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Sunday, July 2, 2017

हिन्दी लेखन में ब्लॉगर -सतीश सक्सेना

ब्लॉग लेखन में कोई संदेह नहीं कि टिप्पणियां जीवनदान का काम करती हैं , अगर सराहा न जाय तब बड़े बड़े कलम भी घुटनों के  बल बैठते नज़र आएंगे ! मेरे शुरुआत के दिनों में उड़नतश्तरी की त्वरित टिप्पणियों का बड़ा योगदान रहा है और आज भी मैं उनका शुक्र गुज़ार हूँ,  तब से अब तक 584 से अधिक रचनाएं , गद्य अथवा पद्य के रूप में ब्लॉग पर लिख चुका हूँ तथा पाठकों से 16649 टिप्पणियां एवं कुल 518380 पेज व्यू  मिले हैं ! यह पाठक ही हैं जिन्होंने इन्हें मन से सराहा और उन के कारण कलम को सहारा मिलता रहा !

किसी भी रचनाकार के लिए, ध्यान से पढ़ के दिया गया कमेन्ट, प्रेरणा दायक होने के  साथ साथ, उसके कार्य की समीक्षा और सुधार के लिए बेहद आवश्यक होता है , और मैं आभारी हूँ अपने उन मित्रों का जो लगातार मुझे पढ़ते रहे और उत्साह देते रहे ! इस बीच जब जब लेखन से मन उचाट हुआ इन्होने मुझे आकर जगाया और कहा कि लिखिए हमें पढ़ना है, और इन्ही मित्रों के कारण, कलम आज भी गति शील है !

साधारणतया ब्लॉग लेखन का एक उद्देश्य, अपने आपको स्थापित करने के साथ साथ, लोकप्रियता हासिल करना तो निस्संदेह रहता ही है, अपनी तारीफ़ सभी को अच्छी लगती है बशर्ते वह योग्य लोगों द्वारा पढ़ कर की जाए !  अक्सर टिप्पणियों के बदले में, लेख अथवा कविता को बिना पढ़े मिली ब्लोगर वाहवाही, अक्सर हमारे ज्ञान का बंटाधार करने को काफी है ! केवल वाहवाही की टिप्पणियां हमारे अहम् और फ़र्ज़ी प्रभामंडल को बढाने में ही सफल होती हैं चाहे हमारा लेखन कूड़ा ही क्यों न हो !

मेरा यह मानना है कि ब्लोगिंग के जरिये लेखन में विकास , भाषा  के साथ साथ , मानसिकता में बदलाव भी लाने में सक्षम है जो शायद भारतीय समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है !
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Monday, February 8, 2016

नुक्कड़ भी अचानक से ही अनाथ हो गया - सतीश सक्सेना

अविनाश वाचस्पति ब्लॉगिंग सभा संचालित करते हुए 
नुक्कड़ भी अचानक से , ही अनाथ हो गया ! 
ऐसा भी क्या हुआ, ये चमन ख़ाक हो गया !

अविनाश के जाते ही,कुछ सुनसान सा लगे 
ब्लॉगिंग में मुन्नाभाई भी, इतिहास हो गया !

कितने दिनों से लड़ रहा था, मौत से इकला
जीवन में जी लिए हैं, ये  अहसास हो गया !

दर्दों में भी हँसता रहा, अविनाश अंत तक 
आखिर ये ज़ज़्बा मस्त भी खलास हो गया !

इक दिन तो मुन्ना भाई,वहां हम भी आएंगे,
अखबार में छपेगा  कि , अवसान हो गया !

Wednesday, September 25, 2013

उद्देश्य ब्लोगिंग का - सतीश सक्सेना

सन २००५ में पहली बार अपना ब्लोगर अकाउंट बनाया था , मगर पहली पोस्ट २४ मई २००८ को प्रकाशित की गयी जब मैंने अपनी पहली कविता "गुडिया के मुख से" ब्लॉग पर लिखी ! ब्लॉग जगत में आने से पहले अपनी रचनाएं डायरी में ही लिखी थीं , और हमेशा लगता था कि यह रचनाएं कहीं खो न जाएँ मगर ब्लॉग पर प्रकाशित करने के बाद ऐसा लगा कि अब वे एक दस्तावेज के रूप में नेट पर हमेशा सुरक्षित रहेंगी !

तब से अब तक ३५० से अधिक रचनाएं गद्य अथवा पद्य के रूप में ब्लॉग पर लिख चुका हूँ और बहुत बड़ा सुकून है कि उन्हें कुछ विद्वान् पाठक भी मिले जिन्होंने इन्हें मन से सराहा और उन के कारण कलम को सहारा मिलता रहा !

किसी भी रचनाकार के लिए, ध्यान से पढ़ के दिया गया कमेन्ट, प्रेरणा दायक होने के  साथ साथ, उसके कार्य की समीक्षा और सुधार के लिए बेहद आवश्यक होता है , और मैं आभारी हूँ अपने उन मित्रों का जो लगातार मुझे पढ़ते रहे और उत्साह देते रहे ! इस बीच जब जब लेखन से मन उचाट हुआ इन्होने मुझे आकर जगाया और कहा कि लिखिए हमें पढ़ना है, और इन्ही मित्रों के कारण, कलम आज भी गति शील है !

साधारणतया ब्लोगर लेखन का एक उद्देश्य, अपने आपको स्थापित करने के साथ साथ, लोकप्रियता हासिल करना तो निस्संदेह रहता ही है, अपनी तारीफ़ सभी को अच्छी लगती है बशर्ते वह योग्य लोगों द्वारा की जाए !  टिप्पणियों के बदले में, लेख अथवा कविता को बिना पढ़े मिली ब्लोगर वाहवाही, अक्सर हमारे ज्ञान का बंटाधार करने को काफी है ! केवल वाहवाही की टिप्पणियां केवल अहम् और अपने प्रभामंडल को बढाने में ही सफल होती हैं चाहे हमारा लेखन कूड़ा ही क्यों न हो !

मेरा यह मानना है कि ब्लोगिंग के जरिये लेखन में विकास , भाषा  के साथ साथ , मानसिकता में बदलाव भी लाने में सक्षम है जो शायद भारतीय समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है !

हाल में वर्धा विश्वविद्यालय ने ब्लोगिंग पर एक सफल राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया था जिसके संयोजक सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी थे और जहाँ कई विशिष्ट एवं विद्वानजनों ने भाग लिया था ऐसे सम्मेलन ब्लोगिंग के उत्थान के लिए, बेहद आवश्यक है बशर्ते कि आयोजकगण  ईमानदारी से कार्य करें और इन स्थलों तक आम गंभीर ब्लॉगर को पंहुचा सकें ! सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी इस सम्बन्ध में निर्दलीय और चमचा रहित हैं और आशा है वे इस उत्तरदायित्व को इसी प्रकार निर्वाह भविष्य में भी करते रहेंगे ! उनका इस क्षेत्र में रहना ही, हिंदी ब्लोगिंग के उत्साहवर्धन के लिए काफी है !

कुछ लोग ब्लोगिंग का उपयोग, वैमनस्य फैलाने के लिए भी करते हैं , अपने अपने ग्रुप बनाकर , अपने छिपे उद्देश्य को सिरे चढाने के लिए , यह लोग लेखनी और प्रतिभा का बेहद दुरूपयोग करते हैं उनसे अवश्य हमें सावधान रहना चाहिए  . . . 

पढ़े लिखों की बातों से यह गाँव सुरक्षित रहने दो !
सुना है,बन्दर बाँट रहे हैं,जीत के परचे,दुनियां में !

ज़हरी बातें, नहीं सिखाओ, इन्हें प्यार से जीने दो !
हमें पता है,स्वर्ग के दावे,कितने कच्चे दुनियां में ! - सतीश सक्सेना 

लेखन अमर है , यह ख़ुशी की बात है कि  हिंदी के पाठक देश के साथ, विदेशों में भी बढ़ रहे हैं , मेरे कई पाठक ख़ास तौर पर अमेरिका में , मेरे गीत की रचनाओं को पढने बार बार और लगभग रोज ही आते हैं, यह महसूस कर, अपने लेखन को सफल मान लेता हूँ ! कल को हम नहीं होंगे मगर यह लेखन अवश्य होगा मुझे याद है कि पिछले साल, जहाँ अलेक्सा, इस ब्लॉग का रैंक, लाखों  में दिखा रही थी वहीँ  आज इसका अलेक्सा रैंक ३०२०८ है और यह प्रसिद्धि इस लेखनी को इसी ब्लोगिंग से मिली अन्यथा सतीश सक्सेना को कौन जानता था ?

satish-saxena.blogspot.in

Alexa Traffic Rank
Traffic Rank in IN


अंत में सिर्फ यह कहना है कि किसी बात का विरोध करने पर ध्यान रहे कि वहां एक हद मुक़र्रर अवश्य रहे :)

अरसे बाद, पड़ोसी दोनों, साथ में  रहना सीखे हैं !
अदब क़ायदा और सिखादें,शेख मोहल्ले वालों को ! - सतीश सक्सेना 

Monday, June 17, 2013

अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर शिरोमणि अवार्ड में भाग लें -सतीश सक्सेना


बहुत दिनों से मन बड़ा बेचैन था , सो सोंचा खुशदीप भाई के घर चलते हैं वहां जाकर देखा वे मत्था पकडे बैठे हैं ...

कारण पूंछने पर जो उन्होंने बताया वह अब आप उनकी जबान में ही सुनें ..

मक्खन रोज़ छत पर कपड़े धोने के लिए बैठता... लेकिन उसी वक्त झमाझम बारिश शुरू हो जाती...मक्खन बेचारा सोचता, कपड़े धोने के बाद सूखेंगे कैसे....बेचारा मन मार कर अपने कमरे के अंदर चला जाता...एक दिन मक्खन कमरे से बाहर निकला तो देखा...


कड़कती धूप निकली हुई थी...मक्खन ने सोचा...आज मौका बढ़िया है, कपड़े धोने का...मक्खन ने कपड़े धोने का सब ताम-झाम बाहर निकाला...

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लेकिन ये क्या सर्फ तो डिब्बे में था ही नहीं...मक्खन फटाफट गली के बाहर जनरल स्टोर की तरफ़ भागा...मक्खन जनरल स्टोर के अंदर ही था कि अचानक बादल ज़ोर ज़ोर से गरजने लगे...दिन में ही अंधेरा छा गया...मक्खन जनरल स्टोर से बाहर निकला...दोनों हाथ झुलाते हुए आगे पीछे करने लगा और फिर बड़ी मासूमियत से आसमान की तरफ़ देखकर बोला...



होर जी, किंदा....मैं ते एवें ही बस...बिस्किट लैन आया सी...तुसी गलत समझ रेयो जी...

                           उस दिन मुझे खुशदीप भाई ने मक्खन से पहली बार मिलवाया , साथ ही बताया कि मक्खन मेरा सारा काम  भी  देखता है , दिमाग का कुछ अधिक तेज होने के कारण मुझे हर समय इस पर निगाह रखनी पड़ती है ! उन्होंने पब्लिक से इसका परिचय कभी नहीं कराया , और साथ ही मुझसे भी वायदा लिया कि वे इसे किसी को बताएँगे भी नहीं ! हाँ हिंट देते हुए मैं बता दूं कि मक्खन खुद एक ब्लोगर है जो ब्लोगिंग समुदाय में एक मशहूर साहित्यकार के रूप में बेतहाशा ख्याति और पुरस्कार के साथ साथ घने नोट भी कूट रहा है  !

           कृपया उपरोक्त चित्रों में एक सज्जन मक्खन है अगर आप सही पहचान सके तो आपको "अंतरार्ष्ट्रीय  ब्लोगर शिरोमणि " का अवार्ड प्रदान किया जाएगा  इस अवार्ड विजेता का चयन किसी मशहूर ब्लोगर की अध्यक्षता वाली एक कमिटी करेगी जिसके चेयरमैन शिप  के लिए अनूप शुक्ल , समीर लाल  और खुद मक्खन दौड़ में हैं  ! इसके लिए भी ब्लोगरों से वोटिंग कराई जायेगी !


             तो आइये इस मक्खन ढूंढो प्रतियोगिता में हिस्सा लें और  "अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर शिरोमणि" पुरस्कार प्राप्त करें !
              यह पुरस्कार देने की जगह अभी मुक़र्रर नहीं हुई है मगर अगर कनाडा में हुआ तो समीर लाल जी ने ब्लोगरों के आने जाने का टिकट एवं रहने की व्यवस्था मुफ्त देने का वायदा ताऊ से कर दिया है ..
और यही वायदा अनुराग शर्मा उर्फ़ स्मार्ट इन्डियन ने भी किया है बशर्ते प्रतियोगिता पिट्सबर्ग में आयोजित की जाए ! 
              अग्रिम बधाई आप सबको ...

Thursday, June 14, 2012

ब्लोगर साथियों का स्नेह आवाहन -सतीश सक्सेना


इस दुनियां में मुझसे बेहतर 
गीत, सैकड़ो लिखने वाले  ! 
मुझसे अच्छा कहने वाले, 
मुझसे  अच्छा गाने वाले  !
यह प्रयास भी सार्थक होगा,अगर आप आ जाएँ मीत !
मात्र उपस्थित होने से ही ,  गौरव शाली   मेरे  गीत  !


आज तुम्हारे पदचापों  की     
सांस रोककर आशा करता 
तेज धूप में घर से  निकलें  
रफ़ी मार्ग,आवाहन करता 
देखें कितना प्यार भरा है,कितने घर तक पंहुचे गीत !  
कड़ी  धूप में , घर से बाहर, तुम्हें बुलाते मेरे गीत  !


कौन हवन को पूरा करने
कमल, अष्टदल लाएगा ?
अक्षत पुष्प हाथ में लेकर
कौन साथ में, गायेगा  ?
यज्ञ अग्नि में समिधा देने,तुम्हें बुलाते मेरे मीत !
पद्मनाभ की स्तुति करते , आहुति देते मेरे गीत !


मेरे गीत का पुस्तक परिचय संगीता स्वरुप जी की कलम द्वारा  उनके ब्लॉग "गीत मेरी अनुभूतियाँ " पर जानिये , उनकी शैली और कलम मिल जाने से निस्संदेह  मेरे गीत गौरवान्वित हैं !
आभार इस स्नेह के लिए !

Sunday, July 31, 2011

हिंदी ब्लोगिंग में स्नेह और प्यार -सतीश सक्सेना

डॉ टी एस दराल ने एक पोस्ट लिखी जिसमें चार ब्लागर साथियों  के द्वारा एक साथ बैठकर किये गए भोजन का जिक्र था , जिसमें आत्मीयता की एक गहरी झलक दिखती थी ! डॉ अरविन्द मिश्र के दिल्ली आगमन पर डॉ दराल साहब की तरफ से दिए गए, इस भोज पर वीरू भाई भी उपस्थित थे यकीनन चार ब्लागरों  का यह मिलन, नायाब ही था मगर इसने मुझे अन्य कई ब्लोगर भोजों की याद दिलाई और यकीन करें, किसी में भी गर्मजोशी की कमी नहीं पायी गयी !
दिल्ली में मुझे ब्लोगर मीटिंग का पहला मौका, अजय कुमार झा के जरिये मिला था जब उन्होंने एक खुला आमंत्रण देकर हम लोगों को एक जगह इकट्ठा करने का प्रयत्न किया था और लगभग  ४ घंटे चले इस  सम्मलेन  में ब्लागिंग की असीमित क्षमताओं पर अच्छा विमर्श किया गया !
इसमें शिरकत करने वालों में, इंग्लॅण्ड से डॉ कविता वाचक्नवी एवं जर्मनी से राज भाटिया ,  पंडित डी.के.शर्मा "वत्स" , खुशदीप सहगल , डॉ टी एस दराल आदि लोग मौजूद थे ! 

ब्लागर मीटिंग्स के नाम के साथ  अविनाश वाचस्पति का नाम  अवश्य जुड़ता है, सब लोगों को जोड़ने का उनका उत्साह, नवोदितों के लिए ,हिंदी ब्लागिंग की शक्ति  को ,नए शिखर पर  पंहुचाने के  लिए बहुत हिम्मत देगा  !
आज भी नए लोगों से, मिलने की इच्छा होते हुए भीं, हर जगह पहल की कमी महसूस होती है ! इस प्रकार के सम्मलेन और मुलाकातें, निस्संदेह एक नवीन वातावरण के निर्माण में मदद देगी ! फलस्वरूप न केवल आपसी स्नेह बढेगा बल्कि आप अपनी शक्ति को भी बढ़ते हुए महसूस करेंगे !  मेरे अपने द्वारा, ब्लॉग जगत में रूचि बढ़ने का एक अच्छा कारण यह मुलाकातें रहीं जहाँ मैं प्रत्यक्ष रूप से, अपने पसंद के लेखकों को आमने सामने सुन सका  ! जिन लोगों  से मैं मिल चूका हूँ ,पहली मुलाकात में ही समीर लाल , रचना , अविनाश वाचस्पति ,रविन्द्र प्रभातखुशदीप सहगल , डॉ दराल ,ताऊ रामपुरिया, योगेन्द्र मौदगिल, सलिल वर्मा, अनूप शुक्ल, बी एस पाबला ,राज भाटिया, शाहनवाज़, निर्मला कपिला,ललित शर्मा ,रतन सिंह शेखावत,  अमरेन्द्र त्रिपाठी, दिनेश राय द्विवेदी,सुनीता शानू  स्मार्ट इंडियन ,राजीव तनेजा ,शहरोज़, दीपक बाबा, एवं डॉ अरविन्द मिश्र ने, अपनी  शख्शियत की , एक गहरी छाप छोड़ी !
 हिंदी लेखन क्षेत्र में , ब्लोगिंग की उपलब्धियों को नकारा नहीं जा सकता ! गूगल के द्वारा दिए गए प्लेटफार्म के जरिये हिंदी भाषा में जो काम, अब तक हो चुका है ,कुछ वर्ष पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी ! जिन लोगों ने, सार्वजनिक मंच पर , अपनी अभिव्यक्ति लाने के बारे में कभी सोंचा भी नहीं होगा, वे अब ब्लोगिंग के जरिये अपने विचार न केवल धड़ल्ले से व्यक्त कर रहे हैं बल्कि खासे सफल भी हैं !
इसमें कोई संदेह नहीं कि जहाँ हम लोग, इस शानदार प्लेटफार्म के जरिये ,एकता के सूत्र में बंधने में कामयाबी मिलने की आशा कर रहे हैं वहीँ यहाँ कुछ लोग अपने कट्टर राजनीतिक, धार्मिक विचारों को भी स्वर देने का प्रयत्न कर रहे हैं ! अपरिमित सीमायें होने से, ब्लॉग जगत लगभग हर क्षेत्र में  ही अपना सफल योगदान कर रहा है !
ब्लाग जगत में, एक से एक विद्वान् कार्यरत हैं , जिन्हें पढना ही सौभाग्य माना जाता है, मगर अक्सर वे भिन्न विचार धाराओं से जुड़े रहने के कारण एक साथ नहीं बैठ पाते ! विभिन्न राजनैतिक पार्टियों , समाजों और धर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाले मनीषी, अगर एक स्थान पर जुड़ सकें तो विद्वानों का कुम्भ होने का सपना पूरा हो सकता है ! 


पिछले कुछ दिनों से यह देखा जा रहा है कि ब्लोगिंग में पहले से कार्यरत लोगों की दिलचस्पी कुछ कम हुई है !  इस सम्बन्ध में खुशदीप सहगल का एक लेख आया था जिसमें इस प्रवृत्ति की और चिंता प्रकट की गयी थी ! मुझे लगता है देर सबेर यह संक्रमण काल भी गुजर जाएगा यदि हम लोग लेखन गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें  !
हजारों तरह के लोग , यहाँ अपनी अपनी समझ के अनुसार लिख रहे हैं  , स्वाभाविक है कि जिस  क्वालिटी की मानसिकता होगी, लेख में उसी समझ की झलक नज़र आएगी  ! पाठकों की वाह -वाह करती टिप्पणियों की बेपनाह शक्ति, यहाँ मूर्ख को विद्वान् और विद्वान् को नासमझ बनाने में समर्थ है ! अतः पाठकों को टिप्पणी अस्त्र का प्रयोग सोंच समझ कर  करना होगा !जहाँ एक  ओर  नए ब्लोगर को मिली टिप्पणी, उसमें नवजीवन संचार कर, बेहतर लेखन की प्रेरणा देती हैं वही टिप्पणी, किसी स्वच्छ चादर में लिपटे धूर्त को, रावण बनाने में समर्थ है ! प्रोत्साहन का दुरुपयोग और सदुपयोग यहाँ बखूबी महसूस होता है !     
आवश्यकता है केवल एक सकारात्मक सोंच और उत्साह की जिसके प्रभाव से नकारात्मक   शक्तियों का ह्रास हो और बेहतर लोग समाज और देश के शुभ निर्माण में लगें !
आप सबको विनम्र शुभकामनायें !

Wednesday, January 12, 2011

कुछ अच्छी यादें , मित्रों से मिलने की-सतीश सक्सेना

समीर लाल के पुत्र अभिनव के विवाह उत्सव में कुछ यादें, यहाँ दिए कुछ नए फोटो मिलने से, ताजा हो गयीं ! खुशदिल समीर -साधना  के परिवार के साथ का यह ग्रुप फोटो, यकीनन एक स्नेही पति पत्नी की हमेशा याद दिलाती रहेगी ! समीर लाल से हम लोग पहले से ही, कहीं न कहीं जुडा महसूस करते रहे थे मगर साधना समीर लाल की आत्मीयता महसूस कर , समीर की किस्मत से कहीं न कहीं जलन सी लगी ! काश साधना भाभी की तरह  .........;-))  
दिगंबर नासवा को समीर भाई द्वारा बार बार पुकारना , इस विवाह उत्सव में उनकी व्यस्तता  और जिम्मेवारी बताने को काफी थी ! स्नेही दिगंबर के बिना रौनक में कोई न कोई कमीं अवश्य रह जाती ! 
दोनों पति पत्नी,  इस विवाह में शामिल होने के लिए,दुबई से यहाँ आकर मेहमानों के स्वागत सत्कार में लगातार व्यस्त रहे ! (साथ के फोटो में श्रीमती एवं श्री दिगंबर नासवा झुककर समीर लाल दम्पति के लिए फोटो में जगह बनाते हुए )


पूरे विवाहोत्सव में जिस व्यक्ति से मिलने को मैं सबसे अधिक उत्सुक था , अफ़सोस रहा कि अंत तक उसकी झलक नहीं मिल सकी ! मुझे बताया गया था कि ताऊ रामपुरिया यहाँ अवश्य आयेंगे मगर वे अपने को प्रकट न करने पर कायम हैं ,अतः उनका परिचय नहीं हो पायेगा ! हिंदी ब्लॉग जगत में , हास्य व्यंग्य को नए आयाम देने वाले, इस ब्लागर को ढूँढने के प्रयत्न में ,मैं हर बन्दर नुमा मेहमान में, ताऊ को ढूँढता रहा ...:-(
खैर कभी तो मौका आएगा .....देख लेंगे ताऊ तुझे भी .....!

Monday, January 3, 2011

समीर लाल और साधना भाभी को इतनी प्यारी पुत्रवधू के लिए बधाई -सतीश सक्सेना

समीर भाई के परिवार के साथ, इस महत्वपूर्ण विवाह उत्सव में , वर वधु ( अनुभव - प्रियंका )पर निगाह पड़ी तो ठगा सा देखता ही रह गया ! ईश्वर बुरी नज़र से बचाए इन फूल से बच्चों को ...ऐसी मनोहर सुदर्शन जोड़ी, कम ही देखने को मिलती है !
अपने दोनों बच्चों और बधुओं के साथ में खड़े समीर भाई और साधना भाभी को देख, मैंने खुशदीप भाई और डॉ दराल को कहा कि बच्चे तो साधना भाभी के ही लगते हैं ....


और बड़ी देर तक समीर लाल, खुशदीप और डॉ दराल के ठहाके गूंजते रहे समझ नहीं आया कि यह सब हँसे क्यों जा रहे हैं ?? मैंने गलत क्या कहा ...???  
;-) ( समीर भाई के दोनों पुत्र  बेहद सुदर्शन व्यक्तित्व के मालिक हैं ) . 
शांत और प्रभावशाली वातावरण में ,बेहद सादगी और बिना किसी भीड़ भाड़ के , अनुभव-प्रियंका का यह विवाह उत्सव  एक बेहद अनौपचारिक प्यार की मधुर गंध समेटे था ! पूरे उत्सव में समीर लाल - साधना भाभी के स्नेही स्वभाव के कारण हमें कहीं नयापन नहीं लगा ! लगा कि अपने घर में खुशियाँ मना रहे हों !


ब्लागर शिरोमणि समीर लाल के सरल  और स्नेही व्यक्तित्व से मिलने का दूसरा मौका था परिवार जनों के मध्य हम लोगों का जिस प्रकार वे ध्यान रख रहे थे वह बड़प्पन और स्नेह का अनुकरणीय  उदाहरण था ! जिस उत्साह से लोग देश विदेश से आकर  उनके उत्सव में शामिल हुए यह उनके प्रति सम्मान और प्यार का अहसास कराने के लिए काफी था !     


इतने सुगंधमय, खुशनुमा माहौल में,कविवर कुंवर बेचैन, पिट्सबर्ग वाले गंभीर अनुराग शर्मा , इंदौर के रहस्यमय ताऊ रामपुरिया ,ब्लोगवाणी वाले सुदर्शन मैथिली जी और सिरिल , दुबई वाले आत्मीय दिगंबर नासवा, और दिल्ली वाले मस्त खुशदीप भाई , स्नेही पद्म सिंह, हंसमुख डॉ दराल, मस्तमौला राजीव -संजू तनेजा के साथ,विद्वान् पंडित डी के शर्मा "वत्स" ,के साथ ,  उड़न तश्तरी द्वारा प्यार सहित परोसे, उस मीठे स्वादिष्ट भोज का आनंद चौगुना हो गया !


      

Sunday, December 19, 2010

पुरविया की टूटी पान की दुकान पर, दीपक बाबा और मैं -सतीश सक्सेना

                           ब्लॉग वाणी को पुनर्जीवित करने का प्रयास, अंततः सिरिल गुप्ता के पत्र के साथ, समाप्त हो गया ! हाँ, फोन पर उनसे बात करते समय ,आवाज से झलकता हुआ दर्द, छिपाने के बावजूद, महसूस हो गया ! बार बार पूंछने पर भी उन्होंने वे कारण नहीं बताये  जो ब्लोगवाणी बंद कराने के लिए जिम्मेवार रहे थे मगर उनका दिल दुखाया गया, यह अंदाज़ तो हो ही गया !
                            ब्लॉग जगत में ताजे बने लेखकों की भीड़ में ,जिसमें संत पुरुषों से लेकर थर्ड ग्रेड शोहदे शामिल है ,अच्छे काम करते कुछ लोगों को, बिना उनका काम समझे , अपमान किया जाए तो इसमें आश्चर्य कैसा ?? संगति का असर तो झेलना ही पड़ेगा  ! आश्चर्य तब होता है जब खासे स्थापित लोग भी, निर्दोषों पर ऊँगली उठा कर, झूठे आरोप लगाते नज़र आते हैं ! आने वाले समय में ऐसे "चरित्रवान " लोग, नंगे नज़र आयेंगे ऐसा मेरा विश्वास है क्योंकि उस समय ब्लॉगजगत में अंधों की संख्या यकीनन कम होगी !
                            खैर भारी मन से , कल भटकते हुए, मैं पुरविया की दुकान पर पंहुचा तो वे सतीश सक्सेना और डॉ अरविन्द मिश्रा   :-) की परेशानी में अनूप शुक्ल की तरह दुखी बैठे थे  ! दीपक बाबा, कौशल मिश्रा को सुनकर आप भी मुस्कराए बिना नहीं रहेंगे ! आप  पुरविया के ब्लॉग पर कमेंट्स की ताजगी देखिये .....
दीपक बाबा said...

मिसिर जी, सही लपेट रहे हो ........ अभी 'मजनू' भी आ रहे होंगे ....... वही जवाब देंगे..

सतीश सक्सेना said...
@ पुरविया

@ बाबा
तुम जैसे जवान होंगे घर में, तो हमें ही मंजनू बनाना पड़ेगा ....
दिन ही बुरे हैं घर के बच्चों को क्या दोष दें ..
सही है! लगे रहो दोनों यही पर :-(
मनोज कुमार said...
लग तो ऐसे ही रहा है जैसा आपने कहा है कि ऐसा लगता है किसी पान की दूकान को नगर निगम का दस्ता गिरा गया हो, जब धडाधड महाराज ही नहीं हैं तो बहुत से लोगों तक अपनी बात पहुँचाना भी दुष्कर कार्य है!
सतीश सक्सेना said...
टूटी पान की दूकान के बाहर फूटपाथ पर , हमारे पुरविया और दीपक बाबा सर पर हाथ रखे ,दूसरों की चिंता में घुल रहे हैं कि इनके पान का क्या होगा ....की चिंता कर रहे हैं ! जय हो महाराज !

टूटी पान की दूकान के बाहर फूटपाथ पर , हमारे पुरविया और दीपक बाबा सर पर हाथ रखे ,दूसरों की चिंता में घुल रहे हैं कि इनके पान का क्या होगा ....की चिंता कर रहे हैं ! जय हो महाराज !
वैसे लिखा बढ़िया है ! !
दीपक बाबा said....
@ सतीश सक्सेना 
@ इनके पान का क्या होगा....
हमरे तो वैसे ही बेकार पान है.......... जो लोग बढिया पान खिलाते थे..... उनका क्या होगा.? सक्सेना जी पहले उनकी चिंता कीजिए....
सतीश सक्सेना said...
हमें तो बाबा और पुरविया की दूकान का ही पान अच्छा लगता है ...धक्का काहे दे रहे हो यार !
वैसे ही सर फटा जा रहा है आज ..
कल शाम छत्तीस गढ़ भवन में कुछ गरम शरम  मीटिंग है चलोगे ...तुम्हारे साथ ठीक रहेगा !
चलने का मन हो, तो फोन कर लेना.....
दीपक बाबा said...
आप तो आइसे बात कर रहे हैं जैसे आपका फोन न. १०० या १०१ हो.......
सतीश सक्सेना said..
सतीश सक्सेना said..
बाबा !
तुम थानेदार क्यों नहीं बन जाते यार...... !
९८११०७६४५१
                                         बिना किसी दिखावे के , ब्लोगर मित्रों के बीच, इस प्रकार की बातचीत दुर्लभ दिखती है ! अधिकतर ब्लॉग जगत में लोग लिखते समय "आदरणीय "और "जी "अवश्य लगाते हैं जबकि दिल में एक दूसरे के प्रति कोई प्यार नहीं होता  ऐसे  सम्मान का क्या फायदा जिसमें प्यार का अभाव हो और संबोधन में नाटकीयता साफ़ झलक रही हो ! डांटने का अधिकार का तो यहाँ सर्वथा अभाव ही है....  

Saturday, December 18, 2010

ब्लोगवाणी संचालकों को एक पत्र , एक अनुरोध के साथ - सतीश सक्सेना

हिंदी ब्लॉग जगत के लिए बेहद सम्मानित मैथिली जी एवं  सिरिल !

मैं एक सामान्य व्यक्ति हूँ , हिंदी ब्लॉगजगत के लिए जो कार्य आप पिता पुत्र ने किया है उसका सम्मान करता हूँ ! ब्लोगवाणी के चले जाने से जो रिक्तस्थान पैदा हुआ वह भर नहीं पा रहा है और इसके बिना ब्लॉग जगत का बहुत नुकसान ( खास तौर पर नए ब्लोगर का )हो रहा है ! मेरी इच्छा, आपके लगाये पौधे को पुनर्जीवित कर ,उसमें आपको सहयोग भर देने की है  !
-क्या आप इसमें अपना समय दे पायेंगे ? यदि हाँ तो आप जैसा सहयोग चाहेंगे  वह मैं देने को तैयार हूँ मेरी तरफ से यह कार्य पूर्णतः समाज के भले के लिए होगा हाँ इसमें आवश्यक धनराशि, चाहे वह कितनी हो क्यों न हो , अपने प्रयत्नों से एकत्र कर लगाने को तैयार हूँ ! और योगदान बिना किसी शर्त होगा !

-अगर आप समय नहीं देना चाहें तो मैं आपका ब्लोगवाणी तंत्र खरीदने के लिए तैयार हूँ और इस तंत्र को पुनर्जीवित कर , ५ लोगों की कमेटी के नेतृत्व में चलाने की व्यवस्था करना चाहूँगा इसमें  आपका नाम जुड़े रहने की प्रार्थना के साथ, आपको उसमें बने रहने की प्रार्थना भी शामिल है !

- प्रयुक्त सर्वर एवं एक ओपरेटर का खर्चा वहन करने की व्यवस्था की जा सकती है !
  
-उपरोक्त कार्य में योगदान के लिए मेरा उद्देश्य, किसी प्रकार का आर्थिक लाभ लेने का नहीं है ! हाँ अगर आपको उससे आर्थिक लाभ हो तो मुझे सहर्ष स्वीकार होगा !

- आशा है जिस भावना से, इस पौधे को रोपित किया था , दुबारा पुनर्जीवन में आप सहर्ष साथ देंगे ! 
आपकी हर शर्त मंजूर होगी !
उत्तर की प्रतीक्षा में 

सादर  
सतीश सक्सेना
(यह अनुरोध मेरी व्यक्तिगत इच्छाशक्ति के आधार पर है इसमें किसी ब्लोगर से कोई राय नहीं ली गयी है , हाँ समान सोच वाले मित्रों  से अनुरोध है कि  वे साथ दें, इससे मैं अपने आपको और मज़बूत महसूस करूंगा ) 
satish-saxena.blogspot.com


अभी अभी इमेल बॉक्स खोलने पर , सिरिल गुप्ता का यह मेल मिला है जो आप लोगों के लिए, पोस्ट का एक भाग बना कर प्रकाशित कर रहा हूँ  ! मेरा विचार है कि अभी भी उनसे बात करने का मौका है ..फिलहाल आप लोगों के विचार आमंत्रित हैं ....  



Cyril gupta

 to me
show details 5:25 PM (2 hours ago)
आदरणीय सतीश जी,
आपको हम और ब्लागवाणी अब तक याद है यही बहुत बड़ा सम्मान है, और यह तो गौरव कि बात है आप अपनी गाढ़ी कमाई का धन ब्लागवाणी पर लगाने को तैयार हैं.
लेकिन ब्लागवाणी तो धनाभाव में बंद नहीं हुई. ब्लागवाणी चालू है, उसके सर्वर पर जितना खर्च पहले हो रहा था निरंतर उतना ही अब भी हो रहा है़.  अब ब्लागवाणी को अपडेट करना रोक दिया है जिसके कारण निजी हैं.
ब्लागवाणी क्योंकि अब ब्लॉग इतिहास का हिस्सा है इसलिये कृपया दूसरे विकल्पों और नये आने वाले रचनाशील लोगों को मौका दें. मुझे नहीं लगता वे आपको निराश करेंगे.
इतने प्रेमपूर्ण पत्र के लिये धन्यवाद, यह हमेशा याद रहेगा.
आपका दोस्त
सिरिल
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