Thursday, October 10, 2013

जब से तालिबान जन्में हैं, विश्व में नफरत आई है - सतीश सक्सेना

तालिबानियों ने,गैरों से द्वेष की फितरत पायी है !
जहाँ गए ये,उठा किताबें, वहीँ हिकारत पायी है !

हैरत में हैं लोग,  इन्होने नफरत  , खूब उगायी है !
इनकी संगति में नन्हों ने ,खूब  अदावत पायी है !

लगता पिछली रात , चाँद ने , अंगारे बरसाए थे !
इस ठहरे पानी में हमने , आज  हरारत  पायी है ! 

हवा,नदी,मिटटी की खुशबू,भी ये बाँट के खायेंगे !  
इन्होने माँ के टुकड़े करने की भी शोहरत पायी है !

घर के आँगन में,बबूल के वृक्ष को,रोज़ सींचते हैं !
इन्हें देखकर , बच्चे सहमें , ऎसी  सूरत  पायी है  !

40 comments:

  1. बहुत सुन्दर .
    नई पोस्ट : मंदारं शिखरं दृष्ट्वा
    नवरात्रि की शुभकामनाएँ .

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  2. सटीक बात कही आपने, बहुत ही सशक्त रचना.

    रामराम.,

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  3. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (11-10-2013) को " चिट़ठी मेरे नाम की
    (चर्चा -1395) "
    पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.
    नवरात्रि और विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें

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  4. बेहद ख़ूबसूरत तरीके से कही गई मार्मिक गजल। आपका आभार आदरणीय सतीश सक्सेना जी।

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  5. अपनी धुन के पक्के लोग ऐसे ही होते हैं भाईजी :)

    You might also like: में शहरोज़ साहब वाली पोस्ट खुल नहीं रही है, देखिये तो क्या लोचा है?

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    1. वह पोस्ट अनावश्यक होने के कारण अब हटा दी गयी है , मगर फीड में होने के कारण अभी भी लिंक दिख रहा है !

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  6. हवा,नदी,मिटटी की खुशबू,को भी बाँट के खायेंगे !
    इन्होने माँ के टुकड़े करने,की भी शोहरत पायी है !
    ..........बहुत सार्थक सटीक अभिव्यक्ति ..

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  7. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-

    नवरात्रि / विजय दशमी की शुभकामनायें-

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  8. हवा,नदी,मिटटी की खुशबू,को भी बाँट के खायेंगे !
    इन्होने माँ के टुकड़े करने,की भी शोहरत पायी है !
    सही बात कही है सटीक पंक्तियाँ !

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  9. इस दिनों तो भरपूर प्रोडक्शन हो रहा है साहब :)

    लगे रहिये ...

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  10. बेहद सटीक और सशक्त रचना....

    सादर
    अनु

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  11. बहुत सुन्दर .सटीक .......

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  12. सशक्त रचना...

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  13. क्या बात है सतीश भाई तालिबान (छात्र )होने का मतलब समझा दिया।

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  14. हवा,नदी,मिटटी की खुशबू,को भी बाँट के खायेंगे !
    इन्होने माँ के टुकड़े करने,की भी शोहरत पायी है !

    घर के आँगन में,बबूल के वृक्ष को, रोज़ सींचते हैं !
    इन्हें देखकर , बच्चे सहमें , ऎसी सूरत पायी है !

    क्या बात है सतीश भाई सक्सेना भाई तालिबान (छात्र )होने का मतलब समझा दिया। अब इंसानों के बस्ती में तालिबान ही होते हैं। आखिरी दो शैरों को हमने थोड़ा यूं लिया है :

    हवा नदी मिट्टी की खुश्बू को भी बाँट के खायेंगे ,

    माँ के टुकड़े करने की कसमें जो इन्होनें खायीं हैं।

    घर आँगन में रोज़ इन्होनें पेड़ बबूल के बोये हैं ,

    इन्हें देखकर ,बच्चे सहमें ,ऐसी सूरत पाई है।

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  15. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार - 11/10/2013 को माँ तुम हमेशा याद आती हो .... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः33 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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  16. हवा,नदी,मिटटी की खुशबू,को भी बाँट के खायेंगे !
    इन्होने माँ के टुकड़े करने,की भी शोहरत पायी है !

    निःशब्द करती बेहतरीन गीत अंतर्मन को झकझोरती

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  17. गम्भीर मामला है ! बात तो सही है लेकिन इतनी आसान नहीं है !

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  18. घर के आँगन में,बबूल के वृक्ष को, रोज़ सींचते हैं !
    इन्हें देखकर , बच्चे सहमें , ऎसी सूरत पायी है
    ...
    फितरत कहाँ बदलती हैं
    ..बहुत सटीक ..

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  19. हवा,नदी,मिटटी की खुशबू,को भी बाँट के खायेंगे !
    इन्होने माँ के टुकड़े करने,की भी शोहरत पायी है !

    सटीक रचना ....

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  20. " शठे शाठ्यं समाचरेत् ।"

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  21. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 12/10/2013 को त्यौहार और खुशियों पर सभी का हक़ है.. ( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 023)
    - पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

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  22. हवा,नदी,मिटटी की खुशबू,को भी बाँट के खायेंगे !
    इन्होने माँ के टुकड़े करने,की भी शोहरत पायी है
    !सुन्दर सटीक खरी खरी बातें,

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  23. विडम्बना और त्रासदी

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  24. लगता पिछली रात , चाँद ने , अंगारे बरसाए थे !
    इस ठहरे पानी में हमने , आज हरारत पायी है !

    सुंदर सटीक सार्थक अभिव्यक्ति ,,,,बधाई ....
    नवरात्रि की शुभकामनाएँ ...!

    RECENT POST : अपनी राम कहानी में.

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  25. dil ke aangaaron se kam nahi bahut badhiya .....

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  26. सुंदर रचना...

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  27. सशक्‍त रचना के लि‍ए बधाई

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  28. इस वक्‍त में भी रहना ही होगा

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  29. सटीक रचना

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  30. sundar rachana prastuti ... abhaar

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  31. सफ़े पलट के तालिब कुछ न पाएगा
    इश्क़ कर के देख, खुदा मिल जाएगा.

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  32. bahut sunder kavita. padh kar hamesha ki tarah accha laga.

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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