Wednesday, May 23, 2018

झूठों को ही इस देश में झूठा नहीं कहते -सतीश सक्सेना

अब मुफ्त में सूरज को भी अच्छा नहीं कहते 
इस देश में अच्छे को ही अच्छा नहीं कहते !

ध्रतराष्ट्र पुत्र बन गया सरदार , तभी से  
झूठों को ही इस देश में झूठा नहीं कहते !

बस्ती में जाहिलों की चोर डाकुओं को भी 
भगवा लिवास में कभी लुच्चा नहीं कहते !

बच्चों को भूल पर तो माफ़ कर ही दें मगर 
कम उम्र नर पिशाच को बच्चा नहीं कहते !

सारे डकैत मिल के चोर चोर कह रहे 
अरविन्द को इस देश में सच्चा नहीं कहते !

7 comments:

  1. कल की पोस्ट का फिर से पोस्टमार्टम कर दिये :) बहुत खूब।

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  2. बहुत ख़ूब ...
    करारा व्यंग ... कस के लगाया थप्पड़ आज के माहोल पर ...
    बहुत बधाई ...

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 24.05.2018 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2980 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

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  4. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 23 मई - विश्व कछुआ दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  5. क्या कहने. बहुत खूब. सच्ची बात

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  6. सारे डकैत मिल के चोर चोर कह रहे
    एक डैम सही कहा सतीश जी करारा व्यंग ..

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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