Saturday, June 27, 2020

मजबूत इच्छा शक्ति और कोरोना बचाव - सतीश सक्सेना

इस भयावह समय में अपने आप को व्यस्त रखना और मस्त रहना बेहद आवश्यक है , इससे जीवनी शक्ति में ताजगी बनी रहती है , इस शक्ति के आगे कोरोना अपने आपको बहुत कमजोर पाता है और एक सामान्य फ्लू से अधिक नुकसान नहीं कर पाता !  अधिकतर लोग इसे बढ़ाने के लिए खाने पीने पर अधिक जोर देते हैं मगर मेरा अपना अनुभव इससे अलग है ! किसी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए उसका फुर्तीला और तनाव रहित होना आवश्यक है ! तनाव दूर करने के लिए आप अपने आपको वे नए शौक सिखाएं जिससे मन जवानों जैसा प्रफुल्लित रहे , हर  बीमारी के लिए दवा लेने न भागें और न खाएं अपनी शारीरिक शक्ति पर भरोसा रखना बहुत आवश्यक है , खुद पर भरोसा टूटने का अर्थ ही बुढ़ापे का आगाज़ है बीमारियों की शुरुआत है !


बीमारियों से भय मुक्ति का एक सरल उदाहरण देता हूँ जो मेरा अपना है , पढ़ने में दिक्कत होने पर मेरी आँख में चश्मा आज से लगभग 30 वर्ष पहले लगा था , और उसके बाद मैंने लगभग १५ वर्ष तक विभिन्न शक्ति के ग्लासेस उपयोग किये और बाद में धीरे धीरे छोड़ दिया , आज ६५ वर्ष की उम्र में मुझे चश्मा लगाने की आवश्यकता केवल बहुत छोटे शब्द पढ़ने पर ही पड़ती है यह पोस्ट मैं बिना चश्मे के लिख रहा हूँ और मुझे कोई परेशानी नहीं होती मेरे घर में +1 से लेकर +3 तक के कम से कम 8 - 9 चश्में रखें हैं जो मैंने समय समय पर अपने लिए ख़रीदे थे , मैं हमेशा सोंचता रहा हूँ कि आई ग्लास के आविष्कार से पहले भी लोग अंधे नहीं हो जाते थे वे बखूबी देख सकते थे हम लोग जिस सुविधा की आदत डाल लें वही हमारी आदत में शुमार हो जाता है ! 
मैं पिछले ३ माह से घर में बंद हूँ , और सरकार की और से सीनियर सिटीजन के लिए बाहर निकलना निषेध भी है मगर आज सुबह एक मित्र जिनका घर लगभग 12 km दूर है ,को होम्योपैथिक दवा देने जाने के लिए , कपडे पहनने लगा था कि उनका फोन आ गया कि अब वे स्वस्थ हैं और आप इतनी दूर आने की तकलीफ न करें !हालाँकि मुझे इस उम्र में यह डर नहीं था कि मुझे खतरा हो सकता है !

अधिकतर लोग कहते हैं कि इस उम्र में बीमारियां इतनी हैं कि हंसने की हिम्मत ही नहीं होती , मुझे भी ५ वर्ष पहले ऐसी ऐसी बीमारियां थीं जो मुझे भय के कारण आराम से सोने भी नहीं देती थीं मगर ज़िंदा रहने की तेज इच्छा के कारण उनकी उपेक्षा करना शुरू की और एक आलसी और कमजोर शरीर से एक लम्बी दूरी का धावक निकल कर बाहर आया जो लगातार तीन घंटे तक बिना रुके दौड़ता था इस करामात ने जो मजबूत आत्मविश्वास दिया उससे न केवल चेहरे की रौनक जवानों से अधिक बेहतर बन गयी बल्कि मैं अपनी जवान शक्ति को महसूस भी करने लगा था  और मैं वाकई हर फ़िक्र को धुएं में उड़ाता चला गया !!

जबरदस्त आत्मविश्वास और जवान इच्छा शक्ति आपकी उम्र बढ़ाने के लिए , और बीमारियों का आपके शरीर से नामोनिशान मिटाने के लिए काफी है दोस्त आप अपनी प्रतिरक्षा शक्ति पर यकीन तो करें !

एक कविता ऐसे ही किसी मस्त समय में लिखी है हालांकि मेरी उम्र के लोगों को यह कविता पसंद नहीं आएगी , इसे बेहद दोस्ताना अंदाज़ में लिखा गया है और वे इसके आदी नहीं हैं , 50 वर्ष से ऊपर के लोग बच्चों की तरह हंसने में असहज होते हैं उन्हें सिर्फ सम्मान चाहिए और वह भी सभ्यता के साथ और जीर्ण शरीर और बुढ़ापा भी यही चाहते हैं !

शाब्बाश बुड्ढे ! यू कैन रन ! 
तवा बोलता छन छन छन !

सारे जीवन काम न करके
तूने सबकी वाट लगाईं !
ढेरों चाय गटक ऑफिस में
जनता को लाइन लगवाई !
चला न जाना हस्पताल में
बेट्टा , वे पहचान गए तो
जितना माल कमाया तूने
घुस जाएगा डायलिसिस में
बचना है तो भाग संग संग
रिदम पकड़ कर छम छम छम ,
शाब्बाश बुड्ढे यू कैन रन !

जब से उम्र दराज बने हो 
सबके आदरणीय बने हो
सारी दुनियां के पापों को
खुलके आशीर्वाद दिए हो !

इस सम्मान मान के होते
देह हिलाना भूल गए हो
पिछले दस वर्षों से दद्दू
छड़ी पकड के घूम रहे हो
आलस तुझको खा जाएगा
फेंक छड़ी को रन,रन,रन , शाब्बाश बुड्ढे यू कैन रन !

साठ बरस का मतलब सीधा
साठ फीसदी ताकत कम
ह्रदय बहाए खून के आंसू
बरसे जाएँ झम झम झम
चलना फिरना छोड़ा कबसे
घुटने रोते , चलते दम !
साँसे गहरी, भूल चुका है
ऑक्सीजन पहले ही कम
अभी समय है रख्ख भरोसा
गैंग बना कर धम धम धम ,शाब्बाश बुड्ढे, यू कैन रन !


डायबिटीज खा रही तुझको 
ह्रदय चीखता, जाएगा मर
सीधा साधा इक इलाज है
उठ खटिया से दौडने चल
आधे धड को पैर मिले हैं
उनको खूब हिलाता चल
ताकतवर शरीर होगा फिर
मगर तभी जब,मेहनत कर
सब देखेंगे जल्द , करेंगे
दुखते घुटने,बम बम बम , शाब्बाश बुड्ढे यू कैन रन !

Friday, June 26, 2020

भैंसे भी, कहाँ से समझेंगे, यह गोबर ढेर, हमारे भी -सतीश सक्सेना

खस्ता शेरों को देख उठे, कुछ सोते शेर हमारे भी !
सुनने वालों तक पंहुचेंगे, कुछ देसी बेर हमारे भी !

पढ़ने लिखने का काम नहीं बेईमानों की बस्ती में !
बाबा-गुंडों में स्पर्धा , घर में हों , कुबेर हमारे भी !
चोट्टे बेईमान यहाँ आकर बाबा बन घर को लूट रहे
जनता को समझाते हांफे, पुख्ता शमशेर हमारे भी !
जाने क्यों वेद लिखे हमने, हँसते हैं हम अपने ऊपर
भैंसे भी, कहाँ से समझेंगे, यह गोबर ढेर, हमारे भी !
फिर भी कुछ ढेले फेंक रहे ,शायद ये नींदें खुल जाएँ !
पंहुचेंगे कहीं तक तो प्यारे,ये कपोत दिलेर,हमारे भी !

Monday, June 8, 2020

धूर्तों से मिल गए ये, वरदान क्या करेंगे ? -सतीश सक्सेना


ये कौम ही मिटी, तो वरदान क्या करेंगे !
धूर्तों से मिल रहे ये, अनुदान क्या करेंगे ?

कोरोना राज में भी, जीना लिखा के लाये
बस्ती के मुकद्दर को ही
  जान क्या करेंगे ?

आशीष कुबेरों का लेकर, बने हैं हाकिम  
लालाओं के बनाये दरबान, क्या करेंगे ?

घुटनों पे बैठ , जोड़े हैं हाथ, मालिकों के 
बोतल में बंद हैं ये, मतदान क्या करेंगे ?

बेशर्म जमूरे और सच को जमीं बिछाकर
हथियार मदारी के , आह्वान क्या करेंगे !

इक दिन छटे अँधेरा विश्वास की किरण है 
जनतंत्र की व्यथा हैं, व्यवधान क्या करेंगे !

Sunday, June 7, 2020

एनसीआर और भूकंप जोन 4 -सतीश सक्सेना

पिछले 45 दिन से लगातार आ रहे भूकंप के झटके , आपको और सावधान रहने की भविष्यवाणी कर रहे हैं !!
कल भूकंप से निपटने की आपातकालीन किट ( पानी की बोतलें, बैटरी सेल, इमरजेंसी पावरफुल टोर्च, वेदर रेडियो, वाकी टाकी, सिग्नलिंग सिस्टम,हथौड़ा या कुल्हाड़ी, पावर बैंक ,ड्राई मिल्क, ड्राई फ्रूट्स , बिस्किट, ओडोमॉस ,हेड प्रोटेक्शन,मास्क और दवाईयाँ ) बनानी शुरू कर दी , एनसीआर बेहद खतरनाक सिस्मिक जोन 4 में आता है !
2020 बेहद खराब साबित होगा हम सबके लिए अगर हम लापरवाही करेंगे !
अफसोस कि मीडिया से सूचना के नाम पर कुछ भी नही मिल रहा है ...
मृत्यु से न डरें बल्कि अगर सामने भी हो तो मुकाबला करें , यक़ीनन आप लंबा जी पाएंगे , इन दिनों व्हाट्सप्प ज्ञानियों और जाहिलों से बचकर रहें, सावधानी ही बचाव है ...
सस्नेह मंगलकामनाएं !!!
https://seismo.gov.in/content/dos-donts

Friday, May 15, 2020

सदियों बादल थके बरसते ,सागर का जल खारा क्यों है -सतीश सक्सेना

अनुत्तरित हैं प्रश्न तुम्हारे
कैसे तुमसे नजर मिलाऊं
असहज कष्ट उठाए तुमने

कैसे हंसकर उन्हें भुलाऊं
युगों युगों की पीड़ा लेेेकर
पूछ रही है नजर तुम्हारी
मैं तो अबला रही शुरू से
तुम सबने, चूड़ी पहनाईं !
हर दरवाजा जीतने वाला , इस दरवाजे हारा क्यों है।

बचपन तेरी गोद में बीता
कितनी जल्दी विदा हो गई !
मेरा घर क्यों बना मायका,
कैसे घर से जुदा हो गई !
अम्मा बाबा खुश क्यों हैं ?
ये आंसू भर के नजरें पूछें !
आज विदाई है, आँचल से
कैसे दुनियाँ को समझाए !
हिचकी ले ले रोये लाड़ली, उसको ये घर प्यारा क्यों है ?

जिस हक़ से अपने घर रहती
जिस हक़ से लड़ती थी सबसे
जिस दिन से इस घर में आयी
उस हक़ से, वंचित हूँ तब से
भाई बहिन बुआ और रिश्ते 
माँ और पिता यहाँ भी हैं पर
नेह, दुलार, प्यार इस घर में
मृग मरीचिका सा बन जाये !
सदियों बादल थके बरसते ,सागर का जल खारा क्यों है !


जबसे आयी हूँ इस घर में
प्रश्न चिन्ह ही पाए सबसे !
मधुर भाव,विश्वास,आसरा
रोज सवेरे, बिखरे पाए !
कबतक धैर्य सहारा देता
जलते सपनों के जंगल में
किसे मिला,अधिकार जो
मेरे आंसू को नीलाम कराए
अपनापन बह गया फूट, अब उनका चेहरा काला क्यों है !

Tuesday, April 14, 2020

बुरे हाल में साथ न छोड़ें देंगे साथ किसानों का -सतीश सक्सेना

यह कविता यवतमाल के किसानों का हाल जानने हेतु आचार्य विवेक जी द्वारा भारत पद यात्रा (15 अप्रैल से 19 अप्रैल 2015)
के अवसर पर लिखी गयी थी जिसमें मुझे शामिल होने का सौभाग्य मिला .....

बुरे हाल में साथ न छोड़ें देंगे साथ किसानों का
यवतमाल में पैदल जाकर जाने हाल किसानों का

जुड़ा हमारा जीवन गहरा भोजन के रखवालों से
किसी हाल में साथ न छोड़ें देंगे साथ किसानों का

इंद्रदेव की पूजा करके भूख मिटायें मानव की
राजनीति के अंधे कैसे समझें कष्ट किसानों का

यदि आभारी नहीं रहेंगे मेहनत और श्रमजीवी के
मूल्य समझ पाएंगे कैसे बिखरे इन अरमानों का

चलो किसानों के संग बैठें जग चेतना जगायेंगे
सारा देश समझना चाहे कष्ट कीमती जानों का



Tuesday, March 31, 2020

शाही सलाम में कलम, क्या ख़ाक लिखेगी ? -सतीश सक्सेना

जयकार में उठी कलम,क्या ख़ाक लिखेगी
अभिव्यक्ति को वतन में,खतरनाक लिखेगी !

अवसाद में निराश कलम , ज्ञान लिखेगी ?
मुंह खोल जो कह न सके,चर्वाक लिखेगी ?

जिसने किया बरवाद , वे बाहर के नहीं थे !
तकलीफ ए क़ौम को भी इत्तिफ़ाक़ लिखेगी !

किसने दिया था दर्द, वह बतला न सकेगी !
कुछ चाहतें दिल में छिपा, बेबाक लिखेगी ?

सुलतान की जय से ही, वो धनवान बनेगी !
मालिक की जो रज़ा हो वही बात लिखेगी !

Tuesday, February 11, 2020

शायर बनकर यहाँ , गवैये आये हैं -सतीश सक्सेना

काव्यमंच पर आज मसखरे छाये हैं !
शायर बनकर यहाँ , गवैये आये हैं !

पैर दबा, कवि मंचों के अध्यक्ष बने,
आँख नचाके,काव्य सुनाने आये हैं !

रजवाड़ों से,आत्मकथाओं के बदले 
डॉक्ट्रेट , मालिश पुराण में पाये हैं !

पूंछ हिलायी लेट लेट के,तब जाकर 
कितने जोकर, पद्म श्री कहलाये हैं !

अदब, मान मर्यादा जाने कहाँ गयी,
ग़ज़ल मंच पर,लहरा लहरा गाये हैं !

Monday, January 20, 2020

थोड़े से दर्द में ही,क्यूँ ऑंखें छलक उठी -सतीश सक्सेना

मुर्दा हुए शरीर  को , जीना सिखाइये !
मरते हुए ज़मीर को , पीना सिखाइये !

थोड़े से दर्द में ही, क्यूँ ऑंखें छलक उठी 

गुंडों की गली में इन्हें , रहना सिखाइये !

गद्दार कोई हो, मगर हक़दार सज़ा के ,
उस्ताद, मोमिनों को ही चलना सिखाइये  !

अनभिज्ञ निरक्षर निरे जाहिल से देश को !
सरकार, शाही खौफ से,डरना सिखाइये !

नज़रें उठायीं तख़्त पे दिलदार, तो खुद को ,
सरकार के डंडों को भी, सहना सिखाइये !

अखबार , मीडिया , महज़  ताली बजा रहे 
इनको तो घुँघरू बाँध, थिरकना सिखाइये !

Tuesday, October 1, 2019

काश कर सकें, पर फैलाकर विचरण अन्य जहान के -सतीश सक्सेना

और अब यह बेहद आसान है अगर दो वर्ष में आप एक बार घर से दूर घूमना चाहते हैं तो कम खर्चे में आप
जर्मनी, चेकिया या रोम जा सकते हैं और निश्चित ही यह आपके या परिवार के लिए उत्साहवर्धक एवं आत्मविश्वास बढाने में कामयाब होगा ,बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि यूरोप जाना उतना ही सस्ता होता है जितना अपने देश में अंडमान निकोबार अथवा गोवा जाकर एक सप्ताह की मस्ती करना !  
मान लीजिये आपको म्युनिक जर्मनी जाना है तो सबसे पहले कुछ चिंताएं पैदा होंगीं जैसे भाषा कैसे समझेंगे और समस्याएं क्या आएँगी !भाषा के नाम पर हमें बिलकुल परवाह नहीं करनी चाहिए पूरे यूरोप में टूटी फूटी इंग्लिश बोली जाती है व् समझी जाती है ! ग्रीक , इटालियन,जर्मन, फ्रेंच,डच , स्पेनिश , पोलिश एवं अन्य प्रांतीय भाषाएँ बोली जाती हैं ! वहां के लोग टूरिस्ट के लायक टूटी फूटी इंग्लिश और कई जगह बेहतर इंग्लिश धड़ल्ले से बोलते हैं ! और यह वाकई इंटरेस्टिंग होता है जब वे ,भारतीय अम्मा जी को भी इंग्लिश में समझाने में अक्सर कामयाब रहते हैं !

विदेश यात्रा के लिए निम्न तैयारी आवश्यक है , अगर डाक्यूमेंट्स पूरे हों तो वीसा मिलने में लगभग 15 दिन लगते हैं !
  1.  पासपोर्ट जिसकी वैलिडिटी लगभग छह माह बची हो !
  2. वीसा जर्मनी का , वीसा विदेशी दूतावास की एक मुहर है जो आपके पासपोर्ट को विशेष देश आने  की अनुमति देता  है ! और यह मुहर आपके पासपोर्ट पर वह देश लगाता है जहाँ आप भ्रमण के लिए जा रहे हैं ! वह देश आपको अपने देश आने की अनुमति कुछ विशेष जानकारियों के लेने के बाद देता है ! यूरोपियन यूनियन की ख़ास बात है कि आप जर्मनी वीसा अप्लीकेशन पर पूरे 26 देशों का भ्रमण कर सकते हैं ! इसे शेंगेन वीसा कहते हैं , इसे अप्लाई करने से पहले निम्न  डाक्यूमेंट्स आवश्यक हैं !
  3. कन्फर्म फ्लाइट टिकट आने व् जाने का 
  4. इन्हीं दिनों होटल या मित्र के यहाँ ठहरने का कन्फर्मेशन ( रूपये 3000 से 5000 प्रतिदिन ) 
  5. उपरोक्त दिनों के ट्रेवल के लिए आपका हेल्थ ट्रेवल बीमा 
  6. आपका बैंक अकाउंट डिपाजिट , लास्ट तीन महीने का  जिससे यह सुनिश्चित हो की आप अपना खर्चा करने में समर्थ हैं ! ( 50 से 60 यूरो प्रतिदिन के हिसाब से ) लगभग २ लाख रुपए हों  तो अच्छा है ! 
  7. तीन माह की सैलरी स्लिप्स अगर आप नौकरी कर रहे हों 
  8. एम्प्लायर का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट 
  9. लास्ट ३ वर्ष की इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी 
  10. वीसा फीस की रसीद 
  11. उपरोक्त डाक्यूमेंट्स के साथ वीसा एप्लीकेशन , वीसा रसीद के साथ ( Rs 4500 ) 
  12. कवरिंग लेटर जिसमें आप कारण लिख कर देंगे और साथ में आप अपनी टिकट एवं रुकने की डिटेल देंगे  ! 
  13. चेकलिस्ट यह रही 
उपरोक्त डाक्यूमेंट्स तैयार होने के बाद आपको  VFS global में एप्लीकेशन सबमिट करना है जो बेहद आसान है ऑनलाइन एप्लीकेशन भरिये , जमा करिये तथा अपॉइंटमेंट लीजिये ताकि आप पासपोर्ट  व उपरोक्त डाक्यूमेंट्स  सबमिट कर सकें ! अगर आप पहली बार यूरोप जा रहे हैं तब आपके फिंगर प्रिंट्स स्कैन होंगे !
फीस जमा होगी तथा डाक्यूमेंट्स रिसिप्ट  आपको दे दी जाएगी ! कुछ दिन में पासपोर्ट वीसा का ठप्पा लगाए कूरियर द्वारा आपके दरवाजे पर पंहुच जाएगा !

क्रमश  ...
टिकट एवं होटल रिजर्वेशन ,एयरपोर्ट फॉर्मेलिटी ,पैकिंग एवं सावधानी 




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