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Friday, April 19, 2024

गढ़ दिया तुमने हमें अब, भाग्य अपना ख़ुद गढ़ेंगे -सतीश सक्सेना

आदरणीय रमाकान्त सिंह जी का अनुरोध पाकर, उनकी ही प्रथम पंक्तियों से, इस कविता की रचना हुई , आभार भाई  ! 

गढ़ दिया तुमने हमें अब, भाग्य अपना ख़ुद गढ़ेंगे !

धरा से सहनशीलता ले,
अग्नि का ताप सहा हमने 
पवन के ठन्डे झोंको संग 
सलिल से शीतलता पायी 
यही पर ज्ञान लिया तुमसे
परिश्रम की क्षमता आयी 
अब हुआ विश्वास सचमुच 
छू सकेंगे हम गगन ,अब 
ज्ञान पाकर शारदा से, 
भाग्य अपना खुद लिखेंगे !
गढ़ दिया तुमने हमें अब, भाग्य अपना खुद गढ़ेंगे !

अब हमें विश्वास अपना
रास्ता पाएंगे , हम भी  !
ज्ञान का आधार लेकर ,
विश्व को समझेंगे हम भी 
अपने विद्यालय से ही तो 
मिल सका है बोध हमको 
शक्तिशाली पंख पाकर 
छू सकेंगे चाँद हम ,अब 
प्रबल इच्छाशक्ति  लेकर, 
भाग्य अपना खुद बुनेंगे !
गढ़ दिया तुमने हमें अब , भाग्य अपना खुद गढ़ेंगे !

https://www.facebook.com/ramakant.singh.509

Tuesday, January 11, 2022

वजन घटाने का सफल संकल्प कैसे किया करें -सतीश सक्सेना

सैकड़ों बार प्रयत्न कर चुकी / चुका हूँ मगर वजन टस से मस नहीं होता, हताश हो चुकी हूँ / निराश हूँ क्या करूँ समझ नहीं आता ? 
2014 से पहले 

यही प्रश्न है उन सबके मन में, जो जूझ रहे हैं हाई बीपी से, हृदय आघात के खतरे से , डायबिटीज से , कॉन्स्टिपेशन से , आलस्य और कथित वृद्धावस्था से जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं होना चाहिए ! उम्र बढ़ने ( 80 के आसपास ) के साथ क्षीण होते शरीर को बचाने का एक मात्र तरीका शारीरिक और मानसिक क्रियाकलाप जारी रखना ही होगा जिसके होते अवसाद , निराशा पास भी नहीं फटकेंगे और एक दिन शांत अवस्था में सोते हुए प्राण जाएंगे ! यही सिद्ध अवस्था माननी चाहिए हम सबको जो देर सबेर सबको आनी चाहिए और सहर्ष स्वीकार्य भी होगी !

सबसे पहले मुझे बताएं क्या आप अपने आपको आमूलचूल बदलने को तैयार हैं तभी तो शरीर बदलेगा अन्यथा व्यर्थ प्रयत्न न करके जैसा है उसे स्वीकार करें और गाना गायें  ...हवन करेंगे हवन करेंगे !आपको मोटापा खराब इसलिए नहीं लगता है कि वह आपको
2012 में 
 अंदर से बर्बाद कर रहा है बल्कि इसलिए लगता है क्योंकि वह आपकी सुंदरता खराब कर रहा है और आप लोगों की नजर में सुंदर दिखना चाहते हैं , यह दिखावा बंद करना होगा ! किसी बच्चे की मुस्कान को गौर से देखें वह नेचुरल है इसीलिए खूबसूरत है !

अगर आप  इसके लिए तैयार हैं तब सबसे पहले अपने उस्ताद मन को बदलना होगा , हर तरह के दिखावे से चाहे वह समाज के प्रति हो या परिवार और दोस्तों के प्रति , अपनी घटिया आदतें जिन्हे आप छिपाते आये हैं को सबके सम्मुख करना सीखना होगा अथवा निर्ममता और ईमानदारी के साथ छोड़ना होगा , एक बार ईमानदारी आते ही मन आपके साथ गहराई से जुड़ेगा और आंतरिक मानवीय रक्षा शक्ति को मजबूत करने को प्रतिबद्ध होगा और यह शरीर सही दिशा में काम करना शुरू करेगा !
before retirement 

खुद को मजबूत दिखाए रखने के आवरण को हटाना होगा उसके लिए मन में गहराई से बैठे मृत्यु भय को मारना होगा एवं उन्मुक्त होकर स्वच्छ मन जो भी कहे करना होगा , रोज नए दिन को आखिरी दिन की तरह जीना सीखना होगा उन्मुक्त मस्त हंसी आते ही मोटापा और बीमारी पास भी नहीं आएगी दोस्त बस बिना समाज भय के सबके मध्य खुद को ठट्ठा मारकर बच्चों की तरह हंसाना, नाचना कैसे है यह नए सिरे से सीखना होगा ! जवान होने की प्रबल इच्छाशक्ति आपसे भीष्म प्रतिज्ञा करवा लेगी और पूरा भी करवाएगी !   
 
म सम्मानित लोग अक्सर अपने ऊपर कोई कठोर फैसला लागू ही नहीं होने देते क्योंकि हम खुद ही नियम बनाने वाले हैं और अक्सर यह नियम दूसरों पर लागू करवाते हैं ! वजन घटाने का फैसला आसान नहीं है क्योंकि बरसों से मेहनत न करने , और जम के बढ़िया भोजन की आदत छोड़ना, भीष्म प्रतिज्ञा जैसा है जो खुद पर लागू ही नहीं करना क्योंकि हम किसी के प्रति जवाब देह नहीं है !
 
हम लोग अक्सर अपने द्वारा किये गए संकल्प भुला देते हैं क्योंकि उसके लिए जवाब हमें खुद को ही तो देना है और इसमें शर्मिंदगी
और कायाकल्प के बाद 2019 

नहीं होती ! अगर हमने अपने बारे में लिया गया कोई संकल्प समाज में जोरदार तरीके से घोषित किया होता तब उसे भुलाने से पहले कई बार सोचना पड़ता सो इस संकल्प की घोषणा 
समाज में खुद के प्रति निर्मम होकर करें , कहें कि आपका वजन इस उम्र में ९० किलो है और इसे 65 किलो लाने के लिए आप आज से कसम खा कर संकल्प लेते /लेती हैं कि अगले दिनों में आप अपने आलसी शरीर पर यह अत्याचार करेंगे / करेंगी जिससे वह अपनी काहिली भुला सके ! शान से बिना शर्मिन्दा हुए अपनी मूर्खता और संकल्प की घोषणा करें, इसके बाद या तो सारी कलई उतर जायेगी या आपको उसे लगातार बचाने का प्रयत्न करते हुए वजन घटाना आ जाएगा जैसा मैंने खुद अपने साथ किया था !

मैंने अपने 61 वर्षीय (ईयर 2015 )आलसी शरीर जिसने पूरे जीवन दौड़ना छोड़िये कभी पार्क में वाक भी नहीं किया था और जिसे घर
2020 
,ऑफिस और कार में एयर कंडीशन सुविधा प्राप्त थी , को सुधारने के लिए घोषणा की थी कि मैं आज से तीन माह बाद 21 Km हाफ मैराथन दौड़ कर पूरा करूँगा और यह घोषणा फेसबुक और तमाम मित्रों परिवार जनों के बीच तब की थी जब मैं दो मंजिल सीढियाँ चढ़ते समय हांफता था और अपने पूरे जीवन में कभी भी 10 मीटर तक नहीं दौड़ा था और अपने ऑफिस और मित्रों में लीडर की भूमिका में था बेहद सम्मानित भी था !

मुझे याद है कि उसके अगले दिन पार्क में मैंने अपना पहला वाक ४५ मिनट का किया था था जिसका आखिरी मिनट जैसे तैसे धीरे धीरे दौड़कर ख़त्म किया था और यह क्रम फिर कभी बंद नहीं हुआ पहला हाफ मैराथन जैसे तैसे ही सही मगर 3 घंटे से कम समय में पूरा करने में कामयाब हुआ था ! आज मुझे कोई बीमारी नहीं , कहाँ गायब हुई यह भी नहीं पता बस शरीर को मेहनत करना सिखा दिया अब आखिरी दिन जब चाहे आये परवाह नहीं !


थुलथुल शरीर से मुक्ति चाहिए तो सोच बदलनी होगी -सतीश सक्सेना

क्या आपने एक भी ऐसे मेहनतकश मजदूर को देखा है जो शरीर से थुलथुल हो , तोंद निकाले हुए बोझा ढो रहा हो अथवा फावड़ा चला रहा हो ! कभी सदर बाजार या अपने शहर की व्यस्त मार्किट में जाएँ वहां आपको हाथ गाड़ी में , अपने शरीर के वजन से 10 गुना सामान लादकर खींचते हुए मेहनतकश मिलेंगे जिनके शरीर से पसीना टपक रहा होगा आप देखेंगे कि जब यह इंसान दोपहर में लंच करने के लिए मैले कपडे में बंधी 4 मोटी रोटियां निकाल, बाजार से 10 रूपये के छोले खरीद कर खाने बैठता है तब आपके मन में कोई विचार खुद को सुधारने के नहीं आते , तब यह लेख आपके लिए नहीं है !

आप भले यकीन न करें मगर अपने रिटायरमेंट के बाद (साठ वर्ष बाद ) मैंने अपने कायाकल्प करने के संकल्प में जिस व्यक्ति को गुरु बनाया वह मेरे मोहल्ले में घर के सामने बरसों से खड़ा होता एक अनपढ़ रिक्शावाला है जो पूरे दिन दो महिलाओं / पुरुषों  को बैठा कर कम से कम 3 से 5 km के , 20 चक्कर रोज लगाता है ! मैं हैरान था कि यह मैला कुचैला, बढाए गंदे बालों वाला इंसान , एक दिन में 120 किलो वजन को लेकर 5 किलोमीटर कैसे आता जाता होगा ! अगर 10 घंटों में यह 20 चक्कर भी लगता है तब इसका अर्थ हुआ कि पूरे दिन में इस दुबले पतले इंसान ने 80 km का सफर , कम से कम 100 kg वजन खींचते हुए किया है , यह जानकारी हतप्रभ करने के काफी थी मेरे लिए !

मैंने उससे उसका भोजन पूछा कि कितने अंडे और दूध ,फल रोज खाते हो भाई तो उसने अपना खाने का डब्बा दिखाया जिसमें चार मोटी रोटियां , आलू की सूखी सब्जी और प्याज था ! यह उसका लंच था , रात को घर जाकर दाल रोटी खायेगा, अंडा और दूध और डॉक्टर उसके बजट में ही नहीं थे , थोड़ा दूध घर में लाता है अपने बच्चों के लिए बस , बुखार उखार आने पर लेटना पड़ता है दो तीन दिन में ठीक हो जाने पर फिर काम पर ! जबकि हमारे ज्ञान के अनुसार अगर मैं मेहनत या एक्सरसाइज करता हूँ तब मुझे पौष्टिक खाना मिलना ही चाहिए अन्यथा शरीर बेकार और बीमार हो जाएगा जबकि यह रिक्शे वाला बीस बरसों से यही कर रहा है और सारी जमा पूँजी अपने गाँव माता पिता के पास भेजता है !

थुलथुल शरीर आपके थुलथुल मन का भी परिचायक है इस पर मनन करके देखिये सो अगर थुलथुल काया से मुक्ति चाहते हैं तो खुद को बदलना होगा  ! उन्मुक्त होकर बोलना और हंसना सीखना होगा बिना किसी की परवाह और दिखावा किये कि कोई क्या कहेगा , आप अपनी भावनाओं को बिना दबाये खुलकर व्यक्त करना सीखिए और यह आप तभी कर पाएंगे जब आप दूसरों के प्रति और खुद के लिए ईमानदार होंगे बिना किसी दिखावे के !

दुनिया की हर उस चीज आनंद लेना शुरू करें जिसके लिए मन हुआ और खर्चे या लोगों के कारण उस इच्छा को कही दबा दिया इसमें हर तरह का खाना पीना जो घर में संभव नहीं, शामिल होगा एवं वह सब काम करें जिसके बारे में सुना है, मगर कर नहीं पाए, ढेरों कारणों के कारण, मन मसोस कर रह गए , खुद को एन्जॉय करना सीखें, बिना किसी दिखावे के गर्व रहित प्यार करें खुद को और शरीर को अपना मित्र बनाएं उससे बातें करें उसपर विश्वास करें वह आपको कभी धोखा नहीं देगा ! प्रसन्न मन आपकी इच्छाशक्ति को अदम्य बनाने में समर्थ है ! जी भर कर हंसना सीखें और इसके लिए कंपनी तलाशें ,पार्क में भीड़ में खड़े होकर हो हो करते हुए बनावटी हंसी आपको जोकर बनाने में ही समर्थ होगी इसका रंच मात्र भी फायदा नहीं !

मेडिकल अथवा अन्य विज्ञापनों से प्रभावित न हों हमेशा यह ध्यान रखें कि विज्ञापनों का सुझाव मानने पर अगर आपको खर्च करना पड़ रहा है तो यह सुझाव सफल है उनके व्यवसाय के लिए और आप असफल !
  1. केवल पांच चीजों का ध्यान रखें गहरी साँस लेकर शुद्ध हवा अंदर खींचना शुरू करें, पूरे फेफड़े खोलने का अभ्यास करें महसूस करें कि यह सामान्य सांस नहीं बल्कि प्राणवायु है जो समूचे रक्तप्रवाह को स्वच्छ करती है हृदय की थकान को दूर करते हुए , बेहतर गतिशील बनाती है ! 
  2. दिन भर में 4 लीटर स्वच्छ पानी , खासतौर पर भूख लगने पर पहले पानी ही पियें ! RO ( रिवर्स ओस्मोसिस ) जल से आवश्यक मिनरल्स निकाल देता है यह हानिकारक है ! कोशिश प्राकृतिक शुद्ध पानी लेने की रहे !
  3. टॉनिक ,विटामिन , प्रोटीन भूलकर कोई भी सामान्य भोजन करें कोशिश रहे कि भोजन परिश्रम करने के बाद ही खाएं और मेहनत के अनुसार ही खाएं अगर पूरे दिन कुछ नहीं किया है तब भोजन न करें अथवा न्यूनतम करें !
  4. कम से कम आधा दिन हाथ पैरों का उतनी मेहनत के साथ चलना आवश्यक है जिससे पसीना बहना शुरू हो जाए अगर आप मेहनतकश नहीं हैं तब वाक करना आरम्भ करें इसमें गति, दूरी , समय आदि में बदलाव लाते रहें ! लगातार एकसार किया गया वाक बेकार हो जाता है क्योंकि शरीर इसे स्वीकार कर अपने नियम में ढाल लेता है ! सो इसमें परिवर्तन करें साथ ही यह अकेले करना चाहिए मनन करते हुए शरीर से बात करते हुए न कि दोस्तों के साथ गप्पे मारते हुए !
  5. भरपूर नींद लें , नींद न आने का कारण आप खुद और आपके लगातार घुमड़ते विचार होते हैं , अपने मन से चालाकी, क्रोध  और समझदारी का त्याग करें बच्चों जैसा निर्मल मन लेकर सोने जाएँ एक दिन तकिये पर सर रखते ही नींद आएगी !
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Saturday, July 17, 2021

जकड़े घुटने पकड़ के बैठा , ढूंढ रहा उपचार आदमी -सतीश सक्सेना

दौड़ते समय घुटनों को नुकसान न पहुँचने पाए इसके लिए कृपया बताइए कि क्या करना चाहिए? मेरे एक मित्र संजय त्रिपाठी का इस प्रश्न का जवाब लगभग हर पोस्ट में देने का प्रयत्न करता हूँ ! #healthblunders लिंक पर मेरे वे लेख दुबारा ध्यान से पढ़ेंगे तो जवाब स्पष्ट मिलेगा , संक्षिप्त में कहूं तो घुटने में नुकसान केवल उन्हें होता है जो घुटनों को बहुत जतन से संभाल कर रखते हैं या बहुत दुरूपयोग करते हैं , घुटने हों या शरीर के अन्य अंग प्रकृति ने उन्हें उपयोग के लिए ही बनाया है , उनका भरपूर उपयोग होना चाहिए अगर नहीं किया है तब जॉइंट जकड जाएंगे ! सो शुरू करें उन्हें प्यार से चलना सिखाना वे आपको सौ वर्षों तक साथ देंगे !

आज से एक रनिंग प्रोग्राम ज्वाइन किया है जिसमें अगले ३० दिनों में कम से कम 194.7 km दौड़ना या साइकिलिंग करना होगा  ! कोच रविंदर सिंह का यह प्रोग्राम बाँध कर रखेगा मुझे एक माह तक लगभग रोज 7 km दौड़ना होगा या साइकिलिंग करना है मगर हर हाल में  195 km पूरे करने होंगे और निस्संदेह 66+ वर्ष के नौजवान के लिए यह बिलकुल मुश्किल नहीं है !

सो आज पहले दिन काफी दिन से खड़ी साईकिल राइडिंग के लिए उसका हेलमेट , हैंड ग्लव्स , शार्ट , रेफ्लेक्टेड जर्सी , फ़्लैश लाइट , वाटर बोतल , जीपीएस वाच , strava अप्प , स्पोर्ट्स शू , आई कार्ड , कुछ रूपये , गॉगल्स , हेड बैंड , स्माल टॉवल , एक्स्ट्रा टायर , टूल्स , एयर पंप , आदि संभाल कर रात को ही तैयार कर इकठ्ठा रख दिए थे ! सुबह सुबह ५ बजे वाच में से स्पोर्ट्स अप्प स्ट्रावा में साइकिल राइड ऑन कर चल दिया दिल्ली की और डीएनडी से आश्रम , इंडिया गेट , प्रगति मैदान , निजामुद्दीन ब्रिज , मयूरविहार होते हुए लगभग 7 बजे घर बापस पंहुचा तो पूरा शरीर पसीने के साथ आनंदमय था कि आज बहुत दिन बाद साइकिल से की गयी यात्रा 30.69 km को 17 km प्रति घंटा की एवरेज स्पीड से तय करने में 1:52 का समय लगा !  इस पूरी यात्रा में कोई कष्ट हुआ तो वह प्रगति मैदान की दुर्दशा देखकर हुआ जिसे डेवलपमेंट की भेंट चढ़ा दिया गया ! राजधानी में यही एक मात्र जगह थी जहाँ बच्चे हमेशा चहकते हुए मिलते थे ! 

अब तक मैं पिछले लगभग छह वर्ष में अपने काया कल्प अनुष्ठान में कुल 7225 km दौड़ने के साथ साथ 2760 km साइकिल भी चला चुका हूँ जो कि लम्बी दौड़ के रनर के लिए बहुत आवश्यक है ! मजबूत जांघों के मसल्स के लिए साईकिल चलाना बहुत आवश्यक है , इससे चोटिल होने का खतरा कम हो जाता है !

अंत में मित्रों से दुबारा अनुरोध है कि उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि उन्हें रनिंग बिलकुल नहीं आती है और न उनके शरीर को , उन्हें भूल जाना होगा कि रनिंग करने में कुछ नहीं है इसमें सीखना क्या ? बिना शरीर को सिखाये हुए रनिंग आपकी जान लेने में समर्थ है सो अपने सुस्त और वजनदार शरीर को मेहरबानी कर धीरे धीरे रनिंग सिखाएं जिस दिन आपका शरीर दौड़ना सीख गया उस दिन आप खुद को शीशे में पहचान नहीं पाएंगे !
शुभकामनायें !



Monday, July 12, 2021

नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये -सतीश सक्सेना

आज सुबह पांच बजे मैं गाडी लेकर DND toll पर पहुँच गया था , बढ़िया मौसम मगर आद्रता 90 प्रतिशत , गाडी एक साइड पार्क कर, रिंग रोड तक जाकर बापस लौटने का (लगभग 8 Km )
मन बनाया और थोड़ी स्ट्रेचिंग के बाद , गहरी गहरी साँस लेकर, बेहद सहज मन से दौड़ना शुरू किया ! आज का संकल्प था कि सहज मन से ही दौड़ना है , न दूरी की चिंता और न समय की , खाली सड़क के किनारे किनारे, पेट के बढे हुए एक टायर पर विचारों को केंद्रित करते हुए कि इस सप्ताह इससे मुक्ति पानी ही है, दौड़ते दौड़ते कब यमुना ब्रिज आ गया पता ही नहीं चला , दिल्ली पुलिस पीसीआर के हैडकांस्टेबल द्वारा गुड मॉर्निंग सर का जवाब देते हुए अच्छा लगा ! इस रुट के लगभग सारे ड्यूटी अफसर जानते हैं कि एक 67 वर्ष का रिटायर्ड जवान नोएडा से दिल्ली तक दौड़ता है !

आज की 8 km की लम्बी दौड़ की विशेषता सहजता रही , बिना किसी तनाव, गरमी ,पसीने पर ध्यान दिए बिना यह बेहद आसान था हालाँकि बढ़ी आद्रता के कारण, बापसी में कार तक पंहुचने पर ऊपर से नीचे तक पसीने से नहाया हुआ था ! 

काया कल्प के संकल्प में सहजता ही आवश्यक है जिसे आज के दिखावटी जगत में पाना बेहद मुश्किल होता है ! सहज आप तभी हो सकेंगे जब मन स्वच्छ हो ईमानदार हो खुद के लिए भी और गैरों के लिए भी ! स्वस्थ मन और शरीर को पाने के लिए आप को भय त्यागना होगा , मृत्यु भय पर विजय पाने के लिए अपनी आंतरिक सुरक्षा शक्ति पर भरोसा रखें कि वह अजेय है किसी भी बीमारी से उसका शरीर सुरक्षित रखने में वह सक्षम है और हाँ, अपने विशाल प्रभामण्डल और तथाकथित आदर सम्मान भार को सर से उतारकर घर पर रख देना होगा अन्यथा यह गर्व बर्बाद कर देने में सक्षम है मेरे हमउम्र तीन मित्र इस वर्ष मोटापे की भेंट चढ़ गए और कुछ हार्ट अटैक की कगार पर हैं ,काश वे समय रहते चेत गए होते ! 

भारत हृदय रोग और डायबिटीज की वैश्विक राजधानी बन चुका है , हर चौथा व्यक्ति इसका शिकार है और उसे पता ही नहीं , चलते समय या सीढियाँ चढ़ते समय सांस फूलता है, उसे यह तक पता नहीं कि साँस फूलने का मतलब क्या होता है और न उसके पास समय है कि इस बेकार विषय पर ध्यान दे मोटापे को वह उम्र का तकाजा समझता है ! खैर  ...

बरसों से आलसी शरीर को सुंदर और स्वस्थ बनाने के लिए कृत्रिम प्रसाधनों , दवाओं का त्याग करना होगा , उनसे शरीर स्वस्थ होगा का विचार, केवल खुद को मूर्ख बनाना है ! शरीर स्वस्थ रखने के लिए जो अंग जिस कार्य के लिए बने हैं उनका सहज भरपूर उपयोग करना सीखना होगा ! गलत लोक श्रुतियों और मान्यताओं, सामाजिक भेदभाव पर खुले मन से विचार कर उनका त्याग करें आप खुद ब खुद सहज होते जाएंगे ! 

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में 
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये 
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से  हृदय में 
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
   
तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें  
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये !

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे  
दूरियों को नमन कर के , धीमे धीमे दौड़िये !

Friday, February 19, 2021

सम्मान से अधिक प्रोत्साहन देना आवश्यक है -सतीश सक्सेना

हिंदी जगत में ब्लॉगिंग का आगमन , हिंदी के नवोदित लेखकों के लिए संजीवनी का काम कर गया , झिझकती लड़खड़ाती शर्मीली सैकड़ों कलमें हिंदी की चाल दिखाने के लिए फ्लोर पर पहली बार जब आयीं थी तो उनमें कितनी ही खड़े होने लायक भी नहीं थीं , मगर पाठक रुपी दर्शकों ने वाह वाह कर उन्हें प्रोत्साहन दिया और कांपते हुए क़दमों को अहसास दिलाया कि वे न केवल चल रही हैं बल्कि बेहतरीन निशान भी छोड़ रही हैं ! 

यह उनके लिए अविश्वसनीय ही था कि जिन्होंने पूरी जिंदगी कुछ नहीं लिखा उनका लिखना न केवल पढ़ने योग्य है बल्कि तालियों के साथ हिंदी जगत में उन्हें एक सम्मानित पहचान भी मिल रही है , इस विश्वास के साथ ही उनके लेखन में विविधता और पैनापन बढ़ने लगा और कुछ समय पश्चात, उनके बेकार लेख वाकई अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए, आज उनमें से कई हिंदी जगत में बेहतरीन लेखक हैं और प्रिंट मीडिया उनके लेख लगातार छापकर उन्हें सम्मानित कर रही है ! 

हिंदी ब्लॉगिंग से लेखकों के उदय में, मैं समीर लाल ( उड़न तश्तरी ) का बहुत बड़ा योगदान मानता हूँ , 2008 में समीर लाल ही थे जो नियमित तौर पर प्रतिदिन लगभग सौ ब्लॉगरों के ब्लॉग पर जा जाकर वाह वाही कर टिप्पणी करते थे , कई लोग कहते थे कि इतनी टिप्पणियां कोई एक व्यक्ति कर ही नहीं सकता यह असंभव ही था कि एक व्यक्ति इतने ब्लॉगों पर जाकर पढ़े और टिप्पणी करे ! कुछ कहते थे कि उन्होंने कोई सॉफ्टवेयर बनवाया है जो इतनी टिप्पणी रोज करता है और कई उनकी मजाक बनाते थे कि वे किसी ब्लॉग को पढ़ते नहीं है बस खुद के ब्लॉग पर टिप्पणी पाने के लिए वे सबके ब्लॉग पर नियमित टिपियाते हैं ! मगर सच्चाई यही थी कि उनकी टिप्पणी पाने पर एक जोश महसूस होता था कि मैंने कुछ अच्छा लिखा है जो कनाडा से उड़नतश्तरी ने आकर कमेंट दिया है ! हिंदी ब्लॉगिंग को बढ़ाने में समीर लाल का योगदान अमर और सैकड़ों लेखनियों के लिए जीवन दायक रहा , इस योगदान के लिए वे हमेशा वंदनीय रहेंगे !

रनिंग करते समय, स्टेडियम के रनिंग ट्रेक पर या खुली सड़क पर जब कोई भारी वजन का व्यक्ति या महिला दौड़ने का प्रयत्न करते देखता हूँ तब मैं उसकी हिम्मत अफ़ज़ाई अवश्य करता हूँ , शाब्बाश बच्चे तुम अवश्य जीतोगे एक दिन, बस हिम्मत नहीं हारना , दुनियां तुम्हें दौड़ते देख हँस रही है इसकी बिना परवाह किये धीरे धीरे बिना हांफे दौड़ना, सीखते रहो एक दिन तुम्हारा स्लिम शरीर इसी ट्रेक पर तेज गति से भागते हुए दुनिया देखेगी !

अंत में , बढ़ा वजन घटाने के लिए !
-दिन में 12 गिलास पानी कम से कम पीना ही है !
-डिनर ७ -८ बजे तक और बहुत हल्का बिना रोटी चावल के !
कोई भी मीठी चीज नहीं खानी है ! मिल्क प्रोडक्ट कम करें !
-रोज आधा घंटा तेज वाक करें बिना हांफे , और आखिरी दो मिनट बिना हांफते हुए दौड़ कर समाप्त करें ! विश्वास रखें कि वे बहुत जल्द सामान्य पहले जैसे स्मार्ट होंगे ! शरीर आसानी से हर परिस्थिति में अभ्यस्त हो जाने में समर्थ है , रनिंग सिखने के साथ ही शरीर की ढेरों उम्र जनित बीमारियां डायबिटीज , बीपी , कब्ज ,दर्द आदि खुदबखुद गायब हो जायँगी ! 

Tuesday, February 16, 2021

45 वर्ष की उम्र में नीरसता क्यों -सतीश सक्सेना

उम्र बढ़ने के साथ नीरसता आनी ही है, मैं ऐसा नहीं मानता !  नीरसता की शुरुआत, जीवन में नयी रुचियों और अपनी इच्छाओं का गला घोटने से होती है और इसके पीछे के कारणों में प्रमुख , बढ़ी उम्र में सामाजिक वर्जनाएं , खुल कर हंसने में भय, अकेलेपन के
कारण आये आलस्य जनित बीमारियों द्वारा शरीर का अशक्त होना अधिक है ! हमारे समाज में, "सब लोग क्या कहेंगे" के दबाव से निकलना, डरपोक और भयभीत लोगों के लिए असम्भव बन जाता है ! 

समाज की नजर में, उम्र अधिक होने का अर्थ चुस्त और जीवंत डिज़ाइन के कपडे, मस्त उन्मुक्त हंसी, मनचाहे मित्रों और शौक को त्यागना होता है , उनके हिसाब से अधिक उम्र में ऐसा करना बेहूदगी होता है और अधेड़ अवस्था में तो यह अशोभनीय,  खासतौर पर तब यह और भी आवश्यक हो जाता है जब उनके बच्चे विवाह योग्य हो जाते हों ! सामाजिक परिवेश उन्हें मजबूर करता है कि वे बढ़ती उम्र में चुस्त दुरुस्त कपडे छोड़कर ढीले वाले कपडे , चप्पल और मोटा चश्मा लगाकर अखबार पढ़ें और पैरों पर हाथ लगाने वालों को हाथ उठाकर , धीमी आवाज में आशीर्वाद और वरदान देना शुरू करें और सबके मध्य ज्यादा बात न करें !

अधिकतर हमारे यहाँ जवान बच्चों की माँ और बहू /दामाद वाले पुरुषों को बूढ़ा मान लिया जाता है और इस नाते 45 वर्ष की भरपूर जवानी में औरतों को शालीन और 55 पार मजबूत पुरुषों को भी पापा जी बनना पड़ता है ! हर प्रकार की मित्रता चाहे वह कितनी शुद्ध और आवश्यक क्यों न हो , उनके लिए अशोभनीय बन जाती है ! उन्मुक्त हँसी का असमय छिन जाना उनके शरीर को असमय क्षरण की गारंटी देने में सहायक सिद्ध होता है !  

महिलाओं का और भी बुरा हाल है , उनकी युवावस्था पापा मम्मी की तीक्ष्ण नज़रों में कटती है और विवाह पश्चात पतिदेव की वर्जनाओं और सुरक्षा में, 40-45 होते होते बच्चे समझाने लगते हैं कि माँ किस साड़ी में अधिक ग्रेसफुल दिखती हैं उनके लिए माँ का चहकना ,हंसना अजीब लगने लगता है , खुलकर हंसने के लिए यह वयस्क लड़कियां जीवन भर तरसती हैं उनके पास एक ही जगह होती है जहाँ वे ठठ्ठा मारकर स्कूली दिनों जैसा हंस पाए जिस जगह उनके परिवार का कोई व्यक्ति दूर दूर तक न हो और वे ऐसा ही करती भी हैं बशर्ते वह क्षण किसी को पता नहीं चलने चाहिए !

हर घर में अपनी भूलों या गलतियों को छिपाना सबसे पहले सिखाया जाता है , बच्चों को कहा जाता है कि अपने घर की यह बात किसी और को नहीं बतानी है ! कोई भी रुका काम कराने का तरीका रिश्वत देना है चाहे वह सरकारी काम हो अथवा मंदिर , भगवान के दर्शन करने को गरीबों और रईसों के रास्ते अलग है , अधिक पैसा दो और साईं बाबा के दर्शन करें अधिक चढ़ावा देंगे तो फल भी

अधिक मिलेगा , दयनीय हाल बना दिया है हमने अपने समाज का और इसके जिम्मेदार हम अधेड़ावस्था के लोग ही हैं जो भुक्तभोगी होने के बावजूद, अपने ज़िंदा रहते, व्यवस्था परिवर्तन की कोशिश करते, युवाओं का मजाक बनाते हैं और उन्हें चोरी करने पर मजबूर करते हैं सो झूठ और चोरी करना हमारे व्यवहार का हिस्सा बन गया है हम एक बीमार अपराधी समाज का अंग बन कर रह रहे हैं और ऐसे ही मरना हमारी नियति है !

विश्व में विकसित देशों के मुकाबले हम कहीं नहीं ठहरते, वहां क्राइम और भ्रष्टाचार का नामोनिशान नहीं है , वे ईमानदार हैं , उम्रदराज हैं उनमें बीमारियों से कराहते लोग न के बराबर हैं , उनका वातावरण, हवा, शुद्ध और पीने के लिए बहती नदियों में स्वच्छ पानी उपलब्ध है उनके पास बड़ी खुली सड़कें और पक्की बस्तियां सैकड़ों वर्षों से हैं ,उनके यहाँ सामाजिक वर्जनाएं न के बराबर हैं , वहां राह चलती लड़कियों को कोई नहीं घूरता , अपने अभिन्न मित्रों के साथ , उन्मुक्त रूप से हंसने के लिए वे परिवार की और से भी मुक्त हैं और वे भरपूर खुशहाल जिंदगी गुजारते हैं ! यूरोपीय देशों में मैंने वाइन / बियर खरीदते अक्सर वृद्धाओं को देखा है वहीँ हमारे देश में ऐसा देखना पाप या अजूबा होता है और भीड़ लग जायेगी उनका चेहरा देखने के लिए ! 

अधिकतर महिलाएं और पुरुष बढ़ती हुई अवस्था में इसे घुटन से मुक्ति चाहते हैं , मगर उनकी हिम्मत नहीं है कि वे किसी को अपनी मित्रता का अहसास दिलाएं , मेरी कुछ महिला मित्रों ने इसे स्वीकार भी किया है, वे हंसना चाहती हैं मगर उनकी हिम्मत नहीं कि वे बेड़ियाँ तोड़ सकें यहाँ तक कि शुद्ध मित्रता आवाहन को स्वीकार कर सकें , उनके लिए पारिवारिक संबंधों से इतर, विपरीत सेक्स मित्रता स्वीकारना और हंसना मना है  चाहे वह मित्रता कितनी ही सहज और निश्छल क्यों न हो भयभीत महिलायें ऐसा सोंच भी नहीं सकतीं कि उनकी मित्रता परिवार से इतर हो अन्यथा बदनाम होने की गारंटी पक्की है !


चूँकि अधिकतर अविकसित देशों में, सत्ता पर बैठने वाले पुरानी मानसिकता में डूबे हुए अधेड़ या वृद्ध बैठे हैं जिन्होंने वर्जनाओं की भरमार पूरी उम्र झेली है और वे मानसिक तौर पर इसको तोड़ने में नाकामयाब रहे , नयी पीढ़ी के लिए वे अपने पुराने उसूलों की कानूनी जामा पहनाने में देर नहीं लगाते हैं और भयभीत युवा उन्हें तोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते इसी कारण पूरा विश्व दो भागों में विभक्त हो चुका है , अविकसित देश वाले समाज को, विकसित मस्तिष्क वाला समाज बनने में सैकड़ों वर्ष और तकलीफ भरा रास्ता तय करना होगा , पीढ़िया बीत जाएंगी खुलकर हंसना सीखने में , भयमुक्त समाज का नारा लगाएंगे मगर अर्थ समझने में उम्र गुजर जायेगी !
स्वस्थ शरीर को बनाने के लिए उन्मुक्त एवं बनावट मुक्त हंसना बेहद आवश्यक है , और फलस्वरूप स्वस्थ मस्तिष्क का मालिक , हमेशा जवान रह सकता है !

अंत में कुछ पंक्तियाँ पढ़ें ..

सज़ा मिले मानवता का , उपहास बनाने वालों को,
कुछ तो शिक्षा मिले काश, कानून बनाने वालों को !

अगर यकीं होता , मौलाना मरते भरी जवानी में ,
हूरें और शराब मिलेगी , ज़न्नत जाने वालों को !
 


Tuesday, July 28, 2020

टी विद अरविन्द कुमार -सतीश सक्सेना

हिंदी साहित्य में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो बिना किसी दिखावा शानशौकत के चुपचाप अपना कार्य करते हैं , उनमें ही एक बेहद सादगी भरा व्यक्तित्व अरविन्द कुमार का है जिनको मैंने जितना जानने का प्रयत्न किया उतना ही प्रभावित हुआ !
वे मेरठ पोस्ट  ग्रेजुएट  कॉलेज ऑफ़ मेडिकल साइंस में मेडिकल फिजिक्स में प्रोफेसर एवं हिंदी जगत में कहानीकार एवं कवि हैं !
अरविन्द कुमार हिंदी इंग्लिश के अलावा रशियन भाषा के जानकार हैं , आजकल वे हिंदी जगत के प्रख्यात लेखकों, कवियों, कहानीकारों और आलोचकों से लाइव वार्ता कर रहे हैं , उनके प्रसारण का नाम टी विद अरविन्द कुमार है और यह वार्ता फेसबुक पर प्रसारित होती है !
मेरी खुशकिस्मती है कि अरविन्द कुमार ने मुझे भी इस चाय के लायक समझा और आज शाम को अपने साथ चाय पर आमंत्रित किया है उनके साथ मुख्य विषय शारीरिक फिटनेस होगा साथ में एक दो गीत भी उनके अनुरोध पर प्रस्तुत किये जाएंगे !
आप सब आमंत्रित हैं इस चर्चा में शामिल होने के लिए  ...
आज दिनांक 28.07.2020 (दिन मंगलवार) की शाम 8.00 बजे
https://www.facebook.com/tkarvind
आभार  ..!!
कल दिनांक 28.07.2020 (दिन मंगलवार) की शाम 8.00 बजे मेरे बातचीत के मंच पर होंगे गीतकार और द फिटनेस मैं Satish Saxena जी। उनसे उनकी जीवन यात्रा, रचना यात्रा और उनके फिटनेस मंत्र के बारे में बातें होंगी। आशा है हमारी यह गुफ्तगू आप सभी मित्रों के लिए प्रेरणादाई होगी। आपसे गुजारिश है कि आप सभी इस बातचीत में सक्रिय भागीदारी निभाएं। हमारी यह बातचीत मेरे फेसबुक वॉल पर लाइव स्ट्रीम होगी जिसका लिंक मैं नीचे दे रहा हूं---
https://www.facebook.com/tkarvind
 — with Satish Saxena 

Saturday, June 27, 2020

मजबूत इच्छा शक्ति और कोरोना बचाव - सतीश सक्सेना

इस भयावह समय में अपने आप को व्यस्त रखना और मस्त रहना बेहद आवश्यक है , इससे जीवनी शक्ति में ताज़गी बनी रहती है , इस शक्ति के आगे कोरोना अपने आपको बहुत कमजोर पाता है और एक सामान्य फ्लू से अधिक नुकसान नहीं कर पाता !  अधिकतर लोग इसे बढ़ाने के लिए खाने पीने पर अधिक जोर देते हैं मगर मेरा अपना अनुभव इससे अलग है ! किसी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए उसका फुर्तीला और तनाव रहित होना आवश्यक है ! तनाव दूर करने के लिए आप अपने आपको वे नए शौक सिखाएं जिससे मन जवानों जैसा प्रफुल्लित रहे , हर  बीमारी के लिए दवा लेने न भागें और न खाएं अपनी शारीरिक शक्ति पर भरोसा रखना बहुत आवश्यक है , खुद पर भरोसा टूटने का अर्थ ही बुढ़ापे का आग़ाज़ है, बीमारियों की शुरुआत है !


बीमारियों से भय मुक्ति का एक सरल उदाहरण देता हूँ जो मेरा अपना है , पढ़ने में दिक्कत होने पर मेरी आँख में चश्मा आज से लगभग 30 वर्ष पहले लगा था , और उसके बाद मैंने लगभग १५ वर्ष तक विभिन्न शक्ति के ग्लासेस उपयोग किये और बाद में धीरे धीरे छोड़ दिया , आज ६५ वर्ष की उम्र में मुझे चश्मा लगाने की आवश्यकता केवल बहुत छोटे शब्द पढ़ने पर ही पड़ती है यह पोस्ट मैं बिना चश्मे के लिख रहा हूँ और मुझे कोई परेशानी नहीं होती मेरे घर में +1 से लेकर +3 तक के कम से कम 10 चश्में रखें हैं जो मैंने समय समय पर अपने लिए ख़रीदे थे , मैं हमेशा सोचता रहा हूँ कि आई ग्लास के आविष्कार से पहले भी लोग अंधे नहीं हो जाते थे वे बखूबी देख सकते थे हम लोग जिस सुविधा की आदत डाल लें वही हमारी आदत में शुमार हो जाता है ! 
मैं पिछले ३ माह से घर में बंद हूँ , और सरकार की और से सीनियर सिटीजन के लिए बाहर निकलना निषेध भी है मगर आज सुबह एक मित्र जिनका घर लगभग 12 km दूर है ,को होम्योपैथिक दवा देने जाने के लिए , कपडे पहनने लगा था कि उनका फोन आ गया कि अब वे स्वस्थ हैं और आप इतनी दूर आने की तकलीफ न करें !हालाँकि मुझे इस उम्र में यह डर नहीं था कि मुझे खतरा हो सकता है !

अधिकतर लोग कहते हैं कि इस उम्र में बीमारियां इतनी हैं कि हंसने की हिम्मत ही नहीं होती , मुझे भी ५ वर्ष पहले ऐसी ऐसी बीमारियां थीं जो मुझे भय के कारण आराम से सोने भी नहीं देती थीं मगर ज़िंदा रहने की तेज इच्छा के कारण उनकी उपेक्षा करना शुरू की और एक आलसी और कमजोर शरीर से एक लम्बी दूरी का धावक निकल कर बाहर आया जो लगातार तीन घंटे तक बिना रुके दौड़ता था इस करामात ने जो मजबूत आत्मविश्वास दिया उससे न केवल चेहरे की रौनक जवानों से अधिक बेहतर बन गयी बल्कि मैं अपनी जवान शक्ति को महसूस भी करने लगा था  और मैं वाकई हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया !!

जबरदस्त आत्मविश्वास और जवान इच्छा शक्ति आपकी उम्र बढ़ाने के लिए , और बीमारियों का आपके शरीर से नामोनिशान मिटाने के लिए काफी है दोस्त आप अपनी प्रतिरक्षा शक्ति पर यकीन तो करें !

एक कविता ऐसे ही किसी मस्त समय में लिखी है हालांकि मेरी उम्र के लोगों को यह कविता पसंद नहीं आएगी , इसे बेहद दोस्ताना अन्दाज़ में लिखा गया है और वे इसके आदी नहीं हैं , 50 वर्ष से ऊपर के लोग बच्चों की तरह हंसने में असहज होते हैं उन्हें सिर्फ सम्मान चाहिए और वह भी सभ्यता के साथ और जीर्ण शरीर और बुढ़ापा भी यही चाहते हैं !

शाब्बाश बुड्ढे ! यू कैन रन ! 
तवा बोलता छन छन छन !

सारे जीवन काम न करके
तूने सबकी वाट लगाईं !
ढेरों चाय गटक ऑफिस में
जनता को लाइन लगवाई !
चला न जाना अस्पताल में
बेट्टा , वे पहचान गए तो
जितना माल कमाया तूने
घुस जाएगा डायलिसिस में
बचना है तो भाग संग संग
रिदम पकड़ कर छम छम छम ,
शाब्बाश बुड्ढे यू कैन रन !

जब से उम्र दराज बने हो 
सबके आदरणीय बने हो
सारी दुनिया के पापों को
खुलके आशीर्वाद दिए हो !

इस सम्मान मान के होते
देह हिलाना भूल गए हो
पिछले दस वर्षों से दद्दू
छड़ी पकड के घूम रहे हो
आलस तुझको खा जाएगा
फेंक छड़ी को रन,रन,रन , शाब्बाश बुड्ढे यू कैन रन !

साठ बरस का मतलब सीधा
साठ फीसदी ताकत कम
ह्रदय बहाए खून के आंसू
बरसे जाएँ झम झम झम
चलना फिरना छोड़ा कब से
घुटने रोते , चलते दम !
साँसें गहरी, भूल चुका है
ऑक्सीजन पहले ही कम
अभी समय है रक्ख भरोसा
गैंग बना कर धम धम धम , शाब्बाश बुड्ढे, यू कैन रन !


डायबिटीज खा रही तुझको 
ह्रदय चीखता, जाएगा मर
सीधा साधा इक इलाज है
उठ खटिया से दौड़ने चल
आधे धड़ को पैर मिले हैं
उनको खूब हिलाता चल
ताकतवर शरीर होगा फिर
मगर तभी जब, मेहनत कर
सब देखेंगे जल्द , करेंगे
दुखते घुटने, बम बम बम , शाब्बाश बुड्ढे यू कैन रन !

Tuesday, October 1, 2019

काश कर सकें, पर फैलाकर विचरण अन्य जहान के -सतीश सक्सेना

और अब यह बेहद आसान है अगर दो वर्ष में आप एक बार घर से दूर घूमना चाहते हैं तो कम खर्चे में आप
जर्मनी, चेकिया या रोम जा सकते हैं और निश्चित ही यह आपके या परिवार के लिए उत्साहवर्धक एवं आत्मविश्वास बढाने में कामयाब होगा ,बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि यूरोप जाना उतना ही सस्ता होता है जितना अपने देश में अंडमान निकोबार अथवा गोवा जाकर एक सप्ताह की मस्ती करना !  
मान लीजिये आपको म्युनिक जर्मनी जाना है तो सबसे पहले कुछ चिंताएं पैदा होंगीं जैसे भाषा कैसे समझेंगे और समस्याएं क्या आएँगी !भाषा के नाम पर हमें बिलकुल परवाह नहीं करनी चाहिए पूरे यूरोप में टूटी फूटी इंग्लिश बोली जाती है व् समझी जाती है ! ग्रीक , इटालियन,जर्मन, फ्रेंच,डच , स्पेनिश , पोलिश एवं अन्य प्रांतीय भाषाएँ बोली जाती हैं ! वहां के लोग टूरिस्ट के लायक टूटी फूटी इंग्लिश और कई जगह बेहतर इंग्लिश धड़ल्ले से बोलते हैं ! और यह वाकई इंटरेस्टिंग होता है जब वे ,भारतीय अम्मा जी को भी इंग्लिश में समझाने में अक्सर कामयाब रहते हैं !

विदेश यात्रा के लिए निम्न तैयारी आवश्यक है , अगर डाक्यूमेंट्स पूरे हों तो वीसा मिलने में लगभग 15 दिन लगते हैं !
  1.  पासपोर्ट जिसकी वैलिडिटी लगभग छह माह बची हो !
  2. वीसा जर्मनी का , वीसा विदेशी दूतावास की एक मुहर है जो आपके पासपोर्ट को विशेष देश आने  की अनुमति देता  है ! और यह मुहर आपके पासपोर्ट पर वह देश लगाता है जहाँ आप भ्रमण के लिए जा रहे हैं ! वह देश आपको अपने देश आने की अनुमति कुछ विशेष जानकारियों के लेने के बाद देता है ! यूरोपियन यूनियन की ख़ास बात है कि आप जर्मनी वीसा अप्लीकेशन पर पूरे 26 देशों का भ्रमण कर सकते हैं ! इसे शेंगेन वीसा कहते हैं , इसे अप्लाई करने से पहले निम्न  डाक्यूमेंट्स आवश्यक हैं !
  3. कन्फर्म फ्लाइट टिकट आने व् जाने का 
  4. इन्हीं दिनों होटल या मित्र के यहाँ ठहरने का कन्फर्मेशन ( रूपये 3000 से 5000 प्रतिदिन ) 
  5. उपरोक्त दिनों के ट्रेवल के लिए आपका हेल्थ ट्रेवल बीमा 
  6. आपका बैंक अकाउंट डिपाजिट , लास्ट तीन महीने का  जिससे यह सुनिश्चित हो की आप अपना खर्चा करने में समर्थ हैं ! ( 50 से 60 यूरो प्रतिदिन के हिसाब से ) लगभग २ लाख रुपए हों  तो अच्छा है ! 
  7. तीन माह की सैलरी स्लिप्स अगर आप नौकरी कर रहे हों 
  8. एम्प्लायर का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट 
  9. लास्ट ३ वर्ष की इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी 
  10. वीसा फीस की रसीद 
  11. उपरोक्त डाक्यूमेंट्स के साथ वीसा एप्लीकेशन , वीसा रसीद के साथ ( Rs 4500 ) 
  12. कवरिंग लेटर जिसमें आप कारण लिख कर देंगे और साथ में आप अपनी टिकट एवं रुकने की डिटेल देंगे  ! 
  13. चेकलिस्ट यह रही 
उपरोक्त डाक्यूमेंट्स तैयार होने के बाद आपको  VFS global में एप्लीकेशन सबमिट करना है जो बेहद आसान है ऑनलाइन एप्लीकेशन भरिये , जमा करिये तथा अपॉइंटमेंट लीजिये ताकि आप पासपोर्ट  व उपरोक्त डाक्यूमेंट्स  सबमिट कर सकें ! अगर आप पहली बार यूरोप जा रहे हैं तब आपके फिंगर प्रिंट्स स्कैन होंगे !
फीस जमा होगी तथा डाक्यूमेंट्स रिसिप्ट  आपको दे दी जाएगी ! कुछ दिन में पासपोर्ट वीसा का ठप्पा लगाए कूरियर द्वारा आपके दरवाजे पर पंहुच जाएगा !

क्रमश  ...
टिकट एवं होटल रिजर्वेशन ,एयरपोर्ट फॉर्मेलिटी ,पैकिंग एवं सावधानी 




Tuesday, July 16, 2019

भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा - सतीश सक्सेना

जो लोग बरसों से बिना पसीना बहाये, ऐयरकंडीशनर ऑफिस में काम करने के आदी हो गए हैं उन्हें यह जान लेना चाहिए कि उनके शरीर की मसल्स, फेफड़ों के नियमित कार्य , धमनियों में रक्त संचार , हाथ, पैरों, रीढ़, कमर, घुटनों व शरीर के अन्य महत्वपूर्ण जॉइंट्स, बेहद धीमी गति से चलने के आदी हो चुके हैं और बरसों से पड़ी उनकी इस आदत के फलस्वरूप शरीर ने अपने अंदर समयानुसार कुछ स्वाभाविक बदलाव भी किये हैं जिनके कारण विभिन्न प्रकार के दर्द एवं बीमारियां उत्पन्न हुई हैं ! और यह स्थिति अपने शरीर के महत्वपूर्ण अवयवों का उपयोग न करने के कारण पैदा हुई है ! आज पहली बार मैं आपका ध्यान आकर्षण उन अवयवों के बारे में करना चाहता हूँ जिनकी स्थिति पर अपने कभी गौर ही नहीं किया और उनकी दुर्दशा कर दी 
जरा गौर करें कि  ... 
  • आपके फेफड़ों का कार्य बेहद जटिल हैं, वे बाहर की हवा को अंदर खींचकर उसमें से ऑक्सीजन अलग कर रक्त में मिलाने के लिए आगे पम्प करते हैं और बची हुई कार्बन डाई ऑक्साइड को शरीर के बाहर निकालते हैं , उनका एक अन्य महत्वपूर्ण काम आपको आवाज देने के लिए हवा की सप्लाई करना भी है ! आप गहरी साँस खींचकर अंदर भरी हुई हवा का अनुमान लगाइये , इस हवा को समाने की क्षमता लिए हैं हमारे फेफड़े मगर अब आप सामान्य सांसे
    लीजिये जिसके आप आदी हैं आप महसूस करेंगे कि आपके फेफड़े सिर्फ 10 प्रतिशत क्षमता पर ही कार्य कर रहे हैं ! इसका मतलब यह भी हुआ कि  जितनी ऑक्सीजन आपके शरीर के लिए मिलनी चाहिए आप उसकी 90 प्रतिशत कम सप्लाई दे रहे हैं , मानवीय शरीर हर परिस्थिति के हिसाब से आसानी से अपने आपको ढाल लेता है और इस कमी के बावजूद भी आपका शरीर चलता रहता है ! जब आप रनिंग जैसी एक्सरसाइज करते हैं तब यही फेफड़े शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन देने के लिए बहुत तेजी से हवा खींचते व् हृदय में पम्प करते हैं बदकिस्मती से उनकी यह क्रिया आपके आरामतलबी के कारण बहुत कम हो गयी है और फलस्वरूप आपका खून गाढ़ा और बिना ऑक्सीजन के काम करने को मजबूर है ! हृदय की तमाम आधुनिक बीमारियां इसी कारण हैं !
  • प्रौढ़ावस्था में जॉइंट दर्द की शिकायत अधिकतर लोगों में मिलती है , शरीर में सैकड़ों जॉइंट्स हैं और यह चलते रहने से यह हमेशा सुचारु रूप से काम करते रहते हैं उम्र चाहे कोई हो ! अगर आप लगातार मूवमेंट करते हैं तो ऑटो लुब्रिकेशन के जरिये हड्डियों के जोड़ों में चिकनापन बना रहता है मगर जॉइंट मूवमेंट बंद करते ही उनमें ब्लड के जरिये रुकावटें जमा होना शुरू हो जाती हैं फलस्वरूप जकड़न के कारण दर्द होता है ! यहाँ डॉक्टरों की सलाह होती है कि आराम करें , जिससे वे और जकड जाते हैं !
  • विश्व में कार्डिओवेस्कुलर डिजीज, मृत्यु का सबसे बड़ा कारण माना जाता है , लगभग 30 प्रतिशत मृत्यु सिर्फ इसी से  होती हैं ! अधिक वजन होना , मेहनत न करना , हाई ब्लड प्रेशर , बढ़ी हुई डायबिटीज , स्मोकिंग , हाई कोलेस्ट्रॉल , बेहतरीन हृदय को रोक देने के लिए काफी हैं !
  • विश्व के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट इस बात को स्वीकार करते हैं कि हृदय रोग और डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण मेहनत कम करना है, पूरे दिन बैठे रहकर काम करने वालों को यह बीमारियों अधिक होती हैं , डायबिटीज ग्रस्त लोगों को हृदय रोग का ख़तरा दूसरों के मुकाबले और अधिक होता है ,अगर इंसान अपनी आदतें बदलकर पसीना बहने तक की मेहनत करना सीख ले तो इन बीमारियों पर विजय आसानी से पा सकता है !
एक बार अगर ऑपरेशन थियेटर में पंहुच गए तो फिर पूरे जीवन के लिए डॉक्टरों के चक्कर लगाते रहने और रोज दवाएं खाने के अलावा और कोई चारा नहीं , इंसान मेडिकल व्यवसाइयों के गिरफ्त से निकल ही नहीं सकता !अपने जीवन की पूरी कमाई
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है बुड्ढा ६५ साल का 
इनको जाते असहाय सा देखता रहता है ! इन खतरनाक बीमारियों में परिवार को मृत्युभय दिखाया जाता है अतः वे तुरंत ऑपरेशन टेबल पर पंहुच जाते हैं ! 
शायद ही किसी डॉ ने यह सलाह दी हो कि आप धीमे धीमे रोज व्यायाम करना शुरू करें लगभग एक वर्ष में एक से दो घंटे लगातार मेहनत करना आते ही यह बीमारियां आपके पास से भाग जाएंगी !

इन सब बीमारियों की भगाने की एक दवाई आप खुद को रनिंग करना सिखाइये मगर ध्यान रहे कि रनिंग का अर्थ तेज दौड़ना नहीं होता बल्कि धीमे धीमे बिना हांफे दौड़ते हुए अपने शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण अवयवों में झंकार पैदा करना होता है जो रनिंग द्वारा आसानी से संभव है ! जब आप भागते हैं तो हर गिरते कदम द्वारा जमीन पर आपके शरीर के वजन का तीन गुना इम्पैक्ट होता है उससे पूरे बॉडी कोर एवं दिमाग तक जो कम्पन की लहरें उठती हैं वह किसी भी बीमारी को दूर भगाने को काफी हैं ! फेफड़ों से शुरू होकर हृदय, किडनी, लिवर, पेन्क्रियास, एब्डोमेन , बॉडी मसल्स , बोन जॉइंट्स , नर्व एवं टिश्यू सबको एक लय में वायब्रेशन मिलता है और हमारा शरीर अधिक फ्रेश महसूस करता है , अधिक ऑक्सीजन पाकर खून स्वच्छ एवं पतला होता है , यह क्रियाएं हम सिर्फ बचपन और जवानी में महसूस करते हैं , बुढ़ापा आराम करते हुए काटने की कोशिश करते हैं कि अब यह काम हमारे लिए संभव नहीं अतः अंत समय अधिक बुरा भुगतते हैं !

अतः मित्रों को चाहिए .. 
-अब हमारी उम्र हो गयी है यह कहना बंद करें और वृद्धावस्था को जड़ से नकारें , हर काम में हाथ डालें जो मजबूत शरीर के साथ करते थे !
-रनिंग सीखना शुरू करें ध्यान रहे रनिंग का अर्थ गति नहीं होता एवं बिना हांफे मुस्कराते हुए दौड़ना सिखाएं अपने शरीर को और याद रहे यह ट्रेनिंग तब पूरी माने जब सुबह ठण्ड के दिनों में ठीक पांच बजे उठकर खुद से कह रहे हों कि उठ बच्चे दौड़ने चलना है  और अगर मन बहाना बनाये तो खुद को कठोर सजा भी दें जैसे क्लास में मिलती थी !
मंगलकामनाएं कि हम सब असमय न जाएँ !!

बढ़ी उम्र में , कुछ समझना तो होगा !
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !

उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें 

भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !

सस्नेह  

Monday, July 15, 2019

प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाकर, भय से मुक्ति पाइये - सतीश सक्सेना

भारत में आजकल लगभग 40 डिग्री टेम्प्रेचर है और एक नए बने रनर ट्रेनी के लिए इस गर्मी में, लम्बी दूरी दौड़ना केवल एक भयावह सपना होता है , पिछले माह जब मैं जर्मनी आया था तब अगले दिन ही यहाँ के ठन्डे मौसम में, इसार नदी के किनारे दौड़ते दौड़ते कब 21 km पूरा कर लिया पता ही नहीं चला जबकि अपने देश में पिछले 4 महीने में मेरा कोई भी ट्रेनिंग रन 21 km के आसपास भी न था ! यहीं एक उदाहरण और देना चाहूंगा 18 जून को अकेले दौड़ते हुए मैंने यह रन बेहद मस्ती और आराम से पूरा किया था जबकि इससे पूर्ववर्ती कई हाफ मैराथन मैंने पूरी ताकत लगाकर दौड़ते हुए भी लगभग इसी समय में पूरे किये थे जबकि शरीर थक कर चूर हो जाता था ! आश्चर्य यह है कि जब भी मैं बिना किसी तनाव के आराम से दौड़ने निकलता हूँ उस दिन गति अधिक ही आती है और मेरा शरीर और मन बिलकुल नहीं थकता !


मुझे ख़ुशी है कि मैं दौड़ के सहारे अपने तथाकथित वृद्ध शरीर का कायाकल्प करने में सफल रहा , आज उन दसियों बीमारियों में से एक भी शेष नहीं बची जिनसे मैं एक समय चिंतित रहा करता था और या सफलता मुझे 60 वर्ष से 64 वर्ष के मध्य मात्र दौड़ना सीख पाने से मिली ! जो व्यक्ति अपने साठ वर्षों में कभी दस मीटर भी न दौड़ा हो वह सिर्फ एक वर्ष के अभ्यास के बाद 21 km लगातार दौड़ने में सक्षम हुआ है एवं बीमारियां कहाँ गायब हुईं यह पता ही नहीं चला !

दौड़ना स्वस्थ शरीर के लिए एक बेहद आवश्यक क्रिया है जिसके द्वारा, शरीर की आंतरिक प्रतिरक्षा शक्ति, शरीर के विभिन्न
अवयवों को वाइब्रेट कर स्फूर्ति प्राप्त करती है ! दुर्भाग्य से आज के समय में बेहतरीन विद्वान भी इस विषय (मानवीय  प्रतिरक्षा शक्ति) को अछूता छोड़े हुए हैं और भौतिक सुख सुविधाओं का उपयोग, अपने शरीर को आराम देने में प्रयुक्त कर रहे हैं !

आज हमारे देश में, 50 वर्ष के आसपास का हर चौथा व्यक्ति हार्ट आर्टरीज़ की रूकावट का शिकार है एवं हर तीसरा व्यक्ति डायबिटीज का शिकार है और ऐसे समय में इसके निदान के लिए मेडिकल व्यवसायी आगे आते हैं ,उनके एजेंट्स, डॉक्टरों के जरिये संभावित असामयिक मृत्युभय के कारण आम व्यक्ति को समझाने में आसानी से कामयाब हैं कि जान जाने से बचने के लिए, उनके पास कितने तरह के केमिकल एवं ऑपरेशन उपलब्ध हैं जिनके सेवन से आपको हृदय रोग से बचाव होगा। ... 

वे यह कभी नहीं बताते कि इन दवाओं के सेवन से आपकी किडनी कितने दिनों में आधे से अधिक बर्बाद हो जायेगी और फिर उसकी दवा भी पुराने केमिकल्स (तथाकथित दवा) के साथ खानी होगी !

वे यह कभी नहीं बताते कि मात्र नियमित दौड़ना सीखने से ही आप बिना किसी साइड इफक्ट्स के आप आर्टरीज को साफ़ कर पाएंगे एवं डायबिटीज कभी पास नहीं आ पाएगी !

वे यह कभी नहीं बताते कि पैरों का उपयोग किये बिना आप अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को बेहद कमजोर कर रहे हैं और बीमारी रहित मजबूत मानव जीवन के लिए रोज कम से कम 10 kmचलना व् दौड़ना बेहद आवश्यक है !

वे यह कभी नहीं बताते कि मात्र दौड़ने के नियमित अभ्यास से आपके हृदय आर्टरीज़ में जमा रक्त के थक्के समाप्त हो सकते हैं !

वे यह कभी नहीं बताते कि मेडिकल साइंस अभी खुद शैशव अवस्था में है और मेडिकल कॉलेज बरसों से पुराना ज्ञान ही पढ़ाते रहते हैं ऑपरेशन करते समय कई बार डॉक्टर्स को यह पता ही नहीं होता कि इस नए लगे चीरे से क्या क्या कट गया और उसका असर क्या होगा !

वे कभी नहीं बताएँगे कि जंग लगे घुटनों से चलने में दर्द तो होगा मगर यह प्रयत्न करना छोड़ें नहीं एक दिन यह घुटने मजबूत जोड़ वाले घुटनों में बदल जाएंगे हाँ वे सब यह अवश्य बताते हैं कि बढ़ी उम्र में आपके घुटने के कार्टिलेज डैमेज हो गए हैं , अब उनका उपयोग कम करें ! 

वे यह कभी नहीं बताते कि  अपने परिवार में वह दवाएं कभी नहीं देते जो वे अपने मरीजों में धड़ल्ले से बांटते हैं !
वे यह कभी नहीं बताते कि उन्हें हर रेकमेंडेड टेस्ट से लगभग 50 प्रतिशत पैसा कमीशम में बापस मिलता है !
वे यह भी नहीं बताते कि अधिकतर लैब टेस्ट, टेबल पर बैठकर बिना टेस्ट किये , सिग्नेचर कर जारी किये जाते हैं !
वे यह भी नहीं बताते कि लैब्स के पास रोज आये सैकड़ों सैंपल टेस्ट करने की क्षमता, उपकरण एवं तकनीशियन लैब में होते ही नहीं !
हजारों तरह के एड हम रोज देखते हैं , कोई एड यह नहीं बताता कि हम अपने शरीर में दौड़ने की आदत विकसित कर 60 वर्ष की उम्र के बाद भी कायाकल्प करने में समर्थ हो सकते हैं  एवं बड़ी उम्र में भी शरीर से अनावश्यक क्षरण को रोकना संभव है !

वे कहेंगे कि आपकी उम्र अब इस योग्य नहीं कि हैवी व्यायाम करने का प्रयत्न करें वे कभी नहीं बताएँगे कि आप धीमे धीमे हलके व्यायाम करते हुए अपने शरीर को मेहनत करने की आदत डालें और यकीन रखें कि आप भी कुछ वर्षों में युवकों जैसा व्यायाम कर पाने में समर्थ होंगे ! धीमे धीमे व्यायाम करते हुए एक आध वर्षों में आपके जीर्णशीर्ण अवयव पहले बीमारी मुक्त होंगे और बाद में अपनी पूरी शक्ति के साथ नए ऊतकों के साथ आपके शरीर को नया अनुभव देने में समर्थ होंगे !

ये सब एक ही बात कहते हैं कि यह दवाएं खाइये आप स्वस्थ होंगे और दवाओं से पहले उसे बीमारी से संभावित खतरे जो मौत की और ले जाते हैं को खूब घंटे बजाकर बताया जाता है ताकि उस अस्वस्थ व्यक्ति के विचार को इतना शून्य और क्षतिग्रस्त कर दिया जाए कि वह इन दवाओं की शरण से अपनी पूरी जिंदगी में निकलने के बारे में कभी सोंच भी न सके !

इस लेख का उद्देश्य उपरोक्त तथ्यों पर आपका ध्यान दिलाना है ताकि आप उचित फैसले ले सकें !

Thursday, May 9, 2019

जीवन चलने का नाम -सतीश सक्सेना

नमस्ते सर , अजय कुमार बोल रहा हूँ  ...कल सुबह आपके साथ दौड़ने का मन है, जहाँ कहें वहां आ जाऊंगा ...
मेरे साथ अजय कुमार दौड़ेंगे ? क्यों बुड्ढे का मजाक बना रहे हो यार  ...?  और वाकई अजय सुबह सवा पांच बजे फरीदाबाद से चलकर मेरे घर के दरवाजे पर थे !


अजय कुमार NCR के जबरदस्त रनर्स में शुमार होते हैं , और वे अक्सर अल्ट्रा रन में भाग लेते हैं , उनका मैं प्रशंसक इसलिए हूँ कि वे कम उम्र में ही हैवी डायबिटीज के शिकार हुए और उन्होंने दौड़ना शुरू करके उसे हराने में कामयाबी प्राप्त की , आज वे एक सफल धावक हैं और 50 km की शानदार दौड़ लगाने में कामयाब हैं !
अजय कुमार एक बेहतरीन चित्रकार भी हैं और उनकी प्रदर्शनी भी लग चुकी हैं , उनका एक चित्र कमेन्ट लाइन में देखिएगा !

आज के बुरे समय में जब इंसान अपने शरीर का उपयोग ही भूल चूका है , अपने शरीर के प्रति जागरूक रहना बेहद आवश्यक है ! अक्सर रिटायरमेंट उम्र होने के आसपास ही अपने मित्रों की मृत्यु की खबर सुनना आम बात हो गयी है और यह अक्सर हार्ट अटैक से होती हैं , अधिकतर यह साथी उस समय ओवरवेट और डायबिटीज , ब्लडप्रेशर के रोगी होते हैं ! अपने मित्रों की मौत की खबर सुनकर हम सिर्फ एक शब्द ही कहते हैं कि यह भी कोई उम्र थी जाने की , और अगले दिन घर में मीठी स्वादिष्ट इलायची पड़ी चाय के साथ आलू परांठे खा रहे होते हैं !


मुझे बेहद अफ़सोस तब होता है कि अक्सर असमय जाने  वाले लोग बेहतरीन प्रभामंडल युक्त होते हैं जिनके आसपास जी हजूरी तथा हाँ जी हाँ जी कहने वालों की भीड़ होती है और यह गुरु गौरव के साथ, तमाम सामाजिक उपयोग का विशुद्ध ज्ञान भी, नियमित बाँटते रहते हैं , ऐसे विद्वान भी अपने शरीर की चीत्कार सुनने में असमर्थ होते हैं और उसका एकमात्र कारण आलस्य तथा जीभ पर कंट्रोल न करना मात्र है जिसके कारण वे अपने नजदीक आती हुई निश्चित मृत्यु की आहट को सुनने में विफल रहते हैं !

मैं जब आलस्य से घिरता हूँ तब अजय कुमार जैसे कम साधन युक्त लोगों से सबक और शक्ति लेता हूँ , जो अकेले बिना किसी दवा के डायबिटीज को हारने में कामयाब हुए हैं अवसाद युक्त क्षणों में भी अक्सर मैं उन्हें हँसते देखता हूँ तब मुझे उनसे शक्ति मिलती है ! 



Monday, April 15, 2019

कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना -सतीश सक्सेना

इस हिन्दुस्तान में रहते, अलग पहचान सा लिखना !
कहीं  गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना !
दिखें यदि घाव धरती के तो आँखों को झुका लिखना 
घरों में बंद, मां बहनों पे, कुछ आसान सा लिखना !

विदूषक बन गए मंचाधिकारी , उनके शिष्यों के ,
इन हिंदी पुरस्कारों के लिए, अपमान सा लिखना !

किसी के शब्द शैली को चुरा के मंच कवियों औ ,
जुगाड़ू गवैयों , के बीच कुछ प्रतिमान सा लिखना !

अगर लिखने का मन हो तड़पते परिवार को लेकर
हजारों मील पैदल चल रहे , इंसान पर लिखना !

तेरी भोगी हुई अभिव्यक्ति , जब चीत्कार कर बैठे
बिना परवा किये तलवार की, सुलतान सा लिखना !


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