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Wednesday, February 21, 2024

अगर बहता है बहने दो, तुम्हारी आँख का पानी -सतीश सक्सेना

पिछले तीन माह घर में रहने के दौरान मेरी आँखों का कैटरेक्ट अधिक तेज़ी से बढ़ा , आज दौड़ते हुए बायीं आँख से लगातार गाढ़ा पानी निकल रहा था , अपने हेडबैंड से उसे साफ़ करते हुए , आँखों में ठंडी हवा की ठंडक से ,अधिक बेहतर लग रहा था ! पिछले तीन माह में प्रदूषण के कारण दौड़ना नहीं हुआ नतीजा फेफड़े तो सही रहे मगर आँखों पर दुष्प्रभाव पड़ा , दौड़ते समय प्रभावित आँख से गाढ़ा पानी निकलना ही कैटरेक्ट को दूर रखता था , सोते समय रात को यह गाढ़ा पानी आँखों के अंदर ही रह जाता था और कैटरेक्ट अधिक जमा होता था , सो आँखों का नुक़सान तेज़ी से हुआ !

अधिकतर आँखों से पानी निकलते ही हम डॉ के पास भागते हैं जबकि यह आँखों को स्वच्छ रखने की, शरीर द्वारा अपनायी सामान्य प्रक्रिया है , इससे आँखें स्वच्छ और पारदर्शी होती हैं ऐसा मेरा विश्वास है , पिछले तीन महीने रज़ाई में लेटे लेटे मुझे यह याद ही नहीं आया और आँखों का बहुत नुक़सान हुआ , अब कोशिश रहेगी कि आँखों को स्वच्छ रखने की यह नियमित प्रक्रिया जारी रहे और शायद यह धुंधली परत धीरे धीरे कम हो जाये !  हमारे पूर्वज गुफ़ामानव अपनी आँख के कैटरेक्ट को ऐसे ही ठीक करते रहे हैं , सो पानी निकलता है तो निकलने दें एवं जल से लगातार धोने की आदत , निस्संदेह कैटरेक्ट को दूर रखने में सहायक होगी !

७० वर्ष होने तक मैंने अभी ख़ुद को मेडिकल व्यापारियों के जाल से बचाये रखा है , अगर शरीर आँखों की इस समस्या को ख़ुद ठीक न कर सका तब आने वाले समय में ऑपरेशन कराना ही होगा जो मेरा आख़िरी विकल्प होगा ! आँखों के सामान्य व्यायाम आदि पर अधिक ध्यान देना होगा ताकि आँखें बिना चश्मा आदि के उपयोग बिना अधिक समय तक साथ दें !

जमा होने नहीं पाये , तुम्हारी आँख का पानी  !
यही ठंडक बहुत देगा, तुम्हारी आँख का पानी !

हमेशा रोकने में ही , लगायी  शक्ति जीवन में  !
न जाने कितनी यादों को समेटे आँख का पानी !

शुभकामनाएँ आप सबको !

Tuesday, October 24, 2023

दर्द और बीमारियों से मुक्त जीवन -सतीश सक्सेना

गरबा नामक मशहूर गुजराती नाच, माँ दुर्गा के सम्मान में , खेला जाता है , इसमें बड़ी संख्या में जोड़े हाथ में डांडिया लेकर रंगबिरंगे कपड़े पहनकर मैदान में उतरते हैं , यह उत्सव मनोहारी होता है जिसका जोड़े पूरे साल इंतज़ार करते हैं ! मगर इस वर्ष का डांडिया कई परिवारों के लिए मनहूस खबर बन गया , आजतक की खबर के अनुसार अकेले गुजरात में ही नवरात्रि के मौक़े पर सिर्फ़ २४ घंटे में गरबा खेलते समय १० लोगों की मौत की खबर आ चुकी है , इस नवरात्रि के पहले ६ दिनों में इमरजेंसी एंबुलेंस को 521 कॉल्स सिर्फ़ हार्ट से जुड़े मामलों और साँस फूलने की समस्या के लिए आये ! 

यह चौंकाने वाला तथ्य है , ऐसी खबरें विदेशों से कभी नहीं सुनी गयीं कि मस्ती भरे डांस के दौरान मौत हुई हो , यह हमारे देश में ही संभव है जहां लोग बिना शरीर को जाने एक दिन में शरीर तोड़ मेहनत करने का प्रयत्न करते हैं , और अपनी जान गँवा देते हैं !

मैं ऐसे तमाम मित्रों को जानता हूँ जो सालों साल किसी काम को हाथ नहीं लगाते , दिमाग़ का उपयोग हर विषय पर ज्ञान बाँटने को करते हैं , वे किसी दिन शादी विवाह या अन्य उत्सव में भीड़ के सम्मुख लंबे समय तक झूम झूम कर नाचते या जिम जॉइन करने पर हाथों को मसल्स बनाने के लिए स्ट्रॉंग एक्सरसाइज करते पाये जाते हैं और ख़ुद के शरीर को फिट बनाने का गुमान लिए फिरते हैं ! उनके ब्लॉक माइंड को यह समझ ही नहीं कि उनके सुस्त और ढीली मांसपेशियों को अचानक मिली यह हैवी स्ट्रेचिंग या हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज कितना नुक़सान पहुँचायेगी ! गरबा में अधिकतर असामयिक मौत उन्हीं की हुई होगी जिन्होंने अपने शरीर की ७० प्रतिशत मांसपेशियों का कभी उपयोग ही नहीं किया तथा जिनके विभिन्न जोड़ों और गतिशील पुर्ज़ों में साल्ट जमा हो चुके हैं ! ऐसे लोग जिम या एक्सरसाइज का मौक़ा मिलते ही ख़ुद को बॉण्ड समझकर कूद पड़ते हैं और ख़ुद को एक भयानक ख़तरे में डाल देते हैं और हाल में यही गुमान लिए कितने वीआईपी अपनी जान खो चुके हैं !

याद रखिए जब भी आप फिजिकल स्ट्रेस या हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज ( रनिंग , गरबा जैसे डांस , क्रिकेट , हॉकी, बैडमिंटन  आदि ) खेलते हैं तब आपका पूरा शरीर और उसके नाज़ुक अवयवों की दशा में परिवर्तन होना शुरू होता है और उस वक्त वे विभिन्न तरीक़ों से बर्ताव करते हैं , आपकी साँसें भारी , तेज पल्स महसूस करते हैं, उस समय ह्रदय और फेफड़ों को मसल्स और मस्तिष्क को ऑक्सीजन मिला खून पहुँचाने के लिए बहुत तेज़ी से काम करना होता है , उस समय आप अपने ह्रदय का धौंकना महसूस कर सकते हैं  ! इस वक्त आप ज़मीन पर प्रहार करते हर कदम पर, अपने शरीर के वजन से तीन गुना इंपैक्ट डालते हैं और बॉडी में एंड्रोफ़िन्स नामक हार्मोन्स का उत्सर्जन करते हैं जो इस स्ट्रेस फ़ुल कंडीशन में उत्पन्न दर्द का एहसास शरीर को नहीं होने देता बल्कि एक आनंद अनुभूति देता है जिसमें वह इंसान, और तन्मयता से ख़ुद को उसी कंडीशन में बनाये रखता है, फलस्वरूप अक्सर यह आनंद दायक पल उसे आकस्मिक मौत तक ले जाते हैं !  

जब हम बैठे होते हैं तब हार्ट लगभग ५ क्वार्ट्स पर मिनट पर खून पंप करता है और दौड़ते या आउटडोर स्पोर्ट्स के समय यही २५-३० क्वार्ट्स पर पहुँच जाता है , यह स्थिति थोड़ी बहुत देर तक चल सकती है मगर इसका मतलब यह नहीं कि इसे घंटों तक इसी अवस्था में रखा जाए , अगर लगातार यह स्थिति लंबे समय तक रखी गई तब यह ह्रदय के नाज़ुक मसल्स फ़ाइबर को, ज़ख़्मी कर उसे ख़तरनाक स्थिति में पहुँचाने के लिए पर्याप्त हैं , लगभग ३० प्रतिशत मैराथन ( ४२ km ) धावक दौड़ की समाप्ति होते होते अपना ट्रॉपोनिन लेवल आवश्यकता से अधिक बढ़ा लेते हैं जो कि उनके हार्ट डैमेज होने का परिचायक है ! 

मेहनत करते शरीर को, बढ़े हुए आनंददायक हार्मोन एंड्रोफ़िन के कारण , दर्द रूपी, आसन्न मृत्यु का एलार्म महसूस ही नहीं होता और उसके ज़मीन पर गिरते ही लोग समझते हैं कि कुछ गड़बड़ हुआ है ! हाल के वर्षों में जबसे लोगों में फ़िटनेस चेतना जगी है , ऐसी असामयिक मौतों की जैसे झड़ी लग गई है , अफ़सोस अख़बारों में ऐसी खबरें तभी छपती हैं जब कोई महत्वपूर्ण घटना , समय या महत्वपूर्ण मशहूर लोगों की जान गई हो अन्यथा जाने कितने नासमझ जोशीले धावक अपनी क़ीमती जान हर वर्ष गँवा देते हैं ! 

एक रिसर्च के अनुसार बेहद मेहनत करने का नतीजा ह्रदय में ख़तरनाक परिवर्तन लाना है , ३०-४० किमी प्रति सप्ताह लगातार लंबे समय तक दौड़ने वालों को, ह्रदय आघात का उतना ही ख़तरा रहता है जितना एक सोफ़े पर बढ़कर टीवी देखने वाले आलसी मोटे व्यक्ति को सो जोश में आकस्मिक अधिक मेहनत से ख़ुद को बचा कर धीरे धीरे शरीर को मेहनत करने का आदी बनाइये , यह ही लाभदायक होगा एवं कुछ वर्षों की लगन के बाद शरीर से सारी बीमारियों ग़ायब होते नज़र आयेंगी चाहें उनका नाम कुछ भी क्यों न हो ! इसे ही लागू करते हुए  ७० वर्ष की उम्र के बाद बिना एक भी गोली खाये अपनी बुढ़ापे की तमाम बीमारियों से निजात पाने में सफलता प्राप्त हुई है आप यक़ीन करें या न करें मगर ,मैं शारीरिक तौर पर ४० वर्ष के जवान जैसे सब हरकतें आसानी से करता हूँ , इनमें पेंड पर चढ़ना , हाथ से घर की पेंटिंग करना , भारी वजन उठाकर चलना , तैरना आदि सब शामिल है ! 

सो एक्सरसाइज करें यह शरीर के लिए लाभदायक है मगर अपने शरीर की सीमा को भी याद रखें , मैं ६० वर्ष की उम्र से दौड़ना शुरू कर पिछले दस वर्षों में १०००० km दौड़ चुका हूँ , और इस मध्य ६० हाफ मैराथन ( २१ Km ) दौड़ते हुए इस स्थिति में हूँ कि जब चाहूँ मैराथन ( ४२ km) दौड़ सकता हूँ , मगर पिछले दस वर्षों में आज तक एक बार भी यह प्रयास नहीं किया , कारण मुझे लगातार ढाई घंटे ( २१ km ) दौड़ने के लिए ही समय नहीं निकाल पाता , और विभिन्न रेस में इसलिए नहीं दौड़ता कि रेस स्ट्रेस लेकर दौड़ना अधिक उम्र में अपने ह्रदय को कमजोर करना होगा और इस अब तक इस मूर्खता से ख़ुद को बचाये रखा है !

सो मेहरबानी करके एक्सरसाइज और हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज क्या है इस पर मनन करने का समय निकालें , तत्पश्चात् ही एक्सरसाइज करें और शरीर को हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज का अभ्यस्त बनाने से पहले बॉण्ड बनने की चेष्टा न करें अन्यथा जिम आपकी बिना दर्द महसूस कराये ,जान लेने में समर्थ है , इसे याद रखें !         


Thursday, January 12, 2023

टीशर्ट राहुल गांधी की -सतीश सक्सेना

देखिए जब 69 वर्ष के सतीश सक्सेना टी शर्ट में 7 डिग्री में दौड़ रहे हैं तब राहुल तो नौजवान हैं , मार्शल आर्ट Akido में ब्लैक बेल्ट होल्डर हैं , ऐसे शानदार एथलीट का ठंड में टी शर्ट पहनना भी, ढीले ढाले लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है !
 
विश्वास करिए, ठंड में एक टी शर्ट में बाहर निकलना असंभव नहीं है , बल्कि आप सबको एक एक लेयर कम करते हुए कम कपड़ों में बाहर रहने का अभ्यास करना चाहिए ! १०००० साल पहले लोग गुफाओं में बिना कपड़े ही रहते थे , परिवार सहित !

शरीर बहुत शक्तिशाली है इस पर भरोसा रखें यह किसी भी परिस्थिति में ज़िंदा रह सकता है , इसको शक्तिशाली बनाने के लिए ढेरों हवा , पानी और भूख लगने पर थोड़ा भोजन चाहिये बस !
 
इसकी आदत न बिगाड़िये , प्रमाण आप सबको

Tuesday, November 22, 2022

ख़याल तुमने किया है कभी इन अंगों का ? -सतीश सक्सेना

 कल मैंने पहली बार गौर किया कि मैंने अपनी आँखों का व्यायाम पूरे जीवन नहीं किया और न उनको शक्तिशाली बनाने की चेष्टा की, फिर भी ये आँखें, उपेक्षित होकर भी सात दशकों से अपना साथ दे रही हैं ! सो आज सहज मानवीय बुद्धि से उनका व्यायाम किया और आगे भी करता रहूँगा , यदाकदा चश्मे का उपयोग त्याग रहा हूँ, सो यह पोस्ट बिना चश्मे लिख रहा हूँ !

- शरीर के अन्य अंग जिनका उपयोग कम किया उनमें घुटने शामिल हैं, कल से पाँच मंज़िल से कम ऊँचाई में लिफ़्ट का उपयोग नहीं करना !
ग़र जकड़ जाएँ जोड़ देह के , रोना कैसा
ख़याल तुमने कौन सा रखा इन अंगों का ?

Wednesday, November 16, 2022

साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा अढसठ साल का -सतीश सक्सेना

धीमे धीमे लम्बा दौड़ना सीखिए, बिन प्रयास फेफड़ों का व्यायाम , आपके गाढ़े होते रक्त में, भरपूर शुद्ध आक्सीजन पम्प कर, जमा थक्के घोल, उसे शुद्ध कर, उसका संचार आपके ढीले शरीर में कर आपको स्फूर्ति देगा और आपका डायबिटीज ग़ायब हो जाएगा !आपकी ढीली मांसपेशियाँ इस तथाकथित बुढ़ापे में आपको जवानी का अहसास कराएँगी, इसका भरोसा रखें , बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, पेट की गैस, ख़राब हाज़मा, और कमजोरी कब ग़ायब हो गयी पता भी नहीं चलेगा , साथ ही बॉडी कोर में अवस्थित अंगों में दौड़ते समय महसूस कम्पन, उनके स्वास्थ्य में सुधार कर, अतिरिक्त एनर्जी पाने के लिए आपके शरीर में जमा अनावश्यक फ़ैट को खा जाएँगे और आपका शरीर सुडौल दिखेगा इसका यक़ीन रखें और इस पर विचार करें ! मगर दौड़ना सीखना दुनियाँ के सबसे मुश्किल कार्यों में से एक है इसके लिए आवश्यक है कि

- मन प्रफुल्लित रहें , उदास और बेमन आप कभी नहीं दौड़ सकेंगे ! अवसाद और स्ट्रेस दूर करना सीखना हो तो दौड़ना सीखें !
-पूरे दिन में कम से कम १२ गिलास पानी एवं रात का डिनर हल्का और सोने से तीन घंटे पहले करना होगा !
-दौड़ने का समय सुबह ६ बजे के आसपास और खुली जगह में जहां आक्सीजन हो, दौड़ने का अभ्यास करना होगा !
-स्वास्थ्य के लिए दौड़ने में गति का महत्व नहीं, मस्ती से बिना हाँफे दौड़ना अगर नहीं आए तो दौड़ना आपके लिए बेहद ख़तरनाक साबित होगा !
- अंत में अगर आप पसीना नहीं बहा सकते तब दिन में एक बार ही भोजन पर अपना हक़ मानिए ! तीन बार भोजन पर केवल श्रमिक का ही हक़ होता है आप जैसे आलसी और आराम पसंद का नहीं ! सो अगर इसका आनंद लेना है तो सुबह दो घंटे दौड़िए और जम के भोजन खाइए अन्यथा बीमारियाँ झेलने को तैयार रहें ! मुझे देखें ...

मैराथन आसान ,भरोसा हो क़दमों की ताल का
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा अढसठ साल का !

करत करत अभ्यास, पहाड़ों को रौंदा इस पाँव ने
हार न माने किसी उम्र में, साहस मानवकाल का !

इसी हौसले से जीता है, सिंधु और आकाश भी
सारी धरती लोहा माने , इंसानी इकबाल का !

गिरते क़दमों की हर आहट,साफ़ संदेशा देती है !
हिम्मत,मेहनत,धैर्य,ज़खीरा इंसानों की चाल का !

बहे पसीना कसे बदन से, मस्ती मेहनत की आयी !
रुक ना जाना, उठता गिरता रहे कदम भूचाल सा !

Monday, November 14, 2022

बढ़ी उम्र में , कुछ समझना तो होगा, तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा -सतीश

विकसित समाज में हमने श्रम करना गरीबों का काम मान लिया और जुटाई गयीं सुख सुविधाओं  का उपयोग अपने आराम के 
लिए 
करते समय यह भूल गए कि शरीर लम्बे समय तक किसी भी अभ्यास को आसानी से स्वीकार कर लेता है , और कुछ समय बाद उस आदत से बाहर निकलना उसके लिए असम्भव सा लगने लगता है ! अपने काम खुद न करने का अभ्यास हमारी शारीरिक प्रतिरक्षा शक्ति को बर्बाद करने में सक्षम है !

जब कोई एक्सरसाइज़, योगासन, जिम और स्ट्रेचिंग की बात करता है तब मुझे लगता है कि वह यह करने की कोशिश तो कर रहा है मगर शारीरिक श्रम करने जैसे मानवीय शक्ति के मूल आधार को ही भूल गया है जिसके सामने यह सब मात्र औपचारिकता है ! मेडिकल व्यवसाय का प्रचार इंसान पर इस कदर हॉवी हो चुका है अपने अपने छोटे से बच्चे को चश्मा लगवाते समय वह यह नहीं सोच पाता कि चश्मे का अविष्कार कब हुआ और उससे पहले हजारों वर्षों से हमारे बच्चे और बूढ़े कैसे देखते होंगे ? घुटने का ऑपरेशन करवाना तो हास्यास्पद ही है जो सिर्फ घुटनों का उपयोग न करने के कारण हुआ है ! बिना उपयोग, शरीर का हर अंग मानवीय मूर्खता पर, धीरे धीरे कराहते हुए बर्बाद होता जाता है और हम उसकी कराह और दर्द को बिना समझे मेडिकल व्यवसायियों की और भाग कर, अपने शरीर को सुधारने की कोशिश में और तेजी से नष्ट करते है !

स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही, बढ़ी उम्र में पछताने का मौक़ा भी नहीं देती ! हमें अपनी गलतियां मनन करते हुए समझना होगा कि पार्क में भीड़ के संग हाथ उठाकर हो हो कर हंसने को कोशिश से , निर्मल और मस्त हँसी का लाभ कभी नहीं मिलेगा ! बेहतरीन स्वास्थ्य के कुछ मूल बिंदुओं पर संकेत कर रहा हूँ , मित्रों से निवेदन है हर बिंदु को मनन करते हुए ही उसे पढ़ने का प्रयत्न करें  !
  • कोई भी शारीरिक एक्सरसाइज़ निरर्थक है जब तक मन उसे स्वीकार न कर ले , चाहे वह हंसने की चेष्टा, वाक या जॉगिंग ही क्यों न हो ! अपने अपने कष्ट भुलाकर खुलकर हंसना सबसे पहले सीखें इसके फलस्वरूप आयी मस्ती से बाकी सब सीखना आसान हो जाएगा ! इस बिंदु को कई बार पढ़ना और समझना होगा स्वास्थ्य को सही रखने की प्रमुख 10 बातों में यह सबसे महत्वपूर्ण एवं मेडिकल उपचार सबसे अंतिम आवश्यकता होनी चाहिए  !
  • मानवीय जीवन के लिए आवश्यक हवा , पानी , धूप ,नींद भरपूर लेनी है एवं भोजन उतना ही लें जितनी दिन में मेहनत की हो , बिना पसीना बहाये दिन में तीन बार भोजन करना आपको शीघ्र शारीरिक क्षरण की ओर ले जाएगा ! बिना मेहनत के तीन बार भोजन लेना इस खूबसूरत मानवीय शरीर के प्रति अपराध है ऐसे लोगों को एक बार भोजन करना स्वस्थ शरीर के लिए पर्याप्त है ! कुछ भी अभक्ष्य न खाएं , दूध सिर्फ अपनी मां का पीना था उनका दूध सूखने के साथ ही दांत निकलने के प्राकृतिक अर्थ पर विचार गहराई से करें तो आप जानवरों के शरीर का चर्बी युक्त हानिकारक दूध का निस्संदेह त्याग करने पर मजबूर होंगे ! दूध और मांस भोजन का एक विकल्प मात्र है और यह विकल्प सोचकर ही उपयोग में लाएं ! 
  •  मानवीय आलस्य जनित आदतों पर गौर करें , फेफड़ों पर दया करें उनका साइज पर गौर करते हुए उन्हें उतना खोलना  सीखें जिसके लिए वे बने हैं आपको बिना गुरु के योग क्या है समझ आएगा और धीमे धीमे खराब हवा में साँस लेने के कारण, आपके गाढ़े होते खून के लिए शुद्ध हवा की जरूरत है , बंद फेफड़े खोलने का प्रयत्न करें !
  • पैरों को मानवीय शरीर का आधा हिस्सा मिला है सो दिन के आधे समय में इनका उपयोग करना होगा , इसमें धीमे धीमे दौड़ना शामिल करें मगर हांफते हुए दौड़ने से आप अपने कमजोर हृदय को खतरे में डालेंगे उम्र चाहे कोई भी क्यों न हो, इसे न भूलें ! हर 40 मिनट वाक को बिना हांफे धीमे धीमे दौड़ कर समाप्त करें , इस आदत से आप अगले दो महीने में बिना हांफे दौड़ना सीख जाएंगे  !
  • दौड़ा या जॉगिंग करना या तेज चलना आपके शरीर में अवस्थित अंगों में कम्पन उत्पन्न करेगा यह कम्पन आपके जीर्ण और आलसी अंगों को फुर्ती देगा एवं  सारी बीमारियों को दूर करने में समर्थ होगा , इसे न भूलें  !
  • बेहतरीन और पूरी नींद लेना हमारी मूलभूत आवश्यकता है , मन से क्रोध अपमान आदि को भुला कर सोने का प्रयत्न करें , मानवीय कष्ट आपको सोने नहीं देंगे , इन्हें भूलकर हंसना सीखना ही होगा तभी बेहतर नींद आएगी याद रखें कि भूतकाल की घटनाएं केवल भूत ही हैं , वे अगर याद हैं तब आपको उदासी की और ले जाने में समर्थ भी होंगी और उदासी के साथ आप हंस नहीं पाएंगे , हंसना भूल जाना ही मौत है ! जब भी कष्ट याद आये उसे थूकना सीख लें क्योंकि इसे साथ लेकर चलना आपका नुकसान एवं कष्ट देने वाले का फायदा करेगा !
  • अभक्ष्य न खाएं , पहचान जो चीज आप की जीभ स्वीकार न करें उसे त्यागिये जैसे तेल और चर्बी , क्या आप सरसों के कुछ दाने खा सकते हैं अगर नहीं तब लाखों सरसों के दानों से निकले तेल में तले हुए पकौड़े क्यों , स्वाद को मारना ही होगा !
  • एक दिन कस कर मुट्ठी बंद कर रुमाल से बाँध लीजिये और तीन दिन बाद खोलिये आपको महीने भर व्यायाम करना होगा तब जकड़े जोड़ खुल पाएंगे अब घुटने के दर्द की कल्पना करें जिन्हे आप चलाते ही नहीं , सीढ़ी चढ़ना और दौड़ना तो शायद सोच भी न पाएं , मनन करियेगा अपनी भूलों पर  !
  • आजकल शायद ही कोई इंसान होगा जो वाक न करता होगा मगर उनका थुलथुल शरीर देखिये जिसपर वाक का कोई असर नहीं होता , कभी वाक के ऊपर सोचने का समय निकालिये, उत्तर मिलेगा ! वाक अकेले करें , और उसका उद्देश्य पर विचार करते हुए करें कि आप यहाँ क्या करने आये हैं , गौर करें अपने विभिन्न अंगों पर, उँगलियों पर, पैरों पर , पिंडलियों पर और पेट के उन अंगों पर जो वाक करते समय भी हिल नहीं रहे , फिर आप वाक कर क्यों रहें हैं ? वाक करने का अर्थ 45 मिनट रोज शरीर के फेफड़े , किडनी , लिवर , पेन्क्रियास , हृदय और जोड़ों को व्यायाम कराना होता है न कि दोस्तों के साथ चलते हुए अपने दफ्तर में की हुई बहादुरी का बखान करना !   
मेरा परिचय जान लीजिये , सतीश सक्सेना उम्र ६८ वर्ष , रिटायर होने से पहले जीवन में कभी वाक या व्यायाम नहीं किया , रिटायर होते समय उम्र जनित बीमारियों , जिसमें बीपी और बढ़ा पेट शामिल था को देखते हुए अपने मित्रों से कहा था कि अगले दो साल नहीं जी पाऊंगा , एक फ्लोर चढ़ने पर हांफता था और रुकना पड़ता था ! मगर मन में जीने की इच्छा और बच्चों से और कर्तव्य से प्यार के फलस्वरूप अपने खुद के कायाकल्प का संकल्प लिया था आलस्य का हाल यह था कि सब्जी लेने के लिए भी गाडी चाहिए और कभी दिल्ली के बस में नहीं चढ़ सका कि उसमें भागना पड़ता था !

६१ वर्ष की उम्र से दौड़ना सीखना सिखाया अपने ढीले वाले थुलथुल शरीर को और दो वर्षों में ही 12 किलो वजन घटाने के कारण आये उत्साह में लम्बी दौड़ें दौड़ना शुरू की , अब तक 10000 km दौड़ चुका हूँ  और शरीर हर बीमारी से मुक्त है ! 2021 में 100 days of running विश्व प्रतियोगिता में शामिल हुआ जिसमें 100 दिन लगातार दौड़ते हुए कुल 1849 km की दूरी तय करते हुए पूरे विश्व में दौड़ते हुए 13068 जवानों के मध्य रैंक 88/13068 एवं अपने उम्र ग्रुप (65-69) में 1/58 रहा ! अपने बारे में बताने का उद्देश्य अपना प्रचार न होकर आपको यह बताना है कि मेरे जैसा सुख सुविधा युक्त जीवन जीने वाला आलसी उम्र दराज अगर यह सब कर खुद का काया कल्प कर सकता है तो आप क्यों नहीं ?

डॉक्टरों और ऑपरेशन थियेटर से बचने का एकमात्र विकल्प यही है जिसे मेडिकल व्यवसायी कभी नहीं बताएँगे वे आपके भगवान बना रहना चाहते हैं ताकि आपके शरीर से उन्हें धन लाभ होता रहे  !

सादर प्रणाम आपको शुभकामनाओं के साथ !



  

Friday, October 7, 2022

मानवीय रोग और निराकरण प्रयास -सतीश सक्सेना

मानव व्यक्तित्व की कमियों में , रोजमर्रा की समस्याओं से जूझते हुए उन पर खुद विचार न करना, शामिल है !अधिकतर लोग विचारवान हैं ही नहीं, वे वह हर काम करते हैं जो उनके आसपास सब लोग कर रहे होते हैं , जो दुनिया करे सो करो के कारण उन्हें बिना मानसिक श्रम किये फल व सम्मान जिसकी उन्हें बहुत भूख होती है , मिलता रहता है , मेरे अधिकतर मित्र गण विद्वान है मगर इस वर्ग के साथ दिक्कत यह है कि इनके पास समय ही नहीं कि वे बीमारियों के बारे में एकाग्रचित्त होकर सोच सकें ! उनके पास एक ही चारा बचता है कि वे इस समस्या के विशेषज्ञ के पास जाकर खुद को उसके हवाले कर दें और दवा खाना शुरू कर दें ऐसे लोगों के पास 60 तक पहुंचते पहुँचते कम से कम दो तीन दवाएँ आ जाती हैं जिनका सेवन नियमित तौर पर उन्हें करना होता है ! बिना दवा जीवन उनकी समझ से बाहर की बात है !

शरीर की शक्ति अपरिमित है यह हम सब जानते हैं मगर इस पर मनन कभी नहीं किया , कभी सोचा ही नहीं होगा कि बच्चा माँ के शरीर से निकला उसका एक अंग है , जिसके पैदा होते ही उसके शरीर के ऊतकों अवयवों ने उसके सीने में ,उसके रक्त और चर्बी को खींच कर सफ़ेद दूध बनाना शुरू कर दिया जिससे माँ को असहाय अवस्था में कहीं भटकना न पड़े और इस दूध में वह सब था जो उसके रक्त में पाया जाता था ! मानव शरीर का सारा प्रबंध मस्तिष्क देखता है , अगर कोई कोशिका बेतरतीब बढ़ने लगती है तो शरीर उस कोशिका को अपने ऊतकों / मांसपेशियों से जकड़ कर उसे गाँठ के रूप में बाँध देती है ताकि उनका अनावश्यक विकास न हो जिसे हम कैंसर कहते हैं , गाँवो कस्बों में लाखों लोग, मिल जाएंगे जिनके शरीर में यह गांठें बरसों से हैं मगर शहर में एलोपैथिक लोग उसका तुरंत ऑपरेशन कर उसे हटा देते हैं और उसकी दुआएँ मुफ्त में लेते हैं  ! मुझे याद है ५० वर्ष पहले ऑपरेशन थियेटर दो चार ही होते थे और सर्जन को कोई जानता तक नहीं था मगर आज बिना ओ टी हॉस्पिटल की कल्पना मुश्किल है  ! यह उस असहाय और मूर्ख रोगी से उसके पूरे जीवन की जमा पूँजी खींचने का सबसे बेहतरीन तरीका है

अगर कोई डॉक्टर आपका मित्र हो तो आप जानते होंगे कि उसके घर में एलोपथिक दवाएँ ढूंढने पर भी नहीं होंगी क्योंकि वह अपने परिवार में इन खतरनाक दवाओं का उपयोग ही नहीं करते , वे सिर्फ सामान्य दवाओं का प्रयोग करते हैं चाहें उसमें समय कितना ही लगे , मैं खुशकिस्मत हूँ कि मुझे डॉक्टर मेरे हितैषी हैं जब भी मुझे मेडिकल व्यवसाय की याद आती है मैं उनसे बात कर खुद को हल्का ( रोग भय से ) महसूस करता हूँ  ! 

रोगी को रोग के बारे में बताना और इस तरह बताना कि वह सब ज्ञान भूलकर सिर्फ यह सोचे कि हे डॉक्टर देवता किसी तरह इस बार बचा दे , सर्व शक्तिमान मेडिकल व्यवसाय का एक बड़ा सहारा है , सारा विश्व इसके आगे घुटने टेकने को विवश है , प्रधानमन्त्री , राष्ट्रपति या कोई अरबपति सब इस मृत्यु भय के आगे नाचने लगते हैं जबकि उन्हें इस बात का ज्ञान है कि मैं सामान्य उम्र को पार कर चुका हूँ और मृत्यु आने वाले कुछ वर्षों में होनी ही है , फिर भी आखिरी वक्त ऑपरेशन थिएटर जाने को लालायित रहते हैं कि शायद डॉक्टरों का प्रयत्न उन्हें बचा ले जबकि खुद कोई विश्व प्रसिद्ध डॉक्टर भी 90 साल न जी सका ! हम यह विचार करना ही नहीं चाहते कि बढ़ी उम्र में शारीरिक क्षरण एक सामान्य प्रक्रिया है , मेरा विश्वास है कि अढ़सठ वर्ष की आयु में मेरा शरीर का अढ़सठ प्रतिशत क्षरण हो चुका है और मेरी बची उम्र सत्तर या 85 के हिसाब से दो साल से लेकर 17 साल और है , कल भी मर सकता हूँ  ! मेरा प्रयास शारीरिक क्षरण रोकने पर न होकर सिर्फ अनावश्यक रोगों के शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को नियंत्रण करना मात्र रहता है और इसमें मैं सफल हूँ , देखिये मेरा आज का फोटो ! 

राजकुमार सिद्धार्थ जैसे संवेदनशील लोग जिन्हें मानव कष्टों का कोई ज्ञान नहीं था , एक मृत शरीर पर रोते, बिलखते परिवार जनों को देख इतने विचलित हुए कि घर छोड़कर जंगल में अकेले निकल पड़े , और घने जंगल में एक पेड़ के नीचे बैठकर खुद से प्रश्न करने शुरू किये ,  सैकड़ों नौकरों सहायकों के बिना पहली बार अकेले खाना कैसे खाया होगा , क्या खाया होगा क्या पिया होगा ?इस पर एकाग्रचित्त होकर आज पूरे दिन विचार करें आपकी आँखें और बुद्धि खुल जाएगी ऐसा मुझे विश्वास है  ! असहाय सिद्धार्थ के पास कोई सहायक न था और न किसी को उनका स्थान पता था , वीरान जगह पर उन्होंने सबसे पहले सांस लेते लेते, सांसों की गति पर नियंत्रण करना सीखा क्योंकि उन्हें पता चला गया कि बिना भोजन वे महीनों , बिना पानी कुछ दिनों और बिना साँस मिनटों ही ज़िंदा रहा पाएंगे  ! बीमार अवस्था में आहिस्ता आहिस्ता गहरी सांस लेना है और स्वस्थ शरीर में धौंकनी की तरह साँस लेने से, पेट की तमाम बीमारियों से मुक्ति मिली होगी ! विश्व के तमाम योगियों ने यह विधा अपने आप सीखी और वे कामयाब हुए उन्हें सिर्फ यह समझ आ गया कि शरीर में उपस्थित आंतरिक सुरक्षा शक्ति , असामयिक मृत्यु से रक्षा करने में समर्थ है  !

क्षरण होते शरीर को रोग मुक्त करने हेतु मेडिकल व्यवसाय की शरण में जाना एक आत्मघाती कदम होता है , एलोपैथिक दवाओं का दुष्प्रभाव आपके शरीर को और जल्दी संसार से मुक्ति दिलाने में समर्थ है , उनका उपयोग बढ़ी अवस्था में कम से कम करना चाहिए और केवल उसी डॉक्टर के पास जाना चाहिए जिसपर आपको अपने से अधिक भरोसा हो सिर्फ तभी आप सुरक्षित हैं  !

Wednesday, September 7, 2022

प्रौढ़ावस्था में सावधान -सतीश सक्सेना

अति सर्वत्र वर्जयेत का पालन करते हुए , अपने ६७ वे वर्ष में, अधिक मेहनत न कर, सामान्य वाक पर ही अधिक ध्यान देने के कारण भोजन को भी काफी कम किया है ! मेहनत नहीं तो भोजन नहीं, सूत्र का पालन करते हुए, इन दिनों सिर्फ एक बार खाना खाया , सुबह की ग्रीन चाय, और हलके फलाहार के बाद दिन में लगभग 3 बजे खाना एवं शाम 6 बजे मुट्ठी भर चना या म्युज़िली चाय के साथ लिया सो वजन नहीं बढ़ सका इससे मेरी हाई इंटेंसिटी एक्सरसाइज करने की आवश्यकता नहीं रही और शरीर को सेल्फ मरम्मत करने के लिए, भरपूर आराम भी मिला ! यह बदलाव मेरे शरीर की टूटफूट की तत्काल मरम्मत करने के लिए आवश्यक था जो पिछले वर्ष लगातार 100 दिन में 1850 km दौड़ने/तेज वाक के दौरान हुई थी !

अगर आपको अपने शरीर की सीमाओं का ज्ञान नहीं और आपके अंग आपके मित्र नहीं तब यकीनन वे आपका संग नहीं देंगे और साठ के आसपास वे कभी भी आपका संग छोड़ देंगे , मेरे बहुत सारे मित्र शरीर की इस चीत्कार को अनसुना कर रिटायरमेंट के बाद भी पैसे कमाने के जतन में लगे रहते हैं , यह इस उम्र में बेहद खतरनाक भूल है जो सम्हलने का मौका भी नहीं देगी ! उन्हें चाहिए कि वे अपने थके मायूस और निराश शरीर से मित्रता करें टहलने के दौरान अपने विभिन्न अंगों से बातचीत करते हुए वाक करें , उन्हें शीघ्र पता चल जाएगा कि कौन सा अंग सही काम नहीं कर रहा , इस दौरान अपने शरीर को हिम्मत दिलाते हुए उसे चैतन्य करने का प्रयास करें और सलाह दें कि अगले बीस वर्षों तक जवानी बनाये रखनी है ताकि जीवन का आनंद ले सकें जो जवानी के दिनों कर्तव्य पूरे करने के कारण नहीं ले पाए ! उन्मुक्त मन और खुलकर हंसने के दौरान आप स्पष्ट देखेंगे कि आपका शरीर खिल रहा है !   

आज म्युनिक में काफी समय बाद 6 km आराम आराम दौड़ा हूँ , लगा कि शरीर जैसे खुल गया हो ! इस दौरान दौड़ते दौड़े एक रनर को अपने खींचने का अनुरोध किया जो उन्होंने बखूबी अंजाम दिया , पेश हैं आज के कुछ फोटोग्राफ्स ! 

Friday, August 5, 2022

रनिंग, तत्काल आपकी जान लेने में समर्थ है -सतीश सक्सेना

अजीब अजीब मित्र हैं मेरे यहाँ, वे सिर्फ़ मेरे रनिंग फ़ोटो को देख कर कहते हैं कि मैं भी रनिंग करूँगा, न वे रनिंग के ख़तरों के बारे में जानते हैं और न जीवन में कभी रनिंग की ट्रेनिंग की, अगर मैं उन्हें समझाने की कोशिश करूँ तो भी पढ़ते ही नहीं केवल अपने जोश के बल पर रनिंग करने का विश्वास है उन्हें ! भारत में कम से कम पाँच रनर, हर वर्ष दौड़ते हुए अपनी जान दे देते हैं, वे या तो कम समय में अपने आपको रनिंग एक्स्पर्ट समझने लगते हैं और लगातार बेहतर करने के प्रयास में, दोस्तों से तालियाँ बजवाने में, जान चली जाती है जबकि वे बेहतरीन विद्वान थे, कुछ तो मशहूर डॉक्टर थे , फिर भी वे अपने शरीर की चीत्कार को नहीं सुन पाए और असमय चले गये वह भी उस रनिंग के कारण जो उनकी जान बचाने में सक्षम थी ! पिछली पोस्ट पर मैंने इन ख़तरों के बारे में विस्तार से लिखा है मगर यहाँ ध्यान से पढ़ता कौन है ?

खुद मैं पिछले एक वर्ष से न के बराबर दौड़ा हूँ , 2021 में २३०० किलोमीटर दौड़ने वाला मैं इस वर्ष अब तक केवल १७० किलोमीटर ही दौड़ा हूँ ! पिछले डेढ़ महीने से जर्मनी में हूँ और यहाँ के बढ़िया मौसम में भी, न के बराबर दौड़ा हूँ, अधिकतर वॉक या तैराकी में ही हिस्सा लिया जो कि लो इम्पैक्ट व्यायाम है क्योंकि मैं लगातार अपने शरीर से बात करता रहता हूँ , अगर शरीर अनमना है, या कोई समस्या है, तब नहीं दौड़ता, चाहे शरीर में कितनी ही फुर्ती क्यों न हो

हर किसी को यह पता रहना चाहिए कि रनिंग एक हाई इम्पैक्ट व्यायाम है , इसमें आपका हर गिरता कदम, आपके शरीर से तीन गुना वजन के इम्पैक्ट से टकराता है और ऐसा एक मिनट में २०० बार होता है, इतनी वेग से टकराने से आपके शरीर में भयंकर इम्पैक्ट पैदा होता है जो आपकी जान लेने में समर्थ है!

Thursday, August 4, 2022

माँ, तुम्हें भी स्वयं का, कुछ ध्यान रखना चाहिए -सतीश सक्सेना

डायबिटीज और हृदय के , विश्व में सबसे अधिक रोगी भारत में हैं , लगभग हर चौथा व्यक्ति इसका शिकार है , यह दोनों बीमारियां परोक्ष में पता ही नहीं चलती , मगर धीरे धीरे शरीर को जकड़ती जाती हैं , इनसे मुक्ति पाने का आसान दवा रहित तरीका खुद को फुर्तीला बनाये रखना है , शायद ही कोई बदकिस्मत रनर विश्व में होगा जिसे रनिंग के बावजूद यह बीमारी बची होगी ! लगभग रोज 10000 कदम वाक अथवा 7 km दौड़ना काफी होता है इनसे मुक्ति दिलाने में ! 

इन दिनों हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज बंद कर रखी है सो म्यूनिख में आकर स्विमिंग ज्वाइन कर लो है , घर के पास ही एक बड़ा स्विमिंग सेण्टर है , जहाँ तीन स्विंमिंग पूल है बड़ा इंडोर स्विमिंग पूल जिसमें सामान्य तापमान पर पानी रहता है और अधिकतर प्रोफेशनल महिला /पुरुष तैरते हैं , दूसरा ओपन स्काई, जिसमें गर्म पानी रहता है और तीसरा स्विमिंग पूल बच्चों के लिए हालाँकि मैं बहुत अच्छा तैराक नहीं हूँ सो बिना थके आराम आराम लगभग 60 मीटर तक तैर सकता हूँ  इससे मेरा आजकल का लो इम्पैक्ट एक्सरसाइज का उद्देश्य पूरा हो जाता है !

हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज , उसे कहते हैं जिसमें जॉइंट्स पर भारी इम्पैक्ट पड़ता है , टेनिस , रनिंग जैसे खेल इसमें आते हैं , रनिंग करते समय हर वक्त एक पैर हवा में रहता है , दूसरा पैर जब जमीन पर गिरता है तब वह रनर के वजन का तीन गुने इम्पैक्ट के साथ जमीन से टकराता है, इससे घुटने, लिगमेंट्स और शरीर पर अधिक स्ट्रेस पड़ता है , दौड़ते समय यह क्रिया बहुत तेजी से और लगातार होती है, 21 किलोमीटर दौड़ में एक रनर को लगभग 30000 बार जमीन पर इस भारी वेग से प्रहार करना पड़ता है , अगर घुटने कमजोर हों , तब घुटने बरबाद होने तय हैं !  इस प्रकार एक सामान्य रनर एक मिनट में लगभग 200 बार अपने शरीर का तीन गुना वजन से अपने घुटनों के जोड़ों पर प्रहार करता है , और इतनी ही बार, इसी वेग से , उसकी बॉडी कोर में अवस्थित किडनी लिवर हृदय पेन्क्रियास आदि झटके लेते हैं , मात्र कपड़ों की रगड़ से ही, लगातार ढाई घंटे दौड़ने से , शरीर से खून छलकना आम बात है ! अगर कोई वयोवृद्ध व्यक्ति अचानक दौड़ने का सोचकर बच्चों की तरह दौड़ने का प्रयास करे तो उसके शरीर पर हुए खतरनाक प्रभाव का अंदाज़ा आप लगा सकते हैं ! जहाँ बोन डेन्सिटी, मजबूत करने के लिए इसे बेहतर माना जाता है वहीं ब्लड प्रेशर , मोटापे और कमजोर हड्डियों के इतिहास वाले लोगों को इसे न अपनाने की सलाह दी जाती है !

इसीलिए वृद्ध अवस्था में लोगों को रनिंग की जगह उनके लिए लो इम्पैक्ट एक्सरसाइज की ही सलाह दी जाती है , इसमें वॉकिंग, स्विमिंग , साइकिलिंग , रोइंग , योगा आदि आता है , इसका उपयोग एथलीट अधिकतर आंतरिक चोट रिकवरी के समय या बीच बीच में बॉडी को आराम देने के लिए करते हैं ! रनिंग करने से पहले हर किसी को लौ इम्पैक्ट एक्सरसाइज से ही शुरू करना चाहिए ! तथा दौड़ने के अभ्यास मध्य भी इसे जोड़कर रखना चाहिए तभी शरीर मुक्त मन से इसे अपना पाता है !

एक रनर को एक सप्ताह में एक दिन रेस्ट तथा एक दिन साइकिलिंग ( क्रॉस ट्रेनिंग ) अवश्य करनी चाहिए ! इससे वह आंतरिक तौर  पर घायल होने से बच जाता है , याद रहे जल्दबाजी करने से मसल्स इंजुरी होती है जिसकी रिकवरी में महीनों लगते हैं , इस मध्य दर्द झेलना पड़ता है सो अलग !

सो दोस्तों :
-रोज सुबह फेफड़ों में सांस भरिये निकालिये , शरीर को स्ट्रेच करके खुली हवा में वाक करने निकल जाइये , एक घंटे का एकाग्रचित्त वाक , जिसमें आप अपने अंगों से बातें करते चलेंगे , आपको एक नयी दुनिया में पहुंचा देगा !
-खाना कम से कम स्वादिष्ट और मात्रा में और भी कम , केवल उतना ग्रहण करें जितना आपका हक़ (पसीना बहाने का परिमाण ) है , अगर पूरे दिन मेहनत नहीं की और सिर्फ घर में लेते रहें हैं उस दिन भोजन न करें या नाम मात्र करें !
 - पानी खूब पीना होगा प्यास हो या न हो  
- जानवरों का दूध, केमिकल शुगर एवं समस्त तेल वर्जित हैं , कुछ समय बाद शीशे में खुद को पहचान नहीं पाओगे !
और हाँ दूसरों को गालियां देना , अपनी तकलीफों पर रोना बंद और जो खुशियां सहेजी हैं उन पर हँसना सीखना होगा !  
आज का फोटो देखिये इस सत्तर वर्षीय जवान का (कागजी उम्र 68)

Tuesday, August 2, 2022

खान पान, प्रौढ़ावस्था में -सतीश सक्सेना

पिछली पोस्ट में कई मित्रों का खान पान पर लिखने का आग्रह था , सो यह पोस्ट , बस पोस्ट पढ़ने से पहले दोस्तों से अनुरोध है कि लीक से हठ कर विचार करें तभी बात बनेगी शरीर बदलने के लिए हमें अपनी आदतें बदलनी होंगी , खाने में जो अच्छा लगता है , सारे जीवन खाया उसे त्याग दें जो नहीं खाया उसे खाना शुरू करें , रोटी दाल चावल के बग़ैर भी आधी दुनिया रहती है सो भोजन बदलें , मेहनतकश बनें और आप देखेंगे आपका शरीर भी बदल रहा है !  

अधिकतर मित्र लोग ५० का होते होते , इतने आलसी हो जाते हैं कि शरीर हिलते ही दर्द शुरू होने लगता है और वे सोचते हैं कि हमारी उमर हो गयी है , अब हर काम सावधानी से करना होगा , इस उमर के बाद अपने शरीर को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए , वे महँगे खानपान की तरफ़ झुकते हैं , उन्हें लगता है कि ड्राई फ़्रूट्स , अंडे , प्रोटीन युक्त भोजन आदि अगले सालों में शरीर को पुष्ट रखेगा और वे ऐसा ही करते हैं, बताइए क्या खाना है ? जबकि शरीर को भोजन की सीमित आवश्यकता ही होती है , मेहनत करने पर जितनी ऊर्जा ख़त्म होती है उसकी भरपायी शरीर एकदम सामान्य भोजन से ही पूरी कर लेता है ! जानवरों के दूध या महँगे ड्राई फ़्रूट्स में ऐसा कुछ नहीं होता जो सामान्य खेत की सब्ज़ी और गेहूं जैसे सामान्य फ़ूड में नहीं होता !

कुछ अन्य लोग रनिंग की ओर ध्यान देते हैं और अति कर देते हैं , यह बेहद ख़तरनाक है , हर एक को अपनी शारीरिक क्षमताओं का पूरा ज्ञान होना चाहिए , बिना इसे समझे, शरीर को हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज़ में झोंक देना , आपके ह्रदय को बर्बाद करने में सक्षम है ! याद रखें कि दौड़ते समय बॉडी कोर में अवस्थित उन नाज़ुक अंगों जैसे किड्नी , लीवर , ह्रदय , फेफड़े , पेंक्रियास आदि में तेज कम्पन और झटके लगते हैं जो पिछले कई वर्षों से बेजान जैसे पड़े रहे हैं ,  नतीजा बढ़ा हुआ ब्लडप्रेशर , धौंकनी जैसे चलते फेफड़े , कांपता पाचन तंत्र आपको किसी भी ख़तरे में डाल सकता है ! यह सब करने के लिए आवश्यक है कि सुस्त शरीर को आहिस्ता आहिस्ता चलाना और फिर इन कम्पनों, झटकों को झेलना सिखाया जायँ , इसमें शरीर की दशा अनुसार महीनों अथवा वर्षों लग सकते हैं , सो पहली बात सुस्त शरीर को पहलवान बनाने में जल्दी न करें अन्यथा जान तक जा सकती है !

अब भोजन का मामला उठाते हैं , अधिकतर लोगों को यह विश्वास होता है शरीर को मजबूत रखने के लिए बढ़िया स्वास्थ्यवर्धक भोजन आवश्यक है ! मेरा विश्वास है कि यह बिलकुल आवश्यक नहीं , भोजन विशिष्ट हो या साधारण उसका असर एक ही जैसा होता है , काजू के आटे की बनी रोटियाँ , शुद्ध घी के पराँठे, फ़र्श सलाद खाएँ, ढेरों फल फ़्रूट खाएँ अथवा सामान्य रोटी , दाल और सब्ज़ी जो रिक्शावाला खाता है , असर एक हो होगा ! कोई व्यक्ति, अखाड़े में लड़ने वाला पहलवान, बढ़िया खाना खाकर नहीं बनता बल्कि पूरे दिन पसीना बहाकर मज़बूत शरीर का मालिक बनता है , और उसे भूख भी अधिक इसीलिए लगती है  ओ खाने पर अधिकार उसी व्यक्ति का अधिक होगा जो मेहनत भी अधिक करता हो , कुर्सी पर बैठे व्यक्तियों को दिन में एक बार का भोजन पर्याप्त होगा , बिना मेहनत तीन बार का भोजन करने वाले लोग सिर्फ़ अपने पूर्वजों की लकीर पीट रहे होते हैं जो बेहद मेहनती थे !

हमें अपने भोजन से अखाद्य को निकालना होगा , प्राकृतिक भोजन से बेहतर कुछ नहीं , तेल अधिकतर इंसानों के लिए नुकसान करता है सो उसका त्याग करना होगा , शुगर की जगह गुड़ का उपयोग बेहतर है ! सीमित भोजन आपके शरीर के तंत्र पर अधिक जोर नहीं डालेगा और उसका फायदा अधिक होगा जबकि लोगों की सोच उसके उलट है क्योंकि बचपन से मन में बैठ चुका है , ब्रेकफास्ट , ऑफिस लंच और घर आकर रात को बीबी के हाथ का बनाया डिनर , शरीर की हाय हाय सुनाई ही नहीं देती , पेट का शेप बदलने लगता है तब भी ध्यान नहीं , शरीर बेचारा थक कर उसे भी आखिर अंगीकार कर लेता है !

सो भोजन उतना ही करना चाहिए जितना श्रम किया है , बिना मेहनत भोजन सिर्फ शरीर को बर्बाद करेगा , अनुरोध है कि मेहनत करना सीखें और भोजन घटाना शुरू करें, भूख पर क़ाबू पाने के लिए खाने से आधा घंटे पहले पानी पीने की आदत डालें , पेट भरा लगेगा ! 
अंत में :
- खुद पर विश्वास रखें कि आपका शरीर बेहद ताकतवर है मानसिक तौर पर ताकतवर लोगों पर, उम्र का कोई ख़ास असर नहीं होता , कम उम्र में ही बूढ़े वे लोग होते हैं जो खुद को कमजोर मानने लगते हैं , आप यक़ीन करें ६८ वर्ष की उमर में मैं वह सब काम आसानी से करता हूँ जो कोई ३५ वर्ष का व्यक्ति कर सकता है , अपने शरीर पर अविश्वास आपको बहुत तेज़ी से कमजोर बनाएगा !
-कोई भी संकल्प बेहद कमजोर और क्षणिक होगा अगर आप ख़ुशमिज़ाज नहीं हैं , मस्तमौला रहना सीखें , कष्टों को भूलना आवश्यक है , ख़ुशियों को हर समय याद रखिए दुःख आपके पास आएँगे ही नहीं ! स्वाभाविक हंसी से स्फूर्ति और ताज़गी आपके शरीर को नौजवानों जैसी शक्ति देने में समर्थ है !
-मृत्युभय, अधिक उम्र में आपको संभावित इलाज के लिए , धन जोड़ने के लिए प्रेरित करेगा और आप धन का उपयोग अपनी ख़ुशियों के लिए नहीं कर पाएँगे जबकि यह बेहद आवश्यक है !
-दिखावा , झूठ, नफ़रत और क्रोध को नज़दीक न आने दें आपके चेहरे की रंगत ही बदल जाएगी ! 
 
मंगलकामनाएँ आप सबको ! 

Thursday, July 28, 2022

शरीर में आश्चर्य जनक बदलाव पाएंगे उम्र चाहे जो भी हो - सतीश सक्सेना

सबसे पहला योगी कोई भी हुआ होगा मगर उसे योग सिखाने वाला कोई नहीं था , अकेले सुनसान जगह पर एकाग्रचित्त होकर बैठकर, सांसों पर ध्यान केंद्रित कर शरीर के अंगों तक भरपूर ऑक्सीजन पहुंचाकर आनंद अनुभव करना सीख लिया और अपने अंगों पर ध्यान केंद्रित कर, बॉडी कोर के अंगों को कम्पन देना आया , यही योग था जिससे उन्हें शारीरिक शक्ति के साथ, अपार मानसिक शक्ति की भी प्राप्ति हुई !

जिस प्रकार हम लगातार एक ही भोजन से ऊब जाते हैं उसी तरह से शरीर को भी एक जैसा लगातार व्यवहार पसंद नहीं उसे वह आदत में ढाल लेता है और उसका फायदा उठाना बंद कर देता है , ठीक वैसे ही जैसे बरसों तक साइकिल चलाने वाले को साइकिलिंग का न मिलने वाला लाभ और गांव से कस्बे जाकर नौकरी करने वाला 10 km रोज पैदल आना और जाना बरसों से करता है और उसे कोई फायदा नहीं होता !

लगातार एक जैसा भोजन और वाक में भी बदलाव आवश्यक है और लगातार करते रहना चाहिए , अगर कायाकल्प करने का संकल्प करना है तब आज से ही वह सब खाना बंद कर दें जो आपने अब तक सबसे अधिक खाया है और वह खाना शुरू करें जो आपने आजतक चखा ही नहीं ! खानपान के साथ शारीरिक आदतों में भी बदलाव लाना होगा , हाथ पैरों का अधिकतम उपयोग करना होगा और यह सब अपने शरीर को आहिस्ता आहिस्ता मगर निर्ममता से सिखाना होगा ! आप अपने शरीर में आश्चर्य जनक बदलाव पाएंगे उम्र चाहे जो भी हो !

Tuesday, July 5, 2022

मोटापा एक अनचाही समस्या -सतीश सक्सेना

साठ के बाद अधिकतर लोग खुद को वृद्ध मानना और तदनुसार व्यवहार करना शुरू कर देते हैं जिसका परिणाम उनके शरीर पर तत्काल दिखना शुरू कर देता है ! आसपास के लोग उनसे अधिक गंभीरता और संजीदगी को उम्मीद करते हैं , उनके कपड़ों, रहन

सहन एवं भोजन में बदलाव आ जाता है ! अब इस उम्र में क्या ? का दयनीय भाव लिए ये लोग धीरे धीरे आने वाले समय में , अपनी संभावित मृत्यु की और अग्रसर होते हैं और शरीर भी इस दयनीय दशा को स्वीकार करते हुए तेजी से अपना कसाव भूलकर थुलथुल होना शुरू कर देता है !

मेरे रिटायर होने के बाद , पिछले आठ साल में मैंने खुद अपने बेहतरीन मित्रों को असमय मौत के मुँह में जाते देखा है , डायबिटीज, मोटापा और उसके कारण हृदय आघात उसका बड़ा कारण थे ! मैंने साठ वर्ष के बाद कोई और कार्य न करके, अपने कायाकल्प का संकल्प लिया था और धीरे धीरे खुद को रनिंग (हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज ) सिखाना शुरू किया जिसमें सफल रहा और शरीर में अत्यधिक बदलाव महसूस किया और वजन तो घटना ही था ! सुबह सुबह एक घंटे का तेज वाक अथवा रनिंग , इन्सुलिन के प्रति बॉडी सेंसिटिविटी बढ़ाने में बड़ा रोल अदा करती है ! मेरे तमाम रनर दोस्त डायबिटीज को वर्षों पहले विदा कर चुके हैं !

बढ़ते हुए वजन से सबसे बड़ा खतरा हार्ट आर्टरी में खून के थक्के जमने से हृदय पर पड़ता बोझ है जो अधिक उम्र में घातक होता है , अगर आप सौ कदम तेज चलने से हांफ रहे हैं तब आप खुद को खतरे में मानिये , मेरे अपने विचार से साठ वर्ष में साठ और अस्सी वर्ष में अस्सी प्रतिशत आर्टरी ब्लॉकेज संभव है , यही प्रकृति का तरीका है और इस उम्र के बाद हमें स्वयं को जाने के लिए तैयार कर लेना चाहिए ! साठ वर्ष में किया गया मेडिकल ऑपरेशन आपके जीवन को बढ़ाएगा नहीं बल्कि कुछ नयी समस्याएं ही पैदा करेगा सो बेहतर यही होगा कि अंत तक शरीर को फुर्तीला बनाये रखने का प्रयास किया जाए , इससे न केवल ब्लॉकेज कम होगी बल्कि आप शारीरिक , मानसिक बुढ़ापे से भी मुक्ति पाए रहेंगे !

इन बुरे दिनों, हर किसी की शारीरिक एक्टिविटी घटी है घर में लगातार बंद रहने के कारण, बिना मेहनत किये बढ़िया खाने की मात्रा में बढ़ोतरी, बढ़ते वजन का बड़ा कारण रहा ! मेरी खुद का वजन लाख कोशिशों के बाद भी 2 किलो बढ़ा है , हालाँकि इन दिनों मैं अपने देश में बढे  पॉल्यूशन के कारण कम एक्सरसाइज कर पाया सो खाना भी बेहद कम खाया नतीजा अपने अन्य मित्रों के मुकाबले वजन कम बढ़ा उम्मीद है जर्मनी के स्वच्छ वातावरण में अगले तीन माह अधिक दौडूंगा एवं वजन घटाने में सफल रहूँगा !    

अगर आप मेहनत नहीं कर पा रहे तब खाने पर आपका कोई अधिकार नहीं होना चाहिए , केवल एक समय का भोजन करें , सुबह हल्का नाश्ता एवं डिनर शाम को 4 बजे , रात आठ बजे ग्रीन टी के साथ 4 फीके बिस्कुट काफी होंगे ठाठ से जीने के लिए और यक़ीनन वजन कण्ट्रोल रहेगा ! सुबह स्वच्छ हवा में गहरी साँस भरकर छोड़ने की आदत डालें , एवं जब भूख लगे तभी पानी अवश्य पियें , पूरे दिन में 10-12 गिलास पानी आपकी पुरानी मस्ती वापस लाने में सहायता करेगा , शुगर और मिल्क प्रोडक्ट का त्याग सोने में सुहागा होगा !

अंत में , आखिरी बात नए आधुनिक चुस्त खूबसूरत कपडे पहने बिना इसकी परवाह किये कि लोग क्या कहेंगे  ? अपने बालपन को मत खोने दें उसे वापस लाएं नए मित्र और नए शौक बनाने होंगे और आप इस उम्र में जाग्रत बदलाव देखेंगे !   

प्रणाम आप सबको !
 

Sunday, July 3, 2022

म्युनिक की तीखी धूप में 10 km रन -सतीश सक्सेना

आज म्युनिक में बेहद गर्म दिन था 27 डिग्री मगर सूरज की तीखी किरणों के कारण महसूस 32 डिग्री हो रहा था , ऐसे में पहले किलोमीटर दौड़ते हुए ही महसूस हो गया था कि आज दौड़ना आसान नहीं होगा और शर्ट उतारकर दौड़ना शुरू किया इससे पेड़ों की छाया में दौड़ते हुए, हवा के ठंडे झोंके कुछ आराम दे रहे थे ! आखिरी 300 मीटर में एक जर्मन लड़की ने मुझसे आगे निकलने के लिए चिल्लाते हुए तेज दौड़ना शुरू किया तो मैंने खुद को चैलेंज दिया कि हारना नहीं है और पूरी ताकत से दौड़ते हुए अपने से कम से कम 45 साल छोटी इस लड़की को हरा दिया मतलब अभी इतने बुड्ढे नहीं हुए कि बच्चे आगे निकल जाएँ !

बहरहाल 10 km रन 77 मिनट में पूरा हुआ !


Thursday, May 19, 2022

कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना -सतीश सक्सेना

इन दिनों भयंकर गर्मी पड़ रही है , काफी समय से दौड़ना बंद कर, आराम करने की मुद्रा में चल रहा हूँ ! हानिकारक मौसम में शरीर पर नाजायज जोर न पड़े इस कारण यह रेस्ट आवश्यक भी है मगर सम्पूर्ण आराम के दिनों खाने के चयन पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है ! अन्यथा ट्रकों के पीछे सही वाक्य लिखा ही रहता है कि सावधानी हटी दुर्घटना घटी !

कल दिन में दो बार खाना खा लिया सुबह 11 बजे और रात 8 बजे , आज सुबह घर से निकलते ही, कल की हुई बेवकूफी पता चल गयी ! बेसन की मोटी रोटी और खुद बनाये हुए स्वादिष्ट दम आलू की सब्जी और छाछ, खाने की कीमत पता चल रही थी साथ ही, मेरे कुछ दुबले पतले मित्रों का हाल में बढ़े हुए वजन का राज भी पता चल रहा था ! सो आज उपवास रखना होगा केवल तरबूज के साथ साथ ही अगले पंद्रह दिन सुबह की चाय और बिस्किट भी बंद ताकि प्रायश्चित्त हो इस लालच का !

लम्बे जर्मनी प्रवास में , सुबह सुबह डिपार्टमेंटल स्टोर में जब अस्सी से ऊपर की महिलाओं पुरुषों को अपना सामान साईकिल पर लादकर साइकिल ट्रेक पर तेजी से जाते देखता तो अपने देश के बुजुर्गों की दयनीय दशा अवश्य याद आती थी कि हम मानसिक तौर पर आज भी कितने अविकसित हैं !

जब तक हूँ तब तक कुरीतियों अनीतियों और अन्याय के खिलाफ लिखना तो होगा इस विश्वास के साथ कि लिखा अमर है और रहेगा ताकि जाते समय खुद को यह कष्ट न हो कि हम संक्रमण काल में भी निष्क्रिय रहे !

इस हिन्दुस्तान में रहते , अलग पहचान सा लिखना !
कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना !

दिखें यदि घाव धरती के, तो आँखों को झुका लिखना
घरों में बंद, मां बहनों पे, कुछ आसान सा लिखना !

विदूषक बन गए मंचाधिकारी , उनके शिष्यों के ,
इन हिंदी पुरस्कारों के लिए, अपमान सा लिखना !

किसी के शब्द शैली को चुराये मंच कवियों औ ,
जुगाडू गवैयों , के बीच कुछ प्रतिमान सा लिखना !

व्यथा लिखने चलो तब, तड़पते परिवार को लेकर
हजारों मील, पैदल चल रहे , इंसान पर लिखना !

तेरे मन की तड़प अभिव्यक्ति जब चीत्कार कर बैठे
बिना परवा किये तलवार की, सुलतान सा लिखना !

Tuesday, January 11, 2022

थुलथुल शरीर से मुक्ति चाहिए तो सोच बदलनी होगी -सतीश सक्सेना

क्या आपने एक भी ऐसे मेहनतकश मजदूर को देखा है जो शरीर से थुलथुल हो , तोंद निकाले हुए बोझा ढो रहा हो अथवा फावड़ा चला रहा हो ! कभी सदर बाजार या अपने शहर की व्यस्त मार्किट में जाएँ वहां आपको हाथ गाड़ी में , अपने शरीर के वजन से 10 गुना सामान लादकर खींचते हुए मेहनतकश मिलेंगे जिनके शरीर से पसीना टपक रहा होगा आप देखेंगे कि जब यह इंसान दोपहर में लंच करने के लिए मैले कपडे में बंधी 4 मोटी रोटियां निकाल, बाजार से 10 रूपये के छोले खरीद कर खाने बैठता है तब आपके मन में कोई विचार खुद को सुधारने के नहीं आते , तब यह लेख आपके लिए नहीं है !

आप भले यकीन न करें मगर अपने रिटायरमेंट के बाद (साठ वर्ष बाद ) मैंने अपने कायाकल्प करने के संकल्प में जिस व्यक्ति को गुरु बनाया वह मेरे मोहल्ले में घर के सामने बरसों से खड़ा होता एक अनपढ़ रिक्शावाला है जो पूरे दिन दो महिलाओं / पुरुषों  को बैठा कर कम से कम 3 से 5 km के , 20 चक्कर रोज लगाता है ! मैं हैरान था कि यह मैला कुचैला, बढाए गंदे बालों वाला इंसान , एक दिन में 120 किलो वजन को लेकर 5 किलोमीटर कैसे आता जाता होगा ! अगर 10 घंटों में यह 20 चक्कर भी लगता है तब इसका अर्थ हुआ कि पूरे दिन में इस दुबले पतले इंसान ने 80 km का सफर , कम से कम 100 kg वजन खींचते हुए किया है , यह जानकारी हतप्रभ करने के काफी थी मेरे लिए !

मैंने उससे उसका भोजन पूछा कि कितने अंडे और दूध ,फल रोज खाते हो भाई तो उसने अपना खाने का डब्बा दिखाया जिसमें चार मोटी रोटियां , आलू की सूखी सब्जी और प्याज था ! यह उसका लंच था , रात को घर जाकर दाल रोटी खायेगा, अंडा और दूध और डॉक्टर उसके बजट में ही नहीं थे , थोड़ा दूध घर में लाता है अपने बच्चों के लिए बस , बुखार उखार आने पर लेटना पड़ता है दो तीन दिन में ठीक हो जाने पर फिर काम पर ! जबकि हमारे ज्ञान के अनुसार अगर मैं मेहनत या एक्सरसाइज करता हूँ तब मुझे पौष्टिक खाना मिलना ही चाहिए अन्यथा शरीर बेकार और बीमार हो जाएगा जबकि यह रिक्शे वाला बीस बरसों से यही कर रहा है और सारी जमा पूँजी अपने गाँव माता पिता के पास भेजता है !

थुलथुल शरीर आपके थुलथुल मन का भी परिचायक है इस पर मनन करके देखिये सो अगर थुलथुल काया से मुक्ति चाहते हैं तो खुद को बदलना होगा  ! उन्मुक्त होकर बोलना और हंसना सीखना होगा बिना किसी की परवाह और दिखावा किये कि कोई क्या कहेगा , आप अपनी भावनाओं को बिना दबाये खुलकर व्यक्त करना सीखिए और यह आप तभी कर पाएंगे जब आप दूसरों के प्रति और खुद के लिए ईमानदार होंगे बिना किसी दिखावे के !

दुनिया की हर उस चीज आनंद लेना शुरू करें जिसके लिए मन हुआ और खर्चे या लोगों के कारण उस इच्छा को कही दबा दिया इसमें हर तरह का खाना पीना जो घर में संभव नहीं, शामिल होगा एवं वह सब काम करें जिसके बारे में सुना है, मगर कर नहीं पाए, ढेरों कारणों के कारण, मन मसोस कर रह गए , खुद को एन्जॉय करना सीखें, बिना किसी दिखावे के गर्व रहित प्यार करें खुद को और शरीर को अपना मित्र बनाएं उससे बातें करें उसपर विश्वास करें वह आपको कभी धोखा नहीं देगा ! प्रसन्न मन आपकी इच्छाशक्ति को अदम्य बनाने में समर्थ है ! जी भर कर हंसना सीखें और इसके लिए कंपनी तलाशें ,पार्क में भीड़ में खड़े होकर हो हो करते हुए बनावटी हंसी आपको जोकर बनाने में ही समर्थ होगी इसका रंच मात्र भी फायदा नहीं !

मेडिकल अथवा अन्य विज्ञापनों से प्रभावित न हों हमेशा यह ध्यान रखें कि विज्ञापनों का सुझाव मानने पर अगर आपको खर्च करना पड़ रहा है तो यह सुझाव सफल है उनके व्यवसाय के लिए और आप असफल !
  1. केवल पांच चीजों का ध्यान रखें गहरी साँस लेकर शुद्ध हवा अंदर खींचना शुरू करें, पूरे फेफड़े खोलने का अभ्यास करें महसूस करें कि यह सामान्य सांस नहीं बल्कि प्राणवायु है जो समूचे रक्तप्रवाह को स्वच्छ करती है हृदय की थकान को दूर करते हुए , बेहतर गतिशील बनाती है ! 
  2. दिन भर में 4 लीटर स्वच्छ पानी , खासतौर पर भूख लगने पर पहले पानी ही पियें ! RO ( रिवर्स ओस्मोसिस ) जल से आवश्यक मिनरल्स निकाल देता है यह हानिकारक है ! कोशिश प्राकृतिक शुद्ध पानी लेने की रहे !
  3. टॉनिक ,विटामिन , प्रोटीन भूलकर कोई भी सामान्य भोजन करें कोशिश रहे कि भोजन परिश्रम करने के बाद ही खाएं और मेहनत के अनुसार ही खाएं अगर पूरे दिन कुछ नहीं किया है तब भोजन न करें अथवा न्यूनतम करें !
  4. कम से कम आधा दिन हाथ पैरों का उतनी मेहनत के साथ चलना आवश्यक है जिससे पसीना बहना शुरू हो जाए अगर आप मेहनतकश नहीं हैं तब वाक करना आरम्भ करें इसमें गति, दूरी , समय आदि में बदलाव लाते रहें ! लगातार एकसार किया गया वाक बेकार हो जाता है क्योंकि शरीर इसे स्वीकार कर अपने नियम में ढाल लेता है ! सो इसमें परिवर्तन करें साथ ही यह अकेले करना चाहिए मनन करते हुए शरीर से बात करते हुए न कि दोस्तों के साथ गप्पे मारते हुए !
  5. भरपूर नींद लें , नींद न आने का कारण आप खुद और आपके लगातार घुमड़ते विचार होते हैं , अपने मन से चालाकी, क्रोध  और समझदारी का त्याग करें बच्चों जैसा निर्मल मन लेकर सोने जाएँ एक दिन तकिये पर सर रखते ही नींद आएगी !
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Monday, November 1, 2021

परीक्षा मानव शक्ति की -सतीश सक्सेना

आज लगातार दौड़ते हुए सौवाँ दिन था , इस बार अपनी शक्ति और सामर्थ्य की खुद परीक्षा लेनी थी , भरोसा था पिछले छह वर्षों की सतत
मेहनत और अपने ऊपर विश्वास का जिसके कारण यह एग्जाम पास किया इसमें आप सब मित्रों का प्रोत्साहन और साथ शामिल था , उसके लिए आप सबको प्रणाम !

इन सौ दिनों में तमाम अनुभव हुए, साठ बार 21 km या अधिक दौड़ना और दो बार लगातार 10 दिन तक रोज हाफ मैराथन (21 Km) दौड़ा , रोज लगभग 3 से चार घंटे दौड़ने के कारण वजन बेहद तेजी से घटा और अधिक पौष्टिक भोजन लेने का ध्यान नहीं रखने के कारण दो या तीन बार रुकने पर, चक्कर आते प्रतीत हुए तब यह अहसास हुआ कि इतना अधिक पसीना ( लगभग 3 लीटर रोज ) बहने से शरीर से आवश्यक साल्ट्स सोडियम, कैल्सियम, मैग्निसियम की कमी काफी हुई है और इसका नतीजा जीवन में पहली बार कमजोरी महसूस हुई अतः अगले दिनों नियमित खाना छोड़ 3 कोर्स मील्स लेना शुरू कर दिया , इससे धीरे धीरे सामान्य महसूस करने लगा और सौ दिन पूरे हुए , फायदा यह हुआ है कि 20 km लगातार दौड़ने पर भी पैरों में थकान का नाम नहीं है ! पिछले सौ दिन में 1849 km दौड़ा हूँ एवं पूरे विश्व में दौड़ते 13073 लोगों में मेरा रैंक 68 रहा , यह मेरे लिए भी अविश्वसनीय है , भरोसा नहीं होता कि मैं 67 वर्ष की उम्र में लगातार 100 दिन तक रोज 19 km दौड़ पाया हूँ !

कई बार घुटने में दर्द कमर दर्द हार्ट पल्पिटेशन आदि ने परेशान अवश्य किया मगर भय और चिंता को कभी खुद पर हॉवी नहीं होने दिया , और नतीजा आनंददायक मिला ! शरीर का सारा अनावश्यक फैट गायब और न थकने वाली अथाह शक्ति , और जवानी किसे कहते हैं, इसका अहसास और आखिरकार मैंने कायाकल्प कर दिखाया ! यहाँ लिखने का उद्देश्य सिर्फ अपने हम उम्र साथियों को विश्वास दिलाना मात्र है कि मानव शरीर पर भरोसा न छोड़ें वह बेहद शक्तिशाली है !

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
दर्द सारे ही भुलाकर, हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !
जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !
जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के , धीमे धीमे दौड़िये !

Saturday, July 17, 2021

जकड़े घुटने पकड़ के बैठा , ढूंढ रहा उपचार आदमी -सतीश सक्सेना

दौड़ते समय घुटनों को नुकसान न पहुँचने पाए इसके लिए कृपया बताइए कि क्या करना चाहिए? मेरे एक मित्र संजय त्रिपाठी का इस प्रश्न का जवाब लगभग हर पोस्ट में देने का प्रयत्न करता हूँ ! #healthblunders लिंक पर मेरे वे लेख दुबारा ध्यान से पढ़ेंगे तो जवाब स्पष्ट मिलेगा , संक्षिप्त में कहूं तो घुटने में नुकसान केवल उन्हें होता है जो घुटनों को बहुत जतन से संभाल कर रखते हैं या बहुत दुरूपयोग करते हैं , घुटने हों या शरीर के अन्य अंग प्रकृति ने उन्हें उपयोग के लिए ही बनाया है , उनका भरपूर उपयोग होना चाहिए अगर नहीं किया है तब जॉइंट जकड जाएंगे ! सो शुरू करें उन्हें प्यार से चलना सिखाना वे आपको सौ वर्षों तक साथ देंगे !

आज से एक रनिंग प्रोग्राम ज्वाइन किया है जिसमें अगले ३० दिनों में कम से कम 194.7 km दौड़ना या साइकिलिंग करना होगा  ! कोच रविंदर सिंह का यह प्रोग्राम बाँध कर रखेगा मुझे एक माह तक लगभग रोज 7 km दौड़ना होगा या साइकिलिंग करना है मगर हर हाल में  195 km पूरे करने होंगे और निस्संदेह 66+ वर्ष के नौजवान के लिए यह बिलकुल मुश्किल नहीं है !

सो आज पहले दिन काफी दिन से खड़ी साईकिल राइडिंग के लिए उसका हेलमेट , हैंड ग्लव्स , शार्ट , रेफ्लेक्टेड जर्सी , फ़्लैश लाइट , वाटर बोतल , जीपीएस वाच , strava अप्प , स्पोर्ट्स शू , आई कार्ड , कुछ रूपये , गॉगल्स , हेड बैंड , स्माल टॉवल , एक्स्ट्रा टायर , टूल्स , एयर पंप , आदि संभाल कर रात को ही तैयार कर इकठ्ठा रख दिए थे ! सुबह सुबह ५ बजे वाच में से स्पोर्ट्स अप्प स्ट्रावा में साइकिल राइड ऑन कर चल दिया दिल्ली की और डीएनडी से आश्रम , इंडिया गेट , प्रगति मैदान , निजामुद्दीन ब्रिज , मयूरविहार होते हुए लगभग 7 बजे घर बापस पंहुचा तो पूरा शरीर पसीने के साथ आनंदमय था कि आज बहुत दिन बाद साइकिल से की गयी यात्रा 30.69 km को 17 km प्रति घंटा की एवरेज स्पीड से तय करने में 1:52 का समय लगा !  इस पूरी यात्रा में कोई कष्ट हुआ तो वह प्रगति मैदान की दुर्दशा देखकर हुआ जिसे डेवलपमेंट की भेंट चढ़ा दिया गया ! राजधानी में यही एक मात्र जगह थी जहाँ बच्चे हमेशा चहकते हुए मिलते थे ! 

अब तक मैं पिछले लगभग छह वर्ष में अपने काया कल्प अनुष्ठान में कुल 7225 km दौड़ने के साथ साथ 2760 km साइकिल भी चला चुका हूँ जो कि लम्बी दौड़ के रनर के लिए बहुत आवश्यक है ! मजबूत जांघों के मसल्स के लिए साईकिल चलाना बहुत आवश्यक है , इससे चोटिल होने का खतरा कम हो जाता है !

अंत में मित्रों से दुबारा अनुरोध है कि उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि उन्हें रनिंग बिलकुल नहीं आती है और न उनके शरीर को , उन्हें भूल जाना होगा कि रनिंग करने में कुछ नहीं है इसमें सीखना क्या ? बिना शरीर को सिखाये हुए रनिंग आपकी जान लेने में समर्थ है सो अपने सुस्त और वजनदार शरीर को मेहरबानी कर धीरे धीरे रनिंग सिखाएं जिस दिन आपका शरीर दौड़ना सीख गया उस दिन आप खुद को शीशे में पहचान नहीं पाएंगे !
शुभकामनायें !



Wednesday, July 14, 2021

उनसे कहिये, चलने का अंदाज बदल लें -सतीश सक्सेना

Strava नाम का एक अप्प रनर्स और साइकिलिस्ट में बहुत पॉपुलर है यह दौड़ते हुए न केवल हमारी रनिंग /वाकिंग के टाइमिंग पर नजर रखता है बल्कि हमारे रुट को ट्रेक भी करता है ताकि हमें अपना सम्पूर्ण हेल्थ डाटा मिल सके , इसके अनुसार सतीश सक्सेना उम्र 66+ ने 2015 सितम्बर से लेकर अबतक दौड़ते हुए 7216 Km की दूरी तय की है , इसमें 10 km की दूरी का उनका सर्वश्रेष्ठ समय 64 मिनट्स और 21.10 Km की रनिंग का समय 2:16:31 रहा ! शुरुआत में लम्बी दूरी तय करते हुए अधिकतम हार्ट रेट चिंताजनक 200 तक पंहुच जाता था जो समय के साथ धीरे धीरे कम होता हुआ अब 165 के आसपास रहता है जो काफी संतोषजनक है !

रनिंग एक हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज है जो कि कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को बेहतर करने के साथ साथ हड्डियों को मजबूत करने में भी सहायक है ! दौड़ते समय रनर के हर गिरते हुए कदम पर, रनर के शरीर के वजन का तीन गुना इम्पैक्ट उसके घुटने पर पड़ता है जो कि उसकी कमजोर आंतरिक मसल्स को चोटिल करने को पर्याप्त है , अतः दौड़ने की शुरुआत करने से पहले शरीर को उसे झेलने हेतु ,धीरे धीरे अभ्यस्त बनाना होता है ताकि शरीर के अवयव इस शानदार हाई इंटेंसिटी क्रिया को आसानी से वर्दाश्त कर सके !

दौड़ने से आपके हृदय और फेफड़ों के कार्य में आश्चर्यजनक सुधार के अतिरिक्त , मसल्स का मजबूत होना , बेहतर नींद और स्वच्छ खून , पेट के रोग , बढ़ा हुआ वजन , डायबिटीज, हृदय रोग और हाइपरटेंशन गायब होते नजर आते हैं !

ध्यान रहे दौड़ते समय आपके पूरे शरीर के हर आंतरिक अवयव में जबरदस्त इम्पैक्ट और कम्पन लगातार होता है , जिससे पूरे शरीर में हलचल होती है और फेफड़े व् हृदय अपने पूरी गति के साथ ऑक्सीजन खींच कर खून में पम्प करते हैं , अगर आप दौड़ते समय अपने हर गिरते उठते कदम के साथ साँस नहीं ले पा रहे हैं तब आप ऑक्सीजन की कमी के कारण शीघ्र हांफने लगेंगे और कुछ कदम दौड़ने के साथ ही थक कर रुकने को विवश हो जाएंगे अतः दौड़ते समय सांसों को कदमों के साथ लयबद्ध करना आवश्यक होता है !

अब इतने वर्ष दौड़ने के बाद मैं अपने आपको एक सहज रनर मानता हूँ उक्त सारी बीमारियां  पता ही नहीं कहाँ गायब हो गयीं और अब सुबह की लम्बी दौड़ के बाद शरीर से टपकता पसीना वरदान जैसा लगता है साथ ही पूरे दिन मूड की मस्ती मुफ्त ! 
सो आइये गुनगुनाएं  ...

सुनी सुनाई खबरों पर,एतबार बदल लें !
झूठी खबरों के सस्ते अखबार बदल लें !

चलते, अहंकार की चाल,नज़र आती है !

उनसे कहिये,चलने का अंदाज बदल लें !




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