई , ये दिल के अंदर से निकले किसी अपने के लिए ,गहरे प्यार ओर अटूट रिश्ते के एहसास है आप की प्राथना मैं ये नाचीज भी आप के साथ है

    आशीर्वाद के साथ !
    अशोक सलूजा !

    ReplyDelete
  2. ....बड़ी मार्मिक पोस्ट लिखी आपने। मूड एकदम से कैसा-कैसा हो गया।

    ReplyDelete
  3. अपने लिये तो सभी करते है मगर जो दूसरो के दुख से द्रवित हो जाये और ऐसी प्रार्थना करे तो फिर कहना ही क्या……………आंख भर आईं ।

    ReplyDelete
  4. मानो तो गंगा माँ हूँ न मानो तो बहता पानी...



    जय हिंद...

    ReplyDelete
  5. यह पोस्त्पधकर मुझे दीवार पिक्चर का अमिताभ बच्चन याद आ गया ...जो अपनी माँ के लिए मंदिर
    की सीढियाँ चढ़ता है ...

    ईश्वर या साईं ...स्वयं का विश्वास ही होता है ...

    भले ही अपने लिए मांगी प्रार्थना कबूल हो या नहीं पर दूसरों के लिए मांगी गयी दुआ ज़रूर कबूल
    होती है ...

    ReplyDelete
  6. ise post ka ek ek shavd mastishk me ankit hai......aaj fir pada to bhee vo hee asar huaa......aankhe bhar aaee hai.......
    Satish jee jinse apanapan mile vo hee apne hai.......jitna bhee sath uska raha uskee sunharee yade hamare sath bantne ka shukriya.

    aaj sai baba kee bhee condition critical hai.........

    aana jaana

    jeevan ka

    ye hee hai

    tana bana

    ReplyDelete
  7. बहुत मार्मिक.
    साईं की महिमा न्यारी है.
    साईं में श्रद्धा रक्खें , बाबा मुसीबत में ख़ुद अ ख़ुद चले आते हैं.
    ॐ साईं.

    ReplyDelete
  8. आपकी भावनाओं और जज़्बे को सलाम!

    ReplyDelete
  9. सतीश जी,
    यही तो जीवन का मर्म है।

    ReplyDelete
  10. एक दूसरे की भावनाओं से बंधे हैं हम, इसलिए ऐसा बहुत कुछ करते हैं जो हम करना नहीं चाहते। आपकी श्रद्धा को नमन।

    ReplyDelete
  11. यही तो भावनाओं की अभिव्यक्ति है।

    किसी और का भला चाहने से अधिक कोई सेवा, भक्ति,पूजा,अर्चना दर्शन या आस्था नहीं हो सकती।

    पर निष्पक्ष 'भला चाहने'पर पूर्ण आस्थावान होना जरूरी है। मन स्वयं आस्तिक बन जाता है।

    ReplyDelete
  12. अपना दुख तो हम झेल ही लेते है लेकिन अपनो का दुख नही झेला जाता।
    भजन अच्छा लगा

    ReplyDelete
  13. साईं ने राकेश की इच्छा पूर्ण की. राकेश को तो उसने अपने पास बुला लिया पर आपको अपने दर्शन करा भक्ति-प्रेम का अविस्मरणीय प्रसाद दिया.
    मानुष चोला तो सभी को छोड़ना है एक दिन ,परन्तु
    चोला छोड़ने से पूर्व यदि ऐसा हो पाए कि हम प्रेम-भक्ति का अनुभव कर पायें तो ही जीवन की सार्थकता है. राकेश की प्रेम-भक्ति ने आपको भी इसका अनुभव कराया यह बड़ी बात है.
    आपकी कविता में बहे भक्ति के भाव अनमोल और हृदयग्राही हैं.बस आँखों से निकले चंद आंसू ही इसका जबाब दे सकते हैं.

    ReplyDelete
  14. जय साईंनाथ !

    आदरणीय सतीश जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    कष्टों की परवाह नहीं है ,
    अपने लिए नहीं कुछ मांगूं
    पर बावा उसकी रक्षा कर
    जिसने तेरा दर दिखलाया
    आज ,किसी की जान बचाने तेरी ज्योति जलाने आया


    औरों के भले के लिए की गई प्रार्थना अवश्य सुनी जाती है …

    नवरात्रि की शुभकामनाएं !

    साथ ही…

    नव संवत् का रवि नवल, दे स्नेहिल संस्पर्श !
    पल प्रतिपल हो हर्षमय, पथ पथ पर उत्कर्ष !!

    चैत्र शुक्ल शुभ प्रतिपदा, लाए शुभ संदेश !
    संवत् मंगलमय ! रहे नित नव सुख उन्मेष !!

    *नव संवत्सर की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !*


    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete
  15. जीवन में ऐसा कई बार होता है कि हम भले ही उस बात में विश्‍वास न करते हों,लेकिन किसी और की खुशी और भले के लिए कुछ देर के लिए ही सही करने लगते हैं। नास्तिक से आस्तिक हो जाते हैं।
    सतीश भाई शायद सबसे अधिक आस्‍था जीवन में होनी चाहिए। जीवन होगा तो हम सब कुछ करेंगे, नहीं होगा तो क्‍या होगा किसने देखा है।
    *
    यह आपकी एक स्‍वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया है।

    ReplyDelete
  16. याचनामय...बहुत सुन्दर भावासिक्त प्रार्थना...

    ReplyDelete
  17. दिल से उठी प्रार्थना !

    ReplyDelete
  18. Ankahin nam kar di aapne...

    Ishwar se kaamna hai ki unke parivar ko sambal de.

    ReplyDelete
  19. बहुत मार्मिक पोस्ट लिख डाली आपने .भगवान क्या है? मन की श्रधा ही तो ..

    ReplyDelete
  20. अपने लिये तो सभी करते है मगर जो दूसरो के दुःख में उनका सहारा बहुत कम लोग होते हैं ..

    बड़ी मार्मिक पोस्ट लिखी आपने

    ReplyDelete
  21. पर शायद बहुत देर हो गई थी......... !

    समझ ही नहीं पा रहा हूँ क्या कहूँ ?

    ReplyDelete

  22. कोई टिप्पणी नहीं,
    कृपया अन्यथा न लें,
    साईं के समक्ष पोस्ट पर टिप्पणी गौण है ।
    और.. मेरी हैसियत साईं की शक्ति पर टिप्पणी करने की नहीं !
    आज कोई टिप्पणी नहीं !

    ReplyDelete
  23. jab pahalee baar aapkee yah kavitaa aur is ghatanaa kaa varnan padha thaa, tab bhi bahut udwelit huaa thaa. aaj bhi vichalit hoon!!

    ReplyDelete
  24. इश्वर में पूर्ण आस्था है।

    ReplyDelete
  25. किसी और का भला चाहने से अधिक कोई सेवा, भक्ति,पूजा,अर्चना दर्शन या आस्था नहीं
    इस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हमारा नव संवत्सर शुरू होता है इस नव संवत्सर पर आप सभी को हार्दिक शुभ कामनाएं......

    ReplyDelete
  26. किसी और का भला चाहने से अधिक कोई सेवा, भक्ति,पूजा,अर्चना दर्शन या आस्था नहीं
    इस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हमारा नव संवत्सर शुरू होता है इस नव संवत्सर पर आप सभी को हार्दिक शुभ कामनाएं......

    ReplyDelete
  27. भक्ति में शक्ति होती है ॥

    ReplyDelete
  28. किसी के लिए सच्चे मन से की गई प्रार्थना का बहुत असर होता है...सब की प्रार्थनाएँ शक्ति पुंज बन कर रक्षा कवच बन जाती है...

    ReplyDelete
  29. जय साँई राम! इसके सिवा कोई शब्द नहीं हैं सतीश जी। आपकी प्रार्थना पढ़ इश्वर की भी आँख भर आई होगी। प्रार्थना कभी बेकार नही जाती हाँ जो किस्मत में लिखा है उसे कोई बदल नही सकता।

    ReplyDelete
  30. अपने लिए तो दुआ सभी मांगते हैं । लेकिन किसी दूसरे के लिए साईं के दरबार में जाना आपके निर्मल और मानवता से भरपूर हृदय के दर्शन कराता है ।

    ReplyDelete
  31. दवा से दुआ अधिक शक्तिशाली है

    ReplyDelete
  32. मर्मस्पर्शी संस्मरण दूसरों के लिए, कुछ करना अलग बात है मार्मिक रचना ..

    ReplyDelete
  33. सब सुखी हों, जय हो आपकी भक्ति की।

    ReplyDelete
  34. कितने कष्ट सहे जीवन में
    तुमसे कभी न मिलने आया
    कितनी बार जला अग्नि में
    अपना मस्तक नही झुकाया
    आज भक्त की रक्षा करने, साईं तुझे मनाने आया !

    बहुत मार्मिक पोस्ट.साईं की स्तुति में मन की करुणा और पुकार मन को छू जाती है. जय साईं नाम!

    ReplyDelete
  35. भावनात्मक सोच हर मनुष्य के ह्रदय में बसती है..... बहुत सुंदर ..पावन स्तुति है बाबा है...

    ReplyDelete
  36. अंतरतम से उठी प्रार्थना में बहुत शक्ति होती है ,मना रही हूँ कि आपकी यह प्रार्थना फलीभूत हो !

    ReplyDelete
  37. आपकी इस श्रधाभरी प्रार्थना में कृपया मुझे भी
    शामिल कर लीजिये !

    ReplyDelete
  38. बहुत ही दुखी कर गयी ये पोस्ट...
    आपके लिए ये सब लिखना भी कितना मुश्किल होगा....समझ सकती हूँ

    ReplyDelete
  39. जय साँई राम! जय साँई राम! जय साँई राम! जय साँई राम! जय साँई राम! जय साँई राम!

    ReplyDelete
  40. सतीश जी, मुझे नहीं लगता कि कोई भी नास्तिक होता है, हां आस्था के आयाम अलग-अलग हो सकते हैं. आप अपने दोस्त के लिये व्यथित हुए, ये आस्तिकता ही है, खुद को नास्तिक न कहें.

    ReplyDelete
  41. निःशब्‍द कर देने वाली रचना.

    ReplyDelete
  42. दिल भर आया क्या कहूँ"

    regards

    ReplyDelete
  43. न्यूज चैनलों को देखकर तो लगता है कि साईं बाबा केवल माला बडी करने, मूर्ति से शहद टपकाने के कार्य ही करते हैं।
    वैसे मैं मानता हूं कि श्रद्धा में शक्ति होती है। और किसी की श्रद्धा ही चमत्कार करती है।
    विनती लिखी है आपने दिल से और हर चीज जो दिल से की जाती है, वह अतुलनीय है।
    घटना कब की है नहीं पता, इसलिये क्या कहें।

    प्रणाम

    ReplyDelete
  44. श्रध्दा से बड़ा कुछ नहीं है लेकिन इंसान का धरती पर आना जाना प्रभु के हाथ है जिसे कोइ टाल नहीं सकता है |

    ReplyDelete
  45. बेहद मार्मिक पोस्ट ......
    जिस के भी नाम से अत्मबल मिल जाये उसके सामने मस्तक खुद-ब-खुद झुक जाता है ....

    ReplyDelete
  46. आपके मन में अपने दोस्त के लिए जज्बा देखकर मैं अभिभूत हो गया हूँ ...

    ReplyDelete
  47. आपने अपना कर्म पूरा किया .....और वही अंतिम रूप से किया जा सकता है -परिणाम हमारे हाथ में नहीं !

    ReplyDelete
  48. दूसरों की पीड़ा के लिए मन में संवेदनाओं का जन्म लेना ही आस्तिक हो जाना है।
    निर्मल हृदय से निकली प्रार्थना है यह।

    ReplyDelete
  49. dil ko dravit kar gayi aapki post. dukh hua jaan kar ki aapne dair kar di baba ke dwar tak pahunchte pahunchte...lekin kisi ke liye yu lagan se dua karna bhi kisi bahut bade naik kaam se kam nahi hai.

    bahut sunder prarthna likhi aapne.

    ReplyDelete
  50. यह सब विश्वास का ही खेल है. मानो तो सब कुछ.

    मार्मिक पोस्ट.

    ReplyDelete
  51. Kisee priy par jab ban aatee hai to achanak wishwas ke naye darwaje khat khatane ko hriday se ichcha hotee hai is kawita ke madhyam se aapne apna hriday undel diya bahut hee sunder dil ko choo lene wali kawita.

    ReplyDelete
  52. कितने कष्ट सहे जीवन में
    तुमसे कभी न मिलने आया
    कितनी बार जला अग्नि में
    अपना मस्तक नही झुकाया
    आज भक्त की रक्षा करने,
    साईं तुझे मनाने आया !
    .आपकी श्रद्धा को नमन!
    ॐ साईं.ॐ साईं.

    ReplyDelete
  53. आस्था तो मानने की बात है। भगवान तो नस्तिकों का भी होता होग,नहीं तो वे लोग दुनिया में कैसे रहते। पर आपकेविचार बहुत ही सुंदर हैं। सच में कुछ-कुछ होने लगा।
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    ReplyDelete
  54. दिल की पुकार है दोस्त जरुर पूरी होगी |
    श्रद्धा और विश्वास हो तो सब संभव है |
    साईं सबका मालिक एक |

    ReplyDelete
  55. kuch b tippadi karne se pahle kahana chaungi k bahut chhoti hu aapse umra or tajurba dono me.koi b bhul chuk ho uske liye chhma parthi hu. par b fir b aapki pankitya dil ki gaharaai ko chhu kar gujrati hai.hum b aapke saath hai. jaane q ye man varvas hi kuch unkahi si baatein bayan kar jaata hai.jispar humne kabhi aitbaar nai kiya aaj seedhe udhar hi muda chala jaata hai.

    ReplyDelete
  56. हृदयस्पर्शी पोस्ट!

    ReplyDelete
  57. ये सिर्फ़ एक पोस्ट नही है........

    ReplyDelete
  58. दूसरों की पीड़ा के लिए मन में संवेदनाओं का जन्म लेना ही आस्तिक हो जाना है।

    ReplyDelete
  59. आपने ब्लॉग पर आकार जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं

    ReplyDelete
  60. आँखे नम हो गयी ,प्रार्थना उठने लगी है साईं बाबा सबकी रक्षा करे .

    ReplyDelete
  61. मर्मस्पर्शी !

    ReplyDelete
  62. मांगी ये दुआ किसने
    मेरी जिंदगी की खातिर
    दामन छुड़ा के देखो
    मेरी मौत जा रही है

    मन से निकली है दुआ मेरा पूरा विस्वास है साईं नाथ जरूर रक्षा करेंगे अपने भक्त की ... ..भावुक कर दिया आपकी भक्ति रचना ने
    जय साईं नाथ

    ReplyDelete
  63. you can read shayari sms jokes
    http://shayari10000.blogspot.com

    ReplyDelete

एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

Related Posts Plugin for Blogger,