Thursday, March 19, 2015

राजनीति के अंधे कैसे समझें कष्ट किसानों का -सतीश सक्सेना

बुरे हाल मे  साथ न छोड़ें, देंगे साथ किसानों का !
यवतमाळ में पैदल जाकर जानें दर्द किसानों का !

जुड़ा हमारा जीवन गहरा ,भोजन के रखवालों से !
किसी हाल में साथ न छोड़ें,देंगे साथ किसानों का

इन्द्र देव  की पूजा करके, भूख मिटायें मानव की  
राजनीति के अंधे कैसे समझें कष्ट किसानों का !

यदि आभारी नहीं रहेंगे मेहनत और श्रमजीवी के     
मूल्य समझ पाएंगे कैसे इन बिखरे अरमानों का !

चलो किसानों के संग बैठे, जग चेतना जगायेंगे 
सारा देश समझना चाहे कष्ट कीमती जानों का !

(यवतमाळ पदयात्रा १५-१९ अप्रैल २०१५ के अवसर पर )

9 comments:

  1. वहाँ किसे कुछ दिखना है
    जहाँ अंधेरा ही बिकना है :)

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  2. वाह, क्या बात है

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  3. किसानों के लिए सोचने वालेा अब विरले ही बचे हैं। बतौर कवि आपका बेहतरीन प्रयास..... विवेक जी को नमन।

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  4. इन्द्र देव की पूजा करके, भूख मिटायें मानव की
    राजनीति के अंधे कैसे समझें कष्ट किसानों का ...
    कठोर सत्य कहा है ... राजनीति की रोटियाँ सकने वाले इस दर्द को नहीं समझेंगे ... बस भुनाएंगे अपने फायदे के लिए ...

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  5. अपने कठोर परिश्रम से धरती पर भूख का काव्य लिखने वाले उन
    कवियों (किसान) के दुःख दर्द को क्या हम शहरी लोग समझ पाएंगे संदेह है !
    फिर भी एक बेहतरीन प्रयास के लिए आभार, आपका अभियान सफल हो :)
    यही शुभकामनाएं !

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  6. इन्द्र देव की पूजा करके, भूख मिटायें मानव की
    राजनीति के अंधे कैसे समझें कष्ट किसानों का !

    koi nahi jaan paata kisan ka dard....!

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  8. सटीक रचना

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  9. राजनीति के अंधे कैसे समझें कष्ट किसानों का ...
    कठोर सत्य कहा है सटीक रचना

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- सतीश सक्सेना

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