Thursday, September 19, 2013

श्वेत दुशाला,सुंदर पगड़ी,पर होते बलिहारी लोग -सतीश सक्सेना

निपट जाहिलों को भरमाते
अज्ञानी  को मूर्ख बनाते !
पैसे दे दे कर लोगों से ,
अपनी तारीफें , करवाते !

घरों में बैठे, सीधे साधे ,
सम्मोहित हो जाते लोग !
श्वेत दुशाला, सुंदर पगड़ी, पर होते बलिहारी लोग !


भोली जनता इज्ज़त देती 
वेश देख , बनवासी को !
घर में लाकर उन्हें सुलाए
भोजन दे , सन्यासी  को !
अलख निरंजन गायें, डोलें,

मुफ्त की खाएं डाकू लोग !
पाखंडी को, गुरू मान कर , पैर दबाएं मूरख लोग !

अनपढ़,अज्ञानी दुनियां में 
गुरु ढूँढने, घर से निकले !
वेद, पुराणों में लिखा है
गुरु ही तेरे , कष्ट मिटायें !
टीवी पर जयकार धूर्त की,

खुश हो जाते भोले लोग !
सौम्य समाज, प्रदूषित करके, पैसा खूब बनाते लोग !


पहले चोर, उचक्के, डाकू,
जंगल गुफा, ढूंढने जाते ! 
बाल बढाये,राख लगाए  
जैसे तैसे,शकल छिपाते !
असली संत ठगे से बैठे , 
नकली प्रवचन सुनते लोग !
गंदे चरणामृत को पीकर , जीवन सफल बनाएं लोग !

34 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-

    गजब आकलन नहीं नव चलन अच्छे लगते ढोंगी ढोंग |

    ReplyDelete
  2. श्वेत दुशाला,सुंदर पगड़ी,पर होते बलिहारी लोग ! ekdam theek bole.....

    ReplyDelete
  3. काश लोगों को सत्य समझ में आये।

    ReplyDelete
  4. satish bahi kabita ke sath sath aapki photo jam rahi hai

    ReplyDelete
  5. ऐसे लोग..कैसे लोग..जाने कैसे कैसे लोग.....

    बढ़िया रचना...

    सादर
    अनु

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - शुक्रवार - 20/09/2013 को
    अमर शहीद मदनलाल ढींगरा जी की १३० वीं जयंती - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः20 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





    ReplyDelete
  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - शुक्रवार - 20/09/2013 को
    अमर शहीद मदनलाल ढींगरा जी की १३० वीं जयंती - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः20 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





    ReplyDelete
  8. bahut sunder, pahle ke daku valmiki ki tarah ho jate the, ab ..... ban jate hain.

    ReplyDelete
  9. ढोंगी बाबाओं ने धर्म को सबसे ज़्यादा नुक्सान पहुँचाया है और इसी कारण इंसानियत को भी।

    ReplyDelete
  10. बेहतरीन ...
    चोर उचक्के डाकू अक्सर
    जंगल गुफा में शरण ढूँढ़ते
    बाल बढाकर,राख रगड़ कर
    जैसे तैसे , शकल छिपाते !
    मौका देख कर चाले चलते, पक्के अवसरवादी लोग !
    चरण गुरु के धोके पीते,जन्म को सफल बनाते लोग !

    ReplyDelete
  11. ऐसे लोग..वैसे लोग..जाने कैसे कैसे लोग.....
    पढे लिखे होकर भी...मूरख क्यूँ बन जाते लोग...

    सुंदर रचना !!

    ReplyDelete
  12. सतीश जी । बिल्कुल सच्ची व्यंग्य रचना ।
    गोस्वामी जी ने मानस में लिखा है—
    'बहु दाम संवारहि धाम जती
    विषया हरि लीन्हि न रहि विरती
    तपसी धनबंत दरिद्र गृही————''
    और भी —
    'मारग सोइ जा कहुं जोइ भावा
    पंडित सोइ जो गाल बजावा
    मिथ्यारंभ दंभ रत जोई
    ता कहुं संत कहइ सब कोई '

    ReplyDelete
  13. सुंदर और सत्य!

    ReplyDelete
  14. बहुत खुबसूरत !!

    ReplyDelete
  15. इन ''बाबाओं'' की वजह से भी ये समाज दूषित हो रहा है ..कटु सत्य

    ReplyDelete
  16. बाबाओं ने न जाने क्‍या चमत्‍कार कर रखा है कि अच्‍छे पढ़े-लिखे लोग भी उनके चरण दबाते देते जाते हैं।

    ReplyDelete
  17. Khoob kahi aapne. Satik vyakhya aaj ke lobhi jamane ki.

    ReplyDelete
  18. ये जमाना ही बाबाओं का है. सटीक व्यंग रचना.

    रामराम.

    ReplyDelete
  19. शायद पूरी दुनिया में एक हमारा ही देश होगा जहाँ हजारों साल से एक ही धंधा चलता है बाबाओं का प्रवचन देना और लोगों का सुनना, सबसे ज्यादा सुनने वालों में महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है और महिलाओं को ही इन बाबाओं ने निन्दित किया है पता नहीं कैसे सुन लेती होंगी, सटीक रचना है !

    ReplyDelete
  20. आपने अंतर मन को झंझोड़ दिया

    ReplyDelete
  21. सुन्दर रचना!
    शुभकामनाएं!

    ReplyDelete
  22. सबसे पढ़े लि‍खे समाजों में मूर्ख लोग पाए ही जाते हैं

    ReplyDelete
  23. baba-giri ek aisa dhandha ho gya hi,jisme nuksaan ho hi nhi skta,aisa isliye kyunki log inka anusaran nhi chhor rahen hi |

    ReplyDelete
  24. बहुरूपियों के रूप हज़ार ...

    ReplyDelete
  25. सामयिक प्रस्तुति

    ReplyDelete
  26. काटजू बाबा सत्य बोले हैं, ९९ % मुर्ख हे भारतीय ! अभी उस निर्मल की दुकान देखो, धड़ल्ले से चल रही हैं

    ReplyDelete

एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

Related Posts Plugin for Blogger,