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Tuesday, January 11, 2022

वजन घटाने का सफल संकल्प कैसे किया करें -सतीश सक्सेना

सैकड़ों बार प्रयत्न कर चुकी / चुका हूँ मगर वजन टस से मस नहीं होता, हताश हो चुकी हूँ / निराश हूँ क्या करूँ समझ नहीं आता ? 
2014 से पहले 

यही प्रश्न है उन सबके मन में, जो जूझ रहे हैं हाई बीपी से, हृदय आघात के खतरे से , डायबिटीज से , कॉन्स्टिपेशन से , आलस्य और कथित वृद्धावस्था से जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं होना चाहिए ! उम्र बढ़ने ( 80 के आसपास ) के साथ क्षीण होते शरीर को बचाने का एक मात्र तरीका शारीरिक और मानसिक क्रियाकलाप जारी रखना ही होगा जिसके होते अवसाद , निराशा पास भी नहीं फटकेंगे और एक दिन शांत अवस्था में सोते हुए प्राण जाएंगे ! यही सिद्ध अवस्था माननी चाहिए हम सबको जो देर सबेर सबको आनी चाहिए और सहर्ष स्वीकार्य भी होगी !

सबसे पहले मुझे बताएं क्या आप अपने आपको आमूलचूल बदलने को तैयार हैं तभी तो शरीर बदलेगा अन्यथा व्यर्थ प्रयत्न न करके जैसा है उसे स्वीकार करें और गाना गायें  ...हवन करेंगे हवन करेंगे !आपको मोटापा खराब इसलिए नहीं लगता है कि वह आपको
2012 में 
 अंदर से बर्बाद कर रहा है बल्कि इसलिए लगता है क्योंकि वह आपकी सुंदरता खराब कर रहा है और आप लोगों की नजर में सुंदर दिखना चाहते हैं , यह दिखावा बंद करना होगा ! किसी बच्चे की मुस्कान को गौर से देखें वह नेचुरल है इसीलिए खूबसूरत है !

अगर आप  इसके लिए तैयार हैं तब सबसे पहले अपने उस्ताद मन को बदलना होगा , हर तरह के दिखावे से चाहे वह समाज के प्रति हो या परिवार और दोस्तों के प्रति , अपनी घटिया आदतें जिन्हे आप छिपाते आये हैं को सबके सम्मुख करना सीखना होगा अथवा निर्ममता और ईमानदारी के साथ छोड़ना होगा , एक बार ईमानदारी आते ही मन आपके साथ गहराई से जुड़ेगा और आंतरिक मानवीय रक्षा शक्ति को मजबूत करने को प्रतिबद्ध होगा और यह शरीर सही दिशा में काम करना शुरू करेगा !
before retirement 

खुद को मजबूत दिखाए रखने के आवरण को हटाना होगा उसके लिए मन में गहराई से बैठे मृत्यु भय को मारना होगा एवं उन्मुक्त होकर स्वच्छ मन जो भी कहे करना होगा , रोज नए दिन को आखिरी दिन की तरह जीना सीखना होगा उन्मुक्त मस्त हंसी आते ही मोटापा और बीमारी पास भी नहीं आएगी दोस्त बस बिना समाज भय के सबके मध्य खुद को ठट्ठा मारकर बच्चों की तरह हंसाना, नाचना कैसे है यह नए सिरे से सीखना होगा ! जवान होने की प्रबल इच्छाशक्ति आपसे भीष्म प्रतिज्ञा करवा लेगी और पूरा भी करवाएगी !   
 
म सम्मानित लोग अक्सर अपने ऊपर कोई कठोर फैसला लागू ही नहीं होने देते क्योंकि हम खुद ही नियम बनाने वाले हैं और अक्सर यह नियम दूसरों पर लागू करवाते हैं ! वजन घटाने का फैसला आसान नहीं है क्योंकि बरसों से मेहनत न करने , और जम के बढ़िया भोजन की आदत छोड़ना, भीष्म प्रतिज्ञा जैसा है जो खुद पर लागू ही नहीं करना क्योंकि हम किसी के प्रति जवाब देह नहीं है !
 
हम लोग अक्सर अपने द्वारा किये गए संकल्प भुला देते हैं क्योंकि उसके लिए जवाब हमें खुद को ही तो देना है और इसमें शर्मिंदगी
और कायाकल्प के बाद 2019 

नहीं होती ! अगर हमने अपने बारे में लिया गया कोई संकल्प समाज में जोरदार तरीके से घोषित किया होता तब उसे भुलाने से पहले कई बार सोचना पड़ता सो इस संकल्प की घोषणा 
समाज में खुद के प्रति निर्मम होकर करें , कहें कि आपका वजन इस उम्र में ९० किलो है और इसे 65 किलो लाने के लिए आप आज से कसम खा कर संकल्प लेते /लेती हैं कि अगले दिनों में आप अपने आलसी शरीर पर यह अत्याचार करेंगे / करेंगी जिससे वह अपनी काहिली भुला सके ! शान से बिना शर्मिन्दा हुए अपनी मूर्खता और संकल्प की घोषणा करें, इसके बाद या तो सारी कलई उतर जायेगी या आपको उसे लगातार बचाने का प्रयत्न करते हुए वजन घटाना आ जाएगा जैसा मैंने खुद अपने साथ किया था !

मैंने अपने 61 वर्षीय (ईयर 2015 )आलसी शरीर जिसने पूरे जीवन दौड़ना छोड़िये कभी पार्क में वाक भी नहीं किया था और जिसे घर
2020 
,ऑफिस और कार में एयर कंडीशन सुविधा प्राप्त थी , को सुधारने के लिए घोषणा की थी कि मैं आज से तीन माह बाद 21 Km हाफ मैराथन दौड़ कर पूरा करूँगा और यह घोषणा फेसबुक और तमाम मित्रों परिवार जनों के बीच तब की थी जब मैं दो मंजिल सीढियाँ चढ़ते समय हांफता था और अपने पूरे जीवन में कभी भी 10 मीटर तक नहीं दौड़ा था और अपने ऑफिस और मित्रों में लीडर की भूमिका में था बेहद सम्मानित भी था !

मुझे याद है कि उसके अगले दिन पार्क में मैंने अपना पहला वाक ४५ मिनट का किया था था जिसका आखिरी मिनट जैसे तैसे धीरे धीरे दौड़कर ख़त्म किया था और यह क्रम फिर कभी बंद नहीं हुआ पहला हाफ मैराथन जैसे तैसे ही सही मगर 3 घंटे से कम समय में पूरा करने में कामयाब हुआ था ! आज मुझे कोई बीमारी नहीं , कहाँ गायब हुई यह भी नहीं पता बस शरीर को मेहनत करना सिखा दिया अब आखिरी दिन जब चाहे आये परवाह नहीं !


थुलथुल शरीर से मुक्ति चाहिए तो सोच बदलनी होगी -सतीश सक्सेना

क्या आपने एक भी ऐसे मेहनतकश मजदूर को देखा है जो शरीर से थुलथुल हो , तोंद निकाले हुए बोझा ढो रहा हो अथवा फावड़ा चला रहा हो ! कभी सदर बाजार या अपने शहर की व्यस्त मार्किट में जाएँ वहां आपको हाथ गाड़ी में , अपने शरीर के वजन से 10 गुना सामान लादकर खींचते हुए मेहनतकश मिलेंगे जिनके शरीर से पसीना टपक रहा होगा आप देखेंगे कि जब यह इंसान दोपहर में लंच करने के लिए मैले कपडे में बंधी 4 मोटी रोटियां निकाल, बाजार से 10 रूपये के छोले खरीद कर खाने बैठता है तब आपके मन में कोई विचार खुद को सुधारने के नहीं आते , तब यह लेख आपके लिए नहीं है !

आप भले यकीन न करें मगर अपने रिटायरमेंट के बाद (साठ वर्ष बाद ) मैंने अपने कायाकल्प करने के संकल्प में जिस व्यक्ति को गुरु बनाया वह मेरे मोहल्ले में घर के सामने बरसों से खड़ा होता एक अनपढ़ रिक्शावाला है जो पूरे दिन दो महिलाओं / पुरुषों  को बैठा कर कम से कम 3 से 5 km के , 20 चक्कर रोज लगाता है ! मैं हैरान था कि यह मैला कुचैला, बढाए गंदे बालों वाला इंसान , एक दिन में 120 किलो वजन को लेकर 5 किलोमीटर कैसे आता जाता होगा ! अगर 10 घंटों में यह 20 चक्कर भी लगता है तब इसका अर्थ हुआ कि पूरे दिन में इस दुबले पतले इंसान ने 80 km का सफर , कम से कम 100 kg वजन खींचते हुए किया है , यह जानकारी हतप्रभ करने के काफी थी मेरे लिए !

मैंने उससे उसका भोजन पूछा कि कितने अंडे और दूध ,फल रोज खाते हो भाई तो उसने अपना खाने का डब्बा दिखाया जिसमें चार मोटी रोटियां , आलू की सूखी सब्जी और प्याज था ! यह उसका लंच था , रात को घर जाकर दाल रोटी खायेगा, अंडा और दूध और डॉक्टर उसके बजट में ही नहीं थे , थोड़ा दूध घर में लाता है अपने बच्चों के लिए बस , बुखार उखार आने पर लेटना पड़ता है दो तीन दिन में ठीक हो जाने पर फिर काम पर ! जबकि हमारे ज्ञान के अनुसार अगर मैं मेहनत या एक्सरसाइज करता हूँ तब मुझे पौष्टिक खाना मिलना ही चाहिए अन्यथा शरीर बेकार और बीमार हो जाएगा जबकि यह रिक्शे वाला बीस बरसों से यही कर रहा है और सारी जमा पूँजी अपने गाँव माता पिता के पास भेजता है !

थुलथुल शरीर आपके थुलथुल मन का भी परिचायक है इस पर मनन करके देखिये सो अगर थुलथुल काया से मुक्ति चाहते हैं तो खुद को बदलना होगा  ! उन्मुक्त होकर बोलना और हंसना सीखना होगा बिना किसी की परवाह और दिखावा किये कि कोई क्या कहेगा , आप अपनी भावनाओं को बिना दबाये खुलकर व्यक्त करना सीखिए और यह आप तभी कर पाएंगे जब आप दूसरों के प्रति और खुद के लिए ईमानदार होंगे बिना किसी दिखावे के !

दुनिया की हर उस चीज आनंद लेना शुरू करें जिसके लिए मन हुआ और खर्चे या लोगों के कारण उस इच्छा को कही दबा दिया इसमें हर तरह का खाना पीना जो घर में संभव नहीं, शामिल होगा एवं वह सब काम करें जिसके बारे में सुना है, मगर कर नहीं पाए, ढेरों कारणों के कारण, मन मसोस कर रह गए , खुद को एन्जॉय करना सीखें, बिना किसी दिखावे के गर्व रहित प्यार करें खुद को और शरीर को अपना मित्र बनाएं उससे बातें करें उसपर विश्वास करें वह आपको कभी धोखा नहीं देगा ! प्रसन्न मन आपकी इच्छाशक्ति को अदम्य बनाने में समर्थ है ! जी भर कर हंसना सीखें और इसके लिए कंपनी तलाशें ,पार्क में भीड़ में खड़े होकर हो हो करते हुए बनावटी हंसी आपको जोकर बनाने में ही समर्थ होगी इसका रंच मात्र भी फायदा नहीं !

मेडिकल अथवा अन्य विज्ञापनों से प्रभावित न हों हमेशा यह ध्यान रखें कि विज्ञापनों का सुझाव मानने पर अगर आपको खर्च करना पड़ रहा है तो यह सुझाव सफल है उनके व्यवसाय के लिए और आप असफल !
  1. केवल पांच चीजों का ध्यान रखें गहरी साँस लेकर शुद्ध हवा अंदर खींचना शुरू करें, पूरे फेफड़े खोलने का अभ्यास करें महसूस करें कि यह सामान्य सांस नहीं बल्कि प्राणवायु है जो समूचे रक्तप्रवाह को स्वच्छ करती है हृदय की थकान को दूर करते हुए , बेहतर गतिशील बनाती है ! 
  2. दिन भर में 4 लीटर स्वच्छ पानी , खासतौर पर भूख लगने पर पहले पानी ही पियें ! RO ( रिवर्स ओस्मोसिस ) जल से आवश्यक मिनरल्स निकाल देता है यह हानिकारक है ! कोशिश प्राकृतिक शुद्ध पानी लेने की रहे !
  3. टॉनिक ,विटामिन , प्रोटीन भूलकर कोई भी सामान्य भोजन करें कोशिश रहे कि भोजन परिश्रम करने के बाद ही खाएं और मेहनत के अनुसार ही खाएं अगर पूरे दिन कुछ नहीं किया है तब भोजन न करें अथवा न्यूनतम करें !
  4. कम से कम आधा दिन हाथ पैरों का उतनी मेहनत के साथ चलना आवश्यक है जिससे पसीना बहना शुरू हो जाए अगर आप मेहनतकश नहीं हैं तब वाक करना आरम्भ करें इसमें गति, दूरी , समय आदि में बदलाव लाते रहें ! लगातार एकसार किया गया वाक बेकार हो जाता है क्योंकि शरीर इसे स्वीकार कर अपने नियम में ढाल लेता है ! सो इसमें परिवर्तन करें साथ ही यह अकेले करना चाहिए मनन करते हुए शरीर से बात करते हुए न कि दोस्तों के साथ गप्पे मारते हुए !
  5. भरपूर नींद लें , नींद न आने का कारण आप खुद और आपके लगातार घुमड़ते विचार होते हैं , अपने मन से चालाकी, क्रोध  और समझदारी का त्याग करें बच्चों जैसा निर्मल मन लेकर सोने जाएँ एक दिन तकिये पर सर रखते ही नींद आएगी !
-
 
  

Monday, April 30, 2018

लेह भ्रमण -सतीश सक्सेना

सुबह लेह की कड़ाके कि ठंड में होटल द्वारा दही परांठा ऑमलेट भारी नाश्ता खाते समय तो स्वादिष्ट लगता था मगर चलते समय हांफते हुए अपने ऊपर गुस्सा आता था ।

लेह से लेक तक का रास्ता इनोवा द्वारा तय करने में लगभग 5 घंटे लगे थे, और बीच में 17586 फुट पर बने चांगला कैफे पर स्वादिष्ट चाय का आनंद गजब का रहा !

जहां बेहद कम ऑक्सीजन के कारण 10 सीढ़ियां चढ़ने में सांस फूलती हो वहां 14250 फुट ऊंचाई पर स्थित पेंगोंग लेक के किनारे दौड़ने का प्रयत्न करना और वह भी 63 वर्ष की उम्र में , तारीफ का काम है न ? सो तारीफ करिए पर्यटकों के मध्य मैंने यह प्रयत्न ही नहीं किया बल्कि 1km से अधिक भागने में सफलता भी प्राप्त की यह और बात है कि मुझे तीन बार उखड़ी सांस व्यवस्थित करने में वाक भी करना पड़ा !

कड़ाके की ठंड में पारदर्शी ब्लू वाटर लेक के किनारे 3 इडियट्स की वे मशहूर कुर्सियां भी रखी हुई थीं , जिन पर बैठकर लोग अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे थे ।

अक्सर लोग लेक किनारे टेंट पर रात को रुकना पसंद करते हैं यहां के शांत वातावरण में स्वर्गिक आनंद महसूस
होता है ! आश्चर्य की बात है कि यह स्वच्छ जल , मीठा। न होकर नमकीन है क्योंकि 130 km लंबी झील चारो ओर से लैंड लॉक्ड है ।

बहरहाल लेह में आकर पहली बार हिमालयन डेजर्ट को महसूस करना ही अपने आप में उपलब्धि है ! शेष कल ..

Wednesday, March 7, 2018

साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा तिरेसठ साल का - सतीश सक्सेना

मैराथन आसान ,भरोसा हो क़दमों की ताल का
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा तिरेसठ साल का !

करत करत अभ्यास,पहाड़ों को रौंदा इस पाँव ने 
हार न माने किसी उम्र में,साहस मानवकाल का !

इसी हौसले से जीता है, सिंधु और आकाश भी
सारी धरती लोहा माने , इंसानी  इकबाल का !


गिरते क़दमों की हर आहट,साफ़ संदेशा देती है !
हिम्मत,मेहनत,धैर्य,ज़खीरा इंसानों की चाल का !

बहे पसीना कसे बदन से,मस्ती मेहनत की आयी !
रुक ना जाना,उठता गिरता रहे कदम भूचाल सा !

Monday, October 30, 2017

दर्द का तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये -सतीश सक्सेना

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

दर्द सारे ही भुलाकर, हिमालय से हृदय में 
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये 
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से  हृदय में 
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
   
तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें  
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये !

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे  
दूरियों को नमन कर के , धीमे धीमे दौड़िये !

Thursday, May 18, 2017

वजन घटाने के लिए रन -वाक -रन कैसे करें - सतीश सक्सेना

-धीमे चलना शुरू करें, बिना हांफे धीमे धीमे मगर अधिक लंबा दौड़ने/वाक की आदत डालें 
तथा उत्सर्जित एंडोर्फिन्स का आनंद लें, इससे न केवल आपकी सहनशीलता बढ़ेगी बल्कि आपका आत्मविश्वास भी ऊपर जाएगा !
- आपका उद्देश्य रोज नयी दूरियां तय करना होना चाहिए एक साथ अधिक लम्बी दूरी तय न करें , सप्ताह में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी उचित रहेगी और रनर्स इंजुरी से भी बचे रहोगे !

-पहली बार दौड़ना सीखने वाले सिर्फ वाक् के आखिरी हिस्से में सिर्फ 2 मिनट धीमे धीमे दौड़ कर अपने शरीर को दौड़ना सिखाएं ध्यान रहे हांफना नहीं है !
-हर रन में आपके हाथ में पानी की बोतल होनी चाहिए जिससे गला तर करने के लिए छोटे छोटे सिप लेते रहें
-दौड़ते समय ध्यान दूरी अथवा थकान पर न होकर अपने क़दमों की ताल पर होना चाहिए , नए रनर को अपने कदम छोटे छोटे मगर तेज चलाने चाहिए इससे थकान कम तथा दूरी अच्छी तय होगी
-सबसे महत्वपूर्ण अपनी तय दूरी खुश होकर आसानी से दौड़ते हुए तय करनी है , माथे पर बल चेहरे पर तनाव लेकर दौड़ने वाले जल्दी थकेंगे
-जोश में किया गया रन थका देगा अतः स्पीड को सही रखें इसे जानने के लिए दौड़ते दौड़ते एक पूरा वाक्य बोलें अगर आप पूरा वाक्य बिना रुके टूटे बोल पा रहे हैं तब आप ठीक दौड़ रहे हैं !
-अधिक उम्र तथा पहली बार दौड़ने वाले जल्दवाजी न करें वे वाक् के अंत में सिर्फ दो मिनट जॉगिंग करके अपना नियमित वाक् समाप्त करें इससे उनका शरीर रनिंग पोस्चर सीखेगा और कुछ समय में दौड़ने लगेगा
-खाने में कटौती न करें आपके खाने में कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा पर्याप्त होनी चाहिए अन्यथा लम्बी दूरी तय करते समय थकान महसूस करेंगे और एन्जॉयमेंट महसूस नहीं करेंगे
-हैवी डिनर का त्याग करें बेहतर होगा नींद से तीन घंटे पहले डिनर लें
-शुगर का पूरी तौर पर त्याग करें
-रविवार की सुबह लॉन्ग वाक /रन का रखें जो पिछले से अधिक लम्बा हो 

Break your barriers !!

Monday, December 5, 2016

मेरे जाने पर मेरी आँख, गुर्दे, ह्रदय, लीवर जलाना नहीं - सतीश सक्सेना

जिन मित्रों को मेरी उम्र पता चल जाती है वे मेरे नाम के साथ आदरणीय लगाना शुरू कर मुझे अपने से दूर कर देते हैं, मुझे लगता है आदर देने की जगह अपनापन और उन्मुक्त व्यवहार मिलता तो अधिक अच्छा था , उसमें मुझे अधिक फायदा होता ! अक्सर अधिक उम्र वालों को आदर देकर हम अपने से दूर रखने में सफल होते हैं जबकि उन्हें इस आदर से अधिक मित्रता की आवश्यकता अधिक होती है !
मेरे यहाँ कई मित्र हैं जिन्हें मैं बुड्ढा कहता हूँ , अपनी बेटी को नसीहत देते समय, बुढ़िया, और कई महिला मित्रों को उनके जबरदस्त स्नेही स्वभाव और अपनापन के कारण अम्मा कहने में आनंद आता है ! पूरे जीवन हम अपने आपको ढंके रहते हैं , घर परिवार , यहाँ तक कि बच्चों तक से औपचारिक व्यव्हार करने के आदि हो गए हैं ! आदर हो या स्नेह , खुल कर करें , यही ईमानदारी है ! अपनापन को दिखावा क्यों ?

बरसों से खूनदान के लिए कई हॉस्पिटल में अपना नाम लिखवा रखा है कि वे मुझे खून की कमी के वक्त बुला सकते हैं ! मरते दम तक किसी के काम आ जाएँ तो जीवन सफल हो इस इच्छा को निभाते हुए , बरसों पहले अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली में अपने शरीर के सारे अंग और शरीर दान कर चुका हूँ !

यह लिख रहा हु ताकि सनद रहे और मित्र मेरी मृत्यु पर परिवार को मेरा संकल्प याद दिलाएं कि यह ऑंखें , गुर्दे, ह्रदय और लीवर किसी को जीवनदान देने में सक्षम हैं !

Tuesday, September 27, 2016

कायाकल्प बेहद आसान है, साथ दें मेरा : सतीश सक्सेना

मैंने अधिकतर धीर गंभीर विद्वानों को 60 वर्ष की उम्र तक पंहुचते पहुंचते निष्क्रिय होते देखा है , इस उम्र में पंहुचकर ये लोग अधिकतर सुबह एक घंटे नियमित वाक के बाद अखबार पढ़ना , भोजन करने के बाद आराम करने तक ही सीमित हो जाते हैं ! पूरा जीवन गौरव पूर्ण जीवन जीते हैं ये लोग मगर स्वास्थ्य पर ध्यान देने का शायद ही कभी सोंच पाते होंगे , इनके जीवन की सारी खुशियां इनके प्रभामंडल तक ही सिमट कर रह जाती हैं , रिटायर जीवन में अक्सर ये शानदार व्यक्तित्व, अपने कार्यकाल के किस्से सुनाते मिलते हैं जिनमें कोई रूचि नहीं लेना चाहता सिर्फ हाँ में हाँ मिलाता रहता है !

मैंने 61 वर्ष की उम्र में अपने कायाकल्प का फैसला लिया और सबसे पहले धीरे धीरे दौड़ना शुरू किया 50 मीटर से शुरू करके आज 21 km तक बिना किसी ख़ास थकान के दौड़ लेता हूँ , ढीली मसल्स एवं भुलाई शक्ति का पुनर्निर्माण होते

देख मैं खुद आश्चर्यचकित हूँ , शारीरिक शक्ति एवं सहनशीलता में इतने बड़े बदलाव की मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी , और यह सब बिना किसी दवा, विटामिन्स, जूस के संभव हुआ है , हड्डियों और जॉइंट्स में आयी मजबूती एवं फर्क को मैं महसूस कर सकता हूँ !

पिछले एक वर्ष में मैंने लगभग 1200 km रनिंग की है जबकि पहले साठ वर्षों में 1 km भी नहीं दौड़ा था ! मैं यह सब अपनी तारीफ हो, इसलिए कभी नहीं लिखता , लिखने का उद्देश्य मेरे से कम उम्र के साथियों , विद्वानों का ध्यान आकर्षण मात्र है ताकि वे मेरी उम्र में आकर ठगे से महसूस न करके स्वस्थ और व्याधिमुक्त जीवन व्यतीत करें !


आज जिस तरह स्वास्थ्य सेवाओं का व्यवसायीकरण हुआ है वह पूरी मानवजाति के लिए बेहद चिंता जनक है , मानवशरीर के साथ, धन कमाने मात्र के लिए, भयभीत करके जिस प्रकार अस्पतालों में चीरफाड़ की जा रही है वह शर्मनाक है अफ़सोस यह है कि हमें इस पर,पूरे जीवन सोंचने का समय ही नही मिलता कि हमारे साथ क्या मज़ाक हो रहा है , मौत होने के डर से अक्सर हम डॉ की हाँ में हाँ मिलाते जाते हैं और ऑपरेशन के बाद ,शेष बचे जीवन को एक बीमार व्यक्ति की तरह काटने को मजबूर हो जाते हैं !


आइये, सुबह ५ बजे उठकर, नजदीक के पार्क में, अपने आपको फिजिकल एक्टिव बनाने का प्रयत्न शुरू करें ! हलके हल्के दौड़ते हुए, खुलते, बंद होते फेफड़े, शुद्ध ऑक्सीजन को शरीर में पम्प करते, शरीर का कायाकल्प करने में पूरी तौर पर सक्षम हैं !
विश्वास रखें ये सच है ...

Monday, September 26, 2016

एक अनुरोध - सतीश सक्सेना

प्रणाम प्रभु ,
कल सुबह नेहरू पार्क में दौड़ने से पहले 

आज के समय में मानव अपने स्वास्थ्य के प्रति बेहद लापरवाह हो गया है और इसमें बहुत बड़ा हाथ हमारे मन का होता है जो कि हमारे काबू में ही नहीं है , हमें समोसे, जलेबी, पकौड़े राह चलते ललचाते हैं  और कठोर व्यायाम करना हमारे बस में नहीं उससे बचने के लिए , हमारा मन हमें तरह तरह से समझाता है कि रात को बारह बजे सोकर, जल्दी नहीं उठ सकते सो सुबह का व्यायाम या टहलना कैसे हो ! ऑफिस से घर पंहुचते ही बहुत समय निकल जाता है , नौकरी तो करनी है न आदि आदि .......
भारत में हर व्यक्ति, समस्या निदान के लिए, विश्व का सबसे बड़ा विद्वान है , आप कोई समस्या बताइये जवाब हाज़िर है खास तौर पर बीमारियों के इलाज़ , बिना शरीर हिलाये तो टिप्स पर हैं  .... हार्ट एवं मोटापे के इतने इलाज हैं कि उन्हें सुनकर आपको लगेगा कि मैं बेकार ही चिंता करता हूँ शायद ही कोई भारतीय होगा जो मेथी, जामुन व् लहसुन नहीं खाता होगा और यह इलाज बचपन से मालूम हैं , उसके बाद सबसे अधिक मौतें इन्हीं बीमारियों से होती हैं मगर मजाल है कि किसी घर में यह देसी इलाज बंद हुए हों !

आज सुबह नेहरू पार्क दिल्ली जो मेरे घर से 20 km है वहां जाकर 15 km दौड़ाना बेहद सुखद रहा ,चित्र में लाल शर्ट में बेयर फुट रनर पंकज प्रसाद हैं उनके साथ कूल डाउन रनिंग में कुछ टिप सीखने का मौका मिला , डॉ प्रभा सिंह लखनऊ से किसी सेमिनार के लिए आयीं थीं , वे भी रनर ग्रुप को तलाश करते हुए , वहां पंहुचीं थी यकीनन इन जवानों के साथ दौड़ते हुए मैं ३० वर्ष पुरानी दुनियां में महसूस करता हूँ साथ ही बीपी अथवा अन्य बीमारियों से जाने कबसे निज़ात मिल चुकी है !  
  
कायाकल्प आसान नहीं है प्रभु , इसे करने के लिए दृढ निश्चयी होकर कुछ कठोर तथा अप्रिय फैसले करने ही होंगे , अगर आप रात को घर 10-11 बजे ही पंहुचते हैं तब आपको घर के गरम खाने का मोह त्यागना होगा, इसके लिए घर से सुबह ही रात का भोजन लेकर निकलें और शाम ६ बजे उसे ग्रहण करने की आदत डालें और अगर ठंडा भोजन स्वीकार नहीं तब शाम को बाजार से ताजे फल खरीदकर वहीँ कुर्सी पर बैठकर खाइये और रात के भोजन की आदत त्यागिये !

रात को १०-११ बजे तक हर हालत में सोना है , जिससे की आप सुबह ५ बजे पास के पार्क में जाकर टहल सकें , अगर दौड़ते हुए आपकी सांस फूलती है तो कृपया दौड़ना तुरंत बंद करें सिर्फ वाक् करना शुरू करें , टहलने के अंत के २ मिनट जॉगिंग अथवा तेज चलना शुरू करें और हांफने से पहले ही उसे बंद कर दें ! धीरे धीरे शरीर दौड़ने की आदत विकसित कर लेगा !

ध्यान रहे हांफना, आपके ह्रदय पर आये खतरे को बताता है , इससे मुक्ति पाने को धीमे धीमे वाक् को बढ़ाना होगा कुछ समय बाद आप देखेंगे कि हांफना समाप्त हो गया है ! यह बेहद खुशनुमा दिन होगा आपके लिए यह पहचान है आपके स्वस्थ ह्रदय की !
फेसबुक पर इस विषय पर  #healthblunders पर मेरे उपयोगी लेख हैं, कृपया उन्हें अवश्य पढ़ लें ! मेरा दावा है कि अगर ऐसा करेंगे तो आप हमेशा के लिए आपरेशन थियेटर से बच पाएंगे अन्यथा पूरे जीवन की कमाई, एक झटके में लूटने के लिए यह एयरकंडीशंड हॉस्पिटल तैयार खड़े हैं !

क्या पता भूल से दिल रुलाया कोई 
गर ह्रदय पर वजन हो, तभी दौड़िए !

आने वाली नसल,आलसी बन गयी
उनको हिम्मत बंधाने को भी दौड़िए !

शक्ति ,साहस,भरोसा,रहे अंत तक 
हाथ में जब समय हो, जभी दौड़िए !

always remember that Running is the best Cardio and diabetes control exercise   
सस्नेह 
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