Tuesday, April 17, 2012

हम रंग जमा दें दुनिया में, हम बात तुम्हारी क्यों माने ?

कुछ रंग नहीं, कुछ माल नहीं
कुछ मस्ती वाली बात नही,
कुछ खर्च करो, कुछ ऐश करो
कुछ डांस करें, कुछ हो जाए !
यदि मौज नहीं कोई धूम नहीं,हम बात तुम्हारी क्यों माने ?


क्या कहते हो ? क्या करते हो
है ध्यान कहाँ ?कुछ पता नहीं
ना टाफी है, ना चाकलेट ,
ना रसगुल्ला, ना बर्गर है !
हम मस्त कलंदर धरती के, हम बात तुम्हारी क्यों माने ?


रंगीन हैं हम, दमदार हैं हम
मस्ती में नम्बरदार, हैं हम
यह समय बताएगा सबको
पढने में तीरंदाज़ हैं हम ,
हम नौनिहाल इस धरती के, हम बात तुम्हारी क्यों माने ?


हम धूम धाम, तुम टाँय टाँय
हम बम गोले,तुम कांय कांय
हम नयी उमर की नयी फसल
तुम घिसी पिटी भाषण बाजी
हम आसमान के पंछी हैं , हम बात तुम्हारी क्यों माने ?


ना गुलछर्रे, ना हो हल्ला,
हम धूमधाम,तुम सन्नाटा
हम छक्के हैं तेंदुलकर के ,
तुम वही पुराना नजराना 
हम रंग जमा दें दुनिया में, हम बात तुम्हारी क्यों माने ?


हम लड्डू हैं तुम हरा साग ,
हम चाकलेट तुम भिन्डी हो
हम मक्खन हैं,तुम घासलेट 
हम रंग रुपहले,तुम कालिख 
हम मस्ती मारें इस जग में, हम बात तुम्हारी क्यों माने ?

40 comments:

  1. उनकी ऊर्जा उन्हें थमने भी कहाँ देती है...... बहुत बढ़िया

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  2. हम लड्डू हैं तुम हरा साग ,
    हम चाकलेट तुम भिन्डी हो
    हम मक्खन हैं,तुम घासलेट
    हम रंग रुपहले,तुम कालिख
    हम मस्ती मारें इस जग में, हम बात तुम्हारी क्यों माने ?

    रंग -ए- मस्ती ,कातिल हलाल ,गम है गाफिल ,एह्तारामे जमाल ..... आफरीन !...

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  3. छुट्टियों के इस मौसम में बच्चों और किशोरों के लिए सुंदर गीत।

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  4. हम भी कभी बच्चे थे
    झूठे नहीं सच्चे थे,
    दुनियादारी से दूर रहे
    नहीं पके थे,अच्छे थे !

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  5. सुन्दर प्रस्तुति ।

    हास्य

    बच्चों को अपने मन की करने का अधिकार है-

    बस नजर रखिये -

    सादर ।।

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  6. ऐसे सूरा करम थोड़े ही मानोगे बच्चू ..जब पड़ेगी तब दौड़ के इधर ही आओगे :)

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  7. उल्लास से परिपूर्ण ..
    kalamdaan

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  8. रंगीन हैं हम, दमदार हैं हम
    मस्ती में नम्बरदार, हैं हम
    यह समय बताएगा सबको
    पढने में तीरंदाज़ हैं हम ,
    हम नौनिहाल इस धरती के, हम बात तुम्हारी क्यों माने ?

    bilkul mat maano ... bharo udaan

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  9. खूब तोहफा है खासकर बच्‍चों के लिए.

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  10. हम गीत रचयिता है अव्‍वल, तो बात हमारी तुम मानो। अच्‍छे अच्‍छों को पढ़ा सके इसलिए बात हमारी तुम मानो।

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  11. बढ़िया, सुंदर बाल अभिव्यक्ति,बेहतरीन मोहक रचना,...

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

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  12. बहुत सुंदर .... बच्चों का मन सा मन लिए गहन अभिव्यक्ति

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  13. सुन्दर प्रस्तुति, आपकी तो हर कविता की बात ही निराली हैं!

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  14. bahut pyari rachna......

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  15. सही बात ...क्यों माने..

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  16. वाह भाईसाहब
    हम बात तुम्हारी क्यों माने :) बहुत खूब!

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  17. मस्त मस्त है जी , एकदम मस्त .

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  18. जोशो खरोश से भरा गीत। बधाई हो

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  19. बहुत खूब...अति सुंदर गीत... बधाई !

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  20. vaah ,ab kya kahe ,ye baat maanane vale kahan ,yahi lo hae bachapan ka aanand ,

    ek najar mere blaag par bhii

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  21. वाह, अब बच्चों की ओर से..

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  22. चरफर चर्चा चल रही, मचता मंच धमाल |
    बढ़िया प्रस्तुति आपकी, करती यहाँ कमाल ||

    बुधवारीय चर्चा-मंच
    charchamanch.blogspot.com

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  23. उर्जा और प्रवाह से भरा गीत !
    आभार !

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  24. कवि पर लिखी आपकी कविता ....
    चरितार्थ करता जहाँ न पहुंचें रवि ,वहाँ पहुंचें कवि ....
    अथक अविचल अविरल ... बहुत खुबा ...

    ReplyDelete
  25. कवि पर लिखी आपकी कविता ....
    चरितार्थ करता जहाँ न पहुंचें रवि ,वहाँ पहुंचें कवि ....
    अथक अविचल अविरल ... बहुत खुबा ...

    ReplyDelete
  26. सही बात
    क्यों माने

    ReplyDelete
  27. हम आसमान के पंछी हैं , हम बात तुम्हारी क्यों माने ?

    उड़ान जारी रहे ... बहुत सुन्दर

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  28. बहुत सुन्दर प्रस्तुति आपकी कविता को पढ़ कर महान हास्य कवी काका हाथरसी की याद आ गयी
    देवी तुम रबड़ी में बूरा
    किसी चतुर हलवाई ने
    तुमको रच यश लूटा है
    किन्तु मुझे तो श्रमिकों ने
    हथियारों से कूटा है
    फिर भी उनसे जूझ रहा हूँ
    चरण तुम्हारे पूज रहा हूँ
    तुम हो सारंगी सी सुन्दर
    मै टूटा हुवा तम्बूरा
    देवी तुम रबड़ी में बूरा .....
    बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी पुरानी याद को पुनः स्मृत करवाने के लिए ...

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    Replies
    1. धन्यवाद मदन भाई ....
      उदाहरण अच्छा लगा ...

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  29. हम लड्डू हैं तुम हरा साग ,
    हम चाकलेट तुम भिन्डी हो
    हम मक्खन हैं,तुम घासलेट
    हम रंग रुपहले,तुम कालिख
    हम मस्ती मारें इस जग में, हम बात तुम्हारी क्यों माने ?
    इनकी मस्ती में ही तो ,हम लोगो की खुसी है.

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  30. आज बस इतना ही कहूँगा कि क्या बात है!!

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  31. हम धूम धाम, तुम टाँय टाँय
    हम बम गोले,तुम कांय कांय
    हम नयी उमर की नयी फसल
    तुम घिसी पिटी भाषण बाजी
    हम आसमान के पंछी हैं , हम बात तुम्हारी क्यों माने ?

    आहाऽऽहाऽऽ… !
    प्रियवर सतीश सक्सेना जी
    क्या बात है !
    लौटा दिया बचपन को …
    कितने खेल , कितने किस्से , कितने गीत आपके मस्त मज़ेदार गीत के बहाने याद हो आए बहुत ख़ूब !!

    हम भी अगर बच्चे होते नाम हमारा होता बबलू डबलू …
    :)


    मंगलकामनाओं सहित…
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  32. .

    …और तस्वीर में आपके साथ ये कौन विभूतियां हैं ,
    जिनकी संगत से आपका बचपना लौट आया :)

    इनको बहुत बहुत Thanks .

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  33. अरे ,आप तो फिर से बचपन में पहुँच गये !

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  34. किसी की बात न सुनो...अपने दिल की सुनो...वही करो

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  35. उत्साह और जोश से भरी बहुत सुन्दर रचना...

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  36. uffffffff .... आज के बच्चे और उनकी सोच ...

    कमाल हैं कमाल हैं ....

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आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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