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Saturday, September 7, 2013

अफगानों की छाती पे , ये निशान रहेंगे -सतीश सक्सेना

एक और बहादुर भारतीय लड़की ने, तालिबानों की जिद पर, अपनी कुर्बानी दे दी ,बंगाली बऊ  सुष्मिता बनर्जी  के खून के छींटों की याद में, कविता के चंद फूल समर्पित हैं ...

कुछ लोग यहाँ हैं , जो तुम्हें याद रखेंगे ! 
वह आग जो जला गयी,सुलगाये रखेंगे !

कातिल मनाएं जश्न,भले अपनी जीत का 
अफगानों की छाती पे , ये निशान  रहेंगे !

बंगाली बऊ  का यह हश्र ,उनकी जमीं पर 
रिश्तों की बुनावट पे, हम आघात  कहेंगे !

दुनियां से काबुली का ,भरोसा चला गया  !
वह मिट गयी पर सुष्मिता को याद करेंगे !

बामियान,सुष्मिता के नाम,अमिट हो गए 
ये ज़ुल्म ऐ तालिबान , लोग याद  रखेंगे  !

जब भी निशान ऐ खून, तुम्हे याद आयेंगे  
अफगानियों को  चैन  से , सोने नहीं देंगे !

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