Thursday, March 26, 2015

व्यास का स्मरण कर ऋगवेद का विस्तार लिख दूँ - सतीश सक्सेना

सहज निर्मल मुस्कराहट से धरा गुलज़ार लिख दूँ !
भव्य मंगल दायिनी को, ईश का आभार लिख दूँ !

एक दिन उन्मुक्त मन से पास आकर बैठ जाओ
और बोलो नाम तेरे,स्वर्ग का अधिकार लिख दूँ !

काव्य अंतर्मन हिला दे, शुष्क मानव भावना में ,
समर्पण संभावना को प्यार का उपहार लिख दूँ !

मुक्त निर्झर सी हंसी पर,गर्व पौरुष का मिटा दूँ ,
तुम कहो तो मानिनी,अतृप्त की मनुहार लिख दूँ !

यदि तुम्हे विश्वास हो, अनुराग की गहराइयों का !
व्यास का स्मरण कर,ऋगवेद का विस्तार लिख दूँ !

20 comments:

  1. ATIIIIIIIIII SUNDER...........SADHUWAD. ........SAADAR NAMAN. .......JAI MAA SHAARDE.

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  2. खूब लिखा है , बहुत उम्दा

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  3. यदि तुम्हे विश्वास हो, अनुराग की गहराइयों का !
    व्यास का स्मरण कर,ऋगवेद का विस्तार लिख दूँ !
    ..बहुत खूब..विश्वास पर दुनिया कायम है

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  4. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार- 27/03/2015 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः 45
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें,

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  5. एक दिन उन्मुक्त मन से पास आकर बैठ जाओ
    और बोलो नाम तेरे, स्वर्ग का अध्याय लिख दूँ ---वाह अद्भुत भाव,खूबसूरत शब्द।

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  6. bahtareen ,bahut sunder likha !!

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  7. एक दिन उन्मुक्त मन से पास आकर बैठ जाओ
    और बोलो नाम तेरे, स्वर्ग का अध्याय लिख दूँ !
    सकारात्मक प्रेरणा अक्सर आपके पास ही होती है,
    तभी तो इतने सुन्दर गीत रचे जाते है, बहुत पसंद आयी
    यह रचना !

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  8. समर्पण की सम्भावना के ये स्वर्णिम अध्याय ही तो हैं .मानवीय संवेदना के गायक . जीवन (और दुनिया भी) इसी तरह हरा-भरा रहता है . .

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  9. आह! अद्भुत गान।
    मनु और श्रद्धा का प्रेमालाप स्मरित हो गया।
    ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई।

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  10. आपकी सामर्थ्य - वाह !

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  11. बहुत ही सूंदर...
    साथ में भाषा और भाव की गहरी समझ.
    मज़ा अ गया..

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  12. वाह ! बहुत सुंदर भाव...गंगा जल से पावन और हिम शिखरों से विमल..

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  13. मुक्त निर्झर सी हंसी पर,गर्व पौरुष का मिटा दूँ ,
    तुम कहो तो मानिनी,अतृप्त की मनुहार लिख दूँ !
    यदि तुम्हे विश्वास हो, अनुराग की गहराइयों का !
    व्यास का स्मरण कर,ऋगवेद का विस्तार लिख दूँ !
    वाह्ह बहुत ही खुबसूरत | मन को छू गयी आपकी ये रचना | बधाई

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  14. यदि तुम्हे विश्वास हो, अनुराग की गहराइयों का !
    व्यास का स्मरण कर,ऋगवेद का विस्तार लिख दूँ !
    वाह ! बेहतरीन रचना।

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  15. यदि तुम्हे विश्वास हो, अनुराग की गहराइयों का !
    व्यास का स्मरण कर,ऋगवेद का विस्तार लिख दूँ !

    विश्वास और अनुराग ही तो काव्य का विस्तार करते हैं।
    लीक से हट कर रची गई एक सुंदर रचना ।

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  16. जो सच है वो सच में सच लिख दो :)
    जिसको लिखने की हिम्मत
    किसी में नहीं वो हिम्मत लिख दो
    कटोरों में चिपकी हुई
    च्म्म्मचॉं को छोड़ कर कभी
    कुछ साफ सी सीधी साधी
    प्लेटें भी कभीए लिख दो :)

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  17. माननीय सतीश जी

    आपकी कविताओं को पढ़कर आनंद आ जाता है, आपकी कलम सदैव सृजन के साहस को जीवंत रखे।

    आपका

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  18. Awww... I wish yeh mere liye hota :], Its just TOO GUD!

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  19. Arvind ki chinta ki jaroorat nahin woh sab ko peeche chod dega . sab chota mehsoos karenge uske samne . Har chaal ko badi chaal se maat dega.

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एक निवेदन !
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- सतीश सक्सेना

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