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Monday, November 8, 2010

पापा के चले जाने का अर्थ - सतीश सक्सेना

                खुशदीप सहगल के पापा दीवाली के दिन उनको छोड़ कर चले गए ! सरल ह्रदय खुशदीप के लिए यकीनन यह सबसे मनहूस दीवाली होगी जिस दिन उनके ऊपर से पापा का हाथ हट गया !

               बड़ों को एक न एक दिन हमें अकेला छोड़ कर जाना ही होता है ! मगर आज की आपाधापी में हम, उनके वे बचे हुए दिन शायद सहेजने की कोशिश नहीं कर पाते !

               और एक दिन चुपके से वह मनहूस घडी आ जाती है जिस दिन हमको तेज धूप से बचाता और खुद चुपचाप कष्ट सहता हुआ यह मजबूत वृक्ष अचानक गिर जाता है !

अक्सर बहुत देर हो जाती है समझने में ,कि यह वृक्ष हमारे कितने काम का था .......

Tuesday, June 15, 2010

खुशमिजाज़ ब्लोगर - सतीश सक्सेना

खुशदीप सहगल को पढना हमेशा सुखद ही होता है , अपने मक्खन की तरह मस्त रहने वाले, जी टीवी में सीनियर  प्रोडयूसर ,खुशदीप सहगल पर ईश्वर की ख़ास मेहरवानी है कि गर्व उनके आस पास कहीं  नज़र ही नहीं आता ! हर एक  के साथ खड़े खुशदीप भाई, आज की दुनिया में, अजीव चीज़  लगते हैं  :-)
आज की उनकी ताज़ी पोस्ट  ब्लागर लापता , ढूंढ कर लाने वाले को ५०० टिप्पणियां ईनाम  ! पढ़ने से ही अंदाजा लग गया  ! अजय झा की अनकही व्यथा इन्होने महसूस की और पाठकों के सामने रखा है , मेरी प्रतिक्रिया निम्न  है ! 
एक बहुत संवेदनशील, ईमानदार, नेक ह्रदय, सबको साथ लेकर चलने में यकीन करने वाले इन सज्जन का नाम है अजय कुमार झा ! मुझे इनके द्वारा बुलाये गए लक्ष्मी नगर ब्लॉग सम्मलेन में जाने का अवसर मिला था, यह मिलन मेरे घर के पास ही था अतः मैंने अजय को पहली बार फ़ोन कर उसमें आने की इच्छा प्रकट की थी, और जब मैंने उनका इस परोपकार पर खर्चा देख, आधा पैसा शेयर करना चाहा तो उन्होंने हाथ जोड़ कर मना कर दिया था ! बाद में मैंने कहीं पढ़ा था कि उन पर पैसा इकट्ठा करने के इलज़ाम भी लगाये गए ! यह अफ़सोस जनक बात है कि अगर खुद , आगे बढ़कर मदद करने वालों की ओर शंकित साथी ऊँगली उठाते हैं तो यकीनन समाज में अच्छे लोगों को प्रताड़ित होना पड़ेगा !

मुझे लगता है कि कम से कम जिसे हम भलीभांति जानते ही नहीं , उसके विरुद्ध कोई बात कहने, लिखने से पहले, कम से कम एक बार मिलकर अपने संशय को दूर तो कर लें ! अगर हम किसी का सम्मान करना नहीं जानते हैं तो कम से कम उसका अपमान करने का प्रयत्न तो न करें ! अगर फिर भी आपको भले और संवेदनशील लोगों का अपमान करने में ही आनंद आता है तो भी जान लें कि आपके खराब समय में जब आपका अपना कोई न हो उस समय भी खुशदीप और अजय झा जैसे लोग आपके पास खड़े होंगे !

अतः ऐसे लोगों को , अगर वे सौभाग्य से, आपके समाज और परिवार में हैं, उन्हें कम से कम इज्ज़त जरूर देते रहें, जिससे आपके बुरे समय में, आपके धूल धूसरित गर्व पर कोई तालियाँ न बजा रहा हो तो कुछ मित्र आपका साथ देने उस समय भी आपके पास हों ! याद रखियेगा बुरा समय हर इंसान के जीवन में एक बार अवश्य आता है !

मगर अजय का लेखन कम होना, अजय की कमजोरी दिखा रहा है  जो ऐसे जीवट वाले इंसान के लिए ठीक नहीं है ! उन्हें लिखना चाहिए ......

जिन मुश्किलों में मुस्कराना हो मना
उब मुश्किलों में मुस्कराना धर्म है !
जब हाथ से टूटे न अपनी हथकड़ी
तब मांग लो ताकत स्वयं जंजीर से
जिस दम न थमती हो नयन सावन झडी
उस दम हंसी ले लो , किसी तस्वीर से !
जब गीत गाना गुनगुनाना जुर्म हो ,

तब गीत गाना गुनगुनाना  धर्म है !  -नीरज 

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