इन आंसुओं को क्या कहें, ख़ुशी के या अपनी लाडली के जाने के गम के !
गुडिया की विदाई पर,अमेरिकन विश्वयात्री एडम ने, हमारे छलके आंसुओं से आहत होकर कहा था ..
"why sad ending of a such beautiful function ? "
मैं इस प्रश्न का जवाब उसे अभी तक नहीं दे पाया...
आज गिरिजा कुलश्रेष्ठ का कमेंट्स, फिर आंसू छलका गया ...
बीतें तेरे जीवन की घड़ियाँ
आराम की ठंडी छांवो में
काँटा भी न चुभने पाए तेरे
मेरी लाडली तेरे पांओं में ...
