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Wednesday, July 20, 2022
Saturday, September 25, 2021
पता नहीं क्यों खाते पीते, ज्ञान की बातें, होती हैं -सतीश सक्सेना
डी पी एस ग्रेटर नॉएडा के, एक क्षात्र, रानू , जो कि, पढने लिखने में बहुत अच्छे होने के साथ साथ, खाने पीने में, भी मस्त हैं, के मन की बातें यहाँ दे रहा हूँ ! जब भी हम सब साथ साथ , खाने पर एक साथ बैठते तो बच्चों से उनके भविष्य की चर्चा तथा क्लास में उनकी पोजीशन की चर्चा जरूर होती ! स्वादिष्ट खाने के समय , पढाई की चर्चा , उनके मुहं का टेस्ट बदलने के लिए काफ़ी होती है !
ग्रामर लेकर , बैठा हूँ !
जैसे तैसे रसगुल्लों से ,
ध्यान हटाए , बैठा हूँ !
मगर ध्यान में बार बार,
ही आतिशबाजी होती है !
अलजब्रा के ही खिलाफ
क्यों नारे बाजी होती है !
नाना,पापा की बातें सुन ,
नींद सी आने लगती है !
इतने बढ़िया मौसम में,एक्जाम की बातें,होती हैं !
समझ नहीं आते बच्चों के
कष्ट , समस्याएं भारी !
पढ़ते, अक्षर नजर न आएं
दिखे किचन की अलमारी !
इतने बढ़िया मौसम में,एक्जाम की बातें,होती हैं !
समझ नहीं आते बच्चों के
कष्ट , समस्याएं भारी !
पढ़ते, अक्षर नजर न आएं
दिखे किचन की अलमारी !
टीवी पर कार्टून, यहाँ
भूगोल की बाते होती हैं
खाने पीने के मौसम मे,
दुःख की बातें, होती हैं !
फीस बढ़ा ले भले प्रिंसिपल
पर बच्चों की क्लासों में !
चॉकलेट लडडू फ्री होंगे
आने वाले , सालों में !
कठिन गणित का प्रश्न क्लास
में, मैडम जब समझाती हैं !
उसी समय क्यों याद हमारे,
मीठी बातें , आती हैं !
खाने पीने के मौसम मे,
दुःख की बातें, होती हैं !
ग्रेट खली,इंग्लिश ग्रामर,
में हर दम कुश्ती होती है !
जाने क्यों घर में हर मौके,क्लास की बातें होती हैं ?
पर बच्चों की क्लासों में !
चॉकलेट लडडू फ्री होंगे
आने वाले , सालों में !
कठिन गणित का प्रश्न क्लास
में, मैडम जब समझाती हैं !
उसी समय क्यों याद हमारे,
मीठी बातें , आती हैं !
बिना जलेबी और समोसा
कैसे मन भी पढ़ पाए
सारे अक्षर गड्मड होते , खाली आंतें रोती हैं !
हाथ में बल्ला लेकर जब मैं
याद सचिन को करता हूँ,
ध्यान लगा के उस हीरो का
सीधा छक्का जड़ता हूँ !
मगर हमेशा अगले पल
ये खुशियां भी खो जाती हैं !
पता नहीं , जब ध्यान
हमारे कृष्णा मैडम आतीं हैं !
ऐसे मस्ती के मौके, क्यों
सारे अक्षर गड्मड होते , खाली आंतें रोती हैं !
हाथ में बल्ला लेकर जब मैं
याद सचिन को करता हूँ,
ध्यान लगा के उस हीरो का
सीधा छक्का जड़ता हूँ !
मगर हमेशा अगले पल
ये खुशियां भी खो जाती हैं !
पता नहीं , जब ध्यान
हमारे कृष्णा मैडम आतीं हैं !
ऐसे मस्ती के मौके, क्यों
याद सजा की आती है !
अक्सर घर में खाते पीते, ज्ञान की बातें, होती हैं !
Tuesday, August 31, 2021
कौन मनाये जन्माष्टमी, कृष्ण कन्हैया चला गया -सतीश सक्सेना
कौन मनाये जन्माष्टमी, किशन हमारा चला गया !
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| 16 Feb 1968 -25 August 2021 |
सबका हाथ बटाते मोहक आँखों वाला चला गया !
इतने लोगों के रहते भी , कैसी किस्मत पायी थी,
बहिनों के रक्षाबंधन पर, सबसे प्यारा चला गया !
सबकी कड़वी बातें सुनकर एक शब्द न कहता था
सबको रोता छोड़ अकेला राज दुलारा चला गया !
राजकुमारों जैसा बचपन , लेकर किस्मत पायी थी
चुपके से घरबार छोड़कर आँख का तारा चला गया !
जहाँ बैठता रौनक लाता था हर शख्श के चेहरे पर
रोता छोड़ अँधेरे सबको , इक ध्रुव तारा चला गया !
Sunday, August 30, 2020
अरसे के बाद मिले जाना,इतने निशब्द,नहीं मिलते -सतीश सक्सेना
जाने कितने ही बार हमें, मौके पर शब्द नहीं मिलते !
अहसासों के आवेगों में जिह्वा को शब्द नहीं मिलते !
अहसासों के आवेगों में जिह्वा को शब्द नहीं मिलते !
सदियों बीतीं हैं यादों में , क्यों मौन डबडबाईं आँखें
अरसे के बाद मिले जाना, इतने निशब्द, नहीं मिलते !
उस दिन घंटों की बातें भी मिनटों में कैसे निपट गयीं
मिलने के क्षण जाने कैसे मनचाहे शब्द नहीं मिलते !
उस दिन घंटों की बातें भी मिनटों में कैसे निपट गयीं
मिलने के क्षण जाने कैसे मनचाहे शब्द नहीं मिलते !
कितना सब कहना सुनना था, पर वाणी कैसे मौन रहीं
दुनिया के व्यस्त बाज़ारों में, इतने अशब्द नहीं मिलते !
हर बार मिले तो आँखों की भाषा में ही प्रतिवाद किये
दुनिया के व्यस्त बाज़ारों में, इतने अशब्द नहीं मिलते !
हर बार मिले तो आँखों की भाषा में ही प्रतिवाद किये
कैसे भी अभागे हों जाना , इतने प्रतिबद्ध नहीं मिलते !
Tuesday, May 7, 2019
क्या जानों सरकार हमारे बारे में -सतीश सक्सेना
क्या समझे हो यार हमारे बारे में !
इसीलिये अब, तुमसे दूरी रखते हैं
दिल न दुखे सरकार,हमारे बारे में !
हमको रोज परिंदे ही बतला जाते
कितने हाहाकार , हमारे बारे में !
जो वे चाहें करें फैसला,किस्मत का
है उनका अधिकार, हमारे बारे में !
मरते दम तक तुम्हें नहीं समझायेंगे
कितने गलत विचार हमारे बारे में !
Tuesday, February 26, 2019
६५ वर्ष में फ़िटनेस उम्र 52 वर्ष -सतीश सक्सेना
जीपीएस वाच मेरी एक्टिविटी रिकॉर्ड करती है , उसके एप्प टॉमटॉम स्पोर्ट्स के अनुसार 65 वर्ष की उम्र में, मेरी फ़िटनेस ऐज 52 वर्ष है जबकि पिछले वर्ष फिटनेस ऐज 47 वर्ष थी , इसका अर्थ है कि मैंने पिछले वर्ष की तुलना
में इस वर्ष कम एक्टिविटी की हैं नतीजा एक वर्ष में 5 वर्ष उम्र बढ़ गयी , पिछले चार माह से दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारण, सुबह दौड़ना केवल नाममात्र को ही रहा, आज भी सुबह आरामदेह कम्बल से दुखी मन तभी निकला जब खुद को ढेरों गालियाँ देनी पड़ीं !
इतिहास गवाह है कि सफलता मानव को पागल बना देती है, वह अपने किये हर काम को श्रेष्ठ मानना शुरू कर देता है , हम सब भी धन और सम्मान पाते ही उसका अनजाने में दुरुपयोग शुरू कर देते हैं , धन का उपयोग सबसे पहले आराम करने में लगाते हैं , सुख सुविधाओं के होते सबसे अधिक ह्रदय रोग और डायबिटीज (शाही रोग) धनवान और सम्मान सज्जित लोगों को ही होते हैं , मैंने आजतक एक भी मेहनतकश व्यक्ति को ह्रदय रोग से मरते नहीं सुना और न उसे डायबिटीज हुई जबकि चीनी भी वह सबसे अधिक खाता रहा ,इन बीमारियों का शिकार सबसे अधिक सम्मानित और बड़े लोग ही होते हैं जिनके प्रभामंडल पर समाज को नाज होता है ! वे पूरे समाज को दिशा देने में समर्थ होते हैं मगर शारीरिक मेहनत और पसीना बहाना उन्हें भी निरर्थक लगता है !
में इस वर्ष कम एक्टिविटी की हैं नतीजा एक वर्ष में 5 वर्ष उम्र बढ़ गयी , पिछले चार माह से दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारण, सुबह दौड़ना केवल नाममात्र को ही रहा, आज भी सुबह आरामदेह कम्बल से दुखी मन तभी निकला जब खुद को ढेरों गालियाँ देनी पड़ीं !
इतिहास गवाह है कि सफलता मानव को पागल बना देती है, वह अपने किये हर काम को श्रेष्ठ मानना शुरू कर देता है , हम सब भी धन और सम्मान पाते ही उसका अनजाने में दुरुपयोग शुरू कर देते हैं , धन का उपयोग सबसे पहले आराम करने में लगाते हैं , सुख सुविधाओं के होते सबसे अधिक ह्रदय रोग और डायबिटीज (शाही रोग) धनवान और सम्मान सज्जित लोगों को ही होते हैं , मैंने आजतक एक भी मेहनतकश व्यक्ति को ह्रदय रोग से मरते नहीं सुना और न उसे डायबिटीज हुई जबकि चीनी भी वह सबसे अधिक खाता रहा ,इन बीमारियों का शिकार सबसे अधिक सम्मानित और बड़े लोग ही होते हैं जिनके प्रभामंडल पर समाज को नाज होता है ! वे पूरे समाज को दिशा देने में समर्थ होते हैं मगर शारीरिक मेहनत और पसीना बहाना उन्हें भी निरर्थक लगता है !
मजबूत मानवीय शरीर के इंजन के विभिन्न अवयवों को शक्ति सप्लाई देने के लिए , हाथ पैरों का निर्माण किया गया है ,लगातार चलते हुए हाथ पैर शारीरिक इंजिन को ईंधन देते रहते हैं ताकि वह अंत तक कार्यशील रहे ,
इसीलिये पुराने समय में लोग बहुत कम बीमार पड़ते थे ,रोग अपने आप ठीक हो जाते थे ! उद्यम शीलता के होते ढाई लाख वर्ष के मानव जीवन में मेडिकल व्यापार का दखल पिछले दो सौ वर्षों से ही हुआ है और यकीन मानिए इसके बदौलत मानव उम्र में कोई ख़ास योगदान नहीं हुआ है सिर्फ धन बहने के एक श्रोत का सर्जन अवश्य हुआ है आज एक ऑपरेशन होते ही इंसान के जीवन की आधी एक्टिविटी और उत्साह नष्ट हो जाता है बचा जीवन धीरे धीरे बात करते हुए ही गुजरता है !
इसीलिये पुराने समय में लोग बहुत कम बीमार पड़ते थे ,रोग अपने आप ठीक हो जाते थे ! उद्यम शीलता के होते ढाई लाख वर्ष के मानव जीवन में मेडिकल व्यापार का दखल पिछले दो सौ वर्षों से ही हुआ है और यकीन मानिए इसके बदौलत मानव उम्र में कोई ख़ास योगदान नहीं हुआ है सिर्फ धन बहने के एक श्रोत का सर्जन अवश्य हुआ है आज एक ऑपरेशन होते ही इंसान के जीवन की आधी एक्टिविटी और उत्साह नष्ट हो जाता है बचा जीवन धीरे धीरे बात करते हुए ही गुजरता है !
रिटायरमेंट के बाद मैंने पहली बार शारीरिक मेहनत का सुख महसूस किया, पिछले 41 माह में 638 बार घर से दौड़ने निकला हूँ और लगभग 5000 Km दौड़ चुका हूँ, प्रति सप्ताह 30 km एवरेज रनिंग करने के साथ 26 बार हाफ मैराथन रेस (21Km) पूरी करने में सफलता प्राप्त की !
६५ वर्ष की उम्र में लगातार ढाई घंटा दौड़ने के बाद पूरे शरीर से बहते पसीने का आनंद का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता उसे केवल महसूस किया जा सकता है , चेहरे और पेट का भारी वजन, कोलेस्ट्रोल , डायबिटीज , बढ़ा बीपी , पेट के रोग , जोड़ों के दर्द कब गायब हो गये, पता ही नहीं चला ! भरोसा नहीं होता कि मैं वही सतीश हूँ जिनका फोटो नीचे लगा है ! यह सब करने के लिए मैंने आत्मविश्वास के साथ लीक से हटकर चलने की आदत डाली और सफल रहा !
सस्नेह आप सबको ...
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Friday, September 14, 2018
जर्मनी से स्पेन, भोजन एवं स्वाद -सतीश सक्सेना
जर्मन लोगों को मैंने अक्सर ट्रेन या बस में शाम ६ बजे के आसपास नेपकिन में दबाये सैंडविच खाते देखा है , और वे यह बेहिचक करते हैं ! वे अक्सर अपना मुख्य भोजन दिन में खाना पसंद करते हैं उनके भोजन में साबुत अनाज की ब्रेड , चीज़ ,योगर्ट , भुने मीट के स्लाइस एवं ब्रैटवुस्ट नामक पोर्क या बीफ या टर्की के बने सॉसेज होते हैं ! साथ में सलाद टमाटर एवं अचार (gherkins) एक्स्ट्रा स्वाद देते हैं !
यूरोप में अधिकतर लोग मीट प्रोडक्ट पर निर्भर होते हैं इनके भोजन में किसी न किसी रूप में मीट, उपलब्ध अवश्य होगा सो हमवेजीटेरियन लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है ! जल्दबाजी में ख़रीदे, रेडीमेड पास्ता एवं टू मिनट नूडल्स पहला चम्मच खाने के बाद ही फेंकने पड़े !
मगर यूरोप में हम वेजिटेरियन लोगों का सहारा, पीता ब्रेड ( ग्रीक रोटी ) होती है जो अकसर यूरोपियन स्टोर में उपलब्ध रहती है , इसे खरीद कर बटर का उपयोग कर अपना देशी परांठा बनाया जा सकता है ! साथ में आलू उबालकर सूखी सब्जी बनाना अधिक मुश्किल काम नहीं , सहारे के लिए स्टोर्स में तरह तरह के योगर्ट ( दही ) उपलब्ध होता है !
म्यूनिख बवेरिया स्टेट की राजधानी है जो अपने बियर गार्डन के लिए मशहूर है , जहाँ खुले में बड़े मैदान में अथवा गार्डन में हजारों लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है और फ्रेश बियर सर्व की जाती है , देखने में यह एक ऐसा खुला रेस्टॉरेंट लगता है जहाँ लोग इकट्ठे होकर किसी राष्ट्रीय त्यौहार पर एक साथ बियर पीकर, ख़ुशी मना रहे हों ! कुछ मायनों में हमारे देश के एक बड़े ढाबे जैसा माहौल होता है मगर एक विशेषता लिए होता है कि हजारों लोगों में से एक भी इंसान जोर से न बोलता है और न झूमता है !
आप किसी भी जर्मन मार्किट में चले जाएँ सड़क किनारे रेस्टुरेंट के फुटपाथ पर कुर्सियों पर बैठे लोग बियर पीते मिलेंगे मगर एक शालीनता और सभ्यता के साथ बिना किसी शोर शराबे के ! मैंने यहाँ हार्ड ड्रिंक्स, शराब, स्कॉच आदि बहुत
कम लोगों को पीते देखी , 80 प्रतिशत लोग बियर और बचे लोग वाइन का सेवन करते देखे हैं ! अगर आप एक दो दिन को यहाँ आएंगे तो जहाँ नजर डालें फुटपाथ पर पड़ी कुर्सियों पर बैठे लोगों के हाथ में बियर का ग्लास देखेंगे मगर एक भी आदमी शराबी व्यवहार करते नहीं दिखेगा !
कम लोगों को पीते देखी , 80 प्रतिशत लोग बियर और बचे लोग वाइन का सेवन करते देखे हैं ! अगर आप एक दो दिन को यहाँ आएंगे तो जहाँ नजर डालें फुटपाथ पर पड़ी कुर्सियों पर बैठे लोगों के हाथ में बियर का ग्लास देखेंगे मगर एक भी आदमी शराबी व्यवहार करते नहीं दिखेगा !
हाँ, हम जैसे देसी वेजिटेरियन लोग भी मिलेंगे जिन्हें वहां बियर के साथ, उबले अंडे या नमकीन तो मिलने से रही सो विकल्प के रूप में वेज ब्रेड, ऑलिव्स और चीज़ की तलाश करते हैं ! जर्मन बेकरी सबसे अधिक व्यस्त दुकाने हैं जहाँ विभिन्न स्वाद की देश विदेश की नमकीन एवं मीठे ब्रेड , बिस्किट एवं केक उपलब्ध हैं जिनको खाने से मन नहीं भरता !
एक दिन बेहद भूख लगने पर मैंने बाजार से दो शहद की बिस्कुट जिनका वजन ५० ग्राम होगा फिलाडेल्फिया चीज के साथ खायीं तो भूख ऐसे गायब हुई जैसे भरपूर लंच लिया हो ! लाजवाब क्वालिटी के ऐसे फ़ूड प्रोडक्ट हमारे देश में दुर्लभ हैं , इन प्रोडक्ट के साथ अक्सर लोग सूप, कोकोकोला पीना पसंद करते हैं जिन्हें हमारे देश में देशी व्यापारियों ने त्याज्य घोषित कर दिया गया है !
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| Swimming in Sea |
कैटालोनिया कोस्ट पर बसे बार्सिलोना का नाम, यूरोप के उन बेहद खूबसूरत शहरों में शामिल होता है जो विश्व के टूरिस्ट नक़्शे में विख्यात हैं ! यह शहर नार्थ स्पेन रीजन में, मेडिटेरेनियन समुद्र तट पर , बसा है तथा अपने विशेष कैटलॉन संस्कृति, गौरव तथा व्यक्तित्व के लिए, एक अलग पहचान रखता है !
कल म्यूनिख से बार्सिलोना, स्पेन पंहुचे थे , एयरपोर्ट से ही 5 दिन का होला बार्सिलोना अनलिमिटेड पास (हेलो बार्सिलोना) ले लिया था, अन्यथा टैक्सी से एयरपोर्ट से शहर अपने अपार्टमेंट तक पंहुचने में ही लगभग 5000 रूपये पड़ जाता ! यह
बार्सिलोना टूरिस्ट पास दो लोगों का 5000 रूपये का पड़ा और इसके द्वारा मैं पांच दिन तक किसी भी वाहन मेट्रो, ट्रेन , बस और ट्राम से पूरे शहर में कितनी ही यात्रायें करने को स्वतंत्र था !
मैं , रुकने के लिए होटल न लेकर, पुराने शहर के बीच प्राइवेट अपार्टमेंट लेना पसंद करता हूँ , इनका रेट लगभग होटल जितना ही पड़ता है मगर , अपना ताला चाबी, प्रायवेसी, अधिक जगह, अपना खुद का किचेन , बाथरूम , और बालकोनी का महत्व इस नयी जगह, संस्कृति के लोगों के बीच रहने की सुविधा मिलने के कारण, इनका महत्व अधिक होता है ! बार्सिलोना में यह अपार्टमेंट एयर बीएनबी के जरिये ऑनलाइन लिया था ! अधिकतर अपार्टमेंट पर पूरा पेमेंट पहले ही देना होता है ! वे इसके बाद आपको दरवाजे के इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स का कोड भेजते हैं जिसे द्वार पर डॉयल करने पर बॉक्स ओपन हो जाता है और अंदर आपको चाबी मिलती है जिसके जरिये आप मेन डोर खोल सकते हैं !
अंदर आकर सबसे पहले बाथरूम , किचेन एवं बैडरूम का निरीक्षण किया तो पाया टॉवल्स सेट , सोप , चादर , ब्लैंकेट , वाशिंग मशीन , फ्रिज , ओवन , माइक्रोवेव , हॉट प्लेट , कॉफी मशीन, इलेक्ट्रिक प्रेस, आवश्यक बर्तन आदि के अलावा पांच दिन के लिए, चाय कॉफी के लिए आवश्यक सामान , वर्जिन ओलिव आयल, जूस आदि उपलब्ध था ! सो अन्य मन
मुताबिक सामग्री जुटाने के लिए पहला काम, बाहर मोहल्ले के स्टोर पर जाना और अपनी मन मर्जी की आवश्यक सामान खरीद कर फ्रिज में रखना था !
जर्मनी, ऑस्ट्रिया, इटली, स्विट्ज़रलैंड , फ्रांस, स्पेन सब जगह शहरी सप्लाई का पानी, पीने योग्य माना जाता है मगर स्वाद मीठा नहीं होता, हम भारतीयों को म्युनिसिपल सप्लाई वाटर में, नाले का पानी, मुफ्त में मिक्स होकर मिलने के कारण, हर घर में आर ओ ( रिवर्स ओसमोसिस )लगाना ही पड़ता है जोकि पीने में मीठा होता है मगर यूरोप के घरों में आर ओ कहीं नहीं देखा ! बाजार में बिकने वाला पानी मिनरल वाटर के रूप में उपलब्ध है जो बेहद मंहगा पड़ता है ! RO का नुकसान एक ही है कि वह पीने के पानी से, मानव शरीर के लिए आवश्यक मिनरल्स जैसे कैल्सियम, मैग्निसियम को भी नष्ट कर देता है जो कि हमारे लिए बेहद आवश्यक हैं शुक्र है कि हमारा शरीर यह मिनरल्स भोज्य सामग्री से आसानी से जुटा लेता है ! दूध, बियर और जूस से अधिक महंगा , आधा लीटर पानी का भाव भी ढाई यूरो है सो अक्सर पानी की जगह बियर से काम चलाने के लिए तैयार रहना होगा !बार्सिलोना टूरिस्ट पास दो लोगों का 5000 रूपये का पड़ा और इसके द्वारा मैं पांच दिन तक किसी भी वाहन मेट्रो, ट्रेन , बस और ट्राम से पूरे शहर में कितनी ही यात्रायें करने को स्वतंत्र था !
मैं , रुकने के लिए होटल न लेकर, पुराने शहर के बीच प्राइवेट अपार्टमेंट लेना पसंद करता हूँ , इनका रेट लगभग होटल जितना ही पड़ता है मगर , अपना ताला चाबी, प्रायवेसी, अधिक जगह, अपना खुद का किचेन , बाथरूम , और बालकोनी का महत्व इस नयी जगह, संस्कृति के लोगों के बीच रहने की सुविधा मिलने के कारण, इनका महत्व अधिक होता है ! बार्सिलोना में यह अपार्टमेंट एयर बीएनबी के जरिये ऑनलाइन लिया था ! अधिकतर अपार्टमेंट पर पूरा पेमेंट पहले ही देना होता है ! वे इसके बाद आपको दरवाजे के इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स का कोड भेजते हैं जिसे द्वार पर डॉयल करने पर बॉक्स ओपन हो जाता है और अंदर आपको चाबी मिलती है जिसके जरिये आप मेन डोर खोल सकते हैं !
अंदर आकर सबसे पहले बाथरूम , किचेन एवं बैडरूम का निरीक्षण किया तो पाया टॉवल्स सेट , सोप , चादर , ब्लैंकेट , वाशिंग मशीन , फ्रिज , ओवन , माइक्रोवेव , हॉट प्लेट , कॉफी मशीन, इलेक्ट्रिक प्रेस, आवश्यक बर्तन आदि के अलावा पांच दिन के लिए, चाय कॉफी के लिए आवश्यक सामान , वर्जिन ओलिव आयल, जूस आदि उपलब्ध था ! सो अन्य मन
मुताबिक सामग्री जुटाने के लिए पहला काम, बाहर मोहल्ले के स्टोर पर जाना और अपनी मन मर्जी की आवश्यक सामान खरीद कर फ्रिज में रखना था !
बहरहाल यूँ देखने में यूरोप महंगा लगेगा मगर यहाँ कम पैसों में भी आराम से घूमा जा सकता , पूरे दिन का भोजन के लिए 6 से 10 यूरो में काम चल सकता है मगर यदि रेस्टॉरेंट में लंच और डिनर लेना है तो यही खर्चा 40 यूरो तक बैठेगा !
Wednesday, September 5, 2018
जर्मनी और राज भाटिया -सतीश सक्सेना
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| टिकट मशीन |
यूरोप के अधिकतर देशों में नगर उपनगर यातायात के लिए , मेट्रो , ट्राम , बस और ट्रेन उपलब्ध हैं और इसके लिए बेहतरीन व्यस्था है कि आपको हर जगह अलग अलग एजेंसीज से अलग टिकिट लेने की आवश्यकता नहीं है ! मेट्रो स्टेशन या बस स्टैंड पर लगी ऑटोमेटिक मशीन से लिया गया एक टिकिट हर जगह मान्य है और यह टिकिट आप अपने मोबाइल पर भी ऑनलाइन ले सकते हैं ! म्यूनिख में जहाँ एक स्थान से दुसरे स्थान का एक तरफ का टिकिट, किसी भी साधन से, 2.90 यूरो (250 रूपये ) है वहीँ एक दो जोन के लिए एक सप्ताह का अनलिमिटेड पास 12 यूरो का और पूरे म्यूनिख नेटवर्क में पूरे दिन के लिए, अनलिमिटेड यात्रा पास 24 यूरो का है ! यूरोप में किसी शहर में घूमने के लिए, अगर उसे बेहतर समझना हो तो उस शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले समझना चाहिए , जहाँ आप ठहरे हैं उस स्थान से पॉपुलर रुट के स्टेशन और दिशा याद रखना आवश्यक है बाकी काम आसान हो जाता है ! ड्राइवर युक्त टैक्सी सर्विस बेहद महगीं हैं , 40 km की टैक्सी यात्रा लगभग 6000/=की पडेगी ! ![]() |
| राज भाटिया के साथ |
हमारे देश में अब अतिथि सत्कार दिखावा और बीते दिनों की बात हो चली है , मगर देश से इतनी दूर , भाटिया दम्पति ने जिस प्यार से विशुद्ध भारतीय भोजन कराया वैसा बहुत कम ही नजर आता है ! भोजन अच्छा तभी लगता है जब वह प्यार से कराया जाय इस मायने में श्रीमती भाटिया साक्षात् अन्नपूर्णा सी लगीं यूँ भी जर्मनी में किसी भी भारतीय घर में, भारतीय भोजन की उपलब्धता होना आसान नहीं, अधिकतर जगह आपका स्वागत वेस्टर्न नाश्ते या भोजन से होगा क्योंकि यहाँ देशी सामग्री इम्पोर्टेड है और अधिकतर सामान जैसे तेल , देशी घी , हरी मिर्च , मसाले सब तलाश करने के लिए इंडियन स्टोर में ही जाना होगा एवं अत्यंत महंगे (गेंहू का आटा 5किलो 1200 रुपया) भी हैं ! 3000 sqft एरिया में बना उनका साफ़ सुथरा घर बॉलीवुड की फिल्म बनाने योग्य था इतने बड़े घर में धूल और अव्यवस्था का नाम नहीं उसके लिए इन दोनों की जितनी तारीफ की जाय वह कम ही होगी !
उसके बाद वे हमें गाँव भ्रमण पर ले गए एक साफ़ सुथरे खेत के बाहर एक छोटे स्टाल पर ताज़ी निकली सब्जियां जिसमें विभिन्न रंग के ऑक्टोपस नुमा कद्दू देखकर हम आश्चर्यचकित थे , सब्जियों पर रेट लिखा था साथ में छोटा सा मनी बॉक्स परन्तु बेंचने वाला कोई नहीं ! आप अपनी मन पसंद सब्जी उठाइये और पैसे बॉक्स में डाल दीजिये कोई देखने वाला नहीं कि आपने पैसे डाले भी कि नहीं .....
एक अन्य जगह अंडे रखे दिखे, यहां भी रेट के साथ मनी बॉक्स था उठाइये, जितने चाहिए और पैसे डाल दीजिये ! आप बेईमानी करना चाहते हैं मुफ्त में ले जाइये कोई आप पर शक नहीं करेगा , सब आपसी विश्वास और भरोसा ! भाटिया जी ने यह भी कहा कि हम अधिकतर समय, घर खुले छोड़ आते हैं कोई ख़तरा नहीं, यहाँ कोई बेईमानी की सोंच भी नहीं सकता ! पुलिस या अन्य सरकारी विभाग रिश्वत लेने अथवा देने की कोई सोंच भी नहीं पाता ! इस छोटे से जर्मन गांव में , जब कोई व्यक्ति जब सड़क या पगडण्डी से, कुत्ते के साथ निकल रहा हो तब उसकी जेब में एक
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| डॉग पूप के लिए थैली यहाँ से लें |
यहाँ कौन देख रहा .... वाले शब्द बोलने वाले लोगों के देश से आये हुए मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह सब देखना आश्चर्य के सिवा और कुछ नहीं था .....
इस गांव में हर रास्ते में फूल और फल लगे देखे जिन्हें सुबह के अँधेरे में आकर भगवान की पूजा के लिए कोई नहीं चुराता ! पके हुए सेब हर घर में लगे हैं और बाहर भी लटके हैं , इस खूबसूरती की हम अपने यहाँ कल्पना भी नहीं कर सकते , अगर किसी की जेब से टहलते हुए कोई तौलिया रूमाल या मोबाइल गिर जाए तो घबराने की कोई बात नहीं वह अगले दिन सुबह भी वहीँ पड़ा मिलेगा ! इस राम राज्य की कल्पना हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों बरसों से की थी और लगता नहीं कि हमारे देश में जहाँ हर व्यक्ति चतुरसेन पहले है, अब कभी भी पूरी होगी ! पश्चिमी देशों की, बिना उन्हें देखे, समझे, मूर्खों की तरह जमकर
उनकी बुराई करते हैं यही हमारी सभ्यता को पहचान बची है ! अगर रामराज्य कहीं है तो वह वाकई इन देशों में है जिन्हें हम गाली देना अपनी शान समझते हैं !
यहाँ की सड़क पर स्पीड लिमिट तोड़ने को कोई कोशिश नहीं करता अगर किसी कैमरे में आ गयी तो जुर्माना जो लगभग १५००० रूपये होगा घर आ जाएगा और सफाई देने की कोई गुंजाइश नहीं ! मानव जीवन को यहाँ बहुमूल्य माना जाता है अगर आप
शराब पीकर ड्राइविंग करना आपको कम से कम 40000 रूपये से 120000 रूपये तक महंगा पड़ सकता है यहाँ तक कि आपकी साइकिल पर अगर लाइटिंग इक्विपमेंट नहीं लगे हैं तब 2000 रुपया जुर्माना होगा अगर वह रेड लाइट क्रॉस करता है तो 60 यूरो ( 5000 रूपये ) जुर्माना है और पैदल चलने वाले को भी माफ़ी नहीं है , पेडस्ट्रियन क्रॉसिंग पर अगर आपने पैदल चलते हुए जल्दी से रेड लाइट जंपिंग की है तो 400 रुपया देने को तैयार रहिये !
यहाँ घर पर नौकर रखना और मरम्मत करवाना बेहद खर्चीला साबित होगा क्योंकि कामगरों की तनख्वाह बहुत अधिक हैं उनसे व्यक्तिगत काम कराना नया सामान खरीदने जितना पड सकता है अतः घरों में मरम्मत, रिपेयर, पेण्ट आदि खुद करना होता है !
सो यहाँ के लोग कामचोर नहीं है इसीलिए फिटनेस की कोई समस्या नहीं ! साईकिल से बाजार जाना , बगीचे की तथा अपने घर से बाहर की घास काटना, झाड़ू लगाना, बर्तन धोना , घर का फर्श आदि सब कुछ आपको खुद करना होगा वह और बात है कि अधिकतर काम के लिए आप मशीनों का उपयोग करते हैं !
राज भाई के घर में इन्होने एक कमरा वर्कशॉप में बदल रखा है , उनके पास हर तरह के टूल्स देखकर पता चला कि समय ने इन्हें हर काम खुद करना भी सिखा दिया इनके घर से निकलते समय एक संकल्प मैंने भी लिया कि अब से घर में अधिकतर काम और रिपेयर खुद करना है जब राज भाई यह कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं !
Sunday, July 29, 2018
आसान यूरोप यात्रा -सतीश सक्सेना
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| यूरोपियन ढाबा पर जौ का रस, मशहूर ब्रेड, ब्रीज़ल के साथ ! |
-विदेश यात्रा को अधिकतर लोग हौआ मानते हैं और उस पर अक्सर बात करने से या जाने की योजना बनाने से झिझकते ही नहीं बल्कि सोंचने में भी कतराते हैं और इसके पीछे धन का अभाव न होकर अक्सर आत्मविश्वास की कमी ही होती है कुछ अन्य कारण निम्न हैं ....
- पहला कारण विदेशियों से कम्युनिकेशन में आत्मविश्वास का न होना, अधिकतर का मानना है कि उनकी बेहतरीन फर्राटेदार इंग्लिश समझना और बेहतरीन इंग्लिश में बात करना बहुत मुश्किल है जबकि वास्तविकता इसके उलट है लगभग पूरे विश्व में सामान्य विदेशियों की इंग्लिश काफी कमजोर है अधिकतर जगह पर वे टूटी फूटी इंग्लिश में और हावभाव के साथ ही संवाद करते हैं और तो और हमारी मैडम एयरपोर्ट से लेकर शानदार मॉल तक में धड़ल्ले से अपनी हिंगलिश और हिंदी मिलाकर चमत्कृत करने वाली देसी अंग्रेजी में जर्मन लोगों को समझाने में कामयाब रहीं हैं !-झिझक का दूसरा कारण विदेश यात्रा में अधिक खर्चे का अनुमान होना होता है जबकि यह कई बार देशी यात्रा से भी कम बैठता है ! दिल्ली से पेरिस या म्यूनिख का एक व्यक्ति के आने जाने का खर्चा लगभग 36000/- है और लगभग 5000 रूपये प्रति दिन में अच्छा होटल मिल जाता है जिसमें एक समय का खाना शामिल होता है ! इस प्रकार एक मध्यम आय वाले पति पत्नी, सवा लाख रूपये में, ५ दिन के लिए रोम जाकर बापस आ सकते हैं !
-विश्व के किसी भी भाग की यात्रा, बिना जानकारी करना पहले असंभव थी जबकि अब इन यात्राओं को गूगल ने बेहद आसान बना दिया है, अगर स्मार्ट फोन आपके पास है तब आप कहीं किसी शहर में खो नहीं सकते, जीपीएस टेक्नोलॉजी के जरिये आपकी लोकेशन हर वक्त आपके पार्टनर के पास होती है इसके लिए आपने अपने परिवार के सदस्यों या मित्रों को अपनी लाइव लोकेशन शेयर करनी भर होती है, आजकल हर व्यक्ति को जीपीएस सिस्टम की जानकारी रखना आवश्यक है !
-आपके शहर से हजारों किलोमीटर दूर अनजान शहर में आपको उस शहर में कदम रखने से पहले, गूगल मैप के जरिये ,अपने बस स्टॉप और बस नंबर तक का पता चल जाता है और कितने स्टॉप बाद उतर कर किस दिशा में, कितने कदम चलना है गूगल मैप की मदद से आप अपने गंतव्य पर आसानी से पंहुच जाते हैं !
-अपना टिकिट अपने मोबाइल पर घर बैठे ऑनलाइन खरीद लीजिये और जहाँ चाहे यात्रा करिये कोई चेक करने नहीं आता न कहीं कोई रेलवे टिकिट कलेक्टर जैसा कोई इंसान दिखता, हर जगह एक भरोसा सा महसूस होता है कि आप भले इंसान हैं और चोरी नहीं कर सकते ! अगर किसी वीरान बसस्टॉप या ट्राम पर खड़े हैं तो टिकिट आपको अपने मोबाइल पर खरीदने की सुविधा है !
-हर सड़क पर पदयात्रियों के फुटपाथ , साइकिल के लिए अलग ट्रेक बना है ! पैदल चलते व्यक्ति को सड़क पार करते देख गाड़ियां जबतक इंतज़ार करती हैं जबतक वह इंसान सड़क पार न कर ले ! मोहल्ले में कोई शोर शराबा नहीं लेट इवनिंग में आप घर में तेज आवाज में टीवी अथवा ड्रिल से दीवार में या लकड़ी में छेद नहीं कर सकते शोर मचाना या जोर जोर से बोलना असभ्यता की निशानी माना जाता है ! नियम पालन यहाँ का समाज अपनी जिम्मेदारी समझ कर पालन करता है !
यूरोप के विभिन्न देशों के बीच सीमा नहीं है हर व्यक्ति बिना किसी परमिट के किसी भी देश में जाने को स्वतंत्र है !
-पूरा वातावरण बेहद स्वच्छ है धूल उड़ते कहीं नहीं दिखती , इस बार मैं एक सफ़ेद शर्ट कई दिन से पहने हूँ कॉलर गंदा ही नहीं होता ! ठन्डे और साफ़ वातावरण में सुबह सुबह इसार नदी के किनारे दौड़ने का आनंद ही कुछ और है काश विश्व के देशों की सीमाएं समाप्त हो जाएँ और हम सब एक साथ मिलकर हंसना रहना सीख सकें !
कितना सुंदर सपना होता
पूरा विश्व हमारा होता ।
मंदिर मस्जिद प्यारे होते
सारे धर्म , हमारे होते ।
कैसे बंटे,मनोहर झरने,
नदियाँ,पर्वत,अम्बर गीत ।
हम तो सारी धरती चाहें , स्तुति करते मेरे गीत ।
काश हमारे ही जीवन में
पूरा विश्व , एक हो जाए ।
इक दूजे के साथ बैठकर,
बिना लड़े,भोजन कर पायें ।
विश्वबन्धु,भावना जगाने,
घर से निकले मेरे गीत ।
एक दिवस जग अपना होगा,सपना देखें मेरे गीत ।
Friday, June 23, 2017
जाने कहाँ वे खो गए कुछ शब्द, जो बोले नहीं - सतीश सक्सेना
बरसों से सोंचे शब्द भी उस वक्त तो बोले नहीं
विश्वास ही पहचान हो निर्मल ह्रदय की भावना
मृदु ह्रदय मंजुल भाव तो हमने कभी तौले नहीं !
जब सामने खुद श्याम थे तब रंग ही घोले नहीं !
कुछ अनछुए से शब्द थे, कह न सके संकोच में,
जानेंगे क्या छूकर भी,हों जब राख में शोले नहीं !
जानेंगे क्या छूकर भी,हों जब राख में शोले नहीं !
प्रत्यक्ष देव,विरक्त मन, किससे कहें, नंदी के भी
सीने में कितने राज हैं,जो आज तक खोले नहीं !
विश्वास ही पहचान हो निर्मल ह्रदय की भावना
मृदु ह्रदय मंजुल भाव तो हमने कभी तौले नहीं !
उलझी अनिश्चय में रही, मंदाकिनी हर रूप में
थी चाहती निर्झर बहे, शिवकेश थे,भोले नहीं !
Wednesday, November 23, 2016
इक दिन के लिए द्वार पे , रहमान बन के आ - सतीश सक्सेना
किसने कहा कि दिल में तू मेहमान बनके आ,
ये तेरी सल्तनत है, तू सुल्तान बन के आ !
साँसे तो कुछ बाकी तेरे दीदार के लिए,
मुफलिस के पास कर्ज का भुगतान बन के आ !
मुफलिस के पास कर्ज का भुगतान बन के आ !
कब तक यहाँ तड़पें सनम रह के भी बावफ़ा,
इक दिन के लिए द्वार पे , रहमान बन के आ !
इक दिन के लिए द्वार पे , रहमान बन के आ !
पहली दो पंक्तियाँ सुदेश आर्या द्वारा लिखी हैं , उनके द्वरा अनुरोध किये जाने पर यह ग़ज़ल पूरी बन गयी !
Wednesday, June 15, 2016
तुम मिलोगे तो ही,पर जमीं पर नहीं -सतीश सक्सेना
हम भी यूँ तो गिरेंगे, जमीं पर नहीं !
वैसे हंसकर कहूँ , यदि बुरा न लगे
तुम निछावर हुये हो, हमीं पर नहीं !
पर भरोसा सा है, आओगे एक दिन
तुम मिलोगे तो ही,पर जमीं पर नहीं !
वे मेहरबां सभी पर, हमीं पर नहीं !
हंसने का भी समय, हो मुक़र्रर यहाँ
खूब खुल के हंसें पर गमीं पर नहीं !
हंसने का भी समय, हो मुक़र्रर यहाँ
खूब खुल के हंसें पर गमीं पर नहीं !
वैसे हंसकर कहूँ , यदि बुरा न लगे
तुम निछावर हुये हो, हमीं पर नहीं !
पर भरोसा सा है, आओगे एक दिन
तुम मिलोगे तो ही,पर जमीं पर नहीं !
Wednesday, May 25, 2016
गर ह्रदय पर वजन हो, तभी दौड़िए - सतीश सक्सेना
कम से कम 2 Km रोज दौड़ते हुए,लगातार 100 दिन दौड़ने का व्रत 30 अप्रैल से लिया है , आज 26 मई तक रोज दौड़ते हुए 132.85 Km की दूरी तय कर चुका हूँ , पिछले 8 माह से 134 बार रनिंग करते हुए आजतक 1035.60 Km दौड़ चुका हूँ और यह सब बिना किसी ट्रेनिंग और अपने 62 वर्षीय शरीर के साथ कुछ ज्यादा ही सावधानी बरतते हुए किया है !
1000 km की दौड़ पार करते हुए, अब मुझे लगता है कि अनावश्यक सावधानी और तेज दौड़ने पर कुछ हो जाने का भय,मानवीय शक्ति को बेवजह डर में फंसाए रखता है नतीजा अथाह मानवीय शक्ति,मन के चंगुल में फंसकर अपने बैरियर कभी नहीं तोड़ पाती और इंसान पूरे जीवन,अपने मन का दास बनने को मजबूर रहता है अतः मन पर निर्दयता पूर्वक चोट करनी ही होगी !
अतः कल से 10 km एक स्पीड पर दौड़ने का प्रयत्न रहेगा और पहला टारगेट 10 km दूरी को 70 मिनट में आराम से दौड़ते हुए पूरा करने का मन है जो कि अब तक का मेरा पर्सनल बेस्ट है !
क्या पता भूल से दिल रुलाया कोई
गर ह्रदय पर वजन हो, तभी दौड़िए !
वायदे कुछ किये थे, किसी हाथ से
मरते दम तक निभाना,तो भी दौड़िए ! - सतीश सक्सेना
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Thursday, May 12, 2016
Monday, April 11, 2016
सब तो रोये थे मगर हम तो, रो नहीं पाये -सतीश सक्सेना
कल ही कुछ याद किया, रात सो नहीं पाये
औ तड़प के जो बुलाया भी , तो नहीं पाये !
सब तो रोये थे मगर हम तो, रो नहीं पाये !
कसम खुदा की सिर्फ खैरियत बता जाएँ !
खिले वसंत अहले दिल से,खो नहीं पाये !
जाने कब से थे मेरे साथ,जानता ही नहीं
बिन कहे जान सकें अक्ल ,वो नहीं पाये !
तुझे हर बार मना ही किया था मिलने को
आज मन ढूंढता अहसास, जो नहीं पाये !
Friday, April 8, 2016
सितारे भूल गलती से मेरे आँगन में आ बरसे - सतीश सक्सेना
लगा जैसे चमन को भूल कंटक बन में आ बरसे !
लगा सहला गयीं यादें, उन्हें हमसे बिछड़ने की
बिना आवाज आहिस्ता से सूनेपन में आ बरसे !
बिना आवाज आहिस्ता से सूनेपन में आ बरसे !
हमारा घर तो कोसों दूर था, जल के किनारे से,
अचानक फूट के झरने, मेरे जीवन में आ बरसे !
हमारा क्या अकेले हैं, कहीं सो जाएंगे थक के
तुम्ही पछताओगे ऐसे, कहाँ निर्जन में आ बरसे !
अचानक फूट के झरने, मेरे जीवन में आ बरसे !
हमारा क्या अकेले हैं, कहीं सो जाएंगे थक के
तुम्ही पछताओगे ऐसे, कहाँ निर्जन में आ बरसे !
Monday, April 4, 2016
कुछ मिलावट लग रही है जहर में -सतीश सक्सेना
पहले जल्दी सी नहीं थी शहर में ,
बहुत कुछ था बुजुर्गों के सबर में !
कैसे इस दिल में अभी भी जान है !
कुछ मिलावट तो नहीं है जहर में !
मना कर दो,हम चले ही जाएंगे !
कब तलक लटके रहेंगे अधर में !
तेरे जाने का यकीं दिल को नहीं
बेईमानी ही लगी , इस खबर में !
होश में जाना दिलाने याद कुछ
दम अभी बाकी बचा है, लहर में !
बहुत कुछ था बुजुर्गों के सबर में !
कैसे इस दिल में अभी भी जान है ! कुछ मिलावट तो नहीं है जहर में !
मना कर दो,हम चले ही जाएंगे !
कब तलक लटके रहेंगे अधर में !
तेरे जाने का यकीं दिल को नहीं
बेईमानी ही लगी , इस खबर में !
होश में जाना दिलाने याद कुछ
दम अभी बाकी बचा है, लहर में !
Monday, March 21, 2016
इसी विश्वास पर, रूठों को हंसाने निकलें -सतीश सक्सेना
चलो सामान ही , बाजार से लाने निकलें !
क्या पता आज वे, मेले के बहाने निकलें !

काश इक बार और आएं , छेड़ने हमको,
क्यूँ न हम छेड़ने वालों को,बुलाने निकलें !
तुमने पूंछा था बहुत बार,क्या कहते तुमसे,
आज, करते हैं तुम्हें प्यार , बताने निकलें !
उन्हें हंसाने को, बस इक सलाम काफी है,
इसी विश्वास पर,रूठों को हंसाने निकलें !
बहुत मज़ाक हुआ, एक बार फिर आओ,
तुम कहो,आज से मनुहार ही गाने निकलें !
क्या पता आज वे, मेले के बहाने निकलें !

काश इक बार और आएं , छेड़ने हमको,
क्यूँ न हम छेड़ने वालों को,बुलाने निकलें !
तुमने पूंछा था बहुत बार,क्या कहते तुमसे,
आज, करते हैं तुम्हें प्यार , बताने निकलें !
उन्हें हंसाने को, बस इक सलाम काफी है,
इसी विश्वास पर,रूठों को हंसाने निकलें !
बहुत मज़ाक हुआ, एक बार फिर आओ,
तुम कहो,आज से मनुहार ही गाने निकलें !
Wednesday, February 24, 2016
धीर और गंभीर पदों के, आहट की पहचान नहीं है -सतीश सक्सेना
सबके मन में ही बसते हैं
![]() |
| गूगल से साभार |
मुरझाये मानव,जीवन में
गीतों का झरना लाते हैं
घने अँधेरे पर जाने कब ,
हौले हौले छा जाते हैं !
किसे ढूँढ़ते चित्र बनाये
लाखों देव देवताओं में ,
दिव्य और विश्वस्त रूप की, मानव को पहचान नहीं है !
जीवन के सब चक्र उलझते
उनके असमय सो जाने पर ,
फुलझड़ियाँ बरसें आँगन में
रोज सुबह उनके जगने पर
दिव्य पुरुष के आसानी से
दर्शन सुलभ नहीं मानव को
कष्ट और निज मर्यादा का
कितना ही अहसास रहे पर
अवमानना प्यार की करके , कोई भी परिहार नहीं है !
उनके आने से पहले ही
जग में कोलाहल आ जाता
उनके चलने से पहले ही,
धरती पर योवन आ जाता
उनकी मद्धम गति से दुनियां
का जीवन रौनक पा जाता
किसे अर्ध्य देने जाती हो
स्वप्नपुरुष की अनदेखी कर
जग में कोलाहल आ जाता
उनके चलने से पहले ही,
धरती पर योवन आ जाता
उनकी मद्धम गति से दुनियां
का जीवन रौनक पा जाता
किसे अर्ध्य देने जाती हो
स्वप्नपुरुष की अनदेखी कर
सूर्य किरण के रथ चिन्हों की, तुमको भी पहचान नहीं है !
अगर तेज को सह न पायीं
आँखें बंद नहीं करनी थीं !
अर्ध्य नहीं दे पायीं जल का
तो भी पीठ नहीं करनी थी !
देवपुरुष को आगे पाकर
पुष्पांजलि भेंट करनी थी
आकर चले गए द्वारे से
ये कैसा आवाहन तेरा !
धीर और गंभीर पदों के, आहट की पहचान नहीं है !
आँखें बंद नहीं करनी थीं !
अर्ध्य नहीं दे पायीं जल का
तो भी पीठ नहीं करनी थी !
देवपुरुष को आगे पाकर
पुष्पांजलि भेंट करनी थी
आकर चले गए द्वारे से
ये कैसा आवाहन तेरा !
धीर और गंभीर पदों के, आहट की पहचान नहीं है !
जीवन के सब चक्र उलझते
उनके असमय सो जाने पर ,
फुलझड़ियाँ बरसें आँगन में
रोज सुबह उनके जगने पर
दिव्य पुरुष के आसानी से
दर्शन सुलभ नहीं मानव को
कष्ट और निज मर्यादा का
कितना ही अहसास रहे पर
अवमानना प्यार की करके , कोई भी परिहार नहीं है !
Wednesday, January 27, 2016
आँधियों ने ओढ़ ली इतनी उदासी किस लिए ? - सतीश सक्सेना
क्या हुआ, ये सोच में डूबी खुमारी किसलिए ?
आँधियों ने ओढ़ ली इतनी उदासी किस लिए ?
आँधियों ने ओढ़ ली इतनी उदासी किस लिए ?
तुम तो कहते थे, न सोओगे , न सोने दो मुझे
आज ऐसा क्या हुआ,इतनी उबासी किस लिए ?
ऐसी क्या अवमानना की मानिनी की, प्यार ने
चमक चेहरे की हुई है,अमलतासी किस लिए ?
लगता घायल से हुए हो, जख्म गहरे दिख रहे
पागलों के पास जाकर मुंह दिखायी किसलिए ?
ये भी अच्छा है कि पछतावा रहे , सरकार को
इक दीवाने के लिए भी जग हँसायी किसलिए ?
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