Thursday, April 3, 2014

लालची राजनैतिक झंडेबरदार -सतीश सक्सेना

आज कल राजनीतिक नेताओं के झंडेबरदार ,बहुत अधिक क्रियाशील हैं , देश में ४-५ प्रमुख पार्टियों के प्रचार के लिए,नेताओं के इन एजेंटों को, आप फेसबुक पर, मुंह से झाग निकालते हुए, विपक्षी नेता को गालियाँ देते देख सकते हैं ! जबतक किसी विशेष पार्टी की आप बुराई न कर रहे हों तब तक ठीक हैं अगर आपने कोई खामी बता दी तो ये तुरंत आपको विपक्षी पार्टी का आदमी बताकर, गाली गलौज पर उतर आयेंगे ! 

बदचलन, असंस्कारी एवं भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की सम्मान रक्षा के लिए, यह झंडाबरदार, किसी भी हद को पार करते देखे जा सकते हैं ! पार्टी कार्यकर्ता का तमगा लगाए ये लोग, वास्तव में , पार्टी के झंडाबरदार हैं , जो दुम हिलाए अपने नेता के पैरों में, इस उम्मीद से बैठे रहते हैं कि कभी तो उनका हिस्सा उन्हें मिलेगा और वारे न्यारे होंगे ! इस बीच में अपने राजा को खुश करने के लिए, जब तब , विरोधी पक्ष की निकलती हुई गाडी के पीछे दौड़ते हुए, तब तक भौंकते हैं जब तक खुद राजा उन्हें चुप हो जाने के लिए न कह दे !

आज संतोष त्रिवेदी ने एक बयान दिया जिसमें उन्होंने दुःख व्यक्त किया कि इस कट्टरता के चलते कुछ मित्रों ने उनसे किनारा कर लिया , अपने संवेदन शील मित्र को, मेरा सुझाव था कि अच्छा हुआ जो इन राजभक्तों से तुम्हारी जान छुड गयी वे मित्र क्या जो वैचारिक मतभेद तक न स्वीकार कर सकें !

कट्टर समर्थन अथवा नफरत दोनों ही इन भक्तों में आम है , लगता है सड़क पर चलते वक्त, खाते पीते , परिवार में बैठे हो अथवा बाहर, इन्होने राजनैतिक आकाओं का नाम,अपनी पीठ पर गुदवा लिया है , वे किसी पार्टी के हो सकते हैं मगर उनकी अपनी व्यक्तिगत पहचान नष्ट हो चुकी है अतः वे चाहे कुछ भी हों पर वे संवेदनशील मित्र नहीं हो सकते !

राजनैतिक पार्टियों के इन झंडाबरदारों को यह खूब पता है कि राजनीति में नोट कैसे कमाए जाते हैं और सारे नेताओं का उद्देश्य, राजनीति में आने का क्या है ? करोड़ों रूपये दाव पर लगा, सौ गुना बापस , आने का इंतज़ार करते इन चमचों को, अपना हिस्सा मिलने की पूरी उम्मीद है ! अतः देश भक्ति , वीररस, धर्म और शहीदों के गीत गाते इन देश भक्तों ने कमर कस , अपने उस्तादों के लिए, जिताने हेतु जिहाद का आवाहन कर रखा है !

मूरख जनता खूब लुटी है, पाखंडी सरदारों से !
देश को बदला लेना होगा, इन देसी गद्दारों से !

पूंछ हिलाकर चलने वाले,सबसे पहले भागेंगे !
सावधान ही रहना होगा, इन झंडेबरदारों से !

22 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (04.04.2014) को "मिथकों में प्रकृति और पृथ्वी" (चर्चा अंक-1572)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

    ReplyDelete
  2. वे मित्र क्या जो वैचारिक मतभेद तक न स्वीकार कर सकें | बहुत दिनों के बाद कहीं कमेन्ट कर रहा हूँ क्यूँ की आपके यह उच्च विचार हैं लेकिन सभी कहते हैं ऐसा हकीकत में ऐसा होता नहीं है | यहाँ तो वैचारिक मतभेद में लोग अफवाहें फैलाने लगते हैं | ऐसे ही लिखते रहे |

    ReplyDelete
  3. कटु सत्य .....

    ReplyDelete
  4. लोकतंत्र के महापर्व में सबको इंतजार रहता है इन अवसरों का.

    ReplyDelete
  5. जी झंडे से नहीं बरदारों को देख कर ही तो मन करने लगता है जब ये झूठा है तो इसके वो को कैसे वोट दे दिया जाये :) और अगर हम पूँछ हिलाना भी चाहें तो भगा नहीं खदेड़ दिये जायेंगे ।

    ReplyDelete
  6. बहुत सही कहा....

    ReplyDelete
  7. माट्साब की व्यथा उचित है... लेकिन जैसा कि मैंने वहाम भी कहा था कि उसका कारण सिर्फ वह नहीं है जो उन्होंने बताया है... यदि हम यह मानकर चलें कि हर व्यक्ति की अपनी अपनी वैचारिक स्वतंत्रता है जिसमें राजनैतिक विचारधारा भी एक है और हमें उसका सम्मान करना चाहिये, तो कोई तकलीफ नहीं होती. उन्होंने कहा कि मोदी का विरोध करने पर उनके भाई उनके विरोध में खड़े हो जाते हैं.. तो उन्हें यह भी सोचना होगा कि काँग्रेस का विरोध करने पर वे भी उसी तरह बिफर पड़ते हैं. इन अवसरों पर आवश्यकता है संतुलन बनाए रखने की. तभी तो मतदान की पद्धति गुप्त मतदान कहलाती है!
    अब हमें ही देख लीजिये, मैं और चैतन्य दिन के 24 घण्टों में कम से हर घण्ते में चार बार ज़रूर बात करते हैं, करीब हैं एक दूसरे के, जबकि राजनैतिक मुद्दों पर कई मतभेद हैं हम दोनों में. त्रिवेदी की चिंता जायज़ है, लेकिन उनके अकेलेपन का (हालाँकि मैं इसे नहीं मानता, उनका भ्रम है) कारण सिर्फ मोदी नहीं हैं!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. सहमत ! अभी थोड़े समय पहले ही उन्होंने काफी समय तक चाय पर बवाल किया था . जब छीछालेदर करने में आप स्वयम शामिल है तो दूसरों पर अंगुली कैसे उठा सकते हैं .
      इस बात पर उनका पक्ष लिया जा सकता है कि वैचारिक मतभेद वर्षों की घनिष्ठ मित्रता पर हावी नहीं होने चाहिए !

      Delete
  8. फेसबुक पर भी ऐसा बहुत देखने मिला है । ऐसे लोगों की समझदारी में भी सन्देह होता है क्योंकि वे दुराग्रह से भरे होते हैं ।

    ReplyDelete
  9. हमारे कई मित्र अलग अलग दलों से हैं, जिनमें ज्यादातर भाजपाई हैं पर दरअसल समस्या मोदीत्व की है। मैं कभी कट्टर कांग्रेसी हुआ करता था पर तब भी विरोधी के तर्क सुनता, समझता था। अब किसी खास दल से लगाव नहीं रहा।भाजपा तो कतई नहीं क्योंकि उसमें वे सारी बुराइयां तो समाहित ही हैं जो कांग्रेस में हैं बल्कि और अतिरिक्त भी।
    रही बात सलिल जी की, मैं कांग्रेस या "आप" को लेकर भी मजबूती से उनकी वकालत करता हूं। बस जो विकल्प हैं उसी के हिसाब से सोचना पड़ता है।
    मैं मोदी या भाजपा की कट्टरता के विरुद्ध हूँ रही बात भ्रष्टाचार की,उसमें किसी का दामन पाक-साफ नहीं है। इसलिए देश के लिए मोदी या भाजपा का फासीवाद कहीं ज्यादा खतरनाक है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. *मजबूत वकालत नहीं करता हूं।

      Delete
  10. जब आलोचना सुनना बंद कर दी जाती है तो ये उदार फासीवाद की पहचान है...इसकी अगली स्टेज कट्टर फासीवाद है, जहां आलोचकों का मुंह ही बंद कर दिया जाता है...

    जय हिंद...

    ReplyDelete
  11. सत्य वचन.. राजनीति के लिए गंभीर होना अच्छी बात है.. पर कट्टर होना पूरे समाज के लिए दुखदायी है..

    ReplyDelete
  12. हमारे यहाँ तो घर में ही डट कर बहस हो जाती है -पर घर तो घर है .

    ReplyDelete
  13. वाकई अब समय आ गया है इनसे मुक्ति पाने का। आपका आवहान प्रेरणीय है

    ReplyDelete
  14. लालची राजनैतिक झंडेबरदार इनके बारे में जितना कहे कम ही लगता है, वैचारिक मतभेद अपनी जगह मित्रता अपनी जगह है , सटीक पोस्ट आज के हालात पर !

    ReplyDelete
  15. राजनैतिक सोच से सामाजिक सोच को जोड़ने से भला नहीं होता। हम दो भिन्न राजनैतिक दलों को वोट दें फिर भी साथ रहें तब आनन्द है।

    ReplyDelete
  16. आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ ... दोस्ती में कभी खटास नहीं आणि चाहिए .... मत भेद दिल भेद नहीं होना चाहिए ....

    ReplyDelete
  17. क्या हुआ इक बात पर बरसों का याराना गया,
    इस बहाने दोस्तों का प्यार पहचाना गया
    (आनंद बख्शी)
    :(
    (अनुराग शर्मा)

    ReplyDelete
  18. पब्लिक सब जानती है कह के नेता को मूर्ख बना रहे हैं...

    ReplyDelete

एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

Related Posts Plugin for Blogger,