Sunday, August 13, 2017

अंगदान दिवस पर लम्बी रनिंग के बाद बेहतरीन न्यूट्रीशियस नाश्ता -सतीश सक्सेना

आज अंगदान दिवस है ,हाल में डॉ अमर नदीम की इच्छा अनुसार उनके निधन के बाद परिवार ने उनके शरीर का दान किया, यह एक सुखद एवं स्वागत योग्य कदम है ! बेहद अफ़सोस की बात है कि इतने बड़े देश में अब  तक देहदान के लिए  500 से भी कम लोग ही उपलब्ध हैं !

मैं लगभग 15 वर्ष पूर्व  अपोलो हॉस्पिटल में किसी मित्र को देखने गया था वहां देहदान की अपील देखकर तुरंत फॉर्म भरा और मरने के बाद अपनी देह एवं समस्त अंग सिर्फ इसलिए दान किये ताकि मेरा शरीर मरने के बाद भी किसी के काम आ सके मुझे याद है उस दिन मैं बेहद खुश था लगा कि आज का दिन सफल हुआ और उसीदिन मैंने हॉस्पिटल में रेगुलर ब्लड डोनर के रूप में भी अपना नाम लिखवा था जबसे अब तक हर बर्ष अनजान व्यक्तियों की कॉल पर भी खून देता रहा हूँ ! 

अपने जन्मदिन पर मैं हमेशा कुछ न कुछ दान करने की नियति से घर से निकलता हूँ कई बार अपनी हैसियत से अधिक भी अनजान लोगों या जरूरत मंदों को देता रहा हूँ और ऐसा करके हमेशा भूला हूँ , क्योंकि दान वही जो बदले की आशा में न दिया जाय अन्यथा उसका उद्देश्य ही निष्फल है !

आज सुबह कोच रविंदर की रनिंग Footloose Run में शामिल हुआ , वंडरफुल आयोजन था आज का , रजिस्ट्रेशन मनी 1700 थी मगर उसके बदले हर प्लेयर को मिजुनो रनिंग जूते ( MRP Rs 3999 /=) टाइमिंग चिप एवं बेहतरीन स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता दिया गया ! 
लम्बी दूरी के रनर्स को रनिंग के बाद , फिनिश पॉइंट पर पंहुचने के बाद बुरी तरह एक्सहॉस्टेड शरीर के लिए बेहतरीन और भरपूर नाश्ते की आवश्यकता रहती है और आज की रनिंग के बाद तो खिलाने का जबरदस्त   इंतज़ाम था , क्वैकर के बनाये गए हैल्थी फ़ूड उपमा ,दलिया ,खिचड़ी , साम्भर , इडली ,  के अलावा पाइन एप्पल और ब्लू बेरी योगहर्ट , जूस , एनर्जी ड्रिंक्स , बिस्किट , मेडिकल फैसिलिटी आदि बढ़िया क्वांटिटी में उपलब्द्ध थी ! लगता है इस बार आयोजकों ने दिल खोलकर पिछली सारी शिकायतें थोक में निपटाने का फैसला किया था !
Ref: http://notto.nic.in/

Thursday, August 10, 2017

श्रद्धांजलि डॉ अमर नदीम -सतीश सक्सेना

मोहन श्रोत्रिय की वाल से बेहद दुखद खबर है कि मशहूर शायर डॉ अमर नदीम नहीं रहे ....  

डॉ अमर नदीम एक बेहतरीन संवेदनशील व्यक्तित्व थे उनका अचानक चला जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है , कमजोर ग़रीबों के लिए उठने वाली एक मजबूत आवाज हमेशा के लिए शांत हो गयी , बेहद बुरी खबर  .... 

उनकी एक रचना याद आती है... 

मज़हबी संकीर्णताओं वर्जनाओं के बग़ैर 
हम जिए सारे खुदाओं देवताओं के बग़ैर 

राह में पत्थर भी थे कांटे भी थे पर तेरे साथ 
कट गया अपना सफर भी कहकशाओं के बग़ैर 

श्रद्धांजलि  बड़े भाई, 
आप बहुत याद आएंगे !!

https://puraniyaden.blogspot.in/

http://satish-saxena.blogspot.in/2009/08/blog-post_01.html

Monday, August 7, 2017

अपना दर्द, उजागर करते, मूरख बनते मेरे गीत ! -सतीश सक्सेना

किसी कवि की रचना देखें,
दर्द छलकता,  दिखता है  !
प्यार, नेह दुर्लभ से लगते ,
शोक हर जगह मिलता है !
क्या शिक्षा विद्वानों को दें ,
रचनाओं  में , रोते गीत !
निज रचनाएं,दर्पण मन का, दर्द समझते, मेरे गीत ! 

अपना दर्द किसे दिखलाते ?
सब हंसकर आनंद उठाते !
दर्द, वहीँ जाकर के बोलो ,
भूले जिनको,कसम उठाके !
स्वाभिमान का नाम न देना,
बस अभिमान सिखाती रीत ,
अपना दर्द, उजागर करते, मूरख  बनते  मेरे  गीत !

आत्म मुग्धता,  मानव की ,
कुछ काम न आये जीवन में !
गर्वित मन को समझा पाना ,
बड़ा कठिन, इस जीवन में !
जीवन की कड़वी बातों को, 
कहाँ भूल पाते हैं गीत !
हार और अपमान यादकर,क्रोध में आयें मेरे गीत !

जब भी कोई कलम उठाये 
अपनी व्यथा,सामने लाये ,
खूब छिपायें, जितना चाहें 
फिरभी दर्द नज़र आ जाये
मुरझाई यह हँसी, गा रही, 
चीख चीख, दर्दीले गीत !
अश्रु पोंछने तेरे,जग में, कहाँ मिलेंगे निश्छल गीत  ?

अहंकार की नाव में बैठे,

भूल गए  कर्तव्यों  को 
अच्छी मीठी ,यादें भूले , 
संचय कडवे कष्टों को
कितने चले गए रो रोकर,
कौन सम्हाले बुरा अतीत !
सब झूठें ,आंसू पोंछेंगे , कौन सुनाये , मंगल गीत  ?

सभी सांत्वना, देते आकर 
जहाँ लेखनी , रोती पाए !
आहत मानस, भी घायल 
हो सच्चाई पहचान न पाए !
ऎसी ज़ज्बाती ग़ज़लों को ,
ढूंढें अवसरवादी गीत !
मौकों का फायदा उठाने, दरवाजे पर तत्पर गीत !

एक मित्र को दी गयी सलाह - सतीश सक्सेना


अगर परिवार में कुछ समय से बिना कारण एक घातक लड़ाई का वातावरण तैयार हो चुका हो तो आपस में न लड़कर शांत मन से तलाश करें कि घर में कोई भेड़िया तो नहीं आ गया जिसे आपने कुत्ता समझकर घर की चौकीदारी ही सौंप दी हो !


अगर हम तुम्हें , बिन मुखौटे के पाते ! 
असल देखकर बस दहल ही तो जाते !
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