Sunday, September 21, 2014

मौत हर वक्त याद रखता हूँ ! - सतीश सक्सेना

सिर्फ इक बात याद रखता हूँ !
आखिरी रात , याद रखता हूँ !

मुझ पे प्यारों के,कर्ज बाकी हैं !
उनकी सौगात, याद रखता हूँ !

कौन जख्मों को सोंच कर रोये !
हर हसीं  रात,  याद रखता हूँ !

मौलवी और पंडितों को नहीं !
भले असरात , याद रखता हूँ !

जो कभी साथ ही न चल पाये
वे भी आघात, साथ रखता हूँ !





27 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना

    सिर्फ इक बात याद रखता हूँ !
    मौत हर वक्त याद रखता हूँ !

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  2. कौन मंदिर की लाइनों में लगे !
    मैं तो अम्मा को याद रखता हूँ !
    bahut khub....

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  3. क्या बात है--कितनी गूढ़ बात,सहज,सरल शब्दों में--

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  4. लम्बी उम्र है आज सुबह ही सोच रहा था कहाँ गायब हो गये हैं जनाब :)
    बहुत सुंदर रचना ।

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    Replies
    1. शुक्रिया सर !
      याद रखने के लिए !

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  5. कौन जख्मों को, सोंच कर रोये !
    सिर्फ खुशियों को याद रखता हूँ !..
    बहुत खूब ... छोटी मगर अन्दर तक जाने वाले शेर ... गहरे शेर ...

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  6. आपकी लिखी रचना मंगलवार 23 सितम्बर 2014 को लिंक की जाएगी........... http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  7. सतीश जी आपकी पंक्ति "कौन मंदिर की लाइनों में लगे !
    मैं तो अम्मा को याद रखता हूँ !" ने बहुत कुछ नही, जीवन की शैली को कह दिया
    बहुत बहुत आभार हम सबको ऐसी प्ररित रचनायें पढवाने के लिये

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  8. गहरी भावाभिव्यक्ति..जो साथ लेकर नहीं चले उन्हें भी साथ रखना यही फितरत तो इंसा के कद को बढा बनाती है।।।

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  9. बहुत सकारात्मक और सार्थक चिन्तन !

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  10. कौन मंदिर की लाइनों में लगे !
    मैं तो अम्मा को याद रखता हूँ !
    bahut khub....SIR

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  11. कौन मंदिर की लाइनों में लगे !
    मैं तो अम्मा को याद रखता हूँ !
    bahut khub....SIR

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  12. @मुझ पे यारों के, कर्ज बाकी हैं !
    एक एक लम्हा याद रखता हूँ !
    मै तो बिलकुल उनके कर्ज याद नहीं रखती
    आखिर मित्र होते किसलिए है :) ??
    सभी सार्थक पंक्तियाँ !

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  13. सिर्फ इक बात याद रखता हूँ
    मौत हर वक्त याद रखता हूँ
    मौत को हर वक्त याद रखने वाले ही शायद जीवन को सही मायने में
    जी पाते है !

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  14. अच्छी व लाजवाब रचना सत्य , धन्यवाद !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )
    आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 23 . 9 . 2014 दिन मंगलवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  15. बहुत सुंदर सोच...

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  16. आज तो आपने हमें हमारे स्वर्गीय पिता जी से मिला दिया... वे कहते थे कि मृत्यु का सतत स्मरण ही अमरत्व का रहस्य है.. और आज आपकी इस ग़ज़ल ने ज़िन्दगी की तमाम सकारात्मक तरंगों को हमारे अन्दर प्रवाहित कर दिया..
    लेकिन दोस्तों के कर्ज़ याद रखना सही बात है बड़े भाई.. लेकिन एक एक लम्हा नहीं, एक एक पाई याद रक्खा कीजिये! नहीं तो कर्ज़ दोस्ती की कैंची साबित ना हो जाए! :) :) :)
    मज़ाक दीगर, वास्तव में प्रेरक ग़ज़ल भाई साहब!

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  17. सार्थक चिंतन

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  18. वाह.. बेहतरीन।।

    ReplyDelete
  19. वाह.. बेहतरीन।।

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  20. मौत को हर वक्त याद रखते हुए घर के सब द्वार खुले रखना जीने का एक उत्तम तरीका है।

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  21. सुंदर रचना

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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