Thursday, March 30, 2017

हेल्थ ब्लंडर 5 - सतीश सक्सेना

63 वर्ष में, मेरा यह दृढ विश्वास है कि शरीर में व्याधि या बीमारी का कोई उपचार नहीं होना चाहिए , हमारा शरीर व्याधियों को खुद ठीक करने के लिए डिजाईन है हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति इतनी जटिल एवं इतनी शक्तिशाली होती है कि किसी भी शरीर को लगभग 100 वर्ष तक जीवित रखने में समर्थ है , यही नहीं, इसको मजबूत बनाये रखने के लिए किसी भी प्रकार के विशेष, मंहगे , दुर्लभ भोजन, टॉनिक, विटामिन की जरूरत नहीं होती केवल सामान्य हवा, जल, प्राकृतिक भोजन एवं शरीर को एक्टिव रखने के लिए थोड़ा बहुत दौड़ना या पसीना निकलने वाला काम करना आवश्यक है ! जानवरों का दूध उनके बच्चों के लिए है वह इंसानों के लिए नहीं है , माँ का दूध सूखने के साथ ही दांत निकलने की क्रिया पर, शक्तिशाली आरामपसंद मानव ने ध्यान दिया होता तो जानवरों का दूध पीना आवश्यक नहीं मानता !

शरीर का सबसे अधिक सत्यानाश मेडिकल प्रयोगों और "रोग" टेस्टिंग सिस्टम ने किया है , जिसके द्वारा मानव अपने शरीर में हो रहीं सामान्य स्वाभाविक क्रिया प्रतिक्रिया को , बीमारी समझकर उसमें अनावश्यक घुसपैठ करने की कोशिश करता है नतीज़ा शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को कई मोर्चों पर एक साथ लड़ना होता है इससे मानव को स्वस्थ होने में और अधिक समय लगता है ! जटिल मानव शरीर के बारे में हम आजतक जितना भी जान पाये वह शतांश भी नहीं है , उसके बावजूद मेडिकल बिजिनिस शतप्रतिशत अस्वस्थता को सही करने का दावा करता है एवं हम पढ़े लिखे संभावित मौत से भयभीत जाहिल ,
मानव, आंख बंद कर मेडिकल अडवेर्टाइज़्मेंट को अप्रूव करते चले जाते हैं ! पिछले चार सौ वर्षों में मेडिकल साइंस के प्रयोगों ने जितने मानवों की जान ली वह पूरे विश्व की लड़ाइयों और युद्धों से कई गुना ज्यादा है !
63 वर्ष,शक्ति 30 वर्ष की,मेडिकल साइंस नहीं मानेगा 

अफ़सोस कि ऐसा कोई कानून, कहीं नहीं बना जिसमे इन मेडिकल शैतानों को फांसी हो कि इनकी बुरी जानकारी एवं दवा बेंचने की जल्दी होते , लाखो इंसान इन पर गलत भरोसा करते हुए, अपनी जान गवां बैठे ! बढे हुए कोलेस्ट्रॉल की दवाएं बरसों से पूरा विश्व खाता रहा , और इसके होते, हजारों ऑपरेशन किये गए अब जाकर पता चला कि ह्रदय रोग से इसका कोई सम्बन्ध ही नहीं है ! एड्स और कैंसर इसके अन्य उदाहरण हैं , कुछ वर्ष पहले एड्स का अंधाधुंध प्रचार किया गया ऐसा लगा कि पूरा विश्व खतरे में हैं , अफ्रीकन देश तो शायद मनावरहित ही हो जाएंगे , मगर अब सब कुछ शांत है , इसी प्रकार कैंसर के बेकाबू टिश्यू को काबू करने के लिए हमारी प्रतिरक्षा शक्ति उसको एक मजबूत जैली से जकड कर काबू कर लेता है जिसे मेडिकल बिजिनिस, ट्यूमर का नाम देता है ! अगर इन्हें न काटा जाय तो शरीर की प्रतिरोधक शक्ति इसका उपचार कर, शमन करने में कामयाब रहती है ! भारतीय गाँवों कस्बों में हजारों लोग इन ट्यूमर्स के साथ , बरसों से सामान्य काम कर रहे हैं , वे बिलकुल ठीक इसी लिए हैं कि उनकी पंहुच किसी ऑपरेशन थियेटर तक नहीं है और वे मर चुके जिनके भयभीत घर वालों को मेडिकल इंस्टिट्यूट वालों ने बुरी तरह डरा दिया , भयभीत मानव , के मन में यह बैठा दिया है कि कैंसर असाध्य है और अब वह कुछ वर्ष का मेहमान है , बचा खुचा काम इनका ऑपरेशन , जहरीली दवाएं एवं इलाज में लगातार धन की होती कमी रहती है !

इन तथाकथित असाध्य बीमारियों का इन अस्पतालों के पास एक ही इलाज है अधिक से अधिक धन उस पीड़ित व्यक्ति से छीन कर उस डरे हुए व्यक्ति के शरीर में जबरन जहरीले मेडिकल साधन पंहुचाये जाएँ जबकि प्राकृतिक साधन आसान है कि वह इस बीमारी  को निर्भय होकर भुला दे व अपना ध्यान बिना डरे अन्य आवश्यक कार्यों में लगाए जो उसे पूरे करने हैं , रोज प्राणायाम पर बैठकर एकाग्रचित्त होकर अपनी आत्मिक शक्ति का आवाहन करे कि इस अस्वस्थ स्थिति से मैं बाहर निकल रहा हूँ मेरा शरीर और मेरी आत्मा बेहद वलिष्ठ है , इन शक्तिशाली विचारों से अपने आपको हर वक्त घेर कर रखे, शीघ्र देखेगा कि इन पोजीटिव विचारों की ताकत से उस बीमारी का नाम भी नहीं बचेगा !

लगभग २० वर्ष से हर जाड़े में, मुझे लगातार क्रोनिक खांसी के साथ खून आता था , थोड़ा सा बोलते ही आवाज बैठ जाती थी ! सरे निशान कैंसर के थे , दो बार ह्रदय की पल्पिटेशन 300-400 हुई थी पारिवारिक मित्र डॉ ने तुरंत हॉस्पिटल ले जाने को कहा मगर मैं आई सी यू के बेड से भाग आया और  रिटायर मेंट के बाद बढे हुए बीपी के साथ दौड़ने की ट्रेनिंग लेनी शुरू की और मैंने न केवल इन बीमारियों को भगाने में सफलता प्राप्त की बल्कि 63 वर्ष की उम्र में 4 लीटर पसीना बहाते हुए, 21 किलोमीटर आराम से भागता हूँ !

अगर आप आलसी हो गए हैं तो यकीन मानिए आपका शरीर खतरे में है , शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए , पसीना बहना, नियमित आवश्यक क्रिया है अगर आप दिन भर कुर्सी पर या कार में रहते हैं , और शरीर को निष्क्रिय कर रखा है तो आप बीमारियों के शिकार अवश्य होंगे उनका नाम दमा , खांसी , बीपी , डायबिटीज , हार्ट अटैक अथवा कैंसर कुछ भी हो सकता है !

अगर आप इनसे जकड़े हुए हैं और पछतावा है तब उठे कल से शरीर को बिना जल्दबाजी, धीरे धीरे चलने की आदत डालना शुरू करें ! छह महीने में कायाकल्प शुरू होगा और आपके शरीर के सारे अवयब फुर्तीले होकर इन बीमारियों से एक जुट होकर लड़ पाएंगे एवं वे निस्संदेह जीतेंगे !

हमारी दवाओं के नाम याद रखिये आप स्वस्थ ही नहीं रहेंगे बल्कि जीवन को 10 वर्ष और बढ़ा पाएंगे :

-विश्वास अपनी आत्मिक प्रतिरक्षा शक्ति पर 
-मुस्कान एवं हँसी 
-खाने के लिए सामान्य प्राकृतिक भोजन
-बार बार खूब जल पीना
-एक घंटा रोज धीमे धीमें दौड़ते हुए शुद्ध हवा का आनंद जिससे शरीर कोर के आलसी अवयवों में फुर्ती आये 
-सकारात्मक सोंच कि मुझे कुछ नहीं हो सकता , मरना मेरी इच्छा पर होगा !
हार्दिक मंगलकामनाएं !


8 comments:

  1. बिलकुल सही लिखा है आपने
    बिना डॉक्टर और दवा के आज लोगों को लगता है जीना मुश्किल है, क्योंकि जरिया बना लिया है पैसे कमाने का इसे
    आपकी प्रेरक पोस्ट पढ़कर डॉक्टर से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है, धन्यवाद आपका

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  2. मैं तो यही कहूँगी हर व्यक्ति इतनी समझ विकसित कर ले कि अपने लिए क्या
    अच्छा है क्या बुरा है यह खुद तय करे, इससे एक फायदा यह होगा कि दूसरों के सकारात्मक अनुभव खुद के अनुभव को विकसित करने में मदद ही होगी, क्योंकि शारीरिक,मानसिक रचना हर व्यक्ति की भिन्न-भिन्न होती है ! प्रेरक पोस्ट है !

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  3. जय हो। उत्साहवर्धन के लिये आभार।

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  4. आपका कहना - 63 वर्ष में, मेरा यह दृढ विश्वास है कि शरीर में व्याधि या बीमारी का कोई उपचार नहीं होना चाहिए , हमारा शरीर व्याधियों को खुद ठीक करने के लिए डिजाईन है कुछ मामलों में सही हो सकता है, सभी मामलों में नहीं. उदाहरण के लिए, जन्मजात बीमारियों के लिए - जिसमें शल्य चिकित्सा आवश्यक होती हैं, यह पूर्णतः गलत हो सकता है. साथ ही एक्यूट डायरिया में यदि त्वरित चिकित्सकीय उपचार न मिले तो आदमी यूँ ही टें बोल जाए. हाँ, क्रॉनिक बीमारियों - जैसे कि उच्च रक्तचाप आदि में यह सत्य हो सकता है.

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  5. सही कहा आपने

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  6. वाह ! प्रेरणादायक पोस्ट..आभार !

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  7. ये जिन्ददिली ऐसी ही रहे और आप धेरे धेरे और प्रेरित करें लोगों को इसी तरह ...
    कभी कभी रश्क होता है ...

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  8. बहुत प्रभावपूर्ण रचना......
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपके विचारों का इन्तज़ार.....

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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