Friday, April 11, 2014

नेतृत्व विहीन समाज और ताकतवर मीडिया -सतीश सक्सेना

           बरसों हो गए, भारतीय मीडिया में, देश की किसी उपलब्धि की चर्चा नहीं सुनायी पड़ी , इस बीच देश ब्रिक देशों में आकर अग्रणीय चार देशों में शामिल हुआ , देश में फोरेक्स रिज़र्व , अमेरिका से भी अधिक हुआ , एटोमिक वारहेड से लेकर, 5000 km से अधिक दूरी पर मार करने वाली अग्नि -५ का प्रक्षेपण, एटॉमिक पॉवर संचालित पनडुब्बी एवं ४०००० टन से अधिक वजन वाला विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर या क्रायोजेनिक इंजिन का स्वदेश में विकास हो , हमारी मीडिया ने, इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी इनकी जगह टी वी पर छाये रहे,नेताओं के चारित्रिक पतन और भ्रष्टाचार के किस्से, और न्यूज़ चैनल इन सच्चे झूठे, करप्शन केस दिखा दिखा कर, मालदार बनते रहे !

           साफ़ लग रहा था कि कैसे देश की जनता में यह भर दिया जाए कि देश नेतृत्व विहीन है और अगर बैसाखियों के सहारे चलते, सत्ता पक्ष को तुरंत नहीं हटाया गया तो देश रसातल में चला जाएगा ! टमाटर,प्याज ,पेट्रोल,डीज़ल की कीमतों में वृद्धि से लेकर खा गए ,खा गए का शोर शराबा इतना था कि हमारे दुश्मन देशों द्वारा हमें बदनाम करने के प्रयास, मीलों पीछे रह गए ! सारे विश्व को यह महसूस हो गया कि हम एक महाभ्रष्ट देश के,दयनीय निवासी हैं !

          इस शोर शराबे में तालियां पीटते, विकल्प में जो लोग खुद को सत्ता का अधिकारी बता रहे थे वे वही सफ़ेद कपडे, सफ़ेद जूते और मोटी तोंद वाले लोग थे, जैसे सत्ता में बैठे हुए थे जिन्हें जनता नेता जी के रूप में खूब पहचानती थी, फर्क बस इतना था कि चुनाव चिन्ह अलग अलग थे !

           लगातार चोर चोर सुनती अनपढ़ जनता को, आखिरकार सत्ता धारी, चोर दिखायी देने लगे और विपक्ष में कई बरसों से बैठी भूखी प्यासी, दूसरी पार्टी के लिए, तथाकथित संत जैसे लगते नेताओं को प्रोजेक्ट करने का यह सबसे बड़ा मौका लगा ! टीवी चैनलों की पौ बारह हो गयी,अपने अपने काम कराने वाले धनपतियों के पास, पैसे की कोई कमी नहीं थी !

           अनपढ़ भीड़ को सबसे अधिक प्रभावित, धन के लिए हाथ पैर मारते टेलीविजन मीडिया ने ही किया है और इन्होने वह सब जनता को परोसा जो सत्ताधारियों  से गहरी वितृष्णा और नफरत पैदा करे और सहजता से वह कामयाब भी रही !

            कमजोर राजनैतिक आधार, असहाय सा खड़ा रहा सब देखता रहा , मीडिया को काबू करने का न साहस था और न भीड़ जैसी देसी मानसिकता वाले, जन सैलाब का साथ ! अगर किसी ने बढ़िया से बढ़िया काम को मिटटी में मिलाने का उदाहरण देखना हो तो इस देश में आकर देख सकता है सिर्फ तालिया बजाना शुरू करिये और ५ साल तक बजाते रहिये , चोर चोर कहते रहिये और जनता अगली बार आपको ही चुनेगी !

            पक्ष और विपक्ष द्वारा एक दुसरे पर भ्र्ष्टाचार के आरोपों  और मीडिया द्वारा चटपटा बना कर विश्व जनमत में परोसने की बदौलत, देश का स्वाभिमान एवं आत्मविश्वास लगभग ख़त्म कर दिया गया है और अब उसे पुराना सम्मान विश्व की नज़रों में दिलाने में बरसों लगेंगे, चाहे सत्ता  किसी भी पार्टी की आये !

( आज बी एस पाबला जी ने मेल द्वारा इस पोस्ट के रायपुर में छापने की सूचना दी , आभार उनका )

9 comments:

  1. हर शाख को आबाद कर दिया है मैंने
    फिर भी कुछ कमी रह गई होगी कहीं
    अब तो कोई कहता भी नहीं है
    बात करना 'उलूक' की बहुत दूर की
    एक बात जैसी हो गई कोई बात नहीं :)

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  2. agree with you .very nice article .

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  3. आपके पास नेता वही हैं...बावन पत्ते की तरह काम से काम उन्हें फेंट तो सकते हैं...हर पांच साल पर ही सही...

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  4. सटीक टिप्पणी

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  5. बिल्कुल सही कहा. हालात बदतर होते जा रहे हैं. सबके सब एक जैसे. सटीक लेख, शुभकामनाएँ!

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  6. अमेरिका हमारा आदर्श नहीं है । मैं सोचती हूँ सतीश जी ! वाकई में अ‍ॅग्रेज़ों की गुलामी ने हमारी रगों में इस कदर गुलामी भर दी है कि हम जागने के लिए तैयार ही नहीं हैं , हम सूरज को देखे बिना ही उसकी आलोचना कर रहे हैं । हमारे वैज्ञानिक तो अपना काम कर ही रहे हैं और करते रहेंगे पर इस समय देश परिवर्तन चाह रहा है । एक और चिन्तनीय बात यह है कि दोनों दलों की तुलना इसलिए नहीं हो सकती क्योंकि एक को हम 60 बरस से देख रहे हैं और दूसरे को 6 बरस , यह तो सरासर अन्याय है न ? दोनों दलों के स्तर में ज़मीन-आसमान का अन्तर है । मुझे पूरा विश्वास है कि भारत 2019 तक पुनः विश्वगुरु के पद पर , प्रतिष्ठित होगा । हम सब इसके साक्षी होंगे । शुभमस्तु ।

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    Replies
    1. स्वागत है !
      मंगलकामनाये आपकी आशाओं को !

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  7. कोई सटीक टिप्पणी नहीं सूझी सिर्फ पढ़कर जा रही हूँ !

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  8. माँ की दवा,को चोरी करते,बच्चे की वेदना लिखूंगा !

    i do not have deeper words than these

    May god bless you.

    K K Garg.

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एक निवेदन !
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- सतीश सक्सेना

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