| अविनाश वाचस्पति ब्लॉगिंग सभा संचालित करते हुए |
नुक्कड़ भी अचानक से , ही अनाथ हो गया !
ऐसा भी क्या हुआ, ये चमन ख़ाक हो गया !
अविनाश के जाते ही,कुछ सुनसान सा लगे
ब्लॉगिंग में मुन्नाभाई भी, इतिहास हो गया !
कितने दिनों से लड़ रहा था, मौत से इकला
जीवन में जी लिए हैं, ये अहसास हो गया !
जीवन में जी लिए हैं, ये अहसास हो गया !
दर्दों में भी हँसता रहा, अविनाश अंत तक
आखिर ये ज़ज़्बा मस्त भी खलास हो गया !
इक दिन तो मुन्ना भाई,वहां हम भी आएंगे,
अखबार में छपेगा कि , अवसान हो गया !
