Tuesday, September 24, 2013

आधी रात को,जलसा होगा,दावत भूत पिशाचों की -सतीश सक्सेना

हमको बेपर्दा करने, कुछ लोग  द्वार पर  आये हैं !
जोश में अपने ही दरवाजे,खुले छोड़ कर आये हैं !

जाने कितने पुण्य किये थे , सुबह सवेरे उठते ही,
लगता जैसे  राह भूल के , नारायण घर आये हैं !

पता हमें भी , जाने वाले , वापस कभी  न आयेंगे !
हँसी ख़ुशी के भी मौके पर,आंसू क्यों भर आये हैं !

देर रात को,जलसा होगा,दावत भूत पिशाचों की !
बड़े दिनों के बाद आज,इस जंगल में,नर आये हैं !

आज रात को झूमझूम के ,माँ की महिमा गायेंगे !
रात्रि जागरण, चन्दा लेने,घर में ऋषिवर आये हैं !

28 comments:

  1. यह श्राद्ध पक्ष का गीत है या कुछ और? लेकिन है बहुत ही श्रेष्‍ठ।

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    1. नहीं नहीं :)
      दावत वाला शेर , राक्षसों जैसा वर्ताव कर रहे इंसानों को, डराने के लिए है :)

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  2. बहुत ही जोरदार रचना आभार ।

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  3. बहुत अच्छी पंक्तियाँ रची हैं.....

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  4. bahut acchhi rachna ....dil bhar aaya ..

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  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  6. बहुत बढ़िया...
    सच्ची डराने वाली कविता :-)
    सादर
    अनु

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  7. ADBHUT RACHNA SANSAAR HAI AAPKA...AISE HI LIKHTE RAHEN....HAM SAB K LIYE.

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  8. मुझे समझ नहीं आया कि‍ इशारा कि‍स तरफ है .

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    1. हर शेर का भाव स्वतंत्र एवं अलग है काजल भाई ,

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  9. पहला शेर सबसे बढ़िया लगा |

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  10. बहुत ही बढ़ियाँ रचना...



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  11. उत्कृष्ट रचना

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  12. हर शेर अलग अंदाज में मस्त है !

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  13. हमने किसका,मुंह देखा था, सुबह सवेरे उठते ही !
    आज न जाने कहाँ से चल के,नारायण घर आये हैं !
    बढ़िया रचना ......

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  14. हमने किसका,मुंह देखा था, सुबह सवेरे उठते ही !
    आज न जाने कहाँ से चल के,नारायण घर आये हैं !
    बहुत सुन्दर !
    Latest post हे निराकार!
    latest post कानून और दंड

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  15. श्राद्ध पक्ष का आह्वान

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  16. बुरी आदतें छूट जाएँ तो ठीक है , वर्ना समय छुडवा ही देगा !

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  17. पता है हमको , जाने वाले, वापस कभी न आयेंगे !
    हँसी खुशी के इस मौके पर, आंसू क्यों भर आये हैं !
    बहुत सुंदर .

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  18. पता है हमको , जाने वाले, वापस कभी न आयेंगे !
    हँसी खुशी के इस मौके पर, आंसू क्यों भर आये हैं !
    बहुत सुंदर .

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  19. आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल {बृहस्पतिवार} 26/09/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" पर.
    आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

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  20. आज रात को मस्त धुनों पर , माँ की महिमा गायेंगे !
    रात्रि जागरण , चन्दा लेने , घर में ऋषिवर आये हैं !

    बहुत सटीक.

    रामराम.

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  21. हर ओर चोट करती रचना..

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  22. अलग अलग शेर पढ़े तो सभी शेर बहुत सटीक है ...
    पर रचना के तालमेल के मुताबिक सब अगल ही लगते हैं

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  23. गजब की रचना जहाँ हर शेरों में अलग भाव आपने पिरोये है---शानदार।

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- सतीश सक्सेना

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