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Sunday, July 17, 2022

एक शाम जर्मनी की, राज भाटिया के घर -सतीश सक्सेना

विदेश में कोई अपना सा दोस्त मिल जाय तो बल्ले बल्ले हो जाती है , पुराने ब्लॉगर साथी राज भाटिया के घर आज शाम जाना हुआ

, उनकी जिद थी कि आप सपरिवार खाना साथ आकर खाएंगे सो हम लोग लगभग 4 बजे घर से निकल लिए , जर्मनी हाईवे पर हाई स्पीड गाड़ी चलाना आनंद दायक है ! गौरव की बीएमडब्लू 200 km प्रति घंटा की स्पीड पर भी स्टेबल थी, मैं खुद तेज ड्राइवर हूँ फिर भी मैंने उन्हें धीरे चलाने को कहा , इलेक्ट्रिक/ हाईब्रिड कार होने के कारण इसका पिकअप दिमाग को हिला देने वाला था ! 

जर्मनी में मानवीय सुरक्षा के सख्त कानून हैं , मैंने ट्रैन स्टेशन पर SOS साइन के साथ बेहतरीन इंतज़ाम देखे हैं , आकस्मिक हार्ट अटैक के समय यह इंस्ट्रूमेंट जान बचाने में सहायक हैं खतरे में पड़े व्यक्ति को मात्र बटन दबाना है !

राज भाई बेहद मिलनसार इंसान हैं , वे अपने जर्मन विलेज के दरवाजे पर पत्नी सहित इंतज़ार करते मिले, शांत स्वच्छ जर्मन गाँव जहाँ धूल का नामोनिशान नहीं , उम्र दराज लोगों के लिए ऐसी जगह पर रहना एक वरदान है ! चाय नाश्ते के बाद वे हमें गांव घुमाने ले गए , रास्ते में जो भी परिवार दिखे एक दूसरे से आत्मीयता से अभिवादन कर हालचाल पूछते नज़र आये ! 

यहाँ एक चीज हमारे यहां से अलग है घर के मेंटेनेंस से सम्बन्धित हर काम परिवार को खुद करना होता है बाहरी मदद इतनी महंगी होती है कि आम आदमी बर्दाश्त ही न कर सके ! बेटे के घर में सिंक टैप से एक एक बूँद पानी टपकता था जिसे ठीक कराने के लिए 60 यूरो दिए गए जिसमें सिर्फ वॉशर बदलना था सो घर में रहने वाले पेंटिंग, गार्डनिंग से लेकर घर की मरम्मत तक के कार्य खुद करते हैं , इसकी पुष्टि राज की होम वर्कशॉप को देख कर आसानी से हो गयी !

राज भाई बड़े जीवट के इंसान हैं , घर में काम करते समय कोई नहीं कह सकता कि उनके हृदय के चार चार ऑपरेशन हो चुके हैं , मजबूत जीवनी शक्ति , इंसान की मजबूत इच्छा शक्ति पर निर्भर करती है , राज भाटिया इसके जीते जागते उदाहरण हैं , सो आज का दिन सफल हुआ एक बेहतरीन इंसान के साथ !

Wednesday, September 5, 2018

जर्मनी और राज भाटिया -सतीश सक्सेना

टिकट मशीन 
यूरोप के अधिकतर देशों में नगर उपनगर यातायात के लिए , मेट्रो , ट्राम , बस और ट्रेन उपलब्ध हैं और इसके लिए   बेहतरीन व्यस्था है कि आपको हर जगह अलग अलग एजेंसीज से अलग टिकिट लेने की आवश्यकता नहीं है ! मेट्रो स्टेशन या बस स्टैंड पर लगी ऑटोमेटिक मशीन से लिया गया एक टिकिट हर जगह मान्य है और यह टिकिट आप अपने मोबाइल पर भी ऑनलाइन ले सकते हैं ! म्यूनिख में जहाँ एक स्थान से दुसरे स्थान का एक तरफ का टिकिट, किसी भी साधन से,  2.90 यूरो (250 रूपये ) है वहीँ एक दो जोन के लिए एक सप्ताह का अनलिमिटेड पास 12 यूरो का और पूरे म्यूनिख नेटवर्क में पूरे दिन के लिए, अनलिमिटेड यात्रा पास 24 यूरो का है ! यूरोप में किसी शहर में घूमने के लिए, अगर उसे बेहतर समझना हो तो उस शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले समझना चाहिए , जहाँ आप ठहरे हैं उस स्थान से पॉपुलर रुट के स्टेशन और दिशा याद रखना आवश्यक है बाकी काम आसान हो जाता है ! ड्राइवर युक्त टैक्सी सर्विस बेहद महगीं हैं , 40 km की टैक्सी यात्रा लगभग 6000/=की पडेगी !  


राज भाटिया के साथ 
अगर यूरोप में वास्तविक प्राकृतिक खूबसूरती और रहनसहन का माहौल देखना हो तो किसी गांव में जा कर देखिये आपको आनंद आ जाएगा ! राज भाटिया म्यूनिख से लगभग ४५ km दूर एक गाँव इज़ेन में रहते हैं , उनका आमंत्रण पहले दिन से मेरे पास था मगर जाने का मौका कल मिला जब मैं किसी को छोड़ने एयरपोर्ट गया था और मेरी जेब में पूरे म्यूनिख नेटवर्क का पास था ! मैंने अपने आने के बारे में उन्हें इन्फॉर्म किया तो उनका कहना था कि आप गाँव तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट से न आएं बल्कि मैं आपको लेने आपके नजदीकी स्टेशन श्वाबिन मार्किट तक आ रहा हूँ आप वहीँ पर मेरा इंतज़ार करें ! जब मैं वहां पंहुचा तो राज भाई अपनी ऑडी के साथ इंतज़ार कर रहे थे ! खूबसूरत साफ सुथरे रास्तों से होते हुए जब उनके गांव पंहुचे तो हमारे जैसा गांव तो कहीं नजर नहीं आया समझ ही नहीं आया की प्रकृति का इतना सुंदर नज़ारा और शोर शराबे रहित, शांत जगह जहाँ धूल का नामोनिशान न हो , गाँव कैसे हो सकता है ! अगर हमारे देश में, शहर के नजदीक गलती से भी ऐसे गांव रहे होते तो निश्चित ही वहां बड़े सरकारी अधिकारियों के निवास स्थान बन गए होते और उसे सिविल लाइन्स का नाम दिया जाता क्योंकि शहर के सबसे बेहतरीन एरिया में रहने का हक़ कलक्टर एन्ड कंपनी का ही होता है ! बाकी तो सब कीड़े मकोड़े हैं कहीं भी रह लेंगे  ...... 


हमारे देश में अब अतिथि सत्कार दिखावा और बीते दिनों की बात हो चली है , मगर देश से इतनी दूर , भाटिया दम्पति ने जिस प्यार से विशुद्ध भारतीय भोजन कराया वैसा बहुत कम ही नजर आता है ! भोजन अच्छा तभी लगता है जब वह प्यार से कराया जाय इस मायने में श्रीमती भाटिया साक्षात् अन्नपूर्णा सी लगीं  यूँ भी जर्मनी में किसी भी भारतीय घर में, भारतीय भोजन की उपलब्धता होना आसान नहीं, अधिकतर जगह आपका स्वागत वेस्टर्न नाश्ते या भोजन से होगा क्योंकि यहाँ देशी सामग्री इम्पोर्टेड है और अधिकतर सामान जैसे तेल , देशी घी , हरी मिर्च , मसाले सब तलाश करने के लिए इंडियन स्टोर में ही जाना होगा एवं अत्यंत महंगे (गेंहू का आटा 5किलो 1200 रुपया) भी हैं ! 3000 sqft एरिया में बना उनका साफ़ सुथरा घर बॉलीवुड की फिल्म बनाने योग्य था इतने बड़े घर में धूल और अव्यवस्था का नाम नहीं उसके लिए इन दोनों की जितनी तारीफ की जाय वह कम ही होगी ! 

उसके बाद वे हमें गाँव भ्रमण पर ले गए एक साफ़ सुथरे खेत के बाहर एक छोटे स्टाल पर ताज़ी निकली सब्जियां जिसमें विभिन्न रंग के ऑक्टोपस नुमा कद्दू देखकर हम आश्चर्यचकित थे , सब्जियों पर रेट लिखा था साथ में छोटा सा मनी बॉक्स परन्तु बेंचने वाला कोई नहीं ! आप अपनी मन पसंद सब्जी उठाइये और पैसे बॉक्स में डाल दीजिये कोई देखने वाला नहीं कि आपने पैसे डाले भी कि नहीं  ..... 

एक अन्य जगह अंडे रखे दिखे, यहां भी रेट के साथ मनी बॉक्स था उठाइये, जितने चाहिए और पैसे डाल दीजिये ! आप बेईमानी करना चाहते हैं मुफ्त में ले जाइये कोई आप पर शक नहीं करेगा , सब आपसी विश्वास और भरोसा ! भाटिया जी ने यह भी कहा कि हम अधिकतर समय, घर खुले छोड़ आते हैं कोई ख़तरा नहीं, यहाँ कोई बेईमानी की सोंच भी नहीं सकता ! पुलिस या अन्य सरकारी विभाग रिश्वत लेने अथवा देने की कोई सोंच भी नहीं पाता ! 

इस छोटे से जर्मन गांव में , जब कोई व्यक्ति जब सड़क या पगडण्डी से, कुत्ते के साथ निकल रहा हो तब उसकी जेब में एक
डॉग पूप के लिए थैली यहाँ से लें 
छोटा लिफाफा होगा जिसे वह कुत्ते का पूप कलेक्ट करने के लिए रखता है इसके अलावा पगडण्डी के साथ साथ एक छोटा बक्सा होगा जिससे कोई भी लिफाफा निकाल सकता है किसी भी हालत में, कोई व्यक्ति  कुत्ते की पूप बाहर नहीं फेंकेगा ! 

यहाँ कौन देख रहा  .... वाले शब्द बोलने वाले लोगों के देश से आये हुए मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह सब देखना आश्चर्य के सिवा और कुछ नहीं था  .....

इस गांव में हर रास्ते में फूल और फल लगे देखे जिन्हें सुबह के अँधेरे में आकर भगवान की पूजा के लिए कोई नहीं चुराता ! पके हुए सेब हर घर में  लगे हैं और बाहर भी लटके हैं , इस खूबसूरती की हम अपने यहाँ कल्पना भी नहीं कर सकते , अगर किसी की जेब से टहलते हुए कोई तौलिया रूमाल या मोबाइल गिर जाए तो घबराने की कोई बात नहीं वह अगले दिन सुबह भी वहीँ पड़ा मिलेगा ! इस राम राज्य की कल्पना हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों बरसों से की थी और लगता नहीं कि हमारे देश में जहाँ हर व्यक्ति चतुरसेन पहले है, अब कभी भी पूरी होगी ! पश्चिमी देशों की, बिना उन्हें देखे, समझे, मूर्खों की तरह  जमकर 
उनकी बुराई करते हैं यही हमारी सभ्यता को पहचान बची है ! अगर रामराज्य कहीं है तो वह वाकई इन देशों में है जिन्हें हम गाली देना अपनी शान समझते हैं !

यहाँ की सड़क पर स्पीड लिमिट तोड़ने को कोई कोशिश नहीं करता अगर किसी कैमरे में आ गयी तो जुर्माना जो लगभग १५००० रूपये होगा घर आ जाएगा और सफाई देने की कोई गुंजाइश नहीं ! मानव जीवन को यहाँ बहुमूल्य माना जाता है अगर आप
मुसीबत में हैं तब डिस्ट्रेस कॉल में एम्बुलेंस पंहुचने का समय ३ मिनट और अगर डॉ उपलब्ध न हो तो हैलकॉप्टर एम्बुलेंस तत्काल हाजिर होगी और मुफ्त का इलाज होगा ! राज भाई के 3 हार्ट ऑपरेशन हुए और बिलकुल मुफ्त , बदकिस्मती से आपके घर में बच्चे आपका ख़याल रखने और तीमारदारी करने को उपलब्ध नहीं हों तो नर्स की मुफ्त सेवा है आपका एक पैसा खर्च नहीं होगा ! सारा भारी भरकम बिल का खर्चा इंस्युरेन्स कम्पनियाँ उठाएंगी और बिना वह भी किसी लिखा पढ़ी के, सीधा हॉस्पिटल के साथ  !

शराब पीकर ड्राइविंग करना आपको कम से कम 40000 रूपये से 120000 रूपये तक महंगा पड़ सकता है यहाँ तक कि आपकी साइकिल पर अगर लाइटिंग इक्विपमेंट नहीं लगे हैं तब 2000 रुपया जुर्माना होगा अगर वह रेड लाइट क्रॉस करता है तो 60 यूरो ( 5000 रूपये ) जुर्माना है और पैदल चलने वाले को भी माफ़ी नहीं है , पेडस्ट्रियन क्रॉसिंग पर अगर आपने पैदल चलते हुए जल्दी से रेड लाइट जंपिंग की है तो 400 रुपया देने को तैयार रहिये !

यहाँ घर पर नौकर रखना और मरम्मत करवाना बेहद खर्चीला साबित होगा क्योंकि कामगरों की तनख्वाह बहुत अधिक हैं उनसे व्यक्तिगत काम कराना नया सामान खरीदने जितना पड सकता है अतः घरों में मरम्मत, रिपेयर, पेण्ट आदि खुद करना होता है !
सो यहाँ के लोग कामचोर नहीं है इसीलिए फिटनेस की कोई समस्या नहीं ! साईकिल से बाजार जाना , बगीचे की तथा अपने घर से बाहर की घास काटना, झाड़ू लगाना, बर्तन धोना , घर का फर्श आदि सब कुछ आपको खुद करना होगा वह और बात है कि अधिकतर काम के लिए आप मशीनों का उपयोग करते हैं ! 

राज भाई के घर में इन्होने एक कमरा वर्कशॉप में बदल रखा है , उनके पास हर तरह के टूल्स देखकर पता चला कि समय ने इन्हें हर काम खुद करना भी सिखा दिया इनके घर से निकलते समय एक संकल्प मैंने भी लिया कि अब से घर में अधिकतर काम और रिपेयर खुद करना है जब राज भाई यह कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं ! 

Tuesday, March 30, 2010

ब्लाग जगत में ऐसे लोग भी हैं - स्नेही राज भाटिया

राज भाई  !
१५ -३० मई  में  एक मित्र के साथ विएंना में, उनके बेटे के घर रहूँगा ! इन १५ दिनों यूरोप घूमने  का प्लान है , जिन जगह जाने का मन है वे प्राग , बुडापेस्ट , स्वित्ज़रलैंड , और इटली हैं  यूरेल टिकेट लेने की सोच रहे हैं ! 
क्या यह कम समय में संभव और ठीक रहेगा ?? 
मार्गदर्शन चाहिए !
सतीश सक्सेना 

नमस्कार सतीश जी,
 आप का स्वागत है युरोप मै, मै Wien से करीब ६०० कि मी दुर रहता हुं जर्मनी मै , मेरे नजदीक का शहर है Munchen (मुनिख), अगर समय हो तो मुझे भी दर्शन जरुरे देवे........

.............मेने आप के हिसाब से एक रुट बनाया है..... सब से पहले आप  Wien मै उतरे दो दिन वहां घुमे, रात को घर पर आराम करे, तीसरे दिन सुबह सवेरे चार पांच बजे वहा से रेल पकडे पराग के लिये( वियाना से पराग की दुरी सडक दुवारा २५५ कि मी) करीब ३ घंटे मै आप पराग पहुच जायेगे दो दिन यहां घुमे, दुसरे दिन शाम को यहां से रेल पकडे जर्मनी  के शहर मुनिख की, रात मेरे यहां ठहरे, दुसरे दिन मुनिख शहर की खास खास जगह मै आप को दिखा दुंगा,( पराग से मुनिख की दुरी सडक दुवारा करीब ३०० कि मी) फ़िर ५० कि मी मेरा घर))अगर आप चाहे तो  कुछ दिन मेरे यहां भी रुक सकते है, इसी दिन रात को मै आप को स्विट्रजर लेंड की रेल मै बिठा दुंगा, ......... यहां रुकना चाहे तो ठीक नही तो यहा से आगे आप बुडापेस्ट जाये, यहां भी दो से तीन दिन, फ़िर वापिस आप वियाना आ जाये...... आगे आप लिखे कि.... ओर क्या इस टिकट मै इंटर सिटी भी शामिल है या नही....अगर कुछ ज्यादा जानना हो तो मुझे फ़ोन कर ले या फ़िर गुगल पर बात कर ले, मै कल शनि वार को भारतीया समय के अनुसार रात सात बजे के बाद गुगल पर मोजूद होऊगां या मुझे मेरे मोबईल पर आप काल कर ले--- 0049-१५२५*******  या फ़िर मेल कर ले मै पुरी मदद करुंगा.
धन्यवाद सहित
राज भाटिया 


उपरोक्त बड़े पत्र  के कुछ अंश छापने का मकसद एक शानदार ,दिलदार, घर से बहुत दूर जर्मनी में बसे एक वास्तविक भारतीय का परिचय, हिन्दी ब्लाग जगत को करवाना है जिसको हम सिर्फ एक ब्लागर के रूप में पहचानते हैं ! मुझे नहीं पता कि मेरी यह "  नीरस "   पोस्ट कितने ब्लागर पसंद करेंगे , मैंने ब्लाग जगत पर बहुत कम लोग एक दूसरे का सम्मान करते देखे है और यह सम्मान भी बदले में दी गयी टिप्पणी के रूप में होता है ! आज " अतिथि कब जाओगे ""  के समय में  मुझे राज भाटिया  भारतीय संस्कृति के सही प्रतिनिधि के रूप में दिखाई पड़ रहे हैं !

मेरा राज भाटिया से सिर्फ एक बार की मुलाकात है जब अजय झा ने उनके स्वागत में  ब्लागर सम्मलेन बुलाया था , और उस मीटिंग में हम दोनों ने शायद चंद शब्द प्रयोग किये होंगे आपस में  ! मेरे यूरोप प्रवास में जर्मनी जाना शामिल ही नहीं है फिर भी जिस आत्मीयता का परिचय देते हुए उन्होंने अपनी मेजवानी पेश की है उससे उन्होंने वाकई मिसाल छोड़ी है हम भारतीयों के लिए !

ईश्वर राज भाटिया जैसे भारत पुत्रों  को  हर जगह सम्मान बख्शे  !

Thursday, September 18, 2008

हमारे संस्कृति सारथी -राज भाटिया !



राज भाटिया जो प्रचार से दूर, पराये देश में रहते हुए भी भारतीय संस्कृति नन्हे-मुन्हे बच्चों को सिखाने के प्रयत्न में लगे हुए हैं ! नन्हे मुन्नों को अपने पास बैठा कर यह भारतीय कल्चर की कहानिया सुनाते हैं, इनकी इस वेब साईट पर जायेंगे तो किसी भी हिंदू का सर श्रद्धा से झुक जाएगा ! महसूस हो जाएगा की हम एक पावन स्थान पर आ गए हैं और वहाँ दिखाई पड़ेंगे बच्चों से घिरे हुए मधुर आचरण की कहानिया सुनाते राज !
और आश्रम भी ऐसा जहाँ गुरुवर नानक, माँ शारदा, ख़ुद केशव विराजमान हैं, वहां एक योगी राज भाटिया अपनी सुगन्धित धूनी रमाये बैठे नज़र आयेंगे !

ब्लाग जगत पर जिन लोगों को अब तक मैं जान पाया उनमे राज भाई ! विदेश में बसे ऋषि प्रतीत होते हैं, ! भारतीय कल्चर को बढ़ाने का ऐसा प्रयत्न और लगाव अब तक मैं और कहीं नही देख पाया ! अचानक पहली बार कोई व्यक्ति इस ब्लॉग पर आएगा तो लगेगा कि जैसे यह स्थान किसी धार्मिक हिंदू का है, मगर कुछ देर में इस संत के विचार जान कर आप समझ जायेंगे कि यह जगह एक विशाल दिल वाले इंसान की है जो मानवता से प्यार करता है , अपने देश से प्यार करता है अपनी संस्कृति से प्यार करने के साथ साथ, हर मज़हब की भी उतनी ही इज्ज़त करता है जितनी हिंदू धर्म की !

"अनवर भाई अगर गलती से किसी का मन भी दुखा दु तो मुझे सारी रात नीद नही आती, जब तक उस से माफ़ी ना मांग लु,ओर गलत को गलत कहने मे कभी भी परहेज नही किया..."

उपरोक्त शब्द राज ने वेब साईट चाट पर अनवर से कह रहे हैं, जबकि आज फैशन बन चुका है अपने बड़प्पन को सिद्ध करने का, अपने ज्ञान ( ज्ञान भाई माफ़ करें ;-) .. उनसे नही कह रहा ) के प्रचार करने का, कोई मौका हमारे कुछ प्रतिष्ठित ब्लागर हाथ से नही जाने देते ! अपनी विद्वता प्रचार का यह नशा, उनके कुछ स्वयं ज्ञानी चेले चेलियों ने उनकी पीठ थपथपा कर और दुगुना कर दिया ! ऐसे ढोल नगाड़े बजते माहौल में कौन हिम्मत करे प्रश्न करने की ?? हर किसी को अपनी इज्ज़त की चिंता रहती है कि सरे बाज़ार मेरी धोती ना खोल दी जाए ....

मैं कल ब्लॉग जगत में, एक साल पुरानी कुछ पोस्ट पढ़ कर कुछ ब्लाग नायकों को समझने की कोशिश कर रहा था जानकर स्तब्ध रह गया कि किस तरह लोग अपनी धुन में दूसरे पक्ष को समझने का प्रयत्न ही नही करते ! और मजेदार बात यह कि हर पक्ष का ग्रुप उनके पक्षः में दोनों हाथों से तलवारें चला रहा है !
चंद "बेस्ट सैलर" किताबें पढ़ कर, उनके उद्धरण देते विद्वान्, यहाँ ब्लाग जगत में विदुर और केशव को सिखाते देखे जा सकते हैं !
इस माहौल में राज भाई के यह शब्द वन्दनीय हैं !

शहरोज भाई के लिखे "पंडित पुरोहितों के बिना उर्स मुकम्मिल नहीं होता" पर दिए गए उनके कमेंट्स
"कट्टरवाद की बीमारी सबसे खतरनाक बीमारी है, दुसरा आग लगाने ओर भडकाने वालो से भी हमे बचना चाहिये, वेसे जब मेरा दोस्त(पकिस्तान से) इस दुनिया से गया तो मेने उस की रुह को जन्नत मे जगह मिले के लिये नमाज भी अदा की ओर इस से मेरे धर्म को तो कोई हानि नही हुयी, बल्कि मुझे आत्मिक शान्ति मिली.
आप ने बहुत ही सुन्दर लिखा हे काश सारे भारत वाषी आप के ख्याल के हो जाये तो हमारे भारत मे ही नही पुरी दुनिया मे कितनी शान्ति हो।"
धार्मिक जनून के इस माहौल में अगर एक हिंदू, किसी मस्जिद में जाकर मत्था टेकता है, तो हिंदू धर्म की इज्ज़त बढ़ाने में इससे बड़ा योगदान और कुछ नही हो सकता, मेरा यह विश्वास है कि किसी हिंदू को मत्था टेकते देख कर मस्जिद में उपस्थित हर मुस्लिम भाई को एक सुखद आश्चर्य और सुकून की भावना ही नहीं पैदा होगी बल्कि तुंरत उसके दिल में उस व्यक्ति विशेष के प्रति आदर सम्मान देने की भावना भी पैदा होगी !
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