जिससे रिश्ता जुड़ा था
द्वार पर आ गए ,
आज बारात ले !
उनके आने से, सब
खुश नुमा हो गया !
नाच गानों से , घर भी चहक सा गया !
पर यह आँखें मेरी,
संग नहीं दे रहीं
हँसते हँसते न जाने
छलक क्यों रहीं ?
आज बेटी चलीं,
अपना दर छोड़कर
घर नया चुन लिया अपना घर छोड़कर !
आज माता पिता
भाई बहना सभी
कर रहे स्वागतें
इक नयी आस में !
जाओ बहना सजाओ
नया आशियाँ !
हम सभी की शुभाशीष है साथ में !
रचनी होगी तुम्हें ,
विश्व सर्वोत्तमा
एक हंसती कलाकृति
हमारे लिए !
हाथ फैलाये हंसती
कृति विश्व की
ऎसी सौगात देना , हमारे लिए !





















