चलो गांव की ओर, व्यथाएँ बांटेंगे,
इकले नहीं किसान यकीन दिलाएंगे
कसमें खाकर घर से पैदल आये हैं
भूखे नहीं किसान कभी सो पाएंगे !
अन्न उगाने वाले क्यों कमजोर रहें
आत्मचेतना,बोध,विवेक जगायेंगे !
हो आनंद हमेशा इनके आँगन में
इन चौपालों में,सौभाग्य जगायेंगे !
जागो देशवासियों ! वरना भारत में
खद्दरधारी दीमक , जश्न मनाएंगे !
कृषिप्रधान देश की खेती चाट गए
अब गरीब की रोटी,चट कर जाएंगे !
अब गरीब की रोटी,चट कर जाएंगे !
हिम्मत हारें नहीं,समय वह आएगा
खलिहानों में जीवनदीप जलायेंगे !
(यवतमाळ पदयात्रा 15 से 19 april के अवसर पर )
(यवतमाळ पदयात्रा 15 से 19 april के अवसर पर )



