Monday, October 10, 2016

गाल बजाते धूर्त ! देश को क्या दोगे ? - सतीश सक्सेना

अगर तुम रहे कुछ दिन 
भी सरदारी में ,
बहुत शीघ्र गांधी,
सुभाष के गौरव को 
गौतम बुद्ध की गरिमा 
कबिरा के दोहे ,
सर्वधर्म समभाव 
कलंकित कर दोगे !
बड़बोले हो दोस्त सिर्फ धनपतियों के 
नील में रंगे सियार, तुम 
मुझे क्या दोगे ?

दुःशाशन दुर्योधन शकुनि 
न टिक पाएं !
झूठ की हांडी बारम्बार 
न चढ़ पाए,
बरसों से अक्षुण्ण रहा 
था, दुनियां में ,
भारत आविर्भाव, 
कलंकित कर दोगे  !!
भारत रत्न मिले, तुमको मक्कारी में 
कितने धूर्त महान, तुम 
मुझे क्या दोगे ?

है विश्वास मुझे तुम 
जल्दी जाओगे !
बस अफ़सोस यही
अपयश दिलवाओगे 
पंचशील सिद्धांत ,
सबक इतिहासों का  
दोस्त रूस को भुला 
विश्व में जा जाकर ,
बचा खुचा सम्मान समर्पित कर दोगे 
हे अभिनय सम्राट , तुम 
मुझे क्या दोगे ?

8 comments:

  1. दोस्त रूस को भुला
    विश्व में जा जाकर ,
    बचा खुचा सम्मान समर्पित कर दोगे
    हे अभिनय सम्राट , तुम
    मुझे क्या दोगे ?

    ReplyDelete
  2. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 11/10/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    ReplyDelete
  3. Hello ! This is not spam! But just an invitation to join us on "Directory Blogspot" to make your blog in 200 Countries
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    ReplyDelete
  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 12 अक्टूबर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. एक अलग-सी रचना

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  6. करने का कुछ नहीं होता है
    खिसियाहट बहुत ही होती है
    ठंड पड़ती है
    खींच कर
    दिये तमाचे से
    आपके हमेशा
    थोड़ा सा तसल्ली
    सी ही सही
    मगर होती है ।

    ReplyDelete
  7. आज के राजनीति माहोल पे आपके विचारों का स्वागत ...

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  8. बहुत बढ़िया ..सादर _/\_

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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