आज मैराथन रनिंग प्रैक्टिस में दौड़ते दौड़ते इस रचना की बुनियाद पड़ी , शायद विश्व में यह पहली कविता होगी जिसे 21 किलोमीटर दौड़ते दौड़ते बिना रुके रिकॉर्ड किया ! लगातार घंटों दौड़ते समय ध्यान में बहुत कुछ चलता रहता है उसकी परिणति आज इस रचना के रूप में हुई !
न जाने दर्द कितना दिल में लेकर, दौड़ता होगाकभी छूटी हुई उंगली, किसी की, ढूंढता होगा !
सुना है जाने वाले भी , इसी दुनिया में रहते हैं !
कहीं दिख जाएँ वीराने में शायद खोजता होगा !
कोई सपने में ही आकर, उसे लोरी सुना जाए
वो हर ममतामयी चेहरे में, उनको ढूंढता होगा !
छिपा इज़हार सीने में , बिना देखे उन्हें शायद
पसीने में छलकता प्यार, उनको भेजता होगा !
अकेले धुंध में इतनी कसक मन में लिए, पगला
न जाने कौन सी तकलीफ लेकर , दौड़ता होगा !
छिपा इज़हार सीने में , बिना देखे उन्हें शायद
पसीने में छलकता प्यार, उनको भेजता होगा !
अकेले धुंध में इतनी कसक मन में लिए, पगला
न जाने कौन सी तकलीफ लेकर , दौड़ता होगा !















