Monday, March 4, 2024
बिना ज़रूरत होते ऑपरेशन -सतीश सक्सेना
Wednesday, February 21, 2024
अगर बहता है बहने दो, तुम्हारी आँख का पानी -सतीश सक्सेना
Friday, November 17, 2023
घुटना रिप्लेस कराने से पहले इसे अवश्य पढ़ लें -सतीश सक्सेना
अधिकतर घुटने का ऑपरेशन , लंबे समय से चले आ रहे दर्द से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है , मगर अक्सर घुटना बदलने के बाद भी यह दर्द बरकरार रहता है बल्कि कई बार पहले से भी अधिक होता है , ऑपरेशन के दो चार साल बाद मरीज़ पहले से अधिक दर्द की शिकायत करते पाये जाते है ! अगर घुटने का दर्द स्पाइनल नर्व या कमरदर्द से जुड़ा है तो यह दर्द घुटना बदलने से भी नहीं जाता है , मगर अक्सर मूल कारण जाने बिना घुटने को रिप्लेस करते हैं और इसे मानवीय त्रुटि कहा जाता है एवं मेडिकल डॉक्टर इस मानवीय भूल में किसी भी सजा के हक़दार नहीं होते !
घुटने बदलने के विज्ञापन या वीडियो देखेंगे तो पता चलता है कि घुटना बदलने के बाद समुद्री बीच पर लोग खेल या दौड़ रहे हैं मगर यह वास्तविकता से कोसों दूर है , हक़ीक़त में 20 में 1 आदमी ही इतनी नार्मल दौड़ भाग कर पाता है जो लोग ऑपरेशन के बाद जोश में घुटनों पर अधिक ज़ोर देते हैं उनके सीमेंटेड जोड़ पाँच साल में ही हिलने लगते हैं और दुबारा घुटना निकाल कर ऑपरेशन करना पड़ता है ! इसके अतिरिक्त नये जॉइंट के घिसने पर, सेरेमिक , प्लास्टिक और मेटल के माइक्रोस्कोपिक टुकड़े खून में मिलकर अलग तरह की ख़तरनाक समस्याएँ पैदा करते हैं !
जब आप घुटने के जॉइंट को शरीर से अलग कराते हैं तब उस उससे उत्पन्न आघात के कारण , बोन मैरो स्पेस और रक्त वाहिनियों में असहनीय तनाव से ब्लड क्लॉट्स उत्पन्न होते हैं , एक रिसर्च के अनुसार 60 वर्ष से अधिक व्यक्तियों के लिए , ऑपरेशन के अगले दो सप्ताह में ह्रदय आघात का ख़तरा, ३१ गुना अधिक होता है और यह सुनकर ही घबराहट होती है कि उस दर्द से मुक्ति पाने का यह तरीक़ा निस्संदेह अधिक ख़तरनाक है इससे बेहतर होता कि उसी दर्द में जिया जाये !
कोशिश करनी चाहिये कि हम अन्य तरीक़ों से घुटने का दर्द ठीक करने का प्रयत्न करें न कि मेडिकल व्यवसायों के विज्ञापनों और डॉक्टरों की बातों से डर कर , ऑपरेशन थियेटर में भर्ती होकर अपने शरीर की दुर्दशा न करवायें और न इस ग़लत तरीक़े पर अपना धन खर्च करें ! विश्व विशाल है और वहाँ अलग अलग तरह के इलाज विकसित हुए थे और वे बेहद सफल भी रहे हैं , मगर एलोपैथिक सिस्टम के दवा व्यापारियों ने इसे बेहद धनवान व्यवसाय में परिवर्तित कर दिया है और अन्य वैकल्पिक चिकित्साओं को नष्टप्राय कर दिया , मगर आज भी अफ़्रीका , चायना , कोरिया , मिडल ईस्ट और भारत में इनकी तलाश करें तो कोई भी असाध्य बीमारी का इलाज मिल जाएगा केवल सब्र और मेहनत चाहिये !
शुभकामनाएँ आप सबको !
Ref : https://newregenortho.com/6-reasons-to-avoid-knee-replacement-surgery/
https://centenoschultz.com/disadvantages-of-knee-replacement-surgery/
Thursday, June 1, 2023
आंसू छलकें नहीं , अनुभवी आँखों से -सतीश सक्सेना
मरते दम तक साथ तुम्हारे कौन रहेगा ?
साथी सबके बीच अकेले रहना सीखो !
कोशिश करिये, बिना सहारे ही उठने की
पैरों को मज़बूत बना कर चलना सीखो !
शारीरिक, मानसिक दर्द से बचना हो तो
मेहनत करो, बहाना खूब पसीना सीखो !
आंसू छलकें नहीं , अनुभवी आँखों से
दोस्त इन्हें अब आँखों में ही पीना सीखो !
Friday, May 19, 2023
दिखावा अस्वस्थ बनाता है -सतीश सक्सेना
जब मन स्वच्छ हो ईमानदार हो खुद के लिए भी और गैरों के लिए भी ! स्वस्थ मन और शरीर को पाने के लिए आप को भय त्यागना होगा , मृत्यु भय पर विजय पाने के लिए अपनी आंतरिक सुरक्षा शक्ति पर भरोसा रखें कि वह अजेय है किसी भी बीमारी से उसका शरीर सुरक्षित रखने में वह सक्षम है और हाँ, अपने विशाल प्रभामण्डल और तथाकथित आदर सम्मान भार को सर से उतारकर घर पर रख देना होगा अन्यथा यह गर्व बर्बाद कर देने में सक्षम है मेरे हमउम्र तीन मित्र इस वर्ष मोटापे की भेंट चढ़ गए और कुछ हार्ट अटैक की कगार पर हैं ,काश वे समय रहते चेत गए होते !
Thursday, March 2, 2023
नज़र का चश्मा आवश्यकता या बुरी आदत -सतीश सक्सेना
Friday, February 24, 2023
एलोपैथी हेल्थ ब्लंडर्स -सतीश सक्सेना
बस तभी से एलोपैथी ने होम्योपैथी को पढ़े, समझे बिना उसके सिद्धांतों की खिल्ली उड़ाना शुरू किया और धीरे धीरे इन तेज प्रभाव वाली कैमिकल दवाओं ने मानव मन क़ाबू पाने में सफलता हासिल कर ली, एंटी बायोटिक्स मेडिसिन जो लाभ से अधिक नुक़सान करती हैं , एलोपैथिक प्रैक्टिशनरों द्वारा हर रोग का इलाज मानी जाने लगी और धीरे धीरे रेडियो और टेलीविज़न के ज़रिए इस धनवान और मशहूर व्यवसाय ने एलोपैथी ट्रीटमेंट सिस्टम को मेडिकल साइंस का नाम देने में सफलता प्राप्त कर ली !
Wednesday, February 15, 2023
लम्बे जीवन के लिए सुपरफूड केफीर -सतीश सक्सेना
Thursday, January 19, 2023
बतलायें, तपोवन कहां लिखूं -सतीश सक्सेना
राजकुमार सिद्धार्थ ने किसी को गुरु नहीं बनाया, उनमें बिना किसी जानवर के भय के बालसुलभ निडरता बचपन से ही थी, वे ख़ुद से ही प्रश्न करते ख़ुद में ही उत्तर की तलाश करते और उन्हें हर बार शरीर और अनुभव सिखाता रहा ! जानवर एक शांत चित्त व्यक्ति अपने पास पाकर खुश थे, उन्हें इस व्यक्ति से कभी ख़तरा महसूस नहीं हुआ सो उन्होंने सिद्धार्थ पर भी कभी आक्रमण नहीं किया बल्कि वे उनसे प्यार करते थे , शायद यही से अहिंसा का जन्म हुआ
उन्होंने महसूस किया कि इंसान को जीवित रहने के लिए शुद्ध हवा में साँस लेना सबसे आवश्यक है , उन्हें दिन में चार पाँच बार प्यास लगती और भूख सिर्फ़ एक बार, खाने में जो फल, मूल, पत्ता, जीभ को कड़वा लगता उसे थूकना पड़ता था उन्होंने उसे हमेशा त्याज्य माना और जो मीठा लगा उसे खाने योग्य !
बिना गुरु ही वे एकाग्रचित्त हो साँसों पर अधिकार कर पेट में कंपन पैदा करना सीख गए जिससे उनका शरीर स्वस्थ रहे , वे ही सर्वोच्च योगी थे जिनका कोई गुरु नहीं था ! सो मेरा ख़ुद का विश्वास है कि हम सब अपने अंदर निहित, आंतरिक गुरु को तलाश करें, जो कि शरीर को पूरे जीवन बेहद शक्ति देने में समर्थ है न कि धन की तलाश में जुटे आडंबरी गुरुओं की तलाश में समय व्यर्थ कर ख़ुद को मूर्ख साबित करें !
प्रणाम आप सबको
Sunday, January 8, 2023
आदतें बदलनी होगी -सतीश सक्सेना
कड़ाके की ठंड में कम कपड़े पहनने की आदत डालें, शुरुआत में एक लेयर कम कर दें , कुछ दिनों में ठंड लगनी बंद हो जाएगी !
Wednesday, December 28, 2022
आंतरिक शारीरिक रक्षा शक्ति -सतीश सक्सेना
अगर मैं स्टोन एज की बात करूँ तो वह लगभग २५ लाख साल चला लगभग ६००० साल पहले समाप्त हुआ था , उस समय भी समय अनुसार मानवीय ज़रूरत का हर साधन उपलब्ध था , बस इलाज और बीमारियों के बारे में उन्हें यही पता था कि कुछ दिन कमजोरी रहती है तब आराम करना चाहिए और उन दिनों खाने का मन नही करता सो वो कम खाते और गुफा के एक कोने में आराम करते, कुछ दिनों में स्वतः ठीक हो जाते और फिर शिकार, भागना दौड़ना और परिवार संग खुश रहना , मस्त जीवन ...
आज से लगभग ५० वर्ष पहले भी दूर दूर तक हॉस्पिटल और डॉक्टर नहीं थे, गाँव क़स्बों के लोगों ने इनका नाम तक नहीं सुना था , लोग तब बिना मृत्यु भय और बीमारियों के जीते थे, वाइरस बैक्टिरिया तो बहुत दूर की चीज़ थे , बस भय और स्ट्रेस देने वाले टेलिविज़न और डर फैलाकर धन कमाने वाले मीडिया संसाधन नहीं थे !मानवीय शरीर में लाखों कोशिकाएँ व्यस्त रहती हैं शरीर को सुचारु रूप से चलाने के लिए, इस प्रक्रिया के फल स्वरूप शरीर में हर समय उथलपुथल रहती है, तरह तरह के दर्द, और समस्याएँ होती हैं जो कुछ समय में अपने आप समाप्त भी हो जाती हैं ,भयभीत और समर्थ मन जो इन्हें सहन नहीं कर पाता , फ़ौरन डॉक्टर की शरण में जाकर दवा खाता है , बिना यह जाने कि इनका शरीर पर बुरा असर क्या होगा वहीं निडर या असमर्थ व्यक्ति चुपचाप घर में लेटकर स्वस्थ होने का इंतज़ार करता है और खुद को स्वस्थ बनाए रखने में सफल रहता है !
पिछले सप्ताह खाना खाते हुए, एक मटर का दाना साँस की नली में फँस गया था लगभग दो घंटे तक लगातार खाँसता रहा, साँस आने में रुकावट थी, लग रहा था कि जान चली जाएगी, डॉक्टर T S Daral जैसे पुराने मित्र, और रनर डॉक्टर दोस्त Vishesh Malhotra न होते तो ओपरेशन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ता ! पूरे सप्ताह साँस लेने में तकलीफ़ रही, अचानक एक दिन सुबह बहुत तेज गति से खांसी शुरू हुई लगा कि फेफड़े बाहर आ जाएँगे, और एक बड़ा सा गोल दाना मुँह से निकल कर बेसिन में गिरा, साथ ही लगातार हो रही खांसी व साँस में रुकावट ग़ायब हो गयी !
कम से कम एक डॉक्टर मित्र आपके परिवार में अवश्य होना चाहिए जो आपातकाल में सही सलाह देकर आपको अनावश्यक दवाओं से बचाने में आपकी मदद करे, उसके अलावा शारीरिक रक्षा शक्ति को कम न आंकिये, यह आपकी रक्षा करने में पूर्ण समर्थ है !
Tuesday, December 20, 2022
हमारी जय हो -सतीश सक्सेना
यूरोप में अवकाश के दिन आप अपने घर में, ज़ोर ज़ोर से बोलना, तेज आवाज़ में टीवी चलाना, किसी तरह ड्रिलिंग, घरेलू मरम्मत का शोर नहीं कर सकते, यहाँ तक कि रात में वॉटर फ़्लश करने का शोर भी नहीं होना चाहिए, शोर को वे हेल्थ के लिए नुक़सान देह व क्राइम मानते हैं और भारी पेनल्टी है मगर हमारे यहाँ किसी को पता ही नहीं कि तेज आवाज़ से बच्चों और बुजुर्गों के कान पर बेहद बुरा असर पड़ता है !
हमारे यहाँ घरेलू एरिया में ५५ DB तक का शोर की इजाज़त है , १० बजे के बाद लाउडस्पीकर बजाने की इजाज़त नहीं, मगर यहाँ यह अपराध धड़ल्ले से होता है, दूसरों की असुविधा से हमारा कोई मतलब ही नहीं और अपने स्वास्थ्य की समझ नहीं !
मानसिक विकास के बिना ही विकास हो रहा है !
Saturday, December 10, 2022
रोबो चेयर, एक वरदान -सतीश सक्सेना
घर में कुर्सी पर बैठ कर लैपटॉप पर या कम्बल में टीवी , बाहर निकलो गाड़ी से ऑफिस में , लिफ्ट से ऑफिस में अपनी कुर्सी तक ,शाम को गाड़ी से घर वापसी , घर के अंदर सोफा तैयार , डाइनिंग कुर्सी पर बैठकर डिनर , और बाद में गर्म बिस्तर
सोचता हूँ कि पैरों का काम ही क्या है , घर में खड़े होकर कार तक पैदल जाना पड़ता है , हाई क्वालिटी रोबो व्हील चेयर बनवा लेता हूँ उसमें सामने लैपटॉप स्क्रीन लगी हो , सेंसर सड़क पर किसी से टकराने भी नहीं देंगे ! घुटनों की जरूरत भी सिर्फ उठते समय पड़ेगी जब सोने जाना होगा , यह कुर्सी लगभग एक लाख की आएगी , खरीदने की सोच रहा हूँ , आराम के लिए पैसा उपयोग न किया तो फिर किस काम आएगा !
घर में पूरे दिन बैठे रहकर टीवी देखते समय मेरी स्पोर्ट्स वाच रिमाइंडर देती रहती है कि अब कम से कम खड़े ही हो जाओ भैया ? इसे फेंक ही दूँगा किसी दिन गुस्से में !
Monday, November 28, 2022
मिलावटी संसार और हम लोग -सतीश सक्सेना
रविवार को सेक्टर 47 में लगी फॉर्मर मार्किट में एक डेरी वाली महिला (Hetha Organics) से गाय का घी (2000 /kg ) और दूध (150 /kg) के रेट पर बात कर रहा था , तो उनका कहना था कि हमारे फॉर्म हाउस में 1000 गाय हैं उनमें से एक समय में मात्र 200 ही दूध देती हैं मगर इन सबको हमें पूरे वर्ष खिलाना और रखरखाव पर खर्चा करना पड़ता है ! आप एक दिन फॉर्म हाउस पर आकर देखें कि एक किलो शुद्ध घी हमें कितने का पड़ता है ? और यह भी कि हमें नहीं मालुम कि बाजार में शुद्ध घी 500 रूपये किलो कैसे मिल जाता है ?
भारत सस्ता चाहने वालों का मार्किट है यहाँ कोई अखबार उठाकर देखें तो दस पर्सेंट से लेकर 50 पर्सेंट तक घटे हुए रेट के विज्ञापनों की भरमार है , शायद ही कोई दुकान ऐसी मिलेगी जो यह कहती हो कि रेट में कोई रिबेट नहीं मिलेगी अगर कोई यह लिखे भी तो शायद ही उसकी कोई बिक्री होगी ,हम मजबूर करते हैं हम व्यापारी को चोरी करने को , हमें सस्ता चाहिए सो हर व्यापारी भी चालाकी सीख गया तीन गुना कीमत लिखकर 50 प्रतिशत घटे रेट पर सेल , और ग्राहकों की भीड़ आएगी दूकान पर इस तरह से एक चालाक पर दूसरा चालाक हावी होता है ! हमारे यहाँ हर व्यक्ति अपनी अपनी औकात में भरपूर चालाक है !
कल HP वाईफाई लेज़र प्रिंटर ठीक कराने को मैंने एक मैकेनिक घर पर बुलाया , जिसने प्रिंटर खोलकर बताया कि आपका पीसीबी इलेक्ट्रॉनिक कार्ड खराब है इसे बदलना होगा , यह थोड़ा महंगा है , मैंने मुस्कराकर कहा शाब्बाश मगर मेरा कोई कार्ड खराब नहीं है ध्यान से सुनो मेरा प्रिंटर अगर एक स्क्रू कसने पर ठीक हो जाए या कोई पार्ट बदलने के बाद ,तुम्हे फिक्स 2000/- दूंगा , शर्त यह भी है कि कार्ड नहीं बदला जाएगा क्योंकि उसमें कोई खराबी आ ही नहीं आ सकती ! और वह चुपचाप बिना जवाब दिए काम करता रहा , थोड़ी देर में ही वह बिना कोई पार्ट बदले ठीक हो गया , मैंने उसे 2000/- रूपये दिए तो वह बोला क्या करें साहब आप जैसे लोग नहीं मिलते हमें , एक घंटे काम करके हमें कोई 100 रूपये से अधिक खुश होकर नहीं देगा जब तक उस काम को बढ़ा चढ़ा कर न बताया जाए जिसमें एक पार्ट बदलना शामिल हो , 100 रुपया तो आने जाने में पेट्रोल का खर्चा है मेरा, इसके अतिरिक्त काम में लगाया समय, जानकारी और मेहनत को कोई नहीं गिनता !
हम सब चतुर हो गए हैं आजकल , हर आदमी दूसरे से या तो दिखावा करता है या झूठ बोलकर उसका फायदा उठाता है यहाँ तक कि परिवार में बच्चों की छोड़िये माता पिता अपने बच्चों से सफाई से झूठ बोलते दिखते हैं कि हर बात बच्चों को बताने की जरूरत नहीं , धन और पैसे तो कोई बताता ही नहीं , पिता बेटा तक से छिपाता है और उम्मीद प्यार की करता है ! अपने खुद के परिवार में खुले दिल से खुलकर बात न कर पाने वाले लोग , दूसरों के लिए गालियाँ देते , ताल ठोकते लोग, बढ़े हुए रक्तचाप लिए परिवार में लड़ते लोग, सोचते हैं कि रोज सुबह आधा घंटा बिना मन को स्वस्थ बनाये, वाक करने से उन्हें बीमारियां नहीं होंगी , हास्यास्पद है !
हमें गहराई से बिना किसी को गुरु बनाये खुद सोचना पड़ेगा कि खाना पीना और दौड़ना क्यों आवश्यक है, कितना आवश्यक है , आँखें खुल जाएंगी आपकी , खुद कहेंगे कि हमने कभी गौर ही नहीं किया था इस बात पर ! खुद को बदलें तो शारीरिक मानसिक बदलाव अवश्य आएगा, बिना दवा रोगमुक्त होकर आप दुबारा बच्चों की तरह हंसना सीख जाएंगे ! पहचानिये खुद को , झूठ को पहचानना सीखें और खुद को उससे बचाएं ! मन स्वस्थ होते ही सब कुछ खूबसूरत नजर आने लगेगा !
Tuesday, November 22, 2022
ख़याल तुमने किया है कभी इन अंगों का ? -सतीश सक्सेना
Wednesday, November 16, 2022
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा अढसठ साल का -सतीश सक्सेना
- मन प्रफुल्लित रहें , उदास और बेमन आप कभी नहीं दौड़ सकेंगे ! अवसाद और स्ट्रेस दूर करना सीखना हो तो दौड़ना सीखें !
-पूरे दिन में कम से कम १२ गिलास पानी एवं रात का डिनर हल्का और सोने से तीन घंटे पहले करना होगा !
-दौड़ने का समय सुबह ६ बजे के आसपास और खुली जगह में जहां आक्सीजन हो, दौड़ने का अभ्यास करना होगा !
-स्वास्थ्य के लिए दौड़ने में गति का महत्व नहीं, मस्ती से बिना हाँफे दौड़ना अगर नहीं आए तो दौड़ना आपके लिए बेहद ख़तरनाक साबित होगा !
- अंत में अगर आप पसीना नहीं बहा सकते तब दिन में एक बार ही भोजन पर अपना हक़ मानिए ! तीन बार भोजन पर केवल श्रमिक का ही हक़ होता है आप जैसे आलसी और आराम पसंद का नहीं ! सो अगर इसका आनंद लेना है तो सुबह दो घंटे दौड़िए और जम के भोजन खाइए अन्यथा बीमारियाँ झेलने को तैयार रहें ! मुझे देखें ...
मैराथन आसान ,भरोसा हो क़दमों की ताल का
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा अढसठ साल का !
करत करत अभ्यास, पहाड़ों को रौंदा इस पाँव ने
हार न माने किसी उम्र में, साहस मानवकाल का !
इसी हौसले से जीता है, सिंधु और आकाश भी
सारी धरती लोहा माने , इंसानी इकबाल का !
गिरते क़दमों की हर आहट,साफ़ संदेशा देती है !
हिम्मत,मेहनत,धैर्य,ज़खीरा इंसानों की चाल का !
बहे पसीना कसे बदन से, मस्ती मेहनत की आयी !
रुक ना जाना, उठता गिरता रहे कदम भूचाल सा !
Monday, November 14, 2022
बढ़ी उम्र में , कुछ समझना तो होगा, तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा -सतीश
- कोई भी शारीरिक एक्सरसाइज़ निरर्थक है जब तक मन उसे स्वीकार न कर ले , चाहे वह हंसने की चेष्टा, वाक या जॉगिंग ही क्यों न हो ! अपने अपने कष्ट भुलाकर खुलकर हंसना सबसे पहले सीखें इसके फलस्वरूप आयी मस्ती से बाकी सब सीखना आसान हो जाएगा ! इस बिंदु को कई बार पढ़ना और समझना होगा स्वास्थ्य को सही रखने की प्रमुख 10 बातों में यह सबसे महत्वपूर्ण एवं मेडिकल उपचार सबसे अंतिम आवश्यकता होनी चाहिए !
- मानवीय जीवन के लिए आवश्यक हवा , पानी , धूप ,नींद भरपूर लेनी है एवं भोजन उतना ही लें जितनी दिन में मेहनत की हो , बिना पसीना बहाये दिन में तीन बार भोजन करना आपको शीघ्र शारीरिक क्षरण की ओर ले जाएगा ! बिना मेहनत के तीन बार भोजन लेना इस खूबसूरत मानवीय शरीर के प्रति अपराध है ऐसे लोगों को एक बार भोजन करना स्वस्थ शरीर के लिए पर्याप्त है ! कुछ भी अभक्ष्य न खाएं , दूध सिर्फ अपनी मां का पीना था उनका दूध सूखने के साथ ही दांत निकलने के प्राकृतिक अर्थ पर विचार गहराई से करें तो आप जानवरों के शरीर का चर्बी युक्त हानिकारक दूध का निस्संदेह त्याग करने पर मजबूर होंगे ! दूध और मांस भोजन का एक विकल्प मात्र है और यह विकल्प सोचकर ही उपयोग में लाएं !
- मानवीय आलस्य जनित आदतों पर गौर करें , फेफड़ों पर दया करें उनका साइज पर गौर करते हुए उन्हें उतना खोलना सीखें जिसके लिए वे बने हैं आपको बिना गुरु के योग क्या है समझ आएगा और धीमे धीमे खराब हवा में साँस लेने के कारण, आपके गाढ़े होते खून के लिए शुद्ध हवा की जरूरत है , बंद फेफड़े खोलने का प्रयत्न करें !
- पैरों को मानवीय शरीर का आधा हिस्सा मिला है सो दिन के आधे समय में इनका उपयोग करना होगा , इसमें धीमे धीमे दौड़ना शामिल करें मगर हांफते हुए दौड़ने से आप अपने कमजोर हृदय को खतरे में डालेंगे उम्र चाहे कोई भी क्यों न हो, इसे न भूलें ! हर 40 मिनट वाक को बिना हांफे धीमे धीमे दौड़ कर समाप्त करें , इस आदत से आप अगले दो महीने में बिना हांफे दौड़ना सीख जाएंगे !
- दौड़ा या जॉगिंग करना या तेज चलना आपके शरीर में अवस्थित अंगों में कम्पन उत्पन्न करेगा यह कम्पन आपके जीर्ण और आलसी अंगों को फुर्ती देगा एवं सारी बीमारियों को दूर करने में समर्थ होगा , इसे न भूलें !
- बेहतरीन और पूरी नींद लेना हमारी मूलभूत आवश्यकता है , मन से क्रोध अपमान आदि को भुला कर सोने का प्रयत्न करें , मानवीय कष्ट आपको सोने नहीं देंगे , इन्हें भूलकर हंसना सीखना ही होगा तभी बेहतर नींद आएगी याद रखें कि भूतकाल की घटनाएं केवल भूत ही हैं , वे अगर याद हैं तब आपको उदासी की और ले जाने में समर्थ भी होंगी और उदासी के साथ आप हंस नहीं पाएंगे , हंसना भूल जाना ही मौत है ! जब भी कष्ट याद आये उसे थूकना सीख लें क्योंकि इसे साथ लेकर चलना आपका नुकसान एवं कष्ट देने वाले का फायदा करेगा !
- अभक्ष्य न खाएं , पहचान जो चीज आप की जीभ स्वीकार न करें उसे त्यागिये जैसे तेल और चर्बी , क्या आप सरसों के कुछ दाने खा सकते हैं अगर नहीं तब लाखों सरसों के दानों से निकले तेल में तले हुए पकौड़े क्यों , स्वाद को मारना ही होगा !
- एक दिन कस कर मुट्ठी बंद कर रुमाल से बाँध लीजिये और तीन दिन बाद खोलिये आपको महीने भर व्यायाम करना होगा तब जकड़े जोड़ खुल पाएंगे अब घुटने के दर्द की कल्पना करें जिन्हे आप चलाते ही नहीं , सीढ़ी चढ़ना और दौड़ना तो शायद सोच भी न पाएं , मनन करियेगा अपनी भूलों पर !
- आजकल शायद ही कोई इंसान होगा जो वाक न करता होगा मगर उनका थुलथुल शरीर देखिये जिसपर वाक का कोई असर नहीं होता , कभी वाक के ऊपर सोचने का समय निकालिये, उत्तर मिलेगा ! वाक अकेले करें , और उसका उद्देश्य पर विचार करते हुए करें कि आप यहाँ क्या करने आये हैं , गौर करें अपने विभिन्न अंगों पर, उँगलियों पर, पैरों पर , पिंडलियों पर और पेट के उन अंगों पर जो वाक करते समय भी हिल नहीं रहे , फिर आप वाक कर क्यों रहें हैं ? वाक करने का अर्थ 45 मिनट रोज शरीर के फेफड़े , किडनी , लिवर , पेन्क्रियास , हृदय और जोड़ों को व्यायाम कराना होता है न कि दोस्तों के साथ चलते हुए अपने दफ्तर में की हुई बहादुरी का बखान करना !
Friday, October 7, 2022
मानवीय रोग और निराकरण प्रयास -सतीश सक्सेना
Tuesday, August 9, 2022
मानसिक अवरोध -सतीश सक्सेना
Friday, August 5, 2022
रनिंग, तत्काल आपकी जान लेने में समर्थ है -सतीश सक्सेना
खुद मैं पिछले एक वर्ष से न के बराबर दौड़ा हूँ , 2021 में २३०० किलोमीटर दौड़ने वाला मैं इस वर्ष अब तक केवल १७० किलोमीटर ही दौड़ा हूँ ! पिछले डेढ़ महीने से जर्मनी में हूँ और यहाँ के बढ़िया मौसम में भी, न के बराबर दौड़ा हूँ, अधिकतर वॉक या तैराकी में ही हिस्सा लिया जो कि लो इम्पैक्ट व्यायाम है क्योंकि मैं लगातार अपने शरीर से बात करता रहता हूँ , अगर शरीर अनमना है, या कोई समस्या है, तब नहीं दौड़ता, चाहे शरीर में कितनी ही फुर्ती क्यों न हो
















