Showing posts with label ब्लागर. Show all posts
Showing posts with label ब्लागर. Show all posts

Thursday, September 1, 2022

दिखावे की दुनियाँ में जीता एक कवि ह्रदय -सतीश सक्सेना

शब्दों पर पॉलिश लगाकर उपयोग में लाने का सुझाव हमारे बुजुर्ग देते रहे हैं , वे यह कभी नहीं बताते कि दिल से त्वरित निकले शब्द ही सच्चे माने जाते हैं , अगर किसी को देखकर आपके मन में स्नेह उमड़ता है तो उसे दबाया क्यों जाये ? अभिव्यक्ति वही जो मन से निकले और कवि वही जो निर्मल मन हो , मैं खुद ऐसे संसार में जीता हूँ जहाँ दिखावे को भरपूर आदर सम्मान दिया जाता है, अगर मन में सम्मान है तो दिखावे के नमस्कार की आवश्यकता क्यों वह तो नजरों से और कर्म से दिखेगा ही

अभी हाल में , मैंने एक महिला मित्र की आहत मन से लिखी पोस्ट पर , नैराश्य से बाहर आने का सुझाव दिया , मगर स्वभाव अनुसार  भावना में बहते हुए उन, हमउम्र महिला को माते शब्द से सम्बोधित कर दिया , और उन्होंने नाराजी जाहिर करते हुए उसी कमेंट को लाइक नहीं किया जिसे सबसे अधिक पसंद करना चाहिए , शायद उन्हें मेरे (६८ वर्षीय) द्वारा, माँ कहना नागवार गुजरा होगा, बहुत कष्ट होता है जब लोग स्नेह को समझने में नाकाम होते हैं !

माँ दुनिया का सबसे खूबसूरत शब्द है जो मैं किसी भी बच्ची को कह सकता हूँ जिसकी मुझे तारीफ़ करनी हो, वे नासमझ हैं जो माँ जैसे प्यारे  शब्द का शाब्दिक अर्थ निकालने की कोशिश करते हैं , ऐसे ही एक भावनात्मक समय में, मैंने पुत्री वंदना भी लिखी थी !


मैं जब भी किसी महिला से बात करता हूँ पहले उसमें माँ की तलाश अवश्य करता हूँ , और अधिकतर सफल भी रहता हूँ ! अनुलता नैयर जैसी छोटी लड़कियां , सुमन पाटिल जैसी हमउम्र अथवा पुष्पा तिवारी जैसी बड़ी , सुदेश आर्य को मैं अक्सर मां सम्बोधन देता हूँ और यह सम्बोधन उनके स्नेही स्वभाव के कारण ही होता है अन्यथा सुदेश मेरे लिए एक चंचल बच्ची से अधिक कुछ नहीं !
 
गरजें लहरें बेचैनी की
कहाँ किनारा पाएंगी !
धीरे धीरे ये आवाजें ,
सागर में खो जाएंगी !
क्षितिज नज़र न आये फिर
भी, हार न मानें मेरे गीत !
ज़ख़्मी दिल में छुपी वेदना, जाने किसे दिखाएँ गीत !


Friday, February 19, 2021

सम्मान से अधिक प्रोत्साहन देना आवश्यक है -सतीश सक्सेना

हिंदी जगत में ब्लॉगिंग का आगमन , हिंदी के नवोदित लेखकों के लिए संजीवनी का काम कर गया , झिझकती लड़खड़ाती शर्मीली सैकड़ों कलमें हिंदी की चाल दिखाने के लिए फ्लोर पर पहली बार जब आयीं थी तो उनमें कितनी ही खड़े होने लायक भी नहीं थीं , मगर पाठक रुपी दर्शकों ने वाह वाह कर उन्हें प्रोत्साहन दिया और कांपते हुए क़दमों को अहसास दिलाया कि वे न केवल चल रही हैं बल्कि बेहतरीन निशान भी छोड़ रही हैं ! 

यह उनके लिए अविश्वसनीय ही था कि जिन्होंने पूरी जिंदगी कुछ नहीं लिखा उनका लिखना न केवल पढ़ने योग्य है बल्कि तालियों के साथ हिंदी जगत में उन्हें एक सम्मानित पहचान भी मिल रही है , इस विश्वास के साथ ही उनके लेखन में विविधता और पैनापन बढ़ने लगा और कुछ समय पश्चात, उनके बेकार लेख वाकई अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए, आज उनमें से कई हिंदी जगत में बेहतरीन लेखक हैं और प्रिंट मीडिया उनके लेख लगातार छापकर उन्हें सम्मानित कर रही है ! 

हिंदी ब्लॉगिंग से लेखकों के उदय में, मैं समीर लाल ( उड़न तश्तरी ) का बहुत बड़ा योगदान मानता हूँ , 2008 में समीर लाल ही थे जो नियमित तौर पर प्रतिदिन लगभग सौ ब्लॉगरों के ब्लॉग पर जा जाकर वाह वाही कर टिप्पणी करते थे , कई लोग कहते थे कि इतनी टिप्पणियां कोई एक व्यक्ति कर ही नहीं सकता यह असंभव ही था कि एक व्यक्ति इतने ब्लॉगों पर जाकर पढ़े और टिप्पणी करे ! कुछ कहते थे कि उन्होंने कोई सॉफ्टवेयर बनवाया है जो इतनी टिप्पणी रोज करता है और कई उनकी मजाक बनाते थे कि वे किसी ब्लॉग को पढ़ते नहीं है बस खुद के ब्लॉग पर टिप्पणी पाने के लिए वे सबके ब्लॉग पर नियमित टिपियाते हैं ! मगर सच्चाई यही थी कि उनकी टिप्पणी पाने पर एक जोश महसूस होता था कि मैंने कुछ अच्छा लिखा है जो कनाडा से उड़नतश्तरी ने आकर कमेंट दिया है ! हिंदी ब्लॉगिंग को बढ़ाने में समीर लाल का योगदान अमर और सैकड़ों लेखनियों के लिए जीवन दायक रहा , इस योगदान के लिए वे हमेशा वंदनीय रहेंगे !

रनिंग करते समय, स्टेडियम के रनिंग ट्रेक पर या खुली सड़क पर जब कोई भारी वजन का व्यक्ति या महिला दौड़ने का प्रयत्न करते देखता हूँ तब मैं उसकी हिम्मत अफ़ज़ाई अवश्य करता हूँ , शाब्बाश बच्चे तुम अवश्य जीतोगे एक दिन, बस हिम्मत नहीं हारना , दुनियां तुम्हें दौड़ते देख हँस रही है इसकी बिना परवाह किये धीरे धीरे बिना हांफे दौड़ना, सीखते रहो एक दिन तुम्हारा स्लिम शरीर इसी ट्रेक पर तेज गति से भागते हुए दुनिया देखेगी !

अंत में , बढ़ा वजन घटाने के लिए !
-दिन में 12 गिलास पानी कम से कम पीना ही है !
-डिनर ७ -८ बजे तक और बहुत हल्का बिना रोटी चावल के !
कोई भी मीठी चीज नहीं खानी है ! मिल्क प्रोडक्ट कम करें !
-रोज आधा घंटा तेज वाक करें बिना हांफे , और आखिरी दो मिनट बिना हांफते हुए दौड़ कर समाप्त करें ! विश्वास रखें कि वे बहुत जल्द सामान्य पहले जैसे स्मार्ट होंगे ! शरीर आसानी से हर परिस्थिति में अभ्यस्त हो जाने में समर्थ है , रनिंग सिखने के साथ ही शरीर की ढेरों उम्र जनित बीमारियां डायबिटीज , बीपी , कब्ज ,दर्द आदि खुदबखुद गायब हो जायँगी ! 

Thursday, August 10, 2017

श्रद्धांजलि डॉ अमर नदीम -सतीश सक्सेना

मोहन श्रोत्रिय की वाल से बेहद दुखद खबर है कि मशहूर शायर डॉ अमर नदीम नहीं रहे ....  

डॉ अमर नदीम एक बेहतरीन संवेदनशील व्यक्तित्व थे उनका अचानक चला जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है , कमजोर ग़रीबों के लिए उठने वाली एक मजबूत आवाज हमेशा के लिए शांत हो गयी , बेहद बुरी खबर  .... 

उनकी एक रचना याद आती है... 

मज़हबी संकीर्णताओं वर्जनाओं के बग़ैर 
हम जिए सारे खुदाओं देवताओं के बग़ैर 

राह में पत्थर भी थे कांटे भी थे पर तेरे साथ 
कट गया अपना सफर भी कहकशाओं के बग़ैर 

श्रद्धांजलि  बड़े भाई, 
आप बहुत याद आएंगे !!

https://puraniyaden.blogspot.in/

http://satish-saxena.blogspot.in/2009/08/blog-post_01.html

Monday, July 3, 2017

लेखन क्वालिटी -सतीश सक्सेना

ब्लॉग लेखन में कुछ सक्रियता तो आयी मगर आवश्यकता इस उत्साह को बनाये रखने की है ! हमें विस्तार से विगत का आकलन करना होगा अन्यथा कुछ दिनों में सब जोश ठंडा हो जाएगा !
फेसबुक के शुरू होने के साथ अधिकतर ने ब्लॉग लेखन बंद कर दिया इसके पीछे उन्हें कमेंट का न मिलना या कमेंट संख्या में भारी कमी थी, लोगों का अधिक ध्यान फेसबुक पर था जहाँ आसानी से लाइक और कमेंट मिल रहे थे और वे अधिक इंटरैक्टिव भी थे ! अपनी रचनाओं पर लोगों का ध्यान न देख कर निराशा और अपमान बोध जैसा महसूस हुआ और सबने अपना रुख फेसबुक की ओर कर लिया जहाँ अधिक पहचान मिलने की आशा थी !

मेरे ब्लॉग पर आने वाले कमेंट में 80 प्रतिशत की गिरावट आयी मगर मेरा लेखन इस कारण कभी कम न हुआ , ब्लॉग लेखन का उद्देश्य मेरे लेखन का संकलन मात्र रहा था मेरा विश्वास था कि इसे देर सबेर लोग पढ़ेंगे ज़रूर ,
इसमें बनावट से लोगों को प्रभावित करने की चेष्टा रंचमात्र भी नहीं थी !

मेरा अभी भी दृढ विश्वास है कि गूगल के दिए इस मुफ्त प्लेटफॉर्म से बेहतर और कोई प्लेटफॉर्म नहीं है जहाँ लोग अपनी रचनाये सदा के लिए सुरक्षित रख सकते हैं ! सो ब्लॉगर साथियों से अनुरोध है कि वे दिल से लिखें और क्वालिटी कंटेंट लिखें ताकि आज न सही कल आने वाली पीढ़ी उनकी अभिव्यक्ति समझे और पुरानी पीढ़ी को अपने साथ महसूस कर सके !

मंगलकामनाएं आपकी कलम को !
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Sunday, July 2, 2017

हिन्दी लेखन में ब्लॉगर -सतीश सक्सेना

ब्लॉग लेखन में कोई संदेह नहीं कि टिप्पणियां जीवनदान का काम करती हैं , अगर सराहा न जाय तब बड़े बड़े कलम भी घुटनों के  बल बैठते नज़र आएंगे ! मेरे शुरुआत के दिनों में उड़नतश्तरी की त्वरित टिप्पणियों का बड़ा योगदान रहा है और आज भी मैं उनका शुक्र गुज़ार हूँ,  तब से अब तक 584 से अधिक रचनाएं , गद्य अथवा पद्य के रूप में ब्लॉग पर लिख चुका हूँ तथा पाठकों से 16649 टिप्पणियां एवं कुल 518380 पेज व्यू  मिले हैं ! यह पाठक ही हैं जिन्होंने इन्हें मन से सराहा और उन के कारण कलम को सहारा मिलता रहा !

किसी भी रचनाकार के लिए, ध्यान से पढ़ के दिया गया कमेन्ट, प्रेरणा दायक होने के  साथ साथ, उसके कार्य की समीक्षा और सुधार के लिए बेहद आवश्यक होता है , और मैं आभारी हूँ अपने उन मित्रों का जो लगातार मुझे पढ़ते रहे और उत्साह देते रहे ! इस बीच जब जब लेखन से मन उचाट हुआ इन्होने मुझे आकर जगाया और कहा कि लिखिए हमें पढ़ना है, और इन्ही मित्रों के कारण, कलम आज भी गति शील है !

साधारणतया ब्लॉग लेखन का एक उद्देश्य, अपने आपको स्थापित करने के साथ साथ, लोकप्रियता हासिल करना तो निस्संदेह रहता ही है, अपनी तारीफ़ सभी को अच्छी लगती है बशर्ते वह योग्य लोगों द्वारा पढ़ कर की जाए !  अक्सर टिप्पणियों के बदले में, लेख अथवा कविता को बिना पढ़े मिली ब्लोगर वाहवाही, अक्सर हमारे ज्ञान का बंटाधार करने को काफी है ! केवल वाहवाही की टिप्पणियां हमारे अहम् और फ़र्ज़ी प्रभामंडल को बढाने में ही सफल होती हैं चाहे हमारा लेखन कूड़ा ही क्यों न हो !

मेरा यह मानना है कि ब्लोगिंग के जरिये लेखन में विकास , भाषा  के साथ साथ , मानसिकता में बदलाव भी लाने में सक्षम है जो शायद भारतीय समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है !
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Saturday, July 1, 2017

रुकिए नहीं, दौड़ते रहें , रुकना अंत होगा अभिव्यक्ति का, जीवन दौड़ का -सतीश सक्सेना

मेरे लिए ब्लॉगिंग करना हमेशा स्फूर्तिदायक रहा है, ब्लॉगिंग मेरे लिए पहले दिन से लेकर आजतक मेरे विचारों का एकमात्र संकलन स्थल रहा है और इसकी उपयोगिता मेरे लिए कभी कम नहीं हुई भले ही लोग आएं या न आएं ! शुरू से लेकर अबतक लगभग ४ पोस्ट प्रति माह लिखता रहा हूँ जो लगातार जारी रही दुखद यह है कि लोगों ने लिखना बंद कर दिया शायद इसलिए कि अब कमेंट मिलने कम हो गए !
लेखन से आपको अपनी अभिव्यक्ति को व्यक्त करने का अवसर मिलता है इसपर तालियों की आशा नहीं करनी चाहिए बल्कि हर नए लेख को और अधिक ईमानदारी से लिखने का प्रयास करते रहना है !

लेखन पर कमेंट न मिलना निराशा का कारण नहीं होना चाहिए बल्कि लेखन में निखार लाने के प्रति कृतसंकल्प होना चाहिए ,निश्चित ही सतत लेखन, आपकी अभिव्यक्ति में सुधार करने में सहायक होगा !

मेरा मानना है कि आप सकारात्मक लिखते रहिये अगर आपके विचारों में , रचनात्मकता है तो लोग एक दिन आपके लेखन को अवश्य पढ़ेंगे और उसे सम्मान भी मिलेगा !

सस्नेह मंगलकामनाएं कि आपकी कलम सुनहरी हो !
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Monday, February 8, 2016

नुक्कड़ भी अचानक से ही अनाथ हो गया - सतीश सक्सेना

अविनाश वाचस्पति ब्लॉगिंग सभा संचालित करते हुए 
नुक्कड़ भी अचानक से , ही अनाथ हो गया ! 
ऐसा भी क्या हुआ, ये चमन ख़ाक हो गया !

अविनाश के जाते ही,कुछ सुनसान सा लगे 
ब्लॉगिंग में मुन्नाभाई भी, इतिहास हो गया !

कितने दिनों से लड़ रहा था, मौत से इकला
जीवन में जी लिए हैं, ये  अहसास हो गया !

दर्दों में भी हँसता रहा, अविनाश अंत तक 
आखिर ये ज़ज़्बा मस्त भी खलास हो गया !

इक दिन तो मुन्ना भाई,वहां हम भी आएंगे,
अखबार में छपेगा  कि , अवसान हो गया !

Wednesday, September 25, 2013

उद्देश्य ब्लोगिंग का - सतीश सक्सेना

सन २००५ में पहली बार अपना ब्लोगर अकाउंट बनाया था , मगर पहली पोस्ट २४ मई २००८ को प्रकाशित की गयी जब मैंने अपनी पहली कविता "गुडिया के मुख से" ब्लॉग पर लिखी ! ब्लॉग जगत में आने से पहले अपनी रचनाएं डायरी में ही लिखी थीं , और हमेशा लगता था कि यह रचनाएं कहीं खो न जाएँ मगर ब्लॉग पर प्रकाशित करने के बाद ऐसा लगा कि अब वे एक दस्तावेज के रूप में नेट पर हमेशा सुरक्षित रहेंगी !

तब से अब तक ३५० से अधिक रचनाएं गद्य अथवा पद्य के रूप में ब्लॉग पर लिख चुका हूँ और बहुत बड़ा सुकून है कि उन्हें कुछ विद्वान् पाठक भी मिले जिन्होंने इन्हें मन से सराहा और उन के कारण कलम को सहारा मिलता रहा !

किसी भी रचनाकार के लिए, ध्यान से पढ़ के दिया गया कमेन्ट, प्रेरणा दायक होने के  साथ साथ, उसके कार्य की समीक्षा और सुधार के लिए बेहद आवश्यक होता है , और मैं आभारी हूँ अपने उन मित्रों का जो लगातार मुझे पढ़ते रहे और उत्साह देते रहे ! इस बीच जब जब लेखन से मन उचाट हुआ इन्होने मुझे आकर जगाया और कहा कि लिखिए हमें पढ़ना है, और इन्ही मित्रों के कारण, कलम आज भी गति शील है !

साधारणतया ब्लोगर लेखन का एक उद्देश्य, अपने आपको स्थापित करने के साथ साथ, लोकप्रियता हासिल करना तो निस्संदेह रहता ही है, अपनी तारीफ़ सभी को अच्छी लगती है बशर्ते वह योग्य लोगों द्वारा की जाए !  टिप्पणियों के बदले में, लेख अथवा कविता को बिना पढ़े मिली ब्लोगर वाहवाही, अक्सर हमारे ज्ञान का बंटाधार करने को काफी है ! केवल वाहवाही की टिप्पणियां केवल अहम् और अपने प्रभामंडल को बढाने में ही सफल होती हैं चाहे हमारा लेखन कूड़ा ही क्यों न हो !

मेरा यह मानना है कि ब्लोगिंग के जरिये लेखन में विकास , भाषा  के साथ साथ , मानसिकता में बदलाव भी लाने में सक्षम है जो शायद भारतीय समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है !

हाल में वर्धा विश्वविद्यालय ने ब्लोगिंग पर एक सफल राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया था जिसके संयोजक सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी थे और जहाँ कई विशिष्ट एवं विद्वानजनों ने भाग लिया था ऐसे सम्मेलन ब्लोगिंग के उत्थान के लिए, बेहद आवश्यक है बशर्ते कि आयोजकगण  ईमानदारी से कार्य करें और इन स्थलों तक आम गंभीर ब्लॉगर को पंहुचा सकें ! सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी इस सम्बन्ध में निर्दलीय और चमचा रहित हैं और आशा है वे इस उत्तरदायित्व को इसी प्रकार निर्वाह भविष्य में भी करते रहेंगे ! उनका इस क्षेत्र में रहना ही, हिंदी ब्लोगिंग के उत्साहवर्धन के लिए काफी है !

कुछ लोग ब्लोगिंग का उपयोग, वैमनस्य फैलाने के लिए भी करते हैं , अपने अपने ग्रुप बनाकर , अपने छिपे उद्देश्य को सिरे चढाने के लिए , यह लोग लेखनी और प्रतिभा का बेहद दुरूपयोग करते हैं उनसे अवश्य हमें सावधान रहना चाहिए  . . . 

पढ़े लिखों की बातों से यह गाँव सुरक्षित रहने दो !
सुना है,बन्दर बाँट रहे हैं,जीत के परचे,दुनियां में !

ज़हरी बातें, नहीं सिखाओ, इन्हें प्यार से जीने दो !
हमें पता है,स्वर्ग के दावे,कितने कच्चे दुनियां में ! - सतीश सक्सेना 

लेखन अमर है , यह ख़ुशी की बात है कि  हिंदी के पाठक देश के साथ, विदेशों में भी बढ़ रहे हैं , मेरे कई पाठक ख़ास तौर पर अमेरिका में , मेरे गीत की रचनाओं को पढने बार बार और लगभग रोज ही आते हैं, यह महसूस कर, अपने लेखन को सफल मान लेता हूँ ! कल को हम नहीं होंगे मगर यह लेखन अवश्य होगा मुझे याद है कि पिछले साल, जहाँ अलेक्सा, इस ब्लॉग का रैंक, लाखों  में दिखा रही थी वहीँ  आज इसका अलेक्सा रैंक ३०२०८ है और यह प्रसिद्धि इस लेखनी को इसी ब्लोगिंग से मिली अन्यथा सतीश सक्सेना को कौन जानता था ?

satish-saxena.blogspot.in

Alexa Traffic Rank
Traffic Rank in IN


अंत में सिर्फ यह कहना है कि किसी बात का विरोध करने पर ध्यान रहे कि वहां एक हद मुक़र्रर अवश्य रहे :)

अरसे बाद, पड़ोसी दोनों, साथ में  रहना सीखे हैं !
अदब क़ायदा और सिखादें,शेख मोहल्ले वालों को ! - सतीश सक्सेना 

Monday, June 17, 2013

अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर शिरोमणि अवार्ड में भाग लें -सतीश सक्सेना


बहुत दिनों से मन बड़ा बेचैन था , सो सोंचा खुशदीप भाई के घर चलते हैं वहां जाकर देखा वे मत्था पकडे बैठे हैं ...

कारण पूंछने पर जो उन्होंने बताया वह अब आप उनकी जबान में ही सुनें ..

मक्खन रोज़ छत पर कपड़े धोने के लिए बैठता... लेकिन उसी वक्त झमाझम बारिश शुरू हो जाती...मक्खन बेचारा सोचता, कपड़े धोने के बाद सूखेंगे कैसे....बेचारा मन मार कर अपने कमरे के अंदर चला जाता...एक दिन मक्खन कमरे से बाहर निकला तो देखा...


कड़कती धूप निकली हुई थी...मक्खन ने सोचा...आज मौका बढ़िया है, कपड़े धोने का...मक्खन ने कपड़े धोने का सब ताम-झाम बाहर निकाला...

............................................................

...........................................................


...........................................................

लेकिन ये क्या सर्फ तो डिब्बे में था ही नहीं...मक्खन फटाफट गली के बाहर जनरल स्टोर की तरफ़ भागा...मक्खन जनरल स्टोर के अंदर ही था कि अचानक बादल ज़ोर ज़ोर से गरजने लगे...दिन में ही अंधेरा छा गया...मक्खन जनरल स्टोर से बाहर निकला...दोनों हाथ झुलाते हुए आगे पीछे करने लगा और फिर बड़ी मासूमियत से आसमान की तरफ़ देखकर बोला...



होर जी, किंदा....मैं ते एवें ही बस...बिस्किट लैन आया सी...तुसी गलत समझ रेयो जी...

                           उस दिन मुझे खुशदीप भाई ने मक्खन से पहली बार मिलवाया , साथ ही बताया कि मक्खन मेरा सारा काम  भी  देखता है , दिमाग का कुछ अधिक तेज होने के कारण मुझे हर समय इस पर निगाह रखनी पड़ती है ! उन्होंने पब्लिक से इसका परिचय कभी नहीं कराया , और साथ ही मुझसे भी वायदा लिया कि वे इसे किसी को बताएँगे भी नहीं ! हाँ हिंट देते हुए मैं बता दूं कि मक्खन खुद एक ब्लोगर है जो ब्लोगिंग समुदाय में एक मशहूर साहित्यकार के रूप में बेतहाशा ख्याति और पुरस्कार के साथ साथ घने नोट भी कूट रहा है  !

           कृपया उपरोक्त चित्रों में एक सज्जन मक्खन है अगर आप सही पहचान सके तो आपको "अंतरार्ष्ट्रीय  ब्लोगर शिरोमणि " का अवार्ड प्रदान किया जाएगा  इस अवार्ड विजेता का चयन किसी मशहूर ब्लोगर की अध्यक्षता वाली एक कमिटी करेगी जिसके चेयरमैन शिप  के लिए अनूप शुक्ल , समीर लाल  और खुद मक्खन दौड़ में हैं  ! इसके लिए भी ब्लोगरों से वोटिंग कराई जायेगी !


             तो आइये इस मक्खन ढूंढो प्रतियोगिता में हिस्सा लें और  "अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर शिरोमणि" पुरस्कार प्राप्त करें !
              यह पुरस्कार देने की जगह अभी मुक़र्रर नहीं हुई है मगर अगर कनाडा में हुआ तो समीर लाल जी ने ब्लोगरों के आने जाने का टिकट एवं रहने की व्यवस्था मुफ्त देने का वायदा ताऊ से कर दिया है ..
और यही वायदा अनुराग शर्मा उर्फ़ स्मार्ट इन्डियन ने भी किया है बशर्ते प्रतियोगिता पिट्सबर्ग में आयोजित की जाए ! 
              अग्रिम बधाई आप सबको ...

Thursday, June 6, 2013

ठसक से ठगी का पाठ पढ़ाता, यह ब्लोगर कौन है -सतीश सक्सेना

बरसों पहले २००८ में  मानसिक हलचल पर ज्ञानदत्त  पाण्डेय जी ने एक लेख लिखा था , यह ताऊ कौन है ?  
जिसमें ज्ञानदत्त जैसे गंभीर ब्लोगर ने लिखा था कि.."ताऊ की पहचान के लिये जो फसाड है एक चिम्पांजी बन्दर का - मैं उससे चाह कर भी ताऊ को आईडेण्टीफाई नहीं कर पाता। अगर मैं उनसे अनुरोध कर पाता तो यही करता कि मित्र, हमारी तरह अपनी खुद की फोटो ठेल दें - भले ही (जैसे हमारी फोटोजीनिक नहीं है) बहुत फिल्मस्टारीय न भी हो तो।"

                      वे कहते हैं कि हो सकता है ताऊ की शक्ल फिल्म स्टार जैसी न हो तो भी कम से कम अपना एक वास्तविक फोटो जरूर लगाएं ! लगभग सभी ब्लागरों ने एक ही बात कहीं कि बन्दर के चेहरे के बावजूद, ताऊ बेहद विद्वान और गंभीर कलम के धनी हैं , उस पोस्ट (३-१२-२००८ )पर मेरा ताऊ के प्रति कमेन्ट निम्न था ..
              "ताऊ पर लेख लिख कर आप बाजी मार ले गए और मैं सोचता रह गया सो बधाई स्वीकार करें ! पी सी रामपुरिया का व्यक्तित्व, ब्लाग जगत के थकान एवं उबाऊ भरे रास्ते पर एक बगीचे का शीतल अहसास जैसा है ! यह विद्वान एवं धीर गंभीर व्यक्ति ब्लाग जगत के उन शानदार प्रतिभाओं में से एक है जिसके कारण हिन्दी ब्लाग पढ़ते हुए भी, हमारे चेहरों पर मुस्कान सम्भव हो पाती है ! मैं उनके प्रसंशकों में, अपने आपको अग्रिम पंक्ति में पाता हूँ  "
                 मगर इस बन्दर मास्क लगाए चेहरे ने,ब्लॉग जगत को सार्थक लिखना सिखा दिया , हास्य व्यंग्य के इस आचार्य ने, खुद अपने चरित्र का, सरे आम मज़ाक उड़ाया है कि हमारे देश के लोग आज भी कितनी आसानी से बहुरूपियों द्वारा लुटे जा रहे हैं ! आम आदमी की कमजोरियों का फायदा उठाते, यह मदारी, नित नया रूप रखने में तनिक भी देर नहीं लगाते हैं ,धन कमाने, बाल उगाने, गोरा बनाने, बिना मेहनत  डिग्री लेने  के तरीकों पर लिखी पुस्तकें आज भी लाखों की संख्या में बिकतीं हैं !
आइये ज़रा ताऊ सद्साहित्य के प्रकाशक, द्वारा, बैस्ट सैलर किताबों पर गौर फरमाएं ...

इनकी विश्व प्रसिद्ध पुस्तकें : 
-५ वीं फेल डायरेक्ट एम् ऐ करें 
-चिटठा रोगों का शर्तिया इलाज़ 
-टंगड़ी मारने के अचूक नुस्खे 
-महिलाओं को इम्प्रेस करने के १०१ अचूक नुस्खे

                     अन्य मशहूर कंपनियों में  टीवी फोड़ न्यूज़ चैनल, ताऊ शर्तिया दवाखाना  जिसकी एजेंसी और कहीं नहीं है, नशा मुक्ति शिविर, कालोनाइज़र ताऊ , ताऊ प्रोडक्ट  फैक्ट्री  के शर्तिया कामयाब उत्पाद  और अगर आप उनके विज्ञापन पढ़ लें तो आप को रात भर नींद नहीं आएगी कि कब सुबह हो और यह प्रोडक्ट खरीदें  जाएँ  ! काश यह हमें पहले क्यों नहीं मिले ..

                      ब्लॉगजगत के इस रहस्यमय ताऊ  से एक बार मेरी मुलाक़ात हो चुकी है , मैंने निम्न कविता ताऊ को समर्पित की है जिसमें इनके ताऊ रूप का वर्णन है ! रूप वर्णन  सत्य है , ज़रा ध्यान से पढियेगा शायद आप ताऊ छवि का अंदाजा लगा सकें ! 

कंगन, झुमका ,पायल, चूड़ी
पर इस ताऊ का, ध्यान रहे
धन जहाँ दिखे, मिलते हैं यह
केवल  धंधे  का ध्यान रहे !
रुपये  कैसे भी, कमा सके ,
ये वेश बदलते रहते हैं !
संपत्ति भक्त की  अंटी कर, ये भक्त बदलते रहते हैं !

सब चोर उचक्कों के ताऊ ,
सारे ठग, इनके अनुयायी
मंदिर का कलश उतारें ये,
भगवान् के बनके अनुयायी
गुरूद्वारे मंदिर मस्जिद में,
ये अक्सर पाए जाते हैं !
जैसा मौका देखें अक्सर, भगवान् बदलते रहते हैं !

सुंदर सुकमार सुदर्शन हैं
औ दिखते वैभवशाली हैं ,
आकर्षक औ गंभीर बहुत
ये ताऊ गरिमा शाली है !
शारद मां मेहरबान इनपर , 
जिह्वा से फूल बरसते हैं !
परिस्थिति, जगह, मौका पाकर, परिवेश बदलते रहते हैं !

काले चश्में में, छिपी हुई ,
मनमोहक आँखें ताऊ की !
बन्दर की शक्ल का धोखा है
गुणवान शख्शियत ताऊ की
जेवर, धन, अर्पित करवाकर,
ये गुम हो  जाया करते  हैं !
ठग राज , चोर,  इस दर्शन को, आश्रम में, जाया करते हैं !!

Thursday, July 26, 2012

ब्लागर साथियों से हर संभव मदद चाहिए -सतीश सक्सेना

अपील 
मैं दर्द लेके दुखी हूँ, मगर पता है मुझे
मेरा ख़याल, उन्हें भी खुशी नहीं देता !


उपरोक्त शब्द, बेहद संवेदनशील शायर सर्वत जमाल  (09696318229) के हैं , जो कि १४ जुलाई से घर से लापता हैं ! उनकी  पत्नी श्री मती अलका सर्वत  (09889478084)से बात करने पर पता चला है कि वे १४ जुलाई को लखनऊ से बनारस के लिए ट्रेन द्वारा रवाना हुए थे, तबसे उनका मोबाइल स्विच ऑफ़ है ! 
अलका जी ने उनके लापता होने की सूचना पुलिस में दे दी है , मगर अब तक उनका कुछ पता नहीं चल पाया है ! आप सबसे, खास तौर पर लखनऊ एवं वाराणसी स्थिति लेखक ब्लोगर्स समुदाय से, आग्रह व अनुरोध है कि  इस बेहद भले और शानदार गज़लकार  को, तलाश करने में, अपनी शक्ति और व्यक्तिगत प्रभाव का उपयोग देने की कृपा करें ! मुझे विश्वास है कि अगर लखनऊ पुलिस एवं सर्वत जमाल साहब के मित्रों से संपर्क किया जाए तो सफलता मिलने की उम्मीद है  !
उनसे मेरी पहली और आखिरी मुलाक़ात अजय कुमार झा द्वारा बुलाए गए एक ब्लोगर सम्मलेन में, दिल्ली में हुई थी, उसके बाद कभी नहीं मिल पाए ! उनका यह शेर पढते हुए दिल में गलत आशंकाये जन्म ले रही हैं , इस भले इंसान की , इंसानियत  के लिए , अभी बेहद जरूरत है !
रोटी, लिबास और मकानों से कट गए
हम सीधे सादे लोग सयानों से कट गए

जंगल में बस्तियों का सबब हमसे पूछिए
जंगल के पहरेदार मचानों से कट गए
बुजदिल कहूं उन्हें कि शहीदों में जोड़ लूँ
वो आदमी जो ठौर ठिकानों से कट गए 

मैं चिंतित हूँ उनके लिए क्योंकि वे बहुत संवेदनशील व्यक्ति हैं, ऐसे लोग समाज की कठोर चोटें, आसानी से झेल नहीं पाते  ...
आप अगर मर्द हैं तो खुश मत हों 
काम  आती  है,  सिर्फ़ नामर्दी  !

उनके एक एक शेर को अगर विस्तार दिया जाए तो पूरी किताब लिखी जा सकती , उनकी संवेदनशीलता, उनकी रचनाओं में ,हर जगह स्पष्ट झलकती नज़र आती है !
सदियाँ गुज़री लेकिन तुमको दहशत 
में, हर लंगड़ा , तैमूर दिखाई देता है !
धोखा पहले पाप बताया जाता था 
लेकिन अब दस्तूर दिखाई देता है !



वे इंसानियत में, कम होते स्नेह और प्यार पर अक्सर लिखते रहे हैं, जीवन में अगर अपनों पर विश्वास न करें तो कहाँ जाएँ ...इंसान पर उनका अविश्वास देखिये ..
इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता ,
बोलिए, किस को सावधान करें!


एक और मिसाल आज के समय का उसूल यही है शायद ...
पास रख्खोगे तो जिल्लत पाओगे 
यार इस ईमान का सौदा करो !  

आशा है आप लोग व्यक्तिगत प्रभाव का उपयोग करते हुए लखनऊ पुलिस पर दवाब बना कर उन्हें तलाश करवाने में अपना सहयोग करेंगे ! इस मामले में ( https://www.facebook.com/alka.s.mishra )  इंदिरा नगर थाने, लखनऊ में  रिपोर्ट दर्ज करवा दी गयी है !
( सर्वत जमाल  के अचानक गायब होने के बारे में खबर है कि वे अपने घर से मनमुटाव के कारण घर से गायब थे , कृपया इस सम्बन्ध में, अब आगे, यहाँ कोई कमेन्ट न करें  )


Thursday, June 14, 2012

ब्लोगर साथियों का स्नेह आवाहन -सतीश सक्सेना


इस दुनियां में मुझसे बेहतर 
गीत, सैकड़ो लिखने वाले  ! 
मुझसे अच्छा कहने वाले, 
मुझसे  अच्छा गाने वाले  !
यह प्रयास भी सार्थक होगा,अगर आप आ जाएँ मीत !
मात्र उपस्थित होने से ही ,  गौरव शाली   मेरे  गीत  !


आज तुम्हारे पदचापों  की     
सांस रोककर आशा करता 
तेज धूप में घर से  निकलें  
रफ़ी मार्ग,आवाहन करता 
देखें कितना प्यार भरा है,कितने घर तक पंहुचे गीत !  
कड़ी  धूप में , घर से बाहर, तुम्हें बुलाते मेरे गीत  !


कौन हवन को पूरा करने
कमल, अष्टदल लाएगा ?
अक्षत पुष्प हाथ में लेकर
कौन साथ में, गायेगा  ?
यज्ञ अग्नि में समिधा देने,तुम्हें बुलाते मेरे मीत !
पद्मनाभ की स्तुति करते , आहुति देते मेरे गीत !


मेरे गीत का पुस्तक परिचय संगीता स्वरुप जी की कलम द्वारा  उनके ब्लॉग "गीत मेरी अनुभूतियाँ " पर जानिये , उनकी शैली और कलम मिल जाने से निस्संदेह  मेरे गीत गौरवान्वित हैं !
आभार इस स्नेह के लिए !

Friday, May 25, 2012

प्रोफ़ेसर अली सय्यद को एक ख़त -सतीश सक्सेना

( यह ख़त प्रोफ़ेसर अली की क्लास में फेंक कर भाग लिए - हास्य  
सन्दर्भ : कुछ पिछली घटनाएं 
 संतोष त्रिवेदी : आपकी इस दार्शनिक-टाइप पोस्ट को एक बार पढके चक्कर खा गया हूँ.लोककथाएं  भी दुरूह होती हैं ? ( समझ न आने की मजबूरी  )
प्रोफ़ेसर अली सय्यद 
डॉ अरविन्द मिश्र 
प्रोफ. अली : और मैं आपकी टिप्पणी पढ़के चक्कर खा रहा हूं ..( झुंझलाहट प्रोफ़ेसर की )

संतोष त्रिवेदी : दुबारा से पढ़ा हूँ,पर पूरी तरह से समझ नहीं पाया (शालीनता और सौम्यता बच्चे की )

प्रोफ. अली : हद कर दी आपने ...( गुस्सा प्रिंसिपल सर का  )

असली बात : 

अली सर ,

आपकी कक्षा में कुछ कम पढ़े लिखे बच्चे भी " यह क्लास सबके लिए खुली है " बोर्ड देख कर अन्दर आ गए हैं !

बदकिस्मती से इन्हें अन्तरराष्ट्रीय समाज शास्त्र की छोडिये, देसी समाज की ही समझ नहीं है और अक्सर जब तब विशिष्ट विद्वानों से पिटते रहते हैं !

पिछले दिनों एक बच्चे संतोष त्रिवेदी ने, आपके शब्द न समझ आने की शिकायत कर दी थी जिसे आपने डांट कर बैठा दिया था !

उनको डांट खाते देख मैंने अपना उठाया हुआ हाथ अपने सर पर लेजाकर खुजाते हुए नीचे कर लिया था ! आपके एक विशिष्ट मित्र डॉ अरविन्द मिश्र उस बात से नाराज होकर, संतोष त्रिवेदी को मिलते ही, गरियाने लगते हैं !

उस दिन के बाद से मैंने, संतोष त्रिवेदी के साथ, आपकी क्लास रूम से दूर,आपका चित्र सामने लगा  कर, गुल्ली डंडा खेल कर, अपना समय पास करने का फैसला किया है !

पढ़े लिखों से दूर ही रहें, तभी ठीक है :)

छात्र संतोष त्रिवेदी 

Friday, April 20, 2012

शारदा पुत्र राजेश उत्साही -सतीश सक्सेना

जबसे ब्लॉग जगत से जुड़ा हूँ , ईमानदार लेखन, पढने  को लगभग तरस से गए !मगर हाल में गुल्लक पर लिखी राजेश उत्साही की आप बीती  "सूखती किताबों में भीगा मन " पढ़ते पढ़ते, मेरा मन अवश्य भीग गया !

राजेश उत्साही को, मैं ब्लॉग जगत के उन रत्नों में से एक मानता हूँ, जिसका आकलन करने की, उतावले ब्लॉग जगत के पास सामर्थ्य ही नहीं है , वे हिंदी साहित्य लेखकों के  उस विशिष्ट वर्ग से हैं ,जिन पर हिंदी भाषा को गर्व होगा ! कम से कम मैं उन लोगों में से एक हूँ ,जो गर्व से यह कहेंगे मुझे राजेश उत्साही ने स्वयं हस्ताक्षरित पुस्तक "वह जो शेष है " भेंट दी है ! ज्योतिपर्व प्रकाशन के अरुण चन्द्र राय एवं ज्योति राय  की पहल पर छपी, इस किताब में राजेश उत्साही की बेहतरीन रचनाओं का समावेश है ! दिलचस्प यह है कि संयोग से लेखक की तरह अरुण चन्द्र राय खुद बेहद प्रतिभाशाली और संवेदनशील लेखक हैं ! और उन्हें संवेदनशील रचनाओं की अच्छी पहचान है !  निस्संदेह ये दोनों पति पत्नी इस सफल प्रयास के हेतु बधाई के पात्र हैं !  
राजेश की लेखन शैली के बारे में जानना हो तो गुल्लक पर लिखा उपरोक्त लेख पढ़ लें ! अपने आपको बड़े लेखक  साबित करने में लगे हम लोग ,शायद इस लेखक  में ईमानदारी की एक गंध महसूस कर सकें !

बरसों से, बेशकीमत कलम का धनी यह लेखक ,अपने आपको स्थापित करने के संघर्ष में लगे, लेखकों में, हिम्मत की एक मिसाल है !
इस कविता संग्रह में एक कविता  " चक्की पर " की इन लाइनों पर गौर करें ....
स्त्रियाँ अपने में मगन 
सूप में फटकती रहती हैं चिंताएं 
लापरवाह अपनी देह के प्रति 
...
बहरहाल 
मैं और मेरा दोस्त 
चक्की की आवाज के बीच स्वतंत्रता से 
बात कर सकते हैं बिना किसी डर और 
झिझक के 
उनके और उनकी देह के बारे में !
अभावों से उनका सतत संघर्ष उनकी  रचनाओं में  मुखर हैं  ! सामाजिक विषमताओं से जूझते एक  आम आदमी की चीत्कार उनकी हर रचना में दिखाई देती है ! "छोकरा " "मैंने सोंचा " "कल रात" सोंचने को मजबूर कर देती हैं !
इस पुस्तक को पढ़कर राजेश उत्साही के प्रति श्रद्धा बढ़ी है !
इस शारदा पुत्र के सम्मान में, इस लेख को लिख कर, अपने आपको धन्य मान रहा हूँ !

Sunday, July 31, 2011

हिंदी ब्लोगिंग में स्नेह और प्यार -सतीश सक्सेना

डॉ टी एस दराल ने एक पोस्ट लिखी जिसमें चार ब्लागर साथियों  के द्वारा एक साथ बैठकर किये गए भोजन का जिक्र था , जिसमें आत्मीयता की एक गहरी झलक दिखती थी ! डॉ अरविन्द मिश्र के दिल्ली आगमन पर डॉ दराल साहब की तरफ से दिए गए, इस भोज पर वीरू भाई भी उपस्थित थे यकीनन चार ब्लागरों  का यह मिलन, नायाब ही था मगर इसने मुझे अन्य कई ब्लोगर भोजों की याद दिलाई और यकीन करें, किसी में भी गर्मजोशी की कमी नहीं पायी गयी !
दिल्ली में मुझे ब्लोगर मीटिंग का पहला मौका, अजय कुमार झा के जरिये मिला था जब उन्होंने एक खुला आमंत्रण देकर हम लोगों को एक जगह इकट्ठा करने का प्रयत्न किया था और लगभग  ४ घंटे चले इस  सम्मलेन  में ब्लागिंग की असीमित क्षमताओं पर अच्छा विमर्श किया गया !
इसमें शिरकत करने वालों में, इंग्लॅण्ड से डॉ कविता वाचक्नवी एवं जर्मनी से राज भाटिया ,  पंडित डी.के.शर्मा "वत्स" , खुशदीप सहगल , डॉ टी एस दराल आदि लोग मौजूद थे ! 

ब्लागर मीटिंग्स के नाम के साथ  अविनाश वाचस्पति का नाम  अवश्य जुड़ता है, सब लोगों को जोड़ने का उनका उत्साह, नवोदितों के लिए ,हिंदी ब्लागिंग की शक्ति  को ,नए शिखर पर  पंहुचाने के  लिए बहुत हिम्मत देगा  !
आज भी नए लोगों से, मिलने की इच्छा होते हुए भीं, हर जगह पहल की कमी महसूस होती है ! इस प्रकार के सम्मलेन और मुलाकातें, निस्संदेह एक नवीन वातावरण के निर्माण में मदद देगी ! फलस्वरूप न केवल आपसी स्नेह बढेगा बल्कि आप अपनी शक्ति को भी बढ़ते हुए महसूस करेंगे !  मेरे अपने द्वारा, ब्लॉग जगत में रूचि बढ़ने का एक अच्छा कारण यह मुलाकातें रहीं जहाँ मैं प्रत्यक्ष रूप से, अपने पसंद के लेखकों को आमने सामने सुन सका  ! जिन लोगों  से मैं मिल चूका हूँ ,पहली मुलाकात में ही समीर लाल , रचना , अविनाश वाचस्पति ,रविन्द्र प्रभातखुशदीप सहगल , डॉ दराल ,ताऊ रामपुरिया, योगेन्द्र मौदगिल, सलिल वर्मा, अनूप शुक्ल, बी एस पाबला ,राज भाटिया, शाहनवाज़, निर्मला कपिला,ललित शर्मा ,रतन सिंह शेखावत,  अमरेन्द्र त्रिपाठी, दिनेश राय द्विवेदी,सुनीता शानू  स्मार्ट इंडियन ,राजीव तनेजा ,शहरोज़, दीपक बाबा, एवं डॉ अरविन्द मिश्र ने, अपनी  शख्शियत की , एक गहरी छाप छोड़ी !
 हिंदी लेखन क्षेत्र में , ब्लोगिंग की उपलब्धियों को नकारा नहीं जा सकता ! गूगल के द्वारा दिए गए प्लेटफार्म के जरिये हिंदी भाषा में जो काम, अब तक हो चुका है ,कुछ वर्ष पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी ! जिन लोगों ने, सार्वजनिक मंच पर , अपनी अभिव्यक्ति लाने के बारे में कभी सोंचा भी नहीं होगा, वे अब ब्लोगिंग के जरिये अपने विचार न केवल धड़ल्ले से व्यक्त कर रहे हैं बल्कि खासे सफल भी हैं !
इसमें कोई संदेह नहीं कि जहाँ हम लोग, इस शानदार प्लेटफार्म के जरिये ,एकता के सूत्र में बंधने में कामयाबी मिलने की आशा कर रहे हैं वहीँ यहाँ कुछ लोग अपने कट्टर राजनीतिक, धार्मिक विचारों को भी स्वर देने का प्रयत्न कर रहे हैं ! अपरिमित सीमायें होने से, ब्लॉग जगत लगभग हर क्षेत्र में  ही अपना सफल योगदान कर रहा है !
ब्लाग जगत में, एक से एक विद्वान् कार्यरत हैं , जिन्हें पढना ही सौभाग्य माना जाता है, मगर अक्सर वे भिन्न विचार धाराओं से जुड़े रहने के कारण एक साथ नहीं बैठ पाते ! विभिन्न राजनैतिक पार्टियों , समाजों और धर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाले मनीषी, अगर एक स्थान पर जुड़ सकें तो विद्वानों का कुम्भ होने का सपना पूरा हो सकता है ! 


पिछले कुछ दिनों से यह देखा जा रहा है कि ब्लोगिंग में पहले से कार्यरत लोगों की दिलचस्पी कुछ कम हुई है !  इस सम्बन्ध में खुशदीप सहगल का एक लेख आया था जिसमें इस प्रवृत्ति की और चिंता प्रकट की गयी थी ! मुझे लगता है देर सबेर यह संक्रमण काल भी गुजर जाएगा यदि हम लोग लेखन गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें  !
हजारों तरह के लोग , यहाँ अपनी अपनी समझ के अनुसार लिख रहे हैं  , स्वाभाविक है कि जिस  क्वालिटी की मानसिकता होगी, लेख में उसी समझ की झलक नज़र आएगी  ! पाठकों की वाह -वाह करती टिप्पणियों की बेपनाह शक्ति, यहाँ मूर्ख को विद्वान् और विद्वान् को नासमझ बनाने में समर्थ है ! अतः पाठकों को टिप्पणी अस्त्र का प्रयोग सोंच समझ कर  करना होगा !जहाँ एक  ओर  नए ब्लोगर को मिली टिप्पणी, उसमें नवजीवन संचार कर, बेहतर लेखन की प्रेरणा देती हैं वही टिप्पणी, किसी स्वच्छ चादर में लिपटे धूर्त को, रावण बनाने में समर्थ है ! प्रोत्साहन का दुरुपयोग और सदुपयोग यहाँ बखूबी महसूस होता है !     
आवश्यकता है केवल एक सकारात्मक सोंच और उत्साह की जिसके प्रभाव से नकारात्मक   शक्तियों का ह्रास हो और बेहतर लोग समाज और देश के शुभ निर्माण में लगें !
आप सबको विनम्र शुभकामनायें !

Monday, June 6, 2011

लेखन अमर होता है - सतीश सक्सेना

                    ब्लॉग लेखन एक ऐसी क्रांति है, जिसकी कुछ वर्षों पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी ! इस प्लेटफार्म के  आने से कितने ही प्रतिभाशाली लेखक, समाज में अपनी सफल उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब हुए हैं ! हिंदी जगत को, जो आसान रास्ता गूगल ने, अपने बलबूते पर, आसानी से उपलब्ध करा दिया शायद यह  काम किसी भी व्यवस्था के लिए एक बेहद कठिन और दुष्कर रास्ता साबित होता ! कम से कम मैं गूगल  का आभारी हूँ कि इसके जरिये न केवल अपनी अभिव्यक्तियों को साकार कर सका अपितु बहुत सारे बेहतरीन लोगों के सामने, अपने आपको पेश कर सकने में भी कामयाब हुआ !

                 लेखन अमर होता है ! एक बार लिखे गए शब्द, सुदूर क्षेत्रों में भी आज आसानी से पढ़े जाने के लिए उपलब्द्ध हैं और कालांतर में, स्मृतियों में जीवित रहते हुए पीढ़ियों यात्रा करने में सक्षम हैं !पाठक समूह रूचि, बुद्धि  और परम्परा अनुसार अपने अपने अर्थ लगाकार इन्हें अपनी स्मृतियों में सहेजे रहते हैं !

                       किसी भी लेखक को ,अपने श्रद्धालु पाठक से अपार सम्मान पाना, कोई चौंकाने वाली  बात नहीं है और हमारे परिवेश में, जहाँ अक्षरों को विद्या मानते हुए पूजा जाता है वहां लेखक को मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार करना कोई असाधारण बात नहीं है ! अधिकतर साधारण मगर बेईमान लेखक अपने पाठकों की श्रद्धा की बदौलत , आसमान  को शिक्षा देते देखे जाते हैं ! अफ़सोस है कि प्रभावित श्रद्धालु , अपनी निश्छल श्रद्धा के कारण, अपने परिवार तक को हमेशा के लिए , इन चालाक शिकारियों का शिष्य बना देता है ! इस समय देश में ऐसे गुरुओं की कोई कमी नहीं है !
     
                  देश और समाज के प्रति प्रतिबद्धता को याद रखते हुए लिखे गए ईमानदार लेखन का लोग सम्मान करते हैं, यदि इस प्रकार के लेखन में व्यक्तिगत राजनैतिक प्रतिबद्धता को अलग रखा जाये , तो लेखक के  विचार, पाठकों के ह्रदय को छू लेने में, अक्सर कामयाब होते हैं !

                   समाज के लिए अहितकर एवं खराब लिखते समय हमें याद रखना चाहिए कि हमारे यह लेख, एक दिन हमारे बच्चे और परिवार जन भी पढेंगे  और तात्कालिक जोश में लिखे गए, कुछ लेख ही, हमारे व्यक्तित्व  का विस्तृत परिचय देने के लिए काफी होते हैं  !

आइये इसी परिप्रेक्ष्य में पंकज उधास की एक ग़ज़ल सुने , विडियो यू टयूब  से  साभार !
तुझे देखकर सब मुझे जान लेंगे .... 

अनुरोध  : आपके आने का आभार ...आगे से, मेरे गीत पर कमेन्ट न करने का अनुरोध है , आशा है मान रखेंगे  !   

Related Posts Plugin for Blogger,