Sunday, August 19, 2018

निराशाओं के दौर में जीना कर्तव्य बन जाता है : सतीश सक्सेना

बढ़ती उम्र, घटती सामर्थ्य, अपनों में ही कम होता महत्व, बुढ़ापा जल्दी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ! पूरे जीवन सम्मान से जीते हुए इंसान के लिए, निराशाओं के इस दौर में हँसते हुए जीना कर्तव्य होना चाहिए साथ ही बदलते समय से समझौता कर, अपने कार्यों का पुनरीक्षण करना, लगातार होती हुई गलतियों में सुधार भी, परिपक्व उम्र की आवश्यकता होती है ! 
निराशा बेहद खतरनाक रोल अदा करती है इससे बाहर निकलने के लिए नयी रुचियाँ और उत्साह पैदा करना होगा अन्यथा यह निराशा असमय जान लेने में समर्थ है ! 

गोपालदास नीरज की यह कालजयी रचना मुझे बेहद पसंद है 

जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना,
उन मुश्किलों में मुस्कुराना , धर्म है।

जिस वक़्त जीना गैर मुमकिन सा लगे,
उस वक़्त जीना फर्ज है इंसान का,
लाजिम लहर के साथ है तब खेलना,
जब हो समुन्द्र पे नशा तूफ़ान का
जिस वायु का दीपक बुझना ध्येय हो
उस वायु में दीपक जलाना धर्म है।


जब हाथ से टूटे न अपनी हथकड़ी
तब मांग लो ताकत स्वयं जंजीर से
जिस दम न थमती हो नयन सावन झड़ी
उस दम हंसी ले लो किसी तस्वीर से
जब गीत गाना गुनगुनाना जुर्म हो
तब गीत गाना गुनगुनाना धर्म है।

Sunday, July 29, 2018

आसान यूरोप यात्रा -सतीश सक्सेना

इस बार यूरोप यात्रा का संयोग गौरव की जर्मनी पोस्टिंग के कारण हुआ उसकी इच्छा थी कि पापा और माँ मेरे पास लम्बे समय आकर रहें सो पहली बार घर को लगभग ढाई महीने के लिए छोड़ने का फैसला किया पिछली पोस्ट पर मित्रों का अनुरोध था कि इस यात्रा का विवरण लिखूं सो यह पोस्ट आवश्यक हो गयी है !
यूरोपियन ढाबा पर जौ का रस, मशहूर ब्रेड, ब्रीज़ल के साथ !

-विदेश यात्रा को अधिकतर लोग हौआ मानते हैं और उस पर अक्सर बात करने से या जाने की योजना बनाने से झिझकते ही नहीं बल्कि सोंचने में भी कतराते हैं और इसके पीछे धन का अभाव न होकर अक्सर आत्मविश्वास की कमी ही होती है कुछ अन्य कारण निम्न हैं  ....

- पहला कारण विदेशियों से कम्युनिकेशन में आत्मविश्वास का न होना, अधिकतर का मानना है कि उनकी बेहतरीन फर्राटेदार इंग्लिश समझना और बेहतरीन इंग्लिश में बात करना बहुत मुश्किल है जबकि वास्तविकता इसके उलट है लगभग पूरे विश्व में सामान्य विदेशियों की इंग्लिश काफी कमजोर है अधिकतर जगह पर वे टूटी फूटी इंग्लिश में और हावभाव के साथ ही संवाद करते हैं और तो और हमारी मैडम एयरपोर्ट से लेकर शानदार मॉल तक में धड़ल्ले से अपनी हिंगलिश और हिंदी मिलाकर चमत्कृत करने वाली देसी अंग्रेजी में जर्मन लोगों को समझाने में कामयाब रहीं हैं !

-झिझक का दूसरा कारण विदेश यात्रा में अधिक खर्चे का अनुमान होना होता है जबकि यह कई बार देशी यात्रा से भी कम बैठता है ! दिल्ली से पेरिस या म्यूनिख का एक व्यक्ति के आने जाने का खर्चा लगभग 36000/- है और लगभग 5000 रूपये प्रति दिन में अच्छा होटल मिल जाता  है जिसमें एक समय का खाना शामिल होता है ! इस प्रकार एक मध्यम आय वाले पति पत्नी, सवा लाख रूपये में, ५ दिन के लिए रोम जाकर बापस आ सकते हैं !

-विश्व के किसी भी भाग की यात्रा, बिना जानकारी करना पहले असंभव थी जबकि अब इन यात्राओं को गूगल ने बेहद आसान बना दिया है, अगर स्मार्ट फोन आपके पास है तब आप कहीं किसी शहर में खो नहीं सकते, जीपीएस टेक्नोलॉजी के जरिये आपकी लोकेशन हर वक्त आपके पार्टनर के पास होती है इसके लिए आपने अपने परिवार के सदस्यों या मित्रों को अपनी लाइव लोकेशन शेयर करनी भर होती है, आजकल हर व्यक्ति को जीपीएस सिस्टम की जानकारी रखना आवश्यक है !


-आपके शहर से हजारों किलोमीटर दूर अनजान शहर में आपको उस शहर में कदम रखने से पहले, गूगल मैप के जरिये ,अपने बस स्टॉप और बस नंबर तक का पता चल जाता है और कितने स्टॉप बाद उतर कर किस दिशा में, कितने कदम चलना है गूगल मैप की मदद से आप अपने गंतव्य पर आसानी से पंहुच जाते हैं !

-अपना टिकिट अपने मोबाइल पर घर बैठे ऑनलाइन खरीद लीजिये और जहाँ चाहे यात्रा करिये कोई चेक करने नहीं आता न कहीं कोई रेलवे टिकिट कलेक्टर जैसा कोई इंसान दिखता, हर जगह एक भरोसा सा महसूस होता है कि आप भले इंसान हैं और चोरी नहीं कर सकते ! अगर किसी वीरान बसस्टॉप या ट्राम पर खड़े हैं तो टिकिट आपको अपने मोबाइल पर खरीदने की सुविधा है ! 

-हर सड़क पर पदयात्रियों के फुटपाथ , साइकिल के लिए अलग ट्रेक बना है ! पैदल चलते व्यक्ति को सड़क पार करते देख गाड़ियां जबतक इंतज़ार करती हैं जबतक वह इंसान सड़क पार न कर ले ! मोहल्ले में कोई शोर शराबा नहीं लेट इवनिंग में आप घर में तेज आवाज में टीवी अथवा ड्रिल से दीवार में या लकड़ी में छेद नहीं कर सकते शोर मचाना या जोर जोर से बोलना  असभ्यता की निशानी माना जाता है ! नियम पालन यहाँ का समाज अपनी जिम्मेदारी समझ कर पालन करता है !
यूरोप के विभिन्न देशों के बीच सीमा नहीं है हर व्यक्ति बिना किसी परमिट के किसी भी देश में जाने को स्वतंत्र है !

-पूरा वातावरण बेहद स्वच्छ है धूल उड़ते कहीं नहीं दिखती , इस बार मैं एक सफ़ेद शर्ट कई दिन से पहने हूँ कॉलर गंदा ही नहीं होता ! ठन्डे और साफ़ वातावरण में सुबह सुबह इसार नदी के किनारे दौड़ने का आनंद ही कुछ और है काश विश्व के देशों की सीमाएं समाप्त हो जाएँ और हम सब एक साथ मिलकर हंसना रहना सीख सकें !

कितना सुंदर सपना होता 
पूरा विश्व  हमारा  होता । 
मंदिर मस्जिद प्यारे होते 
सारे  धर्म , हमारे  होते ।  
कैसे बंटे,मनोहर झरने,
नदियाँ,पर्वत,अम्बर गीत । 
हम तो सारी धरती चाहें , स्तुति करते मेरे गीत ।  

काश हमारे ही जीवन में 
पूरा विश्व , एक हो जाए । 
इक दूजे के साथ  बैठकर,
बिना लड़े,भोजन कर पायें ।
विश्वबन्धु,भावना जगाने, 
घर से निकले मेरे गीत । 
एक दिवस जग अपना होगा,सपना देखें मेरे गीत । 

Monday, July 9, 2018

तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा - सतीश सक्सेना

बढ़ी उम्र में , कुछ समझना तो होगा !
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !

उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें 
भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !

अगर सुस्त मन दौड़ न भी सके तब 
शुरुआत में कुछ ,टहलना तो होगा !

यही है समय ,छोड़ आसन सुखों का 
स्वयं स्वस्त्ययन काल रचना तो होगा !

असंभव नहीं , मानवी कौम में  कुछ  ?
सनम दौड़ में,गिर संभलना तो होगा !

Tuesday, June 26, 2018

सावधान -सतीश सक्सेना

सावधान -सतीश सक्सेना
***********************
कुछ वर्ष पहले के बेहद खूबसूरत चेहरे , चंद वर्षों में ही , बेडौल और भद्दे दिखने लगते हैं , बुरा हो उनके खैरख्वाहों की बजती तालियों और तोंद से नीचे बंधी बेल्ट का, जो उन्हें अहसास ही नहीं होने देतीं कि वे कितना कुछ खो चुके हैं !
और बुरा हो उन बहानों का जो बढ़ते वजन का कारण हैं , कोई बेचारा समय, कम होने के कारण मोटा है तो कोई दवाओं के कारण तो कोई घुटने के दर्द के कारण वाक् नहीं कर पाते तो दौड़ना कैसे सीखें ?
कुछ लोग खुद को तसल्ली दे लेते हैं कि वे रोज दोस्तों के साथ पार्क में टहलते हैं और कुछ तो जिम भी जाते हैं !
इन्हें नहीं मालुम कि बढ़ते फैट के कारण शरीर का हर अंग बीमार हो रहा है अगर वे दो मंजिल सीढियाँ या 100 मीटर दौड़ने में हांफ रहे हैं तो समझिये, ह्रदय घात कभी भी होगा और पछताने का मौक़ा नहीं देगा !
To avoid danger of Obesity, Diabetes and Heart attack, Learn Running ....

Wednesday, June 20, 2018

हेल्थ ब्लंडर -9

आप कई वर्ष से वाक कर रहे हैं, आप कई वर्ष से जानवरों का दूध पी रहे हैं , आप बरसों से रोटी,दाल,सब्जी खा
रहे हैं , यह सब आपकी आदत का हिस्सा बन गयी हैं और उसी तरह से आपका शरीर भी बरसों से एक शक्ल अख्तियार कर चुका है और वजन टस से मस नहीं हो रहा तो मान लीजिये शरीर ने इन आदतों को स्वीकार कर लिया है और आप यह सब करते रहिये शरीर इसी वजन के साथ थुलथुल शरीर के साथ जीने की आदत डाल लेगा और आप इस भुलावे में मस्त रहिये कि आप व्यायाम कर रहे हैं जबकि अब यह व्यायाम न होकर शरीर का एक रुटीन भर रह गया है जिससे शरीर में रत्ती भर बदलाव आना संभव नहीं !

अगर बदलाव लाना है तो अपने व्यायाम की एकरसता को तोडिये और अपनी एक्टिविटी में विविधिता लाइए शरीर में हलचल मचना शुरू हो जायेगी ! सप्ताह में चार पांच अलग गति और एक्शन के साथ वाक /रन करें अन्यथा लटके हुए मांस में बदलाव आना संभव नही ! अधिकतर एथलीट एक दिन साधारण वाक्, एक दिन तेज वाक, अगले दिन साईकिल, अगले दिन रेस्ट और फिर जोगिंग और एक दिन तेज रन करता हूँ !

जानवरों का दूध पीना लगभग एक माह बंद करके देखें इसके साथ ही वह सब कुछ महीने के लिए त्याग करें जो आपको बहुत खाने में बहुत अच्छा लगता हो, इनमें से कुछ खाद्य पदार्थ हो सकता है आपका नुकसान कर रहे हों , इनको छोड़ने के साथ वह प्राकृतिक खाद्य शुरू करें जो आपने बहुत कम खाया हो !

आप डरपोक हैं इसीलिए एक सप्ताह में कैंसर ठीक, जैसे न्यूज़ नुमा विज्ञापन ध्यान से पढ़ते ही नहीं बल्कि अपने तमाम दोस्तों को शेयर भी तुरंत करते हैं ! आकर्षक हैडिंग वाली ख़बरें आपको खींचती हैं उस माल को खरीदने के लिए जो मुफ्त में फायदा देने का झांसा दे रहा है तब आप मृत्यु के प्रति घबराए हुए तो हैं ही साथ ही मूर्ख और लालची भी हैं जो किसी व्यापारी के लुभावने ऑफर को धन्यवाद् सहित स्वीकार ही नहीं कर रहे बल्कि अनजाने में उसके एजेंट भी बन रहे हैं ! मृत्यु के प्रति यह भय आपकी जान ले लेगा और आपके जाते जाते मेडिकल व्यवसाइयों को धन दिलाने में कामयाब रहेगा !

अकर्मण्यता की आदत से, है कितना लाचार आदमी !
जकड़े घुटने पकड़ के बैठा , ढूंढ रहा उपचार आदमी !

दुरुपयोग मानस का करके,ढेरो धन संचय कर.भयवश
निष्क्रिय औ भयभीत ह्रदय से करता योगाचार आदमी !

Tuesday, June 12, 2018

बिना समझे, दौड़ना खतरनाक हो सकता है -सतीश सक्सेना

६ जून की पोस्ट पर भाई लकी सिंह के स्नेहिल प्रश्न के जवाब में यह पोस्ट लिखनी आवश्यक हो गयी है मुझे दुःख है कि अधिकतर लोग ध्यान से बिना समझे रनिंग शुरू करते हैं जबकि यह बेहद घातक सिद्ध हो सकता है अतः आज रनिंग से सम्बंधित कुछ ख़ास बातें , फायदे और संभावित नुकसान की भी चर्चा आवश्यक है !

चूंकि रनिंग अकेली ऎसी एक्सरसाइज है जो डायबिटीज और ह्रदय आर्टरिज़ में आयी रूकावट को दूर करने में समर्थ है मगर रनिंग के बारे में कोई यह जानना नहीं चाहता कि रनिंग का सही तरीका क्या है, नुकसान क्या हो सकते हैं , उनका सोंचना है कि रनिंग के बारे में किसी से क्या पूंछना ? और वे दौड़ना शुरू कर देते हैं यही नहीं उनकी कोशिश होती है कि वे लम्बी दूरियां, बढ़िया स्पीड के साथ तय कर सकें ताकि साथियों में अपनी बुलंदी के किस्से सुनाये जा सकें और अधिकतर इस जोश का अंत किसी गंभीर मसल्स इंजरी के साथ ही होता है जिसके कारण कई लोगों की रनिंग पूरे जीवन नहीं हो पाती !


रनिंग एक हार्ड हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज है जिसमें शरीर के हजारो अंग एक  साथ वायब्रेट करते हैं और विभिन्न व्यक्तियों पर अपनी अपनी आदत के अनुसार उन पर अच्छा या बुरा असर पड़ता है ! अतः रनिंग करते समय हर व्यक्ति का ध्यान अपने शरीर पर होना चाहिए कि वह क्या कह रहा है , और हर शरीर अपने स्वस्थ होने या बीमार होने का संकेत काफी पहले ही देता है अगर इसे दौड़ने के जोश में, नज़रंदाज़ करेंगे तो यकीनन आपका नुकसान हो सकता है !

हर रनिंग में शरीर के मसल्स एवं जॉइंट्स को बहुत काम करना पड़ता है गिरते हुए हर कदम पर आपके शरीर के वजन का तीन गुना इम्पैक्ट जमीन पर पड़ता है इसका अर्थ यह है कि दौड़ते समय अगर आपका वजन 70 kg है तो हर गिरते कदम पर आपका पैर जमीन से 210 kg के वजन के साथ टकराएगा और हर बार 210 किलोग्राम  इम्पैक्ट का कम्पन आपके घुटने,हिप जॉइंट्स , बॉडी कोर, हृदय, फेफड़े और मस्तिष्क तक महसूस करेगा ! 5 Km दौड़ते हुए ,एक रनर लगभग 6000 बार अपने घुटनों और काफ मसल्स पर 210 किलोग्राम का इम्पैक्ट देता है , और यह झनझनाहट, शरीर के हर नाजुक जॉइंट्स से गुजरती हुई मस्तिष्क तक जाती है !

इतनी दुष्कर हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज अगर कोई आलसी वृद्ध व्यक्ति , या अनाड़ी जोशीला जवान एक दिन में करने की कोशिश करेगा तो इस मूर्खता स्वरुप उसकी मसल्स एवं जॉइंट्स में सूजन आ जाएगी और अधिक  करने पर,वे फटकर घायल भी हो सकती हैं जिनके हील होने में कई बार महीनों, बेडरेस्ट करना पडेगा और अगर मेडिकल व्यापारियों के पास चला गया तो वह ऑपरेशन के साथ,लोहे के घुटने लगा कर, बचे जीवन भर रनिंग को गालियां देता रहेगा !


इस तरह की चोट लगने से बचाव के लिए, सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता अधिक मात्र में पानी पीना है ! अगर शरीर में पानी पर्याप्त मात्र में नहीं है तब दौड़ते समय मसल्स क्रेम्प्स आना और अंदरुनी जख्म के कारण दर्द होना, सामान्य बात है ! अतः हर रनर दौड़ने से पहले 24 घंटे अपने शरीर को, पर्याप्त हाइड्रेशन देने की व्यवस्था करता है अधिकतर जल, जूस , दूध या  लिक्विड भोजन इसकी जरूरत पूरी करता है !

हर लम्बी दौड़ के बाद एक या अधिक दिनों का आराम आवश्यक है जिसमे सूजे हुए मसल्स आराम के बाद ठीक होकर और शक्तिशाली बनकर अगली रनिंग के लिए अधिक मजबूती के साथ तैयार हो सकें ! इस प्रक्रिया को मसल्स अथवा शारीरिक रिकवरी कहते हैं यह रनिंग की सबसे बड़ी उपलब्धि है मैं इसे कायाकल्प कहता हूँ इस प्रक्रिया से ही शरीर ढीले मसल्स का त्याग कर , नौजवान मसल्स की शक्ल लेकर , नए
स्वरुप को प्राप्त करता है ! सो हर लम्बी मेहनत के बाद , ढेरों जल , लंबा आराम एवं बेहतरीन नींद अवश्यक है !
  

याद रहे हर रनर दौड़ से पहले बॉडी वार्मअप करता है फिर धीरे धीरे दौड़ना और दौड़ के समाप्ति पर कुछ देर तक जोगिंग मोड में दौड़ना बेहद आवश्यक होता है ! इतनी मेहनत के करने बाद रिकवरी के लिए निम्न टिप ध्यान में रखना आवश्यक हैं !
  • रनिंग के बाद एक या दो दिन आराम करें उसके बाद जब शरीर ठीक हो जाए तब अगली दौड़, पहली दौड़ से स्लो करें न कि जोश में और तेज दौड़ने का प्रयत्न करें यह भयानक भूल होगी आप यह न भूले कि आपके मसल्स ऊपर से भले सहज लग रहे हैं मगर वे भीतर से जख्मी हैं उन्हें और जख्म न दें !
  • बेहतरीन नींद ही सूजे हुए अंगों को ठीक करके स्वस्थ बनाने में समर्थ है सो 10 km या अधिक लम्बी दूरी के रनर कम से कम 8 घंटे या 10 घंटे की नींद अवश्य लें ! 
  • रनर के लिए हाइड्रेशन से महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता हर रनिंग से पहले के 24 घंटे ढेरों पानी पीना है ताकि आपके शरीर में स्मूथनेस और शरीर से सफाई हो सके और इसी तरह रन के बाद अगले दो दिन खूब पानी एवं लिक्विड आहार लें ताकि मसल्स रिकवरी इफेक्टिव हो , हाँ दौड़ते समय पानी कम लेना चाहिए
    गला सूखते समय सिर्फ सिप भर लेना है ताकि गला गीला रहे ! भर पेट पानी दौड़ते हुए पीना मूर्खता होगी वह आपको दौड़ने नहीं देगा !
  • रनिंग के बाद बिना आराम किये, जोश में लोग, पिछली थकान को साथ लेकर अगले दिन फिर दौड़ने जाते हैं और सूजी हुई मसल्स को डैमेज करते हैं अगर इन्हीं मसल्स को समुचित आराम दिया जाता तो वे अगली रनिंग और अधिक ताकत के साथ बिना थके करने के लिए तैयार होती !
  •   सप्ताह में एक दिन रनिंग की जगह क्रॉस ट्रेनिंग बेहद आवश्यक है जिनके द्वारा उन मसल्स को मजबूत किया जाता है जिनका उपयोग रनिंग के समय नहीं होता बहुतायत में रनिंग इंजुरी इसी के न करने के कारण होती है ! और साइकलिंग को बेहतरीन क्रॉस एक्सरसाइज माना जाता है !सो सप्ताह में एक दिन साईकिल चलायें !
  • रनिंग से पहले बॉडी स्ट्रेचिंग एवं वार्मिंग रनिंग के दौरान सिप करने के लिए पानी की छोटी बोतल एवं रन के अंत में धीमे धीमे स्लो डाउन करते हुए रुकना , इंजुरी से बचने के लिए बहुत आवश्यक है !
  • सीनियर उम्र के रनर अगर जल्दवाजी और जोश में रनिंग करेंगे तो तरह तरह के दर्द होंगे जिन्हे मेडिकल व्यापारी  खतरनाक बताकर पैसे निकलवा लेंगे ! उन्हें खासतौर पर शरीर का लचीलापन बनाये रखने के लिए विभिन्न एक्सरसाइज करना होगा तथा अपने लिए गहरी  नींद , सप्ताह में दो दिन पूरा रेस्ट तथा एक दिन साइक्लिंग करनी ही होगी  तभी शरीर लम्बे समय तक रनिंग के लिए साथ देगा , थके हुए पैरों को लेकर लम्बी दौड़ नहीं करनी चाहिए !
निम्न वेब साइट पर जाकर आप अन्य जानकारी ले सकते हैं 
https://www.runnersworld.com/training/

एवं रनिंग ट्रेनिंग के लिए 
https://www.halhigdon.com/training/5k-training/

यह मत भूल जाना कि इन दिनों जिन के पेट का घेरा बढ़ा हुआ है वे सब हृदय आर्टरीज में चर्वी जमा कर चुके हैं और डायबिटीज के शिकार हैं और इससे मुक्ति का इलाज केवल और केवल रनिंग सीखना है ! उनका जबरदस्त प्रभामंडल , समाज से मिलता सम्मान का नशे में व्यस्त वे आसन्न मौत की आहट भी नहीं ले पाएंगे  !

उन्हें चाहिए कि अगर अपने यश और सम्मान का सुख लेना है तो थोड़ा समय उस भूल पर लगाएं जो उन्होंने वर्षों से की है, आज से मेहनत करना और पसीने के साथ दौड़ने में सुख लेने का प्रयत्न करें अन्यथा जिनके लिए जीना आवश्यक है उन्हें ही खतरे में डालकर अचानक जाने के लिए तैयार रहें !
मंगलकामनाएं आप सबको !

Friday, June 8, 2018

मृत्युभय और इम्यून सिस्टम (हेल्थ ब्लंडर 9) -सतीश सक्सेना

गिरिजा कुलश्रेष्ठ एवं शशि शर्मा जी का सवाल है कि इम्यून सिस्टम को मजबूत कैसे करें ? इसके जवाब में आधुनिक सिस्टम और मेडिकल व्यवसाय के अनुसार वही टोटके बताये गए हैं जो हर मालदार आसामी को कहे
जाते हैं जैसे खूब सारे फ्रूट्स , सब्जियां , मेवा , और प्रोटीन आदि खाइये और बीमारियों से  दूर रहिये अगर इनकी बात पर विश्वास करें तब गरीब आदमी, मेहनतकश मजदूर आदि जो सूखी रोटी खाते हैं उनमें इम्यून सिस्टम शायद सबसे कमजोर ही होता होगा ! जबकि एक गरीब रिक्शे वाला 50 वर्ष की उम्र में 150 किलो की दो तोंदवालों को बिठाकर दिन भर 100 km से अधिक चलता है और देर रात घर पंहुचने पर खाने के नाम पर उसे ४ रोटी और दाल मिलती है सुबह फिर रिक्शा लेकर अपने काम पर !

शुरू के दिनों में जब मैं अपने कमजोर मन और शरीर के साथ लड़ रहा था तब यही प्रश्न अल्ट्रा रनर एवं कई बार के आयरन मैन @अभिषेक मिश्रा से पूंछा था कि एक हाफ मैराथन रनर जो 60 वर्ष का हो उसे क्या खाना चाहिए  तो अभिषेक का जवाब था कि यह सब बेकार के चोचले हैं आप वही खाइये जो साधारण लोग खाते हैं दाल सब्जी रोटी और मौसमी फल , और आपका शरीर इनसे ही भरपूर शक्ति ले लेगा !

अधिक उम्र में इम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए :
सबसे पहले अपने आप को हंसना सिखाइये जो कि बीमारी के भय और नकारात्मक विचारों के साथ जीते हुए व्यक्ति के लिए मुश्किल होता है ! मैं ऐसे तमाम लोगों को जानता हूँ जो अपने विगत सम्मान का ढिंढोरा पीटते हैं और अपने चेहरे को पेंट करने में ही अधिकतर समय बिताते हैं ऐसे लोग कुछ समय में ही निढाल हो जायेंगे ! सम्मान की चाहत ही, बुढापे की निशानी है और यह अधिकतर परिपक्व अवस्था में ही आती है ! किसी बच्चे को किशोर अवस्था तक, आपने सम्मान के लिए प्रयास रत नहीं देखा होगा , सम्मान योग्य कर्म कीजिये और उसके बदले में बिना आशा किये उसे भुला दीजिये अगर वह कार्य विशुद्ध मन से किया होगा तो अपने निशान अवश्य छोड़ेगा, जिसे लोग अपनाएंगे भी ! यही सच्चा सम्मान होगा चाहे आपके सामने मिले या पीठ पीछे !

स्वस्थ वही होगा जो प्रसन्नचित होगा, अपने आपको वृद्ध मानना और वैसा ही आचरण करना सबसे अधिक नुकसान करता है ! कुछ लोग अधिक उम्र में अपना गुणगान , अपने किये गए कार्यों का बखान , और सम्मान की चाहत में ,कमउम्र संगति में गंभीरता ओढ़े रहते हैं यह बड़प्पन ही आपको वृद्ध बनाने के लिए काफी है आपको समझना होगा कि सम्मान वह नहीं जो किसी के द्वारा दिया जाए यह सिर्फ खुद को भुलावे में रखने का आधार मात्र है ! ऐसे लोग चेहरे पर आयी झुर्रियों से मुक्ति नहीं पा सकते !

अगर आप खुद को वृद्ध नहीं मानते हैं तब आपका शरीर भी जवानों की फुर्ती रखने में कामयाब रहता है ! खुद को दी गयी मजबूत सलाह और आत्म विश्वास ही बेहतर प्रतिरक्षा शक्ति की कुंजी है सो मेडिकल व्यवसाय द्वारा  दिया ज्ञान भूलकर, बीमारी को लाइलाज न मानकर, मात्र शारीरिक प्रतिक्रिया मानिये जो कुछ दिन में सामान्य हो जायेगी और ऐसा करते समय मृत्युभय न रखें अन्यथा स्वस्थ होने में रूकावट आएगी !

उत्साह का मर जाना मृत्यु और उत्साह का होना ही जवानी है ,अपने ऊपर विश्वास के साथ नए कार्य सीखने का उत्साह होना सबसे आवश्यक है अगर ऐसा नहीं कर पा रहे तो आप नकारात्मक व्यक्तित्व के साथ जवान बनने का प्रयास कर रहे हैं ! सामाजिक वर्जनाओं को आँख बंद कर न अपनाएँ , लोग क्या कहेंगे कि इस उम्र में ..... जैसे सुझावों से मुक्ति पाएं और मन को प्रसन्न रखने के लिए तैरना, झूला झूलना ,साईकिल चलाना, और दौड़ना सीखना ,नए फैशन के कपडे पहनना शुरू करें ! शारीरिक एक्टिविटी जिसमें शरीर के हर अंग में कम्पन हो, व्यायाम हो उसमें लिप्त होना सबसे अधिक आवश्यक है !रनिंग जैसी एक्टिविटी आपको दीर्घ और स्वस्थ आयु दिलाने में समर्थ है ! 

अपने जीवन में कोई बैरियर न लगायें , मैं यह नहीं खा सकता मुझे यह पसंद नहीं ! वह हर चीज खाइए  जो विश्व में खायी जाती हो और उसे एन्जॉय करते हुए खाएं  वेज, नॉन वेज , बियर ,व्हिस्की, कॉफी, चाय , मिठाई , नमकीन मगर गुलाम किसी का न बनें !

अंत में भीष्म प्रतिज्ञा जैसी इच्छा शक्ति का विकास करें कि मैं अपना जीवन 100 वर्ष तक चाहता हूँ और वह भी मजबूती के साथ और यह मैं लेकर रहूँगा ! इस वरदान को लेने के लिए मंदिर जाकर ईश्वर की तपस्या आवश्यक नहीं है बल्कि बिना मेडिकल व्यवसाइयों के उपचार और टेस्ट के अपने मन को मजबूत भरोसा दिलाना ही ,शरीर को सौ वर्ष ज़िंदा रखने के लिए पर्याप्त होगा ! 

विश्व में वे लाखों व्यक्ति पूरे 100 वर्ष जिए हैं जिन्होंने जीवन में मृत्यु का भय दिलाने, विभिन्न बीमारियों का नाम और ज्ञान देने वाले व्यवसाइयों से मिलने में परहेज रखा !

Wednesday, June 6, 2018

हेल्थ ब्लंडर 8 -सतीश सक्सेना

रोज सवेरे वाक करके स्वस्थ रहने की ग़लतफ़हमी पालने वालों के लिए अरुण द्विवेदी की तल्ख़ टिप्पणी को ध्यान से पढ़ना चाहिए शायद वे अपनी गलती महसूस करें !


वाकई में यह वाक उनके किसी काम का नहीं , बरसों से आरामदेह शरीर , अपनी नियमित क्रियाएं भूल चुका है और आलसी आदमी अपने शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति पर ध्यान न देकर कम मेहनत और बिना पसीना बहाये सेठ रामदेव की ओर, किसी संजीवनी बूटी की आशा में देख रहा है !

मृत्यु भय और बढ़ती उम्र में आलसी शरीर के कारण उत्पन्न बीमारियां उसे अपने शरीर का ध्यान रखने के लिए सुबह वाक करने को मजबूर करती हैं और इस बोरियत से बचने के लिए वह अपने किसी संगी साथी की तलाश करता है जिसे वह अपने बड़प्पन के किस्से सुनाकर खुश महसूस करे साथ ही यह मुसीबत का समय भी बढ़िया कटे ! ऐसे लोगों को जब हृदय आघात होता है तब साथी चर्चा करते हैं कि यह तो नियमित टहलने जाते थी फिर इन्हें हार्ट अटैक क्यों हुआ ?

इसे ही ब्लॉक माइंड कहते हैं इन्हें समय ही नहीं है अपने गलते शरीर या अपनी प्रतिरक्षा शक्ति की चीत्कार सुनने का और न इसकी समझ कि मैं बेवकूफी क्या कर रहा हूँ , पछताना सिर्फ तब होता है जब मेडिकल व्यवसाय का कोई अनाड़ी डॉक्टर ,इनके शरीर के ऊपर ऑपरेशन थियेटर में, बेतुकी जगह पर चीरफाड़ करते हुए ऑपरेशन करना सीखता है फलस्वरूप यह लोग अपनी बची हुई जिंदगी ,रेंगते हुए बिताने को मजबूर होते हैं !

कोई भी डॉ अपने मरीज को उसके इम्यून सिस्टम के बारे में जानकारी देने का प्रयत्न नहीं करता कि वह (इम्यून सिस्टम ) उसे बचाने के लिए क्या करता है और न वह यह बताता है कि इन गोलियों के खाने से आपके शरीर का कितना नुकसान होगा !

बीमारी कोई भी हो हर डॉ सबसे पहले विभिन्न टेस्ट करवाता है और अधेड़ शरीर में कम से कम दो तीन स्वाभाविक उम्र जनित बीमारियां निकल ही आती हैं जिनके उपाय में, मेडिकल व्यवसाइयों को अच्छी खासी राहत और एक डरा हुआ मरीज अगले कुछ वर्षों के लिए नोटों का थैला लिए हुए मिल जाता है !

कितने ही पढ़े लिखे जाहिल, अपने शरीर से संवाद न करके इन व्यवसाइयों की सलाह पर निर्भर होकर अपने दुखते घुटने , कमर , किडनी और हृदय रोगों की दवा खाते जी रहे हैं साथ ही अपने आपको तसल्ली देते रहते हैं कि अब हमारी उम्र बीमारियों की तो है ही और मैं "इलाज" भी बढ़िया डॉ से करा रहा हूँ ! काश इन बेवकूफों को पता हो कि इसका विश्व में कोई इलाज उपलब्ध ही नहीं इन गोलियों को खाने से बेहतर बिना दवा लिए जीना है सिर्फ अपने इम्यून सिस्टम से बाते करना सीखना होगा !

इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाओ, शरीर झूम उठेगा ! वह किसी भी बीमारी, जिसका नाम कुछ भी हो, को खुद ठीक करने में समर्थ है बशर्ते कि तुम भयभीत होकर न जी रहे हो !

मंगलकामनाएं सदबुद्धि के लिए !

Tuesday, May 22, 2018

भगवा लिवास को कभी लुच्चा नहीं कहते -सतीश सक्सेना

हम मुफ्त में सूरज को भी अच्छा नहीं कहते !
इस देश में अच्छे को ही,अच्छा नहीं कहते !

बच्चों को भूल पर तो माफ़ कर ही दें ,मगर 
कम उम्र,नर पिशाच को ,बच्चा नहीं कहते !

आधार हिल रहा यहाँ  , बचपन से ,नशे में !
इस पाशविक प्रवृत्ति को,कच्चा नहीं कहते !

उस रात एक स्वप्न का , दम घोट चुका है ,
बच्चा है ये शैतान का , टुच्चा नहीं कहते !

बस्ती में जाहिलों की,चोर डाकुओं को भी 
भगवा लिवास में, कभी लुच्चा नहीं कहते ! 

सारे डकैत  मिल के , चोर चोर  कह रहे !
अरविन्द को इस देश में सच्चा नहीं कहते !




Friday, May 18, 2018

खुद से कहिये जीने का अंदाज़ बदल लें -सतीश सक्सेना

धन कमाने का मतलब आराम और ऐश की जिंदगी है इस विश्वास से बड़ी बेवकूफी मानव ने शायद ही कभी की होगी , साठ वर्ष इसी धारणा के साथ ऐश और आराम किया मगर भला हो रिटायरमेंट का जिसके कारण अपने विगत जीवन का आत्मावलोकन करते समय यह भयंकर बेवकूफी नज़र आ गयी अन्यथा मुझे याद है कि जब बड़े डांटते थे कि कुछ एक्सरसाइज कर लिया करो तो सोंचता था कि मुझे कौन सी स्वास्थ्य  समस्या है जो हेल्थ के बारे में सोंचू और अभी उम्र ही क्या है मेरी ! शुक्र है कि इस लापरवाही के बावजूद मैं इस उम्र तक पंहुच गया !

उन दिनों हेल्थ और स्वास्थ्य को मैं वृद्धों की समस्या मानता था जिसका जवानों से कुछ लेना देना न था और यह धारणा आज भी मैं 90 प्रतिशत लोगों में पाता हूँ यह बेहद अफसोसजनक है ! अपने खास मित्रों  संख्या टटोलता हूँ तो पता चलता है कि लगभग 30 प्रतिशत अकाल ही काल के गाल में चले गए उनमें अधिकतर डर के मारे , बीमारी को ठीक कराने के लिए ,अस्पताल की ऑपरेशन टेबल तक पंहुच गए थे और उन्हें मेडिकल व्यापार ने चूस कर थूक दिया जो बच पाए वे पहले से भी बुरी हालत में कुछ वर्ष तक दस गोली रोज खाते हुए जी पाए !
मगर यह जीना भी कोई जीना है लल्लू  ?

सो जवान रहने के कुछ तरीके नोट करो महाप्रभु 

  1. कष्ट अवसाद को साथ लिए न घूमें जितनी जल्द हो सके कष्टदायी विगत याद न रखें 
  2. उम्र को कभी याद न रखें और न यह कहें कि अब यह मेरे बस का नहीं ध्यान रहे इस वाक्य को अवचेतन मन सुन रहा है और वह उसे सुनकर उसपर अमल करेगा कभी यह न कहें कि आज मैं थक गया आराम करूंगा या सर दबा दो थकान सिर्फ मस्तिष्क का भ्रम है दुबारा कर रहा हूँ थकान सिर्फ मन का भ्रम है आप स्वीकार न करें कि आप थक गए हैं और आप अपने को फ्रेश महसूस करेंगे ! सफ़ेद होते बालों को रंग कर जवान बने रहने की कोशिश न करें इससे भी अपने आपको बूढा होना बता रहे हैं ! हर वह काम जो आप अधिक उम्र के कारण नहीं कर पाए उसे करने का प्रयत्न करें आप देखेंगे कि अधिक उम्र में जवानों वाले काम आप अधिक कुशलता से कर लेंगे !मन से बीमारियों के प्रति भय निकाल दें !
  3. WHO के अनुसार भारत विश्व की डायबिटीज कैपिटल है आप अपने चारो और देखिये हर चौथा आदमी डायबिटिक और हृदय रोग का शिकार है ! आज आप घर के बाहर सड़क पर सिर्फ 100 कदम दौड़ कर देखिये अगर आपकी साँस फूल रही है तो आप शर्तिया हृदय की आर्टरीज़ में फैट जमा कर चुके हैं जो न चेतने की अवस्था में आपकी जान लेने में समर्थ है !
  4. ध्यान रहे सिर्फ रनर, हृदय रोगों और डायबिटीज से अपना बचाव करने में समर्थ हैं , दौड़ते समय बॉडी वेट इम्पैक्ट के कारण बॉडी कोर में उत्पन्न वाइब्रेशन, आपके महत्वपूर्ण अंगों और अवयवों में नयी जान डालकर उक्त बीमारियों से लड़ने के लिए, आपकी रोग प्रतिरक्षा शक्ति को मजबूती देते हैं !
सो जागिये और अपने कमजोर शरीर को मजबूत बनाने के लिए संकल्प लीजिये !

डायबिटीज हृदय पर चोट कर रही कबसे 
उनसे कहिये , चलने का अंदाज़ बदल लें !

Wednesday, May 16, 2018

उनसे कहिये,चलने का अंदाज़ बदल लें -सतीश सक्सेना

सुनी सुनाई खबरों पर,एतबार बदल लें !
झूठी खबरों के सस्ते अखबार बदल लें !

चलते, अहंकार की चाल,नज़र आती है !

उनसे कहिये,चलने का अंदाज बदल लें !

बच जाएगा, आया ऊँट पहाड़ के नीचे   
उंची गर्दन, नीची करके , चाल बदल ले !

तीखी उनकी धार , नहीं दरबार सहेगा !
चंवर बादशाही से ही,तलवार बदल लें  !

कोई मसालेदार खबर इन दिनों न आई 
उनको कहिये अपने गोतामार बदल लें !

Thursday, May 10, 2018

चिंतित माँ की चौकीदारी क्या समझेंगे ? -सतीश सक्सेना

घर कुटुंब की जिम्मेदारी क्या समझेंगे ?
शक संशय में रिश्तेदारी,क्या समझेंगे ?

पर निंदा ,उपहास में, रस तलाशने वाले
व्यथित पिता की हिस्सेदारी क्या समझेंगे ?


नन्हीं बच्ची, तिनके चुग्गा लाने निकली
चिंतित माँ की चौकीदारी क्या समझेंगे ?

सुंदरता में फंस कर ,कितने राजा डूबे
धूर्त कैकेयी की मक्कारी क्या समझेंगे ?

अभी नशे में डूबे हैं , सरकार हुस्न की
चकाचौंध में,आपसदारी क्या समझेंगे ?

Wednesday, May 9, 2018

मेरी पहली बार, नंगे पैर सड़क दौड़ -सतीश सक्सेना

आज सुबह उठा तो लगा बाएं पैर में दर्द है, लग रहा था कि हड्डी में हेयर क्रैक हुआ है लंगड़ा कर टहलते हुए तय किया कि आज सिर्फ वाक पर जाऊंगा मगर जूते के अंदर मोजा नहीं मिला सो सोंचा कि पाँव में दर्द है सो क्यों न धीरे धीरे नंगे पैर टहला जाए और जिंदगी में पहली बार हम अपने घर से बेयर फुट बाहर निकले ! 

इससे पहले एनसीआर में मेरे कुछ रनर मित्र नंगे पैर दौड़ते हैं उनसे मेरा एक सवाल अक्सर होता था कि सड़क पर पड़े कांच का कोई टुकड़ा अगर पैर में घुस गया तो ? मगर अजय कुमार का कहना था कि नीचे देख कर ही पैर रखना है अन्यथा तो काफी दिन को रनिंग छूट जाएगी !

सो आज सड़क पर टहलते हुए लगा कि कोई ख़ास दर्द या समस्या नहीं लग रही क्यों न थोड़ी दूर दौड़कर देखूं और धीरे धीरे दौड़ना शुरू किया तो आसान सा लगा और दौड़ते दौड़ते घर से कब दूर निकल गया पता ही नहीं चला ! एक किलोमीटर जाने के बाद आत्मविश्वास और बढ़ गया लगा कि वाकायदा पूरा रन करना चाहिए और मैं अपनी सामान्य मस्ती में नंगे पैर दौड़ने का आनंद उठाता हुआ एक्सप्रेस वे पर पंहुच चुका था !

और हाँ वह हड्डी के टूटने जैसा दर्द कहाँ गया कुछ पता ही नहीं चला !

Saturday, May 5, 2018

हेल्थ ब्लंडर 7 -सतीश सक्सेना

बरसों से पड़े सुस्त शरीर के साथ जल्दबाजी न करें कायाकल्प एक दिन में नहीं हो सकता , शरीर की
मांसपेशियों धीरे धीरे ही रूप बदलेंगी अगर जबरदस्ती करने की कोशिश की तब वे जख्मी हो सकती हैं और आपके लिए काफी दिन दर्द की शिकायत भी हो सकती है ! पहले साल की रनिंग सीखने में अक्सर लोग बहुत गलतियां करते हैं जिनके कारण मांसपेशियों में भिन्न प्रकार के दर्द या इंजुरी का ख़तरा रहता है !
रनिंग से पहले बॉडी वार्मअप और रनिंग के अंत में धीरे धीरे दौड़कर ही रुकना चाहिए !
नए रनर्स को ध्यान रखना चाहिए कि

  1. सही आरामदेह रनिंग शू होने चाहिए यह आवश्यक नहीं कि मंहगे जूते हो मगर आरामदेह और पैरों में फिट हों !
  2. अगर आप नए हैं तो ध्यान रखें कि अपने पुराने ढीले वाले शरीर की सुस्त मांसपेशियों को एक चुस्त एथलीट की तरह चलाने का प्रयत्न करेंगे तो वे निश्चित ही जख्मी हो जाएँगी और आपको हो सकता है महीनों आराम की सलाह दी जाये ! रनिंग आपके शरीर के लिए हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज है जिसमें  गिरते हुए हर कदम पर आपके शरीर के वजन का तीन गुना वजन इम्पैक्ट के साथ पड़ता है और अगर आप ओवरवेट हैं तो यह खतरनाक हो सकता है ! 
  3. यह आवश्यक है कि रनिंग से पहले अपनी मांसपेशियों को हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज के लिए तैयार  किया जाए ताकि वे इस इम्पैक्ट को झेल सकें ! इसके लिए शुरुआत में सप्ताह के दो दिन, रन /वाक के लिए रखें जिसमें दौड़ते समय याद रहे कि बिना हांफे, साथ दौड़ने वाले से बिना वाक्य टूटे बात कर सकें  ! हर रविवार को रन की लम्बाई थोड़ी बढ़ाएं एवं अगले दिन मांसपेशियों को आराम देने के लिए रेस्ट करें !
  4. अधिकतर लोग रनिंग से पहले वार्मअप और रनिंग के बाद धीमे धीमे कूल डाउन नहीं करते हैं जो कि बहुत आवश्यक है ! नए रनर के लिए सप्ताह में ३ दिन रनिंग एक्सरसाइज एक दिन साइकिल एक्सरसाइज और बाकी दिन रेस्ट आवश्यक है ! ध्यान रहे की कि स्क्वाट्स (Squats) एक्सरसाइज रनर्स के लिए बेस्ट फ्रेंड हैं यह एक्सरसाइज हर रनर को करनी चाहिए !
  5. रनिंग में सबसे आवश्यक पानी है जॉइंट को स्मूथ रखने के लिए शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाना है जो लोग पानी कम पीते हों उन्हें  रनिंग छोड़ देनी चाहिए अन्यथा वे अपने आपको जख्मी कर लेंगे !
  6. रनर फ़ूड मुख्यतः केला और पपीता है जो एनर्जी का बेहतरीन सोर्स हैं 
  7. खाने पर कण्ट्रोल रखें वजन घटाने के लिए जितने कैलोरी बर्न की हैं उसका ध्यान रख कर खाइये 
इंटरनेट पर रनिंग इंजुरी एवं एक्सरसाइज के बारे में लेख मिलेंगे उन्हें पढ़ें और समझदारी के साथ अपना रास्ता चुनें ! https://www.verywellfit.com/common-running-mistakes-to-avoid-2911703

मैराथन आसान ,भरोसा हो क़दमों की ताल का
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा तिरेसठ साल का !

इसी हौसले से जीता है, सिंधु और आकाश भी
सारी धरती लोहा माने , इंसानी  इकबाल का !

हार्दिक मंगलकामनाएं !

Friday, May 4, 2018

हेल्थ ब्लंडर्स 6 -सतीश सक्सेना

अधिकतर लोग दौड़ने को बेहद आसान मानते हैं जबकि हकीकत इसके बिलकुल उलट है ,यह शरीर को सिखाने के लिए सबसे जटिल एक्सरसाइज है जिसमें शरीर के बॉडी कोर में अवस्थित किडनी, पेन्क्रियास, लीवर ,
आंतें , फेफड़े और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अवयवों में लगातार कम्पन होता है साथ में स्किन, मांसपेशियों ,मस्तिष्क में होते कम्पन से एक अलग ही ऊर्जा उत्पन्न होती है जो दौड़ते समय बेपनाह आनंद देती है !

दो वर्ष पूर्व इस आनंद की जगह हांफना और गंदा पसीना होता था जो दौड़ने के प्रति वितृष्णा और गुस्सा पैदा करता था कि पागल आदमी  ऐयरकण्डीशन्ड माहौल को छोड़ कहाँ सड़क और धूल में दौड़ने आ गया ! मगर आज शीशे में अपने सपाट पेट को देखकर अपने ऊपर गर्व होता है 


आज लगातार 7 km दौड़ते समय मैं याद कर रहा था अपने उन मित्रों को जो आलस्य को नहीं छोड़ पा रहे और धीरे धीरे अपनी छिपी हुई बेपनाह ताकत से महरूम होते जा रहे हैं !



बीमारियाँ मुझे उनसे कम नहीं हैं , हार्ट पल्पिटेशन , ब्लड प्रेशर ,उम्र बढ़ने के साथ मिलता बेपनाह डिप्रेशन ,शरीर में उम्र के साथ पनपतीं कैंसर नुमा गांठे तथा अन्य डरावने लक्षण , ब्रोन्काइटिस , क्रोनिक खांसी , क्रोनिक पायोरिया , दो बार टूटा एंकल , अच्छे अच्छों को घर में आराम करने को मजबूर कर देतीं मगर यह बाधाएं मुझे न रोक पायीं तो सिर्फ इसलिए कि मैं अपना बीमार दयनीय बुढ़ापा देखना नहीं चाहता था और मैंने रिटायरमेन्ट के बाद, यह कर भी दिखाया !

और यह सब मैंने अपने वृद्ध सुस्त शरीर को धीरे धीरे सिखाया ही नहीं बल्कि उसकी आदत भी डाल दी कि सुगठित शरीर देखने में सुन्दर ही नहीं लगता बल्कि अधिक समय मजबूती के साथ जीने में भी सहायक है !

मानवों ने अपने शरीर को आराम देने के लिए अपने दिल को तसल्ली देने के लिए तरह तरह के व्यायामों का आविष्कार कर लिया है जो उसे इस ग़लतफ़हमी में डाले रहते हैं कि वह अपनी सेहत का समुचित ख्याल कर रहा है उसमें दोस्तों के साथ गप्पे मारते हुए पार्क में टहलना, दूध सब्जी लाना, बच्चे खिलाना और ऑफिस में मीटिंगों में जाने की कवायद भी शामिल है !

अगर कोई एक मंजिल चढ़ने अथवा थोड़ा तेज टहलने में हांफ रहा है तो निश्चित ही वह हृदय रोगी है या बनने की कगार पर है सो सचेत हो जाएँ कि आलसी व्यक्ति  को इस आसन्न खतरे से डॉ की केमिकल गोलियां नहीं बचा पाएंगी अगर कोई बचा पाएगी तो वह उस शरीर की जीर्ण होती प्रतिरक्षा शक्ति ही बचाएगी जिसे शक्तिशाली बनाना होगा !

मृत्युभय, उम्र घटाने के लिए सबसे बड़ी बीमारी है जिसे मेडिकल व्यापारी धड़ल्ले से, डरते हुए व्यक्ति को और डराने में उपयोग करते हैं !अधेड़ अवस्था में हर व्यक्ति छोटे मोटे लक्षणों को भी कैंसर समझ लेता है और भागता है डॉ के पास जो तुरंत पूरे शरीर के टेस्ट लिख देता है कि इस उम्रदराज मालदार आदमी के शरीर में पनपती हुई कोई न कोई खतरनाक बीमारी अवश्य निकल आये और उसके बाद अपने बचे हुए दिन में यह बेचारा कभी जोरदार आवाज में भी बोलने के लायक नहीं रहता !

आलसी और मोटे पेट वाले लोग सबसे अधिक डायबिटीज और हृदय रोगी हैं उन्हें चाहिए कि धीरे धीरे अपने शरीर को तेज चलना सिखाएं और वाक के अंत में एक से दो मिनट धीमे धीमें दौड़ कर समाप्त करें एक से दो माह में उनके शरीर को दौड़ना आ जाएगा और साथ ही सुस्त पेन्क्रियास और हृदय की मोटी फैट से भरी धमनियों में भी जान पड़नी शुरू हो जायेगी !

विश्वास के साथ शुरू करें यह प्रक्रिया और अपने आप शुरू होगा आपका कायाकल्प भी अगले दो वर्ष में मेरी तरह 63 वर्ष की जगह 36 के दिखोगे अगर अवसाद के शिकार हैं तो उनके लिए रनिंग करें जिनको आपकी जरूरत है और मेरा विश्वास है कि वे लोग हतोत्साहित होंगे जिन्हें आपकी जरूरत ही नहीं !

अंत में ध्यान रहे बहुत अधिक पानी और गहरी नींद बहुत आवश्यक है इसके लिए , इस मेहनत के बाद अगर यह दोनों न मिले तब कुछ भी नतीजा नहीं निकलेगा ! अंत में मेरी एक रचना जो शायद अनूठी है अपने तरह की ....

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !


दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !


Related Posts Plugin for Blogger,