Sunday, December 8, 2013

पुरवाई में तुमको कैसे , वही पुरानी चोट दिखाएँ - सतीश सक्सेना

लोकतंत्र में बेशर्मी से, धन की, लूट खसोट दिखाएँ !
धन के आगे बिकने बैठे, कितने काले कोट दिखाएँ ! 

जिन्हें देखकर दर्द उभरता, कैसे हंस कर गले लगाएं !
पुरवाई में  तुमको  कैसे, बड़ी पुरानी  चोट दिखाएँ !

लम्बी दाढ़ी, भगवे कपडे, तुम कैसे पहचान सकोगे !
भव्य प्रभामंडल के पीछे,कैसे तुमको खोट दिखाएं !

हमको अखबारी लगता है,भिक्षुक धनवानों की दूरी 
सिर्फ उन्हें झोपड़ बस्ती में,थोक में रहते वोट दिखाएं !

खद्दर पहने हाथ जोड़ कर,सब की सेवा करने आये !   
जब भी काम कराना चाहें,इनके आगे नोट दिखाएँ !

18 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति । मनोहर शब्द-चयन । रोचक-रचना ।

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  2. सुन्दर कटाक्ष ........

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  3. अच्छा व्यंग्य

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  4. नोट दिखाने के नतीजे भी आने लगे हैं..!!

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  5. बहुत सुंदर !
    नोट से नोट
    मिलाते चलो
    जिससे नहीं
    हो सकता
    दो रुपये की
    मूंगफली ले
    सड़क पर छिलके
    उड़ाते चलो :)

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  6. आप की ये सुंदर रचना आने वाले सौमवार यानी 09/12/2013 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित है...
    सूचनार्थ।

    एक मंच[mailing list] के बारे में---

    अपनी किसी भी ईमेल द्वारा ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजकर जुड़ जाईये आप हिंदी प्रेमियों के एकमंच से।हमारी मातृभाषा सरल , सरस ,प्रभावपूर्ण , प्रखर और लोकप्रिय है पर विडंबना तो देखिये अपनों की उपेक्षा का दंश झेल रही है। ये गंभीर प्रश्न और चिंता का विषय है अतः गहन चिंतन की आवश्यकता है। इसके लिए एक मन, एक भाव और एक मंच हो, जहाँ गोष्ठिया , वार्तालाप और सार्थक विचार विमर्श से निश्चित रूप से सकारात्मक समाधान निकलेगे इसी उदेश्य की पूर्ति के लिये मैंने एकमंच नाम से ये mailing list का आरंभ किया है। आज हिंदी को इंटरनेट पर बढावा देने के लिये एक संयुक्त प्रयास की जरूरत है, सभी मिलकर हिंदी को साथ ले जायेंगे इस विचार से हिंदी भाषी तथा हिंदी से प्यार करने वाले सभी लोगों की ज़रूरतों पूरा करने के लिये हिंदी भाषा , साहित्य, चर्चा तथा काव्य आदी को समर्पित ये संयुक्त मंच है। देश का हित हिंदी के उत्थान से जुड़ा है , यह एक शाश्वत सत्य है इस मंच का आरंभ निश्चित रूप से व्यवस्थित और ईमानदारी पूर्वक किया गया है। हिंदी के चहुमुखी विकास में इस मंच का निर्माण हिंदी रूपी पौधा को उर्वरक भूमि , समुचित खाद , पानी और प्रकाश देने जैसा कार्य है . और ये मंच सकारात्मक विचारो को एक सुनहरा अवसर और जागरूकता प्रदान करेगा। एक स्वस्थ सोच को एक उचित पृष्ठभूमि मिलेगी। सही दिशा निर्देश से रूप – रेखा तैयार होगी और इन सब से निकलकर आएगी हिंदी को अपनाने की अद्भ्य चाहत हिंदी को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाना, तकनिकी क्षेत्र, विज्ञानं आदि क्षेत्रो में विस्तार देना हम भारतीयों का कर्तव्य बनता है क्योंकि हिंदी स्वंय ही बहुत वैज्ञानिक भाषा है हिंदी को उसका उचित स्थान, मान संमान और उपयोगिता से अवगत हम मिल बैठ कर ही कर सकते है इसके लिए इस प्रकार के मंच का होना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हमारी एकजुटता हिंदी को फिर से अपने स्वर्ण युग में ले जायेगी। वर्तमान में किया गया प्रयास , संघर्ष , भविष्य में प्रकाश के आगमन का संकेत दे देता है। इस मंच के निर्माण व विकास से ही वो मुहीम निकल कर आयेगी जो हिंदी से जुडी सारे पूर्वग्रहों का अंत करेगी। मानसिक दासता से मुक्त करेगी और यह सिलसिला निरंतर चलता रहे, मार्ग प्रशस्त करता रहे ताकि हिंदी का स्वाभिमान अक्षुण रहे।
    अभी तो इस मंच का अंकुर ही फुटा है, हमारा आप सब का प्रयास, प्रचार, हिंदी से स्नेह, हमारी शक्ति तथा आत्मविश्वास ही इसेमजबूति प्रदान करेगा।
    ज आवश्यक्ता है कि सब से पहले हम इस मंच का प्रचार व परसार करें। अधिक से अधिक हिंदी प्रेमियों को इस मंच से जोड़ें। सभी सोशल वैबसाइट पर इस मंच का परचार करें। तभी ये संपूर्ण मंच बन सकेगा। ये केवल 1 या 2 के प्रयास से संभव नहीं है, अपितु इस के लिये हम सब को कुछ न कुछ योगदान अवश्य करना होगा।
    तभी संभव है कि हम अपनी पावन भाषा को विश्व भाषा बना सकेंगे।


    एक मंच हम सब हिंदी प्रेमियों, रचनाकारों, पाठकों तथा हिंदी में रूचि रखने वालों का साझा मंच है। आप को केवल इस समुह कीअपनी किसी भी ईमेल द्वारा सदस्यता लेनी है। उसके बाद सभी सदस्यों के संदेश या रचनाएं आप के ईमेल इनबौक्स में प्राप्त कर पाएंगे कोई भी सदस्य इस समूह को सबस्कराइब कर सकता है। सबस्कराइब के लिये
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    [आप सब से भी मेरा निवेदन है कि आप भी इस मंच की सदस्यता लेकर इस मंच को अपना स्नेह दें तथा इस जानकारी को अपनी सोशल वैबसाइट द्वारा प्रत्येक हिंदी प्रेमी तक पहुंचाएं। तभी ये संपूर्ण मंच बन सकेगा

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  7. लोकतंत्र में बेशर्मी से धन की, लूट खसोट दिखाएँ !
    धन के आगे घुटनों बैठे , कितने काले कोट दिखाएँ !
    बिलकुल सहमत हूँ इस बात से लेकिन कुछ लोगों के लिए अभी भी धन ही सब कुछ नहीं है
    एक बात गर्व से कहना चाहती हूँ अभी कुछ दिन पहले "भारतीय संस्कृति निर्माण परिषद्
    हैदराबद ने इनको सिविल लाईन में अपनी ईमानदारी के लिए "आचार्य चाणक्य सदभावना पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, काले कोट में एखाद अच्छे व्यक्ति भी होते है :)

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  8. हमको अखबारी लगता है, जल घटने का शोर शराबा
    चलो इंडियागेट में तुमको,जल में चलती बोट दिखाएँ !
    हमारे गाइड ने सिर्फ दूर से ही इंडिया गेट दिखाया कहने लगा समय कम है
    जल में चलती बोट नहीं देख पाये !
    सभी सार्थक पंक्तियाँ अलग अलग अंदाज में है !

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  9. बहुत उम्दा भाव..बेहतरीन रचना ...

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  10. हमको अखबारी लगता है, जल घटने का शोर शराबा
    चलो इंडियागेट में तुमको,जल में चलती बोट दिखाएँ !

    पूरा देश जानता इनको , जग की सेवा करने आये !
    जब भी काम कराना चाहें,इनको आकर नोट दिखाएँ !

    behatarin bhawon ki abhiwyakti naman aapake sach ko bayan karane ko

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  11. रोचक-रचना ....सुन्दर प्रस्तुति

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  12. वाह...बहुत उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

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  13. बढ़िया लिखा है सतीश जी |

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  14. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार -

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  15. दूसरा शेर बढ़िया लगा |

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  16. बहुत सटीक और मारक.

    रामराम.

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  17. सटीक चोट,मारक शब्द ,सुथरी अभिव्यक्ति

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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