Thursday, September 20, 2018

रनिंग टिप्स - सतीश सक्सेना

-रनिंग सीखे बिना, दौड़ने की कोशिश करना, अधिक उम्र वालों के लिए घातक हो सकता है !
-अधिकतर प्रौढ़ व्यक्तियों या "समझदार" व्यक्तियों को दौड़ना नहीं आता है वे
बच्चों की तरह, हांफते, रुकते, टहलते, दौड़ने का प्रयास करते हैं जिससे उनके
हृदय पर विपरीत असर पड़ता है ! उन्हें लगता है कि रनिंग में सीखने जैसी क्या बात है !
- अगर रनिंग करते समय आनंद नहीं आ रहा तो वह रनिंग आपके हृदय को स्वस्थ नहीं बल्कि कमजोर बनाएगी इसीलिए शरीर को रनिंग सिखानी आवश्यक है कि उसे उसमें आनंद आये !


-अधिक उम्र वालों को स्मूथ रनिंग सीखने में, लगभग 2 से 3 वर्ष लगते हैं जो जल्दबाजी करते हैं उनकी रनिंग जल्द ही बंद हो जाती है !
- मैं 3वर्ष में 25 से अधिक बार हाफ मैराथन के साथ कुल 4285 km दौड़ चुका हूँ और अब भी खुद को रनिंग का जानकार नहीं समझता, मेरा हर नया रन एक नया सबक देता है !
-जब भी दौड़ते समय हांफने लगें मानियेगा कि आप ट्रेनिंग से अधिक तेज दौड़ने का प्रयास कर रहे हैं और शरीर रजिस्ट कर रहा है सो शरीर से जबरदस्ती नहीं करनी !
-आप लगातार 5 मिनट तक न दौड़ें बल्कि 2 मिनट दौड़ें और अगले चार मिनट वाक् करें जब सांस व्यवस्थित हो जाए तब दो मिनट फिर दौड़ें और फिर चार मिनट वाक, यह क्रम दुहराएँ !
-दौड़ते समय शरीर को शक्ति ऑक्सीजन से मिलती है सो दौड़ते समय सांस लेने का एक रिद्म बनता है जिससे मस्तिष्क और फेफड़ों को बेहतर एवं अधिक मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है ! जो सही से सांस नहीं लेते वे जल्दी थक जाएंगे
-दौड़ने से पहले व्यायाम और एड़ी पंजें की स्ट्रेचिंग करें !
-पानी दौड़ के लिए और एक रनर के लिए बहुत आवश्यक है सारे दिन में कम से कम 12 गिलास पानी पियें इससे जोड़ों में लचीला पैन आएगा जो कि लम्बी दौड़ों के लिए बेहद आवशयक है !
-पूरे सप्ताह में आराम देना बहुत आवश्यक है कम से कम दो दिन दौड़ने को आराम दें !
सप्ताह में एक दिन साईकिल चलाने जैसी एक्सरसाइज बेहद आवश्यक है यह उन मसल्स को मजबूत करेगी जो रनिंग के द्वारा उपयोग में नहीं आते !
अगर रनिंग के सबसे आवश्यक टिप जानना हों तो पहले तीन टिप निम्न हैं
१.हायड्रेशन
२.हायड्रेशन
३.हायड्रेशन
अर्थात शरीर में अगर पानी अब्सॉर्व नहीं है तो शरीर दौड़ नहीं पायेगा इसका अर्थ यह नहीं कि दौड़ने से पहले एक बोतल पानी पीकर दौड़ा जाये बल्कि दौड़ने से पहले दिन अधिक पानी पीना है
- जिस दिन आप रनिंग 21 km दौड़ते हुए एन्जॉय कर पाएंगे समझियेगा कि आपकी सारी हार्ट आर्टरी ओपन हो चुकी हैं और याद रखें रनर को डायबिटीज तो हो ही नहीं सकती !

यूरोप भ्रमण और रनिंग -सतीश सक्सेना

यूरोप का ट्रिप ढाई महीने का रहा जो कि 25 सितम्बर को पूरा होगा, इस बार जर्मनी से बाहर खूबसूरत प्राग (चेकोस्लोवाकिया या चेकिया) , इंसब्रुक (ऑस्ट्रिया), वेनिस (इटली),  माउंट टिटलिस ( स्विट्ज़रलैंड) पेरिस ( फ्रांस ) और बार्सिलोना ( स्पेन )
घूमने का मौका मिला ! सिर्फ यूरोप में ही यह सुविधा है कि विभिन्न देशों में जाने के लिए आपको अलग अलग वीसा (फीस 60 यूरो ) अप्लाई  नहीं करना पड़ता ! यूरोप महाद्वीप के 26 देशों ने, अपने नागरिकों को, किसी भी देश में स्वतन्त्रता पूर्वक आने जाने के लिए, पूरी आज़ादी देते हुए अपने बॉर्डर समाप्त कर दिए हैं !

पूरे शेंगेन जोन ( Schengen zone ) में इंटरनेशनल बॉर्डर, मात्र मैप में ही नज़र आता है , 26 देशों के नागरिक बिना किसी पासपोर्ट चेक एवं कण्ट्रोल के एक दुसरे देश में कहीं भी आने जाने के लिए स्वतंत्र हैं ! इसी तरह विश्व के किसी भी देश का नागरिक शेंगेन वीसा के साथ इन 26 देशों में कहीं भी बेरोकटोक घूम सकता है ! यह समस्त देश आपस में बस, ट्रैन और फ्लाइट के माध्यम से जुड़े हुए हैं ! जैसे म्युनिक(जर्मनी) से प्राग(चेकिया), 380 km की दूरी तय करने में, बस का टिकिट 15 euro का है, हाँ बस में बैठने से पहले आपको अपना पासपोर्ट एवं टिकिट ड्राइवर को दिखाना होगा !

यह यात्रा मेरे लिए बेहद आनंद दायक रही क्योंकि मैंने अपने इस विदेश प्रवास में, चाहे वह प्राग का चार्ल्स ब्रिज हो या पेरिस में एफिल टावर के नीचे, सीन नदी का किनारा, बार्सिलोना (स्पेन) का खूबसूरत समुद्री किनारा , या वेनिस की जलभरी गलियां हर जगह दौड़ते हुए पार की ! मुझे याद है कि अपनी जवानी के दिनों में ऐसा करने में एक डर रहता था कि नए देश में रास्ता न भटक जाएँ ! अभी 64 वर्ष की उम्र में बिना परवाह के दौड़ना शुरू करता हूँ 5 km दौड़ने के बाद, जब तक शरीर गर्म होता है तबतक यह छोटे छोटे शहर का दूसरा किनारा नज़र आने लगता है ! मेरी फिलहाल दौड़ने की रेंज लगभग 25 km है उतने में पूरा शहर का चक्कर हो
जाता है सो खोने का कोई गम नहीं !

समय जाते पता नहीं चलता , मैंने सितम्बर 2015 से रनिंग सीखना शुरू किया तब से अबतक 582 बार और इन 582 प्रयासों में मैने अपने 61वें वर्ष के बाद, पिछले तीन वर्षों में, 4285 Km की दूरी दौड़ते हुए तय की ! जबकि पहले साठ वर्ष तक मैंने दौड़ते हुए, 1 km की बात छोड़िये, 100 मीटर की दूरी भी नहीं भाग सका ! मैं 80 वर्ष के यूरोपियन वृद्धों को साइकिल चलाते हुए देखता हूँ तब मैं सोंचता हूँ कि हम लोग अधेड़ होते ही यह क्यों मान लेते हैं कि अब हम इस काम को नहीं कर सकते, अब हमारी उम्र हो गयी है काश हम भारतीय, यह नेगटिव सोंचना बंद करें और मैं कर सकता हूँ इस सोंच के साथ, नया प्रयास आरम्भ करें !

Friday, September 14, 2018

जर्मनी से स्पेन, भोजन एवं स्वाद -सतीश सक्सेना

जर्मन लोगों को मैंने अक्सर ट्रेन या बस में शाम ६ बजे के आसपास नेपकिन में दबाये सैंडविच खाते देखा है , और वे यह बेहिचक करते हैं ! वे अक्सर अपना मुख्य भोजन दिन में खाना पसंद करते हैं उनके भोजन में  साबुत अनाज की ब्रेड , चीज़ ,योगर्ट , भुने मीट के स्लाइस एवं ब्रैटवुस्ट नामक पोर्क या बीफ या टर्की के बने सॉसेज होते हैं ! साथ में सलाद टमाटर एवं अचार (gherkins) एक्स्ट्रा स्वाद देते हैं !

यहाँ लोग नाश्ते में यह लोग अधिकतर ब्रेड टोस्ट , ब्रेड रोल जिसमें शहद, मार्मलेड , अंडे एवं हैम, सलामी एवं सॉसेज लेना पसंद करते हैं , जिसके बाद गर्म कॉफी, कोको या चाय पीते हैं ! कॉफी यहाँ चाय से अधिक लोकप्रिय है !

यूरोप में अधिकतर लोग मीट प्रोडक्ट पर निर्भर होते हैं इनके भोजन में किसी न किसी रूप में मीट, उपलब्ध अवश्य होगा सो हमवेजीटेरियन लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है ! जल्दबाजी में ख़रीदे, रेडीमेड पास्ता एवं टू मिनट नूडल्स पहला  चम्मच खाने के बाद ही फेंकने पड़े !


मगर यूरोप में हम वेजिटेरियन लोगों का सहारा, पीता ब्रेड ( ग्रीक रोटी ) होती है जो अकसर यूरोपियन स्टोर में उपलब्ध रहती है , इसे खरीद कर बटर का उपयोग कर अपना देशी परांठा बनाया जा सकता है ! साथ में आलू उबालकर सूखी सब्जी बनाना अधिक मुश्किल काम नहीं , सहारे के लिए स्टोर्स में तरह तरह के योगर्ट ( दही ) उपलब्ध होता है ! 

म्यूनिख बवेरिया स्टेट की राजधानी है जो अपने बियर गार्डन के लिए मशहूर है , जहाँ खुले में बड़े मैदान में अथवा गार्डन में हजारों लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है और फ्रेश बियर सर्व की जाती है , देखने में यह एक ऐसा खुला रेस्टॉरेंट लगता है जहाँ लोग इकट्ठे होकर किसी राष्ट्रीय त्यौहार पर एक साथ बियर पीकर, ख़ुशी मना रहे हों ! कुछ मायनों में हमारे देश के एक बड़े ढाबे जैसा माहौल होता है मगर एक विशेषता लिए होता है कि हजारों लोगों में से एक भी इंसान जोर से न बोलता है और न झूमता है !

आप किसी भी जर्मन मार्किट में चले जाएँ सड़क किनारे रेस्टुरेंट के फुटपाथ पर कुर्सियों पर बैठे लोग बियर पीते मिलेंगे मगर एक शालीनता और सभ्यता के साथ बिना किसी शोर शराबे के ! मैंने यहाँ हार्ड ड्रिंक्स, शराब, स्कॉच आदि बहुत
कम लोगों को पीते देखी , 80 प्रतिशत लोग बियर और बचे लोग वाइन का सेवन करते देखे हैं ! अगर आप एक दो दिन को यहाँ आएंगे तो जहाँ नजर डालें फुटपाथ पर पड़ी कुर्सियों पर बैठे लोगों के हाथ में बियर का ग्लास देखेंगे मगर एक भी आदमी शराबी व्यवहार करते नहीं दिखेगा !

हाँ, हम जैसे देसी वेजिटेरियन लोग भी मिलेंगे जिन्हें वहां बियर के साथ, उबले अंडे या नमकीन तो मिलने से रही सो विकल्प के रूप में वेज ब्रेड, ऑलिव्स और चीज़ की तलाश करते हैं ! जर्मन बेकरी सबसे अधिक व्यस्त दुकाने हैं जहाँ विभिन्न स्वाद की देश विदेश की नमकीन एवं मीठे ब्रेड , बिस्किट एवं केक उपलब्ध हैं जिनको खाने से मन नहीं भरता !
एक दिन बेहद भूख लगने पर मैंने बाजार से दो शहद की बिस्कुट जिनका वजन ५० ग्राम होगा फिलाडेल्फिया चीज के साथ खायीं तो भूख ऐसे गायब हुई जैसे भरपूर लंच लिया हो ! लाजवाब क्वालिटी के ऐसे फ़ूड प्रोडक्ट हमारे देश में दुर्लभ हैं , इन प्रोडक्ट के साथ अक्सर लोग सूप, कोकोकोला पीना पसंद करते हैं जिन्हें हमारे देश में देशी व्यापारियों ने त्याज्य घोषित कर दिया गया है !
Swimming in Sea  

कैटालोनिया कोस्ट पर बसे बार्सिलोना का नाम, यूरोप के उन बेहद खूबसूरत शहरों में शामिल होता है जो विश्व के टूरिस्ट नक़्शे में विख्यात हैं ! यह शहर नार्थ स्पेन रीजन में, मेडिटेरेनियन समुद्र तट पर , बसा है तथा अपने विशेष कैटलॉन संस्कृति, गौरव तथा व्यक्तित्व के लिए, एक अलग पहचान रखता है !

कल म्यूनिख से बार्सिलोना, स्पेन पंहुचे थे , एयरपोर्ट से ही 5 दिन का होला बार्सिलोना अनलिमिटेड पास (हेलो बार्सिलोना) ले लिया था, अन्यथा टैक्सी से एयरपोर्ट से शहर अपने अपार्टमेंट तक पंहुचने में ही लगभग 5000 रूपये पड़ जाता ! यह
बार्सिलोना टूरिस्ट  पास दो लोगों का 5000 रूपये का पड़ा और इसके द्वारा मैं पांच दिन तक किसी भी वाहन मेट्रो, ट्रेन , बस और ट्राम से पूरे शहर में कितनी ही यात्रायें करने को स्वतंत्र था ! 

मैं , रुकने के लिए होटल न लेकर, पुराने शहर के बीच प्राइवेट अपार्टमेंट लेना पसंद करता हूँ , इनका रेट लगभग होटल जितना ही पड़ता है मगर , अपना ताला चाबी, प्रायवेसी, अधिक जगह, अपना खुद का किचेन , बाथरूम , और बालकोनी का महत्व इस नयी जगह, संस्कृति के लोगों के बीच रहने की सुविधा मिलने के कारण, इनका महत्व अधिक होता है ! बार्सिलोना में यह अपार्टमेंट एयर बीएनबी के जरिये ऑनलाइन लिया था ! अधिकतर अपार्टमेंट पर पूरा पेमेंट पहले ही देना होता है ! वे इसके बाद आपको दरवाजे के इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स का कोड भेजते हैं जिसे द्वार पर डॉयल करने पर बॉक्स ओपन हो जाता है और अंदर आपको चाबी मिलती है जिसके जरिये आप मेन डोर खोल सकते हैं ! 

अंदर आकर सबसे पहले बाथरूम , किचेन एवं बैडरूम का निरीक्षण किया तो पाया टॉवल्स सेट , सोप , चादर , ब्लैंकेट , वाशिंग मशीन , फ्रिज , ओवन , माइक्रोवेव , हॉट प्लेट , कॉफी मशीन, इलेक्ट्रिक प्रेस,  आवश्यक बर्तन आदि के अलावा पांच दिन के लिए, चाय कॉफी के लिए आवश्यक सामान , वर्जिन ओलिव आयल, जूस आदि उपलब्ध था ! सो अन्य मन
मुताबिक सामग्री जुटाने के लिए पहला काम, बाहर मोहल्ले के स्टोर पर जाना और अपनी मन मर्जी की आवश्यक सामान खरीद कर फ्रिज में रखना था !

जर्मनी, ऑस्ट्रिया, इटली, स्विट्ज़रलैंड , फ्रांस, स्पेन  सब जगह शहरी सप्लाई का पानी, पीने योग्य माना जाता है मगर स्वाद मीठा नहीं होता, हम भारतीयों को म्युनिसिपल सप्लाई वाटर में, नाले का पानी, मुफ्त में मिक्स होकर मिलने के कारण, हर घर में आर ओ ( रिवर्स ओसमोसिस )लगाना ही पड़ता है जोकि पीने में मीठा होता है मगर यूरोप के घरों में आर ओ कहीं नहीं देखा !  बाजार में बिकने वाला पानी मिनरल वाटर के रूप में उपलब्ध है जो बेहद मंहगा पड़ता है ! RO का नुकसान एक ही है कि वह पीने के पानी से, मानव शरीर के लिए आवश्यक मिनरल्स जैसे कैल्सियम, मैग्निसियम को भी नष्ट कर देता है जो कि हमारे लिए बेहद आवश्यक हैं शुक्र है कि हमारा शरीर यह मिनरल्स भोज्य सामग्री से आसानी से जुटा लेता है ! दूध, बियर और जूस से अधिक महंगा , आधा लीटर पानी का भाव भी ढाई यूरो है सो अक्सर पानी की जगह बियर से काम चलाने  के लिए तैयार रहना होगा !
बहरहाल यूँ देखने में यूरोप महंगा लगेगा मगर यहाँ कम पैसों में भी आराम से घूमा जा सकता , पूरे दिन का भोजन के लिए 6 से 10 यूरो में काम चल सकता है मगर यदि रेस्टॉरेंट में लंच और डिनर लेना है तो यही खर्चा 40 यूरो तक बैठेगा ! 

Wednesday, September 5, 2018

जर्मनी और राज भाटिया -सतीश सक्सेना

टिकट मशीन 
यूरोप के अधिकतर देशों में नगर उपनगर यातायात के लिए , मेट्रो , ट्राम , बस और ट्रेन उपलब्ध हैं और इसके लिए   बेहतरीन व्यस्था है कि आपको हर जगह अलग अलग एजेंसीज से अलग टिकिट लेने की आवश्यकता नहीं है ! मेट्रो स्टेशन या बस स्टैंड पर लगी ऑटोमेटिक मशीन से लिया गया एक टिकिट हर जगह मान्य है और यह टिकिट आप अपने मोबाइल पर भी ऑनलाइन ले सकते हैं ! म्यूनिख में जहाँ एक स्थान से दुसरे स्थान का एक तरफ का टिकिट, किसी भी साधन से,  2.90 यूरो (250 रूपये ) है वहीँ एक दो जोन के लिए एक सप्ताह का अनलिमिटेड पास 12 यूरो का और पूरे म्यूनिख नेटवर्क में पूरे दिन के लिए, अनलिमिटेड यात्रा पास 24 यूरो का है ! यूरोप में किसी शहर में घूमने के लिए, अगर उसे बेहतर समझना हो तो उस शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले समझना चाहिए , जहाँ आप ठहरे हैं उस स्थान से पॉपुलर रुट के स्टेशन और दिशा याद रखना आवश्यक है बाकी काम आसान हो जाता है ! ड्राइवर युक्त टैक्सी सर्विस बेहद महगीं हैं , 40 km की टैक्सी यात्रा लगभग 6000/=की पडेगी !  


राज भाटिया के साथ 
अगर यूरोप में वास्तविक प्राकृतिक खूबसूरती और रहनसहन का माहौल देखना हो तो किसी गांव में जा कर देखिये आपको आनंद आ जाएगा ! राज भाटिया म्यूनिख से लगभग ४५ km दूर एक गाँव इज़ेन में रहते हैं , उनका आमंत्रण पहले दिन से मेरे पास था मगर जाने का मौका कल मिला जब मैं किसी को छोड़ने एयरपोर्ट गया था और मेरी जेब में पूरे म्यूनिख नेटवर्क का पास था ! मैंने अपने आने के बारे में उन्हें इन्फॉर्म किया तो उनका कहना था कि आप गाँव तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट से न आएं बल्कि मैं आपको लेने आपके नजदीकी स्टेशन श्वाबिन मार्किट तक आ रहा हूँ आप वहीँ पर मेरा इंतज़ार करें ! जब मैं वहां पंहुचा तो राज भाई अपनी ऑडी के साथ इंतज़ार कर रहे थे ! खूबसूरत साफ सुथरे रास्तों से होते हुए जब उनके गांव पंहुचे तो हमारे जैसा गांव तो कहीं नजर नहीं आया समझ ही नहीं आया की प्रकृति का इतना सुंदर नज़ारा और शोर शराबे रहित, शांत जगह जहाँ धूल का नामोनिशान न हो , गाँव कैसे हो सकता है ! अगर हमारे देश में, शहर के नजदीक गलती से भी ऐसे गांव रहे होते तो निश्चित ही वहां बड़े सरकारी अधिकारियों के निवास स्थान बन गए होते और उसे सिविल लाइन्स का नाम दिया जाता क्योंकि शहर के सबसे बेहतरीन एरिया में रहने का हक़ कलक्टर एन्ड कंपनी का ही होता है ! बाकी तो सब कीड़े मकोड़े हैं कहीं भी रह लेंगे  ...... 


हमारे देश में अब अतिथि सत्कार दिखावा और बीते दिनों की बात हो चली है , मगर देश से इतनी दूर , भाटिया दम्पति ने जिस प्यार से विशुद्ध भारतीय भोजन कराया वैसा बहुत कम ही नजर आता है ! भोजन अच्छा तभी लगता है जब वह प्यार से कराया जाय इस मायने में श्रीमती भाटिया साक्षात् अन्नपूर्णा सी लगीं  यूँ भी जर्मनी में किसी भी भारतीय घर में, भारतीय भोजन की उपलब्धता होना आसान नहीं, अधिकतर जगह आपका स्वागत वेस्टर्न नाश्ते या भोजन से होगा क्योंकि यहाँ देशी सामग्री इम्पोर्टेड है और अधिकतर सामान जैसे तेल , देशी घी , हरी मिर्च , मसाले सब तलाश करने के लिए इंडियन स्टोर में ही जाना होगा एवं अत्यंत महंगे (गेंहू का आटा 5किलो 1200 रुपया) भी हैं ! 3000 sqft एरिया में बना उनका साफ़ सुथरा घर बॉलीवुड की फिल्म बनाने योग्य था इतने बड़े घर में धूल और अव्यवस्था का नाम नहीं उसके लिए इन दोनों की जितनी तारीफ की जाय वह कम ही होगी ! 

उसके बाद वे हमें गाँव भ्रमण पर ले गए एक साफ़ सुथरे खेत के बाहर एक छोटे स्टाल पर ताज़ी निकली सब्जियां जिसमें विभिन्न रंग के ऑक्टोपस नुमा कद्दू देखकर हम आश्चर्यचकित थे , सब्जियों पर रेट लिखा था साथ में छोटा सा मनी बॉक्स परन्तु बेंचने वाला कोई नहीं ! आप अपनी मन पसंद सब्जी उठाइये और पैसे बॉक्स में डाल दीजिये कोई देखने वाला नहीं कि आपने पैसे डाले भी कि नहीं  ..... 

एक अन्य जगह अंडे रखे दिखे, यहां भी रेट के साथ मनी बॉक्स था उठाइये, जितने चाहिए और पैसे डाल दीजिये ! आप बेईमानी करना चाहते हैं मुफ्त में ले जाइये कोई आप पर शक नहीं करेगा , सब आपसी विश्वास और भरोसा ! भाटिया जी ने यह भी कहा कि हम अधिकतर समय, घर खुले छोड़ आते हैं कोई ख़तरा नहीं, यहाँ कोई बेईमानी की सोंच भी नहीं सकता ! पुलिस या अन्य सरकारी विभाग रिश्वत लेने अथवा देने की कोई सोंच भी नहीं पाता ! 

इस छोटे से जर्मन गांव में , जब कोई व्यक्ति जब सड़क या पगडण्डी से, कुत्ते के साथ निकल रहा हो तब उसकी जेब में एक
डॉग पूप के लिए थैली यहाँ से लें 
छोटा लिफाफा होगा जिसे वह कुत्ते का पूप कलेक्ट करने के लिए रखता है इसके अलावा पगडण्डी के साथ साथ एक छोटा बक्सा होगा जिससे कोई भी लिफाफा निकाल सकता है किसी भी हालत में, कोई व्यक्ति  कुत्ते की पूप बाहर नहीं फेंकेगा ! 

यहाँ कौन देख रहा  .... वाले शब्द बोलने वाले लोगों के देश से आये हुए मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह सब देखना आश्चर्य के सिवा और कुछ नहीं था  .....

इस गांव में हर रास्ते में फूल और फल लगे देखे जिन्हें सुबह के अँधेरे में आकर भगवान की पूजा के लिए कोई नहीं चुराता ! पके हुए सेब हर घर में  लगे हैं और बाहर भी लटके हैं , इस खूबसूरती की हम अपने यहाँ कल्पना भी नहीं कर सकते , अगर किसी की जेब से टहलते हुए कोई तौलिया रूमाल या मोबाइल गिर जाए तो घबराने की कोई बात नहीं वह अगले दिन सुबह भी वहीँ पड़ा मिलेगा ! इस राम राज्य की कल्पना हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों बरसों से की थी और लगता नहीं कि हमारे देश में जहाँ हर व्यक्ति चतुरसेन पहले है, अब कभी भी पूरी होगी ! पश्चिमी देशों की, बिना उन्हें देखे, समझे, मूर्खों की तरह  जमकर 
उनकी बुराई करते हैं यही हमारी सभ्यता को पहचान बची है ! अगर रामराज्य कहीं है तो वह वाकई इन देशों में है जिन्हें हम गाली देना अपनी शान समझते हैं !

यहाँ की सड़क पर स्पीड लिमिट तोड़ने को कोई कोशिश नहीं करता अगर किसी कैमरे में आ गयी तो जुर्माना जो लगभग १५००० रूपये होगा घर आ जाएगा और सफाई देने की कोई गुंजाइश नहीं ! मानव जीवन को यहाँ बहुमूल्य माना जाता है अगर आप
मुसीबत में हैं तब डिस्ट्रेस कॉल में एम्बुलेंस पंहुचने का समय ३ मिनट और अगर डॉ उपलब्ध न हो तो हैलकॉप्टर एम्बुलेंस तत्काल हाजिर होगी और मुफ्त का इलाज होगा ! राज भाई के 3 हार्ट ऑपरेशन हुए और बिलकुल मुफ्त , बदकिस्मती से आपके घर में बच्चे आपका ख़याल रखने और तीमारदारी करने को उपलब्ध नहीं हों तो नर्स की मुफ्त सेवा है आपका एक पैसा खर्च नहीं होगा ! सारा भारी भरकम बिल का खर्चा इंस्युरेन्स कम्पनियाँ उठाएंगी और बिना वह भी किसी लिखा पढ़ी के, सीधा हॉस्पिटल के साथ  !

शराब पीकर ड्राइविंग करना आपको कम से कम 40000 रूपये से 120000 रूपये तक महंगा पड़ सकता है यहाँ तक कि आपकी साइकिल पर अगर लाइटिंग इक्विपमेंट नहीं लगे हैं तब 2000 रुपया जुर्माना होगा अगर वह रेड लाइट क्रॉस करता है तो 60 यूरो ( 5000 रूपये ) जुर्माना है और पैदल चलने वाले को भी माफ़ी नहीं है , पेडस्ट्रियन क्रॉसिंग पर अगर आपने पैदल चलते हुए जल्दी से रेड लाइट जंपिंग की है तो 400 रुपया देने को तैयार रहिये !

यहाँ घर पर नौकर रखना और मरम्मत करवाना बेहद खर्चीला साबित होगा क्योंकि कामगरों की तनख्वाह बहुत अधिक हैं उनसे व्यक्तिगत काम कराना नया सामान खरीदने जितना पड सकता है अतः घरों में मरम्मत, रिपेयर, पेण्ट आदि खुद करना होता है !
सो यहाँ के लोग कामचोर नहीं है इसीलिए फिटनेस की कोई समस्या नहीं ! साईकिल से बाजार जाना , बगीचे की तथा अपने घर से बाहर की घास काटना, झाड़ू लगाना, बर्तन धोना , घर का फर्श आदि सब कुछ आपको खुद करना होगा वह और बात है कि अधिकतर काम के लिए आप मशीनों का उपयोग करते हैं ! 

राज भाई के घर में इन्होने एक कमरा वर्कशॉप में बदल रखा है , उनके पास हर तरह के टूल्स देखकर पता चला कि समय ने इन्हें हर काम खुद करना भी सिखा दिया इनके घर से निकलते समय एक संकल्प मैंने भी लिया कि अब से घर में अधिकतर काम और रिपेयर खुद करना है जब राज भाई यह कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं ! 

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