Thursday, September 12, 2013

आसानी से क्यों होते हैं, मौत के चरचे दुनियां में -सतीश सक्सेना

ऐसा करें कि हाथ पकड़ना सीखें बच्चे दुनियां में ! 
रामू चाचा ,रहमत काका, दोनों सच्चे दुनियां में !

क्यों भड़काते हैं बच्चों को, इनको तो जी लेने दें  !
आसानी से क्यों होते हैं, मौत के चरचे दुनियां में !

मंदिर मस्जिद की दीवारों को,साधारण रहने दें  !  
अंत समय में,क्यों करते हो,ऐसे खरचे दुनियां में !

पढ़े लिखों की बातों से,यह गाँव सुरक्षित रहने दें !
सुना है,बन्दर बाँट रहे हैं,जीत के परचे,दुनियां में !

ज़हरी बातें, नहीं सिखाएं, इन्हें प्यार से जीने दें  !
हमें पता है,स्वर्ग के दावे,कितने कच्चे दुनियां में !

50 comments:

  1. सुन्दर गीत-
    बधाई आदरणीय सतीश जी-

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  2. सुना है बन्दर बाँट रहे हैं--

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  3. पीड़ा न अब किसको होती, मौत देखना सीख गये सब,
    रह रह, मर मर जी लेते हैं, नरक बनाते दीख रहे सब।

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  4. बहुत प्रभावशाली. सामयिक दर्द को बयाँ करती.

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  5. क्या बात कही!
    कमाल है।

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  6. रामू चाचा ,रहमत काका, दोनों सच्चे दुनियां में !
    ***
    एक साधारण सी पंक्ति और कितना बड़ा सन्देश!!!
    वाह!
    प्रणाम आपके गीतों को, नमन आपकी कलम को!

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    1. आपका आभार अनुपमा जी !

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  7. बहुत ही सच्ची और प्रभावशाली कविता । समय को शब्द देती हुई ।

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    1. आपके आने से गरिमा आई इस रचना में ..

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  8. ऐसा करें कि हाथ पकड़ना सीखें बच्चे दुनियां में !
    रामू चाचा ,रहमत काका, दोनों सच्चे दुनियां में !
    kitni acchi soch ....par kahan samjh me aati aisee baten haivanon ko unhe to bs apni roti sekni hai ....

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  9. मंदिर मस्जिद की दीवारों को,साधारण रहने दो !
    अंत समय में,क्यों करते हो,ऐसे खरचे दुनियां में !
    बहुत गहन भाव .

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  10. रामू चाचा, रहमत काका
    दोनों सच्चे दुनिया में!
    .
    .
    पर कल्लू दादा, गफ्फ़ार-अब्दुल्ला
    कहो, कहां सजा लूँ दुनिया में?

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    1. उन्हें झेल लेंगे कुछ हम लोग कुछ क़ानून !

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  11. यथार्थ कहती प्रभावशाली रचना..

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  12. बहुत गहन भाव लिए प्रभावी रचना !!

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  13. सियासत की काली दुनिया से बच्चे भी अब महफूज नहीं हैं..समसामायिक रचना !

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  14. ज़हरी बातें, नहीं सिखाओ,इन्हें प्यार से जीने दो !
    हमें पता है,स्वर्ग के दावे,कितने कच्चे दुनियां में !

    दर्द को बयान करती सच्ची कहानी कौन झुठला पायेगा

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  15. क्‍या बात। क्‍या बात।

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  16. ज़हरी बातें, नहीं सिखाओ,इन्हें प्यार से जीने दो !
    हमें पता है,स्वर्ग के दावे,कितने कच्चे दुनियां में !
    ..गहन भाव ...प्रभावी रचना

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  17. एक समसामयिक और सार्थक विषय पर लिखी एक बेहतरीन पोस्ट …।ये अमन का पैगाम सभी तक पहुंचे यही अभिलाषा है |

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  18. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - शुक्रवार - 13/09/2013 को
    आज मुझसे मिल गले इंसानियत रोने लगी - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः17 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





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  19. दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों पर सौहार्दपूर्ण सुन्दर रचना।

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  20. बहुत सुन्दर ..

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  21. सरल शब्दों में कितनी गहरी बात कही... बहुत सुन्दर

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  22. बहुत सुंदर सृजन ! कमाल की प्रस्तुति,

    RECENT POST : बिखरे स्वर.

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  23. वाह बहुत खूब

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  24. क्यों भड़काते हो बच्चों को,इनको तो जी लेने दो !
    आसानी से क्यों होते हैं, मौत के चरचे दुनियां में !

    बहुत सुंदर गीत .....

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  25. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 14/09/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

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    1. आपका आभार यशोदा जी ..

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  26. सुन्दर व प्रभावशाली प्रस्तुती

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  27. सरल सहज अभिव्यक्ति |उम्दा रचना |
    आशा

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  28. इस दुनियां को स्वार्थ वश जहन्नुम हम लोगों ने ही बना रखा है. बेहद सशक्त रचना.

    रामराम.

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  29. उम्दा अभिव्यक्ति !

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  30. बेहद सुंदर और प्रभावशाली रचना ....बधाई आपको ...सतीश जी...

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  31. पढ़े लिखों की बातों से यह गाँव सुरक्षित रहने दो !
    सुना है,बन्दर बाँट रहे हैं,जीत के परचे,दुनियां में !

    ज़हरी बातें, नहीं सिखाओ,इन्हें प्यार से जीने दो !
    हमें पता है,स्वर्ग के दावे,कितने कच्चे दुनियां में !

    सेकुलर वीरों शर्म करो कुछ ,वोट से आगे भी देखो ,

    हमें पता सब गोरख धंधे राग तुम्हारे दुनिया में।

    बहुत सुन्दर रचना है सक्सेना साहब।

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  32. पढ़े लिखों की बातों से यह गाँव सुरक्षित रहने दो !
    सुना है,बन्दर बाँट रहे हैं,जीत के परचे,दुनियां में !

    ज़हरी बातें, नहीं सिखाओ,इन्हें प्यार से जीने दो !
    हमें पता है,स्वर्ग के दावे,कितने कच्चे दुनियां में !

    सतीश जी आपकी रचनायें हमेशा वक्त पर सही टिप्पणी करती हैं।

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  33. बहुत सुन्दर

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  34. बहुत बहुत बहुत खूब. दोहे के स्तर का ! वाह, मजा आ गया.

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  35. अपने फेसबुक पर भी शेयर किया ताकि कोई वंचित न रहे। वाह। https://www.facebook.com/abadhya

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  36. क्यों भड़काते हो बच्चों को,इनको तो जी लेने दो !
    आसानी से क्यों होते हैं, मौत के चरचे दुनियां में !
    ज़हरी बातें, नहीं सिखाओ,इन्हें प्यार से जीने दो !
    हमें पता है,स्वर्ग के दावे,कितने कच्चे दुनियां में !

    मरने के हो गए लाख बहाने ,मौत सस्ती
    अब जीने की कोई वजह नहीं मिलती
    सार्थक लगी ऊपर की पंक्तियाँ , सुन्दर रचना !

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  37. bharna ho bharo jara ,gadde nafrat ke
    prem ki gadi khati gacche duniya me

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  38. भरना है तो ,भर दो तुम, गड्डे किये जो नफ़रत के
    प्रेम भाव की गाड़ी खाती गच्चे इस दुनिया मे
    सुरेश राय 'सुरS'

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  39. बहुत खुबसूरत लिखते हैं आप ...........कई पढ़े पर हर जगह कमेन्ट करने में दिक्कत आ रही हैं क्यकी आपकी पोस्ट पर अनुभवी लोगों के कमेंटो की भरमार हैं हम न भी करे तो क्या फर्क पड़ने वाला ....आपका ब्लॉग कैसे ज्वाइन करे वह भी नहीं समझ आ रहा

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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