शपथ उठाए संविधान की
Wednesday, January 4, 2023
अरे चीथड़ों कब जागोगे -सतीश सक्सेना
शपथ उठाए संविधान की
Friday, December 9, 2022
हम पाखंडी -सतीश सक्सेना
अगर लेखक हैं और आम लोगों में मशहूर होना है तो सबसे पहले नाम बदलिए , बेहतरीन सांस्कृतिक नाम रखिए, दाढ़ी बढ़ा लीजिए बड़े बाल कंधे तक बनाइए, खादी कुर्ता पजामा, चेहरे पर गंभीरता , और कुछ चेले लेकर चलना शुरू करें फिर देखिए जलवा !
सबसे बढ़िया धंधा करना हो तो बाबा बन जाइए, सतीश सक्सेना जैसे बकवास नाम की जगह सत्यानंद सरस्वती अधिक प्रभावशाली रहेगा, दाढ़ी और सर के बाल बढ़ाकर नारंगी रंग की धोती पहनिए, पैरों में खड़ाऊँ हों तो क्या कहने, राह चलते लोगों में पैर छूने की होड़ लग जाएगी , आशीर्वाद दो और धन बरसने लगेगा !
और अगर 69-70 की उम्र में आकर, टी शर्ट, शॉर्ट पहन लिया तब लोगों से यह सुनने को तैयार रहिए, चढ़ी जवानी बुड्ढे नू ! मन को मारना सीख ले, इस उम्र में यह रंग, सब लोग क्या कहेंगे !
अभी हमें मानसिक तौर पर विकसित होने में, कम से कम 100 साल लगेंगे !
Saturday, February 26, 2022
बंदरों के हाथ में , परमाणु बम है -सतीश सक्सेना
1991 में, यू एस एस आर का विघटन एक ऐतिहासिक घटना थी जिसने इस विशाल विश्व शक्ति को 15 देशों में विभाजित कर दिया , अर्मेनिया , अजरबैजान , बेलारूस , ऐस्टोनिआ , जॉर्जिया , कज़ाख़िस्तान करिगिस्तान ,लैटविआ , लिथुआनिया ,माल्दोवा, रूस ,तज़ाकिस्तान , तुर्कमिनिस्तान , उक्रैन और उज़्बेकिस्तान और इस घटना की जिम्मेवारी तत्कालीन राष्ट्रपति गोर्वाचेव की बनायी
नीतियां रहीं जिनके द्वारा उन्होंने इस महान कम्युनिस्ट शासन के हर राज्य को लोकतान्त्रिक तरीके से अपना निर्णय खुद लेने की आज़ादी दी गयी थी और जिसके फलस्वरूप यह विशाल संयुक्त देश 15 देशो में बंट गया जिसमें सबसे बड़ा राज्य रूस भी शामिल था , लिबरल गोर्बाचेव ने इस्तीफा दिया और समस्त न्यूक्लियर हथियारों के साथ रूस की कमान रूढ़िवादियों के हाथ आ गयी !
और तब से लेकर अब तक इन नव विभाजित देशों में अपनी रक्षा के प्रति संशय भावना जुडी रही , वे रूस और उसकी विचारधारा से बचने के लिए शक्तिशाली नाटो देशो के समूह में शामिल होना चाहते थे और इन देशों में उक्रैन सबसे आगे था और रूस के लिए ऐसा होने का अर्थ, अपनी सीमाओं को नाटो देशों से मिलाना था जिसे वह अपने लिए सीधा ख़तरा मानता आया है , वह नहीं चाहता कि उसके दरवाजे पर नाटो देश दस्तक दें अपनी नाराजी और रुख उसने उक्रेन को सीधी वार्निंग देते हुए साफ़ कर दिया कि अगर वह नाटो में शामिल होता है तब मुकाबले के लिए तैयार रहे स्वाभाविक है उक्रैन ने इसे नकार दिया और नाटो देशों ने उक्रैन का साथ भी दिया !
इन दिनों रूस ने उक्रैन पर सैनिक आक्रमण कर दिया है और शायद किसी भी समय उक्रैन आत्मसमर्पण करने को मजबूर होगा वह अपने से सैकड़ों गुना शक्तिशाली रूस के आगे कुछ दिन भी टिक पायेगा इसमें शक है !
मगर इसी परिप्रेक्ष्य में रूस और नाटो की तरफ से जो वक्तव्य दिए जा रहे हैं वे विश्व के समझदार हिस्से के लिए चिंतित करने के लिए काफी है ! नाटो का कहना है कि किसी देश की सम्प्रभुता की रक्षा होनी चाहिए जिसमें उसे अपनी रक्षा हेतु समझौते अपनी इच्छानुसार करने की स्वतंत्रता है इसका आदर होना चाहिए ! मगर रूस ने उक्रैन की तरह ही फ़िनलैंड और स्वीडन को भी राजनैतिक एवं सैनिक परिणाम भुगतने को तैयार रहने के लिए वार्निंग दी है कि वे नाटो में शामिल होने की न सोचें और रूस अपने विचारों में इतना दृढप्रतिज्ञ है कि उसने अमेरिका और नाटो जॉइंट कमांड की सभी चेतावनियों पर कोई ध्यान भी नहीं दिया ! दूसरी तरफ स्वीडन और फ़िनलैंड के इरादे नाटो में बिना शामिल हुए उसकी सुरक्षापंक्ति में शामिल होने के विकल्प तलाशना है जिसे रूस स्वीकार नहीं करता !
यूनाइटेड नेशंस एक ऐसा बौना दफ्तर है जिसे पता है कि हमारे हाथ में कुछ नहीं है , जिसके बाबुओं ने हमारे देश से सीख लिया है कि आठ घंटे की ड्यूटी करनी है जिसमें लंच ऑवर एक घंटे पहले और एक घंटे बाद तक होना है ! दफ्तर आते समय और जाते समय की चाय और पकौड़ी आवश्यक पहले से ही हैं ! बिना किसी झंझट के मोटी तनख्वाह जेब में डालो और चलो भइया घरै !
वीटो पावर के आगे सुरक्षा परिषद मात्र अपील कर पाने की क्षमता रखती है यह सिर्फ उस देश को बचा पाती है जब समस्त वीटो पावर देश एकमत हों अन्यथा उसका कोई अर्थ नहीं !
रूस ने समुद्र में न्यूक्लियर एक्सरसाइज शुरू कर दी है जिसमें हाइपरसोनिक एवं क्रूज़ मिसाइल का उपयोग शामिल है ! इस प्रकार की हर एक मिसाइल एक या अधिक न्यूक्लियर वारहेड से युक्त हो सकती हैं तथा इनके चलने के साथ, इन्हें रोकने का कोई विकल्प विश्व में किसी के पास नहीं है , क्योंकि इन्हें रोकने के लिए दागी गयी एंटी मिसाइल भी इन्हें एक एटॉमिक बम में ही तब्दील करेगी !
इस मध्य विश्व का ध्यान नार्थ कोरिया , चीन , और पाकिस्तान की और है कि यह किसका पक्ष लेंगे ! हमारे देश पर दोनों की निगाह रहेगी कि हम अपनी स्थिति स्पष्ट करें जो बेहद संवेदनशील है ! पूरे विश्व की नज़रें इस समय चीन भारत इज़रायल ईरान नार्थ कोरिया और पाकिस्तान पर टिकी हैं , फिलहाल चीन और भारत ने सुरक्षापरिषद की वोटिंग से अनुपस्थिति रहना ही पसंद किया है और अपना निरपेक्ष रहना ही उचित माना है !
Tuesday, February 16, 2021
45 वर्ष की उम्र में नीरसता क्यों -सतीश सक्सेना
अधिक मिलेगा , दयनीय हाल बना दिया है हमने अपने समाज का और इसके जिम्मेदार हम अधेड़ावस्था के लोग ही हैं जो भुक्तभोगी होने के बावजूद, अपने ज़िंदा रहते, व्यवस्था परिवर्तन की कोशिश करते, युवाओं का मजाक बनाते हैं और उन्हें चोरी करने पर मजबूर करते हैं सो झूठ और चोरी करना हमारे व्यवहार का हिस्सा बन गया है हम एक बीमार अपराधी समाज का अंग बन कर रह रहे हैं और ऐसे ही मरना हमारी नियति है !
Friday, June 26, 2020
पंहुचेंगे कहीं तक तो प्यारे,ये कपोत दिलेर,हमारे भी -सतीश सक्सेना
खस्ता शेरों को देख उठे, कुछ सोते शेर हमारे भी ! सुनने वालों तक पंहुचेंगे, कुछ देसी बेर हमारे भी !
पढ़ने लिखने का काम नहीं बेईमानों की बस्ती में !
बाबा-गुंडों में स्पर्धा , घर में हों , कुबेर हमारे भी !
चोट्टे बेईमान यहाँ आकर बाबा बन घर को लूट रहे
जनता को समझाते हांफे, पुख्ता शमशेर हमारे भी !
जाने क्यों वेद लिखे हमने, हँसते हैं हम अपने ऊपर
भैंसे भी, कहाँ से समझेंगे, यह गोबर ढेर, हमारे भी !
फिर भी कुछ ढेले फेंक रहे ,शायद ये नींदें खुल जाएँ !
Friday, May 10, 2019
यज्ञ सदियों तक चले, जडबुद्धि अभ्युत्थान में -सतीश सक्सेना
कौन आएगा नमन को , मेरे हिंदुस्तान में ?
धूर्तों ने धन कमाने , घर में, कांटे बो दिए !
रोयेंगी अब पीढ़िया, परिवार पुनरुत्थान में !
कौम सारी हो चुकी बदनाम , बहते खून से ,
कई युग बीतेंगे अपनी क़ौम के भुगतान में !
यज्ञ सदियों तक चले जडबुद्धि अभ्युत्थान में !
इस मदारी राज में सब , दिग्भ्रमित से हैं खड़े
औ लगाओ जोर हइन्सा राज ध्वजोत्थान में !
Tuesday, April 9, 2019
आदत भोजन की -सतीश सक्सेना
घर में बैठना एक अभिशाप है ख़ास तौर पर बड़ी उम्र वालों के लिए , सुबह नाश्ता ९ बजे से पहले , 12 बजे दाल चावल रोटी सब्जी अचार और चटनी के साथ, चार बजे लोंग इलायची की चाय के साथ श्रुस्बेर्री चाय बिस्कुट , 6 बजे लॉन में बैठकर मेहमानों के साथ चाय और आठ बजे स्वादिष्ट डिनर और तोंद पर हाथ फिराकर सो जाना, और सबसे बड़ी बेवकूफी यह है कि उम्र के नाते हमने खुद अपने हाथ से कुछ नहीं करना पूरे दिन , सब कुछ आर्डर देते ही हाजिर हो जाता है ! मतलब अभिशप्त बुढापे की हॉस्पिटल मौत साक्षात सामने है और दिखती नहीं !
अधिक उम्र में सुस्वाद भोजन , जान देने की जगह जान लेने में समर्थ है , भारत में हर चौथा व्यक्ति हार्ट आर्टरी में रूकावट और डायबिटीज से पीड़ित है और ५० वर्ष से अधिक का हर आदमी बढ़िया भोजन पर ध्यान केन्द्रित किये रहता है , यह घातक है यह उन्हें मेडिकल व्यवसाय के निर्मम कसाइयों की तरफ ले जाएगा !
हम बुजुर्ग पूरी दुनिया को लंबा जीने का आशीर्वाद देते रहते हैं जबकि अपने ऊपर कोई नसीहत लागू नहीं ! मगर इस बार चार दिन पहले खुद को गरियाने का असर वाकई हुआ उस दिन लिये संकल्प ने भूख की इच्छा ही खत्म कर दी इस परिणाम से मेरे इस विचार को दृढता मिली कि शरीर आपके मन से चलता है इसकी आवश्यकताएं न्यूनतम हैं ! हम जैसी आदत डालेंगे शरीर उसी में जीवनयापन करने में समर्थ है !
दुसरे दिन सुबह एक बड़ी प्लेट टमाटर काला नमक और नीम्बू के साथ और शाम को फिर पपीता ...
तीसरे दिन सुबह तरबूज ढेर सारा और शाम जीरा लौकी की सब्जी बड़ी प्लेट ...
आज चौथे दिन सुबह तरबूज ढेर सारा और पूरे दिन शिकंजी , ग्रीन टी और
यह पहली बार हुआ है कि चार दिनों में वजन ढाई किलो कम हुआ बिना भूख लगे , न कोई कमजोरी न सरदर्द !
अब आज से अपनी जबान पर कंट्रोल रखूंगा , काम नहीं तो भोजन नहीं इस व्रत का पालन पूरी शिद्दत से करूंगा इस भरोसे के साथ कि बिना काम किये खाना शरीर की जरूरत है ही नहीं , बिना भूख लगे भोजन करना ही नहीं है, चाहे कितने दिन हो जायें !
Thursday, February 28, 2019
निरंकुश मीडिया बर्बाद कर देगा इस शानदार देश को,समाज को -सतीश सक्सेना
पिछले कुछ वर्षों में , हमारे देश में नफरत की खेती खूब की गयी है और उसका नतीजा भी नजर आने लगा है, मेरे अपने सर्किल में कई सरल ह्रदय व्यक्तियों के व्यवहार में फर्क आया साफ़ महसूस हो रहा है , पडोसी देश के प्रति उत्पन्न की गयी यह नफरत अब मोहल्ले, घर और ट्रैफिक में भी नजर आ रही है , सोशल मीडिया पर जिनके विचार हमसे न मिलें उन्हें अमित्र करना आम है ! अफ़सोस यह है कि नफरत फ़ैलाने वाले अधिकतर भोले लोग, यहाँ तक कि छोटे बच्चों तक के मानस में , टीवी पर चीखते एंकरों की बाते, अमिट निशान छोड़ रही हैं !

सीधा साधे शांत देश को , जिसमें समस्त जाति ,कौम के लोग आराम से रह रहे थे, इन लोगों ने अपने घरों में भी बच्चों को झाग उगलते हुए गाली देना सिखा दिया है जिसे सब जोश के साथ आसानी से आत्मसात भी कर रहे हैं , इन जाहिलों को यह नहीं मालुम की स्नेह और प्यार की जगह अनजाने में तुम अपने घर में जहर बो रहे हो जिसकी आग में सबसे पहले तुम्हारे बच्चे ही झुलसेंगे जिन्हें इस माहौल में ही पूरी उम्र जीना है ! मानव की मानव के प्रति बढती हुई गुस्सा इन्हें जानवर बना देने में सक्षम है और शीघ्र यह सड़कों पर नजर आयेगी !
मारो , सबक सिखा दो के नारे लगाते, इन बेवकूफों को यह भी नहीं मालुम कि दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों में युद्ध का अर्थ , घना अन्धेरा होगा जिसमें दोनों ओर कोई नाम लेवा नहीं बचेगा , भारत पाकिस्तान में ताकत की तुलना सिर्फ पारम्परिक युद्ध होने तक ही संभव है , परमाणुशक्ति संपन्न देशों में यह तुलना सिर्फ मूर्खता पूर्ण विचार है , दोनों अपार जीव संहार और मानवता विनाश में सक्षम हैं यहाँ एक पक्ष के धन और जनशक्ति का कोई मूल्य नहीं , परमाणु युद्ध होने पर लाखों सैनिकों, भरपूर हथियारों , हवाई जहाजों , और अरबों डॉलर का रिज़र्व धन एक क्षण में नष्ट हो जाएगा और दो जाहिल शासकों के मनहूस स्मारक के रूप में ,आसमान की जगह सिर्फ घना अन्धेरा बचेगा , जो सैकड़ों बरसों तक मानव की मूर्खता का अवशेष होगा !
यही कारण था कि विश्व का सबसे ताकतवर राष्ट्र अमेरिका का राष्ट्रपति आज वियतनाम आकर एक गरीब देश नार्थ कोरिया के राष्ट्रपति से हाथ मिलाने को विवश हो रहा है और यही समय की पुकार भी है कि परमाणुशक्ति संपन्न देश आपस में युद्ध की सोंच भी न सकें !
आज मैंने अपने घर से ललकारने वाले समस्त चैनल विदा कर दिए , सौम्यता से बात करने वाले चैनल ही देखना है इस हेतु न्यूज़ चैनल कम से कम देखूंगा , देखना है कि इस युद्ध यूफोरिया पर लगाम लगाने के लिए हमारी सरकार कब कदम उठाती है ! दुआ करूंगा कि भारत पाकिस्तान नेपाल बंगलादेश एक साथ एक संघ राष्ट्र का निर्माण करें और हम ईद पर होली के उत्साह से ,गले मिलकर, नफरत की करवटें लेना छोड़, आराम की नींद सो सकें !
Thursday, February 7, 2019
तू अमरलता, निष्ठुर कितनी -सतीश सक्सेना
सोंचा था मदद करूँ तेरी
धीरे धीरे रस चूस लिया,
खुद ही संकट को आश्रय दें
अभिशप्त वृक्ष, सहचरी क्रूर , बेशर्म चरित्रहीन कितनी !
Wednesday, January 16, 2019
हे प्रभु ! मेरे देश में ढोरों से बदतर, लोग क्यों - सतीश सक्सेना
जाहिलों को मुग्ध करने को निरंतर शोर क्यों !
अनपढ़ गंवारू जान वे मजमा लगाने आ गए
ये धूर्त, मेरे देश में , इतने बड़े शहज़ोर क्यों ?
साधु संतों के मुखौटे पहन कर , व्यापार में
रख स्वदेशी नाम,सन्यासी मुनाफाखोर क्यों !
माल दिलवाएगा जो, डालेंगे अपना वोट सब
देश का झंडा लिए सौ में, अठत्तर चोर क्यों !
आखिरी दिन काटने , वृद्धाएँ आश्रम जा रहीं !
बेटी बिलख रोई यहाँ,इस द्वार टूटी डोर क्यों !
Monday, October 1, 2018
सीढियां चढ़ते समय फूलती साँस नजरंदाज़ न करें -सतीश सक्सेना
अगर हार्ट अटैक एवं डायबिटीज से बचना चाहते हो तो पसीना निकलने तक की मेहनत करना सीखना होगा ! धन का उपयोग कर अपने शरीर को आराम देने वाले लोग जान लें कि अभी तक किसी भी खतरनाक बीमारी का, कोई भी इलाज नहीं जो पैसा देकर बीमारी ठीक कर, उम्र बढ़ा दे !ये जीवन जटिल हैं,समझना तो होगा !
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !
भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !
शुरुआत में कुछ ,टहलना तो होगा !
स्वयं स्वस्त्ययन काल रचना तो होगा !
सनम दौड़ में,गिर संभलना तो होगा !
Tuesday, May 22, 2018
भगवा लिवास को कभी लुच्चा नहीं कहते -सतीश सक्सेना
इस पाशविक प्रवृत्ति को,कच्चा नहीं कहते !
उस रात एक स्वप्न का , दम घोट चुका है ,
बच्चा है ये शैतान का , टुच्चा नहीं कहते !
बस्ती में जाहिलों की,चोर डाकुओं को भी
भगवा लिवास में, कभी लुच्चा नहीं कहते !
सारे डकैत मिल के , चोर चोर कह रहे !
अरविन्द को इस देश में सच्चा नहीं कहते !
Wednesday, May 16, 2018
उनसे कहिये,चलने का अंदाज़ बदल लें -सतीश सक्सेना
झूठी खबरों के सस्ते अखबार बदल लें !
चलते, अहंकार की चाल,नज़र आती है !
उनसे कहिये,चलने का अंदाज बदल लें !
बच जाएगा, आया ऊँट पहाड़ के नीचे
उंची गर्दन, नीची करके , चाल बदल ले !
तीखी उनकी धार , नहीं दरबार सहेगा !
चंवर बादशाही से ही,तलवार बदल लें !
कोई मसालेदार खबर इन दिनों न आई
उनको कहिये अपने गोतामार बदल लें !
Thursday, May 10, 2018
चिंतित माँ की चौकीदारी क्या समझेंगे ? -सतीश सक्सेना
शक संशय में रिश्तेदारी,क्या समझेंगे ?
पर निंदा ,उपहास में, रस तलाशने वाले
व्यथित पिता की हिस्सेदारी क्या समझेंगे ?
नन्हीं बच्ची, तिनके चुग्गा लाने निकली
चिंतित माँ की चौकीदारी क्या समझेंगे ?
सुंदरता में फंस कर ,कितने राजा डूबे
धूर्त कैकेयी की मक्कारी क्या समझेंगे ?
अभी नशे में डूबे हैं , सरकार हुस्न की
चकाचौंध में,आपसदारी क्या समझेंगे ?
Thursday, March 29, 2018
हेल्थ ब्लंडर -2 -सतीश सक्सेना

बरसों आराम के परिणाम स्वरुप उत्पन्न बीमारियों के लिए मेडिकल व्यापारियों ने तत्काल हानिकारक गोलियां बना डालीं जिसने शरीर के जटिल स्वरूप और इम्यून सिस्टम को बर्बाद करके रख दिया !
मैं खुद अपने आपको महामूर्ख समझता हूँ जिसने पूरे साठ वर्ष तक अपनी खूबसूरत सुडौल शरीर को आराम देते हुए जीभर कर बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अपने आपको संपन्न बुद्धिमान समझता रहा !
पिछले 61 वर्षों में मेरे आधे खराब जर्जर हुए अंगों की रिपेयर सिर्फ रनिंग के बदौलत संभव हुई है अन्यथा अब तक ऑपरेशन टेबल पर हृदय का ऑपरेशन हो चुका होता और इम्यून सिस्टम की मजबूती देखिये कि उसने 60 वर्षों की समस्याओं को महज दो वर्ष में ठीक कर दिया !
गैस्ट्रिक, एसिडिटी , कमजोर फेफड़े , ब्लड प्रेशर यहाँ तक कि स्किन प्रॉब्लम आदि कहाँ गायब हुई पता ही नहीं चला और साथ में मुझे जीवन में पहली बार बहते हुए पसीने से तकलीफ और चिढ़ की जगह पर जो आनंद मिलने लगा यह अभूतपूर्व व अविश्वसनीय है !
इस वर्ष मेरे तीन दोस्त जिनका प्रभामंडल बेहद प्रभावशाली था, असमय कम उम्र में हृदय आघात के शिकार हुए हैं उम्मीद करता हूँ कि और बुरी खबर न सुनाई दें सो अनुरोध है कि सुबह घर से बाहर निकल शरीर के सोये अंगों में कम्पन उत्पन्न करने के लिए, रनिंग करना सीखें !
याद रखें डायबिटीज एवं हृदय रोगों की बेस्ट एक्सरसाइज रनिंग ही है जिसे मेडिकल व्यापार भी मानता है !
सस्नेह मंगलकामनाएं !
Monday, August 7, 2017
अपना दर्द, उजागर करते, मूरख बनते मेरे गीत ! -सतीश सक्सेना
दर्द छलकता, दिखता है !प्यार, नेह दुर्लभ से लगते ,
शोक हर जगह मिलता है !
क्या शिक्षा विद्वानों को दें ,
रचनाओं में , रोते गीत !
निज रचनाएँ , दर्पण मन का, दर्द समझते, मेरे गीत !
अपना दर्द किसे दिखलाते ?
सब हंसकर आनंद उठाते !
दर्द, वहीँ जाकर के बोलो ,
भूले जिनको, कसम उठाके !
स्वाभिमान का नाम न देना,
बस अभिमान सिखाती रीत ,
अपना दर्द, उजागर करते, मूरख बनते मेरे गीत !
आत्म मुग्धता, मानव की ,
गर्वित मन को समझा पाना ,
बड़ा कठिन, इस जीवन में !
जीवन की कड़वी बातों को,
कहाँ भूल पाते हैं गीत !
हार और अपमान याद कर, क्रोध में आयें मेरे गीत !
जब भी कोई कलम उठाये
अपनी व्यथा, सामने लाये ,
खूब छिपायें, जितना चाहें
फिर भी दर्द नज़र आ जाये
मुरझाई यह हँसी, गा रही,
चीख चीख, दर्दीले गीत !
अश्रु पोंछने तेरे, जग में, कहाँ मिलेंगे निश्छल गीत ?
अहंकार की नाव में बैठे,
भूल गए कर्तव्यों को
अच्छी मीठी ,यादें भूले ,
संचय कड़वे कष्टों को
कितने चले गए रो रोकर,
सब झूठे ,आंसू पोंछेंगे , कौन सुनाये , मंगल गीत ?
सभी सांत्वना, देते आकर
जहाँ लेखनी , रोती पाए !
आहत मानस, भी घायल
हो सच्चाई पहचान न पाए !
ऐसी जज़्बाती ग़ज़लों को ,
ढूंढें अवसरवादी गीत !
मौकों का फायदा उठाने, दरवाजे पर तत्पर गीत !
Wednesday, May 17, 2017
जकड़े घुटने पकड़ के रोये , ढूंढ रहा उपचार आदमी -सतीश सक्सेना
हाथ पैर को बिना हिलाये, जब से वह धनवान बना,
रोक पसीना, शीतल घर में, करता योगाचार आदमी !
शक्ति गंवायी बैठे रह कर , रोगों से बच पाने की ,
Thursday, May 4, 2017
उद्दंड राज्य और भयभीत मानवता -सतीश सक्सेना
-नार्थ कोरिया ने इज़राइल को कहा है कि अगर भविष्य में उसके महान नेता के खिलाफ एक भी शब्द बोला तो उसे बिना दया के 1000 गुनी भयानक सजा दी जाएगी अतः भविष्य में अपना मुंह सोंच समझ कर खोले और अमेरिका की चमचा गीरी न करे 
जब किसी विमानवाहक को युद्ध में भेजा जाता है तब उसके साथ सुरक्षा एवं अग्रिम अटैक करने के लिए , स्ट्राइक ग्रुप साथ चलता है जिसमें बेहद शक्तिशाली एक या दो न्यूक्लिअर पनडुब्बियां, जिसमें जमीन पर 1700 km तक मार करने वाली 154 टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल या उनके स्थान पर न्यूक्लियर वार हेड्स युक्त इंटरकांटिनेंटल बैलस्टिक मिसाइल लोडेड रहती हैं !
अटॉमिक आईसीबीएम से लैस,विश्व के सबसे शक्तिशाली युद्धक एयरक्राफ्ट कैरियर को डुबाने की किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी मगर नार्थ कोरिया का आत्मविश्वास पूरी दुनिया को चौंकाने के लिए काफी है !
दो न्यूक्लियर देशों में आजतक युद्ध नहीं हुआ इसीलिए दुनिया सुरक्षित रही है , मगर हाथ में परमाणु बेम लिए हुए अगर कोई पागल व्यक्ति तानाशाह बन जाए तो विश्व पर मौत के गहरे बादल मंडराते नजर आते हैं ! यह समय ऐसा ही है ....
अपने अपने प्रभामंडल के नशे में डूबे दो जननायक जिन्हें पहली चिंता अपने लोगों के जीवन की करनी चाहिए थी , झाग उगलते हुए , हाथ में हाइड्रोजन बम और मिसाइल लिए मानवता को नष्ट करने की धमकी दे रहे हैं ताकि उनका गर्व सुरक्षित रहे !
प्रकृति इन्हें पैदा करने की जगह बाँझ होती तो क्या इससे अधिक बुरा होता !
Tuesday, June 21, 2016
संगमरमरी फर्शों पर ही, पाँव फिसलते देखे हैं -सतीश सक्सेना
झुग्गी से महलों के वादे, सदियों का दस्तूर रहा
राजमहल ने मोची के भी सिक्के चलते देखे हैं
मूर्ख बना के कंगालों को, जश्न मनाते महलों ने
अक्सर ठट्ठा मार मारकर, जाम छलकते देखे हैं
Friday, June 17, 2016
सब लोग क्या कहेंगे - सतीश सक्सेना
कलमधारियों के बीच शायद मैं अकेला बुद्धिहीन, विवेकहीन हूँगा जिसने ६० वर्ष की बाद दौड़ना शुरू किया कई विद्वान मित्र सोंचते होंगे कैसे दिन आ गए हैं कि पहलवानी करने वाले लोग भी कलम उठाकर अपने आपको लेखक अथवा कवि समझते हैं बहरहाल मैं सोंचता हूँ कि एथलीट कोई भी बन सकता है बशर्ते उसमें कुछ नया करने का मन हो , मजबूत अच्छा शक्ति के आगे बढ़ती उम्र का कोई बंधन, उसे रोक नहीं पायेगा !लोग कहेंगे कि आप खुश किस्मत हैं कि आपको इस उम्र में कोई बीमारी नहीं है अन्यथा इस उम्र में दौड़ के दिखाने में, नानी याद आ जाती ! मैं सोंचता हूँ , बीमारी तो कई थीं और हैं भी , मगर मैं उन पर कभी ध्यान ही नहीं देता , मेरा यह विश्वास है कि बीमारी ठीक करने का काम मेरे शरीर की प्रतिरोधक शक्ति का है जिसे मैं दौड़कर और मजबूत बना रहा हूँ !
ध्यान देता हूँ तो सिर्फ दौड़ने पर ताकि बढ़ता भयावह बुढ़ापा दूर दूर तक नज़र भी न आये और मुझे हर रोज सुबह लगातार ५-१० किलोमीटर दौड़ता देख, डर के कहीं छिप जाए कि यह आदमी पागल है कौन इससे पंगा ले !
जब सुबह मोहल्ले में सब सो रहे होते हैं उस वक्त कुछ एक टहलने वालों के सामने से दौड़ता हुआ पसीने से लथपथ जब मैं अपने घर में घुसता हूँ तब बहता हुआ पसीना अमृत जैसा लगता है और लोग आश्चर्य चकित होते हैं कि कमाल है इस उम्र में यह दौड़ क्यों रहा है उस समय उनके इस हैरानी के अहसास से ही मेरी सारी थकान गायब हो जाती है और चेहरे पर मुस्कान आ जाती है !
मुझे याद है ५ वर्ष पहले मैंने कुकिंग गैस का सिलेंडर एक झटके से उठाया था और मेरे सीधे हाथ की सॉलिड मसल्स एक झटके से टूट कर अपनी जगह से हटकर लटक गईं थी उस दिन लगा था कि लगता है वे दिन गए जब खलील खां फ़ाख्ते उड़ाया करते थे , मगर आज दौड़ने के साथ ही वह मसल्स फिर रिपेयर होकर न केवल पहले से अधिक ताकतवर बन गयी है बल्कि अब अपने आपको अधिक शक्तिशाली महसूस करता हूँ !कल २ बजे की तेज धूप में २ किलोमीटर सड़क पर पैदल चलकर जब टपकते पसीने के साथ मॉल में घुसा तब कार से उतरते लोगों को देख बड़ा सुकून महसूस हो रहा था कि मैं वह कर सकता हूँ जो इस गर्मीं में इनके बस की बात नहीं और मैं वही हूँ जो अपनी पूरी युवावस्था में बस में कभी इसी लिए नहीं चढ़ा था कि दिल्ली की बसों में चढ़ने के लिए उनके पीछे भागना पडेगा ! पूरे जीवन पैदल न चलने वाला व्यक्ति प्रौढ़ावस्था या बुढ़ापे में, जो भी आप समझें , बिना रुके, लगातार 10 किलोमीटर दौड़ सकता है , इसका अहसास ही, पूरे दिन दिमाग को तरोताजा रखने के लिए काफी है !
-मुझे याद है रनर का सबसे मुश्किल पहला महीना जब मैं रनिंग की कोशिश कर रहा था , उन दिनों पैरों में तेज दर्द होता था लगता था अब नहीं दौड़ पाउँगा वह दर्द अब कहाँ गया इसका पता ही नहीं चला ....
-मुझे याद है कि 50 वर्ष की उम्र में, ह्रदय की धड़कन तेज होने पर, एक बार मैं पूरी रात हॉस्पिटल में ऑक्सीजन के सहारे रहा तब लोगों ने कहा था कि बाज आइये अब आपकी उम्र हो गई है मगर अब ६२ वर्ष में ,ह्रदय लगता है दुबारा जवान हो गया है
-बढे ब्लड प्रेशर का कभी कोई इलाज नहीं किया न कराया आजकल जब चेक करता हूँ , परफेक्ट जवानी वाला 82 / 140 आता है !
-कॉन्स्टिपेशन लगता है कभी था ही नहीं ....
- उँगलियों तक खून का बहाव लाने के लिए पागलों की तरह तालियां बजाना कब का बंद कर चुका हूँ !
सो अपनी शानदार तोंद को , बढ़िया लम्बे कुर्ते से छिपाए मंच पर बैठे साहित्यकारों, कवियों , लेखिकाओं से निवेदन है कि इस लेख पर सरसरी नजर न डाल , ध्यान से पढ़ें और कल से जॉगिंग के लिए घर से निकलने का संकल्प लें, भले ही गुस्से में गालियाँ मेरे हिस्से में आएं मगर प्लीज़ सुबह सवेरे ट्रेक पर जाने में अधिक न सोचिये कि सब लोग क्या कहेंगे
याद रखें हमारे देश में सबसे अधिक डायबिटीज़ तथा ह्रदय रोगी हैं तथा रनिंग इन सबका सबसे अच्छा और निरापद इलाज है , Running is the best cardio exercise ...
आप सबके स्वास्थ्य के लिए चिंतित ....














