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Wednesday, October 2, 2013

हमें पता है,स्वर्ग के दावे,कितने कच्चे दुनियां में -सतीश सक्सेना

मेरे गीत पर सुमन पाटिल का एक कमेन्ट :
"शायद पूरी दुनिया में एक हमारा ही देश होगा जहाँ हजारों साल से एक ही धंधा चलता है बाबाओं का प्रवचन देना और लोगों का सुनना, सबसे ज्यादा सुनने वालों में महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है और महिलाओं को ही इन बाबाओं ने निन्दित किया है पता नहीं कैसे सुन लेती होंगी . . . ."


अगर आप भारत के गाँव / कस्बों से जुड़े हैं तो ऐसे प्रवचन आम हैं , और उन्हें सुनने के लिए दूर दूर से , लोग परिवारों के साथ पंहुचते हैं ! साधू संतो के प्रति यह श्रद्धा , भारतीय समाज का अभिन्न अंग है , जिसके फलस्वरूप दुखी और समस्याओं से घिरे लोग , इन संतों से मिलकर अपने आपको धन्य मानते हुए राहत महसूस करते थे !
आज सच्चे संतों की जगह , उन अनपढ़ों ने ले ली है जो पढने लिखने में फिसड्डी रह गए , पैसों के अभाव और मातापिता व् समाज से प्रताड़ित ऐसे लोग , बाबा न बनें तो और कहाँ जाएँ !

डंडा कमंडल उठाकर किसी गाँव में पंहुचने पर भोजन, दान, सम्मान की कोई कमी नहीं , जब तक चाहें रुकें, अगर कहीं अधिक पढ़े लिखे लोगों के मध्य भेद खुलने का भय हो तो मौन व्रत धारण करें बाबा , और अगर अनपढ़ों के मध्य हों तो खूब प्रवचन और कष्ट निवारण ! रोज शाम के भोजन में शुद्ध घी , आलू , दूध और पूड़ियाँ उपलब्द्ध रहतीं हैं अलग अलग भक्तों के घर ..शराब पीने की इच्छा हो तो भैरव भैरवी आवाहन, शमशान साधना और पता नहीं क्या क्या . . . बाबाओं ने शिष्यों से भरपूर फायदा उठाने के लिए,सब कुछ किताबों में लिख रखा है !

भोली जनता इज्ज़त देती
वेश देख , सन्यासी को !
घर में लाकर उन्हें सुलाए
भोजन दे , बनवासी को !
अलख निरंजन गायें, डोलें,मुफ्त की खाएं डाकू लोग !
इन बाबाओं को, घर लाकर ,पैर दबाएँ , सीधे लोग !

कब आएगी समझ, देश को . . . ?

Monday, June 17, 2013

अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर शिरोमणि अवार्ड में भाग लें -सतीश सक्सेना


बहुत दिनों से मन बड़ा बेचैन था , सो सोंचा खुशदीप भाई के घर चलते हैं वहां जाकर देखा वे मत्था पकडे बैठे हैं ...

कारण पूंछने पर जो उन्होंने बताया वह अब आप उनकी जबान में ही सुनें ..

मक्खन रोज़ छत पर कपड़े धोने के लिए बैठता... लेकिन उसी वक्त झमाझम बारिश शुरू हो जाती...मक्खन बेचारा सोचता, कपड़े धोने के बाद सूखेंगे कैसे....बेचारा मन मार कर अपने कमरे के अंदर चला जाता...एक दिन मक्खन कमरे से बाहर निकला तो देखा...


कड़कती धूप निकली हुई थी...मक्खन ने सोचा...आज मौका बढ़िया है, कपड़े धोने का...मक्खन ने कपड़े धोने का सब ताम-झाम बाहर निकाला...

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लेकिन ये क्या सर्फ तो डिब्बे में था ही नहीं...मक्खन फटाफट गली के बाहर जनरल स्टोर की तरफ़ भागा...मक्खन जनरल स्टोर के अंदर ही था कि अचानक बादल ज़ोर ज़ोर से गरजने लगे...दिन में ही अंधेरा छा गया...मक्खन जनरल स्टोर से बाहर निकला...दोनों हाथ झुलाते हुए आगे पीछे करने लगा और फिर बड़ी मासूमियत से आसमान की तरफ़ देखकर बोला...



होर जी, किंदा....मैं ते एवें ही बस...बिस्किट लैन आया सी...तुसी गलत समझ रेयो जी...

                           उस दिन मुझे खुशदीप भाई ने मक्खन से पहली बार मिलवाया , साथ ही बताया कि मक्खन मेरा सारा काम  भी  देखता है , दिमाग का कुछ अधिक तेज होने के कारण मुझे हर समय इस पर निगाह रखनी पड़ती है ! उन्होंने पब्लिक से इसका परिचय कभी नहीं कराया , और साथ ही मुझसे भी वायदा लिया कि वे इसे किसी को बताएँगे भी नहीं ! हाँ हिंट देते हुए मैं बता दूं कि मक्खन खुद एक ब्लोगर है जो ब्लोगिंग समुदाय में एक मशहूर साहित्यकार के रूप में बेतहाशा ख्याति और पुरस्कार के साथ साथ घने नोट भी कूट रहा है  !

           कृपया उपरोक्त चित्रों में एक सज्जन मक्खन है अगर आप सही पहचान सके तो आपको "अंतरार्ष्ट्रीय  ब्लोगर शिरोमणि " का अवार्ड प्रदान किया जाएगा  इस अवार्ड विजेता का चयन किसी मशहूर ब्लोगर की अध्यक्षता वाली एक कमिटी करेगी जिसके चेयरमैन शिप  के लिए अनूप शुक्ल , समीर लाल  और खुद मक्खन दौड़ में हैं  ! इसके लिए भी ब्लोगरों से वोटिंग कराई जायेगी !


             तो आइये इस मक्खन ढूंढो प्रतियोगिता में हिस्सा लें और  "अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर शिरोमणि" पुरस्कार प्राप्त करें !
              यह पुरस्कार देने की जगह अभी मुक़र्रर नहीं हुई है मगर अगर कनाडा में हुआ तो समीर लाल जी ने ब्लोगरों के आने जाने का टिकट एवं रहने की व्यवस्था मुफ्त देने का वायदा ताऊ से कर दिया है ..
और यही वायदा अनुराग शर्मा उर्फ़ स्मार्ट इन्डियन ने भी किया है बशर्ते प्रतियोगिता पिट्सबर्ग में आयोजित की जाए ! 
              अग्रिम बधाई आप सबको ...

Thursday, June 6, 2013

ठसक से ठगी का पाठ पढ़ाता, यह ब्लोगर कौन है -सतीश सक्सेना

बरसों पहले २००८ में  मानसिक हलचल पर ज्ञानदत्त  पाण्डेय जी ने एक लेख लिखा था , यह ताऊ कौन है ?  
जिसमें ज्ञानदत्त जैसे गंभीर ब्लोगर ने लिखा था कि.."ताऊ की पहचान के लिये जो फसाड है एक चिम्पांजी बन्दर का - मैं उससे चाह कर भी ताऊ को आईडेण्टीफाई नहीं कर पाता। अगर मैं उनसे अनुरोध कर पाता तो यही करता कि मित्र, हमारी तरह अपनी खुद की फोटो ठेल दें - भले ही (जैसे हमारी फोटोजीनिक नहीं है) बहुत फिल्मस्टारीय न भी हो तो।"

                      वे कहते हैं कि हो सकता है ताऊ की शक्ल फिल्म स्टार जैसी न हो तो भी कम से कम अपना एक वास्तविक फोटो जरूर लगाएं ! लगभग सभी ब्लागरों ने एक ही बात कहीं कि बन्दर के चेहरे के बावजूद, ताऊ बेहद विद्वान और गंभीर कलम के धनी हैं , उस पोस्ट (३-१२-२००८ )पर मेरा ताऊ के प्रति कमेन्ट निम्न था ..
              "ताऊ पर लेख लिख कर आप बाजी मार ले गए और मैं सोचता रह गया सो बधाई स्वीकार करें ! पी सी रामपुरिया का व्यक्तित्व, ब्लाग जगत के थकान एवं उबाऊ भरे रास्ते पर एक बगीचे का शीतल अहसास जैसा है ! यह विद्वान एवं धीर गंभीर व्यक्ति ब्लाग जगत के उन शानदार प्रतिभाओं में से एक है जिसके कारण हिन्दी ब्लाग पढ़ते हुए भी, हमारे चेहरों पर मुस्कान सम्भव हो पाती है ! मैं उनके प्रसंशकों में, अपने आपको अग्रिम पंक्ति में पाता हूँ  "
                 मगर इस बन्दर मास्क लगाए चेहरे ने,ब्लॉग जगत को सार्थक लिखना सिखा दिया , हास्य व्यंग्य के इस आचार्य ने, खुद अपने चरित्र का, सरे आम मज़ाक उड़ाया है कि हमारे देश के लोग आज भी कितनी आसानी से बहुरूपियों द्वारा लुटे जा रहे हैं ! आम आदमी की कमजोरियों का फायदा उठाते, यह मदारी, नित नया रूप रखने में तनिक भी देर नहीं लगाते हैं ,धन कमाने, बाल उगाने, गोरा बनाने, बिना मेहनत  डिग्री लेने  के तरीकों पर लिखी पुस्तकें आज भी लाखों की संख्या में बिकतीं हैं !
आइये ज़रा ताऊ सद्साहित्य के प्रकाशक, द्वारा, बैस्ट सैलर किताबों पर गौर फरमाएं ...

इनकी विश्व प्रसिद्ध पुस्तकें : 
-५ वीं फेल डायरेक्ट एम् ऐ करें 
-चिटठा रोगों का शर्तिया इलाज़ 
-टंगड़ी मारने के अचूक नुस्खे 
-महिलाओं को इम्प्रेस करने के १०१ अचूक नुस्खे

                     अन्य मशहूर कंपनियों में  टीवी फोड़ न्यूज़ चैनल, ताऊ शर्तिया दवाखाना  जिसकी एजेंसी और कहीं नहीं है, नशा मुक्ति शिविर, कालोनाइज़र ताऊ , ताऊ प्रोडक्ट  फैक्ट्री  के शर्तिया कामयाब उत्पाद  और अगर आप उनके विज्ञापन पढ़ लें तो आप को रात भर नींद नहीं आएगी कि कब सुबह हो और यह प्रोडक्ट खरीदें  जाएँ  ! काश यह हमें पहले क्यों नहीं मिले ..

                      ब्लॉगजगत के इस रहस्यमय ताऊ  से एक बार मेरी मुलाक़ात हो चुकी है , मैंने निम्न कविता ताऊ को समर्पित की है जिसमें इनके ताऊ रूप का वर्णन है ! रूप वर्णन  सत्य है , ज़रा ध्यान से पढियेगा शायद आप ताऊ छवि का अंदाजा लगा सकें ! 

कंगन, झुमका ,पायल, चूड़ी
पर इस ताऊ का, ध्यान रहे
धन जहाँ दिखे, मिलते हैं यह
केवल  धंधे  का ध्यान रहे !
रुपये  कैसे भी, कमा सके ,
ये वेश बदलते रहते हैं !
संपत्ति भक्त की  अंटी कर, ये भक्त बदलते रहते हैं !

सब चोर उचक्कों के ताऊ ,
सारे ठग, इनके अनुयायी
मंदिर का कलश उतारें ये,
भगवान् के बनके अनुयायी
गुरूद्वारे मंदिर मस्जिद में,
ये अक्सर पाए जाते हैं !
जैसा मौका देखें अक्सर, भगवान् बदलते रहते हैं !

सुंदर सुकमार सुदर्शन हैं
औ दिखते वैभवशाली हैं ,
आकर्षक औ गंभीर बहुत
ये ताऊ गरिमा शाली है !
शारद मां मेहरबान इनपर , 
जिह्वा से फूल बरसते हैं !
परिस्थिति, जगह, मौका पाकर, परिवेश बदलते रहते हैं !

काले चश्में में, छिपी हुई ,
मनमोहक आँखें ताऊ की !
बन्दर की शक्ल का धोखा है
गुणवान शख्शियत ताऊ की
जेवर, धन, अर्पित करवाकर,
ये गुम हो  जाया करते  हैं !
ठग राज , चोर,  इस दर्शन को, आश्रम में, जाया करते हैं !!

Monday, January 3, 2011

समीर लाल और साधना भाभी को इतनी प्यारी पुत्रवधू के लिए बधाई -सतीश सक्सेना

समीर भाई के परिवार के साथ, इस महत्वपूर्ण विवाह उत्सव में , वर वधु ( अनुभव - प्रियंका )पर निगाह पड़ी तो ठगा सा देखता ही रह गया ! ईश्वर बुरी नज़र से बचाए इन फूल से बच्चों को ...ऐसी मनोहर सुदर्शन जोड़ी, कम ही देखने को मिलती है !
अपने दोनों बच्चों और बधुओं के साथ में खड़े समीर भाई और साधना भाभी को देख, मैंने खुशदीप भाई और डॉ दराल को कहा कि बच्चे तो साधना भाभी के ही लगते हैं ....


और बड़ी देर तक समीर लाल, खुशदीप और डॉ दराल के ठहाके गूंजते रहे समझ नहीं आया कि यह सब हँसे क्यों जा रहे हैं ?? मैंने गलत क्या कहा ...???  
;-) ( समीर भाई के दोनों पुत्र  बेहद सुदर्शन व्यक्तित्व के मालिक हैं ) . 
शांत और प्रभावशाली वातावरण में ,बेहद सादगी और बिना किसी भीड़ भाड़ के , अनुभव-प्रियंका का यह विवाह उत्सव  एक बेहद अनौपचारिक प्यार की मधुर गंध समेटे था ! पूरे उत्सव में समीर लाल - साधना भाभी के स्नेही स्वभाव के कारण हमें कहीं नयापन नहीं लगा ! लगा कि अपने घर में खुशियाँ मना रहे हों !


ब्लागर शिरोमणि समीर लाल के सरल  और स्नेही व्यक्तित्व से मिलने का दूसरा मौका था परिवार जनों के मध्य हम लोगों का जिस प्रकार वे ध्यान रख रहे थे वह बड़प्पन और स्नेह का अनुकरणीय  उदाहरण था ! जिस उत्साह से लोग देश विदेश से आकर  उनके उत्सव में शामिल हुए यह उनके प्रति सम्मान और प्यार का अहसास कराने के लिए काफी था !     


इतने सुगंधमय, खुशनुमा माहौल में,कविवर कुंवर बेचैन, पिट्सबर्ग वाले गंभीर अनुराग शर्मा , इंदौर के रहस्यमय ताऊ रामपुरिया ,ब्लोगवाणी वाले सुदर्शन मैथिली जी और सिरिल , दुबई वाले आत्मीय दिगंबर नासवा, और दिल्ली वाले मस्त खुशदीप भाई , स्नेही पद्म सिंह, हंसमुख डॉ दराल, मस्तमौला राजीव -संजू तनेजा के साथ,विद्वान् पंडित डी के शर्मा "वत्स" ,के साथ ,  उड़न तश्तरी द्वारा प्यार सहित परोसे, उस मीठे स्वादिष्ट भोज का आनंद चौगुना हो गया !


      

Monday, November 1, 2010

ब्लाग जगत की बेहतरीन शख्शियत - ताऊ रामपुरिया

ताऊ के बारे में सोंचते ही, आम ब्लागर का ध्यान मस्ती में जीते, एक ऐसे किरदार पर जाता है जो हर समय इस तेज भागती जिंदगी में ,पैसे कमाने के जुगाड़ में लगा रहता है ! शुरू शुरू में ताऊ चरित्र मुझे आम से बढ़कर कुछ नहीं लगा मगर जब इनको ध्यान से पढना शुरू किया तो इस जबरदस्त प्रतिभाशाली लेख़क से इस कदर प्रभावित हुआ कि ब्लागजगत में इस श्रेणी का, कोई भी कद इनसे बड़ा नज़र ही नहीं आता !

पी सी रामपुरिया, जिस बेदर्दी से अपने चरित्र की मज़ाक उड़ाते हैं वह आज के समाज में अद्वितीय है  ! आधुनिक समय की आपाधापी में, आदमी रिश्ते नाते प्यार सम्मान भूल कर सिर्फ रईस बनने की दौड़ में लगा रहता है ! ऐसे में जो भी मौका मिलता है उसमें शामिल होने में देर नहीं लगाता ! समाज में होते धंधो का पर्दाफाश ,देखना हो तो  अपनी ही मज़ाक उडवाते ताऊ के धारदार लेखन से, बखूबी जाना जा सकता है  !
कई बार ताऊ का लेख पढ़कर, शांत मन से सोंचता हूँ तो ताऊ के इन व्यंग्य लेखों से, अधिक  गंभीर लेख कही नहीं नज़र आते  ! आधुनिक समाज की कमजोरियों और लालच का, जो शब्द चित्र  पी सी रामपुरिया ने खिंचा है वह अन्यंत्र दुर्लभ है !हिंदी ब्लाग जगत में अपना अपना रौब पेलते ब्लागरों के बीच  ताऊ हमेशा अपनी मस्ती में ही बात कहता है सो "गंभीरता की देवी "की नाराजी देखिये ! 
कुछ उदाहरण देखिये ...

ताऊ को ब्लागर गुण  सिखाती हुई इस देवी की शिक्षा देखिये ....
प्रोफाइल में मातम मनाती सी फ़ोटो लगा ले....बिखरे बाल वाली...जिससे दार्शनिक सा लुक आये.....
उसके बाद गूगल मे से कोई जर्मन, फ़्रेंच, रुसी या अंग्रेजी भाषा का कम प्रचलित शब्द खोज ले. और उसको कोट करते हुये लिख डाल मुर्ख.... तेरी धाक जम जायेगी और तू जिम्मेदार और धीर गंभीर लेखक कहलाने लगेगा. समाज मे मान सम्मान और सम्मानित ब्लागर कहलाने लगेगा... 
 और डर के मारे ताऊ ने गंभीर बनने की कसम खाली ...जैसे तैसे नींद आते ही मुस्कान देवी सपने में आ गयी 


 आते ही मुस्कान देवी बोली - हे ताऊ, तूने मेरी बडी सेवा की है. लोगों को हंसाया. अब तू एक ताऊ ठिल्लुआ क्लबबना ले और सब हंसोडो को इक्कट्ठा कर ले और इन गुरु गंभीर लोगों को भाड मे जाने दे.

ताऊ बोला - हे मुस्कान देवी, आपकी बात सही है. मैं ये काम बहुत आसानी से कर सकता हूं. पर मुझे धीर-गंभीर लोग ऐसा करने से मना करते हैं. और आज तो उन्होने गंभीरता की देवी को ही भेज दिया था मुझे डराने के लिये. आप तो जानती ही हैं कि मैं तो पैदायशी सियार हूं और लोग अब ये फ़तवा दे रहे हैं कि सियारों, कायरो और कुत्ते बिल्लियों को ब्लागिंग छोड देना चाहिये. तो अब ये बताओ कि मैं बिना शेर, सियार, गीदड, कुत्ते और बिल्लियों के कैसे ब्लागिंग करूं. मुझे तो बस इन जानवरों की भाषा ही समझ आती है... और ब्लागिंग नही करुं तो लोगों को हंसाऊं कैसे?



और वाकई ताऊ ने हा हा ठी ठी  करते करते, वह रच दिया जो ब्लाग जगत में किसी ने सोचा भी न होगा , बड़े बड़े नामधारी, चमचे धारी लोग, जो अपने आप को सर्वेसर्वा  समझते थे , को धूल चटाते ताऊ ब्लाग सिरमौर कब बन गया लोगों को पता भी न चला ! ऐसे ही दुःख से दुखी ,जलन और ईर्ष्या को दर्शाते हुए एक मेरी कविता पढ़ें ...

सज्जनों और देवियों, सतीश सक्सेना का नमस्कार. ताऊ वार्षिक कवि सम्मेलन में अपनी रचना सुना रहा हूं...आशा करता हूं आपको अवश्य पसंद आयेगी...आपसे दाद चाहुंगा...हां तो ताऊ....
तुम्हारे ब्लाग ने ब्लाग जगत का सत्यानाश कर के रख दिया है ताऊ ! सारी भीड़, अपनी चार सौ बीस खोपड़ी की ११०% एफिसिएंसी प्रयोग करते हुए,खींच लेते हो और हमारे जैसे धुरंधर, बढ़िया बढ़िया पोस्ट लिखे बैठे रहते हैं ! कोई आता ही नहीं पढने !

गुस्से का मामला यह है कि तुम सरासर लोगो को मूर्ख बनाकर अपना देसी माल बेचे जा रहे हो अबतो मुझे यह भी यकीन हो गया है कि समीरलाल भी इस धंधे में शामिल हैं ! तेरे रूप कंचन तेल की ऐसी की तैसी न की तो मेरा नाम नहीं ! सबका धंधा चौपट कर के रख दिया ..
.

दुर्भावना एक मेरी भी ले लो 
वाकई बेमिसाल हो ! ताऊ 

बेईमानी तेरी रुकती तो नहीं 
खोपड़ी, बेमिसाल है !ताऊ !
लोग पागल बनाये जाते है
लेखनी बेमिसाल है ! ताऊ

आग ऐसे गुरु की धोती में,
जिसके चेले का नाम है ताऊ

ताई कैसे गुज़ारा कर पाए
अगर तू बंद हो गया ताऊ !

हेरा फेरी , तुरंत बंद करो
सब बहुत तुझसे त्रस्त हैं ताऊ !


और सबसे अंत में , ब्लाग जगत में नंबर एक का स्थान पाए इस शानदार व्यक्तित्व ने आज तक अपने असली चेहरे को प्रकट नहीं किया है ! पूरे ब्लाग जगत में इनका असली चेहरा किसी को नहीं पता ..यह एक रहस्य है कि  ताऊ रामपुरिया कौन हैं  ?

आज जहाँ हर व्यक्ति अपने नाम और सम्मान के लिए लड़ रहा है , ऐसे समय ब्लाग जगत में कार्यरत यह मशहूर लेखनी , अपने चेहरे को बिना आगे लाये, जो कार्य कर रही है वह हम सबके लिए एक मिसाल है बशर्ते कि हम समझ सकें !

ताऊ को इस दीपावली पर, इस लेख के द्वारा ,सम्मान देते समय मैं गर्व महसूस कर रहा हूँ !  
 

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