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Wednesday, December 28, 2022

आंतरिक शारीरिक रक्षा शक्ति -सतीश सक्सेना

 अगर मैं स्टोन एज की बात करूँ तो वह लगभग २५ लाख साल चला लगभग ६००० साल पहले समाप्त हुआ था , उस समय भी समय अनुसार मानवीय ज़रूरत का हर साधन उपलब्ध था , बस इलाज और बीमारियों के बारे में उन्हें यही पता था कि कुछ दिन कमजोरी रहती है तब आराम करना चाहिए और उन दिनों खाने का मन नही करता सो वो कम खाते और गुफा के एक कोने में आराम करते, कुछ दिनों में स्वतः ठीक हो जाते और फिर शिकार, भागना दौड़ना और परिवार संग खुश रहना , मस्त जीवन ...

आज से लगभग ५० वर्ष पहले भी दूर दूर तक हॉस्पिटल और डॉक्टर नहीं थे, गाँव क़स्बों के लोगों ने इनका नाम तक नहीं सुना था , लोग तब बिना मृत्यु भय और बीमारियों के जीते थे, वाइरस बैक्टिरिया तो बहुत दूर की चीज़ थे , बस भय और स्ट्रेस देने वाले टेलिविज़न और डर फैलाकर धन कमाने वाले मीडिया संसाधन नहीं थे !

मानवीय शरीर में लाखों कोशिकाएँ व्यस्त रहती हैं शरीर को सुचारु रूप से चलाने के लिए, इस प्रक्रिया के फल स्वरूप शरीर में हर समय उथलपुथल रहती है, तरह तरह के दर्द, और समस्याएँ होती हैं जो कुछ समय में अपने आप समाप्त भी हो जाती हैं ,भयभीत और समर्थ मन जो इन्हें सहन नहीं कर पाता , फ़ौरन डॉक्टर की शरण में जाकर दवा खाता है , बिना यह जाने कि इनका शरीर पर बुरा असर क्या होगा वहीं निडर या असमर्थ व्यक्ति चुपचाप घर में लेटकर स्वस्थ होने का इंतज़ार करता है और खुद को स्वस्थ बनाए रखने में सफल रहता है !

६१ वर्ष की उम्र में मैंने जाड़े आते ही कपड़े कम पहन कर दौड़ने का अभ्यास शुरू किया था , पहले तीन लेयर , फिर दो और अंत में स्लीव लेस वेस्ट पहन कर, दौड़ने का अभ्यास किया लगभग दो सीज़न बाद ही ६२ वर्षीय शरीर ने इसे ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लिया और अब ६९ वर्ष की आयु में, ७ डिग्री कड़ाके की ठंड में , सिंगल स्लीव लेस वेस्ट और शॉर्ट में आराम से दौड़ता हूँ ! मानवीय शरीर की ताक़त बेमिसाल है सिर्फ़ बिना डरे उसकी आदत डालने की आवश्यकता है  !

पिछले सप्ताह खाना खाते हुए, एक मटर का दाना साँस की नली में फँस गया था लगभग दो घंटे तक लगातार खाँसता रहा, साँस आने में रुकावट थी, लग रहा था कि जान चली जाएगी, डॉक्टर T S Daral जैसे पुराने मित्र, और रनर डॉक्टर दोस्त Vishesh Malhotra न होते तो ओपरेशन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ता ! पूरे सप्ताह साँस लेने में तकलीफ़ रही, अचानक एक दिन सुबह बहुत तेज गति से खांसी शुरू हुई लगा कि फेफड़े बाहर आ जाएँगे, और एक बड़ा सा गोल दाना मुँह से निकल कर बेसिन में गिरा, साथ ही लगातार हो रही खांसी व साँस में रुकावट ग़ायब हो गयी !

कम से कम एक डॉक्टर मित्र आपके परिवार में अवश्य होना चाहिए जो आपातकाल में सही सलाह देकर आपको अनावश्यक दवाओं से बचाने में आपकी मदद करे, उसके अलावा शारीरिक रक्षा शक्ति को कम न आंकिये, यह आपकी रक्षा करने में पूर्ण समर्थ है !

Wednesday, November 16, 2022

साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा अढसठ साल का -सतीश सक्सेना

धीमे धीमे लम्बा दौड़ना सीखिए, बिन प्रयास फेफड़ों का व्यायाम , आपके गाढ़े होते रक्त में, भरपूर शुद्ध आक्सीजन पम्प कर, जमा थक्के घोल, उसे शुद्ध कर, उसका संचार आपके ढीले शरीर में कर आपको स्फूर्ति देगा और आपका डायबिटीज ग़ायब हो जाएगा !आपकी ढीली मांसपेशियाँ इस तथाकथित बुढ़ापे में आपको जवानी का अहसास कराएँगी, इसका भरोसा रखें , बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, पेट की गैस, ख़राब हाज़मा, और कमजोरी कब ग़ायब हो गयी पता भी नहीं चलेगा , साथ ही बॉडी कोर में अवस्थित अंगों में दौड़ते समय महसूस कम्पन, उनके स्वास्थ्य में सुधार कर, अतिरिक्त एनर्जी पाने के लिए आपके शरीर में जमा अनावश्यक फ़ैट को खा जाएँगे और आपका शरीर सुडौल दिखेगा इसका यक़ीन रखें और इस पर विचार करें ! मगर दौड़ना सीखना दुनियाँ के सबसे मुश्किल कार्यों में से एक है इसके लिए आवश्यक है कि

- मन प्रफुल्लित रहें , उदास और बेमन आप कभी नहीं दौड़ सकेंगे ! अवसाद और स्ट्रेस दूर करना सीखना हो तो दौड़ना सीखें !
-पूरे दिन में कम से कम १२ गिलास पानी एवं रात का डिनर हल्का और सोने से तीन घंटे पहले करना होगा !
-दौड़ने का समय सुबह ६ बजे के आसपास और खुली जगह में जहां आक्सीजन हो, दौड़ने का अभ्यास करना होगा !
-स्वास्थ्य के लिए दौड़ने में गति का महत्व नहीं, मस्ती से बिना हाँफे दौड़ना अगर नहीं आए तो दौड़ना आपके लिए बेहद ख़तरनाक साबित होगा !
- अंत में अगर आप पसीना नहीं बहा सकते तब दिन में एक बार ही भोजन पर अपना हक़ मानिए ! तीन बार भोजन पर केवल श्रमिक का ही हक़ होता है आप जैसे आलसी और आराम पसंद का नहीं ! सो अगर इसका आनंद लेना है तो सुबह दो घंटे दौड़िए और जम के भोजन खाइए अन्यथा बीमारियाँ झेलने को तैयार रहें ! मुझे देखें ...

मैराथन आसान ,भरोसा हो क़दमों की ताल का
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा अढसठ साल का !

करत करत अभ्यास, पहाड़ों को रौंदा इस पाँव ने
हार न माने किसी उम्र में, साहस मानवकाल का !

इसी हौसले से जीता है, सिंधु और आकाश भी
सारी धरती लोहा माने , इंसानी इकबाल का !

गिरते क़दमों की हर आहट,साफ़ संदेशा देती है !
हिम्मत,मेहनत,धैर्य,ज़खीरा इंसानों की चाल का !

बहे पसीना कसे बदन से, मस्ती मेहनत की आयी !
रुक ना जाना, उठता गिरता रहे कदम भूचाल सा !

Monday, November 14, 2022

बढ़ी उम्र में , कुछ समझना तो होगा, तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा -सतीश

विकसित समाज में हमने श्रम करना गरीबों का काम मान लिया और जुटाई गयीं सुख सुविधाओं  का उपयोग अपने आराम के 
लिए 
करते समय यह भूल गए कि शरीर लम्बे समय तक किसी भी अभ्यास को आसानी से स्वीकार कर लेता है , और कुछ समय बाद उस आदत से बाहर निकलना उसके लिए असम्भव सा लगने लगता है ! अपने काम खुद न करने का अभ्यास हमारी शारीरिक प्रतिरक्षा शक्ति को बर्बाद करने में सक्षम है !

जब कोई एक्सरसाइज़, योगासन, जिम और स्ट्रेचिंग की बात करता है तब मुझे लगता है कि वह यह करने की कोशिश तो कर रहा है मगर शारीरिक श्रम करने जैसे मानवीय शक्ति के मूल आधार को ही भूल गया है जिसके सामने यह सब मात्र औपचारिकता है ! मेडिकल व्यवसाय का प्रचार इंसान पर इस कदर हॉवी हो चुका है अपने अपने छोटे से बच्चे को चश्मा लगवाते समय वह यह नहीं सोच पाता कि चश्मे का अविष्कार कब हुआ और उससे पहले हजारों वर्षों से हमारे बच्चे और बूढ़े कैसे देखते होंगे ? घुटने का ऑपरेशन करवाना तो हास्यास्पद ही है जो सिर्फ घुटनों का उपयोग न करने के कारण हुआ है ! बिना उपयोग, शरीर का हर अंग मानवीय मूर्खता पर, धीरे धीरे कराहते हुए बर्बाद होता जाता है और हम उसकी कराह और दर्द को बिना समझे मेडिकल व्यवसायियों की और भाग कर, अपने शरीर को सुधारने की कोशिश में और तेजी से नष्ट करते है !

स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही, बढ़ी उम्र में पछताने का मौक़ा भी नहीं देती ! हमें अपनी गलतियां मनन करते हुए समझना होगा कि पार्क में भीड़ के संग हाथ उठाकर हो हो कर हंसने को कोशिश से , निर्मल और मस्त हँसी का लाभ कभी नहीं मिलेगा ! बेहतरीन स्वास्थ्य के कुछ मूल बिंदुओं पर संकेत कर रहा हूँ , मित्रों से निवेदन है हर बिंदु को मनन करते हुए ही उसे पढ़ने का प्रयत्न करें  !
  • कोई भी शारीरिक एक्सरसाइज़ निरर्थक है जब तक मन उसे स्वीकार न कर ले , चाहे वह हंसने की चेष्टा, वाक या जॉगिंग ही क्यों न हो ! अपने अपने कष्ट भुलाकर खुलकर हंसना सबसे पहले सीखें इसके फलस्वरूप आयी मस्ती से बाकी सब सीखना आसान हो जाएगा ! इस बिंदु को कई बार पढ़ना और समझना होगा स्वास्थ्य को सही रखने की प्रमुख 10 बातों में यह सबसे महत्वपूर्ण एवं मेडिकल उपचार सबसे अंतिम आवश्यकता होनी चाहिए  !
  • मानवीय जीवन के लिए आवश्यक हवा , पानी , धूप ,नींद भरपूर लेनी है एवं भोजन उतना ही लें जितनी दिन में मेहनत की हो , बिना पसीना बहाये दिन में तीन बार भोजन करना आपको शीघ्र शारीरिक क्षरण की ओर ले जाएगा ! बिना मेहनत के तीन बार भोजन लेना इस खूबसूरत मानवीय शरीर के प्रति अपराध है ऐसे लोगों को एक बार भोजन करना स्वस्थ शरीर के लिए पर्याप्त है ! कुछ भी अभक्ष्य न खाएं , दूध सिर्फ अपनी मां का पीना था उनका दूध सूखने के साथ ही दांत निकलने के प्राकृतिक अर्थ पर विचार गहराई से करें तो आप जानवरों के शरीर का चर्बी युक्त हानिकारक दूध का निस्संदेह त्याग करने पर मजबूर होंगे ! दूध और मांस भोजन का एक विकल्प मात्र है और यह विकल्प सोचकर ही उपयोग में लाएं ! 
  •  मानवीय आलस्य जनित आदतों पर गौर करें , फेफड़ों पर दया करें उनका साइज पर गौर करते हुए उन्हें उतना खोलना  सीखें जिसके लिए वे बने हैं आपको बिना गुरु के योग क्या है समझ आएगा और धीमे धीमे खराब हवा में साँस लेने के कारण, आपके गाढ़े होते खून के लिए शुद्ध हवा की जरूरत है , बंद फेफड़े खोलने का प्रयत्न करें !
  • पैरों को मानवीय शरीर का आधा हिस्सा मिला है सो दिन के आधे समय में इनका उपयोग करना होगा , इसमें धीमे धीमे दौड़ना शामिल करें मगर हांफते हुए दौड़ने से आप अपने कमजोर हृदय को खतरे में डालेंगे उम्र चाहे कोई भी क्यों न हो, इसे न भूलें ! हर 40 मिनट वाक को बिना हांफे धीमे धीमे दौड़ कर समाप्त करें , इस आदत से आप अगले दो महीने में बिना हांफे दौड़ना सीख जाएंगे  !
  • दौड़ा या जॉगिंग करना या तेज चलना आपके शरीर में अवस्थित अंगों में कम्पन उत्पन्न करेगा यह कम्पन आपके जीर्ण और आलसी अंगों को फुर्ती देगा एवं  सारी बीमारियों को दूर करने में समर्थ होगा , इसे न भूलें  !
  • बेहतरीन और पूरी नींद लेना हमारी मूलभूत आवश्यकता है , मन से क्रोध अपमान आदि को भुला कर सोने का प्रयत्न करें , मानवीय कष्ट आपको सोने नहीं देंगे , इन्हें भूलकर हंसना सीखना ही होगा तभी बेहतर नींद आएगी याद रखें कि भूतकाल की घटनाएं केवल भूत ही हैं , वे अगर याद हैं तब आपको उदासी की और ले जाने में समर्थ भी होंगी और उदासी के साथ आप हंस नहीं पाएंगे , हंसना भूल जाना ही मौत है ! जब भी कष्ट याद आये उसे थूकना सीख लें क्योंकि इसे साथ लेकर चलना आपका नुकसान एवं कष्ट देने वाले का फायदा करेगा !
  • अभक्ष्य न खाएं , पहचान जो चीज आप की जीभ स्वीकार न करें उसे त्यागिये जैसे तेल और चर्बी , क्या आप सरसों के कुछ दाने खा सकते हैं अगर नहीं तब लाखों सरसों के दानों से निकले तेल में तले हुए पकौड़े क्यों , स्वाद को मारना ही होगा !
  • एक दिन कस कर मुट्ठी बंद कर रुमाल से बाँध लीजिये और तीन दिन बाद खोलिये आपको महीने भर व्यायाम करना होगा तब जकड़े जोड़ खुल पाएंगे अब घुटने के दर्द की कल्पना करें जिन्हे आप चलाते ही नहीं , सीढ़ी चढ़ना और दौड़ना तो शायद सोच भी न पाएं , मनन करियेगा अपनी भूलों पर  !
  • आजकल शायद ही कोई इंसान होगा जो वाक न करता होगा मगर उनका थुलथुल शरीर देखिये जिसपर वाक का कोई असर नहीं होता , कभी वाक के ऊपर सोचने का समय निकालिये, उत्तर मिलेगा ! वाक अकेले करें , और उसका उद्देश्य पर विचार करते हुए करें कि आप यहाँ क्या करने आये हैं , गौर करें अपने विभिन्न अंगों पर, उँगलियों पर, पैरों पर , पिंडलियों पर और पेट के उन अंगों पर जो वाक करते समय भी हिल नहीं रहे , फिर आप वाक कर क्यों रहें हैं ? वाक करने का अर्थ 45 मिनट रोज शरीर के फेफड़े , किडनी , लिवर , पेन्क्रियास , हृदय और जोड़ों को व्यायाम कराना होता है न कि दोस्तों के साथ चलते हुए अपने दफ्तर में की हुई बहादुरी का बखान करना !   
मेरा परिचय जान लीजिये , सतीश सक्सेना उम्र ६८ वर्ष , रिटायर होने से पहले जीवन में कभी वाक या व्यायाम नहीं किया , रिटायर होते समय उम्र जनित बीमारियों , जिसमें बीपी और बढ़ा पेट शामिल था को देखते हुए अपने मित्रों से कहा था कि अगले दो साल नहीं जी पाऊंगा , एक फ्लोर चढ़ने पर हांफता था और रुकना पड़ता था ! मगर मन में जीने की इच्छा और बच्चों से और कर्तव्य से प्यार के फलस्वरूप अपने खुद के कायाकल्प का संकल्प लिया था आलस्य का हाल यह था कि सब्जी लेने के लिए भी गाडी चाहिए और कभी दिल्ली के बस में नहीं चढ़ सका कि उसमें भागना पड़ता था !

६१ वर्ष की उम्र से दौड़ना सीखना सिखाया अपने ढीले वाले थुलथुल शरीर को और दो वर्षों में ही 12 किलो वजन घटाने के कारण आये उत्साह में लम्बी दौड़ें दौड़ना शुरू की , अब तक 10000 km दौड़ चुका हूँ  और शरीर हर बीमारी से मुक्त है ! 2021 में 100 days of running विश्व प्रतियोगिता में शामिल हुआ जिसमें 100 दिन लगातार दौड़ते हुए कुल 1849 km की दूरी तय करते हुए पूरे विश्व में दौड़ते हुए 13068 जवानों के मध्य रैंक 88/13068 एवं अपने उम्र ग्रुप (65-69) में 1/58 रहा ! अपने बारे में बताने का उद्देश्य अपना प्रचार न होकर आपको यह बताना है कि मेरे जैसा सुख सुविधा युक्त जीवन जीने वाला आलसी उम्र दराज अगर यह सब कर खुद का काया कल्प कर सकता है तो आप क्यों नहीं ?

डॉक्टरों और ऑपरेशन थियेटर से बचने का एकमात्र विकल्प यही है जिसे मेडिकल व्यवसायी कभी नहीं बताएँगे वे आपके भगवान बना रहना चाहते हैं ताकि आपके शरीर से उन्हें धन लाभ होता रहे  !

सादर प्रणाम आपको शुभकामनाओं के साथ !



  

Friday, July 22, 2022

अगर परमात्मा, इन्सान होता -सतीश सक्सेना

गरीबों पर बड़ा अहसान होता 
अगर परमात्मा, इन्सान होता !

न जाने कब के हम आज़ाद होते,
भुलाना भी उसे , आसान होता !


पहुँचते उसके दरवाजे भिखारी ,
बगावत का, वहीं ऐलान होता !

दिखाते भूख से,  बच्चे तड़पते 
उसे कुछ भूल का अनुमान होता

नफ़रती अक्षरों को तब तो शायद !
सजा ए मौत का , फ़रमान होता !

Wednesday, July 20, 2022

मिट के ही जायेंगे,गुमां मेरे -सतीश सक्सेना

समझ न पाओगे, बयां मेरे !
मिट के ही जाएंगे, गुमां मेरे !

कैसे दिल से मुझे हटा पाओ 
उसकी हर ईंट पे, निशां मेरे !

तुमने बे घर ,मुझे बनाया था,
कितने दिल में बने, मकां मेरे !

कैसे काबू रखूं , ख्यालों पर 
दिल के अरमान हैं, जवां मेरे !

गर कुरेदोगे, जल ही जाओगे
राख में हैं दबे , जहां  मेरे  !

Sunday, July 17, 2022

एक शाम जर्मनी की, राज भाटिया के घर -सतीश सक्सेना

विदेश में कोई अपना सा दोस्त मिल जाय तो बल्ले बल्ले हो जाती है , पुराने ब्लॉगर साथी राज भाटिया के घर आज शाम जाना हुआ

, उनकी जिद थी कि आप सपरिवार खाना साथ आकर खाएंगे सो हम लोग लगभग 4 बजे घर से निकल लिए , जर्मनी हाईवे पर हाई स्पीड गाड़ी चलाना आनंद दायक है ! गौरव की बीएमडब्लू 200 km प्रति घंटा की स्पीड पर भी स्टेबल थी, मैं खुद तेज ड्राइवर हूँ फिर भी मैंने उन्हें धीरे चलाने को कहा , इलेक्ट्रिक/ हाईब्रिड कार होने के कारण इसका पिकअप दिमाग को हिला देने वाला था ! 

जर्मनी में मानवीय सुरक्षा के सख्त कानून हैं , मैंने ट्रैन स्टेशन पर SOS साइन के साथ बेहतरीन इंतज़ाम देखे हैं , आकस्मिक हार्ट अटैक के समय यह इंस्ट्रूमेंट जान बचाने में सहायक हैं खतरे में पड़े व्यक्ति को मात्र बटन दबाना है !

राज भाई बेहद मिलनसार इंसान हैं , वे अपने जर्मन विलेज के दरवाजे पर पत्नी सहित इंतज़ार करते मिले, शांत स्वच्छ जर्मन गाँव जहाँ धूल का नामोनिशान नहीं , उम्र दराज लोगों के लिए ऐसी जगह पर रहना एक वरदान है ! चाय नाश्ते के बाद वे हमें गांव घुमाने ले गए , रास्ते में जो भी परिवार दिखे एक दूसरे से आत्मीयता से अभिवादन कर हालचाल पूछते नज़र आये ! 

यहाँ एक चीज हमारे यहां से अलग है घर के मेंटेनेंस से सम्बन्धित हर काम परिवार को खुद करना होता है बाहरी मदद इतनी महंगी होती है कि आम आदमी बर्दाश्त ही न कर सके ! बेटे के घर में सिंक टैप से एक एक बूँद पानी टपकता था जिसे ठीक कराने के लिए 60 यूरो दिए गए जिसमें सिर्फ वॉशर बदलना था सो घर में रहने वाले पेंटिंग, गार्डनिंग से लेकर घर की मरम्मत तक के कार्य खुद करते हैं , इसकी पुष्टि राज की होम वर्कशॉप को देख कर आसानी से हो गयी !

राज भाई बड़े जीवट के इंसान हैं , घर में काम करते समय कोई नहीं कह सकता कि उनके हृदय के चार चार ऑपरेशन हो चुके हैं , मजबूत जीवनी शक्ति , इंसान की मजबूत इच्छा शक्ति पर निर्भर करती है , राज भाटिया इसके जीते जागते उदाहरण हैं , सो आज का दिन सफल हुआ एक बेहतरीन इंसान के साथ !

Tuesday, July 5, 2022

मोटापा एक अनचाही समस्या -सतीश सक्सेना

साठ के बाद अधिकतर लोग खुद को वृद्ध मानना और तदनुसार व्यवहार करना शुरू कर देते हैं जिसका परिणाम उनके शरीर पर तत्काल दिखना शुरू कर देता है ! आसपास के लोग उनसे अधिक गंभीरता और संजीदगी को उम्मीद करते हैं , उनके कपड़ों, रहन

सहन एवं भोजन में बदलाव आ जाता है ! अब इस उम्र में क्या ? का दयनीय भाव लिए ये लोग धीरे धीरे आने वाले समय में , अपनी संभावित मृत्यु की और अग्रसर होते हैं और शरीर भी इस दयनीय दशा को स्वीकार करते हुए तेजी से अपना कसाव भूलकर थुलथुल होना शुरू कर देता है !

मेरे रिटायर होने के बाद , पिछले आठ साल में मैंने खुद अपने बेहतरीन मित्रों को असमय मौत के मुँह में जाते देखा है , डायबिटीज, मोटापा और उसके कारण हृदय आघात उसका बड़ा कारण थे ! मैंने साठ वर्ष के बाद कोई और कार्य न करके, अपने कायाकल्प का संकल्प लिया था और धीरे धीरे खुद को रनिंग (हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज ) सिखाना शुरू किया जिसमें सफल रहा और शरीर में अत्यधिक बदलाव महसूस किया और वजन तो घटना ही था ! सुबह सुबह एक घंटे का तेज वाक अथवा रनिंग , इन्सुलिन के प्रति बॉडी सेंसिटिविटी बढ़ाने में बड़ा रोल अदा करती है ! मेरे तमाम रनर दोस्त डायबिटीज को वर्षों पहले विदा कर चुके हैं !

बढ़ते हुए वजन से सबसे बड़ा खतरा हार्ट आर्टरी में खून के थक्के जमने से हृदय पर पड़ता बोझ है जो अधिक उम्र में घातक होता है , अगर आप सौ कदम तेज चलने से हांफ रहे हैं तब आप खुद को खतरे में मानिये , मेरे अपने विचार से साठ वर्ष में साठ और अस्सी वर्ष में अस्सी प्रतिशत आर्टरी ब्लॉकेज संभव है , यही प्रकृति का तरीका है और इस उम्र के बाद हमें स्वयं को जाने के लिए तैयार कर लेना चाहिए ! साठ वर्ष में किया गया मेडिकल ऑपरेशन आपके जीवन को बढ़ाएगा नहीं बल्कि कुछ नयी समस्याएं ही पैदा करेगा सो बेहतर यही होगा कि अंत तक शरीर को फुर्तीला बनाये रखने का प्रयास किया जाए , इससे न केवल ब्लॉकेज कम होगी बल्कि आप शारीरिक , मानसिक बुढ़ापे से भी मुक्ति पाए रहेंगे !

इन बुरे दिनों, हर किसी की शारीरिक एक्टिविटी घटी है घर में लगातार बंद रहने के कारण, बिना मेहनत किये बढ़िया खाने की मात्रा में बढ़ोतरी, बढ़ते वजन का बड़ा कारण रहा ! मेरी खुद का वजन लाख कोशिशों के बाद भी 2 किलो बढ़ा है , हालाँकि इन दिनों मैं अपने देश में बढे  पॉल्यूशन के कारण कम एक्सरसाइज कर पाया सो खाना भी बेहद कम खाया नतीजा अपने अन्य मित्रों के मुकाबले वजन कम बढ़ा उम्मीद है जर्मनी के स्वच्छ वातावरण में अगले तीन माह अधिक दौडूंगा एवं वजन घटाने में सफल रहूँगा !    

अगर आप मेहनत नहीं कर पा रहे तब खाने पर आपका कोई अधिकार नहीं होना चाहिए , केवल एक समय का भोजन करें , सुबह हल्का नाश्ता एवं डिनर शाम को 4 बजे , रात आठ बजे ग्रीन टी के साथ 4 फीके बिस्कुट काफी होंगे ठाठ से जीने के लिए और यक़ीनन वजन कण्ट्रोल रहेगा ! सुबह स्वच्छ हवा में गहरी साँस भरकर छोड़ने की आदत डालें , एवं जब भूख लगे तभी पानी अवश्य पियें , पूरे दिन में 10-12 गिलास पानी आपकी पुरानी मस्ती वापस लाने में सहायता करेगा , शुगर और मिल्क प्रोडक्ट का त्याग सोने में सुहागा होगा !

अंत में , आखिरी बात नए आधुनिक चुस्त खूबसूरत कपडे पहने बिना इसकी परवाह किये कि लोग क्या कहेंगे  ? अपने बालपन को मत खोने दें उसे वापस लाएं नए मित्र और नए शौक बनाने होंगे और आप इस उम्र में जाग्रत बदलाव देखेंगे !   

प्रणाम आप सबको !
 

Sunday, July 3, 2022

म्युनिक की तीखी धूप में 10 km रन -सतीश सक्सेना

आज म्युनिक में बेहद गर्म दिन था 27 डिग्री मगर सूरज की तीखी किरणों के कारण महसूस 32 डिग्री हो रहा था , ऐसे में पहले किलोमीटर दौड़ते हुए ही महसूस हो गया था कि आज दौड़ना आसान नहीं होगा और शर्ट उतारकर दौड़ना शुरू किया इससे पेड़ों की छाया में दौड़ते हुए, हवा के ठंडे झोंके कुछ आराम दे रहे थे ! आखिरी 300 मीटर में एक जर्मन लड़की ने मुझसे आगे निकलने के लिए चिल्लाते हुए तेज दौड़ना शुरू किया तो मैंने खुद को चैलेंज दिया कि हारना नहीं है और पूरी ताकत से दौड़ते हुए अपने से कम से कम 45 साल छोटी इस लड़की को हरा दिया मतलब अभी इतने बुड्ढे नहीं हुए कि बच्चे आगे निकल जाएँ !

बहरहाल 10 km रन 77 मिनट में पूरा हुआ !


Monday, April 25, 2022

अब और न कुछ कह पाऊंगा, मन की अभिव्यक्ति मौन सही !

अब और न कुछ कह  पाऊंगा, मन की अभिव्यक्ति मौन सही !
कुछ लोग बड़े आहिस्ता से
घर के अंदर , आ जाते हैं !
चाहे कितना भी दूर रहें ,
दिल से न निकाले जाते हैं !
ये लोग शांत शीतल जल में
तूफान उठाकर जाते हैं !
सीधे साधे मन पर, गहरे 
हस्ताक्षर भी कर जाते हैं !
कहने को बहुत कुछ है लेकिन, अब यह अभिव्यक्ति मौन सही  !

इस रंगमंच की दुनिया में
गहरी चोटें खायीं हमने !
कितनी ही रातें नींद बिना   
किस तरह गुजारीं हैं हमने 
जब दिल पर गहरे जख्म लगे 
कुछ आकर मरहम लगा गए 
इन प्यारों द्वारा ही कड़वे 
अवशेष मिटाये जाते हैं !
अहसान न अपनों का होता सो यह अभिव्यक्ति मौन सही !

कुछ चित्रकार आसानी से 
निज चित्र, उकेरे जाते हैं !
आहिस्ता से मुस्कानों के 
गहरे रंग , छोड़े जाते हैं !
पत्थर पर निशाँ पड़े कैसे 
अनजाने, दिल में कौन बसा 
अनचाहे स्मृति चिन्ह बने 
मेटे न मिटाये , जाते हैं !
कहने को जाने कितना है पर यह अभिव्यक्ति मौन सही !

Tuesday, January 11, 2022

वजन घटाने का सफल संकल्प कैसे किया करें -सतीश सक्सेना

सैकड़ों बार प्रयत्न कर चुकी / चुका हूँ मगर वजन टस से मस नहीं होता, हताश हो चुकी हूँ / निराश हूँ क्या करूँ समझ नहीं आता ? 
2014 से पहले 

यही प्रश्न है उन सबके मन में, जो जूझ रहे हैं हाई बीपी से, हृदय आघात के खतरे से , डायबिटीज से , कॉन्स्टिपेशन से , आलस्य और कथित वृद्धावस्था से जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं होना चाहिए ! उम्र बढ़ने ( 80 के आसपास ) के साथ क्षीण होते शरीर को बचाने का एक मात्र तरीका शारीरिक और मानसिक क्रियाकलाप जारी रखना ही होगा जिसके होते अवसाद , निराशा पास भी नहीं फटकेंगे और एक दिन शांत अवस्था में सोते हुए प्राण जाएंगे ! यही सिद्ध अवस्था माननी चाहिए हम सबको जो देर सबेर सबको आनी चाहिए और सहर्ष स्वीकार्य भी होगी !

सबसे पहले मुझे बताएं क्या आप अपने आपको आमूलचूल बदलने को तैयार हैं तभी तो शरीर बदलेगा अन्यथा व्यर्थ प्रयत्न न करके जैसा है उसे स्वीकार करें और गाना गायें  ...हवन करेंगे हवन करेंगे !आपको मोटापा खराब इसलिए नहीं लगता है कि वह आपको
2012 में 
 अंदर से बर्बाद कर रहा है बल्कि इसलिए लगता है क्योंकि वह आपकी सुंदरता खराब कर रहा है और आप लोगों की नजर में सुंदर दिखना चाहते हैं , यह दिखावा बंद करना होगा ! किसी बच्चे की मुस्कान को गौर से देखें वह नेचुरल है इसीलिए खूबसूरत है !

अगर आप  इसके लिए तैयार हैं तब सबसे पहले अपने उस्ताद मन को बदलना होगा , हर तरह के दिखावे से चाहे वह समाज के प्रति हो या परिवार और दोस्तों के प्रति , अपनी घटिया आदतें जिन्हे आप छिपाते आये हैं को सबके सम्मुख करना सीखना होगा अथवा निर्ममता और ईमानदारी के साथ छोड़ना होगा , एक बार ईमानदारी आते ही मन आपके साथ गहराई से जुड़ेगा और आंतरिक मानवीय रक्षा शक्ति को मजबूत करने को प्रतिबद्ध होगा और यह शरीर सही दिशा में काम करना शुरू करेगा !
before retirement 

खुद को मजबूत दिखाए रखने के आवरण को हटाना होगा उसके लिए मन में गहराई से बैठे मृत्यु भय को मारना होगा एवं उन्मुक्त होकर स्वच्छ मन जो भी कहे करना होगा , रोज नए दिन को आखिरी दिन की तरह जीना सीखना होगा उन्मुक्त मस्त हंसी आते ही मोटापा और बीमारी पास भी नहीं आएगी दोस्त बस बिना समाज भय के सबके मध्य खुद को ठट्ठा मारकर बच्चों की तरह हंसाना, नाचना कैसे है यह नए सिरे से सीखना होगा ! जवान होने की प्रबल इच्छाशक्ति आपसे भीष्म प्रतिज्ञा करवा लेगी और पूरा भी करवाएगी !   
 
म सम्मानित लोग अक्सर अपने ऊपर कोई कठोर फैसला लागू ही नहीं होने देते क्योंकि हम खुद ही नियम बनाने वाले हैं और अक्सर यह नियम दूसरों पर लागू करवाते हैं ! वजन घटाने का फैसला आसान नहीं है क्योंकि बरसों से मेहनत न करने , और जम के बढ़िया भोजन की आदत छोड़ना, भीष्म प्रतिज्ञा जैसा है जो खुद पर लागू ही नहीं करना क्योंकि हम किसी के प्रति जवाब देह नहीं है !
 
हम लोग अक्सर अपने द्वारा किये गए संकल्प भुला देते हैं क्योंकि उसके लिए जवाब हमें खुद को ही तो देना है और इसमें शर्मिंदगी
और कायाकल्प के बाद 2019 

नहीं होती ! अगर हमने अपने बारे में लिया गया कोई संकल्प समाज में जोरदार तरीके से घोषित किया होता तब उसे भुलाने से पहले कई बार सोचना पड़ता सो इस संकल्प की घोषणा 
समाज में खुद के प्रति निर्मम होकर करें , कहें कि आपका वजन इस उम्र में ९० किलो है और इसे 65 किलो लाने के लिए आप आज से कसम खा कर संकल्प लेते /लेती हैं कि अगले दिनों में आप अपने आलसी शरीर पर यह अत्याचार करेंगे / करेंगी जिससे वह अपनी काहिली भुला सके ! शान से बिना शर्मिन्दा हुए अपनी मूर्खता और संकल्प की घोषणा करें, इसके बाद या तो सारी कलई उतर जायेगी या आपको उसे लगातार बचाने का प्रयत्न करते हुए वजन घटाना आ जाएगा जैसा मैंने खुद अपने साथ किया था !

मैंने अपने 61 वर्षीय (ईयर 2015 )आलसी शरीर जिसने पूरे जीवन दौड़ना छोड़िये कभी पार्क में वाक भी नहीं किया था और जिसे घर
2020 
,ऑफिस और कार में एयर कंडीशन सुविधा प्राप्त थी , को सुधारने के लिए घोषणा की थी कि मैं आज से तीन माह बाद 21 Km हाफ मैराथन दौड़ कर पूरा करूँगा और यह घोषणा फेसबुक और तमाम मित्रों परिवार जनों के बीच तब की थी जब मैं दो मंजिल सीढियाँ चढ़ते समय हांफता था और अपने पूरे जीवन में कभी भी 10 मीटर तक नहीं दौड़ा था और अपने ऑफिस और मित्रों में लीडर की भूमिका में था बेहद सम्मानित भी था !

मुझे याद है कि उसके अगले दिन पार्क में मैंने अपना पहला वाक ४५ मिनट का किया था था जिसका आखिरी मिनट जैसे तैसे धीरे धीरे दौड़कर ख़त्म किया था और यह क्रम फिर कभी बंद नहीं हुआ पहला हाफ मैराथन जैसे तैसे ही सही मगर 3 घंटे से कम समय में पूरा करने में कामयाब हुआ था ! आज मुझे कोई बीमारी नहीं , कहाँ गायब हुई यह भी नहीं पता बस शरीर को मेहनत करना सिखा दिया अब आखिरी दिन जब चाहे आये परवाह नहीं !


थुलथुल शरीर से मुक्ति चाहिए तो सोच बदलनी होगी -सतीश सक्सेना

क्या आपने एक भी ऐसे मेहनतकश मजदूर को देखा है जो शरीर से थुलथुल हो , तोंद निकाले हुए बोझा ढो रहा हो अथवा फावड़ा चला रहा हो ! कभी सदर बाजार या अपने शहर की व्यस्त मार्किट में जाएँ वहां आपको हाथ गाड़ी में , अपने शरीर के वजन से 10 गुना सामान लादकर खींचते हुए मेहनतकश मिलेंगे जिनके शरीर से पसीना टपक रहा होगा आप देखेंगे कि जब यह इंसान दोपहर में लंच करने के लिए मैले कपडे में बंधी 4 मोटी रोटियां निकाल, बाजार से 10 रूपये के छोले खरीद कर खाने बैठता है तब आपके मन में कोई विचार खुद को सुधारने के नहीं आते , तब यह लेख आपके लिए नहीं है !

आप भले यकीन न करें मगर अपने रिटायरमेंट के बाद (साठ वर्ष बाद ) मैंने अपने कायाकल्प करने के संकल्प में जिस व्यक्ति को गुरु बनाया वह मेरे मोहल्ले में घर के सामने बरसों से खड़ा होता एक अनपढ़ रिक्शावाला है जो पूरे दिन दो महिलाओं / पुरुषों  को बैठा कर कम से कम 3 से 5 km के , 20 चक्कर रोज लगाता है ! मैं हैरान था कि यह मैला कुचैला, बढाए गंदे बालों वाला इंसान , एक दिन में 120 किलो वजन को लेकर 5 किलोमीटर कैसे आता जाता होगा ! अगर 10 घंटों में यह 20 चक्कर भी लगता है तब इसका अर्थ हुआ कि पूरे दिन में इस दुबले पतले इंसान ने 80 km का सफर , कम से कम 100 kg वजन खींचते हुए किया है , यह जानकारी हतप्रभ करने के काफी थी मेरे लिए !

मैंने उससे उसका भोजन पूछा कि कितने अंडे और दूध ,फल रोज खाते हो भाई तो उसने अपना खाने का डब्बा दिखाया जिसमें चार मोटी रोटियां , आलू की सूखी सब्जी और प्याज था ! यह उसका लंच था , रात को घर जाकर दाल रोटी खायेगा, अंडा और दूध और डॉक्टर उसके बजट में ही नहीं थे , थोड़ा दूध घर में लाता है अपने बच्चों के लिए बस , बुखार उखार आने पर लेटना पड़ता है दो तीन दिन में ठीक हो जाने पर फिर काम पर ! जबकि हमारे ज्ञान के अनुसार अगर मैं मेहनत या एक्सरसाइज करता हूँ तब मुझे पौष्टिक खाना मिलना ही चाहिए अन्यथा शरीर बेकार और बीमार हो जाएगा जबकि यह रिक्शे वाला बीस बरसों से यही कर रहा है और सारी जमा पूँजी अपने गाँव माता पिता के पास भेजता है !

थुलथुल शरीर आपके थुलथुल मन का भी परिचायक है इस पर मनन करके देखिये सो अगर थुलथुल काया से मुक्ति चाहते हैं तो खुद को बदलना होगा  ! उन्मुक्त होकर बोलना और हंसना सीखना होगा बिना किसी की परवाह और दिखावा किये कि कोई क्या कहेगा , आप अपनी भावनाओं को बिना दबाये खुलकर व्यक्त करना सीखिए और यह आप तभी कर पाएंगे जब आप दूसरों के प्रति और खुद के लिए ईमानदार होंगे बिना किसी दिखावे के !

दुनिया की हर उस चीज आनंद लेना शुरू करें जिसके लिए मन हुआ और खर्चे या लोगों के कारण उस इच्छा को कही दबा दिया इसमें हर तरह का खाना पीना जो घर में संभव नहीं, शामिल होगा एवं वह सब काम करें जिसके बारे में सुना है, मगर कर नहीं पाए, ढेरों कारणों के कारण, मन मसोस कर रह गए , खुद को एन्जॉय करना सीखें, बिना किसी दिखावे के गर्व रहित प्यार करें खुद को और शरीर को अपना मित्र बनाएं उससे बातें करें उसपर विश्वास करें वह आपको कभी धोखा नहीं देगा ! प्रसन्न मन आपकी इच्छाशक्ति को अदम्य बनाने में समर्थ है ! जी भर कर हंसना सीखें और इसके लिए कंपनी तलाशें ,पार्क में भीड़ में खड़े होकर हो हो करते हुए बनावटी हंसी आपको जोकर बनाने में ही समर्थ होगी इसका रंच मात्र भी फायदा नहीं !

मेडिकल अथवा अन्य विज्ञापनों से प्रभावित न हों हमेशा यह ध्यान रखें कि विज्ञापनों का सुझाव मानने पर अगर आपको खर्च करना पड़ रहा है तो यह सुझाव सफल है उनके व्यवसाय के लिए और आप असफल !
  1. केवल पांच चीजों का ध्यान रखें गहरी साँस लेकर शुद्ध हवा अंदर खींचना शुरू करें, पूरे फेफड़े खोलने का अभ्यास करें महसूस करें कि यह सामान्य सांस नहीं बल्कि प्राणवायु है जो समूचे रक्तप्रवाह को स्वच्छ करती है हृदय की थकान को दूर करते हुए , बेहतर गतिशील बनाती है ! 
  2. दिन भर में 4 लीटर स्वच्छ पानी , खासतौर पर भूख लगने पर पहले पानी ही पियें ! RO ( रिवर्स ओस्मोसिस ) जल से आवश्यक मिनरल्स निकाल देता है यह हानिकारक है ! कोशिश प्राकृतिक शुद्ध पानी लेने की रहे !
  3. टॉनिक ,विटामिन , प्रोटीन भूलकर कोई भी सामान्य भोजन करें कोशिश रहे कि भोजन परिश्रम करने के बाद ही खाएं और मेहनत के अनुसार ही खाएं अगर पूरे दिन कुछ नहीं किया है तब भोजन न करें अथवा न्यूनतम करें !
  4. कम से कम आधा दिन हाथ पैरों का उतनी मेहनत के साथ चलना आवश्यक है जिससे पसीना बहना शुरू हो जाए अगर आप मेहनतकश नहीं हैं तब वाक करना आरम्भ करें इसमें गति, दूरी , समय आदि में बदलाव लाते रहें ! लगातार एकसार किया गया वाक बेकार हो जाता है क्योंकि शरीर इसे स्वीकार कर अपने नियम में ढाल लेता है ! सो इसमें परिवर्तन करें साथ ही यह अकेले करना चाहिए मनन करते हुए शरीर से बात करते हुए न कि दोस्तों के साथ गप्पे मारते हुए !
  5. भरपूर नींद लें , नींद न आने का कारण आप खुद और आपके लगातार घुमड़ते विचार होते हैं , अपने मन से चालाकी, क्रोध  और समझदारी का त्याग करें बच्चों जैसा निर्मल मन लेकर सोने जाएँ एक दिन तकिये पर सर रखते ही नींद आएगी !
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Monday, January 10, 2022

तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा -सतीश सक्सेना

 आज बहुत दिन बाद 10 Km की दौड़ लगाईं , मगर इसकी विशेषता यह थी कि यह रनिंग 0 डिग्री टेम्प्रेचर में आसमान से होती, स्नो शावर के दौरान, जर्मनी की एक खूबसूरत झील के किनारे किनारे लगाईं गयी ! 67 वर्ष की उम्र में यह काम मेरे जैसे आलसी के लिए एक अजूबा ही था , मगर हो गया आसानी से !

हालांकि इस कड़ाके की ठण्ड में , दौड़ते समय कुछ जगह ऑक्सीजन की कमी महसूस अवश्य हुई , पहली बार हार्ट रेट ने 210 को भी छुआ और इनर पसीने में पूरी तरह भीग गए थे मगर खुद को टेस्ट करना भी जरूरी था सो कर लिया ! मुझे लगता है कि साठ के बाद हमें मृत्यु का भय मन से निकाल देना चाहिए , मृत्यु भय हमें बूढ़ा बनाने में सबसे बड़ा रोल निभाता है ,

-यही भय है कि बढ़ती उम्र में भगवान् सबसे अधिक याद आते हैं उन्हें भी जिन्होंने पूरे जीवन में कभी भगवान को याद न किया हो !

-यही भय है जिसके कारण हम जीवन भर मेहनत कर धन जोड़ते रहते हैं और हजारो मौकों पर अपने मन को खुश करने हेतु किये गए खर्चों में कटौती करते रहते हैं , कि अगर बीमारी के समय धन न हुआ तब क्या करेंगे जबकि यह सोच ही नहीं पाते कि आजतक मौत से, कोई डॉ, किसी को भी बचाने में सफल नहीं हुआ अन्यथा अमेरिकन प्रेजिडेंट से ताकतवर विश्व में

कोई नहीं मगर वे सब अपने सामान्य वर्ष ही जी पाए , कितने ही सिरफिरों के उदाहरण हैं जिन्होंने मृत्यु से बचने और अधिक उम्र पाने के लिए करोड़ों रूपये खर्च किये मगर वे कम उम्र में ही दुनिया छोड़ गए !

-मेडिकल व्यवसाय का पूरा वृक्ष हमारे शरीर पर खड़ा है , उसे इतने समय में कुछ ही जानकारी हासिल हो पायी है अन्यथा आधुनिक मेडिकल साइंस केवल शैशवावस्था में ही है यह खुद मेडिकल साइंटिस्ट मानते हैं , वे मानव मस्तिष्क संरचना के बारे में सर्वथा अनभिज्ञ है जो मानव को सौ वर्ष तक चलाता है और तमाम बीमारियों से उसकी रक्षा करने में समर्थ है !

-आँखे खोलें , आपका शरीर इस योग्य है कि बिना किसी सपोर्ट के पूरे वर्ष शान से जी सके सिर्फ अपना भरोसा बनाये रखें और

इसकी आवश्यक खुराक शुद्ध हवा , भरपूर स्वच्छ पानी , मामूली भोजन , थकान के बाद की भरपूर नींद एवं पैरों का भरपूर उपयोग करें आप पूरे जीवन वृद्धावस्था से बचे रहेंगे !

सादर प्रणाम आप सबको !

बढ़ी उम्र में , कुछ समझना तो होगा !
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !

उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें
भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !

अगर सुस्त मन दौड़ न भी सके तब
शुरुआत में कुछ ,टहलना तो होगा !

यही है समय ,छोड़ आसन सुखों का
स्वयं स्वस्त्ययन काल रचना तो होगा !

असंभव नहीं , मानवी कौम में कुछ ?
सनम दौड़ में,गिर संभलना तो होगा !

Monday, November 1, 2021

परीक्षा मानव शक्ति की -सतीश सक्सेना

आज लगातार दौड़ते हुए सौवाँ दिन था , इस बार अपनी शक्ति और सामर्थ्य की खुद परीक्षा लेनी थी , भरोसा था पिछले छह वर्षों की सतत
मेहनत और अपने ऊपर विश्वास का जिसके कारण यह एग्जाम पास किया इसमें आप सब मित्रों का प्रोत्साहन और साथ शामिल था , उसके लिए आप सबको प्रणाम !

इन सौ दिनों में तमाम अनुभव हुए, साठ बार 21 km या अधिक दौड़ना और दो बार लगातार 10 दिन तक रोज हाफ मैराथन (21 Km) दौड़ा , रोज लगभग 3 से चार घंटे दौड़ने के कारण वजन बेहद तेजी से घटा और अधिक पौष्टिक भोजन लेने का ध्यान नहीं रखने के कारण दो या तीन बार रुकने पर, चक्कर आते प्रतीत हुए तब यह अहसास हुआ कि इतना अधिक पसीना ( लगभग 3 लीटर रोज ) बहने से शरीर से आवश्यक साल्ट्स सोडियम, कैल्सियम, मैग्निसियम की कमी काफी हुई है और इसका नतीजा जीवन में पहली बार कमजोरी महसूस हुई अतः अगले दिनों नियमित खाना छोड़ 3 कोर्स मील्स लेना शुरू कर दिया , इससे धीरे धीरे सामान्य महसूस करने लगा और सौ दिन पूरे हुए , फायदा यह हुआ है कि 20 km लगातार दौड़ने पर भी पैरों में थकान का नाम नहीं है ! पिछले सौ दिन में 1849 km दौड़ा हूँ एवं पूरे विश्व में दौड़ते 13073 लोगों में मेरा रैंक 68 रहा , यह मेरे लिए भी अविश्वसनीय है , भरोसा नहीं होता कि मैं 67 वर्ष की उम्र में लगातार 100 दिन तक रोज 19 km दौड़ पाया हूँ !

कई बार घुटने में दर्द कमर दर्द हार्ट पल्पिटेशन आदि ने परेशान अवश्य किया मगर भय और चिंता को कभी खुद पर हॉवी नहीं होने दिया , और नतीजा आनंददायक मिला ! शरीर का सारा अनावश्यक फैट गायब और न थकने वाली अथाह शक्ति , और जवानी किसे कहते हैं, इसका अहसास और आखिरकार मैंने कायाकल्प कर दिखाया ! यहाँ लिखने का उद्देश्य सिर्फ अपने हम उम्र साथियों को विश्वास दिलाना मात्र है कि मानव शरीर पर भरोसा न छोड़ें वह बेहद शक्तिशाली है !

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
दर्द सारे ही भुलाकर, हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !
जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !
जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के , धीमे धीमे दौड़िये !

Tuesday, August 31, 2021

कौन मनाये जन्माष्टमी, कृष्ण कन्हैया चला गया -सतीश सक्सेना

कौन मनाये जन्माष्टमी, किशन हमारा चला गया !
16 Feb 1968 -25 August 2021 
सबका हाथ बटाते मोहक आँखों वाला चला गया !

इतने लोगों के रहते भी , कैसी किस्मत पायी थी,
बहिनों के रक्षाबंधन पर, सबसे प्यारा चला गया ! 

सबकी कड़वी बातें सुनकर एक शब्द न कहता था
सबको रोता छोड़ अकेला राज दुलारा चला गया ! 

राजकुमारों जैसा बचपन , लेकर किस्मत पायी थी   
चुपके से घरबार छोड़कर आँख का तारा चला गया !

जहाँ बैठता रौनक लाता था हर शख्श के चेहरे पर
रोता छोड़ अँधेरे सबको , इक ध्रुव तारा चला गया !

Tuesday, February 16, 2021

45 वर्ष की उम्र में नीरसता क्यों -सतीश सक्सेना

उम्र बढ़ने के साथ नीरसता आनी ही है, मैं ऐसा नहीं मानता !  नीरसता की शुरुआत, जीवन में नयी रुचियों और अपनी इच्छाओं का गला घोटने से होती है और इसके पीछे के कारणों में प्रमुख , बढ़ी उम्र में सामाजिक वर्जनाएं , खुल कर हंसने में भय, अकेलेपन के
कारण आये आलस्य जनित बीमारियों द्वारा शरीर का अशक्त होना अधिक है ! हमारे समाज में, "सब लोग क्या कहेंगे" के दबाव से निकलना, डरपोक और भयभीत लोगों के लिए असम्भव बन जाता है ! 

समाज की नजर में, उम्र अधिक होने का अर्थ चुस्त और जीवंत डिज़ाइन के कपडे, मस्त उन्मुक्त हंसी, मनचाहे मित्रों और शौक को त्यागना होता है , उनके हिसाब से अधिक उम्र में ऐसा करना बेहूदगी होता है और अधेड़ अवस्था में तो यह अशोभनीय,  खासतौर पर तब यह और भी आवश्यक हो जाता है जब उनके बच्चे विवाह योग्य हो जाते हों ! सामाजिक परिवेश उन्हें मजबूर करता है कि वे बढ़ती उम्र में चुस्त दुरुस्त कपडे छोड़कर ढीले वाले कपडे , चप्पल और मोटा चश्मा लगाकर अखबार पढ़ें और पैरों पर हाथ लगाने वालों को हाथ उठाकर , धीमी आवाज में आशीर्वाद और वरदान देना शुरू करें और सबके मध्य ज्यादा बात न करें !

अधिकतर हमारे यहाँ जवान बच्चों की माँ और बहू /दामाद वाले पुरुषों को बूढ़ा मान लिया जाता है और इस नाते 45 वर्ष की भरपूर जवानी में औरतों को शालीन और 55 पार मजबूत पुरुषों को भी पापा जी बनना पड़ता है ! हर प्रकार की मित्रता चाहे वह कितनी शुद्ध और आवश्यक क्यों न हो , उनके लिए अशोभनीय बन जाती है ! उन्मुक्त हँसी का असमय छिन जाना उनके शरीर को असमय क्षरण की गारंटी देने में सहायक सिद्ध होता है !  

महिलाओं का और भी बुरा हाल है , उनकी युवावस्था पापा मम्मी की तीक्ष्ण नज़रों में कटती है और विवाह पश्चात पतिदेव की वर्जनाओं और सुरक्षा में, 40-45 होते होते बच्चे समझाने लगते हैं कि माँ किस साड़ी में अधिक ग्रेसफुल दिखती हैं उनके लिए माँ का चहकना ,हंसना अजीब लगने लगता है , खुलकर हंसने के लिए यह वयस्क लड़कियां जीवन भर तरसती हैं उनके पास एक ही जगह होती है जहाँ वे ठठ्ठा मारकर स्कूली दिनों जैसा हंस पाए जिस जगह उनके परिवार का कोई व्यक्ति दूर दूर तक न हो और वे ऐसा ही करती भी हैं बशर्ते वह क्षण किसी को पता नहीं चलने चाहिए !

हर घर में अपनी भूलों या गलतियों को छिपाना सबसे पहले सिखाया जाता है , बच्चों को कहा जाता है कि अपने घर की यह बात किसी और को नहीं बतानी है ! कोई भी रुका काम कराने का तरीका रिश्वत देना है चाहे वह सरकारी काम हो अथवा मंदिर , भगवान के दर्शन करने को गरीबों और रईसों के रास्ते अलग है , अधिक पैसा दो और साईं बाबा के दर्शन करें अधिक चढ़ावा देंगे तो फल भी

अधिक मिलेगा , दयनीय हाल बना दिया है हमने अपने समाज का और इसके जिम्मेदार हम अधेड़ावस्था के लोग ही हैं जो भुक्तभोगी होने के बावजूद, अपने ज़िंदा रहते, व्यवस्था परिवर्तन की कोशिश करते, युवाओं का मजाक बनाते हैं और उन्हें चोरी करने पर मजबूर करते हैं सो झूठ और चोरी करना हमारे व्यवहार का हिस्सा बन गया है हम एक बीमार अपराधी समाज का अंग बन कर रह रहे हैं और ऐसे ही मरना हमारी नियति है !

विश्व में विकसित देशों के मुकाबले हम कहीं नहीं ठहरते, वहां क्राइम और भ्रष्टाचार का नामोनिशान नहीं है , वे ईमानदार हैं , उम्रदराज हैं उनमें बीमारियों से कराहते लोग न के बराबर हैं , उनका वातावरण, हवा, शुद्ध और पीने के लिए बहती नदियों में स्वच्छ पानी उपलब्ध है उनके पास बड़ी खुली सड़कें और पक्की बस्तियां सैकड़ों वर्षों से हैं ,उनके यहाँ सामाजिक वर्जनाएं न के बराबर हैं , वहां राह चलती लड़कियों को कोई नहीं घूरता , अपने अभिन्न मित्रों के साथ , उन्मुक्त रूप से हंसने के लिए वे परिवार की और से भी मुक्त हैं और वे भरपूर खुशहाल जिंदगी गुजारते हैं ! यूरोपीय देशों में मैंने वाइन / बियर खरीदते अक्सर वृद्धाओं को देखा है वहीँ हमारे देश में ऐसा देखना पाप या अजूबा होता है और भीड़ लग जायेगी उनका चेहरा देखने के लिए ! 

अधिकतर महिलाएं और पुरुष बढ़ती हुई अवस्था में इसे घुटन से मुक्ति चाहते हैं , मगर उनकी हिम्मत नहीं है कि वे किसी को अपनी मित्रता का अहसास दिलाएं , मेरी कुछ महिला मित्रों ने इसे स्वीकार भी किया है, वे हंसना चाहती हैं मगर उनकी हिम्मत नहीं कि वे बेड़ियाँ तोड़ सकें यहाँ तक कि शुद्ध मित्रता आवाहन को स्वीकार कर सकें , उनके लिए पारिवारिक संबंधों से इतर, विपरीत सेक्स मित्रता स्वीकारना और हंसना मना है  चाहे वह मित्रता कितनी ही सहज और निश्छल क्यों न हो भयभीत महिलायें ऐसा सोंच भी नहीं सकतीं कि उनकी मित्रता परिवार से इतर हो अन्यथा बदनाम होने की गारंटी पक्की है !


चूँकि अधिकतर अविकसित देशों में, सत्ता पर बैठने वाले पुरानी मानसिकता में डूबे हुए अधेड़ या वृद्ध बैठे हैं जिन्होंने वर्जनाओं की भरमार पूरी उम्र झेली है और वे मानसिक तौर पर इसको तोड़ने में नाकामयाब रहे , नयी पीढ़ी के लिए वे अपने पुराने उसूलों की कानूनी जामा पहनाने में देर नहीं लगाते हैं और भयभीत युवा उन्हें तोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते इसी कारण पूरा विश्व दो भागों में विभक्त हो चुका है , अविकसित देश वाले समाज को, विकसित मस्तिष्क वाला समाज बनने में सैकड़ों वर्ष और तकलीफ भरा रास्ता तय करना होगा , पीढ़िया बीत जाएंगी खुलकर हंसना सीखने में , भयमुक्त समाज का नारा लगाएंगे मगर अर्थ समझने में उम्र गुजर जायेगी !
स्वस्थ शरीर को बनाने के लिए उन्मुक्त एवं बनावट मुक्त हंसना बेहद आवश्यक है , और फलस्वरूप स्वस्थ मस्तिष्क का मालिक , हमेशा जवान रह सकता है !

अंत में कुछ पंक्तियाँ पढ़ें ..

सज़ा मिले मानवता का , उपहास बनाने वालों को,
कुछ तो शिक्षा मिले काश, कानून बनाने वालों को !

अगर यकीं होता , मौलाना मरते भरी जवानी में ,
हूरें और शराब मिलेगी , ज़न्नत जाने वालों को !
 


Friday, February 12, 2021

वजन घटाना आसान है , सिर्फ इच्छाशक्ति मजबूत हो -सतीश सक्सेना

अभी कुछ दिन पहले ही ठंडक और कोरोना के कारण , घर में जमकर खाया और कम्बल की मेहरबानी के कारण एक दिन चेक करने पर पाया कि पूरे तीन किलो वजन बढ़ चुका है , इस उम्र ( 66 वर्ष ) में मुझे बुढ़ापा नहीं चाहिए सो उसी दिन तय कर लिया था कि एक सप्ताह में वजन

सामान्य करना है !

पूरे आठ दिन में रोटी सिर्फ एक बार (घी नमक प्याज मिर्च के साथ), खिचड़ी दो बार दही, घी और धनिये की चटनी के साथ , एक बार बिरयानी रायता , ६ बार टमाटर सूप , दूध की चाय चार बार , ग्रीन टी 10 बार , कहवा २ बार , केला 3 (दो बार ), खजूर लगभग 200 grm ( ४ बार ), उबले अंडे 6 (3 बार ) , पनीर 600 ग्राम (3 बार ), कैप्सिकम , प्याज रोस्टेड और चना जोर गरम ढाई सौ ग्राम के साथ 100 ग्राम चीज़ भी खायीं गयी साथ में रोज १२ गिलास पानी कम से कम पिया !

इन दिनों जो त्यागा गया उसमें, किसी भी शेप में मीठा (बिस्कुट , गजक , रेवड़ी आदि ) , दूध और आयल प्रमुख था ! मानसिक तौर पर लोगों से अपेक्षाएं करना छोड़कर खुद को मस्तमौला रखा , विपरीत परिस्थितियों में और अधिक खुश रहा एवं बोरियत से बचने के लिए रोज दो बार मार्केट /पार्क वाक किया !

मगर वजन घटाने में सबसे अधिक भूमिका रही मेरे द्वारा इस ठण्ड के दिनों में भी , सुबह स्लीवलेस वेस्ट में की गयी धीमे धीमे लम्बी दौड़ , इन आठ दिनों में मैंने, strava रिकॉर्ड के अनुसार 50 km की दूरी दौड़ते हुए तय की तथा एक दिन 15 km साइकिल चलाकर पसीना बहाया !

यह मेरा आज का फोटो है जो इस अवसर पर लगाया गया ताकि उनकी आँखें खुलें , और संकल्प लें कि बुढ़ापा मात्र नाम है अगर मेहनत करने की जिद कर लें , मानवीय शरीर हर बीमारी से आसानी से पार पाने में सक्षम है एक बार विश्वास तो करके देखें तो सही !
सादर मंगलकामनाएं आप सबको ! हँसते रहें हंसाते रहें ...

Friday, January 1, 2021

हो सकें तो उन्मुक्त होकर हंसना सीखें , आप उम्रदराज़ होंगे -सतीश सक्सेना

पिछले वर्ष की भूलें इस वर्ष न हों यही कामना है इस वर्ष , ऐसे मित्रों से रक्षा करे जो सिर्फ दिखावे का प्यार अपनापन जतायें , जिन्हें प्यार की समझ ही न हो ! मैंने जीवन भर दिखावा नहीं किया किसी को भी अगर अपना कहा तब अपनापन का अर्थ समझकर ही कहा और निभाया मगर हमारे समाज में अपनापन है कहां , वहां सिर्फ कहने को अपनापन मिलेगा यह भूल गया , नतीजा यार लोग अपनी औकात दिखा गए !

हमने तो दोस्ती में जान देना सीखा है और वह भी बिना कहे बिना अहसान , अहसास दिलाये , ऐसे लोग हमें नहीं मिले ! खैर अब आगे दोस्ती ही नहीं करना सिर्फ हेलो कैसे हैं , से आगे नहीं जाना, यही संकल्प है अगले कुछ दिन या वर्षों के लिए , जो भी हाथ में हों ! 

आप सब से ऐसी शुभकामनायें चाहिए कि अगले साल "हमें समझ जाने वाले" और "हमारी असलियत जानने वाले" समझदार, कम से कम टकरायें :-)), और कुछ भले और ईमानदार लोगों से भेंट हो तो इन लेखों का लिखना सार्थक हो ! सबसे अंत में ईश्वर से प्रार्थना है कि मेरे पास इतना धन और शक्ति जरूर बचाए रखे कि वक्त आने पर, मेरे दरवाजे से , कोई मायूस होकर, वापस न लौट जाए !किसी का एक आंसू , बिना उस पर अहसान किये, पोंछ सका, तो अगले वर्ष, अपना मन संतुष्ट मान लूँगा ...

आप सब, नववर्ष पर उन्मुक्त नजरें मिला
कर, खुलकर हंसें और हंसाएं , यही कामना है !

Saturday, December 26, 2020

तो फिर मेरी चाल देख ले -सतीश सक्सेना

शायद यह अकेला समाज है जहाँ ऊपरी दिखावे को सम्मान देना सिखाया जाता है ! अगर सामने से कोई गेरुआ वस्त्र धारी और पैर में खड़ाऊं पहने आ रहा है तो पक्का उस महात्मा के चरणों में झुकना होगा और आशीर्वाद मांगना ही है चाहे वह बुड्ढा पूरे जीवन डाके डालकर दाढ़ी बढ़ाकर छिपने के लिए बाबा क्यों न बना हो और किसी गए गुजरे का आशीर्वाद पाने के योग्य भी न हो !

मंदिर जाएँ तो पंडित (जी) धोती, कुरता में ही मिलेंगे , और आजतक किसी पुजारी की हिम्मत नहीं कि वह निक्कर या पैंट पहनकर भगवान की पूजा करे ! शायद यह मंदिर का ड्रेस कोड बना दिया गया है हमारे यहाँ , कष्ट निवारण हेतु पूजा पाठ के अलग अलग रेट हैं ज्यादा रेट तगड़ी पूजा की गारंटी है !

भारतीय राजनीति में खद्दर और सफ़ेद कपडे पहनने का रिवाज शुरू से ही है , खद्दर ग़रीबी की मदद करने और 90 प्रतिशत भूखे नंगे समाज में खुद को गरीब सा दिखाने की तड़प है , इससे बहुमत के वोट मिलने में, आसानी रहती है ! उन पर बहुत प्रभाव पड़ता है क्योंकि यही वह तबका है जो जीवन भर सफ़ेद कपडे कभी नहीं पहन पाता और सफ़ेद रंग स्पॉटलेस करेक्टर की पहचान है सो जितने भी दल्ले हमारे देश में दिखते हैं सब के सब बड़े नेताजी से लिंक का प्रतीक, खद्दर पहने ही मिलते हैं , यह लोग कोई भी असम्भव काम सरकार से कराने का वादा करते हैं और आपसे धन लेकर ऊपर पहुंचाते हैं , बदले में इनको बाकायदा मोटा पारितोषिक मिलता है और आपसे वाहवाही कि पैसे देकर नौकरी लगा दी लल्ला की ! अगले ही दिन इन श्वेत वस्त्रधारियों द्वारा श्वेत महंगे जूते भी ख़रीदे जाते हैं इससे इन्हें मिलने वाला सम्मान और अधिक हो जाता है देसी भाषा में इन्हें जमीन से जुड़ा पार्टी कार्यकर्ता कहा जाता है और इसका मुख्यतः काम नेता के पास लल्लुओं के काम कराने के लिए उनसे नेताजी के लिए नोट इकट्ठा करना होता है ! मोटा एक काम भी करा दिया तो अगले दिन इनके पास एक झंडा लगी एस यू वी मिलेगी !

और हिंदी का मशहूर विद्वान बनना और भी आसान है बस अपना खटारा सा सरनेम बदलकर एक बेहतरीन शास्त्रीय सांस्कृतिक नाम तलाश कर लें जैसे सतीश सक्सेना के नाम पर सतीश अपरिमेय हो तो मेरे पाठक मुझे आदरणीय कहना शुरू कर देंगे पक्का , और अगर मैं अपनी दाढ़ी महा गुरु जैसी रख लूँ तब लोग मुझे आचार्यश्री का दर्जा और जयजयकार आसानी से देंगे भले मैंने हिंदी की पढ़ाई, कक्षा १२ सेकंड डिवीजन पास तक ही की हो ! साहित्यिक लेख लिखने में कोई कष्ट ही नहीं , एक पैरा राजीव मित्तल और दूसरा शम्भुनाथ शुक्ल का और तोड़ मरोड़ कर उसे आकर्षक बनाकर पेश कर दूँ तो तालियों की जबरदस्त गड़गड़ाहट न मिले तो कहना क्योंकि आचार्य जैसी शक्ल और ज्ञान टपकाता नाम इनके पास है ही नहीं !

सो नए साल में क्यों न यह रंग ही धारण कर लूँ भाइयों और बैनों !!
तो फिर मेरी चाल देख ले ...!!

https://youtu.be/7iSDtiBipAk

Saturday, December 19, 2020

६७ वां वर्ष और हेल्थ केयर -सतीश सक्सेना

 दौड़ते दौड़ते 67वां वर्ष कब शुरू हुआ पता ही नहीं चला , शायद मैं अधिक खुशकिस्मत हूँ जिसे अपने बड़े होते बच्चों से कभी कष्ट का अनुभव ही नहीं हुआ ! बेटा 40 वर्ष का है और देखता रहता है कि पापा को घर में किस चीज की आवश्यकता है , तलाश करने से पहले घर में वह चीज आ जाती है ! इस बार मेरे हाथ में एप्पल वाच 6, आ गयी है जिसमें फ़ोन इनबिल्ट है , बेटे का कहना है कि इसमें हेल्थ के सारे टूल्स मौजूद हैं जो आपकी केयर के लिए आवश्यक है !

अगर आप घडी पहने दौड़ रहें हैं या घर से बाहर हैं तब मोबाइल साथ ले जाने की कोई आवश्यकता नहीं , यह फ़ोन काल , मेसेज रिसीव कर सकती है , नार्मल फ़ोन की तरह कॉल कर सकती है ! इसमें वॉकी टॉकी की सुविधा भी है जिसमें इन्सटैंट आप अपने मित्र से बात कर सकते हैं !

आश्चर्यजनक है कि यह घडी हृदय गति पर हर वक्त नजर रखती है , ऑक्सीजन लेवल को चेक करके बता देगी कि दौड़ते हुए ऑक्सीजन लेवल कम तो नहीं हुआ यही नहीं ECG हर वक्त चेक करने की सुविधा है और रिपोर्ट देगी कि यह एब्नार्मल है या सही ! अगर पूरे दिन लेटे रहें तो यह बड़े प्यार से याद दिलाती है कि अब आपको थोड़ा टहलना चाहिए ! यह दिन भर में खड़े होना कितना आवश्यक है उसके मापदंड बताती है तथा याद दिलाती है आज कल के मुकाबले आपने आराम अधिक किया ! यह मुझे हाथ २० सेकंड तक धोने के लिए मजबूर करती है ! इस घडी को पहनकर आप नहा सकते हैं , तैर सकते हैं , पानी से कोई खतरा नहीं !

ऐसा लगता है कि एक सुपरवाइज़र हर वक्त चौकन्ना होकर साथ रहता है जिसका काम मेरी सेहत पर नजर रखना है यहाँ तक कि अगर आप दौड़ते समय या साइकिल चलाते समय गिर गए तो यह बिना आपसे पूछे आपके बेटे और बेटी को फ़ोन करने के साथ साथ आपके डॉ को कॉल भी देगी कि आपका दोस्त खतरे में है !

67 वे वर्ष में नयी टेक्नोलॉजी का फायदा उठा रहा हूँ और मस्ती के साथ दौड़ रहा हूँ ! आज सुबह 5 km , सवा 7 मिनट में एक किलोमीटर की गति से दौड़ते हुए यह बिलकुल नहीं लगा कि मैं जवान नहीं हूँ , आज भी नयी चीजों को समझने और सीखने की इच्छा है , अपने आपको सबसे अधिक समझदार नहीं मानता बल्कि सीखने में अच्छा लगता है ! वे सारे काम करता हूँ जो जवान करते हैं शुक्र है ताकतवर इच्छाशक्ति का साथ शरीर बखूबी देता है , समझदार मूर्खों से दूरी बनाकर रहना पसंद करता हूँ !

शुभकामनायें आप सबको कि नए साल में पछतावा कम से कम हो !


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