Saturday, October 5, 2013

आखिर कुछ तो बात रही है, कंगूरों मीनारों में - सतीश सक्सेना

इतने  भी बदनाम नहीं हैं , गिनती हो आवारों में !
तुम लाखों में एक,तो हम भी जाते गिने,हजारों में!

माना तुम हो ख़ास,बनाया बैठ के,रब ने फुर्सत में !
हम भी ऐसे आम नहीं जो, बिकते हों बाजारों में !

यूँ  ही  नहीं, हज़ारों बरसों से , ये मेले लगते हैं !
आखिर कुछ तो बात रही है , कंगूरों मीनारों में !

जनता का विश्वास जीतने , पाखंडी घर आये हैं ! 
नेताओं  के मक्कारी , की चर्चा है ,अखबारों में !

यूँ ही राधा नहीं, किसी की धुन में,डूबी रहतीं थीं ! 
कुछ तो ख़ास बुलावा होगा,मोहन की मुस्कानों में !

28 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार - 06/10/2013 को
    वोट / पात्रता - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः30 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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  2. वाह! आनंददायक। बहुत बधाई।

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  3. बहुत ही रोचक...प्रयोगात्मक ग़ज़ल...

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  4. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में शामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {रविवार} 06/10/2013 को इक नई दुनिया बनानी है अभी..... - हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल – अंकः018 पर लिंक की गयी है। कृपया आप भी पधारें और फॉलो कर उत्साह बढ़ाएँ | सादर ....ललित चाहार

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  5. आदर प्रणाम
    बहुत ही खूबसूरत रचना |
    मैं मानता हूँ दिल की गहराईयों से जब भी किसी कों पुकारा जाता हैं ,तो दौड़ा दौड़ा ...आता हैं ,चाहे भगवान ही क्यूँ न हों
    अजय

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  6. यूँ ही राधा नहीं, किसी की धुन में,डूबी रहतीं थीं !
    कुछ तो ख़ास बुलावा होगा,मोहन की मुस्कानों में !
    ....... वाह सतीश जी !
    आपकी यह उत्कृष्ट रचना ‘ब्लॉग प्रसारण’ http://blogprasaran.blogspot.in पर कल दिनांक 6 अक्तूबर को लिंक की जा रही है .. कृपया पधारें ...
    साभार सूचनार्थ

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  7. मुस्कानों में कैसे भेद हो ........मोहन के मुस्कान से राधा हो गई ढोंगी की मुस्कान से ........?

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  8. waah hamesha ki tarah khubsurat ...

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  9. सुन्दर गीत -
    भाव कथ्य अनुपम
    आभार आदरणीय-

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  10. अति सुन्दर ..

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  11. यूँ ही राधा नहीं, किसी की धुन में,डूबी रहतीं थीं !
    कुछ तो ख़ास बुलावा होगा,मोहन की मुस्कानों में !

    एक करोड़ की एक पक्की बात कोई किसी का यूँ ही नहीं हो जाता

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  12. एक से एक बहुत सुन्दर शेर है सभी !

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  13. इतने भी बदनाम नहीं हैं , गिनती हो आवारों में !
    तुम लाखों में एक,तो हम भी जाते गिने,हजारों में i

    वाह ! बहुत सुंदर
    नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनायें-
    RECENT POST : पाँच दोहे,

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  14. यूँ ही राधा नहीं, किसी की धुन में,डूबी रहतीं थीं !
    कुछ तो ख़ास बुलावा होगा,मोहन की मुस्कानों में !

    बहुत सुन्दर...

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  15. बहुत सुन्दर ,हम भी है हजारों में !
    latest post: कुछ एह्सासें !

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  16. बहुत सुन्दर और सटीक...

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  17. माना तुम हो ख़ास,बनाया बैठ के,रब ने फुर्सत में !
    हम भी ऐसे आम नहीं जो, टपके हों असमानों से !

    आप तो बड़े "ख़ास" आम हैं :-)
    बहुत बढ़िया शेर...

    सादर
    अनु

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  18. यूँ ही राधा नहीं, किसी की धुन में,डूबी रहतीं थीं !
    कुछ तो ख़ास बुलावा होगा,मोहन की मुस्कानों में !
    बहुत सुन्दर शेर
    सुरेश राय
    कभी यहाँ भी पधारें और टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें
    http://mankamirror.blogspot.in

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  19. बहुत सुन्दर रचना

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  20. सटीक और नायाब शेर, हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  21. माना तुम हो ख़ास,बनाया बैठ के,रब ने फुर्सत में !
    हम भी ऐसे आम नहीं जो, टपके हों असमानों से !

    bahut sundar bhavpoorn prastuti ...abhaar

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  22. यूँ ही राधा नहीं, किसी की धुन में,डूबी रहतीं थीं !
    कुछ तो ख़ास बुलावा होगा,मोहन की मुस्कानों में !
    लाजबाब !

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  23. बात तो राधा में भी कुछ रही होगी जो मोहन के अधरों पर मुस्कान है !
    खूबसूरत रचना !

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  24. मोहन की मुस्कान की तरह मनमोहक :-)

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  25. वाह, सच में सच मिल रहा है।

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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