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Tuesday, April 9, 2019

आदत भोजन की -सतीश सक्सेना

आज चौथा दिन है पारंपरिक भोजन का त्याग किये , रोटी , दाल , चावल, सब्जियां बंद किये हुए , और आश्चर्य है कि मन एक बार भी नहीं ललचाया और न भूख लगी न कमजोरी ...शायद इसलिए कि अपने आपको चार दिन पहले बे इंतिहा गालियाँ दी थीं , अपना वजन देखने के बाद अगर उस दिन मशीन न देखता तो पता ही न चलता कि मेरा वजन पिछले कुछ माह में सामान्य से ४ किलो अधिक हो चुका है ! शीशे में चमकती शक्ल दिखती है तोंद नहीं !

घर में बैठना एक अभिशाप है ख़ास तौर पर बड़ी उम्र वालों के लिए , सुबह नाश्ता ९ बजे से पहले , 12 बजे दाल चावल रोटी सब्जी अचार और चटनी के साथ, चार बजे लोंग इलायची की चाय के साथ श्रुस्बेर्री चाय बिस्कुट , 6 बजे लॉन में बैठकर मेहमानों के साथ चाय और आठ बजे स्वादिष्ट डिनर और तोंद पर हाथ फिराकर सो जाना, और सबसे बड़ी बेवकूफी यह है कि उम्र के नाते हमने खुद अपने हाथ से कुछ नहीं करना पूरे दिन , सब कुछ आर्डर देते ही हाजिर हो जाता है ! मतलब अभिशप्त बुढापे की हॉस्पिटल मौत साक्षात सामने है और दिखती नहीं !

 अधिक उम्र में सुस्वाद भोजन , जान देने की जगह जान लेने में समर्थ है , भारत में हर चौथा व्यक्ति हार्ट आर्टरी में रूकावट और डायबिटीज से पीड़ित है और ५० वर्ष से अधिक का हर आदमी बढ़िया भोजन पर ध्यान केन्द्रित किये रहता है , यह घातक है यह उन्हें मेडिकल व्यवसाय के निर्मम कसाइयों की तरफ ले जाएगा !

 हम बुजुर्ग पूरी दुनिया को लंबा जीने का आशीर्वाद देते रहते हैं जबकि अपने ऊपर कोई नसीहत लागू नहीं ! मगर इस बार चार दिन पहले खुद को गरियाने का असर वाकई हुआ उस दिन लिये संकल्प ने भूख की इच्छा ही खत्म कर दी इस परिणाम से मेरे इस विचार को दृढता मिली कि शरीर आपके मन से चलता है इसकी आवश्यकताएं न्यूनतम हैं ! हम जैसी आदत डालेंगे शरीर उसी में जीवनयापन करने में समर्थ है !

पहले दिन मैंने सुबह एक कटोरा पपीता जो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता खाया था और शाम को पांच छः टमाटर नीबू के साथ , बाकी पूरे इन दो बार ग्रीन चाय और एक वार कश्मीरी कहवा !
दुसरे दिन सुबह एक बड़ी प्लेट टमाटर काला नमक और नीम्बू के साथ और शाम को फिर पपीता ...
तीसरे दिन सुबह तरबूज ढेर सारा और शाम जीरा लौकी की सब्जी बड़ी प्लेट ...
आज चौथे दिन सुबह तरबूज ढेर सारा और पूरे दिन शिकंजी , ग्रीन टी और
यह पहली बार हुआ है कि चार दिनों में वजन ढाई किलो कम हुआ बिना भूख लगे , न कोई कमजोरी न सरदर्द !
अब आज से अपनी जबान पर कंट्रोल रखूंगा , काम नहीं तो भोजन नहीं इस व्रत का पालन पूरी शिद्दत से करूंगा इस भरोसे के साथ कि बिना काम किये खाना शरीर की जरूरत है ही नहीं , बिना भूख लगे भोजन करना ही नहीं है, चाहे कितने दिन हो जायें !

Friday, March 23, 2018

सिंपल ट्रथ : शुगर किल्स -सतीश सक्सेना

कल मॉल में घूमते हुए एक नौजवानों के ग्रुप को देखा सबके हाथ में एक मशहूर ब्रांड ऑरेंज जूस का एक बड़ा गिलास था और उनमें कोई भी मित्र 90 kg से कम नहीं था !
मुझे आश्चर्य है कि बहुत कम लोग जानते हैं कि इंसानों के भोजन में शुगर का कोई उपयोग नहीं और एक मजबूत व्यक्ति रोज सिर्फ 24 ग्राम शुगर ही बिना नुकसान सहन कर सकता है , मगर लोग रोज, मस्ती के साथ एवरेज 100 ग्राम शुगर आराम से खाते हैं जो कि पुरुषों के लिए सामान्य से चार गुनी है और महिलाओं के लिए 6 गुनी !
आज हर चौथा वयस्क भारतीय,चाहे वह मोटा हो या पतला, हृदय रोगी है और उसे यह पता ही नहीं ,ऐसे लोगों की पहचान करनी हो तो 10 सीढ़ियां चढ़ने के बाद,हांफते, रुकते लोगों को देख लीजिये और
मजेदारी यह कि यह सब संपन्न व्यक्ति, बाजार आकर, अपनी सेहत के लिए जूस अवश्य पीते हैं !
शायद आपको यह पता ही नहीं होगा कि बढे हुए बीपी एवं कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के लिए शुगर , नमक खाने से अधिक हानिकारक है !
किसी जमाने में खाते पीते सतीश को देखिये, फोटो में तोंद को छिपाने के लिए जैकेट पहनता था  अगर आप अब भी सावधान न हुए तो आपको सस्नेह मंगलकामनाएं ही दे सकता हूँ कि आपको असामयिक हृदय स्ट्रोक न आये !

Wednesday, May 17, 2017

जकड़े घुटने पकड़ के रोये , ढूंढ रहा उपचार आदमी -सतीश सक्सेना

अकर्मण्यता की आदत से, है कितना लाचार आदमी !
जकड़े घुटने पकड़ के बैठा , ढूंढ रहा उपचार आदमी !

मोटी चर्बी चढ़ी बदन पर, दूध भैंस का घी बूरा संग, 
भुला दंड बैठक धन आते, भूला ग्रामाचार आदमी !

हाथ पैर को बिना हिलाये, जब से वह धनवान बना,
रोक पसीना, शीतल घर में, करता योगाचार आदमी ! 

शक्ति गंवायी  बैठे रह कर , रोगों से बच पाने की  ,
खा ढेरों गोलियां घटाता अपनी रक्षा शक्ति आदमी !

नौकर धनबल शान औ शौकत से शरीर बरबाद किया  
पत्थर जैसा बदन गँवाकर करता शल्योपचार आदमी !

Monday, September 5, 2016

चुनौती खुद को - सतीश सक्सेना

भारत सरकार में 37 वर्ष सेवा करने के उपरान्त, आखिरकार 31 दिसंबर 2014 को रिटायर हुआ जिसमें मुझे साथी अधिकारियों द्वारा पूरे सम्मान के साथ, आखिरी विदाई समारोह आयोजित कर, सरकारी कार में घर तक पंहुचाया गया था !
पूरे जीवन एक कमी हमेशा रही कि विद्यार्थी जीवन से लेकर अब तक शारीरिक एक्सरसाइज पर कभी ध्यान नहीं दिया, सो भारतीय समाज में अभिशप्त रिटायरमेंट के बाद फैसला किया कि ढीले ढाले शरीर का कायाकल्प करूँगा ! बच्चों और परिवार जनों के सामने अपनी बीमारी में कराहते , लुंजपुंज, असहाय व्यक्तित्व मुझे सिर्फ दया के पात्र लगते थे ऐसे लोग अपने परिवार अथवा समाज को अपने विशद अनुभव से कोई भी दिशा देने में पूरी तौर पर असमर्थ थे , जिनके साथ शामिल होने को, मेरा मानस कभी तैयार न था !
अतः सबसे पहले अपना ही कायाकल्प करने का फैसला किया, और यह फैसला उस समय किया जब मैं मॉल में अथवा बाज़ार में घूमने को, सुबह का टहलना मान लिया करता था ! उन दिनों १ किलोमीटर अथवा आधा घंटा टहलने में कमर में दर्द हो जाता था ! दो दिन के मनन के बाद फैसला किया कि 
  • मीठा, आइसक्रीम और शुगर मोटापा बढ़ाने में सबसे अधिक रोल निभाती है अतः इसे बंद करना होगा !
  • पकौड़े, पापड , कश्मीरी दम आलू , पंजाबी दाल फ्राई , जीरा और प्याज परांठा , के साथ साथ हर प्रकार की शोरबे की मसालेदार मुगलई सब्जी छोड़नी होगी !
  • शराब और बियर का शौक़ीन नहीं था मगर परहेज भी नहीं करता था अगर अच्छी कंपनी हो तो दो पैग ड्रिंक्स या गर्मी के दिनों में एक बियर पीना हमेशा आनंददायक लगता था , इसके साथ काजू अथवा पनीर कहकर आसानी से भारी भरकम कैलोरी मिलती थी , उसे बेहद कम करना होगा !
  • दूध की चाय और साथ में नमकीन कुरकुरे नमकपारे , तली नमकीन मूंगफली तुरंत बंद करनी होगी !
  • रात का डिनर बेहद हल्का एवं सात बजे से पहले खाना होगा !
  • बचपन से छोड़ी हुई हरी सब्जियां एवं अंकुरित सलाद के साथ कम से कम एक फल रोज अवश्य खाना होगा 
  •  जमीन पर उकड़ू बैठकर चलना, एवं रोज पांच मंजिल सीढिया चढ़ना सीखना होगा !
  • पार्क में सुबह ५ बजे उठकर , हलकी एकसार गति से , हांफना शुरू होने तक धीमे धीमे दौड़ना होगा 
यह सब करना मेरे जैसे आलसी और बढ़िया खाने के शौक़ीन व्यक्ति के लिए एक सज़ा से कम न था मगर सवाल 61 वर्ष की उम्र में कायाकल्प का संकल्प लेने का था और हार जाना स्वीकार कभी नहीं था सो यह संकल्प लिया कि इसे अपने ऊपर लागू कर अपने परिवार के बच्चों के लिए एक नयी दिशा छोड़ने में कामयाब रहूंगा !
बुढापे में आकर नए सिरे से 35 वर्षीय जवान बनने की क्रिया आसान नहीं थी , शुरुआत से ही आलसी मन ने अड़चने डालनी शुरू कर दी , पैरों में दर्द रोज होता था , मन हमेशा सलाह देता रहता था कि घुटने बर्बाद कर लोगे बुड्ढे , दौड़ना बिलकुल बेकार है आदि आदि  ... 
कुछ दिनों में ही समझ में आ गया कि यह मन जीतने नहीं देगा और मज़ाक बन जायेगी इस संकल्प की , सो दो माह बाद होने वाले हाफ मैराथन ( 21 km ) रनिंग का फार्म भर दिया और परिवार व् नज़दीक मित्रों में घोषणा कर दी !
और इज़्ज़त बचाने के लिए हांफते हांफते भी हाफ मैराथन दौड़ना ही पड़ा और  जब मैंने यह असंभव जैसा कार्य कर लिया तब आत्मविश्वास से सराबोर अगले ४ माह में ही , 3 हाफ मैराथन सहित दसियो मैडल आसानी से हासिल किये ! 
और मैं जीत गया अपने संकल्प में, सिर्फ ८ माह की मेहनत में..... 
जीवन भर पसीने से चिढ़ने वाले व्यक्ति ने , लगातार 3 घंटे दौड़ने के साथ, शरीर से ३ लीटर पसीने के साथ साथ जमा चर्बी बहने का सुख भी महसूस कर लिया था ! 
काया कल्प इतना आसान था, ये पता होता तो बहुत पहले कर लिया होता !

Saturday, May 3, 2014

आदत बदलो यार, नहीं तो जल्दी जाओगे -सतीश सक्सेना

                           डायबिटीज़, ब्लडप्रेशर, मोटापा, एसिडिटी एवं गैस यह सामान्यतः हर घर में मौजूद हैं , कारणों को जानने का न समय है और न रूचि , बस ड़ाक्टर ने, कुछ दवाएं खाने मे और बढ़ा दी हैँ !
हज़ारो वर्ष से मानव जमीन पर रह रहा है , प्रकृति के विपरीत, मानव जनित भोज्य सामग्री से, सबसे अधिक हानि मानव ने ही उठायी  है ! 
प्रकृति ने जीवात्माओं को जन्म के साथ ही,उसमें प्राकृतिक तौर पर, समझ विकसित कर दी थी !
  • हमें उसने लगातार,सांस लेने की  मशीनरी दी जिससे रक्त स्वच्छ रहे !प्राणस्वरूप हवा,जीने का आधार थी ! जिसकी आज हम कद्र नहीं करते हैं ! गहरी सांस लेने के भी फायदे हम भूल गये 
  • उसने बचपन मे, हमें माँ का दूध दिया , और कुछ समय बाद दूध सुखा कर हमारे दांत निकाले , जिससे अब हम ढूध छोंड़कर , हम अन्न , फल और पत्ते खा सकें ! प्रकृति द्वारा, माँ का दूध सुखाने का अर्थ, बड़े होते मानव  का अनावश्यक तेलीय दूध बन्द कर, अन्न फल सब्जियों पर आश्रित करना था !
  • प्राकृतिक भोजन में , तेल और और फ़ैट बेहद कम मात्रा में उपलब्ध थे , मगर इन्सान ने उसका  अधिक मात्रा में निकाल कर परांठे,समोसा,पूरी,लड्डू, एवम चीनी जैसे केमिकल आदि बनाकर खाने शुरु कर दिये जो निर्धारित और प्रकृतिक मात्रा से, बेहद अधिक खतरनाक थे !
  • प्रकृति ने मानव शरीर में , अपने आपको स्वस्थ करने के लिये सेल्फ हीलिंग सिस्टम दिया था , मगर इन्सान ने अपनी बुद्धि चलाते हुए, उसमें व्यवधान उत्पन्न करना शुरू कर दिया ! बुखार द्वारा शरीर अपने आपको ठीक करने का प्रयत्न करता है तब इन्सान की कोशिश बढे हुए टेंप्रेचर को कम करने की रहती है ! फोड़े द्वारा प्रकृति, शरीर के बढे हुए इन्फेक्शन को एक जगह केन्द्रित कर, उसे पस स्वरूप में बाहर निकालना चाहता है तब हमलोग उस फोड़ें से निज़ात पाने के लिये , उसे सुखाने का प्रयत्न करते हुए, शरीर मे बेहद खतरनाक एंटी बायोटिक्स एवम जान लेवा स्टीरॉइड , प्रवेश करा रहे होते हैं !हमने मानव शरीर के प्रतिरक्षा सिस्टम को केमिकल दवाओं द्वारा बरवाद  करने की कसम खा रखी है !
  •  पहले इन्सान को जीवन यापन के लिये रोज लगभग १० किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था और अब इन्सान सब्जी लेने भी, कार से जाना चाहता है और पचास वर्ष पूरे करते करते,घुटनों का आपरेशन करा चुका होता है !
                             सो बुद्धिमान मित्रों,  मैने पिछले ६ माह से अपनी साइंटिफिक बुद्धि का कम प्रयोग करते हुए , प्राकृतिक वस्तुओँ पर निर्भरता बढ़ायी है एवम सुबह ४५ मिनट टहलने के अतिरिक्त , ४५ मिनट शुद्ध वायु को फेफड़ों में भरते और निकालते हुए , बन्द पड़े, जंग लगे फेफड़े खोलना शुरु किया है , इससे रक्त आश्चर्यजनक रूप से साफ़ हुआ है और ४ मंजिल  सीढियाँ चढ़ने में,  हांफना बन्द हो गया , क्या कहते हैं टचवुड  !! 
                             सबसे खतरनाक केमिकल चीनी चाहे वह किसी भी रूप मे हो , का त्याग हमेशा के लिये करके अपने  स्वास्थ्य  को, ३५ वर्षीय बनाये रखने में कामयाबी हासिल की है ! परांठे, समोसे , जलेबी और बेहद गंदे तरीके से बनायी मिठाइयां बंद कर मित्रों के साथ खूब हँसता हूँ व हंसाता हूँ !
इस वक्त ६० वर्ष की जवानी में,  डायबिटीज़ , गैस , एसिडिटी , बीपी , जॉइंटपेन , सरदर्द , तनाव, दांत और बालों  समस्याओं से मुक्त हूँ !  एलोपैथिक दवा व उपायों से हमेशा दूर रहता हूँ , यहां तक कि साबुन और टूथ पेस्ट  का उपयोग नहीं करता क्योंकि जब शेर अपने सबसे आवश्यक मज़बूत दांत कभी नहीं माँजते  तो मैं केवल इसलिए मांजू कि सब लोग क्या कहेंगे  ??
माय फुट !!

Friday, February 28, 2014

वे आवारा क्या समझेंगे ! -सतीश सक्सेना

जिनको माँ घर में बोझ लगे वे नाकारा क्या समझेंगे !
पशुओं जैसा जीवन जीते वे आवारा क्या समझेंगे !


कुछ जीव हमेशा बस्ती में, कीचड़ में ही रहते आये !
गंदे जल में रहने वाले, निर्मल धारा क्या समझेंगे !

वृद्धों को भरी बीमारी में, असहाय अकेले छोड़ दिया,
सर झुका नहीं माँ के आगे ठाकुर द्वारा क्या समझेंगे 

जानवर कहाँ ममता जानें हर जगह लार टपकाएंगे 
माँ के धन पर नज़रें रखते वे भंडारा क्या समझेंगे !

ये क्रूर ह्रदय, ऐसे ही हैं , हंसों के संग, न रह पायें !
अपने ही बसेरे भूल गए, वे गुरुद्वारा क्या समझेंगे !


Tuesday, February 25, 2014

जैसे तैसे बचा के रख्खा, लूट लिया मुस्कानों ने -सतीश सक्सेना

जिस दिन सूरज को ग़ुस्से में देखा दुनिया वालों ने, 
आसमान में अफ़रातफ़री ,पायी चाँद सितारों ने !

निज घर में ही सेंध लगाई, घर के ही मक्कारों ने
जो घर वालों से बच पाया , लूटा चौकीदारों ने !

धुएँ के छल्लों ने देखा है, मदहोशी के आलम में, 
जो कुछ साक़ी से बच पाया लूट लिया दरबानों ने ! 

ऐसे क्यों पहचान न पाये, मास्क लगाये लोगों को !
कुछ तो भावुकता ने लूटा, कुछ अपने घर वालों ने ! 

जिन जिन को ले रहे भागते, नंगे पैरों भूखे प्यासे 
जीवन भर ही लाभ लिया था, कैसे कैसे यारों ने !

Thursday, February 20, 2014

आदतें पशुओं के जैसी, जानवर घबराएंगे ! - सतीश सक्सेना

मानवों की बस्तियों में , बेजुबां मर जाएंगे !
दूध के बदले उन्हें हम प्लास्टिक खिलवाएंगे

हम जहाँ होंगे ,वहीँ कुछ गंदगी बिखरायेंगे !
आदतें पशुओं के जैसी, जानवर  घबराएंगे !

हर मोहल्ले में,जिधर देखो, उधर कूड़ा पड़ा !
भिनभिनाती मख्खियों के साथ,बच्चे खायेंगे !

जाहिलों के द्वार, ये  आये हैं  खाना ढूंढते !

सडा खाना पन्नियों में डालकर खिलवाएंगे !

जूँठने , थैली में भरकर, घर के बाहर है रखी !

गाय देती दूध हमको, हम जहर खिलवाएंगे !

Tuesday, November 12, 2013

आप भक्त हैं या भांड - सतीश सक्सेना

क्या किसी राजनेता का भक्त कहलाने से आप गर्व महसूस करते हैं ?
- खास तौर पर भारत में , अक्सर राजनेता भ्रष्टाचार में लिप्त पाये जाने के बाद, वे चोरी के आरोप में जेल जाते हैं या जायेंगे ! 


-आप लोग किसी बच्चे के पिता और अपने घर के मुखिया हैं , आपकी पीठ पर एक राजनीतिज्ञ का लिखा नाम सबको नज़र आता होगा कि आप इस व्यक्ति के "आदमी" हैं , क्या आपके पीठ पर सिर्फ आपका नाम नहीं होना चाहिए ?


-किसी जमाने में राज दरवार के भांड हुआ करते थे जो अपने राजा की वंदना गाया करते थे क्या हम लोग उसी प्रथा का अनुसरण कर रहे हैं

- मेरा अनुरोध है कि कहें हम किसी के आदमी नहीं हैं , हमारा अपना स्वतंत्र व्यक्तित्व है , शायद यह सुन हमारे बच्चों को शक्तिशाली होने का अहसास होगा क्योंकि वे अपने पिता को दुनिया का सबसे शक्तिशाली आदमी समझते हैं ! किसी अन्य का नाम हमारी पीठ पर लिखा देख, निस्संदेह हमारे बच्चे अपने आपको शर्मिंदा पाएंगे !


-कृपया कहें कि हम किसी के भांड नहीं हैं और न बिकाऊ हैं ! विचारों का सपोर्ट करें मगर व्यक्ति का नहीं ! वह हम जैसा ही है, उसमे वे तमाम ऐब और कमजोरियां हैं जो हम सबमें होती हैं , उसे भगवन बना कर आप ईश्वर का अपमान और अपनी बेवकूफी उजागर कर रहे हैं !

अपने आपको किसी का भक्त न बताएं ! इससे आपके परिवार का स्वाभिमान सुरक्षित रहेगा !


आदर सहित, मात्र विचार करने के लिए अनुरोध !!

Tuesday, June 11, 2013

लोगों का क्या,चलते फिरते, सूरज पर थूका करते हैं -सतीश सक्सेना

लोगों का क्या,चलते फिरते,सूरज गरिआया करते हैं !
रोशनी भूलकर गरमी पर , कोहराम मचाया करते  हैं  !

गर्वीले मद में,जीवन भर,अपमान किया था अपनों का ,
निज घर में ही,लुट जाने पर,क्यों जान गवाँया करते हैं !

जीवन भर, जोड़ घटाने में, न मदद किसी की कर पाए !

अब बिखरे सब रिश्ते नाते,फिर क्यों पछताया करते हैं !

जब शक्ति बहुत थी भूल गए अपने ही संगी साथी को !
अब घर में बैठ, जवानी  के, यश गान सुनाया करते हैं ! 

अब तो छोडो बीती बातें , हंस कर, अपनों से बात करें ! 
मांगलिक कार्य के मौकों पर,क्यों भूत जगाया करते हैं !

Wednesday, December 1, 2010

हमारी देसी आदतें - सतीश सक्सेना

खुशदीप सहगल के द्वारा अपनाए जा रहे देसी ट्रेफिक नियमों की लिस्ट देख , हमारा भी, देसियों के द्वारा अपनाए जा रहे कुछ और नियम, बताने का दिल कर गया ! सो हमारे कुछ देसी रूल देखिये !
  • विश्वस्तरीय मेट्रो की सफाई देख कर बड़ा गुस्सा आता है ....उस पर लिख रखा है कि थूकने पर जुरमाना ! स्टील के थूकदान में थूकना अच्छा नहीं लगता ! मुँह में भरी पीक, निगाह बचा कर कोने में पिचकारी मानने में कितना आनंद है, यह जानने के लिए पान खाना सीखिए ! 
  • ट्रेफिक लाइट पर खड़े खड़े, गाड़ी से फालतू कागज़, रबर मैट को सड़क पर झाड़ना, खाली फ़ूड रैपर , पानी की बोतल आदि सड़क पर फेंकने में कोई बुराई नहीं है  ! समय बचता है !
  • ग्रीन लाइट पर भी , पैदल चलने वालों को , तेज निकलती गाड़ियों को, हाथ से रुकने का इशारा देते हुए,निकलने का मज़ा ही कुछ और है ! पैदल चलने वालों का चालान नहीं होता अतः निश्चिन्त रहें ! 
  • आपात स्थिति में, रास्ते से हटने के लिए सायरन बजाती एम्बुलेंस , के आगे अपनी गाडी को रखें और चलते जाएँ ! रास्ता साफ़  मिलता है  ! एम्बुलेंस में, जीवन से जद्दोजहद करते व्यक्ति से, कौन हमारा कोई रिश्ता है ? 
  • जगत माता के नाम पर, जागरण के लिए पैसे उगाहने के लिए कोई मना नहीं कर पायेगा ! फिर उस रात पूरे मोहल्ले के बच्चों को पढने मत दीजिये ! वृद्ध और बीमारों को नींद आये न आये , क्या फर्क पड़ता है  ?
  • शाम को पार्क में बैठ परिवार के साथ पिकनिक मनाइये और खाली बियर केन,चिप्स पैकेट प्लास्टिक थैली और बोतल वहीँ डाल दीजिये ताकि सनद रहे कि हम यहाँ बैठे थे  !

Friday, June 6, 2008

किसी घटिया दिल का उपहास उड़ाने का दिल करता है -सतीश सक्सेना

लड़कियां घूरें आँखें फाड़ ,

उम्र में लगते बाप समान 
न आता मर्यादा का ध्यान 
हमारे मन में उठें सवाल ,
किसी के गंजे सर पर , 
हाथ फिराने का दिल करता है !
किसी घटिया दिल का उपहास उड़ाने का दिल करता है !

बने फिरते गाँधी के शिष्य
आचरण पर देते व्याख्यान
सुरा सुंदरियों में है मस्त,
देश के नेता बने महान
भरे चौराहे इनको जूत, 

लगाने का दिल करता है !
किसी घटिया दिल का उपहास उड़ाने का दिल करता है!

पढाएँ कक्षा में मन मार
बेचते शिक्षा खुले बाज़ार
पुराने गुरुकुल के वे गुरु
और ये गुरु के नाम कलंक
हमारा अपने सिर के बाल 
नोचने का दिल करता है !
किसी घटिया दिल का उपहास उड़ाने का दिल करता है !!
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