Thursday, March 13, 2014

सोने जैसे दिल वाले ही कविता सुनने आयेंगे -सतीश सक्सेना

बेतुल में विवेक जी के आवाहन पर , पहली बार कविमंच पर गया था एवं यह जानकार अभिभूत था कि विवेक जी को यह भरोसा था कि कवि और कविता समाज को बदलने की सामर्थ्य रखती है अतः आवश्यकता है कि कवि की मर्यादा को वह सम्मान दिया जाए जिसके वह योग्य है ! 

इस रचना के प्रेरणा श्रोत विवेक जी हैं अतः यह रचना उनकी  विचारधारा आनंद ही आनंद को समर्पित है …. 

निर्मल औ निष्कपट संत ही कविता सुनने आएंगे  
प्रेमी, ज्ञानवान, अनुरागी, कवि से मिलने आएंगे !

संवेदनहीन ह्रदय गीतों के साथ बैठ क्या पाएंगे !
केवल शुद्ध विचारों वाले, प्रीति सीखने आएंगे !

सरस्वती का ऋण कवियों पर गीतदान दे जाएंगे
आस्था और श्रद्धा का घर से अर्थ सीखने आएंगे !

भुला व्यथा,प्रतिबंध,समय को संवेदना सिखायेंगे !
गीतों के माध्यम से मानव ,प्यार सीखने आएंगे !

बहुत शीघ्र कविमंच देश में,खोया गौरव पायेंगे !
व्याकुल मानव,राहत पाने, गीत खोजने आएंगे !

20 comments:

  1. वाह ! बढ़ती व्यावसायिकता के दौर में यह नया प्रयोग है। विवेक जी साधुवाद के पात्र हैं।

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  2. निर्मल मन को रखने वाले, कविता सुनने आयेगे !
    आस्था,श्रद्धा,धैर्य हमेशा, कवि से मिलने आयेंगे !

    वाह ! बहुत सुंदर संदेश देती पंक्तियाँ...

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  3. कवि और समाज अन्योन्याश्रित है
    कविता जरुर बदलाव लाती है
    सुन्दर रचना !

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  4. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (14.03.2014) को "रंगों की बरसात लिए होली आई है (चर्चा अंक-1551)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें, वहाँ आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  5. कवि और कविता समाज को बदल पाएं या नहीं , पता नहीं. लेकि‍न हां, नौशाद ज़रूर याद आते हैं जि‍नसे कि‍सी ने संगीत की उपयोगि‍ता पूछी तो उनका कहना था कि‍ मि‍यां आपने संगीत से जुड़े कि‍तने लोगों को अपराधी पाया है. रचनाकर्म की अपनी जगह है. नि‍श्‍चय ही.

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  6. जब ऐसे कवि हों और कवि के अन्दर लगातार समाज को दर्पण दिखाने का साहस और सामर्थ्य हो तो समाज उनकी कविताओं छिपे सन्देश से कैसे अछूता रह सकता है!!

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  7. हम भी आपकी कविता की खोज में सदा ही यहाँ आते हैं, और संतुष्ट हो जाते हैं।

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  8. kalam ki shakti aparampaar hai .....bahut sundar khawahish ...aamin .....

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  9. लोककल्याणकारी सृजन इसे कहते हैं ।

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  10. क्लास और मास में अंतर तो रहेगा ही...

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  11. सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम्: यही वह संदेश है जिसे काव्य वहन करता है ,जसके लिए कवि सतत प्रयत्नशील रहता है - ऐसा ही हो !

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  12. काश कवि सम्‍मेलनों में कविता का दौर वापस आए।

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  13. badhai aur shubhkamna ! is se pahle aap vishwa pustak mela nai dilli me lekhak manch se bhi kavita path kar chuke hain ! maine suna hai aapko

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  14. बहुत बढ़िया प्रस्तुति
    सच है लेखक की कलम में समाज बदलने की सामर्थ्य रहती हैं।।।

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  15. सरस्वती का ऋण लेकर,कवि गीतदान दे जायेंगे !
    सम्मोहक,शालीन,अलंकृत,करुणा सुनने आयेंगे !

    प्रणाम भाई साहब सरस्वती कि कृपा बनी रहे

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  16. हम भी पढ़ने आ गए. होली की शुभकामनायें!

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  17. wah...sundar shabd sandesh dete hue...suthre bhav...

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- सतीश सक्सेना

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