Monday, July 3, 2017

लेखन क्वालिटी -सतीश सक्सेना

ब्लॉग लेखन में कुछ सक्रियता तो आयी मगर आवश्यकता इस उत्साह को बनाये रखने की है ! हमें विस्तार से विगत का आकलन करना होगा अन्यथा कुछ दिनों में सब जोश ठंडा हो जाएगा !
फेसबुक के शुरू होने के साथ अधिकतर ने ब्लॉग लेखन बंद कर दिया इसके पीछे उन्हें कमेंट का न मिलना या कमेंट सख्या में भारी कमी थी, लोगों का अधिक ध्यान फेसबुक पर था जहाँ आसानी से लाइक और कमेंट मिल रहे थे और वे अधिक इंटरैक्टिव भी थे ! अपनी रचनाओं पर लोगों का ध्यान न देख कर निराशा और अपमान बोध जैसा महसूस हुआ और सबने अपना रुख फेसबुक की ओर कर लिया जहाँ अधिक पहचान मिलने की आशा थी !

मेरे ब्लॉग पर आने वाले कमेंट में 80 प्रतिशत की गिरावट आयी मगर मेरा लेखन इस कारण कभी कम न हुआ , ब्लॉग लेखन का उद्देश्य मेरे लेखन का संकलन मात्र रहा था मेरा विश्वास था कि इसे देर सवेर लोग पढ़ेंगे जरूर , इसमे बनावट से लोगों को प्रभावित करने की चेष्टा रंचमात्र भी नहीं थी !


मेरा अभी भी दृढ विश्वास है कि गूगल के दिए इस मुफ्त प्लेटफॉर्म से बेहतर और कोई प्लेटफॉर्म नहीं है जहाँ लोग अपनी रचनाये सदा के लिए सुरक्षित रख सकते हैं ! सो ब्लॉगर साथियों से अनुरोध है कि वे दिल से लिखें और क्वालिटी कंटेंट लिखें ताकि आज न सही कल आने वाली पीढ़ी उनकी अभिव्यक्ति समझे और पुरानी पीढ़ी को अपने साथ महसूस कर सके !

मंगलकामनाएं आपकी कलम को !
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

28 comments:

  1. बहुत महत्वपूर्ण बात कह दी आपने । दिल से लिखें गुणवत्ता बनाते हुऐ ।

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  2. जी, बिल्कुल सही कहा आपने सर, दिल से रची गयी भावनाएँ सदैव प्रभावशाली होती है। इससे बेहतर प्लेटफार्म नहीं मिलेगा जहाँ अनगिनत साहित्य सुधी जनों का ऐसा
    सानिध्य प्राप्त हो पाये।
    आभार आपके सुंदर विचारों के लिए

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  3. बिल्कुल सही कहा आपने, स्वयं चल पडने से भी धीरे धीरे कारवां बन ही जाता है. शुभकामनाएं.

    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  4. बिल्कुल सही बात कही!

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  5. सही कहा सतीश जी ......हमने भी यहाँ लिखना नहीं छोड़ा कोई आया या नहीं किसी ने पढ़ा या नहीं

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  6. दिल से लिखे हुए की कभी न कभी पूछ-परख जरूर होती हैं, फेसबुक को मैं श्यामपट्ट की तरह मानती हूँ पहले लिखा फिर मिटा दिया या मिट गया।
    बहुत अच्छी प्रस्तुति

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  7. मेरे ब्लॉग पर आने वाले कमेंट में 80 प्रतिशत की गिरावट आयी मगर मेरा लेखन इस कारण कभी कम न हुआ , ब्लॉग लेखन का उद्देश्य मेरे लेखन का संकलन मात्र रहा था मेरा विश्वास था कि मैं देर सवेर लोग पढ़ेंगे जरूर

    100 % Sahi baat kahi aapne...Zindabaad.

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  8. बिलकुल सही कहा है आपने. ब्लॉग लिखने से पूर्व मेरा लेखन कभी भी नियमित नहीं रहा, २०१० से नियमित लिखना शुरू किया और अब तो यह जीवन का अभिन्न अंग बन गया है. फेसबुक से इसकी तुलना नहीं की जा सकती. बहुत बहुत आभार आपकी मंगल कामनाओं के लिए..

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  9. दिनांक 04/07/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...
    आप की प्रतीक्षा रहेगी...

    ReplyDelete
  10. दिनांक 04/07/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...
    आप की प्रतीक्षा रहेगी...

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  11. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (04-07-2017) को रविकर वो बरसात सी, लगी दिखाने दम्भ; चर्चामंच 2655 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  12. सही कहा सतीश जी आपने

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  13. आपकी इस आशा के साथ मैंने भी अपनी आशाएँ जोड़ रखी हैं!

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  14. आपके दृढ़ विश्वास की अनुगामी हूँ ।

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  15. सतत लेखन बहुत महत्वपूर्ण है ,आप का व्यक्तित्व और विचारधारा अनुकरणीय है ,संकल्प और समर्पण आपने कूट कूट कर भरा है | दुर्भाग्यवश मेरा ब्लॉग पर आना कम हो गया था ,पर मै भी कुछ न कुछ लिखता रहा | अब निरंतर मिलूंगा ,स्नेह बनाये रखें

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  16. पढ़ना,लिखना,आर्ट मूवीज देखना ये मेरे प्रिय शौक रहे है :)
    आज भी जारी है,आजकल नई-नई पुस्तके पढ़ने मूवी देखने में अधिक
    ऊर्जा खर्च हो रही, सो लिखने के लिए ऊर्जा ही नहीं बचती, लेकिन
    आप सब ब्लॉगर मित्रों के लेखन का हमेशा इन्तजार रहता है !
    बढ़िया पोस्ट, यूँ ही लिखते रहे !

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  17. फेसबुक की आपाधापी में भी मैं ब्लॉग पर निरंतर लिखता रहा। पाठक जरूर कम हो गए हैं। फिर भी। ब्लॉग किताब सी फील देने लगा है इनदिनों। आपके लेखन का फैन तो मैं शुरू से ही हूँ।

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  18. हमेशा की तरह काम की बात .....बिलकुल सही भाई जी |
    स्वस्थ रहें |

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  19. सतीश जी,बिल्कुल सही कहा आपने कि यदि हम अच्छा लिखेंगे तो लोग उसे जरूर पढ़ेंगे। यही विश्वास हमें प्रोत्साहित करता रहेगा। आपको अनेक शुभकामनाएं।

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  20. ब्लॉग लेखन का उद्देश्य मेरे लेखन का संकलन मात्र रहा था मेरा विश्वास था कि मैं देर सवेर लोग पढ़ेंगे जरूर , इसमे बनावट से लोगों को प्रभावित करने की चेष्टा रंचमात्र भी नहीं थी !

    मेरा अभी भी दृढ विश्वास है कि गूगल के दिए इस मुफ्त प्लेटफॉर्म से बेहतर और कोई प्लेटफॉर्म नहीं है जहाँ लोग अपनी रचनाये सदा के लिए सुरक्षित रख सकते हैं

    सतीश जी, आपके विचार बिल्कुल 'अपने से' ही लग रहे हैं। आपकी यह सरल भाषा ब्लॉग लेखन के लिए एक आकर्षक विज्ञापन है जो कई माननीय लेखकों के हृदय तक पहुंचेगी.... आपको शुभकामनाएँ.।

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  21. सही कहा आपने , सतत लेखन बहुत महत्वपूर्ण है !

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  22. आप हिन्दी ब्लॉगिंग के एक मज़बूत स्तंभ हैंं...आपका दिशा निर्देशन और उत्साह वर्धन ब्लॉगर्स के लिए टॉनिक की तरह काम करेगा...

    जय #हिन्दी_ब्लॉगिंग...

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  23. बहुत बढ़िया सतीश भाई , अरसा हुआ मिले बैठे ,बहुत जल्द हम आप मिल रहे हैं

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  24. सत्य कहा आपने | blog एक सशक्त माध्यम है और हम सभी के प्रयास से पुनः यहाँ लोगों की वापसी होगी ऐसा ही मुझे भी विश्वास है !

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  25. आपकी बात से सहमत हूँ ... आप अपनी इच्छा के लिए लिखें ... अच्छा लगे तो लिखें ... जिसको चाहत होगी वो खोज लेगा ...

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  26. सच,ये सही में बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है रचनाओं के संकलन के लिए । मैंने इसके बारे में बड़ी देर से जाना । अब तो इस महासागर में जब डुबकी लगाती हूँ हर बार नायाब मोती मिलते हैं । मैं बहुत से वरिष्ठ ब्लॉगर्स के ब्लॉग पढ़ रही हूँ कुछ तो 2007 से भी पहले के। यही लगता है कि जीवन भर पढ़ती रहूँ, सीखती रहूँ...
    सबका उत्साह बढ़ाते हैं आप सतीश सर, इस विनम्रता के आगे नतमस्तक हूँ ।

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  27. आपसे सहमत हूँ -आपका लेखन सदा सक्रिय रहने को प्रेरित करता है .

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  28. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/07/25.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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