Tuesday, December 10, 2013

हमको अपने से मनचाहे,लोग कहाँ मिल पाते हैं - सतीश सक्सेना

मन में  प्यार जगाने वाले लोग कहाँ मिल पाते हैं !
जीवन साथ निभाने वाले लोग कहाँ मिल पाते हैं !

अम्मा,दादी,चाची,ताई,किस दुनियां में चलीं गयीं , 
बचपन याद दिलाने वाले लोग कहाँ मिल पाते हैं !

महज दिखावे के यह आंसू,आँख में भर के आये हैं,
गैर दुखों  में रोने वाले , लोग कहाँ मिल पाते हैं !

अपने अपने सुख दुःख लेकर इस दुनियां में आये हैं 
केवल सुख ही पाने वाले, लोग कहाँ मिल पाते हैं !

क्यों करते हो याद उन्हें,जो हमें अकेला छोड़ गए, 
दूर क्षितिज में जाने वाले, लोग कहाँ मिल पाते हैं !




25 comments:

  1. बढ़िया है आदरणीय-
    शुभकामनायें -

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  2. कहाँ हैं अब दूसरों के दुःख में दुखी होने वाले लोग...पर नहीं, अब भी हैं.. और उनसे ही सृष्टि सुंदर है..

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  3. हमको अपने से मनचाहे ,लोग कहाँ मिल पाते हैं !
    सारे जीवन साथ निभाने,लोग कहाँ मिल पाते हैं !
    हर मनुष्य को जीवन का सफर अकेले ही तय करना होता है ! संगी, साथी सब मतलब के रिश्ते होते है, हाँ यदि मनचाहा साथ हो तो यह सफर थोडा आसानी से कट जाता है !

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  4. आज व्यथा और कल की कथा को उकेरते गीत
    सच कहा आपने सुप्रभात संग प्रणाम

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  5. क्या किया जा सकता है , जो मिला है, उसी में संतुष्ट रहा जाए :)

    लिखते रहिये।

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  6. अपने अपने सुख,दुःख लेकर इस दुनिया में आये हैं
    केवल सुख ही पाने वाले, लोग कहाँ मिल पाते हैं !
    सुंदर रचना है |सुख दुख जीवन के दो पहलू ...साथ साथ चलते हैं ये बात तो सच है पर अभी भी दुनिया में अच्छे लोग ज़रूर हैं ...अनीता जी की बात से सहमत ....

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  7. बहुत सही कहा.

    रामराम.

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  8. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  9. अपने अपने सुख,दुःख लेकर इस दुनिया में आये हैं
    केवल सुख ही पाने वाले, लोग कहाँ मिल पाते हैं .....बहुत सही..............

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  10. महज दिखावे के यह आंसू,आँख में भर के आये हैं ,
    गैरों के संग रोने वाले , लोग कहाँ मिल पाते हैं ...

    सच में आज ऐसे लोग नहीं मिलते जो दूसरों के दुख में आंसू बहाते हैं ...

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  11. अपने अपने सुख,दुःख लेकर इस दुनिया में आये हैं
    केवल सुख ही पाने वाले, लोग कहाँ मिल पाते हैं !
    बहुत सुन्दर ! यही सच है !
    नई पोस्ट भाव -मछलियाँ
    new post हाइगा -जानवर


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  12. महज दिखावे के यह आंसू,आँख में भर के आये हैं ,
    गैरों के संग रोने वाले , लोग कहाँ मिल पाते हैं !

    दिल को छू जाने वाली कविता,जीवन का सच ......
    आखिर दो लाइन्स तो बहुत ही बढ़िया हैं .....

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  13. मनचाहे लोगों से मिलना अगर जो संभव हो पाता
    मन भाग-भाग उनके पीछे उस पार ही साथ निकल जाता ....

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  14. महज दिखावे के यह आंसू,आँख में भर के आये हैं ,
    गैरों के संग रोने वाले , लोग कहाँ मिल पाते हैं !
    बहुत बढ़िया आदरणीय .. बहुत ही सुन्दर भावनाओं को गूंथा है ..

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  15. कैसे बाटूँ प्रेम असीमित,
    सब के सब घट उल्टे ही हैं।

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  16. बहुत सुन्दर रचना.... फूल तो मुश्किल से मिलते हैं..कांटो के साथ ही निबाह करके चलना होता है.

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  17. मिल तो जाते हैं लेकिन एक दिन साथ छूट ही जाता है !

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  18. लाजवाब-कुछ ऐसे भी हैं जो क्षितिज पर भी नहीं गए यही मुह फुलाये बैठे हैं :-( उनका क्या कीजै ?

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  19. बहुत अच्छा एक कमी सी लगी मुझे बेबाक कहूँ तो कई जगह तुक के चक्कर में भाव गड़बड़ा गए हैं |

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  20. bahut hi achchhi lines,vry touchy

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  21. दूर क्षितिज में जाने वाले, लोग कहाँ मिल पाते हैं !
    यही तो जीवन का सबसे दुखद पहलू है :(

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  22. दुनिया से जानेवाले कहाँ लौट के आते हैं ,जितना भी बुला लो ,यही सत्य को कोई न जान पाया ना ही झुठला सका।

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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